सीएम ने एसडीआरएफ को 05 लाख रुपए का पुरस्कार चेक किया प्रदान

हरिद्वार कुंभ में प्रयागराज महाकुंभ के अनुभव काम आयेंगे। एसडीआरएफ टीम ने महाकुंभ में अपनी दक्षता का कुशल परिचय देकर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। यह बात सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सीएम आवास में एसडीआरएफ के 112 कार्मिकों के वापस आने पर आयोजित महाकुंभ प्रयागराज 2025 अभिनन्दन कार्यक्रम में बात कही। इस मौके पर उन्होंने एसडीआरएफ की टीम को पुरस्कार स्वरूप 05 लाख रुपए का चेक भी सौंपा।

मुख्यमंत्री ने महाकुंभ प्रयागराज में बेहतर सेवाएं देने पर एसडीआरएफ की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये अनुभव हरिद्वार के 2027 कुंभ में काम आयेंगे। कुंभ को भव्य रूप से आयोजित करने में मदद भी मिलेगी। इस महाकुंभ से हमारे जवानों का आत्मविश्वास बढ़ा है तथा भीड़ का कुशल प्रबंधन करने में सफल होंगे।

सीएम धामी ने कहा कि सनातन धर्म के महासंगम की चुनौती को संभालना चुनौतीपूर्ण कार्य था। बेहतर व्यवस्थाओं और प्रबंधन से यूपी के साथ ही उत्तराखंड सरकार का सर ऊंचा हुआ है। यही अनुभव 2027 के कुंभ में मददगार साबित होंगे। हमारा प्रयास है कि वाहनों के लिए सुनियोजित पार्किंग व्यवस्था हो जिसके लिए सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए एसडीआरएफ द्वारा सराहनीय कार्य किए गए हैं। श्रेष्ठ आपदा प्रबंधन में एसडीआरएफ की अहम भूमिका रही है। आपदा प्रबंधन के लिए क्विक रिस्पॉन्स और अत्याधुनिक उपकरणों से राज्य में आपदा के प्रभाव को कम करने में काफी मदद मिली है।

इस मौके पर उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति विनय रोहिला, सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, एडीजी अमित सिन्हा, वी मुरुगेशन, ए. पी अंशुमन, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, आईजी एसडीआरएफ रिद्धिम अग्रवाल, कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी, एसडीआरएफ के अधिकारी और जवान उपस्थित थे।

ग्रामोत्थान परियोजना चमोली में महिलाओं की आजीविका को कर रही मजबूत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चमोली जनपद में ग्रामोत्थान परियोजना ग्रामीणों की आर्थिकी को मजबूत कर रही है। जिले में योजना के तहत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को स्वरोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिससे ग्रामीण घर पर बैठकर ही अपनी आय को मजबूत कर रहे हैं।

जिला परियोजना प्रबंधक ममराज सिंह चौहान ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना के तहत जनपद में 25 क्लस्टर लेवल फेडरेशन बनाई गई है। जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी, पालन, डेयरी यूनिट, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन, ब्यूटी पार्लर, सिलाई सेंटर, रिटेल शॉप, फर्नीचर निर्माण, ढाबा, रेस्टोरेंट, फूड प्रोसेसिंग यूनिट जैसे उद्यमों का संचालन किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण अपनी आजीविका को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत जनपद में कृषि आधारित योजनाओं में 53, गैर कृषि आधारित उद्यम में 55 तथा एक्ट्रीम व अल्ट्रा पुअर योजना के तहत 300 ग्रामीणों को लाभान्वित किया गया है। योजना की जानकारी देते हुए बताया कि कृषि आधारित व व्यक्तिगत उद्यम योजना में परियोजना की ओर से 30 प्रतिशत तथा लाभार्थी की ओर से 20 प्रतिशत का अंशदान किया जाता है। जबकि शेष धनराशि बैंक ऋण के माध्यम से प्रदान की जाती है। जिससे ग्रामीण उद्यम की स्थापना कर सकता है।

क्या कहते हैं लाभार्थी-

केस-1

टंगसा गांव निवासी मंजू देवी का कहना है कि ग्रामोत्थान परियोजना की मदद से उन्होंने व्यक्तिगत उद्यम योजना के तहत वर्ष 2024-25 में मिनी डेयरी का उद्यम स्थापित किया। जिससे उनको आर्थिक रूप से मजबूती मिली है। बताया कि प्रतिदिन मिनी डेयरी से वे 22 लीटर दूध का विपणन कर 18 से 20 हजार तक की आय प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से संचालित योजना से उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है।

केस-2

कुजौं-मैकोट निवासी अमिता देवी का कहना है कि ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से उन्होंने गांव में रिटेल शॉप स्थापित की। जिसके माध्यम वर्तमान में घर पर ही रहते हुए 10 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध आय प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने योजना को गरीब तबकी की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए कारगर बताया है।

पर्वतीय प्रवासी जन-कल्याण समिति गाजियाबाद में हुआ उत्तरैणी-मकरैंण महोत्सव, सीएम ने किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इंदिरापुरम, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में पर्वतीय प्रवासी जन-कल्याण समिति गाजियाबाद द्वारा आयोजित उत्तरैणी-मकरैंण महोत्सव में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने उत्तरैंणी-मकरैंण महोत्सव में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि यह महोत्सव उत्तराखंड की संस्कृति वेशभूषा खानपान और अपनेपन का संगम है। उन्होंने कहा आयोजकों द्वारा हमारी समृद्ध विरासत का संरक्षण कर उसे आगे बढ़ाने का कार्य किया जाना, सराहनीय है। इस प्रकार के महोत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत लोक कला लोक संगीत को बढ़ावा देने के साथ उत्तराखंडी प्रवासियों को प्रेम के एक सूत्र में पिरोने का भी कार्य करते हैं। महोत्सव में पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और उत्तराखंडी व्यंजनों को भी प्रदर्शित किया गया है। जो इन उत्पादों को नई पहचान देंगे।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रवासियों से उत्तराखंड स्थित उनके पुश्तैनी गांव, पहाड़ों के विकास में सहभागी बनने का आवाहन किया। उन्होंने कहा अपनी पैतृक भूमि में निवेश कर वहां स्वरोजगार, लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर अपनी जन्मभूमि को आगे बढ़ाना है। राज्य सरकार ने प्रवासी भाई बहनों के साथ सम्मेलन कर राज्य के विकास को लेकर भी चर्चा की। पूरे देशभर में रहने वाले हमारे प्रवासी भाई बहन उत्तराखंड आए थे, और उनसे कई विषयों पर मंथन हुआ। प्रवासी उत्तराखण्डियों ने अपने गांव को भी गोद लिया है। जिससे वो उत्तराखंड के विकास में सहभागी बनेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और विरासत को साथ में बढ़ाया जा रहा है। देश में बड़े धार्मिक स्थलों का विकास / पुनर्निर्माण किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल लोक, अयोध्या में श्री राम मंदिर परिसर का भी भव्य दिव्य परिसर बना है। उन्होंने कहा उत्तराखंड राज्य सरकार ने विकास के साथ सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का भी कार्य किया है। राज्य में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी जैसे अनेकों क्षेत्रों में विकास कार्य जारी हैं। श्री केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य, भगवान बद्री विशाल के परिसर का मास्टर प्लान, चारों धामों में ऑल वेदर रोड, मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत मंदिरों का सर्किट जैसे अनेकों क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा 2027 में देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होने जा रहा है, जिसके लिए हरिद्वार ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर का कार्य भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। टनकपुर में शारदा कॉरिडोर का कार्य किया जा रहा है। राज्य में विकास कार्यों के साथ रोजगार और स्वरोजगार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। होमस्टे योजना, लखपति दीदी योजना, एक जनपद दो उत्पाद एवं हाउस आफ हिमालयाज के माध्यम से स्थानीय आजीविका को आगे बढ़ाने का कार्य जारी है। देवभूमि की मातृशक्ति कौशल और परिश्रम से भरी हैं, जिसके फलस्वरूप राज्य में 01 लाख लखपति दीदी बनीं हैं। देवभूमि के उत्पादों की मांग देश दुनिया में बढ़ती जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इकोलॉजी और इकनॉमी में समन्वय बनाकर विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों की सूची में राज्य को प्रथम स्थान मिला है। राज्य से नकल माफियाओं को उखाड़ फेंकने का कार्य राज्य सरकार ने किया। अब प्रतिभावान छात्रों को रोजगार मिल रहा है। बीते 3 सालों में 20 हज़ार से ज्यादा लोगों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। राज्य के संकल्प अनुसार हमने अब तक 20 हजार सरकारी नौकरियां देने का कार्य किया है। उत्तराखंड की डेमोग्राफी बचाए रखने के लिए धर्मांतरण कानून लागू किया गया है। राज्य ने सख्त दंगारोधी कानून लागू हो गया है। देश की आजादी के बाद उत्तराखंड ने सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू किया। जिसका गौरव प्रत्येक उत्तराखंडवासी को प्राप्त है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बजट सत्र में राज्य में सशक्त भू कानून लागू किया है। उन्होंने कहा राज्य सरकार, प्रदेश की जमीनों को बर्बाद नहीं होने देगी। उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा और विरासत को जीवंत रखने और इसे पूरा करने में सभी का सहयोग मिलता रहेगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री (उत्तर प्रदेश सरकार) सुनील शर्मा, सागर रावत, विजय रावत, दिनेश बड़ोला, पी.एन शर्मा, आशीष नेगी, मोहन नेगी, खीम सिंह नेगी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने एसईओसी पहुंचकर रेस्क्यू अभियान की समीक्षा की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माणा में हिमस्खलन की चपेट में आए लापता 04 श्रमिकों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर खोज और बचाव अभियान संचालित करने तथा मौसम विभाग द्वारा 03 मार्च से मौसम के दोबारा खराब होने की चेतावनी के दृष्टिगत रविवार को हर हाल में लापता श्रमिकों को ट्रेस करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने सुरक्षित रेस्क्यू किए गए 46 श्रमिकों के उपचार की समुचित व्यवस्था करने तथा उनकी जरूरतों का पूरा ख्याल रखने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचे और रेस्क्यू अभियान की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी चमोली संदीप तिवारी से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से खोज एवं बचाव अभियान की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा दिनांक 03 मार्च से दोबारा मौसम के खराब होने का एलर्ट जारी किया है, इसलिए आज ही रविवार को लापता श्रमिकों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारी चमोली को निर्देश दिए कि मृतक श्रमिकों का पोस्टमार्टम कर उनके शवों को शीघ्रताशीघ्र उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने घायल श्रमिकों तथा मृतक श्रमिकों को आपदा प्रबंधन विभाग के प्रावधानों के अनुसार समुचित मुआवजा राशि मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत और बचाव दलों द्वारा सराहनीय कार्य किया गया, जिसके फलस्वरूप 46 श्रमिकों को सुरक्षित बचाया जा सका। उन्होंने बताया कि लापता श्रमिकों की खोजबीन के लिए लगभग 200 लोग कार्य कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन सेना, आईटीबीपी, बी0आर0ओ0, एन0डी0आर0एफ, एस0डी0आर0एफ, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, वायु सेना, यूकाडा, अग्निशमन विभाग, खाद्य विभाग द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी और मार्च में हिमस्खलन की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में आपदा प्रबन्धन विभाग के माध्यम से एडवाइजरी जारी कर दी गई है। जो भी श्रमिक उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण विद्युत व्यवस्था तथा संचार व्यवस्था बाधित है, उन्हें दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। पांच ब्लाकों में विद्युत व्यवस्था बहाल कर दी गई है।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष राज्य सलाहकार समिति आपदा प्रबंधन विनय कुमार रुहेला, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, आई0जी0 एस0डी0आर0एफ0, रिद्धिम अग्रवाल, अपर मुख्य कार्यकारी, अधिकारी क्रियान्वयन, डी.आई0जी0 राज कुमार नेगी, वित्त नियंत्रक अभिषेक आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यूएसडीएमए मोहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी, डा0 बिमलेश जोशी आदि उपस्थित रहे।

46 सुरक्षित श्रमिक ज्योतिर्मठ लाए गए

बदरीनाथ/माणा से सभी 50 श्रमिकों (46 सुरक्षित तथा 04 मृतक) को ज्योतिर्मठ लाया जा चुका है। मृतक श्रमिकों का पोस्टमार्टम कराये जाने की कार्यवाही गतिमान है, जिसके बाद उनके शवों को उनके घर भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री जी के निर्देशन में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सभी के साथ समुचित समन्वय किया जा रहा है। लगातार राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के माध्यम से नियमित तौर पर पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है तथा सभी विभागों के आपसी समन्वय से युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य किया जा रहा है। बता दें कि पूर्व में श्रमिकों की संख्या 55 बताई गई थी। एक श्रमिक के घर फोन कर संपर्क किया गया तो पता चला कि पहले ही एक श्रमिक बिना बताए अपने घर चला गया था। इस प्रकार प्रभावित/फंसे श्रमिकों की कुल वास्तविक संख्या 54 है।

आधुनिक उपकरणों से की जा रही खोज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि लापता श्रमिकों की तलाश के लिए सर्च एवं रेस्क्यू के लिए आधुनिक उपकरणों की मदद ली जा रही है। आज दिनांक 02.03.2025 को GPR (Ground Penetrating Radar) जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंची, जिसे एम0आई0-17 हेलीकॉप्टर द्वारा घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। इसके अतिरिक्त एन0डी0आर0एफ0 द्वारा थर्मल-इमेजिंग कैमरा, विक्टिम लोकेटिंग कैमरा, RRSAW (ROTARY RESCUE SAW), एवलांच रॉड, डॉग स्क्वाड को घटना स्थल पर भेजा जा चुका है तथा इनके माध्यम से व्यापक स्तर पर रेस्क्यू अभियान संचालित किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर एस0डी0आर0एफ0 तथा यू0एस0डी0एम0ए0 द्वारा थर्मल-इमेजिंग कैमरा, विक्टिम लोकेटिंग कैमरा भी मौके पर भेज दिया गया है तथा इनके द्वारा भी लापता 04 श्रमिकों खोज की जा रही है।

युवा लेखक जय प्रकाश पांडेय की कहानी ‘भूले बिसरे मतवाले’ का हुआ विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में युवा लेखक जय प्रकाश पांडेय के कहानी संग्रह ‘भूले बिसरे मतवाले’ का विमोचन किया।

यह पुस्तक आजादी के अमृत महोत्सव की पूर्वपीठिका में भारतीय स्वाधीनता संग्राम के गुमनाम नायकों के बलिदान और संघर्षों को केंद्र में रखकर लिखी गई है ।

मुख्यमंत्री ने ‘भूले बिसरे मतवाले’ की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन महान नायकों को श्रद्धांजलि है, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। उन्होंने लेखक जय प्रकाश पाण्डेय के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संग्रह नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के बलिदान से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने माणा पास स्थित घटना स्थल का हवाई निरीक्षण किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ज्योर्तिमठ पहुंचे। जहां उन्होंने रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया। उन्होंने घटनास्थल का हवाई निरीक्षण भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 55 में से 50 लोगों को सर्च और रेस्क्यू किया जा चुका है। बाकी 5 लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। जो लोग रेस्क्यू किए गए हैं उनको ज्योतिर्मठ लाया जा रहा है। सभी का उपचार किया जा रहा है। आवश्कता पड़ने पर हायर सेंटर भी रेफर किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आर्मी हास्पिटल में उपचारधीन मजदूरों से मुलाकात कर हालचाल जाना। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि खोज बचाव कार्य में किसी प्रकार आवश्यक संसाधनों की कमी न रहे जो भी आवश्यकताएं हैं उनको समय से चिन्हित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार से पूरी मदद मुहैया की जा रही है।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए बताया कि कल 6 बजे करीब माणा पास के निकट हिमस्खलन हुआ। वहीं पर बीआरओ के 57 मजदूर कंटेनरों में रहते थे जिनमें से 2 मजदूर छुट्टी पर थे। 55 मजदूरों में से आईटीबीपी, सेना ने तेजी से खोजबीन करते हुए अब तक 50 लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है। केन्द्र सरकार व राज्य सरकार की ओर से 04 हेलीकॉप्टर भेजे गए हैं। जिनकी मदद से अभी तक 25 मजदूरों को ज्योर्तिमठ लाया गया है। जिनमें से 4 मजदूरों को गंभीर चोटें आयीं हैं। उनका आर्मी अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की देख रेख में इलाज चल रहा है।

जिलाधिकारी ने आईटीबीपी और आर्मी द्वारा किए गए रेस्क्यू अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा एनडीआरएफ 28 सदस्यीय टीम भी घटना स्थल पर पहुंच चुकी है। उन्हें काफी अनुभव है जिस तरह रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है बाकि मजदूरों को जल्द रेस्क्यू किया जाएगा।

इस दौरान पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, एसडीएम चन्द्रशेखर वशिष्ठ व एसीएमओ एमएस खाती मौजूद रहे।

हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ स्थल के पुनरुद्धार की दिशा में किया जा रहा है तेजी से कार्य

सनातन संस्कृति में यज्ञों का हमेशा से ही एक विशिष्ट स्थान रहा है, हमारे वेदों में यज्ञ को धर्म का मेरुदंड कहा गया है। ये देवताओं और मनुष्यों के बीच सेतु का कार्य करते हैैं। ये न केवल हमारी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि समाज को धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक रूप से भी समृद्ध बनाते हैं। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिव मंदिर शंकरपुर सहसपुर में आयोजित 63वें भव्य कोटि लिंग रुद्र महायज्ञ में शामिल होकर कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सनातन परंपराओं की दिव्यता और भव्यता का जीवंत प्रमाण है। एक सप्ताह तक चलने वाले इस महायज्ञ में 151 विद्वान् वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक ऋचाओं के सामूहिक उच्चारण के साथ भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा, जिससे न केवल इस क्षेत्र में बल्कि संपूर्ण देश और प्रदेश में आध्यात्मिक ऊर्जा की वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की पताका संपूर्ण विश्व में लहरा रही है और दुनिया भर के देश हमारी प्राचीन संस्कृति और दर्शन से परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में, हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ स्थल के पुनरुद्धार की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण यमुना तीर्थ सर्किट का भी भव्य निर्माण किया जाएगा, जिसके अंतर्गत यमुना जी पर विभिन्न घाटों का निर्माण होगा। इन घाटों के निर्माण के पश्चात हरिद्वार, ऋषिकेश और देवप्रयाग की भांति भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा, जिससे ये पवित्र स्थान एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी विकसित होगा। उन्होंने इस भव्य कोटि रुद्र महायज्ञ के सफल आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएं दी और भगवान शिव से प्रार्थना कि वे राज्य के सभी निवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करें।

इस अवसर पर विधायक सहसपुर सहदेव सिंह पुंडीर, धर्मार्थ सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य नित्यानंद सेमवाल, जिलाध्यक्ष मीता सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष हरबर्टपुर नीरू देवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

भारतीय सनातन संस्कृति है ज्ञान विज्ञान एवं आध्यात्म का अद्वितीय संगमः सीएम

भारतीय सनातन संस्कृति में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व जिन सिद्धांतों की खोज की थी, वे आज वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो रहे हैं। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान धाम झाझरा में आयोजित कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार विजेता, भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. सी.वी. रमन को भावांजलि अर्पित करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून देश की पांचवी साइंस सिटी बन रही है, जो उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि साइंस सिटी हमारे राज्य को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में भी एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में अहम् भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार द्वारा तकनीक और नवाचार के उपयोग से सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जहां हम आज प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक ओर साइंस और इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीएसआई डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर और स्टेम लैब्स के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, वहीं, रोबोटिक, ड्रोन, सेमी कंडक्टर और प्री-इनक्यूबेशन लैब की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण नवाचारों को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नित-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, जिनके सिद्धांतों ने खगोल शास्त्र और गणित को सरल बनाया, आचार्य कणाद जिन्होंने हजारों साल पहले परमाणु की व्याख्या की, आचार्य नागार्जुन जिन्होंने सदियों पहले सोना, चांदी, तांबे, लौह, पारा व अभ्रक आदि का इस्तेमाल कर औषधीय भस्म बनाने की विधि तैयार की। महर्षि सुश्रुत जिन्होंने जटिल से जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए। ये सभी भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक विज्ञान स्थापित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, आज देश में डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक तकनीकी क्रांति में अग्रणी भूमिका निभा सके। ये सभी उपलब्धियां भारत को आत्मनिर्भर और विज्ञान-प्रधान राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टेक्नोलॉजी, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं विकास, नई प्रौद्योगिकी तथा स्टार्टअप के अनुरूप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, हम प्रदेश में साइंटफिक रिसर्च और लर्निंग को बढ़ावा देते हुए साइंस बेस्ड नॉलेज इकॉनमी को भी मजबूत किया जा रहा है।

विज्ञान में आगे बढ रहा देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज कोरोना वैक्सीन के विकास से लेकर ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों की खोज तक के कार्य आत्मनिर्भरता के मंत्र को अपनाकर कर रहा है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर उतरने वाला पहला देश बना दिया। जहां आदित्य एल1 मिशन के माध्यम से हमने सूर्य के रहस्यों को उजागर करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया। वहीं अब गगनयान मिशन के तहत भारत जल्द ही अंतरिक्ष में मानव भेजने की तैयारी कर रहा है, जो हमारी वैज्ञानिक उपलब्धियों का एक और स्वर्णिम अध्याय होगा।

ई गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न सरकारी सेवाओं को ई-गवर्नेंस के अंतर्गत ऑनलाइन पोर्टल द्वारा सरल और सुलभ बनाने का कार्य किया जा रहा है। नागरिकों को ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन प्रमाणपत्र समेत कई सेवाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध की जा रही है। यही नहीं, कृषि के क्षेत्र में भी किसानों को तकनीक से जोड़ने हेतु राज्य में स्मार्ट एग्रीकल्चर तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में ड्रोन तकनीक और सेंसर आधारित खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलगी। ई-टूरिज्म पोर्टल के माध्यम से पर्यटकों को ऑनलाइन बुकिंग और पर्यटन स्थलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध किए जाने के भी प्रयास गतिमान हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ऐसे डैशबोर्ड की शुरुआत की गई है जो चारधाम यात्रा पर आने वाले पर्यटकों को पहले ही मौसम पूर्वानुमान से लेकर अपनी यात्रा प्लान करने में मदद करेगा। यही नहीं, हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन पर शोध के लिए डेटा एनालिटिक्स और सैटेलाइट इमेजरी का भी उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी प्रयास उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यूकॉस्ट में राज्य का पहला कम्यूनिटी साइंस रेडियो भी प्रारम्भ होने रहा है जो विज्ञान की महत्वपूर्ण जानकारियां हर घर तक पहुंचाने में सहायक होगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां इंटरनेट या अन्य संसाधन सीमित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी ही वो माध्यम हैं, जिससे हम आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाकर उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने के अपने विकल्प रहित संकल्प को साकार कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने इससे पहले निर्माणाधीन साइंस सिटी परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया और साइंस म्यूजियम का अवलोकन भी किया।

इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव नीतेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, सलाहकार साइंस सिटी देहरादून जी. एस. रौतेला उपस्थित थे।

अपने दायित्वों का निर्वहन न करने वाले कार्मिकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्यवाही की जाएः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे कार्मिक को चिह्नित किया जाए जो अपने दायित्वों का निर्वहन भली भांति नहीं करते हैं।ऐसे कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृति के लिए नियमानुसार कार्यवाही की जाए। प्रदेश में सरकारी भूमि और कई मामलों में लोगों की व्यक्तिगत भूमि पर कब्जा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। विभिन्न अपराधों में लिप्त वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों के सीजन के दृष्टिगत खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी को रोकने और बिजली चोरी को रोकने के लिए सघन अभियान चलाया जाए। मिलावटखोरों और बिजली चोरी करने वालों पर सख्त करवाई भी की जाय। ड्रग्स फ्री उत्तराखंड के लिए सभी संबंधित विभागों द्वारा निरंतर अभियान चलाए जाय। पुलिस द्वारा राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित सघन चौकिंग की जाए। एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराधियों की सूची बनाकर नशे के कारोबार में लिप्त लोगों पर कड़ी करवाई की जाय।

मुख्यमंत्री ने डीजीपी को निर्देश दिए कि राज्य में यातायात प्रबंधन की दिशा में विशेष प्रयास किए जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि ट्रैफिक जाम से लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो। पुलिस को रात्रि कालीन गश्त बढ़ाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य के युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में और प्रयास किए जाएं। इलेक्ट्रिशियन, कारपेंटर, बार्बर, प्लंबर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के प्रशिक्षण और कौशल विकास की दिशा में कार्य किए जाएं।

बैठक में सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, सचिव एवं गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, अपर पुलिस महानिदेशक ए. पी. अंशुमान, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने राज्य आपात परिचालन केंद्र से माणा गांव की व्यवस्थाओं की जानकारी ली

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिले के माणा गांव के पास हुए हिमस्खलन की जानकारी लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को देर रात राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, आईटी पार्क पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की और रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए।

जोशीमठ में भी की जाए आपदा कंट्रोल रूम की स्थापना।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सर्च ऑपरेशन तेजी से चलाए जाए। उन्होंने कहा जोशीमठ में भी आपदा कंट्रोल रूम की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा एनडीआरएफ, एस.डी.आर.एफ ,आईटीबीपी सेना आपसी सहयोग से बर्फ हटाने का कार्य तेजी से करें। जिन श्रमिकों को निकाला गया है उनका विशेष ख्याल रखा जाए। उन्होंने माणा स्थित हेलीपैड को प्राथमिकता से खोले जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जोशीमठ स्थित आर्मी अस्पताल, जिला अस्पताल, एम्स ऋषिकेश तक सभी अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा एम-आई 17 की मदद से घायलों को लिफ्ट करने की भी पूरी तैयारी की जाए।

32 लोगों को निकाला गया सुरक्षित।
अब तक 32 लोगों को निकाला जा चुका है एवं अन्य लोगों को खोजबीन जारी है। जिसमें से 4 लोगों को आईटीबीपी सेना अस्पताल में रखा गया है। बी.आर.ओ स्नो कटर एवं अन्य मशीनों के माध्यम से निरंतर बर्फ हटाने का कार्य कर रही है। कल सुबह एम आई 17 हेलीकॉप्टर भी माणा क्षेत्र को रवाना होंगे।

रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घटनास्थल पर आवागमन सुनिश्चित करने को कहा और समीप के हेलीपैड को शीघ्र सक्रिय करने के निर्देश दिए, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके। उन्होंने ड्रोन एवं हेलीकॉप्टर की मदद से निगरानी और रेस्क्यू अभियान को और प्रभावी बनाने पर ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जरूरत पड़ने पर घायलों को एयर एंबुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश लाया जाए। जिला प्रशासन से निरंतर समन्वय बनाए रखने और प्रभावितों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए।

हिमस्खलन प्रभावितों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आईटीबीपी, सेना, जिला प्रशासन, वायु सेना और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण हेलीकॉप्टर का संचालन फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन स्नो एक्सपर्ट्स की सेवाएं ली जा रही हैं। आईटीबीपी की विशेष टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता हिमस्खलन में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। प्रभावित लोगों के परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जा रहा है।

राज्य और केंद्र सरकार में समन्वय
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार से संपर्क में है और प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री से भी बातचीत हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि रेस्क्यू अभियान में यदि किसी अतिरिक्त एजेंसी की आवश्यकता होगी, तो उनकी मदद तुरंत ली जाएगी। अब तक 32 लोगों को आईटीबीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार बर्फबारी के कारण मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं, लेकिन मौसम में सुधार के साथ रेस्क्यू कार्य और तेज किया जाएगा। सभी राहत दलों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया गया है, और माणा हेलीपैड को भी सक्रिय किया जा रहा है। एम्स ऋषिकेश, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज और गोपेश्वर जिला अस्पताल को भी तैयार रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी से ली पूरी जानकारी
मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी से घटना की विस्तृत जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बताया कि हिमस्खलन बद्रीनाथ धाम से 6 किमी आगे हुआ, जहां सीमा सड़क संगठन के अंतर्गत बर्फ हटाने वाले मजदूर मौजूद थे। तुरंत आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत कार्यों में जुट गईं। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, अब तक 32 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि शेष लोगों को बचाने का अभियान जारी है।

मुख्यमंत्री रात 8 बजे फिर पहुंचे आपदा कंट्रोल रूम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रात 8 बजे दोबारा आपदा कंट्रोल रूम पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वे लगातार रेस्क्यू कार्यों पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों के साथ नियमित स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर प्रभावित व्यक्ति की सुरक्षा और सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी एजेंसियां युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हुई हैं, और जल्द ही सभी फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा।

आपदा के दृष्टिगत रिस्पॉन्स टाईम को कम से कम रखे जाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने वर्तमान में प्रदेश मे हो रही भारी वर्षा एवं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हो रहे हिमपात के दृष्टिगत भी निरन्तर सभी जिलाधिकारियों से समन्वय बनाए रखे जाने के भी निर्देश दिए ताकि किसी भी आपदा की स्थिति का त्वरित ढ़ंग से सामना किया जा सके। किसी भी आपदा के दृष्टिगत रिस्पॉन्स टाईम को कम से कम रखे जाने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए हैं।