सीएम धामी से मिला नेपाल का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में नेपाल के सुदूर पश्चिम प्रांत के मुख्यमंत्री कमल बहादुर शाह के नेतृत्व में 10 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और नेपाल के मित्रतापूर्ण संबधों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया। सीमावर्ती जिलों में आपसी समन्वय से विकास कार्यों को गति देने, सांस्कृति और धार्मिक संबंधों को बढ़ावा देने, पर्यटन विकास एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड और नेपाल की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत साझा हैं और दोनों क्षेत्रों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र में व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में सहयोग के लिए उत्तराखण्ड सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर नेपाल के सुदूर पश्चिम प्रांत के मंत्री वीर बहादुर थापा, सदस्य घनश्याम चौधरी, नरेश कुमार शाही, झपत बहादुर सौद, शेर बहादुर भण्डारी, प्रमुख सचिव सुदूर पश्चिम प्रांत डॉ. कमल प्रसाद पोखरेल शर्मा, सचिव सूरत कुमार बम, राजनीतिक सलाहकार डॉ. जितेन्द्र उपाध्याय मौजूद थे। उत्तराखंड सरकार से प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु और सचिव विनोद कुमार सुमन इस दौरान मौजूद थे।

उत्तराखंडः ज्यातिर्मठ को आपदा से सुरक्षित करने को केंद्र ने मंजूर की 291.15 करोड की धनराशि

भगवान श्री बदरीविशाल के कपाट खुलने की पूर्व संध्या पर केन्द्र सरकार द्वारा उत्तराखण्ड को बड़ी सौगात दी गई। केन्द्र सरकार द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुरोध पर ज्योतिर्मठ को आपदा सुरक्षित करने के लिए 291.15 करोड़ की धनराशि मंजूर की है। मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ के पुनर्निर्माण गतिविधियों के लिये धनराशि की स्वीकृति हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्योतिर्मठ के सुनियोजित विकास तथा सुरक्षित दीर्घकालिक कार्यों के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। ज्योतिर्मठ की देवतुल्य जनता तथा क्षेत्र के विकास के लिए भविष्य में हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से न केवल ज्योतिर्मठ के आपदा प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित किया जा सकेगा, अपितु स्थानीय निवासियों एवं देश-विदेश से भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के सुरक्षित विश्राम हेतु स्थल उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही भगवान बद्रीविशाल के शीतकालीन प्रवास हेतु नरसिंह मंदिर के आस-पास के निवासियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

ज्ञातव्य है कि दिनांक 2 जनवरी, 2023 को ज्योतिर्मठ के कई घरों और अवसंरचनाओं में भू-धंसाव के कारण बड़ी दरारें दिखाई देने लगी थी। ज्योतिर्मठ नगर में स्थित संरचनाओं में से लगभग 22 प्रतिशत संरचनायें इससे प्रभावित हुई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत इस संबंध में शासन के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की जानकारी ली तथा मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र का भ्रमण किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एनडीएमए, यूएसडीएमएम, आईआईटी रुड़की, यूएनडीपी, सीबीआरआई, वाडिया इंस्टीट्यूट, एनआईडीएम, और अन्य एजेंसियों के विशेषज्ञों से युक्त 35 सदस्यीय टीम ने अप्रैल 2023 के चौथे सप्ताह के दौरान पीडीएनए (Post Disaster Need Assessment) करने के लिए ज्योतिर्मठ का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान आवास और पुनर्वास स्वास्थ्य और शिक्षा पेयजल और स्वच्छता सहित नागरिक सुविधाओं सड़क और पुल जैसे स्थानीय स्तर के बुनियादी ढांचे, आपदा जोखिम में कमी और पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण योजनाओं के लिए क्षेत्रवार क्षति का आकलन किया।

उपरोक्तानुसार विशेषज्ञों द्वारा ज्योतिर्मठ भू-धसाव के सम्बन्ध में दी गयी निरीक्षण आख्या के क्रम में उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) द्वारा ज्योतिर्मठ शहर और आसपास के क्षेत्र में पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण गतिविधियों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कराए जाने हेतु वित्तीय सहायता को मंजूरी दी।

मजबूत अवसंरचनाओं का होगा निर्माण

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण ने ज्योतिर्मठ शहर में जमीन के धंसने को रोकने और शहर के निवासियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए विभिन्न परियोजनाएं शुरू करने का प्रस्ताव दिया। प्रारंभ में अस्थिर क्षेत्रों को स्थिर करने और शहर की जलनिकासी और सीवरेज प्रणाली में सुधार करने के लिए परियोजनाओं को शुरू करने की योजना है। इन गतिविधियों से जमीन की स्थिरता में सुधार होगा, जिससे भवन बनाने के लिए मजबूत भूमि उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही घरों और बुनियादी ढांचे के विध्वंस और पुनर्निर्माण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को शुरू करने में मदद मिलेगी।

प्रथम चरण में परियोजनाओं में अलकनंदा नदी के किनारे Toe Protection कार्य ढलान स्थिरीकरण उपाय, Water and Sanitation शामिल हैं। इन पहलुओं पर डीपीआर उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तैयार करायी गयी है और अनुदान की मंजूरी के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार को प्रस्तुत की गई। प्रस्तावित परियोजनाओं को बाद में गृह मंत्रालय में प्रस्तुत किया गया।

उक्त परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु मुख्यमंत्री के स्तर से गृह मंत्री एवं प्रधानमंत्री से समय-समय पर विचार-विमर्श करते हुए यथाशीघ्र धनराशि अवमुक्त किये जाने का अनुरोध किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार किए गए अनुरोध तथा गृह मंत्रालय की सिफारिश के आधार पर धनराशि मिलने से ज्योतिर्मठ शहर को स्थिर करने के लिए योजनाबद्ध गतिविधियों को संपन्न किया जा सकेगा।

‘‘भगवान श्री बदरीविशाल के कपाट खुलने की पूर्व संध्या पर केन्द्र सरकार द्वारा उत्तराखण्ड को बड़ी सौगात देने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह का हार्दिक आभार। ज्योतिर्मठ के सुनियोजित विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। ज्योतिर्मठ की देवतुल्य जनता को भरोसा दिलाता हूं कि एक सुरक्षित, विकसित, सुनियोजित और सुंदर ज्योतिर्मठ शहर का सपना जल्द साकार होगा। इसके लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।’’
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

ईको टूरिज्म की गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाएंः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में ईको टूरिज्म के क्षेत्र में और संभावनाएं तलाशी जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का अधिकतम भू-भाग वन क्षेत्र हैं, जो प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने में सक्षम है। उन्होंने ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ ही इसमें सामुदायिक सहभागिता बढ़ाए जाने की भी बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी गतिविधियों को निर्धारित समय पर शुरू किया जा सके, इसके लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाए और योजनाओं के कैलेंडर के अनुसार संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रकृति से बिना छेड़-छाड़ किए छोटे-छोटे प्रयासों से पारिस्थितिकी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि फॉरेस्ट वॉकिंग, नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियों को बढ़ाया जाए। कहा कि पर्वतारोहण और ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने हेतु सिंगल विंडो सिस्टम में तैयार किया जाए, ताकि देश विदेश से सभी प्रकार की अनुमतियां एक बार आवेदन से प्राप्त हो सकें। उन्होंने वन विभाग को कैंपिंग साइट्स भी बढ़ाए जाने के निर्देश दिए।

फॉरेस्ट से सम्बन्धित गतिविधियों के लिए एकीकृत वेबसाइट की जाए तैयार

मुख्य सचिव ने पर्यटकों की संख्या एवं राजस्व के लक्ष्यों को बड़ा रखने के निर्देश दिए। कहा कि आने वाले समय में योजनाएं लक्ष्यों के अनुरूप बनाई जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अलग-अलग प्रभागों में अलग-अलग संचालित हो रही पर्यटन गतिविधियों अथवा योजनाओं के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स के बजाय एक एकीकृत वेबसाइट तैयार की जाए, ताकि पर्यटकों को एक ही जगह पर सभी पर्यटन गतिविधियों की सम्पूर्ण जानकारी मिल सके।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (वन पंचायत) बी. पी. गुप्ता एवं प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्र, मुख्य वन संरक्षक पी.के. पात्रो सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केदारनाथ पहुंचे विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं से मुख्यमंत्री ने की मुलाकात

विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर केदारनाथ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ परिसर में आयोजित मुख्य सेवक भंडारा में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस दौरान उन्होंने केदारनाथ की स्वच्छता में लगे पर्यावरण मित्रों, पुनर्निर्माण कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सपत्नी मुख्य सेवक भंडारा के तहत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया और भोजन परोसा। अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर श्रद्धालु बेहद खुश नजर आए। इस दौरान हजारों की संख्या में लोगों ने मुख्य सेवक भंडारा का प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ आए श्रद्धालुओं से मुलाकात की एवं उनसे यात्रा को लेकर की गई व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया। यात्रा के लिए राज्य सरकार द्वारा की गई विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा 4 मई को बद्रीनाथ जी के कपाट खुलेंगे। राज्य सरकार देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत एवं उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गत वर्ष केदारनाथ क्षेत्र में आपदा आई थी, जिससे करीब 35 दिन यात्रा बाधित रही। सरकार और प्रशासन ने स्थानीय लोगों के सहयोग से यात्रा को पुनः शुरू किया, जिससे फलस्वरूप रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु चार धाम आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर स्तर पर यात्रा की लगातार मॉनिटरिंग करती है। यात्रा मार्गाे में भी विभिन्न मूलभूत सुविधाएं स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा चार धाम यात्रा राज्य की लाइफ लाइन भी है। यह यात्रा लाखों लोगों की आजीविका का साधन भी है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का संकल्प है कि चार धाम यात्रा साल भर चले, जिसके लिए राज्य में शीतकालीन यात्रा को भी प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए मुखवा, उत्तरकाशी में मां गंगा के दर्शन किए थे।

मुख्यमंत्री ने समस्त प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री का आभार किया। उन्होंने कहा केदारनाथ का पुनर्निर्माण कार्य प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हो रहा है। प्रधानमंत्री केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा करते हैं। 2000 करोड़ की लागत से केदारनाथ का भव्य निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गौरीकुंड से केदारनाथ तक रोपवे निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की है।

इस अवसर गीता पुष्कर धामी, विधायक आशा नौटियाल, डॉ. मधु भट्ट, कर्नल अजय कोठियाल, तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती, अंकित सेमवाल, उमेश पोस्ती, हिमांशु चमोली एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

नगर निगम हरिद्वार के चार अधिकारी निलंबित, जानिए क्या है मामला?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में नगर निगम हरिद्वार द्वारा सराय स्थित भूमि को क्रय किये जाने के प्रकरण में दोषी पाए गए अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की गई है।

इस प्रकरण में 4 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। एक कर्मचारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिये गए हैं जबकि एक अधिकारी का स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

नगर आयुक्त, नगर निगम, हरिद्वार द्वारा उपलब्ध करायी गयी आख्या में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए रणवीर सिंह चौहान, सचिव, गन्ना चीनी, उत्तराखण्ड शासन को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच में पाया गया है कि उक्त भूमि को क्रय किये जाने हेतु गठित समिति के सदस्य के रूप में रवीन्द्र कुमार दयाल, अधिशासी अधिकारी श्रेणी-2 (प्रभारी सहायक नगर आयुक्त), नगर निगम, हरिद्वार, आनन्द सिंह मिश्रवाण, सहायक अभियन्ता (प्रभारी अधिशासी अभियन्ता), नगर निगम, हरिद्वार, लक्ष्मीकांत भट्ट, कर एवं राजस्व अधीक्षक, नगर निगम, हरिद्वार और
दिनेश चन्द्र काण्डपाल, अवर अभियन्ता, नगर निगम, हरिद्वार द्वारा अपने दायित्वों का सम्यक् रूप से निर्वहन नहीं किया गया है। इस पर इन सभी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

इस प्रकरण में सेवा विस्तार पर कार्यरत सेवानिवृत्त सम्पत्ति लिपिक वेदपाल की संलिप्तता पायी गयी है। उनका सेवा विस्तार समाप्त करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश देने के साथ ही निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वित्त अधिकारी नगर निगम, हरिद्वार का स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

भू कानून को मिली राज्यपाल से मंजूरी, प्रदेश में लागू

देवभूमि में भूमि प्रबंधन तथा भू व्यवस्था एवं सुधार के लिए विधानसभा से पारित उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2025 पर महामहिम राज्यपाल की मुहर लगने के साथ ही प्रदेश में सशक्त भू कानून लागू हो गया है। इसी के साथ प्रदेशवासियों की जनभावना के अनुरूप उत्तराखंड में कृषि और उद्यान भूमि की अनियंत्रित बिक्री पर पूरी तरह रोक लग गई है। साथ ही आवासीय, शिक्षा, अस्पताल, होटल, उद्योग जैसी जरूरत के लिए भी, अन्य प्रदेशों के लोगों को निर्धारित कड़ी प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही उत्तराखंड में तय मानकों के अनुसार ही जमीन खरीद पाएंगे। सख्त भू कानून लागू होने से प्रदेश में डेमोग्राफिक चेंज की कोशिशों पर रोकथाम लग सकेगी। प्रदेश की सांस्कृतिक, सामाजिक पहचान को मजबूत बनाने के लिए सख्त भू- कानून को मंजूरी प्रदान करने के लिए राज्यपाल का बहुत-बहुत आभार।

भू अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लोगों के विरुद्ध भी लगातार कार्यवाही की जा रही है। व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, और इस तरह की जमीनों को राज्य सरकार में निहित किया जा रहा है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

गुरूवार से विभागों में अनिवार्य रूप से बायोमैट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करें अधिकारीः बर्द्धन

सभी अधिकारीगण 01 मई, 2025 से स्वयं एवं अपने अधीनस्थ विभागों में अनिवार्य रूप से बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करें। प्रत्येक विभाग अपने विभाग के 05 से 10 महत्वपूर्ण आउटकम निर्धारित करें एवं योजना के अनुरूप कार्य करें। यह निर्देश मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिव समिति के दौरान सभी अधिकारियों को दिए।

जनहित एवं राज्यहित में 10-10 प्रस्तावों की सूची की जाए तैयार

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जनहित एवं राज्यहित में आवश्यक, महत्त्वपूर्ण
एवं प्राथमिकता वाले लगभग 10-10 प्रस्तावों/योजनाओं/कार्यों की सूची (Shelf of projects)
तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि Plinth Area Rates के आधार पर उनकी अनुमानित लागत
का विवरण देते हुए, नियोजन विभाग को तथा उसकी प्रतिलिपि मुख्य सचिव कार्यालय को उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव स्तर पर बैठक तभी प्रस्तावित की जाय, जब प्रकरण नीतिगत हों अथवा अन्तर्विभागीय हो अथवा प्रस्ताव As per rules of business हो अथवा कई विभागों से सम्बन्धित हो या इसका प्रभाव कई विभागों पर पड़ने की सम्भावना हो। उन्होंने कहा कि सामान्य प्रकरणों पर विभाग के स्तर से ही निर्णय लिया जाय। मुख्य सचिव स्तर पर पत्रावली प्रेषित करते समय किन-किन बिन्दुओं पर निर्णय होना है तथा इनके विकल्प क्या-क्या हैं, आदि का भी अनिवार्य रूप से उल्लेख किया जाय। उन्होंने सभी विभागों को अपनी-अपनी विभागीय परिसंपत्तियों की सूची Government Assets inventory पोर्टल पर अपलोड किये जाने के भी निर्देश दिए।

सचिव, अपर सचिव, विभागाध्यक्ष अनिवार्य रूप से क्षेत्रीय भ्रमण पर जाएं

मुख्य सचिव ने सभी सचिवों, अपर सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों को अनिवार्य रूप से क्षेत्रीय भ्रमण पर जाने एवं अपने भ्रमण कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी भ्रमण के दौरान जनपदों में गतिमान विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण भी करें। भ्रमण कार्यक्रम पर जाते समय यह ध्यान रखा जाय कि सचिव एवं अपर सचिव में से तथा सचिव एवं विभागाध्यक्ष में से एक बार में केवल एक ही अधिकारी एक समय पर भ्रमण पर जाए तथा अन्य अधिकारी अपने मुख्यालय में उपस्थित रहे, ताकि राजकीय कार्यों के निर्वहन में असुविधा से बचा जा सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने अधीनस्थ विभागों का Annual Work Calendar बनाये जाने के भी निर्देश दिए, ताकि सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से बिना विलम्ब किये संपन्न कराया जाना सम्भव हो सके।

सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस किया जाए लागू

मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को निर्देश दिए कि जिन विभागों में ई-ऑफिस के माध्यम से अभी तक कार्य आरम्भ नहीं किया गया है, उन सभी विभागों को शीघ्र ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। सभी सचिव एवं विभागाध्यक्ष स्वयं इसकी समीक्षा करते हुए अपने अधीनस्थ कार्यालयों में शीघ्र ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य लागू कराएं। कहा कि ई-ऑफिस के माध्यम से सक्षम स्तर से किसी भी शासनादेश पर अनुमति के उपरान्त सम्बन्धित पोर्टल पर उस शासनादेश को अपलोड किये जाने हेतु व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।

इस अवसर पर सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा Digital Uttarakhand Portal के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण किया गया। उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से अधिकारियों को विभिन्न Portal/Applications के लिए Single Sign-in की सुविधा प्राप्त हो सकेगी तथा नागरिकों को एक ही Portal के माध्यम से विभिन्न विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न नागरिक सेवाओं के लिये Log-in की सुविधा प्राप्त हो सकेगी। यह पहल राज्य को Digital रूप से सक्षम बनाकर समावेशी एवं प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

इसके उपरान्त निदेशक, आई0टी0डी0ए0 द्वारा राज्य में डिजिटल परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी हेतु विकसित किये गये पी0एम0 गतिशक्ति पोर्टल की प्रस्तुति की गयी है, जिसमें निदेशक, आई0टी0डी0ए0 द्वारा बताया गया कि वर्तमान में पी0एम0 गतिशक्ति पोर्टल के द्वारा राज्य में 01.00 करोड़ रूपये से अधिक की लागत की सभी परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की वास्तविक समय की मॉनिटिरिंग की जा रही है। भविष्य में आई0टी0डी0ए0 द्वारा पी0एम0 गतिशक्ति, भारत सरकार, ई-डी0पी0आर0, UKGAMS पोर्टल को IFMS एवं ई-ऑफिस के साथ एकीकृत करते हुए राज्य के समस्त परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का अवलोकन किया जा सकता है।

निदेशक, आई0टी0डी0ए0 ने कहा कि इसमें शासकीय कार्यों को मॉनिटरिंग करने के उद्देश्य से Official Log-in की सुविधा प्रदान की गयी है जिसके द्वारा सचिवगण एवं विभागाध्यक्ष अपने विभाग से सम्बन्धित विभिन्न ई-सेवाओं की रियल टाईम मॉनिटरिंग कर सकते हैं। वर्तमान में Digital Uttarakhand Portal के अन्तर्गत अपणी सरकार पोर्टल, IFMS, E-Office, मुख्यमंत्री घोषणा, ई-मंत्रिमण्डल, सी0एम0 हेल्पलाइन, पी0एम0 गतिशक्ति, कोर्ट केस, ई-डी0पी0आर0, सी0एम0 डैशबोर्ड(दर्पण) आदि को एकीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि Digital Uttarakhand Portal द्वारा सचिवगण एवं विभागाध्यक्ष अपने विभाग से सम्बन्धित वित्तीय आय-व्यय का वित्तीय वर्षवार मॉनिटरिंग, स्वयं तथा अधीनस्थ अधिकारियों के स्तर पर लम्बित ई-ऑफिस फाइलों/निस्तारित फाईलों का विवरण, सी0एम0 हेल्पलाइन पोर्टल के स्वयं के स्तर पर लम्बित शिकायतों/निस्तारित शिकायतों एवं अपने अधीनस्थ कार्यरत अधिकारी/कर्मचारियों की लम्बित/निस्तारित शिकायतों का विवरण रियल टाईम पर मॉनिटर कर सकते है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांश, एल. फैनई, प्रदीप पन्त, विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा, सचिव नितेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ0 पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ0 रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ0 वी0 षणमुगम, डॉ0 आर0 राजेश कुमार, डॉ0 नीरज खैरवाल, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, विनोद कुमार सुमन, दीपक कुमार, सी0 रविशंकर, युगल किशोर पंत, रणवीर सिंह चौहान, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे उपस्थित थे।

डिफेंस प्रोडक्शन हब बनेगा उत्तराखंडः धामी

सीएम धामी ने उत्तराखंड को डिफेंस प्रोडक्शन हब के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार युवाओं में टेक्नॉलजी के प्रति रूझान पैदा करने का प्रयास करने के साथ ही युवाओं को इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ाकर उत्तराखण्ड को ड्रोन एवं रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून छावनी के जसवंत ग्राउंड में आयोजित ‘‘सूर्या ड्रोन टेक 2025’’ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए तथा ड्रोन प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड द्वारा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एस.आई.डी.एम.) के सहयोग से आयोजित यह दो दिवसीय प्रदर्शनी (29-30 अप्रैल, 2025) देश में विकसित अत्याधुनिक ड्रोन प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित कर रही है, जो बहुआयामी सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप हैं और ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ अभियान से प्रेरित हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य में ड्रोन तकनीक आपदा राहत कार्यों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इसलिए हमारी सरकार का प्रयास है कि हमारे युवा न केवल ड्रोन विशेषज्ञ बनें, बल्कि नागरिक उपयोग के लिए भी टेक्नोलॉजी आधारित समाधान विकसित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी नई औद्योगिक नीतियों में रक्षा उत्पादन और टेक इनोवेशन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सूर्या ड्रोन टेक 2025 विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा का समागम है।
इस प्रकार के आयोजन न केवल आधुनिक तकनीकी उपलब्धियों के प्रदर्शन हेतु विशिष्ट मंच प्रदान करते हैं, बल्कि हमारे नौजवानों को ड्रोन और तकनीकी के क्षेत्र में इनोवेशन के लिए प्रेरित भी करते हैं। यह उत्तराखंड को ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक ठोस कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रोन तकनीक में विविधता भारत की आत्मनिर्भर तकनीकी क्षमताओं का जीवंत प्रमाण है। यह देखकर गर्व होता है कि भारत अब न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि तकनीकी इनोवेशन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ड्रोन तकनीक आज सुरक्षा से लेकर शिक्षा, आपदा प्रबंधन, कृषि तथा प्रत्येक क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में ड्रोन टेक्नोलॉजी और सैन्य क्षेत्र में नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। सैन्य क्षेत्र में नवाचार की महत्ता को समझते हुए हमारी सरकार भी उत्तराखंड में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।

सूर्या ड्रोन टेक-2025 के इस कार्यक्रम में मध्य कमान और सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चर्स के सभी सदस्य, ड्रोन विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स, डैडम्’ै, एनसीसी कैडेट्ड और स्कूली छात्र मौजूद रहे।

गंगोत्री और यमुनोत्री के खुले कपाट, पीएम मोदी के नाम से दोनों धामों में की गई पहली पूजा

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बुधवार को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसके साथ ही उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा 2025 का भी शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों धामों में कपाटोद्घाटन समारोह में संकल्प लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से पहली पूजा की और चारधाम यात्रा के सफल आयोजन तथा देश-प्रदेश की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना की है। श्री पुष्कर सिंह धामी यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन में पहुंचने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं। इस अवसर पर गंगोत्री एवं यमुनोत्री मंदिर के ऊपर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार आज सुबह मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी स्थित भैरव मंदिर से चलकर गंगोत्री धाम पहुंची। गंगोत्री धाम में विशेष पूजा-अभिषेक के साथ पूर्वाह्न 10 बजकर 30 मिनट पर गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गये। मां यमुना की डोली शनिदेव महाराज की अगुवाई में शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली से चलकर यमुनोत्री धाम पहुंची। धार्मिक विधि- विधान के साथ पूर्वाह्न 11 बजकर 55 मिनट पर यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। कपाट खुलने के अवसर पर देश विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने अखंड ज्योति के दर्शन किये तथा गंगा और यमुना में स्नान कर पुण्य अर्जित किया।

गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन समारोहों में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मॉ गंगा एवं यमुना के मंदिरों में शीश नवाया और विशेष पूजा-अर्चना की। धामी ने दोनों धामों में पहुंची लोक देवताओं की डोलियों से भी आशीष प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। उत्तराखण्ड के चार धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं और इन धामों की यात्रा का सौभाग्य प्राप्त करने की आकांक्षा हर श्रद्धालु के मन में रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए राज्य में व्यापक प्रबंध किये गये हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगमता को ध्यान में रखते सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किये गये हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में श्रद्धालु को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिथि देवो भवः की परंपरा के अनुसार हमारा प्रयास है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालु देवभूमि उत्तराखण्ड से दिव्य धामों के शुभाशीष के साथ ही यात्रा का सुखद अनुभव लेकर जाएं। मुख्यमंत्री ने ग्रीन और क्लीन चारधाम यात्रा के आयोजन के लिए सभी लोगों से सहयोग की अपील भी की है।

गंगोत्री धाम में कपाटोद्घाटन के अवसर पर विधायक सुरेश चौहान, गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल, पूर्व विधायक विजय पाल सजवाण, भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान, किशोर भट्ट, जिलाधिकारी उत्तरकाशी डॉ.मेहरबान सिंह बिष्ट, पुलिस अधीक्षक सरिता डोबाल, आदि मौजूद थे। यमुनोत्री धाम में कपाटोद्घाटन के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी उत्तरकाशी एस.एल सेमवाल, उप जिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी, यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष संजीव उनियाल, सचिव सुनील उनियाल भी मौजूद थे।

सीएस बर्द्धन ने लिया जिलाधिकारियों से चारधाम यात्रा की तैयारियों का जायजा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में चारधाम यात्रा की तैयारियों के सम्बन्ध में जायजा लिया। उन्होंने सम्बन्धित जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखण्ड आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा को अपनी शीर्ष प्राथमिकता पर रखा जाए। मुख्य सचिव ने बुधवार से शुरू हो रही गंगोत्री धाम एवं यमुनोत्री धाम की यात्रा के लिए जिलाधिकारी उत्तरकाशी को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुखद यात्रा और सकुशल वापसी हमारी जिम्मेदारी है।

मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा मार्गों में आवश्यक सेवाओं जैसे सब्जी, राशन और गैस आदि की आपूर्ति करने वाले वाहनों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या के लिए कमिश्नर और आईजी सिंगल कॉन्टैक्ट पॉइन्ट होंगे। उन्होंने चारधाम एवं यात्रा मार्गों पर ओवर रेटिंग पर भी निगरानी रखे जाने के निर्देश दिए। इसके लिए निगरानी तंत्र को बढ़ाया जाए।

मुख्य सचिव ने चारों धामों में स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारी के लिए सचिव स्वास्थ्य से अद्यतन जानकारी लेते हुए केदारनाथ में नवनिर्मित अस्पताल को शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से अधिक से अधिक यात्रियों के स्वास्थ्य परीक्षण पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां पर श्रद्धालु वाहनों से उतरते हैं, वहां पर स्वास्थ्य परीक्षण कराए जाने के लिए रिकॉर्डेड जागरूकता संदेश लगातार चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वास्थ्य परीक्षण कराएं। ऐसे स्थलों में होमगार्ड एवं पीआरडी जवानों की संख्या भी अधिक रखी जाए। मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा मार्ग पर सड़कों की स्थिति की भी जानकारी ली।

जिलाधिकारी उत्तरकाशी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते यात्रा मार्ग पर शौचालय, पार्किंग और यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ किया गया है। चारधाम यात्रा 2025 के सुगम, सुरक्षित और सफलतापूर्वक संचालन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारी की गई है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रमुख मार्गों को सुगम और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया गया है। जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग डॉ. सौरभ गहरवार एवं जिलाधिकारी चमोली डॉ. संदीप तिवारी ने भी चारधाम यात्रा की तैयारियों की जानकारी दी।

इस अवसर पर एडीजी डॉ. वी. मुरूगेशन, सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव रीना जोशी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।