मतदाता सत्यापन अभियान से जुड़कर निर्वाचक नामावली को बनाएं 100 प्रतिशत सही

रविवार को मीडिया सेंटर, सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या ने उत्तराखण्ड में ‘वोटर सत्यापन कार्यक्रम (ई.वी.पी)’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने बताया कि भारत निवार्चन आयोग द्वारा 1 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक वोटर सत्यापन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूचियों को 100 प्रतिशत सत्यापित व त्रुटिरहित करना है। उन्होंने प्रदेश के लोगों से सबसे बड़े मतदाता सत्यापन अभियान से जुड़ने की अपील की।

एक सितम्बर से प्रारम्भ हुए इस अभियान में वोटर कार्ड में दर्ज अपने और अपने परिवार के विवरण की जांच कर प्रमाणित किया जा सकता है। इससे निर्वाचक नामावली को 100 प्रतिशत त्रुटिरहित बनाया जा सकता है। इस अभियान में लॉजिकल त्रुटियां व डुप्लीकेट त्रुटियां भी दूर की जाएंगी। मतदाता को अपने विवरण की जांच के लिए अपने वोटर कार्ड नम्बर से डब्ल्यूडब्ल्यूडल्ब्यूडॉटएनवीएसपीडॉटइन पर लॉग-इन करना होगा। इसके बाद अपने नाम, जन्मतिथि, लिंग, संबंध या संबंधी का नाम, पता व फोटो का सत्यापन करें। त्रुटियां होने पर अपने विवरण व फोटोग्राफ में परिवर्तन के लिए सही जानकारी अंकित करें।

मतदाता सूची में परिवर्तन के लिए आवश्यक अभिलेखों की जानकारी देते हुए मुख्य निवार्चन अधिकारी ने बताया कि इंडियन पासपोर्ट, ड्राइविंग लाईसेंस, आधार कार्ड, शासकीयध्अशासकीय कार्मिकों का पहचान पत्र, बैंक पासबुक, किसान पहचान पत्र, पैन कार्ड, एनपीआर के अंतर्गत आरजीआई द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड, नवीनतम पानीध्टेलीफोनध्बिजलीध्गैस कनैक्शन का बिल, इनमें से कोई भी एक पहचान दस्तावेज अपलोड करें। भविष्य में सेवाएं प्राप्त करने के लिए मोबाईल नम्बर व ईमेल अंकित करें।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पंजीकृत मतदाताओं के लिए स्थायी लॉग-इन की सुविधा दी गई है। मोबाईल नम्बर उपलब्ध कराने पर नियमित एसएमएस आधारित सूचना अलर्ट मिल सकेंगे। बीएलओ से व्यक्तिगत सम्पर्क किया जा सकता है। मतदाता की अनुमति के बिना कोई विलोपन नहीं होगा। एक साथ रहने वाले परिवार को एक ही मतदेय स्थल पर रखा जाएगा। अधिक जानकारी के लिए वोटर हेल्पलाईन नम्बर 1950 पर कॉल किया सकता है, वोटर हेल्पलाईन मोबाईल एप का उपयोग भी किया जा सकता है। मतदाता सुविधा केंद्र भी बनाए गए हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 1 जनवरी 2020 तक 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले इसमें अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। मतदाता सत्यापन अभियान के बाद 15 अक्टूबर को निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी। इस पर 15 दिसम्बर तक कोई शिकायत होने पर दर्ज कराई जा सकती है। इन आपत्तियों का निस्तारण करते हुए 1 जनवरी 2020 को नयी निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी।

न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का नाम योगनगरी ऋषिकेश होगा

कर्णप्रयाग रेलवे लाइन प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद ही ऋषिकेश में स्थापित होने वाले स्टेशन का नाम न्यू ऋषिकेश प्रस्तावित कर दिया गया था। तमाम औपचारिकताओं के पहले ही निर्माणाधीन स्टेशन के सामने नए नाम का बोर्ड भी लगा दिया गया है।

बता दें कि न्यू ऋषिकेश नाम को लेकर निगम बोर्ड ने आपत्ति दाखिल की थी। बोर्ड बैठक के दौरान एक सुर में कहा गया कि न्यू ऋषिकेश नाम बदलकर योग नगरी रखा जाए। यह प्रस्ताव बोर्ड में पास भी हो गया था और अंतिम मंजूरी के लिए शासन को पत्रावली भेजी गई थी। उससे पहले ही आरवीएनएल के प्रस्ताव पर शासन ने मुहर भी लगा दी।

ऋषिकेश निगम के नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान का कहना है कि न्यू ऋषिकेश नाम में संशोधन के लिए बोर्ड में प्रस्ताव पारित हुआ था। इसी के तहत योग नगरी ऋषिकेश नाम रखने के लिए शासन को पत्र भी भेजा गया। इसी क्रम में शासन से निर्देश जारी किया गया कि प्रस्तावित नाम को तीन भाषाओं-हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में लिखकर भेजा जाए। शासन के निर्देशानुसार तीनों भाषाओं में योग नगरी ऋषिकेश का नाम लिखकर भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई शासन को करनी है।

करोड़ो की संख्या में श्रद्धालु कुंभ में पहुंचे, इसके लिए करेंगे प्रचार प्रसार

2021 के हरिद्वार महाकुम्भ को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी महाराज एवं महासचिव हरि गिरी महाराज के साथ बैठक की।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि 2021 में हरिद्वार में भव्य महाकुंभ का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि 11 अक्टूबर 2019 को हरिद्वार में अखाड़ा परिषदों के साथ सकुशल कुंभ कराने के लिए बैठक की जायेगी। आखाड़ा परिषद के सभी संतों के सुझावों को सरकार गम्भीरता से लेगी। भव्य एवं सुन्दर कुंभ कराने के लिए सरकार कृत संकल्प है। करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार कुंभ में आयें, इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जायेगा और इसके साथ ही उनकी सुख-सुविधा का पूरा ध्यान भी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ मेले की तैयरियों में संत समाज के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाएगा। कुंभ मेला प्रारम्भ होने से पूर्व हरिद्वार में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जायेंगी। संत समाज का हमें निरंतर सहयोग मिलता रहा है। संत समाज के सुझावों को ध्यान में रखते हुए महाकुम्भ के लिए सुनियोजित कार्ययोजना बनाई जायेगी।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आगामी महाकुंभ एक बड़ी चुनौती है। सकुशल कुंभ कराने के लिए विस्तृत कार्य योजनाएं बनाई जा रही है। संत समाज के आशीर्वाद से सकुशल कुंभ का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कुंभ में स्वच्छता का विशेष ध्यान दिया जायेगा।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी महराज ने कहा कि महाकुभ में सुरक्षा व्यवस्था में अखाड़ा परिषदों द्वारा पूरा सहयोग दिया जायेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि कुंभ मेले में होने वाले स्थाई प्रकृति के कार्यों की शुरूआत जल्द ही शुरू हो जाये। अखाड़ा परिषदों के लिए स्थान समय पर चिन्हित कर लिये जाए। उन्होंने अखाड़ों के लिए स्थाई प्रकृति के कार्य करने पर भी बल दिया। महाकुंभ में अखाड़ों के रहने का कलेण्डर बने व उसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी हो। मेले के लिए पार्किंग स्थल, सड़कों के चौड़ीकरण, पुलों के निर्माण, एवं सुचारू आवागमन हेतु अभी से ही सुनियोजित कार्ययोजना बन जाए। सुझाव दिया कि कुंभ मेले के लिए गंगा की स्वच्छता के साथ ही हरिद्वार की सफाई व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

बिना लाइसेंस ठेली नहीं लगा सकेंगे वेंडर्स

शहर में फेरी नीति लागू करने के लिए गठित कमेटी की बैठक नगर निगम में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि क्षेत्र में नगरीय फेरी नीति लागू होने के बाद परिवार के एक सदस्य को ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। साथ ही इनकी जगह, समय और दूूरी भी निश्चित की जाएगी। इन्हें निगम की ओर से पथ प्रकाश, पानी और शौचालय की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बैठक में मुख्य नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान ने फेरी संगठनों के नामित सदस्यों को 20 दिन के भीतर निगम क्षेत्र के वेंडर्स की सूची उपलब्ध कराने को कहा।

सूची में वेंडर्स का नाम, फोटो, मोबाइल और पता भी उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने कहा कि 20 दिनों के बाद किन जगहों पर आपत्ति है, यह समिति के सभी सदस्य निश्चय करेंगे। एनएनए ने बताया कि वेंडर्स को लेकर तीन क्षेत्र चयनित किए जाएंगे। इसमें पहला गैर प्रतिबंधित ठेली क्षेत्र (बिना रोक टोक वेडर्स ठेली लगा सकते है), दूसरा नियंत्रित ठेली क्षेत्र (कुछ ही लोगों को ठेली लगाने की परमिशन दी जाएगी, इसमें दिन, दूरी और समय निश्चित किया जाएगा) और तीसरा ठेली रहित क्षेत्र (इस क्षेत्र में कोई भी ठेली खड़ी नहीं हो पाएगी)। इस दौरान सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी, डॉ. संतोष पंत, सब इंस्पेक्टर कुलदीप, ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर राजेंद्र, राजू गुप्ता, राहुल पाल, मुसाफिर साहनी, कुसुम गुप्ता, लता देवी आदि उपस्थित रहे।

एक साल के लिए होगा पंजीकरण
एमएनए चतर सिंह चौहान ने बताया कि वेंडर्स के लिए पंजीकरण एक साल के लिए ही मान्य होगा। हर साल पंजीकरण को नवीनीकरण कराना होगा। उन्होंने बताया कि पंजीकरण का शुल्क वेंडर्स की सूची आने के बाद ही तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जो वेंडर्स इस सूची से वंचित रह जाएगा। उसका नाम अगले पांच साल बाद ही जुड़ सकेगा।

बैठक में यह भी तय हुआ
– जिस स्थान का लाइसेंस वेंडर्स को मिलेगा, वह उसी स्थान पर ठेली लगाएगा।
– एक स्थान पर सीमित संख्या से ज्यादा आवेदन आने पर, लॉटरी से चयन किया जाएगा।
– स्थिर, चलायमान और साइकिल से वस्तु विक्रय करने वालों को भी लाइसेंस दिया जाएगा।
– जिसके नाम लाइसेंस उपलब्ध होगा, वही व्यक्ति कार्य करेगा।
– एक व्यक्ति एक से ज्यादा ठेली नहीं लगा सकेगा।
– ठेली और फड़ के आसपास गंदगी करने पर पेनल्टी लगेगी।
– वेंडर्स को कूड़ा उठान की सुविधा, पथ प्रकाश, शौचालय, पानी आदि की सुविधा निगम उपलब्ध कराएगा।
– शर्तों का उल्लंघन करने पर शुरूआती दो चरणों में चालान वसूला जाएगा, तीसरे चरण में लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।

राज्य वन्य जीव बोर्ड की 13वीं बैठक में वन संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव बोर्ड की 13वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। इस अवसर पर वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत भी उपस्थित थे। बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने वनों के प्रबन्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित किये जाने पर बल देते हुए कहा कि वनों के संरक्षण के साथ ही ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित न हो इसके लिये प्रभावी पहल होनी चाहिए।

बैठक में मानव वन्य जीव संघर्ष से ग्रसित गांवों में वालेण्टरी विलेज प्रोटेक्शन फोर्स के गठन, संरक्षित क्षेत्रों के अन्दर व निकटस्थ गांवों में इको डेवलपमेंट कार्यक्रम को पंचायतों के माध्यम से संचालित कराये जाने, राज्य मे कस्तुरी मृग व राज्य पक्षी मोनाल के संरक्षण, मत्स्य संरक्षण एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एंगलिंग की अनुमति प्रदान करने के साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व व राजाजी टाइगर रिजर्व में मानव वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिए बाघो व जंगली हाथियों की जनसंख्या प्रबन्धन व धारण क्षमता के आकलन के लिये दीर्घ कालीन शोध व नीति निर्धारण पर सहमति प्रदान की गई।

बैठक में नन्दौर एवं सुरई को क्षेत्रीय जनता की मांग के दृष्टिगत बफर जोन न बनाये जाने का भी निर्णय लिया गया। लालढ़ांग-चिल्लरखाल सड़क के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। अब यह प्रस्ताव नेशनल वाईल्ड लाईफ बोर्ड को भेजा जाएगा। नेशनल पार्क व बफर जोन में वर्षों पूर्व स्थापित स्कूलों आदि में सौर उर्जा एवं शौचालयों के निर्माण के लिए कंजरवेटर को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया। इसके अतिरिक्त बैठक में विभिन्न सड़को के 16 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

बैठक में कंडी मार्ग के सम्बन्ध में इसके सभी पहुलओं पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण के माध्यम से व्यापक चर्चा की गई। इस सम्बन्ध में व्यापक विचार विमर्श के पश्चात् शासन द्वारा इस पर व्यवहारिकता के दृष्टिगत नीतिगत निर्णय किए जाने की भी सहमति बनी।

निवेश के लिए उत्तराखंड सबसे उपयुक्त राज्य, तेजी से बढ़ रही उत्तराखंड की अर्थव्यवस्थाः त्रिवेन्द्र रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बैंगलोर में आयोजित आठवें इनवेस्ट नाॅर्थ कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखण्ड में निवेश के लिए उद्यमियों को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सेवा क्षेत्र विशेष तौर पर पर्यटन, बायो टेक्नोलाॅजी, नवीकरणीय ऊर्जा, फिल्म शूटिंग व सूचना प्रौद्योगिकी में निवेश की काफी सम्भावनाएं हैं। उत्तराखण्ड सरकार, निवेशकों को आवश्यक सुविधायें प्रदान करने के लिए तत्पर है। गत दो वर्षों राज्य में निवेश के लिए सुनियोजित प्रयास किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य तेजी से निवेश के लिये मुख्य गंतव्य स्थल के रूप में विकसित हुआ है। यह देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। राज्य सरकार ने डीपीआईआईटी और विश्व बैंक द्वारा प्रस्तावित विभिन्न व्यावसायिक सुधार किए हैं। पर्वतीय राज्यों द्वारा किए गए व्यापार सुधारों के मामले में उत्तराखण्ड अग्रणी है। लाॅजिस्टिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए अनेक बुनियादी अवसंरचनात्मक परियोजनाएं प्रारम्भ की हैं। राज्य में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आईसीडी और एलसीएस की स्थापना की गई हैं। आल वेदर रोड़ व जौलीग्रांट एयरपोर्ट की क्षमता विस्तार का काम प्रगति पर है। केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अमृतसर-कोलकाता इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर से उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड में स्थित उद्योगों को लाॅजिस्टिक्स के लिए सुगमता होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में अक्टूबर, 2018 में प्रथम इन्वेस्टर्स समिट ‘‘डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड’’ का आयोजन किया गया था, जिसमें देश व विदेश के 4000 से अधिक प्रतिनिधियों, निवेशकों, उद्योगपतियों ने प्रतिभाग किया था। शिखर सम्मेलन के दौरान 600 से अधिक निवेशकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी निवेश के लिए रू. 1,24,000 करोड़ (एक लाख चैबिस हजार करोड़) से अधिक के प्रस्तावों के एमओयू किये गये। इन एमओयू के क्रियान्वयन के लिए ठोस पहल की गई है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद के 10 माह में लगभग रू. 17 हजार करोड़ से अधिक के पूंजी निवेश के प्रस्तावों की ग्राउण्डिंग की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का ध्यान ऐसी परियोजनाओं पर भी केंद्रित है, जिससे राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिकी को मजबूत किया जा सके। पाइन निडिल से ऊर्जा उत्पादन इनमें से एक है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को रोजगार के अवसर सुलभ हो सकें। राज्य सरकार ने अब तक 20 परियोजनाआं की स्थापना के लिए विकासकर्ताओं का चयन किया है, जो लगभग 675 किलोवाट की बिजली उत्पादन कर सकेंगे और आने वाले समय में इस परियोजना की क्षमता को 5 मेगावाट तक बढ़ाये जाने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश की सम्भावनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये नयी पर्यटन नीति-2018 लागू की गयी है, जिसका मुख्य उद्देश्य रिवर्स माइग्रेशन को सुगम बनाने, ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने और पारिस्थितिक पर्यटन, वैलनेस व साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। राज्य के प्रत्येक जनपद में एक नया थीम बेस्ड डेस्टिनेशन विकसित किया जा रहा है। राज्य में पर्यटक रोप-वे निर्माण की व्यापक सम्भावनायें हैं, जिनमें से कुछ चिन्हित परियोजनायें देहरादून-मसूरी, जानकी चट्टी-यमुनोत्री, गोविन्दघाट-हेमकुण्ड साहिब, भैरव गढ़ी, देव का डाण्डा, बिनसर प्रमुख हैं। हाल ही में देहरादून को मसूरी से जोड़ने वाले रोप-वे प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया है, जिससे सड़क मार्ग से यात्रा मंे लगने वाला समय एक घण्टा तीस मिनट से घटकर केवल 15-20 मिनट हो जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा 66 वें राष्ट्रीय फिल्म फेयर अवाड्र्स में उत्तराखण्ड का चयन मोस्ट फिल्म फेंडली स्टेट के लिए किया गया है। राज्य सरकार की फिल्म नीति के कारण ही पिछले वर्ष 180 से अधिक फिल्मों की शूटिंग राज्य में की गईं, जो एक समर्पित क्षेत्र नीति का ही परिणाम है। उत्तराखण्ड, सूचना प्रौद्योगिकी एवं समर्थित सेवाओं के क्षेत्र के विकास पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है और इस क्षेत्र के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विशेष पहल की है। राज्य ने अपनी सूचना प्रौद्योगिकी नीति को अधिसूचित कर दिया है। इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी सम्बोधित किया।

शादी के लिए किया मना तो प्रेमी ने प्रेमिका को उतारा मौत के घाट

शादी के लिए मना करने पर एक सिरफिरे आशिक ने घर में घुसकर प्रेमिका पर चाकू से वार कर हत्या कर दी। युवक ने खुद के गले व हाथ पर भी चाकू से वार कर आत्महत्या का प्रयास किया। युवक एम्स ऋषिकेश में भर्ती है। वहंी, युवती के शव को पोस्टमार्टम के बाद उसकी आंखे एम्स को दान कर दी गईं है।

ठेकेदार सुखराम यादव बनखंडी गली नं. दो में अपने परिवार के साथ रहते हैं। बुधवार की सुबह वह आरएसएस की शाखा में गए थे, जबकि उनकी पत्नी प्रातः करीब साढ़े छह बजे मार्निंग वॉक के लिए गई हुई थी। घर पर उनकी बेटी कल्याणी (27) मौजूद थी। सुबह करीब पौने सात बजे एक युवक उनके घर के बाहर स्कूटी खड़ी करके अंदर घुस गया। युवक की कल्याणी के साथ कहासुनी होने लगी। घर की ऊपरी मंजिल पर किराये पर रहने वाले रवि ने जब आवाज सुनी तो वह नीचे आ गया। देखा कि बरामदे में युवक व कल्याणी के बीच छीनाझपटी हो रही थी, जिसे देख रवि ने बीच बचाव करना चाहा।

मगर, युवक ने बरामदे में भीतर से कुंडी लगा दी। यह बात अन्य लोगों को बताने के लिए रवि बाहर की ओर दौड़ा। इस बीच युवक ने पेपर काटने वाले धारदार चाकू से कल्याणी का गला रेत दिया और शरीर पर अन्य जगह भी वार कर दिए। युवक ने खुद के गले पर भी चाकू से गहरा वार कर दिया और हाथ की नसें भी काट दी। सूचना पर घर पहुंचे परिजनों ने आसपास के लोगों की मदद से ग्रिल की जाली काटकर भीतर प्रवेश किया। बरामदे में कल्याणी व युवक लहूलुहान हालत में पड़े थे। इस बीच कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। मगर, तब तक युवती दम तोड़ चुकी थी। जबकि गंभीर रूप से घायल युवक को पुलिस ने एम्स ऋषिकेश पहुंचाया। वहंी, मृतक युवती की आंखे उसके पिता सुखराम ने दान की है। बुधवार दोपहर बाद एम्स पहुंचे मृतका के पिता सुखराम ने एम्स को बेटी की आंखे दान करने का निर्णय लिया है।

स्व. जेटली की अस्थियां हरिद्वार गंगा में प्रवाहित

सोमवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. अरूण जेटली की अस्थियां ब्रह्मकुण्ड, हरिद्वार में विसर्जित की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी अस्थि विसर्जन के अवसर पर मौजूद रहे। उन्होंने स्व. जेटली को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके निधन को देश के लिये अपूरणीय क्षति बताया।

स्व0 जेटली के पुत्र रोहन जेटली ने धार्मिक रीति के साथ अपने पिता की अस्थियाँ गंगा में विसर्जित की। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधान सभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, डॉ0 हरक सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत, विधायक यतीश्वरानंद, देशराज कर्णवाल, पुष्कर सिंह धामी, आदेश चौहान, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा अजय भट्ट तथा जनमानस ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

वन कर्मियों की कमी केंद्र और राज्य सरकार को देना है जवाब

उत्तराखंड में वनों को बचाने के लिए वन विभाग के पास जरुरी उपकरणों की कमी है। साथ ही एक तिहाई फील्ड कर्मचारियों कमी है। वन विभाग की मुताबिक, राज्य के वन 95 हजार करोड़ की पर्यावरणीय सेवा प्रदान कर रहे हैं। यहां गंगा-यमुना का कैचमेंट भी है, लेकिन वनों का प्रबंधन व सुरक्षा की बेहद खराब हालत है। फील्ड स्टाफ की कमी की वजह से एक फॉरेस्ट गार्ड सैकड़ों वर्ग किमी वनों की सुरक्षा में तैनात हैं। इस वजह से कर्मचारी श्रम कानूनों के अनुसार नियमित आठ घंटे के अतिरिक्त 24 घंटे ड्यूटी देने को मजबूर हैं। हाईकोर्ट ने वन विभाग की इन तमाम दुश्वारियों के मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र और उत्तराखंड सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव रहे संदीप तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर कर कहा है कि वन विभाग के पास वनों को बचाने के लिए जरूरी उपकरण जैसे आग बुझाने के उपकरण, बंदूक, कर्मचारियों की फायर वर्दी, सेटेलाइट मोबाइल आदि का अभाव है। उत्तराखंड में हर साल आगजनी की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। वन कर्मचारियों के पास अत्याधुनिक संचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, जंगली जानवरों का अवैध शिकार किया जा रहा है। अवैध तरीके से वन एवं खनिज संपदा का दोहन किया जा रहा है। वन कर्मचारी पैदल गश्त करते हैं। वन चैकियों या चेक पोस्ट में धर्मकांटा और सीसीटीवी का भी अभाव हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र या बुग्यालों में गश्त के लिए जरूरी उपकरण भी वन कर्मचारियों के पास नहीं हैं। आरोप लगाया कि दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों की तस्करी हो रही है। उन्होंने याचिका में पुलिस आधुनिकीकरण की तर्ज पर वन विभाग को बजट मुहैया कराने, रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने, उपकरण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को निर्देशित करने की गुहार लगाई गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद केंद्र और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत सामाग्री देकर लौटते समय क्रैश हुआ हेलीकॉप्टर

आपदा प्रभावित क्षेत्र से राहत सामाग्री देकर लौट रहा एक हेलीकॉप्टर आराकोट न्याय पंचायत क्षेत्र के मोल्डी गांव में क्रैश हो गया। हादसे में पायलट, को-पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति की मौत हो गई। इसके बाद समूचे आपदा प्रभावित इलाकों में फिलहाल हेली रेस्क्यू पर रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतक आश्रितों को 15-15 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। बता दें कि हादसे में मारे गए पायलट ने छह साल पहले केदारनाथ आपदा के दौरान भी रेस्क्यू में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 225 किलोमीटर दूर आराकोट इलाके में बीती रविवार तड़के बादल फटने से भारी तबाही मची थी। यहां 35 गांवों में मोटर और पैदल मार्गों के साथ ही पुल-पुलिया बह गई हैं। इसकी वजह से रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं। प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए सोमवार से हेली रेस्क्यू चलाया जा रहा है। बुधवार दोपहर करीब पौने बारह बजे आराकोट से छह किलोमीटर दूर मोल्डी गांव में राशन व राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हैरिटेज कंपनी के हेलीकॉप्टर ने मोरी स्थित हेलीपैड से उड़ान भारी। 12 बजे हेलीकॉप्टर मोल्डी गांव में पहुंचा। वहां राशन व राहत सामग्री को छोड़कर वापस लौट रहा था, तभी हेलीकॉप्टर गांव के पास ही बागीचों से सेब की पेटियों को सड़क तक पहुंचाने के लिए लगाई गई ट्रॉली की तारों से उलझकर क्रैश हो गया। देखते ही देखते हेलीकॉप्टर में आग लग गई और वह बरसाती नाले से सटे जंगल में जा गिरा।

हेलीकॉप्टर में पायलट सहित तीन लोग सवार थे, तीनों की मौके पर ही मौत हुई। इनमें पायलट, को-पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति शामिल हैं। स्थानीय व्यक्ति भी एक निजी एविएशन कंपनी का मुलाजिम है, बताया गया कि वह रेस्क्यू टीम की मदद के लिए हेलीकॉप्टर में साथ गया था। आग लगने से तीनों के शव बुरी तरह झुलस गए थे। सूचना पर एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल) और आइटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) की टीम मौके पर पहुंची।