राज्य के दो शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा देने संबंधी अनुमोदन मिला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो शहीद सैनिकों के आश्रितों को सरकारी सेवा प्रदान किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन प्रदान किए जाने के फलस्वरूप शहीद जगेन्द्र सिंह की धर्मपत्नी किरन को समूह ग के पद पर जिलाधिकारी कार्यालय, टिहरी में और शहीद आदर्श नेगी के भाई अभिषेक नेगी को समूह ग के पद पर अधीक्षण अभियन्ता, आठवां वृत्त, लोक निर्माण विभाग, नई टिहरी के कार्यालय में सेवायोजित किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा भारतीय सेना व अर्द्धसैनिक बलों के उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी शहीद सैनिकों के आश्रितों को राज्याधीन सेवाओं में अनुकंपा के आधार पर सेवायोजित करने के लिए नियमावली निर्धारित है। इस नियमावली के तहत टिहरी गढ़वाल जिले में शहीद सैनिकों के उक्त दो आश्रितों को सेवायोजित किए जाने हेतु मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025ः ऋषिकेश ने 31वें स्थान से उछाल मार 14वां स्थान हासिल किया

देहरादून 37वें से छलांग लगाकर 19वां स्थान

ऋषिकेश 31वें से उछलकर 14वां स्थान

काशीपुर 19वें से सुधारकर 18वां स्थान

सफलता के प्रमुख कारण

यांत्रिक सड़क सफाई से धूल नियंत्रण

ठोस अपशिष्ट एवं निर्माण मलबा प्रबंधन

हरित पट्टी विकास

उद्योगों में स्वच्छ ईंधन का उपयोग

स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली

जन जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने इस उपलब्धि पर कहा…
“ये उपलब्धि सभी के लिए स्वच्छ वायु के प्रति उत्तराखंड की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
लक्ष्य आने वाले वर्षों में और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, नवाचार एवं जनसहभागिता से वायु गुणवत्ता में सुधार।

सीएस ने दिए पर्वतारोहण नीति की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार नई नीति बनाए जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने समृद्ध जैव विविधता से परिपूर्ण उत्तराखंड राज्य में वन पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए अभिनव प्रयास किए जाने और ईको टूरिज्म के विकास हेतु चयनित स्थलों के वन विश्राम गृहों को ईको एवं नेचर कैंप के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा है कि नंदा देवी शिखर को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोले जाने के प्रस्ताव के संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया जाएगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राज्य की पर्वतारोहण की नीति की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार नई नीति बनाए जाने और ट्रैकिंग के नियमों को शीघ्र लागू कर इससे संबंधित अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को भी आगामी 15 नवंबर तक संचालित करने की हिदायत दी है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ईको टूरिज्म के विकास के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की सचिवालय स्थित सभागार में मंगलवार को आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य में ईको टूरिज्म के विकास की बेहतर संभावनाओं को साकार करने के लिए चिन्हित 25 नई योजनाओं पर तेजी से काम किया जाय। इन स्थलों को जबरखेत मॉडल की तर्ज पर विकसित कर इनमें वनों से अनुराग रखने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षक सुविधाएं जुटाई जांय। ताकि फॉरेस्ट टूरिस्ट यहां लंबे समय तक टिके रहें और बेहतर अनुभव के साथ वापस लौटें।

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश के निकट बीटल्स आश्रम के रूप में विख्यात चौरासी कुटिया का पर्यटन के दृष्टिकोण से पुनर्विकास किए जाने की योजना पर भी समयबद्ध ढंग से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस आश्रम से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं अन्य संदर्भों को ऋषिकेश एवं कोलकाता से संकलित कर प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाय।

बैठक में मुख्य वन संरक्षक पी.के. पात्रो ने ईको टूरिज्म विकास की परियोजनाओं की प्रगति तथा प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी।

बैठक में सचिव वन सी रविशंकर, अपर सचिव विनीत कुमार, अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) विवेेक पाण्डेय, मुख्य वन संरक्षक पी.के. पात्रो, अपर निदेशक पर्यटन पूनम चंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेे।

सीएम ने की नेपाल से लगे तीन सीमांत जनपदों के अधिकारियों के साथ बैठक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पड़ोसी देश नेपाल में हाल के दिनों में उत्पन्न हुए राजनीतिक हालातों को ध्यान में रखते हुए राज्य के तीन सीमांत जनपदों चंपावत, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर के जिला प्रशासन, सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों एवं पुलिस प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में नेपाल से सटी उत्तराखण्ड की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा को लेकर संपूर्ण स्थिति की समीक्षा की गई ।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नेपाल से लगी सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाए जाएं और वहां किसी भी असामाजिक या उत्पाती तत्व की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की निगरानी भी सतत रूप से की जाए ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना या उकसाने वाले कंटेंट पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि वे केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों एवं एसएसबी के साथ निरंतर संपर्क व समन्वय बनाकर कार्य करें। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों, स्थानीय ग्राम समितियों, पुलिस बल एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर सामूहिक भागीदारी से निगरानी व्यवस्था को सशक्त बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सीमाओं से लगे प्रवेश मार्गों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और सीमा पार से होने वाले आवागमन पर विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने भारत सरकार द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का कठोरता से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, साथ ही आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के भी आदेश दिए।

बैठक में सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा चुनौतियों, सामुदायिक भागीदारी, खुफिया सूचना तंत्र की मजबूती, तथा केंद्रीय एजेंसियों से तालमेल के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव (गृह), एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, एडीजी इंटेलिजेंस, कुमाऊं मंडलायुक्त, कुमाऊं परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक, तथा चंपावत, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर जिलों के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक व सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

ऋषिकेश में पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि पर भूमिगत पार्किंग की व्यवस्था करेंः बर्द्धन

मुुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यकारिणी समिति की बैठक में राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी परियोजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन से जुड़े कामों को तत्परता से संचालित करने पर जोर दिया गया। बैठक में यूआईआईडीबी के संगठनात्मक ढांचे का सुदृढीकरण करने तथा विभिन्न स्तरों पर अधिकारों के विकेन्द्रीकरण के संबंध में भी विस्तार से चर्चा कर इससे जुड़े प्रस्ताव बोर्ड की आगामी बैठक में रखने का निश्चय किया गया।

यूआईआईडीबी की कार्यकारिणी समिति की 8वीं बैठक सचिवालय स्थित मुख्य सचिव सभागार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने यूआईआईडीबी के कार्यों की विस्तार से समीक्षा कर शारदा कॉरीडोर, ऋषिकेश कॉरीडोर एवं हरिद्वार कॉरीडोर परियोजनाओं के़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि ऋषिकेश में त्रिवेणीघाट परियोजना के तहत घाट पर गंगाजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाय। इसके लिए हाइड्रोलॉजीकल अध्ययन कराते हुए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए जाने वाले आवश्यक उपाय अमल में लाए जायें। ऋषिकेश में पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि पर भूमिगत पार्किंग की व्यवस्था सहित हरित पार्क एवं हेरीटेज फारेस्ट वाक-वे के निर्माण की परियोजना के प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोजना के रख-रखाव एवं संचालन की व्यवहार्यता का समुचित आकलन कर लिया जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि हरिद्वार-ऋषिकेश तक रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के विस्तार एवं ऋषिकेश से देहरादून के मध्य रेलवे लाईन के निर्माण किए जाने की संभावनाओं को देखते हुए ऋषिकेश में रेलवे स्टेशन व इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में भविष्य की आवश्यकताओं का ध्यान रख जरूरी अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने के प्राविधान भी शामिल किये जायें। मुख्य सचिव ने ऋषिकेश में शहर के अंदर भीड़ एवं यातायात के अत्यधिक दबाव को देखते हुए आईएसबीटी और चारधाम यात्रा पंजीकरण केन्द्र को उपयुक्त स्थल पर पुनर्स्थापित करने के मामले में मंडलायुक्त, पुलिस, जिला प्रशासन, पर्यटन, परिवहन, संयुक्त रोटेशन व्यवस्था समिति सहित सभी संबद्ध हितधारकों से विचार-विमर्श कर प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

हरिद्वार कॉरीडोर की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी कुंभ मेला को देखते हुए इस परियोजना के स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाय। मुख्य सचिव ने हरिद्वार में सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंध के लिए उच्च तकनीकी व आधुनिक सुविधाओं से युक्त इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर बनाए जाने के लिए मेला नियंत्रण कक्ष के निकट उपयुक्त स्थान की व्यवस्था किए जाने के साथ ही इस परियोजना के प्रस्तावों में मेलाधिकारी, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक के सुझावों को शामिल किए जाने की हिदायत दी। हरिद्वार में घाटों के विस्तार, पार्किंग, रोपवे, पैदल मार्गों के निर्माण तथा परिवहन, सार्वजनिक प्रसारण व्यवस्था, विभिन्न प्रकार की नागरिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन किए जाने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि चंडीघाट में सांस्कृतिक केन्द्र और मल्टी मॉडल टूरिज्म निर्माण की महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए भी तेजी से आगे बढा जाये। मुख्य सचिव ने देहरादून में यमुना कॉलोनी के पुनर्विकास, नए ग्रीनफील्ड शहरों का विकास की योजना सहित यूआईआईडीबी द्वारा प्रस्तावित अन्य योजनाओं के लिए भी समुचित प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, डॉ. वी. षणमुगम, युगल किशोर पंत, सीसीएफ डॉ. पराग मधुकर धकाते, रेजिडेंट कमिश्नर अजय मिश्रा, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित एवं मेलाधिकारी सोनिका, अपर सचिव अभिषेक रूहेला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हिमालय में पाई जाने वाली दुर्लभ वनस्पतियां और जीव-जंतु भी हमारे पर्यावरण की महत्वपूर्ण धरोहरः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार हिमालय संरक्षण को लेकर पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है, इस महत्वपूर्ण काम में हम सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।

आईआरडीटी सभागार में आयोजित हिमालय दिवस समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को हिमालय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिमालय मात्र बर्फीली चोटियों और विस्तृत पर्वतमालाओं का समूह नहीं है बल्कि ये सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्रोत भी है। हिमालय न केवल भारत के उत्तर में अटल प्रहरी का काम करता है, बल्कि इसकी पर्वतीय नदियाँ पूरे देश की जीवनधारा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय की ऊंची चोटियां, विस्तृत ग्लेशियर, नदियां और जैव विविधता से भरपूर वन हमें न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराते हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां हिमालय से निकलने वाली नदियां देश के करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती हैं वहीं इस पर पाए जानी वाली दुर्लभ जड़ी बूटियां आयुर्वेद का आधार हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज हमारी इस अमूल्य धरोहर को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास, और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हिमालय के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। इसके ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जो आने वाले समय में गंभीर जल संकट और पारिस्थितिकीय असंतुलन की बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हिमालयी क्षेत्र में वर्षा की तीव्रता लगातार बढ़ रही है और अप्रत्याशित क्लाउड बर्स्ट तथा उनके परिणामस्वरूप भूस्खलन जैसी आपदाएँ बार-बार घटित हो रही हैं। इन घटनाओं की आवृत्ति और उनके प्रभाव दिन प्रति दिन बढ़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में हमारे राज्य को कई भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है। इन गंभीर चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए, गत वर्ष सरकार ने उच्च स्तरीय समिति के गठन के लिए निर्देश जारी किए थे। अब इस वर्ष नवंबर में राज्य में जलवायु परिवर्तन पर ‘विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन’ का भी आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालय की सुरक्षा केवल सरकार का ही कार्य नहीं है, बल्कि ये देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण को लेकर पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में सरकार डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान और जनभागीदारी कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम प्रारम्भ किया गया है। इस एक छोटी सी पहल से हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें पर्यटन क्षेत्र में भी पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में ध्यान देना होगा क्योंकि अनियंत्रित और असंवेदनशील पर्यटन हिमालय के पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इसके लिए हमें ‘’सस्टेनेबल टूरिज्म’’ को बढ़ावा देना होगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन का विकास किया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका ज्ञान, परंपराएं और जीवनशैली हमें सिखाती हैं कि किस प्रकार हम प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन जी सकते हैं। हमें उनके अनुभवों और पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करते हुए उसे भी अपनी पर्यावरण संरक्षण नीति में सम्मिलित करना चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पानी की बचत, पेड़ों को लगाना और प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना, हिमालय की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी क्रम में सरकार ने दो से नौ सितंबर तक प्रतिवर्ष हिमालय जनजागरुकता सप्ताह मनाने का निर्णय लिया है।

इस मौके पर पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि इस साल समूचे हिमालयी क्षेत्र में आपदाएं आई हैं, अब साल दर साल इस तरह की घटनाओं से मानसून काल डराने लगा है। हमें हिमालय के पर्यावरण को बचाने के लिए नए सिरे से सोचना होगा।

इस मौके पर विधायक किशोर उपाध्याय, मेयर सौरभ थपलियाल, दर्जाधारी मधु भट्ट, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, सूर्यकांत धस्माना सहित प्रमुख लोग शामिल हुए।

सीएम ने प्रबुद्धजन सम्मेलन में दी राज्य सरकार की उपलब्धियां एवं विकास योजनाओं की दी जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज काशीपुर में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन में प्रतिभाग कर जनसंवाद के माध्यम से समाज के विविध क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद स्थापित किया। सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों तथा उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

कार्यक्रम में जनपद के डॉक्टर्स, इंजीनियर, शिक्षाविद, अधिवक्ता, उद्यमी व व्यापारीगण, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनपद व राज्य के सभी प्रबुद्धजन प्रधानमंत्री के “विकसित भारत/2047” के संकल्प को साकार करने वाले अग्रदूत हैं। आज प्रबुद्धजनों के साथ किया गया सार्थक संवाद उत्तराखंड के विकास के हमारे सामूहिक संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति के साथ भारत विकास और समृद्धि के नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। आज भारत में न केवल निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक परिवर्तन आया है। मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है और इस संकल्प को साकार करने के लिए आज योजनाबद्ध तरीके से कार्य भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। यही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम खड़ा करने वाला देश बन चुका है। आज हमारे स्टार्टअप्स ग्लोबल इनोवेशन में अपनी पहचान बना रहे हैं। डिजिटल इंडिया ने आम नागरिक तक तकनीक को पहुँचाया है और आत्मनिर्भर भारत के अभियान ने देश को उत्पादन और विनिर्माण का हब बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। विश्व के बड़े बड़े देश ये देखकर अचंभित हैं कि भारत में सब्जी की एक छोटी सी दुकान लगाने वाली महिला भी यूपीआई के ज़रिए मोबाइल से पेमेंट का लेनदेन कर रही है। आज देश के 55 करोड़ से अधिक लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर विश्व की एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। चाहे रक्षा, विज्ञान और तकनीकी का क्षेत्र हो, या कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा का क्षेत्र हो, चाहे देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो, अंतरिक्ष के क्षेत्र से जुड़ी महान उपलब्धियां हो, या वैश्विक स्तर के सम्मेलनों की सफल मेजबानी हो, आज भारत प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर विश्व पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आज हमारी बढ़ती शक्ति ने कुछ देशों को चिंता में डाल दिया है इसलिए वो हमारे बढ़ते कदमों को रोकने के असफल प्रयास कर रहे हैं। जो देश पहले भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा करते थे, आज वही देश भारत के उद्योग, प्रौद्योगिकी और नवाचार की क्षमता को चुनौती के रूप में देखने लगे हैं। क्योंकि भारत अब केवल उत्पादों को आयात करने वाला देश नहीं रहा, भारत अब निर्यात, विनिर्माण और तकनीकी फील्ड सहित विभिन्न क्षेत्रों में विश्व का अग्रणी राष्ट्र है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे नागरिकों ने अपने संकल्प, सामर्थ्य और नवाचार से ये सिद्ध कर दिया है कि कोई भी शक्ति हमारे विकास के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। हाल ही में आए पहली तिमाही के आँकड़ों से ये स्पष्ट हो गया है कि भारत वास्तव में दुनिया का सबसे तेज ग्रोथ इंजन है। रिज़र्व बैंक और आईएमएफ ने भी इस तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत ही लगाया था, लेकिन एनएसओ द्वारा जारी आँकड़ों से ये सिद्ध हुआ है कि भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। ये इस बात का प्रमाण है कि अब बुलंद भारत के बढ़ते हौसले को कोई शक्ति रोक नहीं सकती।

जीएसटी की दरों में कमी के लिए प्रधानमंत्री का आभार
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा जीएसटी की दरों में की गई कमी भी निश्चित रूप से उद्योग जगत एवं व्यापारियों के साथ साथ देश के प्रत्येक नागरिक के लिए सुखद साबित हुई है। इसके लिए मैं, प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री का हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ।

राज्य में विकास और समृद्धि के नए आयाम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारा राज्य भी विकास और समृद्धि के नए आयाम स्थापित कर रहा है। जहां एक ओर, राज्य के शहरों से लेकर सुदूर पर्वतीय गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, हम राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी निरंतर प्रयासरत हैं। हमारी सरकार राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है द्य हमारी सरकार ने वर्ष 2023 में ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का आयोजन कर 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौते किए। ये हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि हमें इनमें से लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में सफलता प्राप्त हुई है। हमने राज्य में निवेशक केंद्रित नीतियों, बुनियादी ढांचे, कुशल जनशक्ति और सुशासन के द्वारा स्वस्थ निवेश वातावरण की उपलब्धता सुनिश्चित की है।

उत्तराखंड बना निवेशकों की पहली पसंद
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्य में मैनुफ़ैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए अलग-अलग विभागों से विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियां लेनी पड़ती थी जिसमें बहुत समय लगता था। इस समस्या के समाधान के लिए हमने जहां एक ओर उद्योगों की लाइसेंसिंग प्रोसेस को आसान करते हुए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था में सुधार किया, वहीं औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक नीति, स्टार्टअप नीति और डैडम् नीति सहित 30 से अधिक नीतियां लाकर राज्य में उद्योगों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने का प्रयास किया। इसके साथ ही, विनिर्माण क्षेत्र में बड़े उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए हमारी सरकार ने राज्य में मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी भी लागू की है। इसके अलावा जहां हम स्टार्टअप को इनक्यूबेशन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 60 करोड़ रुपए की लागत से विश्वस्तरीय यू-हब की स्थापना कर रहे हैंद्य इन्हें आसानी से फंड उपलब्ध कराने हेतु 200 करोड़ रुपए के वेंचर फंड की स्थापना भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश प्रोत्साहन के लिये यूके-स्पाईस नाम से निवेश प्रोत्साहन एजेंसी स्थापित कर निवेशकों को समर्पित निवेश मित्र की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। हमने जहां एक ओर काशीपुर में अरोमा पार्क, सितारगंज में प्लास्टिक पार्क, काशीपुर में इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर, पंतनगर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना की है, वहीं, एम.एस.एम.ई. क्षेत्र के उद्यमियों को प्लग एंड प्ले मॉडल पर उद्यम स्थापना हेतु सिडकुल द्वारा रुद्रपुर, सेलाकुई और हरिद्वार में कम लागत वाली फ्लैटेड फैक्ट्रियाँ भी तैयार की जा रही हैं। इतना ही नहीं, हम किच्छा फार्म में हजार एकड़ से अधिक भूमि पर एक स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।

राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राज्य में स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना के माध्यम से हमने स्थानीय आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया है, जबकि हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड ने हमारे स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने का काम किया है। इसके अलावा, श्स्टेट मिलेट मिशनश्, श्फार्म मशीनरी बैंकश्, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, होम स्टे, वेड इन उत्तराखंड ‘सौर स्वरोजगार योजना’ जैसी योजनाओं के माध्यम से हम अपनी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि विभिन्न चुनौतियों के बावजूद हमारे प्रदेश ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की और नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिनकी गूंज आज पूरे देश में सुनाई दे रही है। ये हम सभी के लिए गर्व का विषय है कि नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2023-24 के सतत् विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के इंडेक्स में हमारे उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी भी प्राप्त हुई है। इसके साथ ही, हमने प्रदेश की बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड 4.4 प्रतिशत की कमी लाकर राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ने का काम किया है।

राज्य सरकार के ऐतिहासिक निर्णय
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य हित में कई ऐतिहासिक निर्णय भी लिए हैं, जिन्हें पूर्व की सरकारों ने अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते ठंडे बस्ते में डाल दिया था। हमने जहां एक ओर देश में सबसे पहले “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। वहीं, देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून भी लागू किया है, जिसके परिणाम स्वरुप उत्तराखंड में पिछले साढ़े 3 वर्षाे में लगभग 24 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां पाने में सफलता प्राप्त की है।

राज्य की डेमोग्राफी को संरक्षित रखने हेतु प्रतिबद्ध सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने के प्रति भी पूर्ण रूप से संकल्पबद्ध होकर काम कर रही है। इसी संकल्प के साथ, हमने जहां एक ओर प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को लागू किया है, वहीं लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी घृणित मानसिकताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की है। हमने प्रदेश में ’’लैंड जिहाद’’ पर कड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 9 हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को लैंड जिहादियों से मुक्त कराया है। इसके साथ ही करीब 250 अवैध मदरसों को सील करने के साथ ही 500 से अधिक अवैध संरचनाओ को भी हटाया है। इतना ही नहीं, हाल ही में हमारी सरकार ने राज्य में नया कानून लागू कर मदरसा बोर्ड को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कानून के लागू होने के पश्चात 1 जुलाई 2026 के बाद उत्तराखंड में केवल वही मदरसे संचालित हो पाएंगे, जिनमें हमारे सरकारी बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा द्यइसके अतिरिक्त, हमारी सरकार राज्य में सनातन संस्कृति को बदनाम करने वाले पाखंडियों के विरुद्ध भी ’’ऑपरेशन कालनेमि’’ के माध्यम से सख्त कार्रवाई कर रही है।

सरकार की भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध श्जीरो टॉलरेंसश् की नीति के अंतर्गत सख्त कार्रवाई भी की जा रही है। हमने प्रदेश के इतिहास में पहली बार,आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित बीते तीन वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की है।

मुख्यमंत्री का स्वदेशी अपनाने का आग्रह
इस अवसर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आग्रह किया कि सभी प्रदेशवासी प्रधानमंत्री के “स्वदेशी अपनाओ देश को मजबूत बनाओ’’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करें। हमारे देश में एक पेन की निब से लेकर अंतरिक्ष यान तक, सब कुछ स्वदेशी रूप से बनाने की क्षमता है। हमें अब संकल्पित होकर प्रत्येक वस्तु खरीदने से पहले ये देखना होगा कि वो स्वदेशी है या विदेशी। यदि हम स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देंगे, तो हमारा ये कदम न केवल हमारे कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को सशक्त बनाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, शिव अरोड़ा, महापौर काशीपुर दीपक बाली सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजन व स्थानीय जनता मौजूद रही।

सीएस की अध्यक्षता में हुई डीआरएम मुरादाबाद और प्रदेश सरकार के बीच बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में प्रदेश सरकार और डीआरएम मुरादाबाद संग्रह मौर्य के मध्य सामंजस्य बैठक हुयी। बैठक के दौरान रेलवे और राज्य सरकार के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुयी।

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश डोईवाला रेलवे बाईपास के लिए राजाजी नेशनल पार्क, रेलवे और डीएफओ की टीम को शीघ्र से शीघ्र संयुक्त सर्वेक्षण कराये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया भी शुरू कर ली जाए। उन्होंने हर्रावाला रेलवे स्टेशन के विस्तारीकरण कार्य में तेजी लाए जाने हेतु रेलवे, वन एवं राजस्व की संयुक्त टीम द्वारा सर्वे पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि महाकुम्भ 2033 से पहले हरिद्वार-देहरादून डबल लेन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इसके लिए वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस और फॉरेस्ट क्लीयरेंस आदि की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे से कुंभ मेला के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट सर्कुलेशन प्लान भी शीघ्र तैयार कर उपलब्ध कराए जाने की बात कही। उन्होंने रेलवे स्टेशंस का फेस लिफ्टिंग में ऋषिकेश एवं हरिद्वार को भी शामिल किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने रेलवे से कुम्भ 2027 से सम्बन्धित बैठकों में कॉर्डिनेशन के लिए एक मेला अधिकारी नामित किए जाने की बात कही। कहा कि कुम्भ की तैयारियों को लेकर होने वाली आगामी बैठक में रेलवे से भी प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने रेलवे और उत्तराखण्ड सरकार के मध्य सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए भी मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि पूरे राज्य के लिए मोबिलिटी प्लान तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के यातायात साधनों और विकल्पों को लेकर अगले 50 सालों का प्लान तैयार किए जाने की बात कही।

डीआरएम संग्रह मौर्य ने बताया कि देहरादून मसूरी रेलवे प्रोजेक्ट का प्राथमिक सर्वे हो गया है, फाइनल लोकेशन सर्वे शीघ्र शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सहारनपुर देहरादून प्रोजेक्ट का फाइनल लोकेशन सर्वे गतिमान है। उन्होंने बताया हर्रावाला रेलवे स्टेशन की डीपीआर स्वीकृत हो गई है। प्रोजेक्ट की स्वीकृति होनी बाकी है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव बृजेश कुमार संत, सी रविशंकर, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा, उपाध्यक्ष एमडीडीए एवं महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम का बरसात के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने और चारधाम यात्रा को सुचारु कराने पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में शासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तथा वर्चुअल माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों को आपदा प्रबंधन, कानून व्यवस्था, पुनर्निर्माण कार्यों, पर्यटन एवं जनसुविधाओं से संबंधित व्यापक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता जनता को त्वरित राहत, सुरक्षा एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बरसात समाप्त होते ही मरम्मत और पुनर्निर्माण के कार्यों हेतु प्रशासनिक मशीनरी एक्टिव मोड में कार्यरत रहे। वर्षा काल तक राहत सामग्री एवं ड्राई राशन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। आपदा प्रभावितों के ठहरने, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की जाए। फसलों, पेयजल लाइन एवं सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान का त्वरित आकलन कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाए। नदी-नालों के पास निर्माण की अनुमति पर प्रतिबंध सख्ती से लागू किया जाए। प्रतिबंधों का अनुपालन न करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रभावितों को मानकानुसार त्वरित सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण करें और विभिन्न व्यवस्थाओं का आकलन करें। डेंगू, मलेरिया और अन्य जल जनित रोगों से बचाव के लिए अस्पतालों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में स्वास्थ्य विभाग की शीघ्र बैठक करें।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कानून व्यवस्था में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अनधिकृत आधार कार्ड, वोटर आईडी और कनेक्शन जारी करने वालों पर नियमित कार्रवाई की जाए। बाहरी व्यक्तियों व संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए।सीमावर्ती क्षेत्रों में चेकिंग और सख्ती बढ़ाई जाए तथा संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। गौवंश के संरक्षण के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के बाद पुनर्निर्माण एवं इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों में तेजी लाई जाए। सरकारी निर्माण कार्यों में स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता दी जाए। गांवों और शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि मानसून के बाद चारधाम यात्रा सतर्कता के साथ सुचारू रूप से संचालित हो। श्रद्धालुओं को खराब मौसम की जानकारी समय पर मिल जाए।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद की मुख्यमंत्री घोषणाओं एवं चालू कार्यों की रिपोर्ट 15 दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए। ग्राम स्तर पर चौपाल कार्यक्रम, जिलास्तरीय जनसुनवाई, तहसील दिवस, बीडीसी की बैठकों एवं बहुउद्देशीय शिविरों का नियमित आयोजन किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिवस 17 सितंबर से गांधी जयंती तक सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम की विस्तृत तैयारी की जाए। सेवा, स्वच्छता और जनसुविधा की थीम पर कार्य किए जाएं। जनपदों में नियमित स्वच्छता अभियान चलाने के साथ प्रत्येक सप्ताह एक दिन स्वच्छता कार्यक्रम में जिलाधिकारी स्वयं प्रतिभाग करें। क्षतिग्रस्त सड़कों को जल्द सुचारु करने के साथ ही अभियान के तहत सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 1905 सीएम हेल्पलाइन और 1064 एंटी करप्शन कैंपेन की कार्यवाही निरंतर जारी रहे। आपदा की चुनौतियों से पार पाने के लिए डिजास्टर वालंटियर, संकट मोचन दल एवं जनपद स्तर पर मॉक ड्रिल कराए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा के अधिकार के तहत प्रदान किए जा रहे विभिन्न प्रमाण पत्रों को आवेदनकर्ता जिस भाषा (हिंदी या अंग्रेजी) में मांगते हैं, उसी भाषा में उपलब्ध कराया जाए। नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री की प्रक्रिया में सम्मिलित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, वर्चुअल माध्यम से कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड की आपदा राहत हेतु राजस्थान सरकार ने 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की

उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए, राजस्थान सरकार ने उत्तराखंड सरकार को 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। यह सहायता राशि राज्य के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तात्कालिक राहत और पुनर्वास कार्यों में उपयोग की जाएगी।

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखे एक पत्र में इस दुखद परिस्थिति पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि, “इस प्राकृतिक आपदा के कठिन समय में हम उत्तराखंड के लोगों की पीड़ा को अपनी ही पीड़ा मानते हैं।“

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजस्थान के निवासी इस संकट की घड़ी में उत्तराखंड के भाइयों-बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण होंगे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राजस्थान सरकार का आभार व्यक्त किया है।