अच्छी खबरः केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में सचिवालय में पर्वतमाला परियोजना के अन्तर्गत केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे के विकास के लिए राज्य सरकार और नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के बीच समझौता हुआ। इस समझौते के अन्तर्गत इक्विटी भागीदारी में एनएचएलएमएल की 51 प्रतिशत और राज्य सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। राजस्व साझेदारी के अन्तर्गत 90 प्रतिशत धनराशि उत्तराखण्ड राज्य में पर्यटन, परिवहन एवं गतिशीलता के क्षेत्र में व्यय की जायेगी। इस समझौते के अवसर पर राज्य मंत्री सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, भारत सरकार अजय टम्टा एवं उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह समझौता प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के साथ ही पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढ़ाचे के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पर्वतमाला परियोजना के तहत सोनप्रयाग से केदारनाथ के बीच लगभग 4100 करोड रूपए की लागत से 12.9 किलोमीटर लंबी तथा गोविंदघाट से हेमकुण्ड साहिब के बीच 2700 करोड़ से अधिक की लागत की 12.4 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य में रोपवे कनेक्टिविटी के विस्तार में नए आयाम स्थापित करने के साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में रेल, रोड और रोपवे कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है। चारधाम ऑलवेदर रोड, दिल्ली देहरादून एलिवेटेड रोड, सितारगंज से टनकपुर मोटर मार्ग, पौंटा साहिब देहरादून, बनबसा से कंचनपुर, भानियावाला से ऋषिकेश, काठगोदाम से लालकुंआ, हल्द्वानी बाईपास और सीमांत क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से कनेक्टिविटी को सशक्त करने की दिशा में कार्य हो रहे हैं। रेल कनेक्टिविटी के विस्तार पर भी तेजी से कार्य हो रहे हैं।

केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि राज्य में रोपवे के विकास की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में हर क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। इन रोपवे के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को केदारनाथ और हेमकुण्ड साहिब के दर्शन करने में काफी सुगमता होगी।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि यह समझौता राज्य में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। इन रोपवे के निर्माण के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों की आर्थिकी और रोजगार में वृद्धि होगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, अपर सचिव, सड़क परिवहन और राजमार्ग, भारत सरकार विनय कुमार, सचिव दिलीप जावलकर, धीराज गर्ब्याल, युगल किशोर पंत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एनएचएलएमएल राजेश मलिक, वाइस प्रेजीटेंट, रोपवे एनएचएलएमएल प्रशांत जैन, अपर सचिव अभिषेक रोहिला और पर्यटन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मसूरी गोलीकांड की घटना उस समय के सत्ताधारी दलों के दमनकारी रवैये का प्रतीकः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश सरकार राज्य आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए कृतसंकल्प होकर कार्य कर रही है।

मसूरी स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान मसूरी में शहीद हुए आंदोलनकारी बलबीर सिंह नेगी, बेलमती चौहान, हंसा धनाई, धनपत सिंह, राय सिंह बंगारी और मदन मोहन ममगई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने हमारे बेहतर भविष्य के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगाकर उत्तराखंड के निर्माण में अपना अद्वितीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि 2 सितंबर 1994 का दिन राज्य के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। इस दिन मसूरी की वीरभूमि पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों को पुलिस की गोलियों का सामना करना पड़ा। यह घटना उस समय के सत्ताधारी दलों के दमनकारी रवैये का प्रतीक थी, जिन्होंने एक शांतिपूर्ण आंदोलन को निर्दयता के साथ कुचलने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए उनके और उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। साथ ही शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए 3000 रुपये मासिक पेंशन की सुविधा भी प्रारंभ की गई है। घायल और जेल गए आंदोलनकारियों को 6000 रुपये तथा सक्रिय आंदोलनकारियों को 4500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व की सरकारों के समय में राज्य आंदोलनकारियों के केवल एक आश्रित के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था थी, परंतु अब नए कानून के अंतर्गत चिन्हित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी इस आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। यही नहीं, राज्य सरकार ने चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 93 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित भी किया है। इसी के साथ राज्य आंदोलनकारियों के बच्चों को स्कूलों और कॉलेजों में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था और आंदोलनकारियों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का सपना था कि एक ऐसा उत्तराखंड बने जहां हमारी संस्कृति, भाषा और परंपराओं का संरक्षण हो। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने “समान नागरिक संहिता” लागू कर राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कर्तव्य सुनिश्चित कर दिए हैं। वहीं, प्रदेश के युवाओं को पारदर्शिता के साथ रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू किया गया और 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया। इसके बाद उत्तराखंड में 25 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां पाने में सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बचाए रखने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए जहां एक ओर प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया, वहीं 9 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने दंगाइयों को सबक सिखाने के लिए सख्त दंगारोधी कानून बनाकर दंगों में होने वाले नुकसान की भरपाई भी उनसे ही करने का कार्य किया है। हाल ही में सरकार ने नया कानून लागू कर राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कानून के लागू होने के बाद एक जुलाई 2026 के बाद उत्तराखंड में केवल वही मदरसे संचालित हो पाएंगे, जिनमें सरकारी बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। राज्य में अवैध रूप से संचालित ढाई सौ से अधिक मदरसों को भी बंद करवाया गया है। प्रदेश सरकार राज्य में सनातन संस्कृति को बदनाम करने वाले पाखंडियों के विरुद्ध ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के माध्यम से भी सख्त कार्रवाई कर रही है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने गढ़वाल सभा भवन जल्द बनाने और सिफन कोर्ट का मामला जल्द हल करने की बात कही तथा मसूरी में वेंडर जोन की घोषणा सहित अन्य मांगों पर भी शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे स्वर्गीय इंद्रमणि बड़ोनी के जन्मशताब्दी समारोह को भी भव्य तरीके से मनाएगी।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मसूरी तहसील बनाने के लिए सीएम का आभार व्यक्त करने के साथ ही मसूरी की विभिन्न मांगों को मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी, दर्जाधारी सुभाष बड़थ्वाल, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन मल्ल सहित राज्य आंदोलनकारियों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी शामिल हुए।

किसी भी देश का सामाजिक व आर्थिक विकास उसकी शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भरः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से हेमवती नन्दन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खटीमा में ‘‘साथी केंद्र’’ का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश का सामाजिक और आर्थिक विकास उसकी शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक स्तर पर सुधार लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया। उन्होंने कहा कि आज इस नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में भी सहायता मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में देश के समस्त विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में साथी प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से, आज आईआईटी और आईआईएससी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसर ऑनलाइन क्लासेज द्वारा विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे हैं। आज यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग, मेडिकल, बैंकिंग, रेलवे और क्लैट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए दूरस्थ क्षेत्रों और निर्धन परिवारों के विद्यार्थियों सहित अन्य सभी विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस केन्द्र में 80 छात्रों को ऑफलाइन कोचिंग और मेंटरिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा का सीधा लाभ खटीमा और आसपास के ग्रामीण अंचलों के सभी प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज देशभर में 15 लाख से अधिक विद्यार्थी “प्रोजेक्ट साथी” से लाभान्वित हो चुके हैं। हमारे राज्य में भी अब तक लगभग 29 हजार विद्यार्थी इस पहल का हिस्सा बन चुके हैं और पिछले वर्ष 500 से अधिक विद्यार्थियों ने इस प्लेटफॉर्म की मदद से विभिन्न परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 द्वारा प्रदेश के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे कोर्स संचालित करने की पहल की जा रही है। साइंस सिटी, एस्ट्रो पार्क आदि का निर्माण कर राज्य में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ही 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। “मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना“ के माध्यम से, राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों को 18 लाख रुपये तक का शोध अनुदान प्रदान किया जा रहा है। उत्कृष्ट शोध पत्र प्रकाशन हेतु राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किया जा रहा है।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सांसद अजय भट्ट, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जा राज्य मंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. बी. एन. खाली, निदेशक आईआईटी कानपुर मनिंदर अग्रवाल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ बी0 एन0 खाली, निदेशक आईआईटी कानपुर मनिंदर अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. पंकज कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी मौजूद थे।

खटीमा गोलीकांड के शहीदों को सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि, आंदोलनकारियों को सम्मानित भी किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान शहीद हुए आन्दोलनकारियों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये और उनके आश्रितों तथा राज्य आन्दोलनकारियों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमत्री ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के दौरान खटीमा गोलीकांड में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट और परमजीत सिंह को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का हर नागरिक इन सभी वीर सपूतों का सदैव ऋणी रहेगा। राज्य आन्दोलन के अपने अनुभवों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कि इस घटना ने लोगों को उत्तराखंड के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। हम सभी मिलकर उनके सपनों के उत्तराखंड का निर्माण करें, यही उनके लिए हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों के आदर्शों और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए राज्य सरकार की नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया है। शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए 3 हजार रुपये मासिक पेंशन की सुविधा भी शुरू की है, साथ ही घायल और जेल गए आंदोलनकारियों को 6000 रुपये और सक्रिय आंदोलनकारियों को 4500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। नए कानून के अंतर्गत चिन्हित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी इस आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 93 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित भी किया है। आंदोलनकारियों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के आंदोलन में नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, उन्होंने आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। राज्य निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका को देखते हुए ही राज्य सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए सरकारी नौकरी में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। राज्य के समग्र विकास के साथ ही प्रदेश के हित में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उत्तराखंड ने देश में सबसे पहले “समान नागरिक संहिता” को लागू किया है। देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके बाद लगभग 24 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां पाने में सफलता प्राप्त की है।

सरकार देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बचाए रखने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों लागू किया गया है। 7 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को हिमालय बचाओ अभियान की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि हिमालय के पर्यावरण की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक भुवन कापड़ी, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जा राज्य मंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, सुभाष बर्थवाल, फरजाना बेगम, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, दान सिंह रावत, नंदन सिंह खड़ायत, जीवन सिंह धामी, गोपाल सिंह राणा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जय किशन, डीएफओ हिमांशु बागरी, एडीएम पंकज उपाध्याय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी एवं जनता मौजूद थी।

सीएम धामी ने युवाओं से किया वायदा करा पूरा, अग्निवीर आरक्षण नियमावली जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक और वायदे को पूरा करते हुए, सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न विभागों की वर्दीधारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान कर दिया है। इस संबंध में सोमवार को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से विधिवत तौर पर उत्तराखंड राज्याधीन सेवाओं में समूह ग के सीधी भर्ती के वर्दीधारी पदों पर सेवायोजन हेतु सेवामुक्त अग्निवीरों को क्षैतिज आरक्षण नियमावली-2025 जारी कर दी है।

सैन्य बहुल प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय को मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इसी नियमावली के जरिए अब सेवामुक्त हुए अग्निवीरों को विभिन्न विभागों के वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इसमें पुलिस आरक्षी (नागरिक/पीएसी), उप निरीक्षक, प्लाटून कमांडर पीएसी, अग्निशामक, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बंदी रक्षक, उप कारापाल, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे महत्वपूर्ण वर्दीधारी पद शामिल हैं।

“देश की सेवा कर लौटे पूर्व अग्निवीर प्रदेश का गौरव हैं। उन्हें सम्मान और रोजगार का अवसर देना हमारी जिम्मेदारी है। यह निर्णय सेवामुक्त हुए अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को हर तरह से सेवायोजन का प्रयास कर रही है”।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

रेड और ऑरेंज अलर्ट को लेकर सीएम ने कहा मुस्तैद रहें अधिकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों के लिए प्रदेश के अधिकांश जनपदों के लिए जारी रेड तथा ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए शासन तथा जनपद स्तरीय अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने तथा 24×7 अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अत्यधिक वर्षा के कारण राज्य के सामने लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए समुचित कदम उठाए जाएं। भूस्खलन के दृष्टिगत मार्गों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा मैदानी क्षेत्रों में जल भराव की आशंका को देखते हुए सभी एहतियाती कदम उठाए जाएं। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से हर स्थिति पर नजर रखी जाए।

मुख्यमंत्री ने शासन तथा जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत बचाव कार्यों का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आपदाओं में बेघर हो गए हैं, सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उनके बेहतर से बेहतर पुनर्वास के लिए हर स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने दोनों मंडलायुक्तों को निर्देश दिए कि आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए शीघ्रता से कार्य करते हुए मैदानी जनपदों में पुनर्वास किए जाने के विकल्पों पर भी कार्य करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में हम सभी प्रभावित भाइयों-बहनों की पीड़ा को गहराई से समझते हैं। राज्य सरकार केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि हम उनकी भावनाओं और संवेदनाओं से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से भी अपेक्षा की कि उनके दुख को अपना दुख मानकर, उनके पुनर्वास और जीवन को सामान्य बनाने के लिए पूर्ण मनोयोग से कार्य करें।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जनपदों में अधिकारी फील्ड में रहें और राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर संचालित करें। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव आनंद स्वरूप, एससीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, हेमंत बिष्ट, रोहित कुमार आदि मौजूद रहे। वहीं प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव लोनिवि पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश कुमार, मंडलायुक्त विनय शंकर पाण्डेय, दीपक रावत बैठक में वर्चुअल शामिल हुए।

तमक में बैली ब्रिज जल्द बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ-मलारी नेशनल हाईवे में तमक नाले में बहे पुल को लेकर बीआरओ के अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह पुल राज्य के साथ ही देश के लिए भी सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां जल्द से जल्द बैली ब्रिज बनाकर यातायात को सुचारू किया जाए। उन्होंने कहा बीआरओ को यदि राज्य के स्तर से किसी भी प्रकार की मदद की दरकार है तो वह तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने सचिव लोक निर्माण विभाग श्री पंकज कुमार पांडेय को बीआरओ के अधिकारियों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए।

गंगोत्री हाईवे को यातायात के लिए सुरक्षित बनाया जाए

मुख्यमंत्री ने यात्रा प्रारंभ होने से पहले गंगोत्री हाइवे को सुरक्षित बनाने तथा बेहतर स्थिति में लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से यात्री एक भरोसे के साथ चार धाम यात्रा के लिए आते हैं, उनकी यात्रा को सुरक्षित बनाना हमारा कर्तव्य है, इसमें ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुनः दोहराया कि बरसात समाप्त होने के बाद सभी सड़कों में पेचवर्क तथा नई सड़क बनाने का कार्य हर हाल में प्रारंभ हो जाए। इसमें किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि टेंडर तथा अन्य जो भी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं, उन्हें इसी बीच पूरा कर लिया जाए।

हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में रिवर चौनेलाइजेशन जरूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी के हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में बनी झीलों की स्थिति तथा जल निकासी के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्यानाचट्टी में झील के जलस्तर में पुनः वृद्धि की सूचना मिली है, वहां 24×7 नजर रखी जाए तथा राहत एवं बचाव दल हर वक्त वहां तैनात रहें। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पुल को किसी प्रकार का खतरा न हो। उन्होंने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को निर्देश दिए कि झील के जलस्तर को कम करने तथा अधिक मात्रा में झील से जल निकासी के लिए समुचित प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्यानाचट्टी के लोगों की सभी आवश्यकताओं का ख्याल रखने तथा बिजली पानी की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में काफी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिसे नदी से हटाया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने सुरक्षित स्थानों पर मड डिस्पोजेबल साइट्स बनाने तथा वहां मलबे को डंप करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजने को भी कहा है।

नदियों के जलस्तर पर रात्रि में भी रखी जाए नजर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अगले कुछ दिनों में नदियों के जलस्तर पर गहन निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि के समय भी पहाड़ी तथा मैदानी इलाकों में नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखी जाए। लोगों को सचेत किया जाए और कोई भी खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं।

देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार के लिए रेड अलर्ट

दिनांक 01.09.2025 को राज्य के देहरादून, टिहरी, पौड़ी, तथा हरिद्वार जनपदों में कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने के साथ कुछ स्थानों में भारी से बहुत भारी वर्षा/गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने/वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (रेड अलर्ट)। साथ ही राज्य के शेष जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा / गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने /वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (ऑरेंज अलर्ट)। वहीं दिनांक 02.09.2025 को राज्य के देहरादून, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली एवं बागेश्वर जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा/गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने/ वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (ऑरेंज अलर्ट)।

सीएम धामी के नेतृत्व में भूस्खलन से बंद हुई सड़कों पर यातायात हुआ बहाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और सतत निगरानी में प्रदेश में आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। भारी बारिश व मलबा आने से प्रदेश में कुल 1827 स्थानों पर सड़कें बाधित हुई थीं। इनमें से 1747 सड़कों को खोला जा चुका है, जबकि 80 सड़कों पर कार्यवाही गतिमान है। इस प्रकार मलबे और भूस्खलन से बंद हुई अब तक 95.62 प्रतिषत सड़कों पर यातायात बहाल किया जा चुका है।

जहाँ-जहाँ मलबा आने की संभावना थी, वहाँ पहले से ही जेसीबी और आवश्यक संसाधनों की तैनाती की गई थी। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाए। परिणामस्वरूप प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें तेज़ी से खोली जा रही हैं और लोगों को राहत मिल रही है।

ज्ञातव्य है कि इस वर्ष प्रदेश में पिछले कई वर्षों की तुलना में अधिक बारिश हो रही है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री श्री धामी स्वयं लगातार आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं और राहत व बचाव कार्यों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।

प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार लगातार सक्रिय है और हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सड़क, बिजली, पानी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने की निरंतर निगरानी की जा रही है। सभी विभाग समन्वय बनाकर त्वरित राहत व बचाव कार्य कर रहे हैं।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।

पूर्ण मकान क्षति एवं मृतकों को सीएम राहतः 5-5 लाख की सहायता राशि वितरित

जनपद पौड़ी गढ़वाल में आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा घोषित राहत राशि बाँट दी गयी है। प्रभावितों ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसे संकट की घड़ी में बड़ी राहत बताया है।

मुख्यमंत्री धामी ने 26 अगस्त की शाम को घोषणा की थी कि धराली और थराली के अतिरिक्त पौड़ी में भी आपदा से पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों के स्वामियों तथा मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें से एक हिस्सा एसडीआरएफ मद से तथा शेष राशि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से उपलब्ध करायी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि राहत राशि शीघ्रता एवं पारदर्शिता के साथ लाभार्थियों तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।

शनिवार को जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के त्वरित निर्देशन पर कार्यवाही करते हुए तहसीलदार पौड़ी दीवान सिंह राणा के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में जाकर राहत राशि के चेक वितरित किये। उन्होंने बताया कि आपदा से आवासीय भवन ध्वस्त होने से प्रभावित ग्रामीणों और मृतकों के वारिसों को राहत राशि के चेक सौंपे गये हैं।

गौरतलब है कि भारी बारिश और भूस्खलन से तहसील पौड़ी के ग्राम सैंजी, बुराँसी, रैदुल, फलद्वाड़ी, क्यार्द, कलूण एवं मणकोली में कुल 22 आवासीय भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे, जबकि 6 लोगों की मृत्यु हुई थी। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने 7 अगस्त को स्वयं आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था तथा प्रशासन को त्वरित राहत पहुंचने के निर्देश दिए थे।

प्रभावितों ने राहत राशि मिलने पर कहा कि यह सहायता उन्हें नए सिरे से जीवन स्थापित करने में मददगार साबित होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार ने कठिन परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई कर हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया।

दून पुस्तकालय में नियमित रूप से विदेशी भाषा सीखने को संभावनाएं तलाशेंः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की चतुर्थ जनरल बॉडी मीटिंग आयोजित हुयी। बैठक के दौरान दून पुस्तकालय से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुयी। मुख्य सचिव ने कहा कि रविवार को दून पुस्तकालय खुला रखा जा सकता है जिससे अधिक से अधिक बच्चे इसका लाभ उठा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि दून पुस्तकालय में नियमित रूप से विदेशी भाषा सीखने हेतु कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। उन्होंने इसके लिए सम्भावनाएं तलाशे जाने की बात कही। कहा कि राज्य सरकार द्वारा लगातार राज्य के युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। दून पुस्तकालय द्वारा प्रदेश के युवाओं के लिए विदेशी भाषाओं को सिखाने की दिशा में प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने दून पुस्तकालय में प्रदेश के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 1 से 9 नवम्बर तक रजत जयंती सप्ताह के दौरान विशेष कार्यक्रम संचालित किए जाने की भी बात कही।

बैठक के दौरान बताया गया कि बाल वर्ग के लिए भाषा ज्ञान, नाटक, कहानी, पर्यावरण, संस्कृति जैसे विषयों पर एवं युवाओं के लिए पर्यावरण, साहित्य, भाषा, इतिहास और संस्कृति जैसे विषयों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही, आम जनता के लिए समाज और मानसिक स्थिति, महिला सशक्तिकरण, उपभोक्ता संरक्षण और कानून, वास्तुकला और परिवर्तन, पहाड़ों में खेती का उजाड़ होना आदि विषयों पर भी कार्यक्रम आयोति किए गए हैं।

इस अवसर पर प्रो. बी. के. जोशी, सुभाष कुमार, एस. के. मट्टू एवं एन. रविशंकर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

जन्म और मृत्यु पंजीकरण से सम्बन्धित पुराने दस्तावेजों का भी डिजीटाईजेशन करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के सम्बन्ध में राज्य स्तरीय अन्तर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया एवं समस्याओं के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जन्म-मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से कर लिया जाए। उन्होंने जन्म-मृत्यु पंजीकरण से सम्बन्धित पुराने दस्तावेजों का भी डिजीटाईजेशन किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रार कार्यालयों के बाहर सूचना पट पर रजिस्ट्रार कार्यालय के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी अनिवार्य रूप से लगायी जाए।

मुख्य सचिव ने जनपद स्तर पर जिला रजिस्ट्रार/जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति (डीएलसीसी) की बैठक का आयोजन वर्ष में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से किये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य में फर्जी पोर्टल/वेबसाइटों के माध्यम से जन्म-मृत्यु पंजीकरण के कार्य को रोकने हेतु व्यापक प्रचार सहित आवश्यक कार्यवाही किए जाने की भी बात कही।

इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन, डॉ. आर. राजेश कुमार, निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय ईवा आशीष श्रीवास्तव, अपर सचिव रंजना राजगुरू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।