स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 के समापन सत्र को सीएम ने किया संबोधित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लेखक गांव, थानों, देहरादून में आयोजित स्पर्श हिमालय महोत्सव-2025 के समापन सत्र में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लेखक गांव स्थित मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश में सुख शांति की कामना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना की रजत जयंती उत्सव पर सभी आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि लेखक गांव की परिकल्पना उन विचारों का प्रतीक है जो समाज को दिशा देते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य का निर्माण करना सिखाते हैं। उन्होंने कहा लेखक गांव में आयोजित यह महोत्सव, नई सृजन-यात्रा का आरंभ है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को सम्मानित एवं विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता योजना के तहत साहित्यकारों को अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है। राज्य सरकार, प्रदेश के उत्कृष्ट साहित्यकारों को साहित्य भूषण और लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित करने का कार्य कर रही है। जिसमें 5 लाख तक की धनराशि देने की भी घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार युवा पीढ़ी को साहित्य के प्रति आकर्षित करने के लिए भी विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रहे है। सभी साहित्यकारों, कलाकारों, विद्वानों और संस्कृति के साधकगणों के सहयोग से हम अपने इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में अवश्य सफल रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रजत जयंती वर्ष पर उत्तराखंड विधानसभा द्वारा आयोजित विशेष सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा आगामी 9 नवंबर राज्य स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उत्तराखंड आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेश में लेखक गांव स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ विश्व के साहित्यिक मानचित्र पर राज्य को एक नई पहचान प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा आने वाले समय में लेखक गांव, भारत की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक दृष्टि से जोड़ने का कार्य करेगी।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पूर्व रक्षा सचिव डॉ. योगेन्द्र नारायण, ले.ज अनिल कुमार भट्ट (से.नि), पद्मश्री डॉ. हरमोहिन्दर सिंह बेदी, विदुषी निशंक एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंड रजतोत्सव वर्षः देशभर के संतों ने धामी सरकार के विकास कार्यो व सांस्कृतिक संरक्षण की सराहना की

उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आज मुख्यमंत्री आवास आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक सौहार्द का केंद्र बन गया, जब देशभर के प्रमुख संतों एवं धर्माचार्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर राज्य की प्रगति, सांस्कृतिक संरक्षण और अध्यात्मिक समृद्धि के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की।

संत समाज ने प्रदेश के लिए सकारात्मक बदलाव, विरासत संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक मानकों को सुदृढ़ करने वाले निर्णयों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री को आशीर्वाद प्रदान किया और उन्हें “देवभूमि का धर्म-संरक्षक” बताया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।


मुख्यमंत्री आवास में आध्यात्मिक संगम में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रविंद्रपुरी महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी, चिंतक और लेखक डॉ. कुमार विश्वास सहित अनेकों प्रतिष्ठित संत-महात्मा एवं धर्माचार्य भेंट करने वाले प्रमुख संत-महात्माओं में शामिल रहे।

सभी संतों ने मुख्यमंत्री को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए राज्य के सांस्कृतिक सम्मान और अध्यात्मिक धरोहर संरक्षण को लेकर उनके समर्पण की सराहना की।

संत समाज ने की सीएम धामी की प्रशंसा
संतों ने कहा कि “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाला नेतृत्व प्रदान किया है। उनके प्रयासों से देवभूमि की मूल आत्मा और सनातन विरासत सुरक्षित और सुदृढ़ हुई है।”

उन्होंने राज्य सरकार की उन नीतियों की भी सराहना की जिनसे सामाजिक-सांस्कृतिक अनुशासन, धार्मिक स्थलों का संरक्षण, आध्यात्मिक पर्यटन विकास तथा परंपरा-संरक्षण को नया आयाम मिला है।

कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए संत समाज तथा सरकार मिलकर कार्य करेंगे
संत समाज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हरिद्वार कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए वे सरकार के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। संतों ने कहा कि कुम्भ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है, जिसे ऐतिहासिक स्वरूप देना हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।


संतों ने यह भी कहा कि कुम्भ की तैयारी के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। यातायात, अधोसंरचना, घाटों का सौंदर्यीकरण, सुरक्षा व्यवस्थाएँ, स्वच्छता और तीर्थ विकास जैसे क्षेत्रों में जो योजनाएँ बन रही हैं, वे आने वाले वर्षों में हरिद्वार को विश्व आध्यात्मिक धरोहर केंद्र के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित करेंगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि
“देवभूमि उत्तराखंड को कुम्भ-2027 में एक नए आयाम तक पहुँचाने की जो दूरदृष्टि मुख्यमंत्री ने प्रस्तुत की है, वह प्रेरणादायक है। सरकार द्वारा किए जा रहे त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान से हमें पूर्ण विश्वास है कि यह कुम्भ इतिहास में अपना स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।”

संत समाज ने आश्वस्त किया कि
“हम सभी संत-महात्मा, अखाड़े और धर्म संस्थान एक परिवार की तरह एकजुट होकर कुम्भ की सफलता के लिए निरंतर योगदान देंगे। कुम्भ के आयोजन में चाहे आध्यात्मिक मार्गदर्शन हो या जन-आस्था का प्रबंधन, हर मोर्चे पर हमारा सहयोग निरंतर रहेगा।”

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास का केंद्र बन रहा उत्तराखंड
संत समाज ने यह भी कहा कि उत्तराखंड आज तेजी से वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र और शांति-स्थल के रूप में उभर रहा है, जिसका श्रेय राज्य सरकार की सांस्कृतिक दृष्टि और दूरदर्शी नेतृत्व को है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रदेश वासियों के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं और उत्तराखंड की रजत जयंती को आध्यात्मिक रूप से ऐतिहासिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया।

प्रवासी उत्तराखंडी हैं देवभूमि के सच्चे ब्रांड एम्बेसडरः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित “प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई आपदाओं में जान गंवाने वालों के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप एक मिनट का मौन भी रखा गया।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रवासी उत्तराखंडी देवभूमि की संस्कृति, परंपराओं और मातृभूमि के गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रवासी उत्तराखंडी देवभूमि के सच्चे ब्रांड एम्बेसडर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट लोक संस्कृति, भाषा और बोली में झलकने वाली आत्मीयता हमें विश्वभर में जोड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडी जहां भी रहते हैं, अपने साथ देवभूमि की संस्कृति और अपनी मिट्टी की सुगंध लेकर चलते हैं। राज्य सरकार ने प्रवासी उत्तराखंड परिषद का गठन इसी उद्देश्य से किया है ताकि उनके सुझाव और अनुभव राज्य के विकास की मुख्यधारा में शामिल किए जा सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अनेक प्रवासी स्वयं अपने गांवों को गोद लेकर विकास में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड सरकार “विकसित भारत, विकसित उत्तराखंड” के लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेल, पेयजल और हवाई कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। “एक जनपद दो उत्पाद”, “हाउस ऑफ हिमालयाज”, “स्टेट मिलेट मिशन”, “नई पर्यटन नीति”, “वेड इन उत्तराखंड” और “सौर स्वरोजगार योजना” जैसी योजनाओं से स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने सतत विकास लक्ष्यों में नीति आयोग की रैंकिंग में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” में उत्तराखंड को “एचीवर्स” तथा “स्टार्टअप रैंकिंग” में “लीडर्स” श्रेणी प्राप्त होना राज्य के सुनियोजित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक मूल्यों और जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य में देश का सबसे सख्त नकल-विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवा प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर कार्य कर रही है, जिसके तहत चार वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि स्वर्ण जयंती वर्ष तक उत्तराखंड ऐसा राज्य बने जहां हर युवा को सम्मानजनक रोजगार मिले, पलायन रुके और प्रवासियों की गौरवपूर्ण वापसी हो। “विकास भी, विरासत भी” की भावना के साथ राज्य सांस्कृतिक समृद्धि और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने प्रवासी उत्तराखंडियों से आह्वान किया कि वे भी राज्य के इस विकास अभियान में भागीदार बनें।

पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि हमारी देवभूमि का रहस्य और विरासत ईमानदारी तथा परिश्रम में निहित है। इसके कारण उत्तराखंड का व्यक्ति देश-विदेश में अपनी प्रतिभा, कर्मठता और ईमानदारी से कार्य करता है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी ताकत को पहचानना होगा। आज अनेक मानकों में उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उत्तराखंड के प्रति विशेष लगाव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे सभी प्रवासी अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहेंगे और राज्य के विकास में निरंतर योगदान देंगे।

विधायक विनोद चमोली ने कहा कि उत्तराखंड की अनेक हस्तियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपने कार्यों के बल पर विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने सभी प्रवासी उत्तराखंडियों से अपील की कि वे जिन भी क्षेत्रों में दक्ष हैं, राज्य के विकास में उस क्षेत्र में अवश्य योगदान करें। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को राज्य के विकास में जो भी सहयोग देना है, उसमें राज्य सरकार पूरा समर्थन देगी।

दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष और प्रवासी उत्तराखंडी मोहन सिंह बिष्ट ने इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड हमारी आत्मा और संस्कृति की धरोहर है। उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू, बोली की मिठास और लोकनृत्यों की ध्वनि हमारे हृदय में सदा गूंजती रहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रवासी उत्तराखंडी और फिल्म अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने बताया कि उन्होंने रुद्रप्रयाग जनपद में अपने पैतृक गांव को गोद लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सांस्कृतिक और लोककला की दृष्टि से समृद्ध राज्य है, इसलिए हमें अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य करना होगा।

प्रवासी उत्तराखंडी और राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन का यह दिन हमारी मिट्टी की महक, संस्कृति की आत्मा और अपनत्व का उत्सव है। उन्होंने कहा कि पहाड़ की ठंडी हवा में माँ की ममता बसती है। उत्तराखंड हमारी आस्था, परिश्रम और संस्कारों की भूमि है। उन्होंने कहा कि आज हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहेंगे और उत्तराखंड को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अपना पूरा योगदान देंगे।

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि आज राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, जैविक कृषि, औद्योगिक विकास और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। सशक्त और समृद्ध उत्तराखंड के संकल्प के साथ शासन, प्रशासन एवं जनभागीदारी से राज्य आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती के लिए तेजी से कार्य कर रही है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ राज्य ने खेल भूमि के रूप में नई पहचान बनाई है। सरकार की पारदर्शी नीति और अनवरत प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य की जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय में तीव्र वृद्धि हुई है।

प्रवासी उत्तराखंडी और भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय में निदेशक पूर्णेश गुरूरानी ने कहा कि उत्तराखंड में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइनिंग सेंटर स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हिमालय फाइबर के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इसके लिए केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के दोनों मंडलों में टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने के प्रयास किए जाने चाहिए।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंडियों ने राज्य के विकास के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए तथा राज्य के लिए किए जाने वाले संभावित योगदान की जानकारी साझा की।
इस अवसर पर विधायक किशोर उपाध्याय, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, सचिवगण और देशभर से आए प्रवासी उपस्थित थे।

विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया अपना संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान आयोजित परिचर्चा में भाग लेते हुए, राज्य गठन की पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान तक का विस्तृत खाका खींचते हुए, सदन के सामने आगामी वर्षों में उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प दोहराया।

सभी मुख्यमंत्रियों का योगदान सराहा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अटल सरकार के कार्यकाल में राज्य स्थापना के साथ ही केंद्र सरकार द्वारा राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया गया। जिसके माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री स्व नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ पर्यटन विकास, औद्योगिक विस्तार और आर्थिक सुधारों का नया दौर प्रारंभ हुआ। उसके बाद वर्ष 2002 में राज्य के प्रथम विधानसभा चुनाव के बाद स्व. नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी। उनके नेतृत्व में राज्य में प्रशासनिक स्थिरता स्थापित करने, औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वर्ष 2007 के बाद, तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का कार्यकाल ‘’सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व’’ की नीति पर केंद्रित रहा। इसके पश्चात डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के मुख्यमंत्रित्व काल में भी कई ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से राज्य का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित किया गया।

इसी क्रम में वर्ष 2012 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने कांग्रेस पार्टी को सत्ता सौंपी, ये कालखंड राज्य के लिए राजनीतिक अस्थिरता, प्राकृतिक आपदाओं और विभिन्न चुनौतियों का दौर रहा। इसी दौरान केंद्र सरकार के सहयोग से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ किए गए, जिन्होंने 2013 की भीषण आपदा के बाद श्रद्धालुओं के विश्वास को पुनर्स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। जबकि वर्ष 2017 में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत से विजय प्राप्त हुई, जिसमें त्रिवेंद्र सिंह रावत को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर मिला। उनके नेतृत्व में राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण सुधार प्रारंभ किए गए। उनके पश्चात तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालते हुए अल्प अवधि में ही हरिद्वार कुंभ जैसे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन का कोरोना जैसी महामारी के बीच सफल आयोजन कराया।

कठिन चुनौतियों के बीच निभाई जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2022 में कोरोना महामारी जैसी वैश्विक आपदा के दौर और विधानसभा चुनाव से मात्र सात माह पूर्व उन्हें राज्य के मुख्य सेवक के रूप में दायित्व संभालने का अवसर मिला। उस अल्पावधि में अनेकों चुनौतियां थीं, ऐसे में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने राज्य में चल रही विभिन्न नीतियों और योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन करते हुए राज्य को नई दिशा देने का प्रयास किया। जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की जनता ने राज्य के इतिहास में पहली बार किसी एक दल को दूसरी बार भारी बहुमत से विजयी बनाकर पुनः राज्य की सेवा करने का अवसर प्रदान किया। उसके बाद से सरकार राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और उनके सपनों को साकार करने के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

प्रगति के पथ पर उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने सरकार के काम काज का विस्तार से विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के साधनों को बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में 30 से अधिक नई नीतियों को बनाकर प्रदेश के समग्र विकास का विजन प्रस्तुत करते हुए राज्य को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने का प्रयास किया गया है। इन प्रयासों से नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2023-24 के सतत् विकास लक्ष्य इंडेक्स में हमारे प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। आज प्रदेश की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। आज राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना बढ़ा है और प्रति व्यक्ति आय में 18 गुना बढ़ोतरी हुई है। राज्य गठन के समय हमारी अर्थव्यवस्था का आकार 14 हजार 501 करोड़ रुपए था, जो 2024-25 में बढ़कर 3 लाख 78 हजार 240 करोड़ रुपये होने जा रहा है। इसी प्रकार राज्य गठन के समय हमारे राज्य में प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 15 हजार 285 रुपए थी, जो अब बढ़कर लगभग 2 लाख 74 हजार 64 रुपए के करीब है।

डबल इंजन सरकार ने गैरसैंण को बनाया ग्रीष्मकालीन राजधानी
उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का काम किया। उन्होंने स्वयं गैरसैंण के सारकोट गाँव को गोद लिया है, प्रतिपक्ष के साथियों को वहां जाकर जायजा लेना चाहिए। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का आयोजन कर 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौते किए।

किसान कल्याण के लिए समर्पित
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि के लिए संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। एक ओर जहां प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं कृषि उपकरण खरीदने हेतु ’’फार्म मशीनरी बैंक’’ योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।

तीर्थाटन के साथ पर्यटन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार राज्य में धार्मिक, साहसिक, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, एग्रो टूरिज्म और फिल्म पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। आज जहां एक ओर केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण हेतु विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। वहीं ऋषिकेश और हरिद्वार को योग और आध्यात्मिक केंद्रों के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने के उद्देश्य से ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर पर भी कार्य किया जा रहा है।

देवभूमि बनी खेल भूमि
उन्होंने कहा कि सरकार देवभूमि को खेल भूमि के रूप में स्थापित करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। इसी वर्ष राज्य में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इन खेलों में उत्तराखण्ड ने 103 पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रीय खेलों में 7वां स्थान प्राप्त कर एक नया इतिहास रचा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए भी संकल्पित होकर कार्य कर रही है। जिसके अंतर्गत सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

इंफ्रा प्रोजेक्ट में तेजी
उन्होंने कहा कि आज ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना द्वारा पहाड़ों तक रेल पहुंचाने का वर्षों पुराना हमारा सपना साकार होने जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में रोपवे विकास की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजनाओं का निर्माण भी शीघ्र प्रारंभ होने जा रहा है। डबल इंजन सरकार’’ द्वारा उड़ान योजना के अंतर्गत प्रदेश में 18 हेलीपोर्ट्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से अब तक 12 हेलीपोर्ट्स पर हवाई सेवाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ की जा चुकी हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रयासरत है। जहां एक ओर राज्य के प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, वहीं देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित करने के साथ ही हल्द्वानी में राज्य के प्रथम आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी चल रहा है। हालांकि अभी हमें स्वास्थ्य क्षेत्र में और अधिक काम करने की आवश्यकता है।

लंबित समस्याओं का निदान किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के पश्चात हमारे समक्ष ऐसी बहुत सी समस्याएं थीं, जिनका यदि समय पर समाधान हो जाता तो आज उत्तराखंड की स्थिति ओर अधिक मजबूत होती। इसी क्रम में मुख्य सेवक का दायित्व संभालने के पश्चात, उन्होंने देखा कि हमारे राज्य के युवा नकल माफियाओं के कारण दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इसलिए सरकार ने देश का सबसे सख्त नकल कानून लाकर हमने नकल माफिया की रीढ़ तोड़ने का काम किया। इसी का परिणाम है कि पिछले साढ़े 4 चार वर्षों के अपने कार्यकाल में हम रिकॉर्ड 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान करने में सफल रहे।

साफ नीयत स्पष्ट नीति और पारदर्शी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि वो साफ नीयत, स्पष्ट नीति और पारदर्शी प्रक्रिया के साथ शासन चलाने का संकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं। आज उत्तराखंड में न तो किसी घोटालेबाज़ को संरक्षण मिलता है, न किसी भ्रष्टाचारी को बख्शा जाता है। आज भ्रष्टाचारियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्यवाही करते हुए प्रदेश के इतिहास में पहली बार आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित पिछले चार वर्षों में भ्रष्टाचार में लिप्त 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की है।

राज्यहित में लिए दूरगामी निर्णय
उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यहित में अनेक ऐसे ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय लिए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक महसूस किया जाएगा। सरकार ने देश में सबसे पहले “समान नागरिक संहिता” कानून लागू कर सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करने का काम किया। डेमोग्राफी बदलाव रोकने के लिए सरकार ने प्रदेश में जहां एक ओर ’’धर्मांतरण विरोधी कानून’’ बनाया, वहीं लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे कुकृत्यों को रोकने के लिए भी सख्त कार्रवाई की। प्रदेश में दंगों की राजनीति करने वालों को सबक सिखाने के लिए सख्त दंगा रोधी कानून बनाकर दंगों में होने वाले नुकसान की भरपाई भी दंगाईयों से ही करने का काम किया गया। साथ ही देवभूमि के मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य में सख्त भू-कानून लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लेने का भी काम किया। सरकार ने राज्य में मदरसा बोर्ड को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है।

उत्तराखंड को बनाएंगे देश का श्रेष्ठ राज्य
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड ने अपनी इन 25 वर्षों की यात्रा में अनेकों उतार चढ़ावों का सामना सफलतापूर्वक किया है, उन्हें पूर्ण विश्वास है कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता के सहयोग से हम आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ’’विकल्प रहित संकल्प’’ को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।

राष्ट्रपति का जताया आभार
इससे पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का सदन की ओर से आभार व्यक्त करने के साथ, देश के अमर शहीदों, राज्य आंदोलनकारियों और राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी सदन की ओर से नमन किया।

राज्य स्थापना की रजत जयंती के विशेष सत्र में सीएम धामी ने किया ऐतिहासिक वक्तव्य, संघ के योगदान का अभिनंदन

देवभूमि उत्तराखण्ड की विधानसभा ने आज एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज किया, जब राज्य की स्थापना की रजत जयंती (25 वर्ष पूर्ण होने) के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर संगठन के देश निर्माण में योगदान की औपचारिक सराहना की।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड विधानसभा देश की पहली संवैधानिक संस्था बन गई जिसने संघ के राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जागरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में दिए योगदान को सदन में आधिकारिक रूप से मान्यता दी।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने वक्तव्य में कहा कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी सौ वर्षों की तपोमय यात्रा के माध्यम से भारत में सांस्कृतिक पुनरुत्थान, सामाजिक समरसता, आत्मगौरव और राष्ट्रनिष्ठ सेवा की ऐसी दिव्य धारा प्रवाहित की है जिसने देश के कोने-कोने में राष्ट्रीय चेतना की अखंड ज्योति प्रज्वलित की।”

उन्होंने कहा कि जो भारत कभी गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त था, आज वही अपने सांस्कृतिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और परंपराओं पर गर्व करता है कृ यह आत्मगौरव संघ की शताब्दी तपस्या का ही परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड ने अपने 25 वर्षों के विकास सफर में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, किंतु राज्य ने सदैव विकल्प रहित संकल्प के साथ प्रगति की राह पर कदम बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी वर्षों में जनता के सहयोग से उत्तराखण्ड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने का लक्ष्य अवश्य पूरा होगा।

सत्र के समापन पर मुख्यमंत्री धामी ने संघ शाखा में गाए जाने वाले प्रेरक गीत की पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त की कृ

“ये उथल-पुथल उछाल लहर, पथ से न डिगाने पाएगी,
पतवार चलाते जाएंगे, मंज़िल आएगी, आएगी३”

इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरे सदन में एकता, आत्मगौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार हुआ। विधानसभा द्वारा पारित यह भावनात्मक अभिव्यक्ति न केवल उत्तराखण्ड बल्कि सम्पूर्ण भारत के लिए संघ की राष्ट्रसेवा की शताब्दी यात्रा को सम्मानित करने वाला क्षण बन गई।

उत्तराखंड रजत जयंती पर सीएम ने विधानसभा विशेष सत्र में दिया ऐतिहासिक संबोधन

उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने विस्तृत और ऐतिहासिक संबोधन में राज्य की 25 वर्ष की विकास यात्रा, उपलब्धियों और आगामी संकल्पों का विस्तार से उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि यह वर्षों के लंबे संघर्ष, असीम त्याग और हजारों आंदोलनकारियों के बलिदान का परिणाम है। उन्होंने राज्य निर्माण में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी हुतात्माओं, आंदोलनकारियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों तथा जनप्रतिनिधियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड आज विभिन्न क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना और प्रति व्यक्ति आय में 18 गुना वृद्धि हुई है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि किसानों की आय वृद्धि दर में भी राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में 30 से अधिक नई नीतियाँ लागू की गई हैं जिनसे उद्योग, पर्यटन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते हुए, जिनमें से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (न्ब्ब्) कानून लागू कर समानता, न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। साथ ही, राज्य में भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और नकल विरोधी कानून जैसे कड़े कदम उठाकर पारदर्शी व जवाबदेह शासन की मिसाल पेश की गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियों में अवसर दिए गए हैं, जबकि 1 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के लिए आरक्षण, पेंशन और पहचान पत्र जैसी व्यवस्थाओं को सशक्त बनाया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी के “2047 तक विकसित राष्ट्र” के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता के सहयोग से उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश का श्रेष्ठ राज्य बनेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत की प्रेरक पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त की-
“पतवार चलाते जाएंगे, मंज़िल आएगी… आएगी।”

सीएम धामी से चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने को आंदोलनरत प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु आंदोलन कर रहे प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त किया कि चौखुटिया क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल के उन्नयन हेतु शासनादेश जारी कर दिया है। इसके अंतर्गत चौखुटिया अस्पताल की क्षमता 30 बेड से बढ़ाकर 50 बेड कर दी गई है, साथ ही विभिन्न आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को चरणबद्ध रूप से सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि जनहित की प्रत्येक मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार संवेदनशील है और जन आकांक्षाओं के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विषय में वह स्वयं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक करेंगे तथा प्रगति की सीधे मॉनिटरिंग करेंगे। उन्होंने कहा कि चौखुटिया एवं आसपास के क्षेत्रवासियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत एक्स-रे मशीन के संचालन की जिम्मेदारी उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को दी गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड वासियों के लिए विशेष काउंटर स्थापित करने हेतु तत्काल बात की जाएगी, ताकि प्रदेशवासियों को त्वरित एवं सरल चिकित्सा सेवा मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए सरकार ठोस स्वास्थ्य नीति पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री स्वयं भी जल्द ही चौखुटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करेंगे और व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता को बढ़ाते हुए इसे 30 बेड से विस्तारित कर 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से चौखुटिया में उप जिला चिकित्सालय के निर्माण से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है और प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के विस्तार से चौखुटिया और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा तथा स्वास्थ्य उपचार में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी अल्मोड़ा, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चौखुटिया के जनप्रतिनिधि तथा आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उपस्थित रहे।

बैकुंठ चतुर्दशी का यह मेला आस्था एवं समृद्ध सांस्कृतिक लोक परंपराओं का प्रतीकः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीनगर, पौड़ी में आयोजित बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले के शुभारंभ अवसर पर जनता को वर्चुअल संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीनगर गढ़वाल में स्थित माँ धारी देवी और भगवान कमलेश्वर महादेव के पौराणिक मंदिर सम्पूर्ण उत्तराखंड की अनमोल धरोहर है। प्रत्येक वर्ष बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर आयोजित होने वाला यह मेला आस्था एवं समृद्ध सांस्कृतिक लोक परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा इस प्रकार के पारंपरिक मेले हमें हमारी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ा रही है। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और कनेक्टिविटी सहित अनेकों क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश के विकास के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी संरक्षित किया जा रहा है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य तेजी के साथ चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के पूर्ण होने पर श्रीनगर के साथ पूरे गढ़वाल क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा श्रीनगर क्षेत्र में अनेकों विकास कार्य भी करवाए जा रहे हैं। 4 करोड़ 88 लाख की लागत से रोडवेज बस स्टेशन एवं पार्किंग का निर्माण किया गया है। अलकनन्दा नदी के किनारे गंगा संस्कृति केंद्र का निर्माण कार्य, श्रीनगर नगर पालिका को नगर निगम बनाया गया है। 37 करोड़ से अधिक की लागत से मढ़ी-चौरास-जाखड़ी पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रीनगर के बेलकेदार और बेल कंडी मार्ग से लगे क्षेत्र में एक नई टाउनशिप स्थापित करने, श्रीनगर नगर निगम के दायरे में आने वाले सभी मोहल्लों तक सीवरेज की व्यवस्था पहुंचाने, ट्राइडेंट पार्क निर्माण, पुराने कलैक्ट्रेट भवन को हैरिटेज भवन के रूप में विकसित करने, धारी देवी मंदिर पैदल मार्ग का निर्माण, गोला पार्क का सौंदर्गीकरण कार्य जैसी विभिन्न विकास योजनाओं पर भी कार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों का ये शहर धार्मिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रीनगर, प्रदेश में शिक्षा के हब के रूप में भी उभर रहा है, इसे देखते हुए राज्य सरकार यहां एक पैरामेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी करा रही है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण कार्य अंतिम चरण में हैं। बेस अस्पताल में 25 करोड़ रुपए की लागत से क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है, जिसका लाभ पौड़ी के साथ ही चमोली, टिहरी और रूद्रप्रयाग जिले के हजारों मरीजों को मिलेगा।

इस अवसर पर मेयर आरती भण्डारी, जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया एवं अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

चौखुटिया में सीएम धामी ने की घोषणा, डिजिटल एक्स-रे मशीन होगी उपलब्ध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता को बढ़ाते हुए इसे 30 बेड से विस्तारित कर 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से चौखुटिया में उप जिला चिकित्सालय के निर्माण से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है और प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के विस्तार से चौखुटिया और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा तथा स्वास्थ्य उपचार में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड रजतोत्सव के क्रम में विधानसभा के विशेष सत्र में संबोधन दिया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड राज्य स्थापना, रजतोत्सव के अवसर पर आयोजित, उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया।

राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए उत्तराखंड विधान सभा के पूर्व और वर्तमान सदस्यों तथा सभी राज्यवासियों को बधाई देते हुए कहा कि, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में, यहां के जनमानस की आकांक्षा के अनुरूप, बेहतर प्रशासन और संतुलित विकास की दृष्टि से, नवंबर, 2000 में इस राज्य की स्थापना की गई। विगत पचीस वर्षों की यात्रा के दौरान उत्तराखंड के लोगों ने विकास के प्रभावशाली लक्ष्य हासिल किए हैं। पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में राज्य ने सराहनीय प्रगति की है। इसी तरह डिजिटल और फिजिकल कनेक्टिविटी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलमेंट के क्षेत्रों में भी विकास हुआ है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विकास के समग्र प्रयासों के बल पर राज्य में मानव विकास सूचकांक के मानकों पर सुधार हुआ है। राज्य में साक्षरता बढ़ी है, महिलाओं की शिक्षा में विस्तार हुआ है, मातृ एवं शिशु-मृत्यु-दर में कमी आई है, राज्य में स्वास्थ्य- सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि, इससे राज्य में सुशीला बलूनी, बछेन्द्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी। इसी तरह श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण को राज्य की पहली महिला विधान सभा अध्यक्ष नियुक्त करके उत्तराखंड विधान सभा ने अपना गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा वे सभी हितधारकों के सक्रिय प्रयास से उत्तराखंड विधान सभा में महिलाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होते देखना चाहेंगी।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की इस देव-भूमि से अध्यात्म और शौर्य की परम्पराएं प्रवाहित होती रही हैं। कुमांऊ रेजीमेंट और गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से ही यहां की शौर्य परंपरा का परिचय मिलता है। यहां के युवाओं में भारतीय सेना के जरिए मातृ-भूमि की रक्षा करने के प्रति उत्साह दिखाई देता है। उत्तराखंड की यह शौर्य परंपरा सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा को शक्ति प्रदान करने में भी उत्तराखंड के अनेक जन-सेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने ’नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता’ के निर्माण के लिए संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत प्रावधान किया था। संविधान निर्माताओं की इसी भावना के अनुरूप अब उत्तराखंड विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक लागू कर दिया है, जिसकी वो सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधान सभा में 550 से अधिक विधेयक पारित किए गए हैं। उन विधेयकों में उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक, उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था विधेयक तथा नकल विरोधी विधेयक शामिल हैं। इससे पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की भावना मजबूत हुई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विधान सभाएं हमारी संसदीय प्रणाली का प्रमुख स्तम्भ हैं। बाबासाहब अंबेडकर ने कहा था कि संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली को अपनाकर निरंतर उत्तरदायित्व को अधिक महत्व दिया था। जनता के प्रति निरंतर उत्तरदाई बने रहना संसदीय प्रणाली की शक्ति भी है और चुनौती भी। विधायक-गण, जनता और शासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीनी स्तर पर क्षेत्र की जनता से जुड़कर उनकी सेवा करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है।

राष्ट्रपति ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक विधायक के रूप उन्हें भी नौ वर्ष जन-सेवा का अवसर मिला है। इसलिए वो अपने अनुभव से कह सकती हैं कि यदि विधायक सेवा-भाव से निरंतर जनता की समस्याओं के समाधान तथा उनके कल्याण में सक्रिय रहेंगे तो जनता और जन-प्रतिनिधि के बीच विश्वास का बंधन अटूट बना रहेगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि विकास तथा जन-कल्याण के कार्यों को सभी लोग पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाएं। ऐसे कार्य दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं। सबको समाज के वंचित वर्गों के कल्याण एवं विकास पर विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की जरूरत है।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि उत्तराखंड विधान सभा में इस वर्ष राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन की व्यवस्था का शुभारंभ हुआ है, इसके माध्यम से दो सत्रों का संचालन किया जा चुका है। इस एप्लीकेशन के जरिये सभी विधायक-गण, संसद तथा अन्य विधान-सभाओं एवं विधान परिषदों के बेस्ट प्रैक्टिस को अपना सकते हैं।

संबोधन में अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड में अनुपम प्राकृतिक संपदा और सौन्दर्य विद्यमान हैं। प्रकृति के इन उपहारों का संरक्षण करते हुए, राज्य को विकास के मार्ग पर आगे ले जाना है। उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास-यात्रा, विधायकों के योगदान से ही संभव हो पाई है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि आगे भी सभी विधायक जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देते रहेंगे।
’राष्ट्र सर्वाेपरि’ की भावना के साथ राज्य तथा देश को विकास-पथ पर तेजी से आगे ले जाने की जरूरत है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन उत्तराखंड के सभी निवासियों को भविष्य की मंगलकामना देने के साथ की।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने अपने अभिभाषण में प्रदेश की 25 वर्ष की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कालखण्ड उत्तराखण्ड के लिए आर्थिक समृद्धि, सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना निर्माण का स्वर्णिम दौर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड “समृद्ध एवं सशक्त उत्तराखण्ड” की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

राज्यपाल ने राष्ट्रपति का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सानिध्य एवं मार्गदर्शन से प्रदेशवासियों को नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महोदया का देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति स्नेह और संवेदना हम सभी के लिए गौरव का विषय है।

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि इस विशेष सत्र के माध्यम से राज्य की अब तक की विकास यात्रा पर चर्चा की जाएगी और आगामी वर्षों के लिए नए विकास रोडमैप का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि “विकसित उत्तराखण्ड” का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समावेशी और चहुँमुखी विकास से है, जहां “प्रकृति और प्रगति दोनों साथ चलें।” उन्होंने प्रदेश के लिए “समृद्ध गाँव, सशक्त युवा, सशक्त नारी और सुरक्षित पर्यावरण” का मंत्र दिया।

राज्यपाल ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड को आध्यात्मिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, जैविक कृषि और हरित ऊर्जा के आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पलायन रोकने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजतोत्सव पर आयोजित इस विशेष सत्र में माननीय राष्ट्रपति का मार्गदर्शन हम सबको प्राप्त हो रहा है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का सम्पूर्ण जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्र सेवा का अनुपम उदाहरण है। उनके व्यक्तित्व में मातृत्व की ममता, सेवा का संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत संगम निहित है। उन्होंने सदैव अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए समाज के वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण हेतु कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निजी जीवन में अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए भी हमेशा राष्ट्र सर्वाेपरि की भावना से कार्य करते हुए समाज जीवन में अपना योगदान दिया। झारखंड की राज्यपाल के रूप में भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दूसरा मौका है कि जब उत्तराखंड की विधानसभा में हमारे देश के राष्ट्रपति का अभिभाषण हो रहा है, इससे पूर्व 18 मई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणव मुखर्जी ने विधानसभा को संबोधित किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति द्वारा उत्तराखंड की विधानसभा में दिया जाने वाला ऐतिहासिक अभिभाषण हमारे राज्य के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जाएगा। उनके प्रेरणादायी शब्द आने वाले 25 वर्षों तक उत्तराखंड की प्रगति के लिए हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड 9 नवंबर को अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर प्रत्येक उत्तराखंडवासी के लिए आत्मगौरव का क्षण होने के साथ ही अत्यंत भावनात्मक क्षण भी है। उत्तराखण्ड राज्य हमारी उन असंख्य माताओं, बहनों, युवाओं और जननायकों के अदम्य साहस और संघर्ष का प्रतीक है, जिनके तप, त्याग और बलिदान के बल पर ये गौरवशाली राज्य अस्तित्व में आया। मुख्यमंत्री ने सभी ज्ञात-अज्ञात राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि अमर आंदोलनकारियों के बलिदान को उत्तराखंड का कोई भी नागरिक कभी नहीं भुला सकता।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के आशीर्वाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और उत्तराखंड की जनता के सहयोग से हम उत्तराखंड को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करने के अपने विकल्प रहित संकल्प में अवश्य सफल होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूडी ने स्वागत संबोधन में कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रही हैं। प्रदेश की विधानसभा के लिए भी यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के अजातशत्रु स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के निर्णय से नवंबर 2000 में अस्तित्व में आने के बाद उत्तराखंड विधानसभा की पहली बैठक 12 जनवरी 2001 के दिन आयोजित की गई। तब से अब तक भारतीय लोकतंत्र के उच्च सिद्धांतों और परम्पराओं पर चलते हुए, उत्तराखंड विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण आयाम स्थापित किए हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का बलिदान हमें, उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए चेष्टावान बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण में मातृशक्ति ने अहम भूमिका निभाई है। उत्तराखंड की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण, खेती-बाड़ी, समाज सुधार से लेकर राज्य निर्माण आंदोलन में तक सक्रिय भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति के संबोधन से उत्तराखंड की मातृशक्ति गौरवांवित हुई है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों के कालखंड में उत्तराखंड विधानसभा ने महिला आरक्षण विधेयक सहित पांच सौ से अधिक विधेयक पारित किए हैं। वर्ष 2001 में अंतिम विधानसभा से लेकर वर्तमान विधानसभा के सदस्यों ने तक महत्वपूर्ण अवसरों पर दलगत राजनीति से उठकर, प्रदेश के सामने उपस्थित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सम्मान करते हुए, अपने ज्ञान, विवेक और परिश्रम से आम जनता की आशा, आकांक्षाओं को मूर्त रूप दिया है। इससे प्रदेश में संसदीय लोकतंत्र की नींव भी मजबूत हुई है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनभावना के अनुरूप प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में समुचित विकास सुनिश्चित करने के लिए भराडीसैंण – गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है, अब वहां भी एक विधानसभा भवन संचालित किया जा रहा है। उत्तराखंड विधानसभा ने ग्रीन इनिसिटेव के तहत अब पेपरलेस विधायिका की ओर कदम बढ़ दिए हैं। देहरादून के साथ ही भराडीसैंण विधानसभा परिसर में भी नेशनल ई विधान एप्लकेशन लागू किया गया है। विधानसभा में ई लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास में शोध के महत्व पर जोर देते हैं, इसके लिए भराड़ीसैंण विधानसभा के अंतर्गत, पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रवण मुखर्जी द्वारा स्वीकृत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज, रिसर्च एंड ट्रेनिंग शुरू किया गया है। जिसे विधायी और संसदीय कार्य के साथ ही पॉलिसी प्लानिंग में उच्च कोटि के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन से सब में नई ऊर्जा का संचार होगा, जिससे उत्तराखंड वासी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल की दिशा में संकल्पित होकर कार्य कर सकेंगे।

इस मौके पर नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड सभी मानकों में विशिष्ट प्रदेश है, उत्तराखंड की सीमाएं तिब्बत और नेपाल से मिलती हैं इस तरह ये हिमालयी राज्य देश की रक्षा में अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने इस राज्य को परोपकारी हिमालय से निकलने वाली सदानीरा नदियां दी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं ने हमेशा राज्य के जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्ष किया है। विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन इसका उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति के संबोधन से सदस्यों को नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त होगी।