प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता बच्चों के लिए पुरस्कार सामग्री दी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता बच्चों अनुराग रमोला, देहरादून एवं शिवम रावत, किच्छा उधमसिंहनगर को पुरस्कार सामग्री उनके माता-पिता को प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया जाता है। ये पुरस्कार नवाचार, शैक्षिक, खेल, कला और संस्कृति, समाज सेवा और बहादुरी के क्षेत्र में असाधारण क्षमताओं और उत्कृष्ट उपलब्धि वाले बच्चों को मान्यता के रूप में दिए जाते है। अनुराग रमोला, देहरादून एवं शिवम रावत, किच्छा उधमसिंहनगर को यह पुरस्कार दिया जाना राज्य का भी सम्मान है तथा अन्य बच्चों के लिये भी प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर सचिव हरि चन्द सेमवाल आदि उपस्थित रहे।

सीएम के व्यवहार ने बदली अब तक की परिपाटी, बच्चों को आवास बुलाकर कराया भोजन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में शिशु सदन केदारपुरम के बच्चों ने भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों का परिचय प्राप्त किया और उन्हें भोजन करवाया। इस अवसर पर शिशु सदन के बच्चों के लिए खेल एवं मनोरंजन की गतिविधियां भी आयोजित की गई।
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपने बीच देखकर बच्चे काफी उत्साहित दिखे। मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को जीवन में हमेशा परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा की जिस समय जो कार्य करें, उसे पूरे मनोयोग से करें। भविष्य के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर, उस पर निरंतर आगे बढ़ते रहें। जो मेहनत करते हैं, उन्हें सफलता अवश्य मिलती है।

प्रदेशभर से आये स्कूली छात्रों ने सीएम से पूछे सवाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘हिल की बात-युवा संवाद’ कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं से संवाद किया। कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं द्वारा उत्तराखण्ड की लोक परंपरा एवं संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई। स्कूली बच्चों द्वारा भाषण एवं कविता का प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। इस अवसर पर बच्चों ने मुख्यमंत्री से संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिल की बात-युवा संवाद कार्यक्रम में आये सभी विद्यार्थियों एवं युवाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का देवभूमि उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। उनका देवभूमि उत्तराखण्ड से कर्म एवं मर्म का रिश्ता है। प्रधानमंत्री के 9 साल के कार्यकाल में उन्होंने उत्तराखण्ड के लिए लाखों करोड़ रूपये के कार्यों की स्वीकृतियां प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में कार्य करने का मौका मिला है। आज प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025 तक उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। 2025 तक देवभूमि उत्तराखण्ड को ड्रग्स फ्री बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। जो भी भर्ती परीक्षाओं में धांधली करते हुए पाये गये उन पर सख्त कार्रवाई की गई। 90 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया। मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने जीवन में जिस भी क्षेत्र को चुने, उसमें पूर्ण मनोयोग से कार्य करें। यदि हम किसी कार्य को पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा से करते हैं, तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने कहा कि जो भी अपना कार्यक्षेत्र चुनें, उसमें लीडर की भूमिका में रहें।
मुख्यमंत्री से स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी इस अवसर पर संवाद किया। विकासनगर की वंशिका ने पूछा कि अभिभावकों को कैसे समझाएं कि जो हम करियर में करना चाहते हैं, वे उसमें अपनी सहमति दे दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी कार्य करें, कुछ बनने के लिए नहीं बल्कि जीवन में कोई सराहनीय कार्य करने के लिए करें। आप अपने अभिभावकों को इस तरह से समझा सकती हैं, कि मैं जिस भी क्षेत्र को अपने करियर के लिए चुनूंगी, इसमें अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ कार्य करने का प्रयास करूंगी। बागेश्वर के दिव्यम कंडवाल ने पूछा कि क्या आपके जीवन में कभी ऐसे क्षण आते हैं, जब आप अपने परिवार को समय नहीं दे पाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक व्यक्ति के जीवन में ऐसे क्षण बार-बार आते हैं। राजनीति में कार्य प्रोफेशन नहीं मिशन है, इसके लिए कार्य के प्रति समर्पण बहुत जरूरी होता है। भूमिका रावत ने पूछा कि देहरादून भारत की स्कूल राजधानी है। देहरादून में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड के युवाओं को राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर मिले। इस दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। ऋषिका भट्ट ने पूछा कि पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधयों के लिए समय कैसे निकालें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजकल तो बच्चों का टाइम टेबल अभिभावक बना देते हैं। बच्चों को इस बात का ध्यान देना होगा कि जिस समय जो कार्य कर रहे हैं, उस समय पूरा ध्यान उस कार्य पर होना चाहिए। रिया ने पूछा कि युवाओं के लिए आपका क्या विजन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि युवा सिर्फ रोजगार पाने वाले न बने, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। राज्य में स्वरोजगार के अलावा हार्टिकल्चर, पर्यटन, स्टार्टअप को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक दुर्गेश पंत और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए युवा उपस्थित थे।

जब बच्चों को अगुंली पकड़कर अक्षरज्ञान कराने लगे सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय बनियावाला, देहरादून में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित ‘‘प्रवेशोत्सव’’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। शैक्षणिक वर्ष 2023-24 के लिए शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेशभर में आज से प्रवेशोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन एक माह तक चलेगा। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय बनियावाला में बालिकाओं का प्रवेशोत्सव विद्यारम्भ संस्कार के साथ शुरू किया गया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय बनियावाला के उच्चीकृत भवन का शिलान्यास भी किया। उन्होंने विद्यालय से 8वीं पास करने वाली बालिकाओं को मैट्रिकुलेशन सेरेमनी से अलंकृत भी किया। इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों के 21 हजार से अधिक अध्यापकों को टेबलेट के लिए उनके स्कूलों में डीबीटी के माध्यम से 21 करोड़ 76 लाख रूपये की धनराशि हस्तांतरित की गई। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर कुछ अध्यापकों को टेबलेट भी प्रदान किये। इनका उपयोग शिक्षा शिक्षण अधिगम के लिए करेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर घोषणा की कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय छात्रावास बनियावाला में उपलब्ध भूमि की चाहरदीवारी एवं उपलब्ध भूमि के अनुरूप खेल का मैदान बनाया जायेगा। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय छात्रावासों एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका छात्रावासों में मानदेय पर कार्यरत अल्पकालिक शिक्षकों तथा अन्य कार्मिकों के मानदेय में तर्कसंगत वृद्धि की जायेगी। राजकीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के अन्तर्गत मानदेय पर रखे गये भोजनमाता एवं अनुसेवकों के लिए कल्याण कोष की स्थापना की जायेगी। इस कल्याण कोष का उपयोग संबंधित भोजनमाता एवं अनुसेवकों के द्वारा एक निश्चित योगदान अवधि पूर्ण करने के बाद विद्यालय से मुक्त होने पर उन्हें एकमुश्त तर्कसंगत धनराशि दिए जाने के लिए किया जायेगा। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय छात्रावास बनियावाला के लिए डाइनिंग हॉल एवं 2 अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने स्कूलों में प्रवेशोत्सव करने पर सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हो रहा है, वहीं दूसरी और विद्यार्थियों के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ से उच्चीकृत एक नए नेताजी सुभाष चन्द्र बोस छात्रावास का भी शिलान्यास किया जा रहा है। इस समय राज्य में टनकपुर, चम्पावत, श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल, उधमसिंह नगर, पीठसेन में कुल 11 ऐसे आवासीय छात्रावास स्वीकृत हुए हैं, जिनके माध्यम से हमारे विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिल रही है, इसके अलावा इस वित्तीय वर्ष में 2 नये आवासीय छात्रावास टनकपुर एवं श्रीनगर में स्वीकृत किये गये हैं साथ ही 3 छात्रावास गदरपुर, पीठसेन एवं बनियावाला को भी उच्चीकृत किया गया है। इन छात्रावासां के माध्यम से बालकों तथा बालिकाओं दोनों को निःशुल्क भोजन, आवास, गणवेश, शिक्षण सामग्री आदि उपलब्ध कराई जा रही है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को डिजिटल सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से टीचर रिर्साेस पैकेज के तहत टैबलेट क्रय के लिए दस हजार रूपये की धनराशि प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समय के साथ शिक्षा में इनोवेशन बहुत जरूरी है। ज्ञान और शिक्षा सिर्फ किताबी नहीं हो सकते हैं। शिक्षा का मकसद व्यक्ति के हर आयाम का सन्तुलित विकास करना है। सन्तुलित विकास इनोवेशन के बिना सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें उच्च विचार, उच्च आचार, उच्च संस्कार और उच्च व्यवहार के साथ ही समाज की समस्याओं का उच्च समाधान भी उपलब्ध कराती है। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बेटी पढ़ाओ, बेटी बढाओ का जो नारा दिया है उस नारे को हमें सार्थक करके दिखाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे नौनिहाल इस देश का भी भविष्य हैं, बच्चे ही वो मजबूत नींव है, जिस पर नए भारत की तकदीर और नए भारत का भविष्य टिका हुआ है। राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा के द्वारा ही कोई समाज समृद्धशाली और शक्तिशाली बन सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति से स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा को नए आयाम प्राप्त होंगे, इससे सभी वर्ग के लोगों को समानता के आधार पर शिक्षा प्राप्त करने के अवसर भी मिलेंगे। नई शिक्षा नीति के माध्यम से रोजगार परक शिक्षा मिलेगी, साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग से तैयारी नहीं करनी पड़ेगी। इससे शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा तथा देश को विकसित राष्ट्र बनाने में नई शिक्षा नीति कारगर साबित होगी। उत्तराखंड देश का प्रथम राज्य है जिसने स्कूली शिक्षा में नई शिक्षा नीति को लागू किया है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम एक माह तक चलेगा। स्कूलों में प्रवेशोत्सव कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधिगण भी भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या को शून्य प्रतिशत करने के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में जल्द ही विद्या समीक्षा केन्द्र का शुभारंभ किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के अलावा अशासकीय विद्यालयों के बच्चों को भी मुफ्त में किताबें देने का निर्णय सरकार ने लिया है, जल्द ही सभी को किताबें मिल जायेंगी। अब प्रत्येक स्कूलों में बुक बैंक बना रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में जितने भी अल्पसंख्यक स्कूल हैं, उन सभी स्कूलों को सर्वे किया जा रहा है, जिन मानकों के हिसाब से स्कूलों को अल्पसंख्यक का दर्जा मिला है, उनका कितना पालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में स्थानान्तरण की पॉलिसी को मजबूत बनाया जा रहा है। राज्य में माह में बच्चों को स्कूलों में एक दिन बस्ता फ्री दिवस करने जा रहे हैं, उस दिन व्यायाम, योगा एवं अन्य गतिविधियां कराई जायेंगी। जल्द ही शिक्षा के पांचों बोर्ड की बैठक की जाएगी, इस बैठक में बच्चों के बस्ते के वजन को कम करने के लिए निर्णय लिया जायेगा।
इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुण्डीर, दलीप सिंह रावत, मोहन सिंह मेहरा, सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

आयोग ने दी जानकारी, शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई वन आरक्षी भर्ती परीक्षा

प्रदेशभर के 625 केंद्रों में वन आरक्षी भर्ती परीक्षा 2022 शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई। परीक्षा में 1,42,973 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया, जबकि 63,417 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। यह जानकारी उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) ने परीक्षा संपन्न होने के बाद दी है।
आयोग के मुताबिक, रविवार को वन आरक्षी भर्ती 2022 के लिखित परीक्षा राज्य के 13 जनपदों में स्थित 625 परीक्षा केंद्रों में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न की गई। बताया कि 2,06,390 अभ्यर्थियों ने फार्म भरे थे, जबकि 1,42,973 अभ्यर्थियों परीक्षा में प्रतिभाग भाग किया। 63417 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
बता दें, आज रविवार 9 अप्रैल 2023 को वन आरक्षी परीक्षा 2022 की लिखित परीक्षा (वस्तुनिष्ठ प्रकार) का आयोजन पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 1 बजे तक एकल सत्र में किया गया। परीक्षा राज्य के 13 जनपदों में 625 परीक्षा केन्द्रों में निर्विघ्न शांतिपूर्वक संपन्न हुई। उक्त लिखित परीक्षा (वस्तुनिष्ठ प्रकार) में कुल पंजीकृत 2,06,390 अभ्यर्थियों में से 1,42,973 अभ्यर्थी उपस्थित रहे तथा 63,417 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा में उपस्थित अभ्यर्थियों का कुल प्रतिशत 69.27 रहा है।

शिक्षण कार्य पेशा नहीं बल्कि एक पवित्र नैतिक कर्तव्य-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को शिमला बाईपास रामगढ़ में जी डी गोयनका पब्लिक स्कूल का शुभारम्भ किया। देश में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान देने वाले जी.डी. गोयन्का पब्लिक स्कूल समूह के विद्यालय से उत्तराखण्ड को जोड़ने के लिए स्कूल के संस्थापक कुलानन्द नौटियाल को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आशा है कि यह संस्थान भविष्य में सफलता के नवीन आयाम स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी संस्कृति में शिक्षक अपने काम को केवल एक पेशा मात्र नहीं मानते, उनके लिए पढ़ाना एक मानवीय संवेदना है, एक पवित्र नैतिक कर्तव्य है, इसीलिए हमारे यहां शिक्षक और बच्चों के बीच प्रोफेशनल रिश्ता नहीं होता, बल्कि एक पारिवारिक रिश्ता होता है तथा यह संबंध जीवन भर का होता है। हमारी संस्कृति में शिक्षा ग्रहण करने का अर्थ केवल किताबी ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं है, यह एक ऐसी यात्रा है जिसमें हम स्वयं की और अपने अस्तित्व की खोज करते हैं। एक व्यक्ति के रूप में हमारे सर्वांगीण विकास और हमारे समाज के निर्माण में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज नए भारत का निर्माण हो रहा है, जिसके अंतर्गत देश में अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा वर्तमान समय के अनुसार, नई शिक्षा नीति को हमारे सम्मुख रखा गया है। नई शिक्षा नीति से स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा को नए आयाम प्राप्त होंगे, इससे सभी वर्ग के लोगों को समानता के आधार पर शिक्षा प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे। स्कूली स्तर पर ’’कौशल विकास’’ से युवा कुशलता के साथ कार्य करने में सक्षम होंगे। नई शिक्षा नीति के माध्यम से रोजगार परख शिक्षा मिलेगी, साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग से तैयारी नही करनी पड़ेगी। साथ ही इससे शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और मेरा मानना है कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने में नई शिक्षा नीति कारगर साबित होगी। आप सभी को यह बताते हुए मुझे अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है कि उत्तराखंड देश का प्रथम राज्य है जिसने स्कूली शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2022 को लागू किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आप सभी देश के भविष्य हैं, उत्तराखण्ड व देश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आप सभी के कंधों पर है और पूर्ण विश्वास है कि आप सभी अपना यह कर्तव्य पूर्ण समर्पण और मनोयोग के साथ पूर्ण करेंगे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा धन सिंह रावत, विधायक यमुनोत्री संजय डोभाल, मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा, जी डी गोयनका समूह के एमडी निपुन गोयनका, संस्थापक कुलानन्द नौटियाल, शिक्षकगण, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

छात्रों को मेडल और उपाधि देकर गौरवान्वित महसूस कर रहा-शाह

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरूकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय हरिद्वार के 113 वें दीक्षांत समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर 99 विद्यार्थियों को स्नातक, 100 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर, 56 विद्यार्थियों को पी.एच.डी की उपाधि प्रदान की। 83 विद्यार्थियो को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त कर शिक्षार्थी नये जीवन की शुरूवात करने जा रहे है। गुरूकुल कांगड़ी संस्थान की नींव स्वामी श्रद्धानन्द ने रखी, महर्षि दयानन्द के सिद्धान्तों पर यहां शिक्षा का अविरल प्रवाह चलता है। आज यह विश्वविद्यालय महान वटवृक्ष बनकर समग्र देश और दुनिया को महर्षि दयानन्द का संदेश और हमारी पौराणिक शिक्षा पद्धति को आगे बढ़ा रहा है। यहां की शिक्षा पद्धति का महत्व देखकर ही महात्मा गांधी, राजेन्द्र प्रसाद, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मोरारजी देसाई जैसे अनेक महानुभावों ने इस पूण्य भूमि की शिक्षा व्यवस्था को बल देने का कार्य किया। आज जो बैच शिक्षा पूर्ण कर जा रहा है, यह बैच आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष एवं स्वामी दयानन्द सरस्वती के 200वें जन्म वर्ष का बैच है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज 1800 विद्यार्थी शिक्षा की दीक्षा प्राप्त कर नये जीवन में प्रवेश करेंगे। यहां से शिक्षा ग्रहण करने के बाद राष्ट्र के लिए योगदान की शुरूवात करने वाले हैं। यह भूमि वह भूमि है जहां से वैदिक शिक्षा को बढ़ावा मिला। स्वामी दयानन्द का संदेश स्वामी श्रद्धानन्द ने हुबहू जमीन पर उतारने का कार्य किया। उन्होंने शिक्षा को अंग्रेजी की चंगुल से बाहर निकालने के लिए हमारी परम्परागत शिक्षा पद्धति को नई ऊर्जा देने के लिए वैदिक मूल्यों, प्राचीन भारतीय संस्कृति, वेदों और उपनिषदों का ज्ञान, ब्रहमाण्ड का विज्ञान एवं आधुनिक विषयों को जोड़कर शिक्षा को परिपूर्ण बनाने का कार्य किया। विश्वविद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता के साथ 800 से अधिक शोधपत्र रजिस्टर किये गये हैं, यह सराहनीय कदम है। वैदिक एवं आधुनिक शिक्षा के संगम का कार्य गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने किया है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से कहा कि महर्षि दयानन्द के संदेश को अपने मन से लगा कर रखें। उनके बताये गये रास्ते पर चलने का प्रयास करें।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में नई शिक्षा नीति लाये हैं, इसमें दयानन्द जी की शिक्षा की दृष्टि है, श्रद्धानन्द का वेद और विज्ञान की शिक्षा के समन्वय का संदेश है, महात्मा गांधी का मातृभाषा में शिक्षा का संदेश, यह शिक्षा नीति चरितार्थ करती है, लाला लाजपराय का शिक्षा सभी के लिए का संदेश भी यह शिक्षा नीति जमीन पर उतार रही है। नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में होगी। त्रिभाषा का सूत्र भी दिया है और आने वाले दिनों में मातृभाषा से पढ़े हुए छात्र समग्र देश एवं विश्व का कल्याण करे, इस प्रकार का रास्ता प्रशस्त किया गया है। नई शिक्षा नीति को स्ट्रीमलेस और क्लासलेस बनाया गया है। मल्टिपल एन्ट्री, मल्टिपल एक्जिट शिक्षा नीति का विशेष अंग है। एक साल की पढ़ाई में सर्टिफिकेट, दो साल की पढ़ाई में डिप्लोमा, तीन साल की पढ़ाई में डिग्री मिलेगी और चार साल की पढ़ाई करेंगे तो रिसर्च मिल जायेगा। हर स्तर पर विद्यार्थी एंट्री भी कर सकता है और एक्जिट भी कर सकता है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि युवाओं को एक ऐसा प्लेटफार्म मिल जाए, जिस पर हमारे युवा खड़े होकर विश्व के युवाओं के साथ स्पर्धा कर सके और मां भारती का यशोगान पूरे विश्व के अन्दर हो।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्टार्ट अप इंडिया के माध्यम से देश में युवाओं को अनेक मौके सृजित किये गये हैं। 2016 में देश में 724 स्टार्ट अप थे। 2022 में यह संख्या बढ़कर 70 हजार से अधिक हो गई है। 10 हजार से अधिक स्टार्ट अप कोरोनाकाल में बने। 44 प्रतिशत स्टार्ट अप महिलाओं के द्वारा चलाये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और भारतीयता दोनों के गौरव को विश्वभर में बुलंद करने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गृहमंत्री अमित शाह का देवभूमि की समस्त देवतुल्य जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि यह हम सभी के लिए बड़े गर्व का विषय है कि हमारे बीच गृहमंत्री के रूप में देश के एक ऐसे नेता उपस्थित हैं, जिनके अथक प्रयासों से और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आज सम्पूर्ण भारत आंतरिक रूप से जहां एक ओर अपने आपको सुरक्षित अनुभव करता है, वहीं दूसरी ओर अपने आपको पहले से अधिक संगठित एवं आत्मविश्वास से भरा हुआ अनुभव करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर से धारा-370 खत्म करने में सफलता भी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री ने गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को दीक्षांत समारोह की बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में ज्ञान की अविरल गंगा को प्रवाहित करने वाले इस संस्थान में उपस्थित होकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। महान शिक्षाविद् स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने जो यह अद्भुत धरोहर मां भारती को सौंपी थी, उसका हिस्सा बनना और आप सभी साथियों से जुड़ना, मेरे लिए प्रेरक भी है और आनंददायक भी है। स्वामी श्रद्धानन्द ऐसे संन्यासी थे, जिन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया। वह भारत के उन महान राष्ट्रभक्त सन्यासियों में अग्रणी थे, जिन्होंने अपना जीवन स्वाधीनता, स्वराज्य, शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया था।
इस अवसर पर कुरूकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सत्यपाल सिंह, कुलपति प्रो. सोमदेव शंतांशु, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, डॉ. कल्पना सैनी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक मदन कौशिक, आदेश चाहान, संतगण एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

गैरसैंण का सर्वागीण विकास सरकार की प्राथमिकता-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को राजकीय इंटर कॉलेज भराड़ीसैंण में सुदृढ़ीकरण, आर्ट-क्राफ्ट कक्ष एवं पुस्तकालय कक्ष का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को फूलदेई पर्व की शुभकामनाएं देते हुए विधानसभा परिसर भराड़ीसैंण में इस अवसर पर आने के लिए बच्चों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आपके विधानसभा परिसर में आने से वहां एक एक अलग प्रकार की ऊर्जा आ गईं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बोर्ड की परीक्षाएं प्रारंभ होने पर भी बच्चों को शुभकामनाएं दी और कहा कि सभी छात्र अच्छे अंको से उत्तीर्ण हों ऐसी उनकी शुभकामनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम जो छात्र देखने से रह गए अगर वह अभी भी उसे देखेंगे तो उनका बहुत अच्छा मार्ग-दर्शन होगा। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में ये बच्चे देश-प्रदेश का नाम रोशन करने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भी इतिहास बनाया वे सब सामान्य स्थिति में पले बढ़े हैं। नई शिक्षा नीति में आज बहुत सारे काम हो रहे हैं। नई शिक्षा नीति लागू करने वाले उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल की निधि से विद्यालय के सामान हेतु 5 लाख रुपये दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर हम इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत भी उपस्थित रहे।

नवाचार के तहत की होगी शोध एवं विकास प्रकोष्ठ की स्थापना

धामी सरकार ने नये शैक्षिक सत्र से उच्च शिक्षा विभाग में तीन नई योजनाएं शुरू करने का निर्णय लिया है। जिसके लिये वित्तीय वर्ष 2023-24 में बजट का प्रावधान कर दिया गया है। नई योजनाओं के तहत राजकीय महाविद्यालयों में शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अनुसंधान एव ंविकास प्रकोष्ठ की स्थापना, छात्र-छात्राओं को उद्यमिता एवं कौशल विकास का प्रशिक्षण तथा स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जायेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुये उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। जिनकी झलक वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने नवीन वित्तीय वर्ष हेतु बजट में उच्च शिक्षा विभाग के लिये कुल रू0 817 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि शोध, उद्यमिता, कौशल विकास तथा नवाचार उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण घटक हैं जिन्हें इस बजट में सम्मिलित करते हुये राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसी क्रम में नये शैक्षणिक सत्र से उच्च शिक्षा विभाग तीन नई योजनाएं शुरू करने जा रहा है। जिसके अंतर्गत राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिये राज्य अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ की स्थापना हेतु बजट में रू0 2 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया गया है। जबकि महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं में उद्यमिता, कौशल विकास तथा नवाचार को बढ़ावा देने के लिये 7 करोड़ 11 लाख 95 हजार का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर अध्ययनरत छात्र-छात्राओं में प्रतिस्पर्धा तथा गुणवत्ता संवर्धन हेतु प्रत्येक संकाय के तीन श्रेष्ठ छात्र-छात्राओं को न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर छात्रवृत्ति देने का भी निर्णय लिया गया है, जिस हेतु वर्तमान बजट में रू 10 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया गया है।
विभागीय मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से पूर्व में ही देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता पत्र हस्ताक्षरित किये हैं, जिनमें भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद भी शामिल है जो कि राज्य में अपना एक केन्द्र स्थापित कर उद्यमिता, कौशल विकास व स्टार्टअप संस्कृति को विकसित करने की दिशा में कार्य करेगा।

संस्कृत विद्यालयों की मान्यता हेतु शीघ्र जारी होगा आदेश

लंबे समय से शासन स्तर पर लम्बित पड़ी संस्कृत शिक्षा विभाग की नियमावली को शीघ्र जारी कर किया जायेगा। विभाग के अंतर्गत विभिन्न संस्थाओं में लम्बे समय से रिक्त पदों को आवश्यकतानुसार प्रतिनियुक्ति एवं सेवा स्थानांतरण के माध्यम से भरा जायेगा। संस्कृत शिक्षा के अंतर्गत आगामी 8 अप्रैल से 21 अप्रैल तक आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को नकल विहीन एवं पारदर्शिता के साथ आायेजित करने को कहा गया है। नये शैक्षिक सत्र को देखते हुये संस्कृत विद्यालयों की मान्यता हेतु शीघ्र कार्यकारी आदेश जारी करने के निर्देश विभागीय सचिव को दिये गये हैं।
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विधानसभा स्थित सभाकक्ष में संस्कृत विभाग की समीक्षा बैठक ली। डा. रावत ने बताया कि संस्कृत शिक्षा बोर्ड के तहत आगामी 8 अप्रैल से 21 अप्रैल के मध्य आयोजित होने वाली हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षआों को नकल विहीन एवं पारदर्शिता के साथ आयोजित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा के विभागीय ढांचे को मजबूत करने के लिये शीघ्र ही विभागीय नियमावली को जारी कर दिया जायेगा, इसके अलावा विभाग के अंतर्गत विभिन्न संस्थाओं में लम्बे समय से रिक्त चल रहे पदों को प्रतिनियुक्त एवं सेवा स्थानांतण के आधार पर शीघ्र भरने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं ताकि विभागीय कार्यों में किसी तरह का व्यवधान न आये। विभागीय मंत्री ने बताया कि प्रत्येक जनपद में एक-एक सस्कृत गांव की स्थापना की जानी है, जिसकी चयन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि संस्कृत एवं संस्कृत शिक्षा को को बढ़ावा देने के लिये उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है जिसके तहत पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री, आचार्य तथा प्रदेश के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कक्षाओं तथा विश्वविद्याल स्तर पर स्नातक एवं परास्नातक के छात्र-छात्राओं को संस्कृत विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जायेगा। इसके अलावा प्राथमिक संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत एवं पंजीकृत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें प्रदान की जायेगी। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को संस्कृत छात्रवृति प्रदान की जायेगी। शोध छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत राज्य के विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभाग में पंजीकृत 10 शोध छात्रों को एक वर्ष के लिये 30 हजार रूपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी। संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षण सहायता योजना के तहत 20 विद्यालयों एवं महाविद्यालयों को वित्तीय अनुदान दिया जायेगा। अशासकीय संस्कृत विद्यालयों में संसाधनों की न्यूनता पूर्ण करने की दृष्टि से कम्प्यूटर, फर्नीचर आदि के क्रय करने हेतु 50 हजार रूपये का अनुदान दिया जायेगा।
बैठक में सचिव संस्कृत शिक्षा डा. चन्द्रेश कुमार, निदेशक संस्कृत शिक्षा एस.पी.खाली, सचिव उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा परिषद डॉ. वाजश्रवा आर्य, उपनिदेशक पदमाकर मिश्र, कुलसचिव संस्कृत विश्वविद्यालय गिरीश कुमार अवस्थी, सहायक निदेशक चंडी प्रसाद घिल्डियाल, शोध अधिकारी डा. हरीश गुरूरानी, महामंत्री संस्कृत शिक्षक संघ डा. नवीन पंत सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

’17-18 मार्च को होगा अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन’
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि संस्कृत शिक्षा के अंतर्गत अनुसंधान की संभावनाएं एवं अनुसंधान कौशल विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन का आयोजन आगामी 17-18 मार्च को अकादमी परिसर हरिद्वार में आयोजित किया जा रहा है। जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से संस्कृत के विद्वान, आचार्य, शिक्षक एवं शोध छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे। इसी प्रकार आदमी द्वारा संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिये समय-समय पर अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन तथा अखिल भारतीय ज्योतिष एवं वास्तु सम्मेलनों का आयोजन किया जाता रहा है।