सरकार के प्रयास से हर वर्ग को मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्यामपुर, ऋषिकेश में विश्व बैंक पोषित अर्द्धनगरीय क्षेत्रों हेतु उत्तराखण्ड पेयजल कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रतीत नगर हेतु 25 करोड़ 65 लाख एवं खड़कमाफी हेतु 13 करोड़ 36 लाख रूपये की पेयजल योजनाओं का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर श्रीदेव सुमन डिग्री कॉलेज के ऋषिकेश कैंपस हेतु शिक्षा शास्त्र, समाज शास्त्र एवं गृह विज्ञान की कक्षाएं संचालित करने व चार वर्षीय बी.एड के कोर्स के लिए सहमति दी। उन्होंने कहा कि इस कॉलेज की चारदीवारी की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋषिकेश क्षेत्र की जिन विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया गया हैं उनका परीक्षण कर समाधान करने का हर सम्भव प्रयास किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पेयजल योजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश क्षेत्र की जनता को प्रतिदिन 16 घण्टे पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि समाज के हर वर्ग को सरकार की विभिन्न योजनाओं का फायदा मिले। राज्य सरकार द्वारा किसानों को बिना ब्याज के एक लाख तक एवं स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रूपये तक का ऋण दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 58 ग्रोथ सेंटर की स्वीकृति दी जा चुकी है, 40 ग्रोथ सेंटरों की जल्द स्वीकृति प्रदान की जायेगी। राज्य के सभी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 05 लाख रूपये तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अभी तक 70 हजार से अधिक लोग इस योजना का फायदा ले चुके हैं।
मुख्यमंत्री कहा कि अर्द्धनगरीय क्षेत्रों के लिए राज्य में पेयजल की कुल 970 करोड़ रूपये की योजना पर कार्य किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत राज्य को सात पुरस्कार मिले। उत्तराखण्ड को कुपोषण मुक्त करने के लिए कुपोषित बच्चों को गोद लिया गया है। इन बच्चों की निरन्तर निगरानी की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश में अन्तरराष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर खोला जा रहा है। इस सेंटर में राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर की गोष्ठियां आयोजित की जायेगी। इससे स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल ने कहा कि पिछले दो सालों में ऋषिकेश विधानसभा में सड़क, विद्युत, सीवरेज, घाटों के सौन्दर्यीकरण, नमामि गंगे के तहत अनेक कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में ऋषिकेश विधानसभा में लगभग 25 करोड़ रूपये की सड़कों का कार्य हुआ, विद्युत विभाग के अन्तर्गत 65 ट्रांसफार्मर लगे, 175 कि.मी की बंचिंग केबल लगाई जा रही है। नमामि गंगे के अन्तर्गत 158 करोड़ की लागत के सीवरेज का कार्य चल रहा है। त्रिवेणी घाट के सौन्दर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है।
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि ऋषिकेश में उच्च शिक्षा के लिए श्रीदेव सुमन का कैंपस खुलने से अब यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एडमिशन में दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित को देखते हुए ग्रेजुएशन स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम को खत्म किया गया है। ऋषिकेश के डिग्री कॉलेज के लिए मुख्यमंत्री ने 6.5 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।
इस अवसर पर मेयर अनीता मंमगाई, सचिव पेयजल अरविन्द सिंह ह्यांकी आदि उपस्थित थे।

जीरों बजट वाली घोषणाएं अविलंब पूरी होंगीः त्रिवेन्द्र

उत्तराखण्ड को पूर्ण साक्षर बनाने के लिए मिशन मोड में काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एक निश्चित समयावधि में पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नियोजित तरीके से काम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत सचिवालय स्थित विश्वकर्मा भवन के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में सीएम घोषणाओं की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घोषणा के क्रियान्वयन के हर स्तर के लिए टाईम फ्रेम तय किया जाए। जीरो बजट वाली घोषणाएं अविलम्ब पूरी हों। जिन मामलों में भूमि संबंधी दिक्कतें आ रही हैं, उनमें स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी में तहसील निर्माण में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नागरिक उड्डयन विभाग प्रदेश में जहां भी हैलीपैड बनाए जा सकते हैं, आवश्यकतानुसार स्थान चिन्हित कर लें। खेल विभाग प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बनाए जाने वाले खेल स्टेडियमों की आवश्यक प्रक्रियाओं में तेजी लाए। मुनि की रेती में ईको पार्क की डीपीआर जल्द से जल्द तैयार कर ली जाए। सतपुली से दिल्ली बस सेवा को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। कोसी-बेराज क्षेत्र में साहसिक पर्यटन और मुन्स्यारी को पर्यटन डेस्टीनेशन व रांसी को पर्यटन ग्राम के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। यमुनोत्री में रोपवे निर्माण के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाए।

कृषि विभाग द्वारा बताया गया कि उत्तराखण्ड को जैविक राज्य बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। 3900 क्लस्टर चयनित किए जा चुके हैं। मुन्स्यारी को कृषि जैविक हब के रूप में विकसित करने के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। दारमा व व्यास घाटी में स्थानीय जैविक उत्पादों की खरीद के लिए संग्रहण केंद्र बनाया जाना है।

गृह विभाग ने जानकारी दी कि हरिद्वार में सीसीटीवी कैमरे आगामी कुम्भ मेले के अंतर्गत लगाए जाएंगे। खेल विभाग ने बताया कि स्टेडियमों व मिनी स्टेडियमों के निर्माण के लिए अधिकांश स्थानों पर भूमि चयनित कर ली गई है। गैरसैंण में 200 मीटर टैªक बनाया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग ने बताया कि राज्य में स्थित कॉलेजों में ई-लाईब्रेरी स्थापित करने के लिए एक समिति बनाई गई थी जिसने कि अपनी रिपोर्ट दे दी है। 10 कॉलेजों में आवश्यक उपकरण दे दिए गए हैं। अन्य के लिए भी कार्यवही की जा रही है। विद्यालयी शिक्षा विभाग में विभिन्न इंटर कॉलेजों में अतिरिक्त कक्षा-कक्षों, प्रयोगशाला आदि के निर्माण के प्रस्ताव नाबार्ड से स्वीकृत हो गए हैं। जीआईसी गैरसैण में प्रेक्षागृह की वित्तीय स्वीकृति हो चुकी है। सैनिक स्कूल घोड़ाखाल को राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष दी जाने वाली अनुदान राशि के लिए 5 करोड़ रूपए का प्राविधान कर दिया गया है।

नौजवान होंगे दक्ष तो समाज की उत्पादकता में होगी बढ़ोत्तरीः बेबी रानी मौर्य

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने शिक्षक दिवस पर कहा कि आधुनिकीकरण के कारण आज समाज की अपेक्षाएं तेजी से बढ़ रही हैं। विद्यार्थियों पर परीक्षाओं में सफल ही नहीं अच्छे ग्रेड से सफल होने का निरन्तर दवाब रहता है। आज शिक्षा में नवाचार सम्मिलित किये जा रहे हैं। मेरी प्रदेश के शिक्षकों से अपील है कि विद्यार्थियों को विषय ज्ञान देने के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान, वैज्ञानिक ज्ञान व दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता करें। समय की मांग है कि व्यक्ति मात्र शिक्षित ही न हो अपितु दक्ष भी हो। राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री द्वारा भी स्किल इंडिया पर बल दिया जा रहा है।

हमारे नौजवान यदि दक्ष होंगे तो समाज की उत्पादकता स्वतः ही बढ़ जाएगी। वे नए-नए उत्पादो पर शोध करेंगे तथा नए-नए उद्यम लगाएंगे व देश की प्रगति में तेजी से अपना योगदान देंगे।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश की श्रेष्ठ अकादमिक संस्थाओं से भी अनुरोध है कि वे सूचना तकनीक का प्रयोग बच्चों को अधिक जानकारी देने व उनकी जिज्ञासा को दूर करने के लिये करें। इन्टरनेट, नॉलेज कमीशन, ऑनलाइन सुविधाओं का भी भरपूर सहयोग लिया जाय। उन्होंने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब राज्य के सभी स्कूलों में खोली जाए। राज्यपाल ने गुरूवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन में राज्य के उत्कृष्ट शिक्षकों को ‘‘गवर्नर्स टीचर्स अवार्ड 2019’’ से सम्मानित किया।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 एस0 राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये राज्यपाल ने कहा कि डॉ0 राधाकृष्णन शिक्षकों को भविष्य का शिल्पकार मानते थे। उनका मानना था कि सभी बुराईयों का अन्त शिक्षा के प्रसार से ही हो सकता है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा कार्य हो रहा है। सरकार का प्रयास है कि शिक्षा में सुधार हेतु सरकारी तंत्र के साथ सामाजिक सहयोग लिया जाय। राज्य सरकार ‘‘देश को जानों’’ योजना आरम्भ करने जा रही है जिसके तहत 25 उत्कृष्ट छात्र-छात्राओं को एक सप्ताह तक भारत-भ्रमण करवाया जायेगा। राज्य सरकार छः करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय बनाने जा रहा है जिसमें निर्धन मेधावी बच्चों के लिये खोला जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को सामूहिक दायित्व की ओर प्रोत्साहित करना होगा।

इन शिक्षकों का हुआ सम्मान
ऋषिकेश। राज्यपाल मौर्य ने माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत ‘गवर्नर्स टीचर्स अवार्ड 2019’ से रा0बा0इ0का0स्याल्दे, अल्मोड़ा से गीता रानी, प्रवक्ता, रा0इ0का0सिरकोट, गरूड़, बागेश्वर से पूरन सिंह, प्रवक्ता, रा0इ0का0पाण्डुकेश्वर, जोशीमठ, चमोली से नरेन्द्र कुमार बहुगुणा, प्रवक्ता, रा0इ0का0मडलक, चम्पावत से दयाकृष्ण जोशी, स0अ0, रा0इ0का0क्वानू, देहरादून से संजय कुमार, प्रवक्ता, रा0क0उ0मा0वि0 मानकचौक मंगलौर, हरिद्वार से पुष्पांजली अग्रवाल, स0अ0, रा0आ0इ0का0 कोटाबाग, नैनीताल से डॉ0 भवतोष भट्ट, प्रवक्ता, रा0क0इ0का0श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल से सरिता उनियाल, प्रवक्ता, रा0इ0का0थरकोट, विण, पिथौरागढ़ से भाष्करानन्द जोशी, प्रवक्ता, रा0इ0का0क्यंूजा, रूद्रप्रयाग से विजय बैरवाण, प्रवक्ता, रा0इ0का0मंजाकोट चौरास, टिहरी गढ़वाल से डॉ0 अशोक बड़ोनी, प्रवक्ता, रा0इ0का0बौन पंजियाला, उत्तरकाशी से दिवाकर प्रसाद पैन्यूली, प्रवक्ता, रा0उ0मा0वि0मोहम्मदपुर भुडिया, यूएस नगर से प्रकाश चन्द्र पाठक, स0अ0 को सम्मानित किया।
राज्यपाल ने प्रारम्भिक शिक्षा के अन्तर्गत ‘गवर्नर्स टीचर्स अवार्ड 2019’ से रा0आ0जू0हा0महतगांव अल्मोड़ा से पंकज कुमार पंत, स0अ0, रा0क0जू0हा0गन्यूड़ा, गरूड़, बागेश्वर से निर्मला आर्या, स0अ0, रा0प्रा0वि0निजमूला,दशोली, जोशीमठ, चमोली से सुमित्रा फरस्वाण, प्र0अ0, रा0प्रा0वि0 गड्यूड़ा नवीन पाटी, चम्पावत से शंकर सिंह अधिकारी, स0अ0, रा0 प्रा0वि0पौंधा, सहसपुर, देहरादून से अर्चना नौटियाल, स0अ0, रा0उ0प्रा0वि0 तल्ली पाली, नैनीताल से गणेश दत्त, स0अ0, रा0पू0मा0वि0मुस्याखांद, नैनीडांडा, पौड़ी गढ़वाल से गबर सिंह, स0अ0, रा0प्रा0वि0सलकोट, विण, पिथौरागढ़ से अजरा जुनैद, प्र0अ0, रा0प्रा0वि0 बैनोली, रूद्रप्रयाग से अंजू लिंगवाल, प्र0अ0, रा0प्रा0वि0नागराजाधार कड़ाकोट, टिहरी गढ़वाल से गीता कठैत, प्र0अ0, रा0उ0प्रा0वि0 सुनाली, पुरोला, उत्तरकाशी से चन्द्रभूषण बिजल्वाण, स0अ0, रा0प्रा0वि0जसपुर खुर्द, काशीपुर, ऊ0सि0नगर से नमिता पंत, स0अ0 को सम्मानित किया।

राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने संस्कृत विद्यालयों के अन्तर्गत ‘गवर्नर्स टीचर्स अवार्ड 2019’ से रघुनाथ कीर्ति आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, देवप्रयाग, पौडी से डॉ0 शैलेन्द्र नारायण कोटियाल, श्री वेद संस्कृत महाविद्यालय ऋषिकेश, देहरादून से कृष्ण प्रसाद उनियाल, सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय, रेलवे बाजार हल्द्वानी नैनीताल से डॉ0 नवीन चन्द्र बेजवाल, राजकीय संस्कृत विद्यालय, सौडू, टिहरी गढ़वाल से पंकज कुमार, श्री गरीबदासीय साधु संस्कृत महाविद्यालय, जगजीतपुर कनखल, हरिद्वार से डॉ0 गोपाल राम को सम्मानित किया।

जो काम पिछली सरकार ने नहीं किए, वह टीएसआर सरकार ने कर दिखाया

उत्तराखण्ड में कुपोषण से मुक्ति के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर बड़ी पहल की गई है। मंगलवार को पोषण अभियान 2019 के अंतर्गत ‘‘कुपोषण मुक्ति हेतु गोद अभियान’’ की शुरूआत हुई। इसमें प्रदेश में चिन्हित 1600 अति कुपोषित बच्चों को मुख्यमंत्री, मंत्रिगणों, विधायकों, अधिकारियों, उद्योगपतियों व अन्य समाजसेवियों द्वारा गोद लिया जाएगा।

शुभारम्भ कार्यक्रम में 20 अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया गया
सीएम आवास में अभियान के शुभारम्भ के अवसर पर 20 बच्चों को गोद लिया गया। सीएम ने स्वयं योगिता पुत्री रेखा, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने अनिषा पुत्री गुड़िया, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने निहारिका पुत्री सीमा, विधायक गणेश जोशी ने भूमिका, मेयर सुनील उनियाल गामा ने निहारिका पुत्री प्रियंका, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने नैंसी पुत्री अतर सिंह, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने विनायक पुत्र शीतल, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन ने आयुष पुत्र राजेश्वरी, सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख ने आन्या, आरके सुधांशु ने अरहम, नीतेश झा ने नैना, शैलेश बगोली ने उमर, सौजन्या ने अभिषेक, हरबंस सिंह चुघ ने राज, अरविंद सिंह ह्यांकि ने हमजा, पंकज पाण्डे ने शुभान, विनोद प्रसाद रतूड़ी ने जोया, बीएस मनराल ने प्रियांशु, बीके संत ने शौर्य व एचसी सेमवाल ने दिव्यांशी को गोद लेकर उन्हें कुपोषण से मुक्त करने की जिम्मेदारी ली है। समाजसेवी व उद्योगपति राकेश ऑबेराय ने अपनी संस्थाओं के माध्यम से 100 कुपोषित बच्चों को गोद लेने की बात कही।

समाज की शक्ति को पहचाना होगाः टीएसआर
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि हमें समाज की शक्ति को पहचानना चाहिए। किसी भी समस्या का हल समाज की भागीदारी से हो सकता है। हमारे पूर्वजों ने समाज की ताकत को पहचाना था। हमें भी यह देखना होगा कि कैसे समाज की शक्ति का उपयोग किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक पौधरोपण अभियान चलाए गए थे। इसमें समाज के सभी लोगों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। कोई भी समस्या दूर की जा सकती है अगर सही तरीके से नियोजन किया जाए, समाज को इसमें जोड़ा जाए और उसे पर्सनल टच दिया जाए। मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों व समाज का सहयोग लेकर बालिका लिंगानुपात में काफी सुधार आया है।

प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं का हिमोग्लोबिन टेस्ट कराया जाएगा
उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं का हिमोग्लोबिन टेस्ट कराया जाएगा। वर्ष 2022 तक प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को पक्का भवन युक्त किया जाएगा। प्रत्येक राशनकार्ड पर 2 किग्रा दाल उपलब्ध कराई जाएगी।

मां स्वस्थ तो बच्चा भी स्वस्थ
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन बच्चों को गोद लिया जा रहा है, उनका नियमित रूप से पूरा ध्यान रखना जरूरी है। उनके माता पिता के सम्पर्क रहना होगा। बच्चे क्या खा रहे हैं, कैसे खा रहे हैं, हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देना होगा। पहला सहयोग बच्चे की मां का चाहिए। अगर मां को पोषण मिले, मां का स्वास्थ्य ठीक हो तो बच्चे का पोषण और स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को कुपोषण से मुक्ति की शपथ भी दिलाई।

राज्य वन्य जीव बोर्ड की 13वीं बैठक में वन संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव बोर्ड की 13वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। इस अवसर पर वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत भी उपस्थित थे। बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने वनों के प्रबन्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित किये जाने पर बल देते हुए कहा कि वनों के संरक्षण के साथ ही ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित न हो इसके लिये प्रभावी पहल होनी चाहिए।

बैठक में मानव वन्य जीव संघर्ष से ग्रसित गांवों में वालेण्टरी विलेज प्रोटेक्शन फोर्स के गठन, संरक्षित क्षेत्रों के अन्दर व निकटस्थ गांवों में इको डेवलपमेंट कार्यक्रम को पंचायतों के माध्यम से संचालित कराये जाने, राज्य मे कस्तुरी मृग व राज्य पक्षी मोनाल के संरक्षण, मत्स्य संरक्षण एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एंगलिंग की अनुमति प्रदान करने के साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व व राजाजी टाइगर रिजर्व में मानव वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिए बाघो व जंगली हाथियों की जनसंख्या प्रबन्धन व धारण क्षमता के आकलन के लिये दीर्घ कालीन शोध व नीति निर्धारण पर सहमति प्रदान की गई।

बैठक में नन्दौर एवं सुरई को क्षेत्रीय जनता की मांग के दृष्टिगत बफर जोन न बनाये जाने का भी निर्णय लिया गया। लालढ़ांग-चिल्लरखाल सड़क के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। अब यह प्रस्ताव नेशनल वाईल्ड लाईफ बोर्ड को भेजा जाएगा। नेशनल पार्क व बफर जोन में वर्षों पूर्व स्थापित स्कूलों आदि में सौर उर्जा एवं शौचालयों के निर्माण के लिए कंजरवेटर को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया। इसके अतिरिक्त बैठक में विभिन्न सड़को के 16 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

बैठक में कंडी मार्ग के सम्बन्ध में इसके सभी पहुलओं पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण के माध्यम से व्यापक चर्चा की गई। इस सम्बन्ध में व्यापक विचार विमर्श के पश्चात् शासन द्वारा इस पर व्यवहारिकता के दृष्टिगत नीतिगत निर्णय किए जाने की भी सहमति बनी।

’’शगुन’’ से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में आयेगा बड़ा सुधारः निशंक

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र को मजबूती देने के मकसद से विश्व के सबसे बड़े ऑनलाइन जंक्शनों में शामिल एकीकृत ऑनलाइन जंक्शन ‘स्कूल एजुकेशन शगुन’ का शुभारंभ नई दिल्ली में किया। इस ऑनलाइन जंक्शन के जरिए स्कूली शिक्षा से जुड़े सभी ऑनलाइन पोर्टल्स और वेबसाइट को जोड़ने की पहल की गई है। इस मौके पर मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री संजय शामराव धोत्रे भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा कि बेहतर शिक्षा के बिना किसी राष्ट्र, समाज या परिवार की उन्नति नहीं हो सकती। शिक्षा तरक्की की नींव है और नींव जितनी मजबूत होगी, इमारत उतनी ज्यादा बेहतर होगी। ‘स्कूल एजुकेशन शगुन’ एक ऐसा ही प्लैटफॉर्म है, जिसके जरिए शिक्षा की नींव को मजबूती मिलेगी। ‘शगुन’ में श शब्द का आशय शाला से है, जिसका मतलब स्कूल से है और गुन से गुणवत्ता को दर्शाया गया है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि 1200 केंद्रीय विद्यालयों, 600 नवोदय विद्यालयों, सीबीएससी से जुड़े 18000 स्कूलों, 30 एससीईआरटी और एनसीटीई से जुड़े 19000 संस्थानों की वेबसाइट्स को ‘स्कूल एजुकेशन शगुन’ पोर्टल से जोड़ा गया है। इस ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के जरिए 15 लाख स्कूलों, 92 लाख शिक्षकों और करीब 26 करोड़ विद्यार्थियों की जानकारी ली जा सकती है। इसके जरिए योजनाओं की जानकारी लेने के साथ ही लोगों को स्कूलों से जुड़ी नई सूचनाएं भी मिलेंगी।

पोखरियाल ने कहा कि हम चाहते हैं कि किसी के मन में कोई सवाल है, तो वह सवाल हम तक पहुंच सके। इस एकीकृत ऑनलाइन जंक्शन के जरिए लोग स्कूल के बारे में अपनी प्रतिक्रिया हम तक पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा से जुड़े समस्त आंकड़े एक जगह से प्राप्त कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस नए भारत की कल्पना की है, जिसमें उन्होंने हमेशा कहा कि शिक्षा में तकनीक का बेहतर इस्तेमाल होना चाहिए। उसी दिशा में ‘स्कूल एजुकेशन शगुन’ स्कूली शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगा।
‘स्कूल एजुकेशन शगुन’ के जरिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ने के लिए सामग्री मिलेगी, साथ ही उन्हें वीडियो आधारित शिक्षा का अवसर भी मिलेगा। वेबसाइट के जरिए यह भी जाना जा सकता है कि आपके क्षेत्र में कौन-कौन से स्कूल हैं और वह क्या-क्या सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री श्री पोखरियाल ने ‘एकीकृत राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा निधि’ (INSET) बनाने की भी घोषणा की, जिसके जरिए विद्यार्थियों, शिक्षकों ओर स्कूलों से जुड़ी तमाम सूचनाएं एक मंच से मिल सकेंगी।
कार्यक्रम में मौजूद मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री संजय शामराव धोत्रे ने कहा कि ‘स्कूल एजुकेशन शगुन’ के जरिए स्कूलों से जुड़ी समस्त जानकारी एक साथ मिल सकेगी। स्कूलों की सुविधाओं के बारे में जानने के साथ ही उन्हें जांच कर उन पर अपने सुझाव भी दिए जा सकेंगे। धोत्रे ने कहा कि यह बहुत ही अच्छा कदम है, इससे बच्चों के सम्पूर्ण विकास में और मदद मिलेगी। इस मौके पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा विभाग की सचिव रीना रे समेत मंत्रालय के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
शगुन पोर्टल को इस लिंक पर क्लिक करके देखा जा सकता है : http://seshagun.gov.in

आदेश जारी, बायोमेट्रिक और प्रति सेमेस्टर में 75 फीसद उपस्थिति अनिवार्य

10 जुलाई को जारी पब्लिक नोटिस के बाद राज्य में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने अपने सभी 24 निजी और आठ सरकारी सेल्फ फाइनेंस बीएड कॉलेजों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत ने बताया कि विवि से संबद्ध बीएड और एमएड संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि चालू शिक्षा सत्र से बायोमेट्रिक उपस्थिति शुरू कर इसकी रिपोर्ट विवि को प्रेषित करना सुनिश्चित करें। उधर, डीएवी पीजी कॉलेज में भी चालू शिक्षा सत्र से बीएड के विद्यार्थियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय सक्सेना ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के कड़े नियमों के बाद शासन के निर्देशानुसार कॉलेज के बीएड विभाग के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन बायोमेट्रिक उपस्थिति और प्रति सेमेस्टर में 75 फीसद उपस्थिति अनिवार्य होगी। जिसके लिए इसी सत्र से बीएड बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होने जा रही है। उन्होंने बताया कि कॉलेज के विधि संकाय में भी बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से लागू कर दी गई है। मॉनिटरिंग कमेटी गठित एनसीटीई ने इसके लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया है, जो समय-समय बीएड कॉलेजों से छात्रों और शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति का ब्योरा तलब करेगी। प्रतिवर्ष दस हजार छात्र करते हैं बीएड प्रदेश के सरकारी सेल्फ फाइनेंस और निजी बीएड कॉलेजों की संख्या 112 है। जिसमें प्रतिवर्ष 10100 छात्र-छात्राएं दो वर्षीय पाठ्यक्रम के प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेते हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने सभी बीएड कॉलेज को 10 अगस्त तक बायोमेट्रिक उपस्थिति की स्टेटस रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे।
श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत का कहना है कि नियमों की अनदेखी और लापरवाही बरतने वाले संस्थानों की सेक्शन 17 ऑफ द एनसीटीई एक्ट 1993 के अनुसार मान्यता तक समाप्त की जा सकती है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों का शत फीसद पालन किया जा रहा है। विवि से संबद्ध निजी और सेल्फ फाइनेंस बीएड कॉलेजों में इसी सत्र से बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से शुरू करने को लेकर निर्देशित किया गया है। यह मानव संसाधन विकास मंत्रालय की सार्थक पहल है।
वहीं, डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि डीएवी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद और शासन के निर्देशानुसार चालू सत्र से बीएड के साथ-साथ विधि संकाय में भी बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रारंभ कर दी गई है। इसका पालन करना अनिवार्य है। जिस छात्र की एक सेमेस्टर में उपस्थिति 75 फीसद से कम रही उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा।

छात्रों को अब प्रवेश में नही आयेगी दिक्कत, सरकार ने बढ़ाई सीटें

सरकारी महाविद्यालयों में प्रवेश को लेकर अकसर मारामारी रहती है। इससे परेशान छात्र-छात्राओं को उत्तराखंड सरकार ने बड़ी राहत प्रदान की है। प्रदेश के 17 राजकीय महाविद्यालयों में 10 फीसद सीटें बढ़ाने को सरकार ने हरी झंडी दे दी। इस संबंध में उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिए है।
सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फीसद आरक्षण देने के चलते राज्य के सभी 105 महाविद्यालयों में 10 फीसद सीटें नहीं बढ़ाई हैं। बीते 19 अगस्त को विधानसभा में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ धन सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई विभागीय बैठक में उन महाविद्यालयों को चिह्नित किया गया, जहां प्रवेश को लेकर अधिक दबाव था। कॉलेजों में आवश्यकता को देखते हुए ही 10 फीसद कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित सीटों को बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। यह भी बताया गया कि हर कॉलेज में दाखिले को लेकर मारामारी की स्थिति नहीं है। साथ ही कुलपति और शिक्षा निदेशक की सहमति के बाद अतिरिक्त सीट की वृद्धि की छूट देने का निर्णय भी लिया गया। इससे पहले प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक ने बीती 17 अगस्त को इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेजा था।
अब शासनादेश जारी कर 17 कॉलेजों में गोपेश्वर, लोहाघाट, टनकपुर, पाटी, चंपावत, गंगोलीहाट, पिथौरागढ़, गरुड़, बागेश्वर, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, खटीमा, बाजपुर, रामनगर, मंगलौर, ऋषिकेश में 10 फीसद सीटें बढ़ाई गई हैं। उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव आनंद बर्द्धन का कहना है कि उक्त कॉलेज 10 फीसद से अधिक सीट वृद्धि चाहते हैं तो उच्च शिक्षा निदेशक और संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति से सामंजस्य स्थापित कर और उनकी सहमति से अधिकतम 20 फीसद सीमा तक सीटों में इजाफा कर सकेंगे।

उत्तराखंड में कौशल विकास से मिलेंगे रोजगार के अवसर
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थान व विश्वविद्यालयों में कौशल विकास (स्किल्ड डेवलपमेंट) केंद्र खोलने के प्रति सरकार गंभीर है, ताकि हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। केंद्र सरकार ने कौशल विकास के लिए अलग मंत्रालय खोला है, जिसका उत्तराखंड अधिक से अधिक लाभ अर्जित करेगा। यह बात उन्होंने उत्तराखंड तकनीकी विवि (यूटीयू) में कौशल विकास पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर कही।
यूटीयू में टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टीईक्यूआइपी-3) के अंतर्गत देश के युवाओं के कौशल को रणनीति एवं अभ्यास से बदलना विषय पर यह राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश और देश ही नहीं वैश्विक स्तर पर कौशल विकास कितना महत्वपूर्ण है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में केंद्र में कौशल विकास मंत्रालय का गठन किया। इसका लाभ देशभर के राज्यों के लाखों युवाओं को मिल रहा है। कौशल विकास विवि, डिग्री कॉलेज, पॉलीटेक्निक, आइटीआइ, जिला व ब्लॉक स्तर पर गठित कौशल विकास केंद्र पर संचालित किया जा रहा है। जिसमें दर्जनों तकनीकी विषयों में युवाओं को पुस्तक अध्ययन के अलावा ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसके बाद हजारों युवा सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अब वैदिक शिक्षा बोर्ड से पढ़ाई करते नजर आएंगे बच्चे, अगले सत्र से लागू

देश का पहला वैदिक शिक्षा बोर्ड तैयार हो चुका हैं। इसके लिए पाठ्यक्रम भी बनकर तैयार हो चुका हैं। योग गुरू बाबा रामदेव वैदिक शिक्षा बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष रहेंगे। अगले वर्ष से यह बोर्ड लागू किया जाएगा। यह बोर्ड सीबीएसई की तर्ज पर होगा।

बोर्ड से जुड़े विद्यालयों में प्राच्य और आधुनिक शिक्षा समान रूप से दी जाएगी। बाबा रामदेव पहले ही प्राचीन और अर्वाचीन शिक्षा पद्धति देने के लिए आठवीं कक्षा तक के लिए आचार्यकुलम की स्थापना कर चुके हैं।

पहले योजना थी कि इसी आचार्यकुलम को बड़ी कक्षाओं तक आगे बढ़ाया जाएगा। बाद में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने देश के अनेक शिक्षाविदों के साथ बैठक कर भारतीय वैदिक शिक्षा बोर्ड का ढांचा तैयार किया।

इस बोर्ड का मुख्यालय फिलहाल पतंजलि योगपीठ में चल रहा है। शीघ्र ही इस बोर्ड का कार्य संचालन देश की राजधानी दिल्ली से किया जाएगा। वैदिक शिक्षा बोर्ड देश का एकमात्र ऐसा बोर्ड होगा, जो अपने से जुड़े विद्यालयों में वेदों की शिक्षा भी देगा।

साथ ही धनुर विद्या जैसे अनेक प्राचीन अवमान बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं। इस समय सीबीएसई बोर्ड द्वारा संचालित जितने भी पाठ्यक्रम मान्य हैं, वे सभी विषय वैदिक शिक्षा बोर्ड में समाहित कर लिए जाएंगे।

पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि देश का पहला बोर्ड अब पूर्णरूप से कार्य करने के लिए तैयार है। प्राचीन शिक्षा के जो विषय जोड़े जाएंगे, उनका पाठ्यक्रम बन चुका है।

विश्वास दिलाया कि इस बोर्ड की शिक्षा पद्धति से निकले छात्र विश्व स्तर की किसी भी शैक्षणिक प्रतियोगिता में भाग लेने के अधिकारी बनेंगे। वैदिक शिक्षा बोर्ड के छात्र इंटर के बाद जिस भी क्षेत्र में जाना चाहेंगे उन्हें प्रवेश हासिल होगा।

इंद्रमणि बडोनी चौक का मेयर अनिता ने किया शुभारंभ

रविवार से ऋषिकेश का सबसे बड़ा नटराज चौक अब इंद्रमणि बडोनी चौक नाम से इतिहास के पन्ने में दर्ज हो गया। मेयर अनिता ममगाईं ने इसे नगर निगम के अभिलेख में भी दर्ज करा लिया।
मेयर अनिता ममगाईं सहित क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल दमाउ की थाप के बीच वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत रूप से स्व. इंद्रमणि बडोनी की 10 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया।

हालांकि इससे पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों से प्रतिमा का अनावरण किया जाना था, लेकिन किन्हीं कारणों से वह नहीं पहुंच सके। कार्यक्रम के लिए तेज बारिश में भी लोगों में गजब का उत्साह बना रहा। इसके बाद नटराज होटल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि तीर्थनगरी के इस चौक का राज्य आंदोलन अपना स्थान रहा है। स्व. इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा के लिए इससे उपयुक्त स्थान न होता।