प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को कैरियर के सम्बन्ध में परामर्श देने के निर्देश-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कैरियर काउंसलिंग की व्यवस्था शुरू किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को कैरियर के सम्बन्ध में परामर्श दिया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे की काउंसिलिंग सुनिश्चित हो सके इसके लिए प्रोफेशनल कैरियर काउंसलर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए बच्चों में रुचि और कौशल को जांचने हेतु परीक्षा और उसके परिणाम के उपरांत परामर्श उपलब्ध करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परामर्श भौतिक रूप से, दूरस्थ क्षेत्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम या किसी एक कॉमन सेंटर में बच्चों को बुलाकर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 8वीं कक्षा से ऊपर सभी बच्चों को इसका लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश को आवासीय विद्यालयों से संतृप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों को विद्यालयों के भाग के रूप में ही तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे दूरस्थ क्षेत्र जहां सड़कों एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण उत्कृष्ट विद्यालय में शामिल नहीं किया जा सकता, ऐसे स्कूलों के पास लगे कस्बों और छोटे शहरों में आवासीय विद्यालय तैयार किए जाएं। इससे इन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी हॉस्टल में रहकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने प्रदेश के प्रत्येक जनपद में 2, 3 मॉडल लैब भी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन मॉडल लैब को टॉप क्लास का बनाया जाना है। उन्होंने कहा कि छात्रों को रोस्टर के आधार पर इन प्रयोगशालाओं में भेजा जाए। प्रत्येक छात्र को प्रयोगात्मक कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशालाएं आसपास के स्कूलों के सभी बच्चे प्रयोग कर सकें, इसके लिए कौन से स्कूल को किस प्रयोगशाला में जाना है इसका रोस्टर भी तैयार किया जाए।
इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

शिक्षा मंत्री बोले, 30 जून तक अनिवार्य रूप से डीपीआर जमा करें समस्त बीईओ

राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार, भौतिक संसाधनों में वृद्धि, शिक्षकों की उपलब्धता एवं छात्र संख्या में वृद्धि के दृष्टिगत प्रदेशभर में कलस्टर स्कूलों के गठन का निर्णय लिया है। प्रत्येक विकासखंड में न्यूनतम दो कलस्टर विद्यालय स्थापित किये जायेंगे। जिसकी प्रक्रिया पूर्ण करने की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को चयनित कलस्टर स्कूलों, पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के नये भवनों हेतु कार्यदाय संस्थाओं के माध्यम से शीघ्र डीपीआर तैयार कराने के निर्देश दिये गये हैं।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज देहरादून स्थित एक निजी होटल में शिक्षा अधिकारियों की बैठक ली, जिसमें शासन एवं निदेशालय के उच्चधिकारियों के साथ ही प्रदेशभर के खंड शिक्षा अधिकारियों एवं उप खंड शिक्षा अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। विभागीय मंत्री डा. रावत ने करीब तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक में चयनित कलस्टर विद्यालयों की संख्या, पीएम-श्री स्कूलों की प्रगति, परिषदीय परीक्षा में छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन, विद्यालय में तैनात शिक्षकों एवं छात्रों की संख्या, मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता, निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण, लम्बे समय से लापता एवं बीमार शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों की स्वैच्छिक एवं अनिवार्य सेवानिवृत्ति की प्रगति आदि बिन्दुओं पर विकासखंडवार समीक्षा की। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये कि चयनित कलस्टर स्कूलों में से वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम दो-दो कलस्टर विद्यालयों का गठन करना अनिवार्य है। इसके लिये अधिकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं अभिभावकों के साथ पांच से दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों के समायोजन की सहमति बनाते हुये सभी बिन्दुओं पर विचार-विमर्श करें। इसके उपरांत अंतिम रूप से चयनित कलस्टर विद्यालयों तथा पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के नये भवन निर्माण की कार्यदायी संस्था से डीपीआर बनवाकर शीघ्र मुख्य शिक्षा अधिकारी को सौंपे ताकि समय पर सभी स्कूल भवनों एवं कलस्टर विद्यालयों की डीपीआर स्वीकृति हेतु शासन को उपलब्ध हो सके। शिक्षा मंत्री डा. रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी विद्यालयों में नशा मुक्ति एवं तम्बाकू निषेध अभियान चलाने के साथ ही छात्रों को नैतिक शिक्षा एवं शिक्षकों को आचरण सेवा नियमावली का पालन कराना भी सुनिश्चित करना होगा। इसके लिये उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंड में विशेष अभियान चलाकर समय-समय पर समीक्षा करने को भी कहा। डा. रावत ने कहा कि जो शिक्षक एवं कर्मचारी लम्बे समय से गायब हैं अथवा लम्बे समय से बीमारी के कारण स्कूलों में अनुपस्थित हैं उनके विरूद्ध नियमानुसार अनिवार्य एवं स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की कार्यवाही भी करें। समीक्षा बैठक में कलस्टर स्कूलों के गठन को लेकर शिक्षा निदेशालय की ओर उप निदेशक डॉ. चेतन नौटियाल के द्वारा प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। इस अवसर पर विभगीय मंत्री ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उत्तराखंड द्वारा तैयार आनन्दम्-पाठ्यचर्चा विशेषांक ‘आनंद-पथ’ पत्रिका के द्वितीय संस्करण का विमोचन भी किया। विभागीय सचिव रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव व महानिदेशक वंशीधर तिवारी ने भी अधिकारियों को विद्यालयों के स्थापना एवं शिक्षा की गुणवत्ता सहित विभिन्न बिन्दुओं पर दिशा-निर्देश दिये।

बैठक में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा वंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक रामकृष्ण उनियाल, महावीर सिंह बिष्ट, डॉ. मुकुल सती, जे.एल शर्मा, रघुनाथ लाल आर्य, डा.एस.बी. जोशी, जगमोहन सोनी, चेतन प्रसाद नौटियाल सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं प्रदेशभर से आये खंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।

सचिवालय के कार्मिकों को सौगात, नवीनीकृत पालना केन्द्र और स्मार्ट क्लास का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय परिसर स्थित नवीनीकृत पालना केन्द्र (क्रेच) व स्मार्ट क्लास का शुभारंभ किया। यह क्रेच सचिवालय के कार्मिकों की ड्यूटी के दौरान उनके बच्चों की देखभाल के उद्देश्य से बनाया गया है। क्रेच में ए.सी, रेफ्रिजरेटर, पेयजल हेतु वाटर प्यूरीफायर, बच्चों के आराम करने के लिए बिस्तर, बाल सुलभ वॉश बेसिन, अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था की गई है। इसमें स्मार्ट क्लास की व्यवस्था भी की गई है। क्रेच में आउटडोर खेल उपकरण लगाये गये हैं। फेन्सिंग, चित्रकारी एवं वाल पेंटिंग से इसे सजाया गया है। क्रेच में ऊर्जा की बचत हेतु दो किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट (सोलर पैनल पावर कंडीशनिंग यूनिट व बैटरी) की व्यवस्था की गई है जिसमें केन्द्र के स्मार्ट क्लास सिस्टम, एल.ई.डी. लाइटिंग एवं समस्त पंखे संचालित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सचिवालय में कार्मिकों के बच्चों के लिए क्रेच की यह अच्छी सुविधा दी गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुविधा के लिए यहां पर अच्छी व्यवस्था की गई है। इससे जहां सचिवालय में कार्य करने वाले कार्मिकों को बच्चों की देखभाल के लिए अच्छी सुविधा मिलेगी, वहीं बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ सीखने के लिए भी अच्छी व्यवस्थाएं की गई हैं। क्रेच के नवीनीकरण का कार्य मात्र 18 दिनों में कराने के लिए उन्होंने नोडल विभाग महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास के प्रयासों की सराहना भी की।
सचिवालय के कार्मिकों ने सचिवालय परिसर में क्रेच की बेहतर सुविधा और बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए इसमें की गई व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार भी व्यक्त किया।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास एच.सी. सेमवाल एवं सचिवालय के कार्मिक उपस्थित रहे।

स्कूलों में फर्नीचर, कम्प्यूटर व खेलकूद का बजट शीघ्र जारी करने के निर्देश

उत्तराखंड में कलस्टर स्कूलों के गठन हेतु धरातल पर काम किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को जनपद स्तर पर बैठक का आयोजन कर सभी पहलुओं पर विचार करने को कहा गया है, ताकि आस-पास के विद्यालयों का विलय कर कलस्टर स्कूलों का गठन किया जा सके। प्रत्येक विद्यालय में ढांचागत सुविधाओं एवं अन्य सामग्री के लिये बजट समय जारी करने के निर्देश दिये गये हैं। वर्चुअल कक्षाओं के संचालन को लेकर राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी तैनात किया जायेगा।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज विधानसभा स्थित सभाकक्ष में विद्यालयी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने कलस्टर स्कूलों के गठन को लेकर विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक जनपद में जाकर क्षेत्रीय विधायक, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं अभिभावकों के साथ बैठक कर सभी पहलुओं पर चर्चा करने के निर्देश दिये, ताकि भविष्य में स्कूलों के गठन के उपरांत किसी प्रकार की समस्या का समाना न करना पड़े। उन्होंने प्रदेशभर के जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों के नये भवन निर्माण, वृहद एवं लघु मरम्मत सहित फर्नीचर, कप्यूटर, खेल सामग्री आदि का बजट एक माह के भीतर जारी करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। इसके अलावा विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को जूते, बैग एवं साइकिल की धनराशि शीघ्र डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करने को कहा। वहीं बच्चों को पाठ्य पुस्तकें समय पर उपलब्ध न कराये जाने पर विभागीय मंत्री ने नाराजगी जताते हुये अधिकारियों को यथाशीघ्र स्कूलों में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। इसके अलावा उन्होंने आईसीटीई के तहत संचालित वर्चुअल क्लासेज के बेहतर संचालन के लिये स्टेट स्तर पर नोडल अधिकारी तैनात करने को कहा। उन्होंने कहा कि वुर्चअल कक्षाओं का निरंतर संचालन सुनिश्चित किया जाय ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को इस योजना का भरपूर लाभ मिल सके। विभागीय बजट का समय पर व्यय न होने पर विभागीय मंत्री ने प्रत्येक माह बजट की समीक्षा करने के निर्देश अधिकारियों को दिये, ताकि स्वीकृत बजट समय पर व्यय किया जा सके। इसके अलावा विभागीय मंत्री ने अटल उत्कृष्ट विद्यालयों, निर्माण कार्यों, लम्बे समय से रिक्त पड़े पदों एवं रिक्त पदों के सापेक्ष पदोन्नति, स्थानांतरण एवं पारस्परिक स्थानांतरण की समीक्षा करते हुये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पात्र शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ शीघ्र शुरू की जाय ताकि वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को सुगम में आने का मौका मिल सके। उन्होंने कहा कि सबसे पहले दुर्गम से दुर्गम श्रेणी के स्थानांतरण किये जाय तत्पश्चात पारस्परिक, अनुरोध व अनिवार्य स्थानांतरण किये जायेंगे।

बैठक में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी, अपर निदेशक रामकृष्ण उनियाल, महावीर सिंह बिष्ट, अजय कुमार नौड़ियाल, संयुक्त निदेशक जे.एल शर्मा, रघुनाथ लाल आर्य, डा. एस.बी. जोशी, उप निदेशक जगमोहन सोनी, चेतन प्रसाद नौटियाल, अनुभाग अधिकारी राकेश सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

धामी की सौगात, अब स्कूल से ही मिलेंगे हर प्रकार के आवश्यक प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्य के समस्त विद्यालयों में कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभाग किये जाने की आवश्यकता के दृष्टिगत स्थायी निवास जाति एवं आय तथा अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र विद्यालय में ही उपलब्ध कराये जाएं।
इस संबंध में सचिव शैलेश बगोली ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा हैं कि छात्रों को आवश्यक प्रमाण-पत्र की आवश्यकता एवं इन प्रमाण-पत्रों को प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के दृष्टिगत राज्य के समस्त विद्यालयों में अपणों स्कूल, अपणू प्रमाण नामक पहल के तहत कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को स्थायी निवास, जाति एवं आय तथा अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र विद्यालय स्तर पर ही उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आदेश जारी किये हैं कि जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मुख्य शिक्षा अधिकारी को सम्मिलित करते हुए समिति का गठन किया जाय। समिति द्वारा जनपद स्तर पर कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या का आकलन किया जायेगा। तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति से विद्यालय में भ्रमण करने वाली टीमों (पटवारी/लेखपाल/कानूनगो एवं सीएससी के डाटा एण्ट्री ऑपरेटर) का तिथिवार रोस्टर तैयार करवाया जायेगा। निवास स्थान, चरित्र, आय एवं पर्वतीय प्रमाण-पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने की प्रक्रिया हेतु टाइम फ्रेम का निर्धारण करते हुए कार्ययोजना तैयार की जायेगी। जनपद स्तर पर उक्त कार्यक्रम का साप्ताहिक अनुश्रवण एवं निगरानी की जायेगी।
तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में खण्ड शिक्षा अधिकारियों को सम्मिलित करते हुए समिति का गठन किया जाय। समिति द्वारा तैयार रोस्टर की सूचना से सम्बन्धित विद्यालयों को अवगत कराने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। प्रमाण-पत्रों हेतु आवश्यक दस्तावेजों की सूचना प्रधानाचार्याे, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध करायी जायेगी। तहसील स्तर पर इस कार्यक्रम का दैनिक अनुश्रवण एवं निगरानी की जायेगी। कार्यवाही के पश्चात तहसीलदार स्तर से दैनिक निगरानी के अंतर्गत तिथिवार रोस्टर के अनुसार पटवारी/लेखपाल/कानूनगो एवं सीएससी के डाटा एण्ट्री ऑपरेटर की टीम द्वारा सम्बन्धित विद्यालय का भ्रमण किया जायेगा तथा प्रधानाचार्य से प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए प्रमाण-पत्र हेतु आवश्यक शुल्क/दस्तावेज, ऑनलाईन/ऑफलाईन माध्यम से तहसीलदार/उपजिलाधिकारी कार्यालयों को प्रेषित किये जायेंगे।
आवश्यक शुल्क/दस्तावेज प्राप्त होने के उपरान्त तहसीलदार/उपजिलाधिकारी कार्यालय द्वारा प्रमाण-पत्र निर्गत करते हुए उक्त प्रमाण-पत्र, छात्र-छात्राओं को वितरित किये जाने हेतु एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाचार्य को उपलब्ध करा दिया जायेगा। जिला स्तरीय समिति द्वारा समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार तथा खण्ड शिक्षा अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुए सम्पूर्ण कार्यवाही की प्रभावी मॉनिटरिंग की जायेगी एवं किसी प्रकार की समस्या/कठिनाई उत्पन्न होने पर समिति के स्तर से सम्बन्धित को तात्कालिकता के आधार पर यथावश्यक दिशा-निर्देश निर्गत किये जायेंगे।यह समस्त कार्यवाही अधिकतम दो माह के भीतर सम्पादित कराते हुए, प्रत्येक जनपद की साप्ताहिक सूचना, जिलाधिकारी द्वारा शासन को सलग्न प्रारूपानुसार अनिवार्य रूप से संप्रेषित कराया जाना सुनिश्चित करें।

अधिकारियों को यू-सेट परीक्षा तिथि घोषित करने के निर्देश

प्रदेश में राज्य पात्रता परीक्षा (यू-सेट) शीघ्र आयोजित की जायेगी। यू-सेट के आयोजन के लिये कुमाऊं विश्वविद्यालय के अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं, शीघ्र ही परीक्षा तिथि घोषित कर दी जायेगी। इस परीक्षा को पास करने पर प्रदेशभर के युवाओं की प्रोफेसर बनने की राह और भी आसान हो जायेगी।
सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि प्रदेश में शीघ्र ही राज्य पात्रता परीक्षा (यू-सेट) आयोजित की जायेगी। उन्होंने बताया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय को इस परीक्षा का आयोजन करना है, लिहाजा विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा तिथि जल्द घोषित करने के निर्देश दे दिये गये हैं। विभागीय मंत्री डा. रावत ने बताया कि यू-सेट के आयोजन के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जरूरी दिशा-निर्देश मांगे गये थे, जिस पर यूजीसी की अनुमति मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन को ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लम्बे अंतराल के बाद यू-सेट की परीक्षा आयोजित होने जा रही है लिहाजा इस परीक्षा में प्रदेशभर के हजारों छात्र-छात्राएं सम्मिलित होंगी, परीक्षा के सफल आयोजन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को सभी औचारिकताएं समय पर पूरे करने को कहा गया है। डॉ. रावत ने उम्मीद जताते हुये कहा कि यू-सेट के सफल प्रतिभागियों राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की राह आसान हो जायेगी। उन्होंने कहा कि यू-सेट में वही कामन विषय शामिल हैं जो मुख्यतः कालेजों में संचालित हैं। जिसमें प्रमुख रूप से हिंदी, इंग्लिश, सोशियल साइंस, हिस्ट्री, ज्योग्राफी, सोशियोलॉजी, फिजिकल एजूकेशन, बायोलॉजी, फिजिक्स, कैमिस्ट्री, इकोनॉमिक्स, कॉमर्स आदि विषय शामिल है।

’क्या है सेट’
स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) सहायक प्राध्यापक की नौकरी के लिए अनिवार्य है। इस परीक्षा को पास करने के बाद सीधे तौर पर सहायक प्राध्यापक पद के लिए आवेदन किया जा सकता है। यदि यह नहीं हो तो पीएचडी व नेट होना जरूरी है।

2025 तक जिन योजनाओं का लक्ष्य दिया गया है उसे पूर्ण करे विभाग-धामी

उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिए विभागों द्वारा जो भी अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जा रही हैं उनके क्रियान्वयन के लिये गंभीरता से प्रयास किये जायें। इस संबंध में विभागों द्वारा जो लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं, उनकी प्राप्ति के लिए भी सुनियोजित तरीके से कार्य किये जाएं। योजनाओं पर चरणबद्ध तरीके से कार्य किये जाने के साथ ही 2025 तक जिन योजनाओं को पूर्ण करने का विभागों द्वारा लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के प्रयास हों, साथ ही इसकी नियमित समीक्षा भी की जाए। सचिवालय में विद्यालयी शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास एवं खेल विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ये निर्देश अधिकारियों को दिये।
विद्यालयी शिक्षा की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन जनपदों में विद्यालयी शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थी ड्रॉप आउट हो रहे हैं, इनके कारणों का विस्तृत अध्ययन किया जाए। विद्यालयी शिक्षा में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किये जाएं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गुणात्मक सुधार एवं विद्यार्थियों के पंजीकरण को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किये जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र पोषित योजनाओं के तहत होने वाले कार्यों में तेजी लाई जाए। जो भी प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे जाने हैं, उनमें किसी भी स्थिति में विलम्ब न हो। पीएम श्री के तहत राज्य के चयनित 142 स्कूलों के लिए सभी आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए पूरी तैयारी किये जाने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्कूलों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो।
तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पॉलिटेक्निक कॉलेजों एवं आईटीआई में समय की मांग के आधार पर कोर्स करवाए जाएं। इसके लिए औद्योगिक संस्थानों से निरंतर आपसी समन्वय बनाये जाने पर ध्यान दिया जाये। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों को उचित प्लेसमेंट मिल जाए। पॉलिटेक्निक कॉलेजों एवं आईटीआई के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए। यह सुनिश्चित किया जाए कि इनमें दक्ष मानव संसाधन के साथ आवश्यक उपकरण भी हों। जिन ट्रेडों में कार्य के लिए डिमांड बढ़ी है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाए। पॉलीटेक्निक कॉलेजों और आईटीआई का अपग्रेडेशन भी चरणबद्ध तरीके से किये जाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये।
उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध को बढ़ावा देने के लिए और प्रयासों की जरूरत है। शोध आधारित मॉडल महाविद्यालय बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किये जाएं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुपालन पर विशेष ध्यान दिया जाए। उच्च शिक्षा के साथ व्यावसायिक कोर्स को बढ़ावा देने पर भी कार्य किया जाए। डिग्री कॉलेजों में नवाचार को बढ़ावा देने के लगातार प्रयास किये जाने की भी उन्होंने जरूरत बतायी।
कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि सभी तकनीकि संस्थाओं को एकीकृत रूप में एक प्लेटफार्म पर लाया जाए। रोजगार मेलों का नियमित आयोजन किया जाए और उनका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाए। रोजगार के साधन बढ़ाने के लिए कौशल विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राज्य में स्थापित उद्योगों को दक्ष मानव संसाधन मिले, इसके लिए युवाओं को उद्योगों की आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं की जाए।
खेल विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि नई खेल नीति में खिलाड़ियों की सुविधा के लिए जो भी प्रावधान किये गया है, उनका सभी को पूरा लाभ मिले। इन प्रावधानों का विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में 2024 में प्रस्तावित 38वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारियां अभी से शुरू कर दी जाएं। सभी जनपदों में खेल की गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा देने तथा आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये हैं।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, विजय कुमार यादव, शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी, निदेशक खेल, जितेन्द्र सोनकर एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम धामी से मिलने पहुंचे नन्हे मुन्ने बच्चे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को मुक्तेश्वर पहुंचे, जहां वह कुमाऊं मंडल विकास निगम मुक्तेश्वर में पहुंचे थे कि केंद्रीय विद्यालय मुक्तेश्वर के तीन नन्हे मुन्ने बच्चे मुख्यमंत्री से आकर मिले। अपने बीच मुख्यमंत्री को देख बच्चे काफी उत्साहित थे, केंद्रीय विद्यालय में कक्षा छठी की छात्रा करुणा और कक्षा तीसरी की छात्रा रुचि और कक्षा एक के छात्र शैलेश पांडे ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान सीएम धामी भी बच्चों को देख काफी प्रफुल्लित हुए उन्होंने नन्हे-मुन्ने बच्चों से बातचीत की और उनका हालचाल जाना और उनकी पढ़ाई के बारे में भी पूछा। इस दौरान बच्चे सीएम से मिलकर काफी खुश नजर आए, उन्होंने सीएम धामी का ऑटोग्राफ भी लिया।

क्लस्टर विद्यालयों में जरुरत के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के साथ क्लस्टर विद्यालय के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत संचालित क्लस्टर विद्यालय शिक्षण अधिगम को गुणवत्तापरक एवं रूचिकर बनाने के उद्देश्य से पठन-पाठन से सम्बन्धित मूलभूत सुविधायें विकसित कर उत्कृष्ट शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन क्लस्टर विद्यालयों में समुचित मात्रा में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल के लिए आने वाले समय में अधिकतम छात्र संख्या के अनुरूप मास्टर प्लान तैयार किया जाए। क्लस्टर स्कूल में समुचित अध्यापक, कक्षाकक्ष, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब और अन्य प्रयोगशालाओं आदि की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों में छात्रों के लिए आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन कर उन्हें छात्रों को आवागमन का किराया किस रूप में देना है इसके लिए भी अधिकृत किया जाए। इस समिति में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक आदि सम्बन्धित सभी विभागों का प्रतिनिधित्व रखा जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसे स्कूल, जो अत्यधिक दूर हैं और बच्चे इतने दूर आना जाना नहीं कर सकते, के लिए आवासीय स्कूलों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि आवासीय स्कूलों को पर्वतीय जनपदों के छोटे शहरों में खोला जा सकता है। ऐसे में उन आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों को अपने परिवार के साथ रहने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में एक नहीं बल्कि 5 से 7 आवासीय विद्यालय होने चाहिए। वर्तमान में संचालित आवासीय विद्यालयों में हॉस्टल की सुविधा को और बढ़ाया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध हो इसके लिए अच्छे सुझावों को लगातार अपनाने की आवश्यकता है।
सचिव रविनाथ रमन ने बताया कि प्रदेशभर में माध्यमिक स्तर पर कुल 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार प्राथमिक में 603 और पूर्व माध्यमिक में 76 विद्यालयों को चिन्हित किया गया है। सभी विद्यालयों के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है।
इस अवसर पर महानिदेशक माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा बंशीधर तिवारी, अपर सचिव शिक्षा योगेन्द्र यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता बच्चों के लिए पुरस्कार सामग्री दी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता बच्चों अनुराग रमोला, देहरादून एवं शिवम रावत, किच्छा उधमसिंहनगर को पुरस्कार सामग्री उनके माता-पिता को प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया जाता है। ये पुरस्कार नवाचार, शैक्षिक, खेल, कला और संस्कृति, समाज सेवा और बहादुरी के क्षेत्र में असाधारण क्षमताओं और उत्कृष्ट उपलब्धि वाले बच्चों को मान्यता के रूप में दिए जाते है। अनुराग रमोला, देहरादून एवं शिवम रावत, किच्छा उधमसिंहनगर को यह पुरस्कार दिया जाना राज्य का भी सम्मान है तथा अन्य बच्चों के लिये भी प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर सचिव हरि चन्द सेमवाल आदि उपस्थित रहे।