टॉर्चर और आत्महत्या के लिये मजबूर करने पर ऋषिकुल के दो शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज

ऋषिकुल विद्यापीठ में पढ़ने वाले दिल्ली के छात्र ने खुदकुशी की थी। छात्र के परिजनों ने संस्थान के दो शिक्षकों पर टॉर्चर और आत्महत्या के लिये उकसाने का आरोप लगाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस ने मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि इस पर अभी जांच होगी उसके बाद ही कार्यवाही शुरू की जायेगी।

पुलिस के मुताबिक देवेंद्र शर्मा निवासी मकान नंबर 79, गली नंबर 14, फेस-6 शिव विहार दिल्ली का बेटा दीपेश शर्मा ऋषिकुल विद्यापीठ हरिद्वार में कक्षा आठ का छात्र था। वह विद्यापीठ परिसर में ही बने छात्रवास में रहता था। बीते 13-14 सितंबर की रात उसने छात्रवास के आंगन में ही फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। हालांकि उस दौरान भी परिजनों ने छात्र की मौत पर सवाल उठाए थे, मगर पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की बात कही थी।

मामले में दिल्ली से हरिद्वार पहुंचे परिजनों ने एसपी सिटी ममता वोहरा से मुलाकात की और बताया कि अंतिम संस्कार से पहले दीपेश के कपड़ों से दो अलग-अलग सुसाइड नोट मिले थे। जिनमें दीपेश ने लिखा है कि शिक्षक देवीदत्त कांडपाल व दिनेश चंद्र तिवारी ने उसका जीवन बरबाद कर दिया है। इसके अलावा छात्र ने सुसाइड नोट में अपने परिजनों से माफी भी मांगी है।

परिजनों ने आरोप लगाया कि दोनों शिक्षकों ने दीपेश को इतना टॉर्चर किया है कि उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। एसपी सिटी ममता वोहरा के निर्देश पर पुलिस ने शिक्षक देवीदत्त कांडपाल व दिनेश तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसपी सिटी ममता वोहरा ने बताया कि सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग का एक्सपर्ट से मिलान कराया जाएगा। शिक्षकों के अलावा छात्र-छात्रओं से भी पूछताछ की जाएगी। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रबंध समिति की स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका होगी समाप्त

अब विद्यालय प्रबंध समितियों का स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका समाप्त हो जाएगी। इसका कारण है कि राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क दी जाने वाली स्कूल ड्रेस के स्थान पर धनराशि मिलेगी और यह धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में की जायेगी।

राज्य में सरकारी व सहायताप्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत समस्त छात्रओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को मुफ्त स्कूल ड्रेस मुहैया कराई जाती है। इस योजना से राज्य के करीब ढाई लाख छात्र-छात्रएं लाभान्वित होते हैं।

अब सरकार ने मुफ्त किताबों की तर्ज पर स्कूल ड्रेस का पैसा भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के तहत छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में देने का निर्णय लिया है। कक्षा एक से आठवीं तक समस्त छात्र-छात्रओं को दी जाने वाली निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के स्थान पर पुस्तकों की मूल्य राशि डीबीटी के तहत उपलब्ध कराई जा रही है। अब इस योजना को स्कूल ड्रेस के लिए भी लागू किया जा रहा है। इस योजना में प्रति लाभार्थी छात्र-छात्र को दो स्कूल ड्रेस के लिए 600 रुपये दिए जाएंगे। इस मद में तकरीबन 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इस संबंध में फैसला लेने में देरी के चलते स्कूल ड्रेस के लिए दी जाने वाली धनराशि निदेशालय स्तर से जिलों को भेजी जा चुकी है। केंद्र सरकार डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इसमें धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में मुहैया कराई जा रही है। केंद्र के रुख को भांपकर राज्य सरकार भी डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इस कड़ी में अब स्कूल ड्रेस के लिए भी इसे लागू किया जा रहा है। हालांकि इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान कार्यकारिणी परिषद में भी डीबीटी के प्रस्ताव पर मुहर लगानी होगी। लिहाजा शासन स्तर पर कार्यकारिणी परिषद की बैठक 30 अक्टूबर को बुलाई गई है।

स्कूली अनुबंधित बसों का टैक्स आधा होने से मिलेगी राहत

अब स्कूलों में अनुबंध पर लगने वाली बसों का टैक्स भी आधा होने की उम्मीद है। परिवहन विभाग ने इसके लिये प्रस्ताव बनाया हैं। अभी तक टैक्स में छूट स्कूलों की स्वयं की बसों और वैन को ही है।

परिवहन दफ्तरों में पंजीकृत होने वाली स्कूल बस का टैक्स निजी बसों की अपेक्षा कम होता है। टैक्स व्यवस्था के हिसाब से स्कूल बस से तीन महीने के लिए 90 रुपये प्रति सीट के हिसाब से टैक्स वसूला जाता है, जबकि निजी बसों से 300 रुपये टैक्स लिया जाता है। निजी बस को अनुबंध पर स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए चलाया जाता है तब भी उसे 300 रुपये प्रति सीट के हिसाब से ही टैक्स देना होता है। ऐसे में निजी ट्रांसपोर्टर स्कूल में बसें लगाने से बचते हैं। ट्रांसपोर्टर अनुबंधित स्कूल बसों के लिए भी स्कूल वैन की तर्ज पर टैक्स में छूट की मांग कर रहे हैं। दरअसल, स्कूल का टैक्स मैक्सी-कैब की अपेक्षा आधा है। मैक्सी कैब का तीन महीने का टैक्स 415 रुपये प्रति सीट है, जबकि स्कूल वैन का टैक्स 207.50 रुपये प्रति सीट है।

वैन भी अनुबंध या निजी करार पर स्कूलों के लिए संचालित होती हैं। अनुबंधित स्कूल बसों को टैक्स में छूट देने के लिए परिवहन आयुक्त ने एक टैक्स निर्धारण कमेटी का गठन किया था। जिसमें आरटीओ देहरादून दिनेश चंद्र पठोई कमेटी के अध्यक्ष हैं। इस कमेटी ने स्कूली बच्चों की सुविधाओं को देखते हुए अनुबंध पर संचालित स्कूल बसों का टैक्स आधा कर देने की सिफारिश की है। इसमें शर्त होगी कि बस का संचालन निजी बुकिंग पर नहीं किया जाएगा।

कमेटी ने रिपोर्ट में बताया है कि स्कूलों संग अनुबंध करने वाले वाहन स्वामी प्रदेशस्तर का कांट्रेक्ट कैरिज परमिट लेते हैं और स्कूल बंद हो तो ये बसें निजी मार्गो पर संचालित की जाती हैं। टैक्स की छूट उन्हीं निजी बसों को मिलेगी, जो सभी नियम पूरे करती हों, रंग पीला हो और बसें केवल स्कूल के लिए संचालित हों।

एनआरआई व्यवसायी ने विदेशी युवती के साथ किया दुष्कर्म, पुलिस ने किया गिरफ्तार

विदेशी युवती के साथ एक एनआरआई व्यवसायी ने दुष्कर्म किया। ऋषिकेश में डेनमार्क से एक युवती योग सीखने के लिये पहुंची थी। जिसे एनआरआई व्यवसायी ने एनर्जी हीलिंग के जरिये स्वस्थ करने का झांसा देकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। वहीं पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

निजी योग संस्थान का संचालन करने वाले वीरभद्र ऋषिकेश निवासी जितेन अरोड़ा ने रामझूला थाने में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि डेनमार्क निवासी 22 वर्षीय एक युवती उनके संस्थान में पंद्रह दिनों से योग शिक्षा ले रही थी।

गुरुवार को युवती संस्थान पहुंची और उसने आपबीती सुनाई। युवती ने बताया कि उसकी मुलाकात कुछ दिन पूर्व तपोवन स्थित एक रेस्टोरेंट में सुदीप बालियान नाम के शख्स से हुई। सुदीप को उसने अपने मानसिक तनाव की बात बताई। जिस पर सुदीप ने उसे एनर्जी हीलिंग (एक ऐसी ध्यान क्रिया जिसमें प्राण ऊर्जा को शरीर के प्रभावित हिस्से पर केंद्रित करने का अभ्यास कराया जाता है) की सलाह दी थी।

युवती का आरोप है कि सुदीप इस बहाने उसे तपोवन स्थित देवी म्यूजिक आश्रम में ले गया, वह इसी आश्रम में कमरा लेकर रह रहा था। पीड़िता के अनुसार एनर्जी हीलिंग की क्रिया के दौरान आरोपित ने उसके साथ छेड़छाड़ व दुष्कर्म किया।

मुनिकीरेती थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज करने के साथ ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि वह ग्रीन स्ट्रीट मेल वैली, कैलिफोर्निया यूएसए में कारोबार करता है। मूलरूप से वह सोनीपत हरियाणा का रहने वाला है। करीब एक महीने पहले वह भारत आया था। पिछले दस दिनों से तपोवन में रह रहा है।

सशस्त्र सीमा बल के प्रशिक्षण केंद्र पहुंच सीएम ने देवभूमि पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत शनिवार को श्रीनगर (पौड़ी) में सशस्त्र सीमा बल केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र के 11वें बुनियादी रंगरूट प्रशिक्षण कोर्स के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने परेड का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सेना में बेटियों की बढ़ती भागीदारी को देशहित में बताया। उन्होंने कहा कि सेना में बेटियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे को साकार कर रहा है। मुख्यमंत्री ने रंगरूट प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रशिक्षुओं को ट्राफी देकर सम्मानित भी किया। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं द्वारा लिखी गई देवभूमि पुस्तक का विमोचन भी मुख्यमंत्री ने किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आज का दिन हमारे जवानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर तथा हम सब के लिए गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि अपने सैन्य बलों पर हमें गर्व है। ऐसे कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने के लिए उनकी उत्सुकता बनी रहती है।

गढ़वाल और जम्मू कश्मीर का श्रीनगर एक हुए
उन्होंने कहा कि हमारे लिए एवं अर्द्ध सैनिक बल के लिए यह सम्मान की बात है कि एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भागीदारी कर जम्मू कश्मीर के युवक व युवतियां यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर वापस जा रहे हैं। यह गढ़वाल का श्रीनगर है वहां जम्मू कश्मीर का श्रीनगर है। आज दोनों श्रीनगर एक हुए हैं। यह गढ़वाल की पूर्व राजधानी है। वह जम्मू कश्मीर की वर्तमान राजधानी है। कश्मीर को देश का सिरमौर भी कहा जाता है।

मुख्यमंत्री ने यहां से प्रशिक्षण लेकर जाने वाले प्रशिक्षुओं के परिवार वालों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारी सेनाओं की मजबूती से ही हमारा देश सुरक्षित है। सीमान्त क्षेत्रों के युवक व युवतियां यहां से प्रशिक्षण लेकर जा रहे हैं, इससे हमारी सीमाओं को और अधिक ताकत मिलेगी तथा हमारी सीमाएं और अधिक मजबूत होंगी।

भारत-नेपाल तथा भारत-भूटान की संवेदनशील सीमाओं की जिम्मेदारी भी सीमा सशस्त्र बल पर है। उन्होंने कहा कि एसएसबी सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ अनेकों अन्य दायित्वों का निर्वहन भी पूरी तत्परता से कर रहा है। विगत वर्षों में सशस्त्र सीमा बल ने विभिन्न राज्यों के हुये चुनाव को सुरक्षित व शांतिपूर्ण निभाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सशस्त्र सीमा बल के ये 101 नव प्रशिक्षु जवान अपनी सीटीसी में आधारभूत प्रशिक्षण के मध्य सीखी गई अनूठी सैन्य विधाओं का प्रयोग करते हुए भारत-नेपाल व भारत- भूटान सीमाओं की रक्षा में भारत माता और अपने बल का नाम शिखर पर पहुंचाएंगे।

सीएम बोले कि देव भूमि में बसी इस सीटीसी में 44 सप्ताह का प्रशिक्षण ग्रहण करते समय यहां की मनोहर प्रकृति ने आपको अवश्य प्रेरणा दी होगी। निश्चय ही सैन्य प्रशिक्षण की इन विधाओं में दक्ष इस सीटीसी के सभी प्रशिक्षक बल कर्मी और उप महानिरीक्षक तथा महानिरीक्षक बधाई के पात्र हैं। इन्हीं के अथक प्रयासां के परिणामस्वरूप राष्ट्र सुरक्षा का सुदृढ़ प्रतिमान यहां तैयार किया जा रहे हैं। 44 सप्ताह की इस प्रशिक्षण अवधि में विभिन्न प्रशिक्षणों में सर्वोत्तम रहे प्रशिक्षुओं को उन्होंने विशेष रूप से बधाई दी। जिनकी अद्वितीय क्षमता ने उन्हें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितेंद्र कुमार, डोली देवी, सुमन लता, कमर इकबाल तथा शुभम वर्मा प्रशिक्षुओं को ट्राफी देकर सम्मानित किया। प्रशिक्षुओं को देश की अखंडता और एकता की शपथ दिलाई। समारोह में एसएसबी जवानों द्वारा बैंड, मार्च पास्ट व घुड़सवार प्रतिस्पर्धा समेत विभिन्न करतब आयोजित किये गये। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं द्वारा लिखी गई देवभूमि पुस्तक का विमोचन भी मुख्यमंत्री ने किया।

स्वामी सानंद उपवास तोड़ना चाहते थे, मगर….

ऋषिकेश एम्स के निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने स्वामी सानंद की मौत के बाद एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद अपना उपवास तोड़ना चाहते थे। मगर, परिवार के अलावा बाहर का एक शख्स ऐसा भी था, जो उन्हें उपवास तोड़ने से रोक रहा था।

इस बात के ठोस आधार के बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद तीन बार एम्स में भर्ती किए गए। उनके साथ हमारी कई मर्तबा बातचीत हुई है, अगर ऐसा पता होता तो हम उसकी भी रिकॉर्डिंग करते। उन्होंने मातृ सदन द्वारा स्वामी सानंद की मौत के षड्यंत्र में शामिल होने संबंधी आरोप को खारिज करते हुए कहां की हम किसी को झूठ बोलने से कैसे रोक सकते हैं।

सानंद अपनी देह कर चुके हैं एम्स को दान
स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने संबंधी मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को किसी भी दशा में अंतिम दर्शन के लिए नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज कोई प्रदर्शनी की जगह नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वामी सानंद अपनी देह एम्स को दान कर चुके हैं, परिजन भी सहमति जता चुके हैं। इसलिए दान की हुई वस्तु को वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है।

स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर एम्स की संपत्ति, अंतिम दर्शन की इजाजत नहीं

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान प्रशासन ने शुक्रवार को स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन कराने से हाथ खड़े कर दिये। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर उनकी संपत्ति हो गयी है। इसलिये किसी को भी सार्वजनिक रूप से अंतिम दर्शन की इजाजत नहंी दी जा सकती है।

एम्स प्रशासन के इस बयान के बाद बाद उनके परिजन, अनुयायी और गंगा संकल्प यात्रा के सहयोगी नाराज हो गए। एम्स ने मातृ सदन की ओर से आए उनके शरीर को तीन दिन आश्रम में रखने के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। हालांकि बाद में बिगड़ते हालात को देखते हुए एम्स प्रशासन ने मीडिया को छोड़कर कुछ लोगों को अंतिम दर्शन की इजाजत दे दी।

गुरुवार को स्वामी सानंद के परिजनों ने एम्स प्रशासन से उनके पार्थिव शरीर को परिजनों और उनके अनुयायियों के दर्शनाथ रखने के लिए आग्रह किया था। जिस पर एम्स प्रशासन ने मौखिक सहमति भी दे दी थी, लेकिन शुक्रवार को पूरा घटनाक्रम बदल गया।

एम्स के निदेशक प्रो. रविकांत ने शव को अंतिम दर्शन के लिए रखने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर अब एम्स की संपत्ति है, लिहाजा उसे सार्वजनिक रूप से अंतिम दर्शन के लिए नहीं रखा जा सकता। एम्स प्रशासन के इस फैसले के बाद उनके परिजनों और अनुयायियों ने काफी मिन्नतें की। लेकिन एम्स निदेशक अपने फैसले से पीछे नहीं हटे और दोपहर एक बजे वहां से चलते बने।

इससे पहले मातृ सदन हरिद्वार से स्वामी दयानंद ब्रह्मचारी भी एक पत्र लेकर एम्स पहुंचे। पत्र में मातृसदन ने दो दिन के लिए स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को आश्रम में दर्शन के लिए ले जाने का आग्रह किया था। मगर, एम्स प्रशासन ने उन्हें भी इसकी इजाजत नहीं दी। जिससे स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन की इच्छा लेकर यहां पहुंचे लोग नाराज हो गए। स्वामी सानंद के अधिकांश परिजन इस निर्णय के बाद यहां से चले भी गए थे। जबकि कुछ लोगों ने एम्स प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

धरने के बाद बैकफुट पर आया प्रशासन

स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन न कराए जाने से नाराज गंगा संकल्प यात्रा के सदस्य जल पुरुष राजेंद्र सिंह व उनके सहयोगियों ने एम्स निदेशक के कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह भी कार्यकर्ताओं के साथ एम्स पहुंचे और वह भी गंगा संकल्प यात्रा के सदस्यों के साथ धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने उन्हें उठाने की कोशिश की, मगर सभी लोग स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन की मांग पर अड़े रहे।

मामला बिगड़ता देख पुलिस व स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आ गया। स्थानीय प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद एम्स प्रशासन ने गंगा संकल्प यात्रा के सदस्यों व अनुयायियों को स्वामी सानंद के दर्शन की इजाजत दी।

113 दिन से अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद की हृदयघात से हुयी मौत

गंगा पर बन रहे बांध के विरोध और गंगा रक्षा के लिये प्रभावी कानून बनाने जाने को लेकर बीते 113 दिनों से अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद (प्रोफेसर गुरुदास अग्रवाल) का एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया। विदित हो कि स्वामी सानंद को हरिद्वार प्रशासन ने जबरन एम्स में बुधवार को भर्ती कराया था। वहीं मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने जिला प्रशासन पर सानंद की हत्या करने का आरोप लगया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उनके निधन पर शोक जताया है।

गुरूवार को स्वामी सानंद की मौत के बाद एम्स के चिकित्सकों ने बताया कि स्वामी सानंद के शरीर में पोटेशियम और ग्लूकोज निचले स्तर पर आ गया था, इसकी वजह से दोपहर उन्हें हृदयघात आया। 86 वर्षीय सानंद अविवाहित थे। चूंकि, स्वामी सानंद ने एम्स ऋषिकेश को अपनी देह दान की हुई थी, लिहाजा पार्थिव शरीर को अभी एम्स में ही रखा गया है। शाम को परिजन भी यहां पहुंच गए।

उधर, मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने जिला प्रशासन पर सानंद की हत्या का आरोप लगाया। घोषणा की है कि नवरात्रों के बाद वह स्वयं इस आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। कहा कि, स्वामी सानंद की हत्या में शामिल अधिकारियों व मंत्रियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर कठोर तपस्या (अनशन) करेंगे। उल्लेखनीय है किसात साल पहले मातृसदन के एक अन्य संत निगमानंद ने भी इसी मुद्दे पर 114 दिन के अनशन के बाद दम तोड़ दिया था।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से सेवानिवृत प्रोफेसर गुरुदास अग्रवाल (स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद) मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कांधला मुजफ्फरनगर के रहने वाले थे। 22 जून, 2018 को उन्होंने गंगा की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाने और जल विद्युत परियोजनाओं के विरोध समेत विभिन्न मांगों को लेकर मातृसदन में अनशन शुरू किया था, इसे उन्होंने तप नाम दिया था। इस दौरान वे केवल नींबू, शहद, नमक और पानी ले रहे थे। उन्हें मनाने के लिए केंद्रीय मंत्री उमा भारती दो बार खुद मातृसदन आईं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने पत्र के साथ संदेशवाहक भेजकर उनके आंदोलन खत्म करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।

एम्स को दान कर गए अपना शरीर

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को स्वामी सानंद अपना शरीर दान कर गए हैं। उनकी इस इच्छा का सम्मान करने के लिए एम्स प्रशासन जुट गया है। एम्स में डीन डॉ विजेंद्र सिंह ने बताया कि जब स्वामी सानंद स्वस्थ थे तो उन्होंने अपना शरीर एम्स को दान करने के लिए संकल्प पत्र हमें भिजवाया था। इस संकल्प पत्र का एम्स प्रशासन पालन करेगा और स्वामी सानंद की इस इच्छा का पूरा सम्मान किया जाएगा।

मंगलवार सुबह भी हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक फिर से केंद्रीय मंत्री गडकरी का पत्र लेकर उनके पास पहुंचे थे, जल्द उनकी मांगों पर विचार करने आश्वासन पर सानंद ने सहमति जताई थी, लेकिन शाम होते ही उन्होंने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि उन्होंने दोपहर से ही जल त्याग दिया है। इस पर बुधवार शाम को जिला प्रशासन ने उन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती करा दिया था। जहां, गुरूवार दोपहर एक बजकर बीस मिनट पर उन्होंने शरीर त्याग दिया।

इससे कुछ देर पहले ही डाक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया था, तब उनकी हालत स्थिर थी। जल पुरुष राजेंद्र सिंह के अनुसार सुबह उन्होंने भी एम्स पहुंचकर सानंद से मुलाकात की थी, दिल्ली जाते वक्त मुरादाबाद में उन्हें सानंद के देह त्यागने की सूचना मिली। बता दें कि इससे पहले भी 12 जुलाई से 23 जुलाई तक उनका एम्स में उपचार किया गया था। तब भी वह इन्हीं मांगों को लेकर अनशन पर थे। स्वामी शिवानंद (परमाध्यक्ष मातृसदन) ने कहा कि जिस तरह से सात साल पहले मातृसदन के संत उनके शिष्य ब्रह्मचारी निगमानंद की हत्या की गई थी, ठीक उसी प्रकार अब स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की भी हत्या की गई है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के देहावसान का समाचार पाकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल एम्स पहुंचे। प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने गंगा की सेवा के लिए अपना जीवन आहूत किया है। उन्होंने स्वामी सानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर उनकी मांगे जायज थी, जिन पर विचार किया जाना चाहिए था। संभव है कि सरकार की कुछ मजबूरियां रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का देहावसान किन कारणों से हुआ यह पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वामी सानंद का व्रत तुड़वाने के लिए हर संभव प्रयास किया, इसलिए यह कहना गलत है कि केंद्र सरकार स्वामी सानंद के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नहीं थी।

सीएम बोले सरकार ने दिखाई पूरी संवेदनशीलता
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो. जीडी अग्रवाल) के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश मे मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा को लेकर विभिन्न मुद्दों के लिए अनशनरत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी सानंद की मुख्य मांग थी कि गंगा के लिए अलग से एक्ट बनाया जाए और राज्य में तमाम जलविद्युत परियोजनाओं को रद किया जाए। इस कार्य के अध्ययन और उस पर योजना बनाने में थोड़ा समय लगता है। हमारी सरकार और केंद्र सरकार लगातार उनसे संपर्क में थी, बातचीत होती थी। केंद्रीय पेयजल मंत्री उमा भारती ने उनसे मुलाकात की थी। उसके बाद जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने भी फोन पर उनसे बातचीत की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से भी इस मुद्दे पर पूरी संवेदनशीलता दिखाई गई थी। सरकार के प्रतिनिधि लगातार उनके संपर्क में थे। हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। हमारी कोशिश थी कि किसी तरह से उनकी जान बचाई जा सके, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्होंने अनशन तोडने से इन्कार कर दिया। जैसे ही उन्होंने नौ अक्टूबर को जल का त्याग किया, उन्हें तत्काल ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था। एम्स के डाक्टरों ने भी उनकी जान बचाने का भरसक प्रयास किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।

रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिले राज्यमंत्री अजय टम्टा और सांसद कोश्यारी, की इस रेल लाइन के शीघ्र निर्माण की मांग

केन्द्रीय वस्त्र राज्यमंत्री अजय टम्टा व सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने बुधवार को नई दिल्ली में रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के शीघ्र निर्माण का अनुरोध किया।

रेल मंत्री को लिखे पत्र में टम्टा ने कहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र अल्मोड़ा की जनता कई दशकों से टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर संघर्षरत है। इस रेल मार्ग के निर्माण हेतु 1912 में ब्रिटिश शासनकाल से वर्ष 2010-11 तक अनेक बार सर्वे का कार्य किया गया है। उन्होंने इस विषय को लोकसभा में रेल बजट पर अपने भाषण में भी उठाया था और इसका निर्माण शीघ्र प्रारम्भ करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा टनकपुर-बागेश्वर रेलमार्ग को भारत की सुरक्षा की दृष्टि से सामरिक महत्व की परियोजना के रूप में चिन्ह्ति किया था। समिति द्वारा अपनी 141वीं रिपोर्ट में इसके शीघ्र निर्माण का प्रस्ताव किया गया था। इस रेल मार्ग के निर्माण में विलम्ब से क्षेत्रवासियों में अत्यंत रोष है।

उन्होंने इस संबंध में बागेश्वर-टनकपुर रेलमार्ग निर्माण संघर्ष समिति के साथ सांसद भगत सिंह कोश्यारी के पत्र का भी उल्लेख किया है, जिसमें भी उल्लेख किया गया है कि सामरिक सुरक्षा की दृष्टि से संसद की याचिका समिति के सम्मुख हिमालयी राज्यों में 14 नये रेल लाईनों की आवश्यकता बताई गयी। इन 14 रेल लाईनों में तीन उत्तराखण्ड से है, जिनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग-चमोली, टनकपुर-बागेश्वर व टनकपुर-जौलजीवी है। इनमें टनकपुर बागेश्वर रेल लाईन के बीच में लगभग 80 किमी के बाद जौलजीवी 35 किमी के आसपास रेल लाईन बनेगी।

उक्त रेल लाईनों में टनकपुर-बागेश्वर-जौलजीवी छोडकर ऋषिकेश कर्णप्रयाग सहित सभी रेल लाईनों को केन्द्र ने राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के रूप में ले लिया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा व सीमान्त क्षेत्र की जनता के हित में टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन को शीघ्र बनवाने का आग्रह किया। सामरिक महत्व के कारण इसे नेशनल प्रोजेक्ट के रूप में लिया जा सकता है। इस रेल लाईन के बनने से भारत के साथ-साथ नेपाल के नागरिकों को भी बहुत सुविधा होगी।

आश्रम कब्जाने के आरोप में फरार सन्त गिरफ्तार

न्यायालय से धोखाधड़ी कर एक आश्रम की संपत्ति कब्जाने के आरोप में फरार चल रहे एक संत को रायवाला पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

बुधवार को रायवाला पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर वारंटी अनूप गौड़ पुत्र मदानंद गौड निवासी सप्त ऋषि रोड हरिपुर कलां रायवाला को गिरफ्तार किया। आरोपी काफी समय से अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा था। विदित है कि हरिपुरकलां स्थित स्वामी दिव्यानंद शारदा फाउंडेशन के महासचिव धर्मवीर सिंह ने 24 फरवरी 2014 को अनूप गौड़ के खिलाफ पुलिस को लिखित तहरीर दी थी।

तहरीर में बताया गया कि स्वामी दिव्यानंद शारदा फाउंडेशन द्वारा अनूप गौड़ को संस्था के हरिपुर कला स्थित आश्रम में निवास के लिए वर्ष 2011 में एक कमरा दिया गया। इस बीच अनूप गौड़ ने अपनी पत्नी रेनू गौड़ सहित क्षेत्र के 11 अन्य लोगों के साथ मिलकर एक मिलते जुलते नाम वाली संस्था बनाकर सोसाइटी रजिस्ट्रार में पंजीकरण कराया। उसने स्वयं को आश्रम का मुख्य सन्त घोषित किया भवन पर अपना कब्जा जमा लिया। लोगों और अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए उसने खुद को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रचारक व विश्व हिंदू परिषद के कई अहम पदों पर होने की झूठी बातें भी बताई।

वहीं स्वामी दिव्यानंद शारदा फाउंडेशन के महासचिव की शिकायत पर हुई जांच के बाद सोसाइटी रजिस्ट्रार ने अनूप गौड़ की संस्था का पंजीकरण रद्द कर दिया और कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत कर संस्था का पंजीकरण कराए जाने की बाबत अनूप गौड़ के विरुद्ध पुलिस को लिखित सूचना भी दी। बीते माह उच्च न्यायालय ने पुलिस को आरोपी अनूप गौड़ की गिरफ्तारी के आदेश दिए। इसके बाद से वह फरार चल रहा था। रायवाला के थानाध्यक्ष अमरजीत सिंह रावत ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। शेष आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर ली जाएगी।