केंद्रीय सड़क मंत्री से मिले मुख्यमंत्री धामी, विभिन्न सड़क एवं अवसंरचना परियोजनाओं को लेकर की वार्ता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से नई दिल्ली में की गई भेंट के दौरान उत्तराखंड की विभिन्न सड़क एवं अवसंरचना परियोजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर उत्तराखंड की अनेक सड़क एवं अवसंरचना परियोजनाओं के शीघ्र स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया। हाल के वर्षों में चारधाम यात्रा के दौरान पर्यटकों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होने और राज्य की सड़कों पर यातायात का दबाव बढने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों की यातायात वहन क्षमता बढाए जाने व समुचित रख-रखाव के साथ ही क्षेत्रीय संपर्क, पर्यटन और आर्थिक प्रगति की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता की विभिन्न परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति दिया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री के द्वारा राज्य की विभिन्न परियोजनाओं के संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस मौके पर केन्द्रीय सड़क अवसंरचना निधि के अंतर्गत अवशेष प्रतिपूर्ति के सम्बन्ध में उत्तराखण्ड राज्य को प्रतिवर्ष ।बबतनंस के अनुसार देय धनराशि की प्रतिपूर्ति किये जाने हेतु सहमति प्रदान की गई। इस दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के लूप के रूप में बिन्दाल नदी एवं रिस्पना नदी में कुल 26 कि.मी. लंबाई के ऐलिवेटेड रोड़ निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण एवं वनभूमि हस्तान्तरण की कार्यवाही राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इस परियोजना की निर्माण लागत रू. 6164 करोड़ पर देय एस.जी.एस.टी. व रॉयल्टी की धनराशि में राज्य सरकार द्वारा छूट प्रदान किये जाने पर निर्माण हेतु शेष धनराशि का वहन भारत सरकार द्वारा किया जायेगा। इसी तरह पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण से प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-109 (पुराना 87) के संशोधित संरेखण में होने वाले अतिरिक्त व्यय रू. 183 करोड़ में भी राज्य सरकार द्वारा एस.जी.एस.टी. की धनराशि में छूट प्रदान किये जाने पर शेष धनराशि का व्यय भारत सरकार द्वारा वहन किए जाने का भी निर्णय लिया गया।

इस बैठक में खटीमा रिंग रोड का निर्माण एन.एच.ए.आई. के माध्यम से कराये जाने, एनएच संख्या-507 के किमी. 12 से 40 (बाड़वाला-कटापत्थर-जुड्डो-लखवाड़ बैण्ड प्रभाग) का चौड़ीकरण का कार्य तथा एनएच संख्या-534 के किमी. 157 से 175 (दुगड्डा- गुमखाल प्रभाग) का चौड़ीकरण का कार्य पर भी केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री द्वारा सहमति व्यक्त की गयी।

इस अवसर पर यह भी तय किया गया कि ऋषिकेश बाईपास के प्रथम भाग (नेपाली फार्म से ढालवाला) के राजाजी नेशनल पार्क की सीमा के साथ-साथ वाले वैकल्पिक संरेखण में वन भूमि हस्तांतरण हेतु कार्यवाही आगामी तीन माह में पूरा करने के बाद कुल 10.88 किमी. लम्बाई और रू. 1546 करोड़ की लागत की इस परियोजना के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नेशनल हाईवेज एण्ड लॉजिस्टिक्स मैनेजमेन्ट लिमिटेड द्वारा बनाये जाने वाले केदारनाथ रोपवे के निर्माण हेतु मुख्यमंत्री व केन्द्रीय राज्य मंत्री सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से विचार-विमर्श कर निविदा स्वीकृति की कार्यवाही की जाएगी।

उक्त बैठक में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के सचिव वी. उमाशंकर, एन.एच.ए.आई. के सदस्य (एडमिन) विशाल चौहान, उत्तराखण्ड शासन के प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु एवं आर मीनाक्षी सुंदरम तथा सचिव पंकज कुमार पाण्डेय द्वारा प्रतिभाग किया गया।

केंद्रीय मंत्री से मिले सीएम धामी, त्यूनी-प्लासू तथा यपसियाबगड जल विद्युत परियोजना को लेकर हुई वार्ता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव से भेंट कर त्यूनी-प्लासू जल विद्युत परियोजना के लिए वन भूमि के हस्तांतरण के साथ ही रुपसियाबगड जल विद्युत परियोजना के लिए वांछित पर्यावरण स्वीकृति एवं वन भूमि हस्तानांतरण की स्वीकृति दिए जाने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री को अवगत कराया कि विद्युत ऊर्जा की आवश्यकताओं के लिए उत्तराखण्ड को अन्य राज्यों एवं केन्द्रीय पूल से विद्युत ऊर्जा क्रय करनी पड़ती है। विद्युत आपूर्ति की समुचित व्यवस्था एवं राज्य की बढ़ती जरूरतों की पूर्ति के लिए नई पर्यावरण अनुकूल जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण आवश्यक है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में अत्यधिक मदद मिलेगी और राज्य की पलायन की समस्या पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य में यमुना नदी की सहायक नदी टौंस पर प्रस्तावित 72 मेगावाट क्षमता की त्यूनी-प्लासू जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए आवश्यक 47.547 हे. वन भूमि एवं राजस्व भूमि (बंजर भूमि) के हस्तांतरण की शीघ्र स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य में गंगा नदी पर प्रस्तावित परियोजनाओं पर स्वीकृति प्राप्त न होने से यमुना नदी पर तथा कुमायूं क्षेत्र में गौरीगंगा, धौलीगंगा नदियों पर नयी विद्युत परियोजनाओं का निर्माण किया जाना नितांत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सिरकारी भ्योल रुपसियाबगड जल विद्युत परियोजना गौरी गंगा नदी पर प्रस्तावित पहली परियोजना है। 120 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति तथा 29.997 हे. वन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव पर शीघ्र स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सामरिक महत्व एवं राष्ट्रहित को देखते हुए राज्य की इन जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण किया जाना लाभकारी होगा।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से ऋषिकेश स्थित त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक रोपवे विकास के प्रस्ताव को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में स्वीकृत करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह योजना क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के विकास तथा यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगी।

मुख्यमंत्री ने चौरासी कुटिया (बीटल्स आश्रम) के पुनरुद्धार के लिए भी केंद्र सरकार से सहयोग का अनुरोध करते हुए कहा कि इससे ऋषिकेश को वैश्विक स्तर पर योग और पर्यटन हब के रूप में और मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए कैम्पा योजना के अंतर्गत वनाग्नि प्रबंधन की पंचवर्षीय योजना के तहत रूपये 404 करोड़ की विशेष सहायता का आग्रह भी किया। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को सभी प्रस्तावों पर हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा उपस्थित थे।

शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए अभी से तैयारियां शुरू करते हुए हितधारकों से भी संवाद करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली, एवं चल रहे कार्यों एवं आगामी योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन प्रदेश की बैकबोन है। उन्होने निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन के साथ ही अन्य पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए अभी से तैयारियां शुरू करते हुए हितधारकों से भी संवाद किया जाए। उन्होंने कहा कि टिहरी झील रिंग रोड परियोजना का सतत् एवं समावेशी प्लान तैयार किया जाए, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले एवं रोजगार भी उत्पन्न हो।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में क्वालिटी टूरिज्म पर भी फोकस किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए साहसिक पर्यटन, ट्रैकिंग और अन्य गतिविधियों को बढ़ाए जाने के लिए योजनाएं तैयार की जाएं। सभी योजनाओं को निर्धारित समय पर पूर्ण करने के लिए कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने मानसखण्ड मंदिर माला के प्रथम चरण के कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान एक राज्य स्तरीय संग्रहालय बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लोककलाओं एवं लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेश के अभिलेखागारों को अपग्रेड करते हुए उनका डिजिटाइजेशन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने देहरादून स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र का वार्षिक कैलेण्डर तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित लोक गीत, लोक नृत्य, लोक नाटकों के वास्तविक रूप को जीवंत रखने के लिए नाट्य शिविरों के आयोजन के साथ ही रंग मंडलों की स्थापना की जाए। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक दलों के गठन किये जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव सचिन कुर्वे, युगल किशोर पंत, अपर सचिव अभिषेक रोहिला एवं निदेशक संस्कृति बीना भट्ट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती के निर्देश, लोगों से अफवाहों से बचने की अपील

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की परिस्थितियों को देखते हुए चारधाम यात्रा, उत्तराखंड में स्थित महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और बांधों और ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतेजाम किये जाएं। उन्होंने शासन, प्रशासन और पुलिस को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिये हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की वर्चुअल बैठक में प्रतिभाग करने के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे राज्य के सभी क्षेत्रों में सुरक्षा की दृष्टि से पुख्ता इंतजाम किए जाएं, सीमांत क्षेत्रों में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि इस समय राज्य में चारधाम यात्रा चल रही है, जिसमें लाखों तीर्थयात्री प्रतिभाग कर रहे हैं, इसलिए यात्रा मार्ग सहित चारों धामों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कई राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठान हैं, इन संस्थानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी तरह की आपात स्थिति के लिए जिला और तहसील स्तर पर खाद्यान सहित आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाये रखी जाए। अस्पतालों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए अलर्ट रखा जाए। सभी आवश्यक दवाओं का पूर्ण प्रबंध किया जाय। उन्होंने कहा कि नागरिक सुरक्षा दल और स्वयंसेवी संस्थाओं को बचाव और राहत कार्य के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को भी सही सूचनाओं के साथ सतर्क किया जाए, साथ ही इस बात का ध्यान रखा जाए कि जन सामान्य के पास हर तरह से सही और प्रमाणित सूचनाएं ही पहुंचे, ताकि वो अफवाह से दूर रह सकें। साथ ही अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती की जाए। सोशल मीडिया के माध्यम से इस पर लगातार निगरानी रखी जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़ते हुए, कार्मिकों के अवकाश मंजूर न किए जाएं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए। लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि शासन दृ प्रशासन हर तरह से मदद के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बल उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विशेष आभार व्यक्त किया है।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, डीजीपी दीपम सेठ, सचिव शैलेश बगोली, वीके सुमन शामिल हुए।

सीएस ने प्रदेश में नागरिक सुरक्षा पूर्वाभ्यास के सम्बन्ध में अधिकारियों एवं जिलाधिकारियों के साथ बैठक ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में नागरिक सुरक्षा पूर्वाभ्यास के सम्बन्ध में अधिकारियों एवं जिलाधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि यह पूर्वाभ्यास गतिविधियां/मॉक ड्रिल प्रदेशभर में आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह पूर्वाभ्यास आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में अत्यधिक सहायक होंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि इन पूर्वाभ्यास गतिविधियों से आमजन में किसी प्रकार का पैनिक न हो इसके लिए जनता से लगातार संवाद किया जाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिक को इन मॉक ड्रिल और उसके लाभ से अवगत कराया जाए। आपातकालीन परिस्थितियों में सभी विभागों द्वारा क्या-क्या गतिविधियां और कार्यवाही की जानी है, उसके लिए सभी विभागाध्यक्षों द्वारा अपने स्तर से तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि यह एक पूर्वाभ्यास कार्यक्रम है, जिससे राज्य के प्रत्येक नागरिक को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं के प्रति प्रदेश के नागरिकों को जागरूक किए जाने हेतु पूरे प्रदेश में पूर्वाभ्यास गतिविधियां/मॉक ड्रिल आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि आपातकालीन एवं विपरीत परिस्थितियों में आमजन को क्या-क्या करना है या क्या नहीं करना है, इसकी जानकारी उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने कहा कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने विद्यालय एवं अस्पतालों में आपदा से बचाव हेतु जागरूक किए जाने पर भी जोर दिया।

मुख्य सचिव कहा कि पूर्वाभ्यास के साथ ही स्थायी तौर पर आपातकालीन परिस्थितियों के लिए ठोस प्लान तैयार किया जाना चाहिए। इसके लिए राज्य स्तरीय एवं जनपद स्तरीय नागरिक सुरक्षा समितियों को सक्रिय किया जाए। संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर लिया जाए। उन्होंने प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं के दौरान प्रदेश में अलर्ट जारी करने के लिए सायरन सिस्टम दुरूस्त किए जाने के भी निर्देश दिए, साथ ही, एसएमएस और वॉट्सऐप सहित अन्य विकल्पों के माध्यम से अलर्ट का संदेश भेजे जाने के लिए मैकेनिज्म तैयार कर लिए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस) को मजबूतीकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा एवं मानव जनित आपदा सहित युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए भी प्रदेश को और प्रदेश के नागरिकों को जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए संचार तंत्र को मजबूत किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में संचार तंत्र फेल होने पर आपातकालीन संचार व्यवस्था, वायरलैस, सैटेलाईट फोन आदि के लिए भी तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने इसमें सामुदायिक सहभागिता, आपदा मित्र, मंगल दल, एनएसएस एवं एनसीसी को भी शामिल किए जाने की बात कही। मुख्य सचिव ने बड़े बांध एवं संवेदनशील भवनों में सम्भावित खतरे की स्थिति में सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं सहित आपदा प्रबन्धन योजना तैयार रखे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी वाटर हाईड्रेंट्स को सुचारू किया जाएं। नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से बड़े भवनों के सुरिक्षत बेसमेंट आदि को तैयार रखा जाए।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपक सेठ, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगोली, नितेश कुमार झा, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, कमिश्नर गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय एवं सचिव विनोद कुमार सुमन, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर कुमाऊं दीपक रावत, जनपदों से जिलाधिकारी, भारतीय सेना के प्रतिनिधि सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

त्रिजुगीनारायण में शादी के लिए दुनिया भर से आ रहे हैं जोड़े, फेरे लेकर सात जन्मों का ले रहे संकल्प

रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित, शिव- पार्वती का विवाह स्थल त्रिजुगीनारायण वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है। जहां देश विदेश से लोग सनातन परम्पराओं के अनुसार विवाह करने के लिए पहुंच रहे हैं। शादियों के सीजन में अब यहां हर महीने 100 से अधिक शादियां हो रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई मौकों पर डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए उत्तराखंड की ब्रांडिंग कर चुके हैं। इसका असर, त्रिजुगीनारायण मंदिर में साफ तौर पर नजर आ रहा है। जहां लोग देश विदेश से डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए पहुंच रहे हें। इससे यहां होटल कारोबारियों से लेकर पंडे पुजारियों, वेडिंग प्लानर, मांगल टीमों और ढोल दमौ वादकों सहित कई अन्य लोगों को काम मिल रहा है।

2025 में हुई पांच सौ शादियां

क्षेत्र की वेडिंग प्लानर रंजना रावत के मुताबिक, 07 से 09 मई के बीच सिंगापुर में कार्यरत भारतीय मूल की डॉक्टर प्राची, यहां शादी करने के लिए पहुंच रही है। इसके लिए उन्होंने जीएमवीएन टीआरएच बुक किया हुआ है। उन्होंने बताया कि इस साल अप्रैल माह तक ही यहां करीब पांच सौ शादियां हो चुकी है, जबकि 2024 में कुल छह सौ शादियां ही हुई थी। उन्होंने बताया कि अब तक यहां इसरो के एक वैज्ञानिक, अभिनेत्री चित्रा शुक्ला, कविता कौशिक, निकिता शर्मा, गायक हंसराज रघुवंशी, यूट्यूबर आदर्श सुयाल, गढ़वाली लोकगायक सौरभ मैठाणी के साथ ही कई, जानी मानी हस्तियां सात फेरे ले चुके हैं।

रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य

मंदिर के पुजारी सच्चिदानंद पंचपुरी ने बताया कि यहां सनातन मतावलंबियों का विवाह वैदिक परंपराओं के अनुसार सम्पन्न होता है, इसके लिए पहले से रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। साथ ही माता-पिता या अभिभावकों की मौजूदगी में ही विवाह संपन्न होता है। उन्होने बताया कि सात फेरों के लिए मंदिर परिसर में ही वेदी बनाई गई है, इसके बाद अखंड ज्योति के साथ पग फेरा लिया जाता है। इसके अलावा अन्य सभी आयोजन, नजदीकी होटल और रिजॉर्ट में सम्पन्न किए जाते हैं। सीतापुर तक के होटल में अन्य विवाह समारोह भी स्थानीय पुजारियों द्वारा सम्पन्न कराए जाते हैं, इसके लिए दक्षिणा की दरें तय की गई हैं।

त्रिजुगीनारायण मंदिर का महत्व

त्रिजुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। स्वयं भगवान विष्णु ने इस विवाह में देवी पार्वती के भाई (कन्यादान कर्ता) का कर्तव्य निभाया था। मंदिर प्रांगण में एक पवित्र अखंड अग्नि है, मान्यता है कि शिव पार्वती ने इसी अग्नि के सात फेरे लिए थे। मंदिर की बनावट केदारनाथ मंदिर से मिलती-जुलती है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद, उत्तराखंड में देश विदेश के लोग डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। सरकार उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता दे रही है। देवभूमि उत्तराखंड आपका स्वागत करने के लिए तैयार है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

हाउस ऑफ हिमालयाज के प्रमोशन को भारत सरकार, उत्तराखंड में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाएगीः शिवराज

अब देश-विदेश से उत्तराखंड आने वाले सैलानियों को एयरपोर्ट में ही उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों पर आधारित हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद मिल सकेंगे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून में हाउस ऑफ हिमालयाज स्टोर का शुभारंभ किया। इस स्टोर के खुलने से राज्य के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी एवं स्थानीय उत्पादों की बिक्री से राज्य की आर्थिकी भी सशक्त होगी।

राज्य सरकार को इस सराहनीय प्रयास के लिए बधाई देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तराखंड सरकार के अथक प्रयासों से हाउस ऑफ हिमालयाज के स्टोर विभिन्न एयरपोर्ट में खोले जाने से उत्तराखंड के इस अंब्रेला ब्रांड को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा इन उत्पादों गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग भी सर्वश्रेष्ठ है। हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पादों का लाभ उत्तराखंड के साथ देश को भी मिलेगा। उन्होंने कहा हाउस ऑफ हिमालयाज के प्रमोशन और अन्य कामों के लिए भारत सरकार, उत्तराखंड में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाएगी। इनसे एक ओर जहां गुणवत्तापूर्ण उत्पाद आम लोगों को मिलेंगे वहीं दूसरी ओर किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज के स्टोर खुलने से राज्य के उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा यह स्टोर राज्य के किसानों, कारीगरों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों के परिश्रम और हुनर का भी प्रतीक है। स्थानीय उत्पाद राज्य की संस्कृति, परंपरा और पहचान का भी हिस्सा हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाउस ऑफ हिमालयाज का शुभारंभ किया था। आत्मनिर्भर उत्तराखंड की भावना को साकार करने के लिए राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रही। इससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सचिव राधिका झा, अपर सचिव अनुराधा पाल, अपर सचिव मनुज गोयल, अपर आयुक्त ग्राम्य विकास राजेन्द्र सिंह रावत, मुख्य अभियन्ता वी.वी.एस रावत, अधीक्षण अभियन्ता अनिल कुमार एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों के लिए अगले 10 सालों के स्पष्ट प्लान पर किया जाएगा कार्यः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि स्कूलों में बच्चों को पाठ्यचर्या में श्रीमद् भगवत गीता का अध्ययन भी कराया जाए। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार का अगले 10 सालों के स्पष्ट प्लान पर कार्य किया जाए। शिक्षा विभाग द्वारा दिसम्बर 2026 तक शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों का रजतोत्सव कैलेंडर बनाया जाए। बरसात शुरू होने से पहले राज्य के सभी स्कूलों का निरीक्षण किया जाए और स्कूल के रास्तों और पुलों की स्थिति के साथ ही अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी देखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कलस्टर विद्यालयों में आवासीय हॉस्टल की सुविधा के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस का अध्ययन कर प्रस्ताव बनाया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों को आवासीय हॉस्टल में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों। पहले चरण में प्रत्येक जनपद में एक-एक आवासीय हॉस्टल बनाया जाए। 559 कलस्टर विद्यालयों के 15 किमी के अंतर्गत छात्र-छात्राओं की परिवहन व्यवस्था के लिए जल्द प्रस्ताव बनाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर साल बच्चों को पाठ्य-पुस्तकें समय पर मिले। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में ट्रांसफर की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता रहे, इसके लिए सभी पहलुओं का गहनता से अध्ययन कर प्रस्ताव बनाया जाए। जनपद, मण्डल और राज्य स्तरीय कैडर में सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाए। स्कूलों में एनसीसी और एन.एस.एस को बढ़ावा दिया जाए, जिन स्कूलों में अभी इनकी सुविधा नहीं हैं, चरणबद्ध तरीके से स्कूलों का चयन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए राज्य के औद्योगिक प्रतिष्ठानों से सी.एस.आर फण्ड के तहत सहयोग के लिए अनुरोध भी किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों में मरम्मत के कार्यों में तेजी लाई जाए। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। बच्चों की सुरक्षा से संबंधित किसी भी मामले में लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों में छात्रों की क्षमता के अनुसार पूर्ण उपलब्धता हो, इसके लिए प्रतीक्षा सूची भी बनाई जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए आवश्यक संसाधनों में कोई कमी नहीं होने दी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का राज्य में प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में और तेजी से कार्य किये जाएं। बच्चों को नैतिक शिक्षा, पर्यावरणीय शिक्षा, राज्य की सांस्कृतिक विरासत, महानुभावों का उल्लेख, क्षेत्रीय आवश्यकताओं के हिसाब से कौशल विकास, स्वास्थ्य शिक्षा, लोककथा, लोक साहित्य, संगीत और कला को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

बैठक में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव रंजना, महानिदेशक माध्यमिक शिक्षा झरना कमठान, अपर सचिव बेसिक शिक्षा एम.एम. सेमवाल, माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती, बेसिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल अरौर शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी ने विभिन्न पदों पर नियुक्त 139 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए

उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न पदों पर नियुक्त 139 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नियुक्ति पत्र वितरित किए। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के राज्य सरकार के विकल्प रहित संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता एवं ईमानदारी से जुटने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में अब नौकरियां सिर्फ और सिर्फ योग्यता, प्रतिभा व क्षमता के आधार पर मिल रही है। प्रतियोगिता परीक्षाओं को निष्पक्षता व ईमानदारी से संपन्न कराया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि साढ़े तीन वर्षों के दौरान राज्य में विभिन्न सेवाओं में नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अब तेईस हजार के आंकड़े को पार करने वाली है।

मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसर के 52 पदों पर लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों के साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत मेडिकल कॉलेजों के 18 प्रोफेसर्स व 36 एसोसिएट प्रोफेसर और नर्सिंग कॉलेजों में ट्यूटर व मेडिकल सोशल वर्कर के 33 पदों पर चिकित्सा सेवा चयन आयोग के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्षता व ईमानदारी के साथ संपन्न कराने के लिए कड़े प्राविधान किए हैं। पेपर लीक की समस्या को जड़ से समाप्त करने का काम किया गया है। जिसके चलते युवाओं को उनकी योग्यता व प्रतिभा का पूरा सम्मान मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा व परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस सफलता में उनके अभिभावकों व गुरुजनों के योगदान व मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि अध्यापन अधिक जिम्मेदारी का कार्य है, जिसके माध्यम से हम युवाओं का मार्गदर्शन कर उनका भविष्य ही नहीं गढ़ते हैं बल्कि समाज के निर्माण में भी योगदान करते हैं। नवनियुक्त अभ्यर्थियों को इस चुनौतीपूर्ण दायित्व को पूरी ईमानदारी व समर्पण से निभाने के लिए प्रतिबद्धता से जुटना होगा। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी नौकरी ही नहीं बल्कि मानवता की सेवा करने का महान अवसर है। लिहाजा आपके कार्य व्यवहार में हमेशा सेवा की भावना परिलक्षित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक काम हो रहे हैं। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने, नए अस्पतालों का निर्माण व आधुनिकीकरण करने के साथ ही हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने और चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था के सुदृढीकरण के लिए भी ठोस कार्य हो रहे हैं। देश में सबसे पहले उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति को लागू करने का ऐतिहासिक काम किया गया है। प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है और गुणवत्तापरक शिक्षा व्यवस्था के लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किये जा रहे हैं। प्राध्यापकों के खाली पदों को तेजी से भरा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्राध्यापकों को छात्रों को अच्छी शिक्षा देने के साथ ही उनमें समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को उद्यमिता एवं स्टार्टअप के लिए तैयार किया जाय। उत्तराखंड में प्रतिभा और कौशल से परिपूर्ण नवाचार करने वाले युवाओं की भरमार है। उन्हें प्रोत्साहित करने हेतु सरकार अनेक कदम उठा रही है। देवभूमि उद्यमिता योजना के जरिए युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। मेधावी छात्रों को प्रतिमाह छात्रवृत्ति एवं शोध को बढावा देने के लिए रू. 18 लाख तक का शोध अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य को हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सभी लोगों को सामूहिक रूप से जुटे रहने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में उच्च शिक्षा विभाग में फैकल्टी के सभी पदों को भर लिया गया है। ऐसा करने वाला उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य हो गया है। इसी तरह मेडिकल कॉलेजों में नियमित फैकल्टी भरने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में 70 प्रतिशत पद भरे जा चुके हैं और आगामी तीन माह में फैकल्टी के 85 प्रतिशत से अधिक पद भरे जाएंगे। शीघ्र ही मेडिकल कॉलेजों के लिए 400 एसोसिएट प्रोफेसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास एवं सविता कपूर, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन एवं डॉ. जयपाल सिंह, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार भी उपस्थित रहे।

प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियों की स्थापना की जाएगीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में उत्तराखंड पॉवर लिफ्टिंग एसोसिएशन“ द्वारा आयोजित “एशियन सब जूनियर-जूनियर मैन एवं वूमेन कप एवं एशियन यूनिवर्सिटी कप पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता 2025” का शुभारंभ किया।

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड को खेलभूमि के रूप में स्थापित करने उद्देश्य से हमारी सरकार राज्य में शीघ्र ही एक ’स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान’ लागू करने जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियों की स्थापना की जाएगी। इन अकादमियों में प्रत्येक वर्ष 920 विश्वस्तरीय एथलीट और 1000 अन्य खिलाड़ी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। हमारी सरकार हल्द्वानी में उत्तराखंड का प्रथम खेल विश्वविद्यालय एवं लोहाघाट में एक महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में खेलों के समग्र विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने एक नवीन खेल नीति लागू की है। इस नीति के अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को ’आउट ऑफ टर्न’ सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होटल हयात सेंट्रिक देहरादून में उत्तराखंड पावर लिफ्टिंग एसोसिएशन“ द्वारा आयोजित “एशियन सब जूनियर-जूनियर मैन एवं वूमेन कप एवं एशियन यूनिवर्सिटी कप पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता 2025” का शुभारंभ किया।
5 मई से 12 मई तक आयोजित हो रही इस पॉवरलिफ्टिंग चौंपियनशिप में भारत सहित एशिया महाद्वीप के 16 देशों के करीब 300 से अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमारी सरकार ’मुख्यमंत्री खेल विकास निधि’, ’मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’, ’मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना’ तथा ’खेल किट योजना’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के उभरते हुए युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का काम कर रही है। हम ‘उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार’ और ‘हिमालय खेल रत्न पुरस्कार’ प्रदान कर खिलाड़ियों की योग्यता को भी सम्मानित कर रहे हैं। इसके साथ ही हमने राज्य की राजकीय सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए 4 प्रतिशत खेल कोटे को पुनः लागू कर दिया है, जिससे हमारे खिलाड़ियों के परिश्रम और उत्कृष्टता को उचित अवसर और सम्मान मिल सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्राचीन भारतीय इतिहास में शारीरिक शक्ति और कौशल का विशेष स्थान रहा है। प्राचीन समय में जहां हमारे पूर्वज मुगदर, गदा और हल जैसे पारंपरिक उपकरणों से अपने बल और परिश्रम का प्रदर्शन करते थे, वहीं आज उनकी जगह वेट लिफ्टिंग और पावरलिफ्टिंग जैसे आधुनिक खेलों ने ले ली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक पावर लिफ्टिंग में वजन उठाने के जो तरीके हैं, वो इन पारंपरिक भारतीय खेलों से ही प्रेरित हैं। पावर लिफ्टिंग जैसी प्रतिस्पर्धाएं न केवल युवाओं में आत्मविश्वास और अनुशासन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाने में भी अपनी अहम भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल के प्रारंभ से ही “खेलो इंडिया“ और “फिट इंडिया मूवमेंट“ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं।
आज प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत खेलों के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है तथा वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।
उनके मार्गदर्शन में हमारी सरकार भी प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इसी वर्ष हमारे राज्य में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य एवं सफल आयोजन ने उत्तराखंड को “देवभूमि“ के साथ ही “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया हैद्यइस बार के राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने 100 से अधिक पदक जीतकर इतिहास रचते हुए राज्य का गौरव बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।हमने उत्तराखंड में, 517 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक स्टेडियम बनाने के साथ ही लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरण लाकर उत्तराखंड में विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है, इसी का परिणाम है कि आज उत्तराखंड केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के आयोजनों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बन रहा है। जिसका एक उदाहरण ये “पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता“ भी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज यह विश्व स्तरीय स्टेडियम और खेल सुविधाएँ प्रदेश के खिलाड़ियों की ट्रेनिंग का एक मजबूत आधार बन चुके हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि खेल में हार-जीत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण ’खेल भावना’ होती है, क्योंकि ये हमें अनुशासन, धैर्य, सहनशीलता और परस्पर सम्मान सिखाती है, जो केवल खेल परिसर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जीवन के हर पहलू में हमारे लिए मार्गदर्शक बनते हैं।
इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या, विधायक खजान दास, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, अपर सचिव प्रशांत आर्य एवं बड़ी संख्या में विभिन्न देशो के पावर लिफ्टर मौजूद रहे।