नेशनल गेम्स के आयोजन के लिये सीएम ने केंद्रीय खेल मंत्री का जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से शिष्टाचार भेंट कर उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन की तैयारियों के बारे में जानकारियां साझा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के 38वें संस्करण की मेजबानी का सौभाग्य उत्तराखण्ड को प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 28 जनवरी से 14 फरवरी, 2025 तक चलने वाले राष्ट्रीय खेलों के इस महापर्व में भारत के विभिन्न प्रान्तों से आए लगभग 10 हजार से अधिक कुशल खिलाड़ियों द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए काफी तैयारियां की गई हैं। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से उत्तराखंड में खेल संस्कृति का विकास होगा। प्रदेश में खेल अवस्थापनात्मक सुविधाओं का इस प्रकार विकास किया जा रहा कि राज्य के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से जनपद अल्मोड़ा के डीनापानी में उच्च स्तरीय खेल सुविधाओं (हाई एल्टीट्यूट सेन्टर) के निर्माण और प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किए जाने हेतु एक-एक बहुद्देशीय स्पोर्ट्स हॉल की स्थापना के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्टस कॉलेज परिसर में स्थित आईस स्केटिंग रिंग के संचालन के लिए पूर्व में प्रेषित प्रस्ताव पर स्वीकृति के साथ ही राज्य सरकार द्वारा जनपद नई टिहरी स्थित शिवपुरी में संचालित साहसिक प्रशिक्षण केन्द्र के उच्चीकरण के लिए भी धनराशि की स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से जिला चम्पावत में महिला स्पोर्ट्स कालेज की भूमि पर इण्डोर आर्टिफिशियल रॉक क्लाइबिंग वाल के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता का आग्रह किया।

अतः आपसे सादर अनुरोध है कि राज्य के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय खेल सुविधाओं हेतु उपरोक्त प्रस्तावों पर स्वीकृति निर्गत करने का कष्ट करें। आपकी इस सहृदयता से प्रदेश के खिलाड़ियों के मनोबल एवं उत्साह को नई ऊर्जा प्रदान होगी। केंद्रीय खेल मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में खेल अवस्थापनात्मक सुविधाओं के विकास के लिए केंद्र से हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

राष्ट्रीय खेलों के लिए पांडवाज बैंड ने तैयार किया मोटिवेशनल सॉंग हल्ला धूम धड़क्का

अडग अडग अगवाड़ी हिट/प्रीत बढ़ा, रीत बढ़ाश् (अडिग होकर कदम आगे बढ़ा/प्यार, सौहार्द बढ़ा/परंपरा रीत बढ़ा)। राष्ट्रीय खेलों के मोटिवेशनल सांग हल्ला धूम धड़क्का की यह शुरूआती पंक्तियां हैं। इसे उत्तराखंड के प्रख्यात पांडवाज बैंड ने तैयार किया है। अपने नाम के अनुरूप हल्ला धूम धड़ाका गीत धूम मचाने के लिए तैयार है। इसे रिलीज कर दिया गया है।

जाहिर तौर पर तीन मिनट के इस गीत का मिजाज खेलों और युवाओं को समर्पित है। चूंकि इसे राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किया गया है, इसलिए इसका फलक बड़ा है। बावजूद इसके, उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक पूरी शान से गीत में मौजूद है। खास तौर पर, जब पारंपरिक वेशभूषा में गाते और ढोल-दमाऊ बजाते पांडवाज ग्रुप के कलाकार दिखाई देते हैं। इस गीत को शिवानी भागवत, ईशान डोभाल और सुशांत भट्ट ने गाया है। विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा मानते हैं कि बहुत कम समय में पांडवाज ने एक बेहतरीन गीत तैयार किया है। राष्ट्रीय खेलों के लिए यह गीत युवाओं को प्रेरित करेगा।

वोकल फॉर लोकल के लिए पांडवाज को मौका
-पांडवाज बैंड ने उत्तराखंडी लोक संगीत के क्षेत्र में खास जगह बनाई है। लोक और आधुनिक संगीत का तालमेल इस बैंड की सबसे बड़ी खासियत है। राष्ट्रीय खेलों के प्रचार-प्रसार में पांडवाज बैंड की सरकार ने विशेष भूमिका निर्धारित की है। राष्ट्रीय खेलों की मशाल के विभिन्न स्थानों पर भ्रमण के दौरान पांडवाज ग्रुप के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, मोटिवेशन सांग के लिए पांडवाज को अवसर दिया गया। सरकार ने पांडवाज को अवसर देकर लोकल फॉर वोकल का उदाहरण पेश किया है।

ये हमारा परम सौभाग्य है कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन में पांडवाज बैंड की भूमिका रखी गई है। यह गीत दस दिनों में तैयार किया गया है। शूटिंग देहरादून स्टेडियम और आस-पास ही की गई। इस गीत को तैयार करते वक्त हमें कलात्मक स्वतंत्रता दी गई है। इसलिए और भी अच्छा लगा। राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी उत्तराखंड के लिए बहुत बड़ा अवसर है।
ईशान डोभाल, पांडवाज बैंड के संस्थापक सदस्य।

राष्ट्रीय खेलों का आयोजन न सिर्फ खेल प्रतिभाओं, बल्कि उत्तराखंड के स्थानीय कलाकारों व अन्य क्षेत्रों से जुडे़ लोगों को भी आगे आने का अवसर प्रदान करेगा। उत्तराखंडी लोक संस्कृति का भी इस आयोजन के जरिये प्रचार-प्रसार होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर हमारी सरकार वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रही है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

मुख्य सचिव ने प्रशासन को प्रवासियों के साथ पूरी उदारता एवं सहयोगपूर्ण शैली से कार्य करने की हिदायत दी

देश और दुनियाभर से बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों द्वारा राज्य में गांवों को गोद लेने में व्यक्त किए जा रहे अभूतपूर्व उत्साह को देखते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी जिलाधिकारियों को इस सम्बन्ध में प्रवासियों से सम्पर्क, समन्यव तथा योजनाओं को प्रभावी रूप से धरातल पर लाने हेतु हर जिले में एक-एक नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट किया है कि प्रवासियों द्वारा गोद लिए जा रहे गांवों में विकास हेतु जिस भी क्षेत्र कार्य करने की इच्छा व्यक्त की जा रही हैं उसमें किसी भी प्रकार की बाध्यता ना रखी जाए। प्रवासियों को उनकी इच्छा और रूचि के अनुसार सभी विकल्प दिए जाए। सीएस ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस कार्य में प्रशासन द्वारा पूरी उदारता एवं सहयोगपूर्ण शैली से कार्य किया जाए। प्रवासियों द्वारा राज्य के गांवों के विकास में भागीदारी हेतु किए जा रहे आवेदनों को सकारात्मकता से लेने की हिदायत देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इसे जिलाधिकारियों एव जिला प्रशासन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी बताया हैं। उन्होंने जिला प्रशासन एवं सम्बन्धित विभागों को प्रवासियों को इस कार्य में तकनीकी मार्गदर्शन एवं अन्य अपेक्षित सहायता ससमय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीएस ने सभी जिलों को अपने-अपने प्रवासियों का डाटाबेस जिलास्तर पर बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रवासियों द्वारा गांवों को गोद लिए जाने की योजना में ग्राम प्रधानों, स्थानीय निवासियों, ग्राम विकास अधिकारी सहित ग्रामीणों को जोड़ने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में राज्य के सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ अन्तर्राष्ट्रीय उत्तराखण्डी प्रवासी सम्मेलन पर विडियों कॉन्फ्रेस के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए कि प्रवासियों को ग्राम स्तर के विकास प्रक्रिया से जोड़ने एवं प्रेरित करने, प्रवासियों की विशेषज्ञता, अनुभवों तथा वितीय सहायता का लाभ राज्य के गांवों के सम्पूर्ण विकास को मिले इसके लिए प्रशासन को भी अति सक्रियता एवं उत्साह से कार्य करना होगा।

अमेरिका से शैलेश उप्रेती

अमेरिका में निवासरत शैलेश उप्रेती अल्मोड़ा के मानन गांव को गोद ले रहे हैं। शैलेश उप्रेती आईआईटी दिल्ली से पीएचडी स्कोलर हैं। वे अमेरिका की एनर्जी फ्रटियर रिसर्च सेन्टर के सदस्य हैं। वे सी4वी के अध्यक्ष भी हैं। वे एम्पीरियम 3 के चेयरमैन होने के साथ ही प्रो0 स्टेन विटिंगन के ग्रुप मेम्बर भी हैं। वे अल्मोड़ा में एक मॉडल एनर्जी स्टोरेज सेन्टर विकसित करना चाहते हैं। वे यहां पर अपना इंडिया कॉरपोरेट ऑफिस खोलना चाहते हैं।

यूनाइटेड किंगडम से नीतू अधिकारी

यूनाइटेड किंगडम में रहने वाली नीतू अधिकारी वहां पर पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी हैं। वह नैनीताल का एक्वा तोक जंगलिया गांव गोद ले रही हैं। वे राज्य में विदेशी पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती हैं तथा उक्त गांव में कीवी की खेती एवं योग केन्द्र स्थापित करेंगी। इसके साथ ही वे सभावाला देहरादून में कौशल विकास पर कार्य करेंगी।

चीन से देव रतूड़ी

चीन में रहने वाले देव रतूड़ी जो कि एक प्रतिष्ठित उद्यमी, समाजसेवी एवं अभिनेता हैं ने टिहरी के सुनार गांव एवं केमरिया गांवों को गोद लिया है। उनके द्वारा इसके लिए जिला प्रशासन को फण्ड भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। उन्होंने उक्त गांवों में सामुदायिक सुविधाओं के विकास, सोलर लाइट, गांवों के युवाओं को चीन में रोजगार दिलवानें में सहायता, शिक्षा में रुचि व्यक्त की गई हैं। जिलाधिकारी टिहरी द्वारा बताया गया कि उक्त गांवों में उनके द्वारा प्रदान किए गए फण्ड से बहुत से कार्य सम्पन्न हो चुके हैं।

यूनाइटेड अरब अमीरात से विनोद जेथूरी

दुबई के निवासी विनोद जेथूरी प्रतिष्ठित शिक्षाविद तथा समाजसेवी हैं। अपने एनजीओ समून के माध्यम से वे उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। वे उत्तरकाशी में ओसला गांव गोद ले रहे हैं, जहां पर वे कौशल विकास पर कार्य करेंगे।

दुबई से गिरीश पंत

दुबई निवासी पिथौरागढ़ मूल के गिरीश पंत को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 का प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय सम्मान से पुरस्कृत किया गया है। उन्हें यूक्रेन युद्ध तथा कोविड के दौरान उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता हैं। वे पिथौरागढ़ में बजेट, बरशायत व बेरीनाग गांव गोद ले रहे हैं। वे यहां पर शिक्षा, कम्पयूटर शिक्षा व स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन के लिए कार्य करेंगे।

थाईलेण्ड से डा ए के काला

बैंकोक के बराउटेन गु्रप के अध्यक्ष एवं सीईओ डा ए के काला पौड़ी का फण्दाई गांव गोद ले रहे हैं। वे यहां शिक्षा एवं स्थानीय उत्पादों के लिए कार्य करेंगे।

दिल्ली से बी पी अंथवाल

दिल्ली निवासरत प्रतिष्ठित वकील जो 2008 से अपने टिहरी स्थित अपने गांव में तेजपात, रोज, लेमनग्रास एवं मसालों की कृषि कार्यों में लगे हैं। इन्होंने टिहरी के मंजेरी तथा मुयाल गांवों को गोद ले रहे हैं। वे इन गांवों में किसानों को उच्च मूल्य की फसलों की खेती हेतु प्रेरित करना चाहते हैं।

लखनऊ से एम पी भटट

लखनऊ में निवासरत एम पी भटट एक कृषि उद्यमी हैं जिन्हें टिश्यू कल्चर में विशेषज्ञता हासिल हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि में उत्कृष्ट कार्य हेतु कई पुरस्कार मिल चुके हैं। वे टिहरी में झौन एवं भदरसू गांव गोद ले रहे हैं। वह स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर अदरक, हल्दी तथा लेमन के खेती को बढ़ावा देना चाहते हैं।

अहमदाबाद से डा विरेन्द्र रावत

अहमदाबाद से डा विरेन्द्र रावत ग्रीन मेंन्टर्स के फाउण्डर तथा डाइरेक्टर हैं। उनकी संस्था सस्टेनेबल फार्मिंग में ग्लोबल लीडर है, जो शिक्षा तथा नीतिगत सुधारों से जुड़ी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के साथ भी कार्य किया है। डा विरेन्द्र रावत प्रताप नगर में हेरवाल गाँव गोद ले रहे हैं। वे इस गांव को ग्रीन विलेज के रूप में विकसित करना चाहते हैं।

बैंगलोर से प्रदीप सती

बैंगलोर में रहने वाले प्रदीप सती मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं जो आईबीएम, एचपी, लेनोवों जैसी प्रतिष्ठित कम्पनियों के साथ लम्बे समय तक कार्य कर चुके हैं। वे भिकियासैंण में हानड गांव गोद ले रहे हैं, जहां पर वह ईको टूरिज्म तथा संतरे व सेब की व्यवसायिक खेती को बढ़ावा देंगे।

मुम्बई से हिमानी शिवपुरी

प्रतिष्ठित अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी भटवाड़ी गांव को गोद ले रही हैं। वे यहां पर पर्यावरण संरक्षण, आजीविका उत्पादन तथा संस्कृति के लिए कार्य करेंगी।

आज की बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन सहित सभी जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री को दिया राष्ट्रीय खेलों में आने का आमंत्रण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को मलारी (चमोली) की शॉल और नारायण आश्रम की प्रतिकृति भेंट की।

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य के विकास में प्रधानमंत्री के नेतृत्व, मार्गदर्शन और सहयोग के लिए प्रदेश की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य में संचालित विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेल परियोजना के प्रथम चरण पर तेजी से काम चल रहा है। टनकपुर बागेश्वर रेल परियोजना का सर्वे का कार्य हो चुका है। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना की स्वीकृति और परियोजना का पूर्ण वित्तीय व्यय भार केंद्र सरकार द्वारा किए जाने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश में प्रस्तावित बुनियादी विकास कार्यों के लिए ऋषिकेश के पुराने रेल स्टेशन को बंद करने और सभी ट्रेनों का संचालन ऋषिकेश के नए योग नगरी रेलवे स्टेशन से किए जाने का अनुरोध किया। पुराने स्टेशन की भूमि पर जो रेल ट्रैक है, उसका उपयोग नई सड़क व्यवस्था के लिए किया जा सकेगा जिससे यातायात में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में जल जीवन मिशन की प्रगति की जानकारी देते हुए जल जीवन मिशन में आवंटित केंद्रीय अंशदान की अवशेष धनराशि जल्द अवमुक्त किए जाने के लिए संबंधित को निर्देशित करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश को रिवर राफ्टिंग में पबवदपब बपजल के रूप में चयनित करने पर आभार व्यक्त करते हुए हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर परियोजना के लिए राज्य के सीमित संसाधनों को देखते हुए केंद्र स्तर से संसाधन उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में भूतापीय ऊर्जा के दोहन के लिए आइसलैंड एंबेसी के सहयोग से एक एमओयू प्रस्तावित है। इस एमओयू पर भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से आवश्यक अनापत्ति पत्र प्राप्त किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के लिए सभी तकनीकी और वित्तीय सहयोग राज्य सरकार को प्रदान किए जाने का अनुरोध किया ताकि वर्ष 2070 तक कार्बन नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तराखंड अहम भूमिका निभा सके।

मुख्यमंत्री ने सड़क परिवहन मंत्रालय में प्रेषित प्रस्तावों ऋषिकेश बायपास, हरिद्वार बायपास (पैकेज 2), देहरादून – मसूरी कनेक्टिविटी, देहरादून रिंग रोड, चंपावत बायपास, लालकुआं, हल्द्वानी और काठगोदाम बायपास और मानसखंड प्रॉजेक्ट की स्वीकृति के लिए संबंधित को निर्देशित किए जाने का भी अनुरोध किया।

किसी भी धोखाधड़ी को न करने को लेकर कॉमन सर्विस सेंटरों को निर्देश

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जानकारी दी है कि आयुष्मान कार्ड राज्य के एनएफएसए/एसएफएसए राशन कार्ड धारक लाभार्थी को जारी किया जाता है। सीएस ने स्पष्ट किया कि कार्ड निर्माण के दौरान आधार का उपयोग केवल केवाईसी के लिए किया जाता है। राज्य के पास संग्रहित डेटाबेस में मौजूद आधार के विवरण तक किसी भी प्रकार की पहुंच नहीं है। फर्जी कार्डों की जांच के लिए एनएचए की मदद से पहले से जारी आयुष्मान कार्डों का विश्लेषण और सत्यापन किया जाता है। भर्ती के दौरान आधार पर अंकित पते की प्रामाणिकता की जांच करने और मूल आधार कार्ड और राशन कार्ड मांगने के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की जा रही है। पिछले 1-2 वर्षों के दौरान बने राशन कार्डों, विशेष रूप से राशन कार्ड में केवल एक सदस्य होने के सत्यापन के लिए खाद्य विभाग को निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जानकारी दी है कि अन्य राज्यों से आने वाले लाभार्थियों के मामले में अधिक सतर्क रहने और मूल आधार कार्ड और राशन कार्ड मांगने के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्देश दिए जा रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटरों को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे किसी भी धोखाधड़ी गतिविधि में शामिल न हों अथवा सख्त कार्रवाई का सामना करें। एसएचए ऐसी किसी भी धोखाधड़ी गतिविधि का पता लगाने के लिए अधिक सतर्क रहेगा।

अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन विशेषः गांव को गोद लें योजना के तहत विदेशों में रह रहे प्रवासियों ने चिन्हित किए गांव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर विदेशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए चलाए जा रहे, गांव को गोद लें (एडोप्ट ए विलेज) कार्यक्रम में रुचि दिखाते हुए, कई प्रवासियों ने अपने लिए गांव चिन्हित कर लिए हैं। साथ ही राज्य सरकार के सामने चिन्हित गांवों के लिए विकास का रोडमैप भी प्रस्तुत किया है।

गांव को गोद लें (एडोप्ट ए विलेज) कार्यक्रम का विचार, गत 05 मार्च, को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विभिन्न देशों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों के साथ हुए संवाद में निकल कर आया। जिसमें मुख्यमंत्री ने प्रवासियों से राज्य में एक या एक से अधिक गाँवों को गोद लेने की अपील की। इसके बाद कई प्रवासियों ने गांव चिन्हित करते हुए, राज्य सरकार के सामने यहां किए जाने वाले कार्यां का रोडमैप प्रस्तुत किया है।

चीन निवासी देव रतूड़ी ने टिहरी जिले में सुनार गांव और कमैरा सौड़ गांव में सोलर लाइट लगाने, युवाओं को चीन की होटल इंडस्ट्री में रोजगार प्राप्त और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने की इच्छा जाहिर करते हुए, प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है।

इसी तरह वर्तमान में अमेरिका में निवासरत उद्यमी शैलेश उप्रेती ने अल्मोड़ा जिले में स्थित मनान गांव में अपनी कंपनी का इंडिया कॉरपोरेट ऑफिस खोलने और एनर्जी स्टोरेज सेंटर खोलने की दिशा में काम प्रारंभ कर दिया है।

सीमांत गांव का चयन
वर्तमान में यूएई में निवासरत टिहरी जिले के मूल निवासी विनोद जेठूड़ी ने उत्तरकाशी जिले के सीमांत ओसला गांव में स्किल ट्रेनिंग और पिथौरागढ़ निवासी गिरीश पंत ने बजेट और बरसायत गांवों में शिक्षा, कम्प्यूटर एजूकेशन के साथ ही स्थानीय उतपादों का बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की इच्छा जाहिर की है।

पौड़ी जिले के निवासी डॉ एके काला, थाईलैंड में उद्यमी हैं, उन्होंने पौड़ी जिले के किसी एक गांव के मेधावी छात्रों की शिक्षा में मदद करने की इच्छा जाहिर है। जबकि वर्तमान में ब्रिटेन में निवारसत, नैनीताल जिले की नीरू अधिकारी ने नौकुचियाल के निकट एक्वा टोक में किवी उत्पादन, ध्यान योग केंद्र की स्थापना के साथ ही देहरादून जिले के सभावाला गांव कौशल विकास का प्रशिक्षण देने की योजना प्रस्तुत की है।

क्या है गांव को गोद लें कार्यक्रम
योजना का उद्देश्य प्रवासी उत्तराखंडियों की विशेषज्ञता, अनुभव और वित्तीय सहायता से गांव का सर्वागींण विकास करना है। यह प्रक्रिया पूर्ण रूप से स्वैच्छिक है, प्रवासीजन अपने या किसी भी गांव का चयन इसके लिए कर सकते हैं। राज्य सरकार प्रवासियों के साथ चर्चा कर आपसी सहमति के आधार पर गांव के विकास के लिए आरम्भिक 2-3 वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार करती है। इसके लिए प्रवासियों एवं स्थानीय प्रशासन के मध्य एमओयू भी सम्पादित किया जाने का प्रावधान है। प्रवासियों द्वारा चिन्हित गांव में शिक्षा, इंटरनेट कनैक्टिविटी, छात्रवृत्ति, उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने जैसे कार्य किए जा सकते हैं। निर्माण गतिविधियाँ केवल अपरिहार्य एवं आवश्यक परिस्थितियों में ही किए जाने का प्रावधान है। जिलाधिकारी चिन्हित गांव में चल रहे कार्यक्रमों की निगरानी करते हुए, इसे मॉडल गांव के तौर पर विकसित करेंगे।
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प्रवासी उत्तराखंडियों ने ‘गांव को गोद लें’, कार्यक्रम में रुचि दिखाते हुए, अपने प्रस्ताव सरकार के सामने प्रस्तुत किए हैं। चिन्हित गांवों के लिए प्रवासियों के सुझाव पर विस्तृत विकास योजना बनाई जा रही है। उक्त गांव, विकास के रोल मॉडल बनते हुए, दूसरे प्रवासियों के लिए भी प्रेरणा का काम करेंगे।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राष्ट्रीय खेल के लिए वॉलंटियर ऑनलाइन प्रशिक्षण/चयन प्रक्रिया शुरू

दस मिनट में 16 सवाल। राष्ट्रीय खेलों में वॉलंटियर बनने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले अभ्यर्थियों को कडे़ इम्तिहान से गुजरना पड़ रहा है। राष्ट्रीय खेल सचिवालय ने वॉलंटियर प्रशिक्षण/चयन प्रक्रिया शुरू कर दी है। चूंकि रजिस्ट्रेशन बहुत ज्यादा हुए हैं, इसलिए एक बार में 500 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण/चयन प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। राष्ट्रीय खेल सचिवालय ने दस जनवरी तक चयन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

वॉलंटियर बतौर 38 वें राष्ट्रीय खेल से जुड़ने के लिए अभी तक 30,433 रजिस्ट्रेशन हुए हैं। रजिस्ट्रेशन अभी जारी हैं। राष्ट्रीय खेल सचिवालय के अपर मुख्य कार्याधिकारी प्रशांत आर्या के अनुसार-रजिस्ट्रेशन कराने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राष्ट्रीय खेल सचिवालय की टीम एक बार में 500 अभ्यर्थियों के साथ जुड़ रही है। कुल 45 मिनट में प्रशिक्षण/चयन प्रक्रिया से संबंधित कार्य संचालित हो रहे हैं। इसमें शुरुआती 35 मिनट में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बाद के दस मिनट में प्रत्येक अभ्यर्थी से 16 सवाल पूछे जा रहे हैं। इसके आधार पर ही चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

जहां से रजिस्ट्रेशन, वहीं तैनाती पर रहेगा जोर

वॉलंटियर बतौर राष्ट्रीय खेलों से जुड़ने के लिए जिस अभ्यर्थी ने जहां से रजिस्ट्रेशन कराया है, उसे वहीं तैनाती देने पर जोर रहेगा। हालांकि चयनित अभ्यर्थियों को यह विकल्प दिया जाएगा कि वह चाहे, तो दूसरे जिले में भी अपना योगदान दे सकता है। वालंटियर चयन प्रक्रिया से जुड़े प्रतीक जोशी के अनुसार-यह बात उत्साहित करने वाली है कि उन जिलों से भी रजिस्ट्रेशन हुए हैं, जहां पर राष्ट्रीय खेलों से संबंधित कोई भी गतिविधि प्रस्तावित नहीं है। जोशी के अनुसार-दस जनवरी तक वॉलटियर चयनित हो जाएंगे। इसके बाद, चयनित अभ्यर्थियों को भौतिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। दो से ढाई हजार चयनित वॉलंटियर इस आयोजन में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका निभाएंगे।
वॉलंटियर के लिए रजिस्ट्रेशन की स्थिति

जिला रजिस्ट्रेशन
अल्मोड़ा 1750
बागेश्वर 771
चमोली 1582
नैनीताल 4119
चंपावत 1719
देहरादून 7524
हरिद्वार 4881
पौड़ी 1562
पिथौरागढ़ 1161
रूद्रप्रयाग 822
उधमसिंहनगर 2355
टिहरी 1245
उत्तरकाशी 942
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राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के प्रति हर तरफ उत्साह दिखाई दे रहा है। हम उत्तराखंड में हर एक व्यक्ति का इस आयोजन से जुड़ाव चाहते हैं। सभी के सहयोग से उत्तराखंड में खेलों का यह महा आयोजन भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सीएम धामी पहनते हैं मलारी और मुनस्यारी सहित पहाड़ के अन्य क्षेत्रों के ट्वीड से बनी जैकेट, मफलर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मलारी, मुनस्यारी सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में बने ट्वीड से बनी जैकेट पहनकर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। लगातार सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनको राज्य के बने उत्पाद दे तैयार वस्त्रों के पहने हुए देखा जा सकता है। यह पहल राज्य के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने और उनकी ब्रांडिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।

मुख्यमंत्री ने इसके पूर्व राज्य के सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता दें। यह कदम न केवल राज्य के पारंपरिक कारीगरों और उत्पादकों को आर्थिक समर्थन प्रदान करेगा, बल्कि उत्तराखंड के अनूठे हस्तशिल्प और उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी मदद करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, हमारा लक्ष्य है कि स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देकर उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा को जीवित रखें। मुनस्यारी के ट्वीड जैसे उत्पाद हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक हैं। सरकार हर संभव प्रयास करेगी कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को बढ़ावा मिले।

सरकार के इस कदम से स्थानीय उद्योगों को नया जीवन मिलेगा और राज्य में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, इस पहल से राज्य के पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि स्थानीय उत्पाद पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों से भी अपेक्षा की है सभी लोग स्थानीय उत्पाद का उपयोग करें और कपड़े व स्थानीय ऊन से तैयार वस्त्रों को पहन कर इस अभियान को बढ़ावा दें।

12 जनवरी को देहरादून में होने जा रहा है प्रथम अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन

उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे प्रथम अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में 17 देशों में रहने वाले उत्तराखंडी पहुंच रहे हें। अब तक 50 से अधिक जाने माने प्रवासी उत्तराखंडियों ने सम्मेलन के लिए अपना पंजीकरण करवा लिया है।

12 जनवरी को आयोजित होने वाले एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। सम्मेलन में उत्तराखंड में निवेश की संभावना, हॉस्पेटिलिटी दृ वेलनेस, कौशल विकास, विदेश में रोजगार और उच्च शिक्षा के साथ ही उद्यान जड़ी- बूटी में संभावना विषय पर चार अलग अलग सत्रों में पैनल डिस्कशन भी किया जाएगा।

शामिल हो रहे हैं कई दिग्गज
इस सम्मेलन में विदेश में रहते हुए अलग -अलग क्षेत्रों में नाम कमाने वाले कई प्रवासी उत्तराखंडी शामिल हो रहे हैं। इसमें प्रवासी भारतीय सम्मान प्राप्त दुबई निवासी गिरीश चंद्र पंत के अलावा चीन से देव रतूड़ी, अमेरिका से डॉ अनिता शर्मा, जापान से भुवन तिवारी, सिंगापुर से सुनील थपलियाल, मीनाक्षी डबराल, थाईलैंड से डॉ एके काला जैसे नाम शामिल हैं। कई प्रवासी, इससे पहले भारत सरकार की ओर से भुवनेश्वर में आयोजित किए जा रहे प्रवासी भारतीय दिवस में भी शामिल होंगे। कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट https://pravasiuttarakhandi.uk.gov.in/en/program भी शुरू कर दी गई है।

मुख्यमंत्री धामी की पहल से हुई शुरुआत

विदेशों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी मिट्टी से जोड़ने की पहल खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। दरअसल, दिसंबर 2023 में आयोजित इन्वेस्टर समिट से पहले सीएम धामी विदेश दौरे पर गए थे, जहां प्रवासियों ने उनका उत्तराखंड की रीति परंपरा से स्वागत किया। इस दौरान तमाम सफल लोगों की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई। इसी के बाद मुख्यमंत्री ने ऐसे प्रवासियों के अनुभव का लाभ लेने के लिए, शासन में प्रवासी उत्तराखंडी सेल गठित किए जाने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन भी आयोजित करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में गत सात नवंबर को देहरादून में अपने देश के भीतर ही विभिन्न राज्यों में रहने वाले उत्तराखंडियों के बीच ऐसा ही एक सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है।

विदेशों में रहने वाले उत्तराखंड के प्रवासी, हर क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं। उनके पास ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी, उद्यमशीलता का विपुल अनुभव है। सरकार चाहती है कि इस अनुभव से प्रवासीजन अपने प्रदेश और गांव का भी विकास करें। सरकार इस काम में हर संभव मदद देने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी लगातार प्रवासियों को अपने प्रदेशों के विकास में योगदान करने की प्रेरणा देते रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड ।

स्वयं के कर से भी वित्तीय वर्ष का कुल राजस्व 22500 करोड़ तक जाने की उम्मीद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार, कुशल वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में ही खनन से 686 करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति हो चुकी है, जो गत वित्तीय वर्ष के कुल राजस्व 646 करोड़ रुपए से अधिक है।

प्रदेश में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव (वित्त), सचिव वित्त की अध्यक्षता में राजस्व अर्जित करने वाले विभागों के साथ पूरे वर्ष लगातार बैठकें की जा रही हैं। जिसके अब सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इसी क्रम में खनन से होने वाली राजस्व प्राप्ति में वर्ष दर वर्ष वृद्धि हो रही है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में खनन से कुल 397 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। जो वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर 646 करोड़ जा पहुंचा। वित्तीय वर्ष 2023-24 में गत वित्तीय वर्ष के सापेक्ष लगभग 36.86 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

अब वित्तीय वर्ष 2024-25 में 29 दिसम्बर तक ही खनन से कुल 686 करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति हो चुकी है। जबकि इस वित्तीय वर्ष में अभी तीन माह शेष हैं, अब तक के आंकड़ों से इस वित्तीय वर्ष के अन्त तक खनन से 1000 करोड़ रुपए से अधिक की राजस्व प्राप्ति होने की उम्मीद है। जो कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के सापेक्ष करीब 50 प्रतिशत अधिक होगी।

रणनीति में किया बदलाव

मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्त और खनन विभाग ने राजस्व बढ़ोत्तरी के लिए, रणनीति में बदलाव करते हुए, निगरानी का काम वाह्य सहायतित एजेन्सियों को दिया, जबकि पूर्व में खनन कार्यों की मॉनिटरिंग खनन विभाग द्वारा ही की जाती थी। जिसके सकारात्मक परिणाम आए हैं।

स्वयं के कर से भी बढ़ रहा राजस्व

राज्य के स्वंय के कर राजस्व में भी वर्ष दर वर्ष बढ़ोत्तरी हो रही है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य को स्वंय के कर से 11513 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर 19245 करोड़ हो गया। इस वित्तीय वर्ष में स्वयं के कर से कुल राजस्व करीब 22500 करोड़ रुपए होने की उम्मीद है।