हाईवे पार करते समय हाथी का बच्चा ट्रक से टकराया, घायल

लच्छीवाला वन रेंज के क्षेत्रांतर्गत एक हाथी का बच्चा हाईवे पार करते समय ट्रक से जा टकराया। इस कारण वह घायल हो गया। वन विभाग के कर्मचारियों ने क्रेन की मदद से उसे उठाया। जहां से उसे लच्छीवाला रेंज लाया गया। प्राथमिक उपचार देकर उसे हरिद्वार छोड़ दिया गया।

एक ट्रक देहरादून के सेलाकुई से मुंबई के भिवंडी जा रहा था। मणिमाई मंदिर के नजदीक जंगल से हाईवे क्रॉस कर रहा हाथी का बच्चा ट्रक से टकरा गया, जबकि उसकी मां सड़क क्रॉस कर गई थी। दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेंज अधिकारी घनानंद उनियाल फॉरेस्टर मुनेंद्र डंगवाल आदि टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इस बीच कोतवाल राकेश सिंह गुसाईं भी घटना की जानकारी मिलते मौके पर पहुंचे। हाईवे से जाम को भी खुलवाया गया। जंगल में हाथियों की चिंघाड़ भी जारी रही। हाथियों को जंगल में खदेडने के लिए वन विभाग को हवाई फायर भी करने पड़े।

क्रेन की मदद से घायल हाथी के बच्चे को लच्छीवाला वन परिसर में लाया गया। पशु चिकित्सकों के अनुसार इस हाथी के बच्चे की उम्र लगभग 3 से 5 साल के बीच है। पोर्टेबल एक्स-रे मशीन मंगवाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल हालत स्थिर बनी हुई है।

रेंज अधिकारी घनानंद उनियाल के अनुसार ट्रक चालक व क्लीनर को वाहन सहित हिरासत में ले लिया गया है। ट्रक चालक के अनुसार हाईवे में अचानक रात के समय डिवाइडर से जंप करके हाथी का बच्चा अचानक सामने आ गया था। ट्रक के ब्रेक भी फेल हो गए थे। उधर, उप वन प्रभागीय अधिकारी भारत भूषण मार्तोलिया ने बताया कि मथुरा से पोर्टेबल एक्सरे मशीन मंगाई गई है।

शहीद की पत्नी ने ऐसे दी विदाई कि सब की आंखें भर आई

जम्मू के पुलवामा में शनिवार को आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद देहरादून निवासी मेजर विभूति शंकर ढोंडियाल का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह उनके निवास डंगवाल मार्ग पर अंतिम दर्शन को रखा गया। शहीद की पत्नी निकिता, मां, दादी और बहनों का रो-रो कर बुरा हाल। इस दौरान शहीद की पत्नी ने कहा जयहिंद। साथ ही पार्थिव शरीर को सैल्‍यूट किया। बोली आई लव यू विभू। पत्‍नी ने खुद शवयात्रा की अगुआई की। शहीद की पत्‍नी ने कहा कि जो चले गए उनसे कुछ सीखें, दुनिया में जो शहादत देते हैं, उनसे सीखना चाहिए। देश के लिए काम करने के बहुत सारे फील्ड हैं, ईमानदारी से काम करें।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व विधानसभा अद्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल समेत कई मंत्री, विधायक, सेना, शासन प्रशासन के आला अधिकारी ने शहीद को श्रद्धांजल‍ि दी। इस दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को अश्रुपूरित आंखों से अंतिम विदाई दी। कहा ये देश सदैव हमारे शहीदों का ऋणी रहेगा। सैन्य सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान हजारों का जन सैलाब उमड़ा। लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। लोग भारत माता की जय, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। शहीद विभूति अमर रहे के नारे भी लग गए। इसके बाद शहीद की अंतिम यात्रा हरिद्वार के लिए प्रस्थान कर गई।

सैन्‍य सम्‍मान के साथ किया गया अंतिम संस्‍कार

कश्मीर में शहीद उत्तराखंड के मेजर विभूति शंकर धौंडियाल का अंतिम संस्कार खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। शहीद के चाचा जगदीश प्रसाद ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के वक्त मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई। इस दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम, पाकिस्तान मुर्दाबाद, मेजर धौंडियाल अमर रहे के नारे लगते रहे। इस दौरान शहीद मेजर के ससुर एमके कॉल, साले मनीष कॉल और सुशांत कॉल, बुआ कुसुम सकलानी और रेखा बहुगुणा मौजूद रहे। इससे पूर्व बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप एंड सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर रघु श्रीनिवासन, सीडीओ विनीत तोमर, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, महापौर अनीता शर्मा, मसूरी विधायक गणेश जोशी आदि ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर सैल्यूट किया।

जहरीली शराब कांड के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा: बंसल

बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश बंसल ने आज भगवानपुर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर विगत दिनों जहरीली शराब के कारण मृत लोगो के परिजनों एवं घायलों से भेंट की। बंसल ने प्रभावित परिवारों से मिलकर आश्वासन दिया कि राज्य सरकार द्वारा इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि दोषियों को बक्शा नही जायेगा। उनके विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी। राज्य सरकार ने प्रथमदृष्टया दोषी पाये गये अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए निलंबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनशील है। श्री बंसल ने इस दौरान स्थानीय लोगो की समस्याओं को सुना और उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन भी दिया।

अब घर बैठे दर्ज कराएं निगम में शिकायत

अब नगर निगम ऋषिकेश में निवास कर रहे लोगों को अपनी शिकायत के लिए अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। नगर निगम ने इसके लिए टोल फ्री नंबर 18003135292 जारी किया। इसके लोग घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

गुरुवार को मेयर अनिता ममगाईं ने टोल फ्री नंबर जारी किया। उन्होंने बताया कि इस टोल फ्री नंबर पर निशुल्क कॉल किया जा सकेगा। इस नंबर पर कॉल करते ही पांच विकल्प कॉलर को दिए जाएंगे। इस पर कॉलर अपनी शिकायत किसी विभाग के विरुद्घ है, के चुनने का ऑप्शन बताएगा। इसके बाद कॉल को संबंधित विभाग पर ट्रांसफर कर दी जाएगी। इसके बाद समस्या का निदान करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। नई सुविधा से लैस होने के बाद प्रदेश में ऋषिकेश पहला नगर निगम हो गया है जहां टोलफ्री नंबर पर समस्याएं दर्ज करवाई जा सकेंगी।

इन अधिकारियों से कर सकेंगे शिकायत

मेयर ममगाईं ने बताया कि कॉलर अपनी ‌शिकायत निर्माण विभाग के सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर अ‌धीक्षक निशात अंसारी, पथ प्रकाश विभाग में ‌ललित नौटियाल, जन्म व मृत्यु पंजीकरण विभाग से विनोद कुमार त्यागी तथा सफाई निरीक्षक सचिन रावत से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मेयर ममगाईं ने बताया कि कॉलर टोल फ्री नंबर पर सुबह दस से शाम पांच बजे तक ही अपनी शिकायत दर्ज करा पाएगा। साथ ही कॉलर अपनी शिकायत मैसेज ड्राप बॉक्स में भी छोड़ सकेगा।

सरकार विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों को नियमित न करेः हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने 2013 की नियमितीकरण नियमावली के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुये निर्देश दिए है कि इस नियमावली के अनुसार विभागों, निगम, परिषद व अन्य सरकारी उपक्रमों में कार्यरत अस्थाई कर्मियों को नियमित न करें।

नैनीताल जिला मुख्यालय के समीपवर्ती सौड़ बगड़ गांव निवासी नरेंद्र सिंह बिष्टड्ढ व अन्य ने याचिका दायर कर कहा था कि वह इंजीनियरिंग से डिप्लोमा होल्डर हैं और सरकार के अधीन अवर अभियंता पद पर नियुक्ति पाने की पूर्ण अर्हता रखते हैं। याचिका में नरेंद्र ने 2013 की नियमितीकरण नियमावली को भी चुनौती दी है।

इसमें कहा गया है कि यह नियमावली सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी व एमएल केसरी से संबंधित मामले में दिए गए निर्णय के विपरीत है। सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को दरकिनार कर विभाग, निगम, परिषदों समेत अन्य सरकारी उपक्रमों में अस्थायी कार्मिकों को बिना चयन प्रक्रिया के नियमित कर रही है, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता भगवत सिंह मेहरा ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में उद्यान विभाग ने चाय विकास बोर्ड के अस्थायी कर्मियों को इस नियमावली के तहत नियमितीकरण की कार्रवाई आरंभ की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद नियमितीकरण नियमावली-2013 के क्रियान्वयन पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी।

ऊर्जा निगम की लापरवाही, एक माह का बिल 20 करोड़ का भेजा

ऋषिकेश में एक दुकानदार को बीस करोड़ रूपये का बिजली का बिल आया है। वह भी एक माह का ही। यह देख दुकानदार के होश उड़ गये। वहीं विभाग के अधिकारी इसको सॉफ्टवेयर की त्रुटि का हवाला दे रहे है।

गीता नगर आइडीपीएल निवासी राकेश कुमार तपोवन में एक छोटी सी दुकान पर फोटो स्टेट और साइबर कैफे का संचालन करते हैं। इस दुकान पर लगा बिजली का कनेक्शन उनके भाई देव प्रकाश के नाम पर है। शुक्रवार की सुबह राकेश कुमार के मोबाइल पर ऊर्जा निगम की ओर से एक मैसेज आया, जिसमें उनकी दुकान का एक माह का बिजली का बिल 19 करोड़ 84 लाख 59 हजार 959 रुपये बताया गया। राकेश कुमार ने कंप्यूटर खोलकर जब ऑनलाइन बिल देखा तो वास्तव में उनके नाम पर करीब 19.84 करोड़ रुपये का बिल जारी हुआ था।

बिजली के बिल की इतनी भारी-भरकम राशि देखकर राकेश के होश उड़ गए। उन्होंने बताया कि वह कई वर्षों से इसी दुकान का बिजली का बिल एक हजार से पंद्रह सौ रुपये चुकाते आ रहा हैं। राकेश ने दुकान पहुंचने के बाद मीटर की रीडिंग चेक की तो बिल में दर्ज रीडिंग भी सही थी। उन्होंने ऊर्जा निगम के मुनिकीरेती स्थित उपखंड कार्यालय में जब इस बिल के संबंध में पता किया तो अधिकारियों ने उन्हें प्रिटिंग में गड़बड़ी की बात बताई। कुछ देर बाद फिर से राकेश कुमार के मोबाइल पर 1690 रुपये का बिजली के बिल का मैसेज आया। जिसके बाद उन्होंने राहत की सांस ली।

इस संबंध में उपखंड अधिकारी मुनिकीरेती वैभव चमोली ने बताया कि हाल में ही विद्युत बिल मशीन के सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव हुआ है, जिस वजह से बिजली के बिलों में इस तरह की त्रुटियां आ रही हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के बिलों को दुरुस्त किया जा रहा है। बहरहाल, ऊर्जा निगम की ओर से जारी यह बिल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

अब देहरादून के अलावा नैनीताल में भी खुलेगा मुख्यमंत्री कार्यालय

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की बड़ी पहल पर नैनीताल में मुख्यमंत्री कार्यालय खुलने जा रहा है। इसके लिये कुमाऊं कमिश्नर राजीव रौतेला को सीएम का सचिव बनाया गया था। जो अब नैनीताल में ही सीएम स्तर की समस्याओं का निस्तारण करेंगे।

बङे पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल से मुख्यमंत्री ने शासन-प्रशासन की ओवर हीलिंग करने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी व सचिव राजीव रौतेला की तैनाती से निश्चित तौर पर सीएम सचिवालय के काम में और दक्षता आएगी। राधा रतूड़ी व राजीव रौतेला दोनों अधिकारियों की छवि आम जन के बीच ईमानदार व रिजल्ट ऑरिन्टेड अधिकारी के रूप में है। अब सीएम सचिवालय की शासन पर पकड़ और अधिक मजबूत होगी। निश्चित तौर पर दोनों अधिकारियों के अनुभव व दक्षता का लाभ मिलेगा।

युवा अधिकारी नितेश झा को गृह विभाग का जिम्मा देकर मुख्यमंत्री ने पुलिस महकमे को मजबूत करने की कोशिश की है। झा केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान गृह मंत्रालय में रहे हैं। अपनी कार्यप्रणाली से उन्होंने वहां अपना स्थान बनाया था। उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के दौरान उनके अनुभव का लाभ राज्य में पुलिस महकमे को चुस्त दुरूस्त बनाने में मिलेगा। सचिव नितेश झा ईमानदार, अनुभवी व परिश्रमी अधिकारी हैं, मुख्यमंत्री ने उन पर विश्वास जताया है। अपने विश्वासपात्र को गृह विभाग देकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था उनकी पहली प्राथमिकता है।

आबकारी विभाग राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में है। ऐसे में प्रमुख सचिव आनंद बर्द्धन को इस विभाग की कमान देकर स्पष्ट संदेश दिया गया है। आनंद वर्द्धन की छवि कर्मठ व कड़क मिजाज अधिकारी के तौर पर रही है। उम्मीद की जा रही है कि आबकारी विभाग को कसने के लिए आनंद बर्द्धन को लाया गया है। दीपेंद्र चौधरी भी ईमानदार अधिकारी के तौर पर पहचाने जाते हैं। आंनद बर्द्धन व दीपेंद्र चौधरी के पास आबकारी विभाग आने से आने वाले में समय में कई सुधार देखने को मिलेंगे।

सूची में नाम न होने से नहीं दे सकें बालिग मतदान, वहीं दो नाबालिग ने सूची में नाम होने से डाला वोट

नगर पालिका से उच्चीकृत होकर नगर निगम के पहले ही चुनाव में चुनाव आयोग की पोल खुलकर सामने आ गई। ऋषिकेश नगर निगम में पांच नाबालिगों के नाम वोटर लिस्ट में पाये गये। इनमें से दो नाबालिग ने वोट भी डाला। जबकि तीन किसी कारणवश वोट नहीं डाल सके। वहीं, कई लोगों के नाम मतदाता सूची से ही नदारद रहे।

ऋषिकेश नगर निगम के अंतर्गत आवास विकास कॉलोनी के सुनील नागपाल ने बताया कि इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर उनका नाम दर्ज है। जबकि कमीशन द्वारा की गई वोटर लिस्ट में उनका नाम ही नहीं है। जबकि इससे पूर्व के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उन्होंने वोट डाला था। उन्होंने बताया कि ऐसा सिर्फ उनके ही साथ नहीं हुआ है। बल्कि कई लोगों के साथ हुआ है। उन्होंने इसकी शिकायत इलेक्शन कमीशन को मेल के माध्यम से भेजी है।

बनखंडी वार्ड नंबर 18 के निवासी जितेन्द्र पाल पाठी के अनुसार उनके परिवार के पांच नाबालिग बच्चों को नाम वोटर लिस्ट में चढ़ा हुआ है। इन पांच नाबालिगों में से दो ने रविवार को मतदान केंद्र जाकर वोट भी डाला है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार से तानिया पुत्री इंद्रजीत उम्र 13 वर्ष, निखिल पुत्र हजमोह उम्र 10 वर्ष ने श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज जाकर मतदान किया। जबकि भविष्य पुत्र इंद्रजीत उम्र 10 वर्ष, अभय पुत्र हजमोह उम्र 10 वर्ष, तन्मय पुत्र इंद्रजीत उम्र 09 वर्ष किसी कारण वश मतदान को नहीं पहुंच सकें। जितेन्द्र ने कहा कि इन नाबालिग बच्चों के नाम वोटर लिस्ट में होने से यह बात से साफ उजागर है कि जिन कर्मचारियों की गलती से इनका नाम लिस्ट में चढ़ाया गया। वह उस समय अपने होश में नहीं होंगे। बहरहाल आयोग ने इन नाबालिगों को वोट डालने का अधिकार दिया है। तो दो ने वोट भी डाला है।

किरायेदार के सत्यापन में नहीं काटेगी पुलिस मालिक का सीधा चालान

पुलिस महानिदेशक ने सेवा का अधिकार आयोग के निर्देश के क्रम में सभी जिलों को जारी किए दिशा निर्देश के तहत अब पुलिस सत्यापन के दौरान सीधे मकान मालिक का चालान नहीं करेगी। पहले नोटिस जारी कर सत्यापना की स्थिति स्पष्ट करेगी।

देहरादून की पटेलनगर पुलिस ने सत्यापन के दौरान आइएसबीटी के पास एमडीडीए आवासीय परियोजना निवासी जनार्दन प्रसाद ध्यानी का चालान काट दिया था। जबकि उन्होंने पहले से किरायेदार का सत्यापन करा रखा था। इस कार्रवाई के विरोध में ध्यानी ने सेवा का अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। प्रकरण पर सुनवाई करते हुए आयोग के मुख्य आयुक्त आलोक कुमार जैन ने पाया कि पुलिस की लापरवाही के चलते मकान मालिक को सीजेएम कोर्ट में एक हजार रुपये खर्च करने पड़े और आर्थिक, मानसिक परेशानी से भी गुजरना पड़ा।

आयोग ने पुलिस की इस कार्रवाई पर द्वितीय अपीलीय अधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब किया था। आयोग ने पूछा था कि क्या सत्यापन के दौरान पुलिस के पास मकान मालिकों के आवेदन का विवरण नहीं रहता है। हालांकि, उनकी तरफ से चौंकाने वाला जवाब मिला कि संबंधी थाना पुलिस के लिए यह संभव नहीं है कि वह सत्यापन रजिस्टर को साथ लेकर चले। इस उत्तर को आयोग ने वाजिब नहीं पाया और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा कि सत्यापन के विवरण के बिना इस तरह मकान मालिकों का चालान किया जाना उचित नहीं है। जब शासकीय तंत्र के पास सूचना है तो नागरिकों को परेशान किया जाना किसी भी दशा में ठीक नहीं।

लिहाजा, दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए कि जिन मकान मालिकों ने सत्यापन करा लिया है, उनका चालान न किया जाए। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक ने जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए और यह आदेश प्रदेशभर के लिए नजीर भी बन गया है।

यूपी और उत्तराखंड की बसों के अस्थाई परमिट की व्यवस्था हुई खत्म, दोनों सरकारों ने लिया फैसला

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पारस्परिक परिवहन समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस मौके पर सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस समझौते के बाद अब यूपी और उत्तराखंड की जनता को परिवहन में बेहतर सुविधा मिलेगी। पिछले 18 सालों से चला आ रहा इंतजार अब खत्म हो गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि दोनों राज्यों की सरकारें समाधान में विश्वास करती हैं। दोनों ही सरकारें राज्य के विकास के लिये निरंतर कार्यरत है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा भी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिवहन समझौता होने से दोनों राज्यों के बीच बसों का आवागमन बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सब साझी विरासत का हिस्सा है। इसलिए आने वाले दिनों में हमारे संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे।

इस समझौते से अब यूपी परिवहन निगम की बसें उत्तराखंड में 216 मार्गों पर एक लाख 39 हजार किलोमीटर चलेंगी। वहीं उत्तराखंड की बसें यूपी में 335 मार्गों पर दो लाख 52 हजार किलोमीटर हर रोज चलेंगी।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में यूपी से उत्तराखंड जा रहीं और वहां से यूपी आ रहीं बसों का संचालन अस्थाई परमिट के आधार पर हो रहा है। परमिट की अवधि खत्म हो जाने के बाद दोनों राज्य एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश करने वाली बसों को रोक दिया जाता है। इसके चलते बस यात्रियों को अत्यंत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस समझौते के होने के बाद दोनों राज्यों को अपनी बस चलाने के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही अस्थाई परमिट की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह व उत्तराखण्ड के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य भी उपस्थित थे।