पतंजलि के प्रथम दीक्षांत समारोह में पहुंचे राष्ट्रपति, छात्रों को दी उपाधि

राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रथम दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से. नि.), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण, संकाय अध्यक्षा डॉ. साध्वी देवप्रिया उपस्थित थे।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि आधुनिक विज्ञान के साथ हमारी परंपरा की प्रासंगिक ज्ञान-राशि को जोड़ते हुए भारत को नॉलेज सुपर पावर बनाने का जो लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने निर्धारित किया है उस मार्ग पर पतंजलि विश्वविद्यालय अग्रसर है। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं तथा स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में हरिद्वार की पावन धरती पर रहने का और शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव जी ने योग की लोकप्रियता को बढ़ाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। भारत सरकार के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 2015 में प्रतिवर्ष 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। ऐसे प्रयासों के परिणामस्वरूप सन 2016 में ‘योग’ को यूनेस्को द्वारा‘विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर’ की सूची में शामिल किया गया है। राष्ट्रपति ने क्यूबा का उदाहरण देते हुए कहा कि योग को विश्व के हर क्षेत्र और विचारधारा के लोगों ने अपनाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय द्वारा जो प्रयास किए जा रहे हैं उनसे भारतीय ज्ञान-विज्ञान, विशेषकर आयुर्वेद तथा योग को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विश्व-पटल पर गौरवशाली स्थान प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है कि पतंजलि समूह के संस्थानों में भारतीयता पर आधारित उद्यमों और उद्यम पर आधारित भारतीयता का विकास हो रहा है।
राष्ट्रपति ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आलस्य और प्रमाद को त्याग कर आप सब योग-परंपरा में उल्लिखित ‘अन्नमय कोष’, ‘मनोमय कोश’ और‘प्राणमय कोश’ की शुचिता हेतु सचेत रहेंगे। और ‘विज्ञानमय कोश’ और ‘आनंदमय कोश’ तक की आंतरिक यात्रा पूरी करने की महत्वाकांक्षा के साथ आगे बढ़ेंगे। करुणा और सेवा के आदर्शों को आप अपने आचरण में ढाल कर समाज सेवा करते रहेंगे। करुणा और सेवा के अद्भुत उदाहरण हमारे देशवासियों ने कोरोना का सामना करने के दौरान प्रस्तुत किए हैं। आज हम गर्व के साथ यह कह सकते हैं कि हमारा देश विश्व के उन थोड़े से देशों में से है जिन्होंने न सिर्फ कोरोना के मरीजों की प्रभावी देखभाल की है अपितु इस बीमारी से बचाव हेतु वैक्सीन का भी उत्पादन किया है। हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है। सृष्टि के साथ सामंजस्यपूर्ण जुड़ाव ही आयुर्वेद एवं योग-शास्त्र का लक्ष्य है। इस सामंजस्य के लिए यह भी आवश्यक है कि हम सभी प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली को अपनाएं तथा प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन न करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज जब हम आज़ादी का अमृत महोत्सव बना रहे हैं, तब हमें अपने ऐसे विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को और भी अधिक प्रोत्साहन देना चाहिए जो हमारी संस्कृति को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय तथ्य है कि पतंजलि विश्वविद्यालय में छात्रों की अपेक्षा बेटियों की संख्या अधिक है। यह प्रसन्नता की बात है कि परंपरा पर आधारित आधुनिक शिक्षा का विस्तार करने में हमारी बेटियां अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। मुझे विश्वास है कि आप सभी छात्राओं में से आधुनिक युग की गार्गी,मैत्रेयी, अपाला, रोमशा और लोपामुद्रा निकलेंगी जो भारतीय मनीषा और समाज की श्रेष्ठता को विश्व पटल पर स्थापित करेंगी।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से. नि.) ने कहा कि आज हम सभी देवभूमि वासियों के लिये सौभाग्य और प्रसन्नता का क्षण है। महामहिम राष्ट्रपति जी की उपस्थिति से आज यह विद्या और ज्ञान का मन्दिर पंतजलि विश्वविद्यालय तथा हमारा पूरा उत्तराखण्ड परिवार गरिमामय हो गया है। देवभूमि उत्तराखण्ड की पावन धरती, यहां के सुन्दर पर्वत, नदियां और सभी लोग महामहिम राष्ट्रपति जी का आभार व्यक्त करते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग एवं आयुर्वेद को दुनियाभर में एक नई पहचान दी है। वे बधाई के पात्र है। स्वामी रामदेव जी ने आयुर्वेद व योग का महत्व पूरी दुनिया को बताया। वे योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से हेल्थ सेक्टर में क्रांति लाए हैं। भविष्य में विश्व के 7 बिलियन लोग इसका लाभ उठाएंगे। उन्होंने इसे जन-जन तक पहुंचाने का महान कार्य किया है। आज बच्चे, बुजुर्गाे सहित सभी लोगों में योग लोकप्रिय हो चुका है। प्राणायाम और योगासनों की शक्तियों को पूरा विश्व पहचान चुका है। राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद तथा योग ने भारत को कोविड काल की चुनौतियों के लिये भी तैयार किया। जहां पूरा विश्व कोविड के कारण बुरी तरह प्रभावित रहा। योग एवं आयुर्वेद के कारण भारत ने इस चुनौती का सामना बेहतर ढंग से किया। राज्यपाल ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि आज इस दीक्षांत समारोह में डिग्रीयां लेने वाले विद्यार्थी अपने राष्ट्र, प्रदेश और समाज की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। आप अपनी शिक्षा, प्रतिभा एवं प्रशिक्षण का उपयोग मानव कल्याण के लिये करेंगे। आशा है कि हमारे यह स्वास्थ्य योद्धा आने वाली चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक करेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह का अर्थ शिक्षा की समाप्ति नही है। शिक्षा तो जीवनभर निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। आज पूरा विश्व असीमित संभावनाओं और अवसरो से युक्त है। युवा पीढ़ी से अपेक्षाएं है कि आउट ऑफ द बाक्स थिकिंग और अपनी नई कल्पनाओं के साथ प्रत्येक क्षेत्र में असीमित परिणाम देंगे। मुझे यह देखकर खुशी होती है कि आज बड़ी संख्या में युवा संस्कृत भाषा, योग, आयुर्वेद, नैचुरोपेथी तथा प्राचीन भारतीय विधाओं को पढ़ना और सीखना चाहते हैं। ऐसे युवा यदि इन्फोर्ममेशन टेक्नॉलॉजीए डिजिटिजेशन, सोशल मीडिया एवं मास मीडिया में भी विशेषज्ञता प्राप्त कर लेते हैं तो यह हमारी प्राचीन विधाओं को नई ऊंचाईयों तक ले जाएंगा। युवाओं के द्वारा सोशल मीडिया तथा मास मीडिया का सदुपयोग इन समृद्ध विधाओ के प्रचार प्रसार किया जा सकता है। मेरा मानना है कि योग और आयुर्वेद के विद्यार्थी हमारी सभ्यता, संस्कृति के ब्राण्ड अम्बेसडर भी हैं।
राज्यपाल ने कहा कि योग और आयुर्वेद हमारी सरल, सहज एव शाश्वत तथा सम्पूर्ण चिकित्सा विज्ञान है। हमे जन-जन तक इस बात को पहुंचाना है। योग और आयुर्वेद को विश्व की एक प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करना है। यह महान उत्तरदायित्व भी आपके ऊपर ही है। राज्यपाल ने कहा कि आज हमारे समक्ष सतत विकास के साथ ही संतुलित विकास की भी चुनौती है। विद्यार्थियों से मेरा आग्रह है कि यदि आपकी शिक्षा, प्रतिभा और विजन का लाभ हमारे देश के पिछडे़ क्षेत्रों, दूरस्थ गांवों, समाज के वंचित और निर्धन तबकों को मिले तो यह आपके जीवन को एक नया अर्थ देगा। विशेषकर उत्तराखण्ड के संदर्भ में यहां की शिक्षित युवाओं को स्थानीय उत्पादों, शिल्पों, संस्कृति और सोच विचार पर आधारित उद्यमों के लिये कार्य करना चाहिये। निश्चित ही आप राज्य में रिवर्स माइग्रेशन का नया अध्याय लिखेंगे। राज्यपाल ने कहा कि आशा है कि भविष्य में आप अपने सेवा क्षेत्र में नैतिक मूल्यों, मानवीयता, विश्व कल्याण और सेवा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देंगे। आप सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की सोच के साथ कार्य करेंगे। आप प्रोफेशनल एथिक्स के साथ ही अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट से उत्कृष्ट प्रयास करेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपति का देवभूमि और गंगा नगरी में आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि हमारे महामहिम राष्ट्रपति जी का जीवन एक प्रेरणा पुंज के समान है। ये हमें बताता है कि व्यक्ति में यदि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास, साहस और इच्छाशक्ति हो तो वो बड़े से बड़े लक्ष्य को भी हासिल कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम जहां एकत्रित हुए हैं ये वो स्थान है जिसने दुनिया भर योग के प्रचार-प्रसार को एक नया आयाम और एक नया विस्तार दिया है। जिस प्रकार महर्षि दधीचि के तप का उपयोग कर वज्र का निर्माण हुआ उसी प्रकार स्वामी रामदेव अपने संघर्ष और तप से योग, प्रणायाम, अध्यात्म और स्वदेशी चिंतन की पताका को पूरे विश्व में फहरा रहे हैं। साथ ही इस अवसर पर मैं आभार प्रकट करना चाहुंगा आचार्य बालकृष्ण का भी जो कि अपने प्रबंधन कौशल तथा आयुर्वेद के ज्ञान से इस भारतीय चिकित्सा पद्धति और योग क्रांति को पूरे विश्व में आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज योग भारतीय संस्कृति के ध्वजारोहक के रूप दुनिया भर में इस सत्य को पुर्नःस्थापित कर चुका है कि भारतीय परम्पराएं, भारतीय दर्शन और हमारे ऋषि मुनियों द्वारा अपनाई और तय की गई जीवन पद्धति कितनी वैज्ञानिक और हितकारी थी। योग केवल शारीरिक ही नहीं मानसिक और भावनात्मक विकारों को भी दूर करता है। यूं तो योग सदियों से विश्व में अपना डंका बजा रहा है लेकिन जो ख्याति प्रधानमंत्री के प्रयासों से इसने हासिल की है वो अभूतपूर्व है। ये आदरणीय मोदी की ही पहल थी कि 21 जून 2015 को दुनिया में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। यशश्वी प्रधानमंत्री का कथन है कि हमें खुद भी योग का संकल्प लेना है और दूसरों को भी इस संकल्प से जोड़ना है। “योग से सहयोग“ तक का मंत्र हमें भविष्य का नया मार्ग दिखाएगा और मानवता को सशक्त करेगा। उत्तराखंड में हम लगातार उनके इस मंत्र पर चलने और इसे सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पथ प्रदर्शक दीनदयाल उपाध्याय जी ने जो ’अंत्योदय’ का जो मन्त्र हमें दिया है लगातार उसको अपना कर हम अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। इस दिशा में हमें सफलता भी मिली है और हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। उत्तराखंड उन सपनों को साकार करने की राह पर आगे बढ़ रहा है जो सपने इसके निर्माण के दौरान देखे गए थे। एक सैनिक पुत्र होने के नाते, मैं उत्तराखंड के सैनिक परिवारों की अपेक्षाओं और उम्मीदों को पूरा करने के लिए भी प्रयत्नशील हूँ। हम निरंतर उन कामों को कर रहे हैं जिनका सीधा सरोकार जनता से है, उनकी भलाई से है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी पूरी कोशिश है कि वर्ष 2025 में जब हम राज्य स्थापना के 25 वर्ष का जश्न मना रहे होंगे तब तक हम उत्तराखंड को हर क्षेत्र में नंबर वन बना लेंगे। प्रधानमंत्री ने भी कहा है और मैं भी उनके ही कथन को दोहरा रहा हूं कि आने वाला दशक उत्तराखंड का दशक होगा और इस दशक में हम आप सभी के सहयोग से नई बुलंदियों को छुएंगे। प्रदेश की जनता ने हमेशा हम पर विश्वास जताया है और मुझे पूरी आशा है कि उनका ये विश्वास हम पर आगे भी यूं बना रहेगा।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द, विधायक आदेश चौहान, सुरेश राठौर, प्रदीप बत्रा, मेयर रूड़की गौरव गोयल, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

एसबीएम इंटर कॉलेज में एनसीसी दिवस मनाया

73वें एनसीसी दिवस पर एसबीएम इंटर कॉलेज के एनसीसी कैडेटों ने परेड का आयोजन किया। कॉलेज परिसर में श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया। साथ ही सामाजिक कार्य में भागीदारी का संकल्प दोहराया।
रविवार को हरिद्वार रोड स्थित एसबीएम इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य मेजर गोविंद सिंह रावत ने कहा कि एनसीसी के द्वारा छात्रों के अंदर देश प्रेम की भावना का विकास होता है और यह आगे चलकर सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते हैं।
लेफ्टिनेंट लखविंदर सिंह ने कहा कि प्रतिवर्ष नवंबर माह के चौथे रविवार को एनसीसी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य संपूर्ण देश के कैडेट को एक सूत्र में बांधना है। एनसीसी कैडेट पूरे मनोयोग के साथ कठिन परिश्रम करके लगातार ट्रेनिंग लेते हैं, जिसका लाभ आने वाले समय में देश की सेनाओं को मिलता है। इनको समय-समय पर शिविरों और प्रशिक्षण कैंपों के द्वारा भी तैयार किया जाता है। इस दौरान प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी आदि ने एनसीसी कैडेटों की परेड की सलामी ली। मौके पर शिव प्रसाद बहुगुणा, विनीत सिंघल, संजीव चौधरी, रंजन अंथवाल, नीलम जोशी, विकास नेगी आदि उपस्थित रहे।

स्वच्छता और कोरोना के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए प्रतियोगिता का आयोजन

आवास विकास स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश में बीएड के प्रशिक्षणार्थीयो ने समाज, घर व विद्यालय को स्वच्छ रखने एवं अपने को स्वस्थ रखने के प्रति एक अभियान चलाया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद पांडेय तथा संगीता नागपाल, प्रगति गुल्हाटी ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया। कार्यक्रम में बीएड छात्रा स्वाति रावत एवं साक्षी पालीवाल ने विद्यार्थियों को हस्तनिर्मित मास्क बनाना एवं कोराना से कैसे बचाव किया जाये इसके लिए जागरूक किया और अपने आसपास की स्वच्छता को बनाये रखने के लिए एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन करवाया।
पोस्टर प्रतियोगिता में छात्र हिमांशु कुमार प्रथम एवं द्वितीय चांदनी अंसारी तथा तृतीय अनुष्का राणा रही। कार्यक्रम में अंकिता पेटवाल, चेतना नारंग, शुभम राणा, रजनी गर्ग, सतीश चौहान, नरेन्द्र खुराना, कर्णपाल बिष्ट, रामगोपाल रतूड़ी, आदि उपस्थित रहे।

सीएम ने मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत छात्राओं को चेक बांटे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत मुख्यमंत्री आवास में महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून की तीन छात्राओं को चेक प्रदान किये। मुख्यमंत्री द्वारा कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग की तृतीय वर्ष की छात्रा कु. गरिमा शर्मा को 1 लाख 70 हजार 950 रुपये का चेक प्रदान किया गया। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की चतुर्थ वर्ष की छात्रा कु. अलविना खानम को 56 हजार 100 रुपये का चेक प्रदान किया गया। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की चतुर्थ वर्ष की छात्रा कु. शिप्रा नेगी को 27 हजार 500 रुपये का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत इन छात्राओं का 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 की अवधि का लिया गया शुल्क महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून द्वारा वापस किया गया है। भविष्य में भी संस्थान द्वारा इन छात्राओं से कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 2 अगस्त 2021 को कोविड-19 में अपने अभिभावकों को खोने वाले बच्चों के लिए मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना शुरू की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने अभिभावकों को खोया, इस कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन सरकार का प्रयास है कि इन बच्चों की जो भी मदद हो सकती है, वह राज्य सरकार करेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, निदेशक महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून प्रो. आर.पी.एस. गंगवार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकुर दुम्का भी मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय परिसर में सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री से मिले

एबीवीपी ने पंडित ललित मोहन शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में विज्ञान, कामर्स और कला संकाय में 20 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की मांग उच्चशिक्षा मंत्री धन सिंह रावत से की है। साथ ही उनका कॉलेज में व्याप्त अन्य समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया।
कल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के लिए भूमि दान करने वाले स्व. पंडित ललित मोहन शर्मा की प्रतिमा अनावरण में आए उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कालेज संबंधी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। बताया कि श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि का परिसर खुलने के बाद भी कॉलेज में तीनों संकाय में सीटें नहीं बढ़ी है। 12वीं पास छात्र कॉलेज में प्रवेश से वंचित नहीं हो इसके लिए तीनों संकाय में 20 प्रतिशत सीट बढ़ाई जाए। साथ ही कालेज परिसर में शौचालय और बीएसी बिल्डिंग निर्माण, खेल मैदान में छात्राओं के लिए चेंजिंग रूम और प्रदेश में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग की। उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस मौके पर एबीवीपी जिला प्रमुख विवेक शर्मा, नगर मंत्री अनिरूद्ध शर्मा, दीपक कुमार, शुभम शर्मा आदि मौजूद रहे।

महाविद्यालय परिसर में पंडित ललित मोहन शर्मा की प्रतिमा का अनावरण हुआ

श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर में आज भूमि दाता श्री भरत मंदिर परिवार का सम्मान समारोह एवं पंडित ललित मोहन शर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने समारोह का शुभारंभ पंडित ललित मोहन शर्मा की प्रतिमा का अनावरण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि जयराम आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी और महापौर ऋषिकेश अनीता ममंगाई रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत से किया गया। कार्यक्रम में भरत मंदिर परिवार के सम्मानित सदस्यों को विश्व विद्यालय परिवार की ओर से सम्मानित किया गया। भरत मंदिर परिवार की ओर से इस अवसर पर हर्षवर्धन शर्मा, मंजरी शर्मा, गीता कुकरेती, निशा शर्मा, वत्सल प्रपन्न शर्मा एवं वरुण शर्मा उपस्थित रहे। सभी सम्मानित सदस्यों को स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने श्री भरत मंदिर परिवार को ऋषिकेश परिसर के लिए भूमि दान हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने शर्मा परिवार की भूरि भूरि प्रशंसा की। उन्होंने आंतरिक परिसर के सड़क निर्माण हेतु 5 लाख की धनराशि देने की घोषणा भी की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने भी विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर हेतु भूमि दाता पंडित ललित मोहन शर्मा की भविष्य में एक और विशाल प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की। इसके लिए उनके परिवार को धन्यवाद भी दिया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को प्रोत्साहित करने हेतु उच्च शिक्षा मंत्री ने ऋषिकेश परिसर में पढ़ने वाले लगभग 4000 छात्र छात्राओं को स्मार्ट टैब अगले दिसंबर माह में देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि परिसर में निर्माण कार्य हेतु 58 करोड़ की डीपीआर की स्वीकृति अतिश्ीघ्र प्रदान की जायेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के सुचारू रूप से संचालन एवं प्रगति के लिए सदैव प्रयासरत रहने की इच्छा दर्शायी। उच्च शिक्षा मंत्री एवं विधान सभा अध्यक्ष द्वारा इस कार्यक़म के आयोजन के लिए कुलपति प्रो. पी. पी. ध्यानी एवं परिसर प्राचार्य प्रो. पंकज पन्त की सराहना की। कार्यक्रम समारोहक डॉ. सुमिता श्रीवास्तव ने भूमि दाता पंडित ललित मोहन शर्मा का एक संक्षिप्त जीवन परिचय भी दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि व्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने पंडित ललित मोहन शर्मा महाविद्यालय में गुजारे अपने छात्र दिनों को भी याद किया और इसके उज्जव भविष्य की कामनाएं की। शिक्षण संस्थान के लिए सदैव प्रयासरत रहने के लिए उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता भी दिखाई। विश्वविद्यालय परिसर विकास कार्य हेतु उन्होंने 1 लाख का चेक प्रदान किया। भरत मंदिर परिवार के सदस्य हर्षवर्धन शर्मा जी ने अपने परिवार की ओर से विश्वविद्यालय परिसर को इस सम्मान समारोह के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पुस्तकों एवं ई ग्रन्थालय हेतु 5 लाख धनराशि देने का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट बनाने के लिए अपने सदैव प्रयासरत रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीपी ध्यानी जी ने भरत मंदिर परिवार एवं पंडित ललित शर्मा के परिवार के सदस्यों को परिसर में आने हेतु एवं सम्मान ग्रहण करने हेतु धन्यवाद दिया। उन्होने विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर नाम में पंडित ललित मोहन शर्मा का नाम सदैव रहने की बात की। महाविद्यालय से विश्वविद्यालय एवं भविष्य में भी उत्कृष्टता के आयामों को स्थापित करने के लिए उन्होंने अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की।

ऋषिकेश इंटरनेशनल स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन

ऋषिकेश इंटरनेशनल स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। जिसमें छात्र-छात्राओं ने इतनी शक्ति हमें देना दाता…, तू ही राम, तू ही रहीम…आदि गीतों से दर्शकों को आकर्षित किया।
ढालवाला स्थित ऋषिकेश इंटरनेशनल स्कूल में कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रबंधक मोहन डंग, सचिव कप्तान सुमंत डंग, प्रधानाचार्या डा. कोयली चक्रवर्ती ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर सुमंत डंग ने कहा कि विद्यालय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कार्य कर रहा है। प्रधानाचार्य डा. कोयली चक्रवर्ती ने कहा कि 10वीं और 12वीं की सीबीएसई बोर्ड की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं इसी महीने होनी है। जबकि फाइनल परीक्षा मार्च में होनी है। कहा कि सभी बोर्ड विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम व लगन से पढ़ना चाहिए।
इस दौरान छात्र-छात्राओं ने इतनी शक्ति हमें देना दाता…, तू ही राम, तू ही रहीम…, अंग्रेजी गीत वी शैल ऑवरकम…आदि की प्रस्तुति दी। मौके पर पूजा डंग, महिमा डंग, बिंदु शर्मा, ज्योति कोठियाल, दीपा शर्मा, अलीशा खान, संजीत पंवार, सौरव पोखरियाल आदि उपस्थित थे।

डीएसबी इण्टरनेशनल पब्लिक स्कूल का राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ग्राम्यांचल डिग्री कॉलेज में 11 नवंबर 2021 से 14 नवंबर 2021 के बीच आयोजित जूनियर नेशनल चौंपियनशिप तीरंदाजी प्रतियोगिता में उत्तराखंड राज्य की ओर से डीएसबी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल ऋषिकेश के छात्रों ने ओलंपिक राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जिसमें छात्रों ने 14 स्वर्ण पदक, 3 रजत पदक व 2 कांस्य पदक प्राप्त किए।
अंडर 10 वर्ग में अभीष्ट भारद्वाज ने 2 स्वर्ण, वर्णित रावत ने 2 स्वर्ण तथा मनीष कंडियाल ने 1 स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
अंडर 14 बालक वर्ग में आदित्य दत्त ने 2 स्वर्ण, ओजस पैन्यूली ने 1 स्वर्ण व 1 कांस्य पदक, अभिनव घनसोला ने 1 स्वर्ण पदक तथा बालिका वर्ग में आकांक्षा उनियाल ने 2 स्वर्ण, श्रीयशी ने 1 स्वर्ण व 1 रजत , तन्वी बागड़ी ने 1 स्वर्ण व 1 रजत पदक प्राप्त किया। अंडर 17 वर्ग में अर्पित सिंह ने 2 स्वर्ण, आदित्यवर्धन रमोला ने 1 स्वर्ण व 1 रजत, अभिनव सिंह ने 1 स्वर्ण व 1 कांस्य पदक प्राप्त किया।
प्रतियोगिता में छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 पदक प्राप्त करते हुए रिकर्व राउंड में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
छात्रों की इस स्वर्णिम उपलब्धि पर विद्यालय के चेयरमैन ब्रह्म स्वरुप ब्रहमचारी महाराज ने छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विद्यालय के प्रधानाचार्य शिव सहगल ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि कोरोना काल में भी छात्र-छात्राओं ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए निरंतर अभ्यास किया। छात्रों के अभिभावकों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने कोच पवन सैनी व मैनेजर आकांक्षा वर्मा व विद्यालय के खेल विभाग का भी आभार व्यक्त किया।

आवास विकास विद्या मंदिर में आयोजित हुआ मातृशक्ति सम्मेलन

आवास विकास स्थित विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के विवेकानंद योग सभागार में आज मातृशक्ति सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय, गीता चंदोला (योग शिक्षिका), मनदीप कौर कार्यक्रम अध्यक्षा एवं मीरा रतूड़ी ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं द्वारा स्वागत गीत गायन कर मातृशक्ति का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मीरा रतूड़ी ने अपने सम्बोधन में कहा कि बच्चों को व्यवहारिक शिक्षा देनी है, तो उसके लिए घर ही हमारी प्रथम पाठशाला होती है, उसके लिए हमें सभी माताओं को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देना होगा। जिसके लिए विद्या मंदिर भी हमारे पाल्य के लिए पूर्ण प्रयासरत है। लेकिन हमें भी अपने पाल्य को संस्कारित बनाने के लिए उसकी कार्यशैली को समझना होगा।
कार्यक्रम में छात्रा महक व साक्षी बर्थवाल ने हमारी लोक संस्कृति पर गीत गाकर सुनाया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद पांडे ने सभी माताओ का आभार प्रकट करते हुए कहा कि बच्चों के शिक्षण व सर्वांगीण विकास में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है, कोई भी पौधे को सीचने के लिए जिस प्रकार से शुद्ध वातावरण की आवश्यकता होती है उसी प्रकार से बच्चों में नैतिक मूल्यों के सिद्धांतों की नीव मातृशक्ति द्वारा ही रखी जाती है, इसलिये अपने पाल्य के लिए आप सब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, आप सभी बधाई की पात्र है।
मीनाक्षी उनियाल के चले कार्यक्रम संचालन में आरती बडोनी, अनिल भंडारी, सतीश चौहान, कर्णपाल बिष्ट, नरेन्द्र खुराना एवं लगभग 95 मातृशक्ति उपस्थित रहे।

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं-चारु माथुर कोठारी

इनर व्हील क्लब ऋषिकेश ने आज आवास विकास कॉलोनी, ऋषिकेश स्थित स्वामी नित्यानंद सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए 30 कुर्सियों का वितरण किया।
इस दौरान क्लब की अध्यक्ष चारू माथुर कोठारी ने कहा सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में गुणवत्ता परक एवं संस्कारित शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिए। बच्चें ही हमारा भविष्य है। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चें समाज के सभी वर्गो से आते है। ऐसे में दन बच्चों की मदद करने से बड़ा कार्य कोई हो ही नही सकता है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को साधुवाद देते हुए कहा कि आगे भी विद्यालय के बच्चों के लिए क्लब की ओर से हर संभव मदद की जाएगी।
इस मौके पर सुशीला राणा, वीना शर्मा, स्नेह जैन, वर्षा खन्ना, मीनाक्षी, प्रधानाचार्य राजेंद्र पांडे, प्रधानाचार्य पूनम, रोमा सहगल आदि उपस्थित रहे।