नहीं हो रही कम गौहरीमाफी के लोगों की दुश्वारियां

गौहरीमाफी में नदी का जलस्तर कुछ कम हो गया है। जिस कारण लोग नदी में आर-पार आ जा रहे है। मगर, कई जगहों पर गहरे गड्ढों के कारण जोखिम अभी भी बरकरार है। मगर, इसके बावजूद यहां लोग जान जोखिम में डालकर राशन व सिलेंडर सिर पर रखकर पानी के बीच में ही आ जा रहे है।

शुक्रवार को गांव की तरफ आ रही नदी की धारा को पूरी तरह डायवर्ट कर दिया गया। इसका असर यह हुआ कि लोग पैदल नदी से आर-पार जा पा रहे हैं। लेकिन रपटे बहने व सड़के टूट जाने से वाहनों का आवागमन शुरू नहीं हो पाया। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एसएस ममगाईं ने बताया कि जेसीबी से लगातार वर्क किया जा रहा है। फिलहाल गांव की तरफ आ रही नदी की धारा को डायवर्ट तो कर दिया गया है लेकिन यह अस्थायी उपाय है। अभी राहत कार्य जारी रहेंगे। जल्द ही तार-जाल भी डाले जाएंगे ताकि कटाव को रोका जा सके।

वहीं मौसम साफ रहने से लोगों को राहत जरूर मिली है लेकिन बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं। नदी का जलस्तर घटने से चारों तरफ बाढ़ के गहरे जख्म साफ दिखाई देने लगे हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सड़के व खेतों को पहुंचा है। नदी का जलस्तर घटते ही लोग दैनिक जरूरत का सामान जुटाने निकल पड़े। सड़कें व रपटे टूटे होने की वजह से वाहनों का आवागमन अभी संभव नहीं है। लोगों ने सिर राशन व ईंधन सिर पर रख कर अपने घर तक पहुंचाया। बता दें कि बीते 16 दिन से बाढ़ में घिरे गौहरीमाफी के 300 परिवारों का तहसील से सड़क सम्पर्क पूरी तरह कटा हुआ है।

गांव के आंतरिक मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। तिब्बती कालोंनी के पास सड़क व रपटा बह गया है। आनंदमयी स्कूल के पास टिहरी फार्म एक नंबर को जोड़ने वाला कांजवे और बारात घर के पास पुलिया व सड़क टूटी हुई है। कई खेत नदीं में समा गए है। कई घरों के भीतर व आंगन में मिट्टी व मलवा जमा हो गया है। वहीं एसडीआरएफ की टीम भी वापस लौट गई। ग्राम प्रधान सरिता रतूड़ी ने बताया कि मौसम साफ रहने से लोगों को राहत मिली है। लेकिन सड़कें टूटी हुई हैं। इनकी जल्द मरम्मत की जरूरत है, ताकि वाहनों की आवाजाही शुरू हो सके। उन्होंने बताया कि बिजली के 18 पोल बह गए हैं। हालांकि आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऊर्जा निगम ने वैकल्पिक इंतजाम किए हैं।

अटल जी के जाने से एक युग का अंत हो गयाः नमो

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरूवार को निधन हो गया। भारत रत्न अटल जी का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली रहा कि हर कोई चाहे वह कोई भी राजनैतिक संगठन हो या फिर कोई आम नागरिक। सभी को उनके जाने का गहरा सदमा लगा है। उन्होंने दिल्ली स्थित एम्स में अंतिम सांसे ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के देहावसान से उत्तराखंड भी शोक में डूब गया। शासन ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। श्रद्धांजलि स्वरूप शुक्रवार राज्य में सरकारी कार्यालय व शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर कहा कि उनका जाना पिता के खोने जैसा है। मां भारती के सच्चे सपूत थे अटल जी। उनका विराट व्यक्तित्व था। अटल जी के जाने से एक युग का अंत हो गया है।

वाजपेयी के निधन पर प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर ने कहा, मुझे ऐसा लगता है कि एक साधु पुरुष चला गया है। वह अच्छे लेखक और कवि थे। लोग उनका भाषण सुनने के लिए तरसते थे, वह एक सच्चे और अच्छे इंसान थे। उन्होंने कहा, वाजपेयी के निधन पर मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा।

वे पिछले दो महीने से ज्यादा समय से एम्स के बिस्तर पर थे और मौत से उनकी ‘ठनी’ हुई थी, हालांकि आज शाम पांच बजकर पांच मिनट पर उन्होंने अलग रास्ता चुना और ‘काल के कपाल पर लिखकर’ वे इस दुनिया से कूच कर गए। उनके खुद के शब्दों में ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं’।

तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी अस्वस्थता के चलते लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर थे। वे डिमेंशिया नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। 2009 से ही वे व्हीलचेयर पर थे, देशवासियों ने उन्हें अंतिम बार 2015 में 27 मार्च को देखा, जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भारत माता के इस सच्चे सपूत को भारत रत्न से सम्मानित करने उनके आवास पर पहुंचे।

दो महीने पहले वाजपेयी की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। यूरिन में इन्फेक्शन के चलते 11 जून को उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी और देश की अलग-अलग पार्टियों के नेता और अनेक गणमान्य हस्तियां उनका हालचाल जानने पहुंचीं. उनके समर्थक लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहे थे, हालांकि कुदरत को शायद कुछ और मंजूर था।

अटल बिहारी वाजपेयी देश की सक्रिय राजनीति में पांच दशक से ज्यादा समय तक रहे। वे देश के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1952 में लड़ा, हालांकि पहली जीत उन्हें 1957 में मिली। तब से 2009 तक वे लगातार संसदीय राजनीति में बने रहे। 1977 में वे पहली बार मंत्री बने, जबकि 1996 में वे 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री भी रहे।

हालांकि 1998 में उन्हें एक बार फिर पीएम बनने का मौका मिला। उनकी ये सरकार भी सिर्फ 13 महीने चली लेकिन इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के बहुमत वाली सरकार बनी और वाजपेयी ने पीएम के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। वर्ष 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में वे लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए।

शहीदों को सलाम कर मनाया स्वतंत्रता दिवस

देशभर में आज स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में महापुरूषों के नक्शे कदम पर चलने का संकल्प लिया जा रहा है। महापुरूषों की झांकी के माध्यम से देश के लिये मर मिटने वालों को नमन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लाल किले में तिरंगा फहराया। साथ ही देश की जनता को संबोधित किया।

पीएम ने कहा कि सभी भारतीयों को खाना, स्वास्थ्य, कनेक्टीविटी, कुशलता, स्वच्छता, सुरक्षा, जल मिले इसलिए वॉटर फॉर ऑल, सैनिटेशन फॉर ऑल, स्किल फॉर ऑल, हेल्थ पर ऑल, इंश्योरेंस फॉर ऑल, कनेक्टीविटी फॉर ऑल के मंत्र के साथ चलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश में टैक्स न देने की हवा बनाई जा रही है, ईमानदार करदाताओं के टैक्स पर देश चलता है, डायरेक्ट टैक्स देने वालों की संख्या पौने सात करोड़ तक है।

प्रधानमंत्री बोले भारत को हमारे वैज्ञानिकों पर गर्व है, जो अपने शोध में उत्कृष्ट हैं और नवाचार में सबसे आगे हैं। आज मेरा सौभाग्य है कि इस पावन अवसर पर मुझे देश को एक और खुशखबरी देने का अवसर मिला है। साल 2022, यानि आजादी के 75वें वर्ष में और संभव हुआ तो उससे पहले ही, भारत अंतरिक्ष में तिरंगा लेकर जा रहा है। ऐसा करने वाल भारत चौथा देश बनेगा।

उन्होंने कहा, ‘मैं आज इस मंच से मेरी कुछ बहादुर बेटियों को खुशखबरी देना चाहता हूं। भारतीय सशक्त सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए नियुक्त महिला अधिकारियों को पुरुष समकक्ष अधिकारियों की तरह पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा स्थायी कमीशन देने की घोषणा करता हूं। अपनी उपलब्घ्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि हमने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया, दिक्कतों के बावजूद जीएसटी लागू किया और सैनिकों के हित में वन रैंक वन पेंशन योजना लेकर आए। जन आरोग्घ्य योजना का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी 25 सितंबर से देश में यह योजना लागू कर दी जाएगी। महिलाओं की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि खेत से लेकर खेल तक महिलाएं हमारा नाम ऊंचा कर रहीं हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में जय हिंद, भारत माता की जय व वंदे मातरम् के नारे लगाए।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। इस इस दौरान सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। वहीं सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी।

मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी। बताया कि राज्य की जीडीपी में छह प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय 16 हजार से ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा ग्रोथ सेंटर्स की स्थापना से गांवो में रोजगार बढ़ा है। अब तक 103 ग्रोथ सेंटर्स स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार लगातार किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयास कर रही है।

दो महीने में ऋषिकेश का तीसरा जवान हुआ सीमा पर शहीद

देश की सीमा पर उत्तराखंड से शहादत देने वाले कभी पीछे नहीं हटते। रविवार को भी उत्तराखंड का एक जवान शहीद हो गया। ऋषिकेश निवासी प्रदीप रावत सीमा पर बारूदी सुरंग में विस्फोट होने के बाद घायल हो गये थे। जिन्हें सैंन्य उपचार के लिये ले जाया गया। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

जानकारी के मुताबिक प्रदीप रावत (30 वर्ष) पुत्र कुंवर सिंह रावत निवासी अपर गंगानगर ऋषिकेश, गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन में तैनात थे। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात थे। रविवार दोपहर करीब 12 बजे एक सैन्य अभियान के दौरान सीमा पर दुश्मन की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंग के फट जाने से प्रदीप रावत गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें सैन्य वाहन से पहले नजदीकी अस्पताल और फिर हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया।

शाम करीब चार बजे हायर सेंटर पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शहीद प्रदीप रावत मूल रूप से बैराई गांव पट्टी दोगी टिहरी गढ़वाल के रहने वाले हैं। शहीद प्रदीप रावत के पिता कुंवर सिंह रावत सेना से रिटायर्ड हैं, वर्तमान में वह एम्स में कार्यरत है। शहीद प्रदीप रावत तीन बहनों के इकलौते भाई थे। करीब डेढ़ साल पहले ही प्रदीप रावत की शादी हुई थी। वह जनवरी में अपनी मैरिज एनिवर्सरी में छुट्टी आने वाले थे।1उनके चाचा वीर सिंह रावत ने बताया कि सेना के कमांोडग ऑफिसर ने उन्हें फोन पर उनके शहीद होने की जानकारी दी।

प्रदीप रावत की शहदात की सूचना के बाद घर पर कोहराम है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद के घर पर पहुंचकर उनके पिता कुंवर सिंह रावत को सांत्वना दी। पूर्व क्षेत्रीय सभासद बृजपाल राणा ने बताया कि आर्मी हेड क्वार्टर द्वारा शहीद के घर पर विधिवत सूचना दे दी गई है। सूचना के बाद से ही परिवार व आसपास के क्षेत्र में कोहराम मच गया है। परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। आस पास क्षेत्रों में दो महीने में तीसरी शहादत होने पर माहौल गमगीन है।

त्रिवेंद्र सरकार का अहम निर्णय, धर्मान्तरण पर होगी ये सजा

अब राज्य में जबरन धर्मान्तरण किया गया तो दंडात्मक कार्यवाही होगी। कैबिनेट ने इस नियमावली पर अपनी मोहर लगा दी है। त्रिवेंद्र सरकार की मौजूदगी में हुयी बुधवार को कैबिनेट की बैठक में धर्म स्वतंत्रता एक्ट पास किया गया। धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपित व्यक्ति को दोषमुक्त साबित करने के लिए खुद प्रमाण देने होंगे।

त्रिवेंद्र सरकार ने बीते मार्च माह में गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक को पारित कराने के बाद उसे एक्ट की शक्ल दी थी। अब उक्त एक्ट की नियमावली पर मंत्रिमंडल की मुहर लग गई। सचिवालय में बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसलों को काबीना मंत्री प्रकाश पंत ने ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि धर्म स्वतंत्रता एक्ट की नियमावली बनने के बाद इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो जाएगा। अब धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने स्थायी निवास स्थल क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसी सूचनाओं की 15 दिन के भीतर जांच कराएगा।

सात दिन में होगी जांच

इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि धर्म परिवर्तन जबरन, प्रलोभन, उत्पीडन या कपटपूर्ण अथवा विवाह के जरिये किया जा रहा है अथवा नहीं। बिना सूचना के किसी ने भी धर्म परिवर्तन किया तो ऐसे मामलों की जांच होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों में सात दिन के भीतर जांच कराएंगे। सरकार ने नियमावली में यह प्रावधान भी किया है कि प्रत्येक जिलाधिकारी को हर महीने की दस तारीख तक पिछले माह के दौरान ऐसे मामलों की रिपोर्ट सरकार को देनी होगी।

यह है सजा का प्रावधान

यदि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह किया गया तो उस धर्म परिवर्तन को अमान्य घोषित किया जाएगा। धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक माह पहले शपथपत्र देना होगा। धर्म परिवर्तन के लिए समारोह की भी पूर्व सूचना देनी होगी। सूचना नहीं देने की स्थिति में इसे अमान्य करार दिया जाएगा। धर्म स्वतंत्रता कानून का उल्लंघन होने की स्थिति में तीन माह से एक वर्ष की सजा होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में यह छह माह से दो वर्ष होगी।
धर्म परिवर्तन के एवज में किसी तरह का दान या अंशदान लेन-देन का मामला सामने आया तो जांच के बाद ऐसी राशि जब्त की जाएगी। साथ ही इसके लिए दोषी संस्था, व्यक्ति अथवा पुजारी को दंडित किया जाएगा। जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में जेल जाने का प्रावधान भी किया गया है।

आखिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह क्यों भड़क उठे? जाने क्या है सच

भोपालपानी बड़ासी पुल निर्माण कार्य को देखकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह को गुस्सा आ गया। उन्होंने निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुये विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही लोक निर्माण विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को देहरादून में रायपुर – थानौ मार्ग के मध्य निर्माणधीन सौंडा-सरौली, बडासी भोपालपानी (मत्स्य पालन) विभाग के समीप बन रहे पुल का काफी मौके पर स्थलीय निरीक्षण किया। भोपालपानी के पुल की सड़क खस्ता हालत के साथ पुल की दीवारें दीवारों में पड़ी दरारों को देखकर गुस्से में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई व प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि क्या उनके ऊपर निर्माण कार्य को शीघ्र समाप्त करने का कोई दवाब था। इस प्रकार की घटनाओं में संलिप्त अधिकारी, कार्मिक व ठेकेदार सख्त कार्यवाही से बच नही सकते। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यो में किसी भी प्रकार की लापरवाही व गुणवता में गिरावट बर्दाश्त नही की जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस दौरान उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व लोगो से भी पुल व सड़कों की गुणवत्ता से संबंधित स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। मालूम चला कि पुल के ऊपर सड़क के घटिया निर्माण कार्य को छिपाने के लिए कार्यदाई संस्था के ठेकेदार द्वारा जेसीबी से सड़क की खुदाई कर दी गई थी। जिसको देखकर मुख्यमंत्री भी गुस्से में नजर आए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने रायपुर-थानो मार्ग पर सौंडा सरौली पुल का भी विस्तृत स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यो की अद्यतन जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को सौंडा सरौली पुल को समय पूरा करने तथा निर्माण कार्यो की गुणवता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि उक्त पुल का निर्माण कार्य आगामी 30 सितम्बर तक पूरा कर लिया जाएगा।

पौधारोपण कार्यक्रम को सफल बनाने में आमजन की भूमिका अहमः त्रिवेन्द्र

देवभूमि उत्तराखंड पर्यावरण को सुरक्षित करने में अपनी भूमिका बखूबी तरह से निभा रहा है। राज्य में विभिन्न जगहों पर हरेला महोत्सव के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम चलाये जा रहे है। आपसी जन सहभागिता के कुछ भी काम सफल नहीं होता। इसलिये उन्होंने सभी नागरिकों से उत्तराखंड को हरा-भरा बनाये रखने में सहयोग करने की अपील की।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को भोगपुर (बागी) के कुआंखाला मे उत्तराखंड वन विभाग के तत्वधान में वह विभिन्न सामाजिक संगठनों, विद्यालयो के स्कूली छात्र छात्राओं के साथ थानों रेंज मे वृहद पौधारोपण कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष चिदानंद स्वामी, पर्यावरणविद् हैस्को के संस्थापक डॉ अनिल जोशी के साथ बेलपत्री, चंदन, रुद्राक्ष, पीपल आदि के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का आव्हान भी किया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष मुनि स्वामी चिदानंद ने कहा कि वृक्षों से मनुष्य का प्राचीन समय से नाता रहा है। इसलिए इनकी रक्षा करना हमारा धर्म भी है। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के साथ हमारे प्राण तत्व भी है।

पर्यावरणविद् हैस्को के संस्थापक डॉक्टर अनिल जोशी ने कहा कि पेड़ पौधे सुरक्षित रहेंगे। तभी हमारा जीवन व पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। ग्लेशियर भी सुरक्षित रहेंगे।

प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड जयराज सिंह ने कहा कि विभाग पूरे प्रदेश में पौधारोपण कार्यक्रम को बढ़ावा दे रहा है। वन संरक्षक राहुल सिंह, प्रभारी डीएफओ भारत भूषण मर्तोलिया, थानों रेंज अधिकारी डॉक्टर उदय नंद गौड ने भी पौधारोपण का आह्वान किया। पौधरोपण कार्यक्रम में श्री गुरु रामराय विद्यालय भोगपुर, चार्ल्स बेन स्कूल, दून भवानी इंटरनेशनल विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज रानीपोखरी, आर्यन पब्लिक स्कूल, शिशु विद्या मंदिर व इको टास्क फोर्स के जवानों ने भी पौधारोपण कार्यक्रम में शिरकत की।

आंतकियों से दो-दो हाथ कर ऋषिकेश के हमीर सिंह हुये शहीद

जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों से मुकाबला करते उत्तराखंड के दो वीर शहीद हो गए। इनमें एक जवान ऋषिकेश, जबकि दूसरे पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार से हैं।

ऋषिकेश स्थित कुंजापुरी कालोनी, गुमानीवाला निवासी 27 वर्षीय राइफलमैन हमीर सिंह पोखरियाल मंगलवार सुबह आतंकियों से लोहा लेते शहीद हो गए। वह वर्ष 2013 में 12वीं गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए और वर्तमान में 36 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। उनका परिवार मूल रूप से पोखरियाल गांव उत्तरकाशी के लम्बगांव का रहने वाला है।

शहीद के पिता जयेंद्र सिंह पोखरियाल एसएसबी में सब इंस्पेक्टर हैं और अमरनाथ यात्रा के चलते जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। हमीर की शहादत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। घर में हमीर की पत्नी, एक ढाई वर्ष की बेटी, मां और एक छोटा भाई हैं। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने शहीद के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी।

इस मुठभेड़ में ग्राम शिवपुर, कोटद्वार निवासी 28 वर्षीय मनदीप सिंह रावत भी शहीद हुए हैं। उनके पिता बुथी सिंह भी फौज से रिटायर हैं। मनदीप 2012 में 15 गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे और छह माह पूर्व ही उनकी तैनाती 36 राष्ट्रीय राइफल में हुई थी। मनदीप की शहादत की सूचना के बाद से ही उनके घर मातम छाया हुआ है। तमाम लोग उनके घर पहुंचकर माता-पिता को ढांढस बंधा रहे हैं। मनदीप के छोटे भाई हाल ही में सेना में भर्ती हुए हैं और जम्मू-कश्मीर में ही तैनात हैं।

बाढ़ की समस्या से बावजूद गौहरीमाफी के ग्रामीण पेश कर रहे मिशाल

बाढ़ की समस्या से जूझते हुये ग्रामीण दैनिक राशन की समस्या से जूझ रहे है। लेकिन इसी बीच सभी ग्रामीण आपस में मिल जुलकर भोजन आदि कर रहे है। इससे गौहरीमाफी गांव के ग्रामीणों ने एक मिशाल पेश की है।

बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों के बीच पहुंचकर हालात का जायजा लेने पर यह बात सामने आई कि गांव में करीब 50 परिवार ऐसे हैं जिनके घरों में राशन व अन्य खाद्य सामग्री पूरी तरह खत्म हो गई है। कुछ घरों में ईंधन व रसोई गैस उपलब्ध नहीं है। कहीं चीनी तो कहीं नमक खत्म हो गया है। गांव की छोटी दुकानों में सामान उपलब्ध नहीं है।

कई घरों में बारिश का पानी घुसा हुआ है। घरेलू सामान खराब हो गया है। लोगों के पास ठीक से रात काटने को जगह नहीं बची है। लेकिन ग्रामीणों के बीच परस्पर सहयोग एक दूसरे के लिए बना हुआ है। लोग एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। कई घरों में सामूहिक भोज बन रहा है। गांव की युवा इस काम में बढ़-चढ़कर जुटे हैं। युवा एक दूसरे के घरों में जाकर जानकारी जुटा रहे हैं और मदद के लिए हाथ बढा रहे हैं।

सोमवार रात को जब कई घरों में बारिश का पानी घुसा तो युवाओं ने की मदद से ही लोग सुरक्षित जगह पर पहुंचे। रात को गंगा प्रेम हॉस्पिस के पास आठ घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। इन लोगों को स्थानीय युवाओं ने ही सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया। रात को ही गंगा प्रेम हॉस्पिस की तरफ से भोजन का प्रबंध किया गया।

युवाओं के इस जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। लोगों को भरोसा है प्रकृति उनकी पीड़ा को समझेगी और संकट जल्द दूर होगा। वहीं बाढ़ प्रभावितों, एसडीआरएफ व् राहत कार्य में सहयोग कर रहे लोगों के लिये भी स्थानीय लोगों की मदद से आनंदमयी स्कूल में भोजन व्यव्स्था की गयी है। देर शाम बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राशन सामग्री पंचायत घर में पहुंच गई। जिला पूर्ति अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवारों तक पहुंचाने के लिए राशन उपलब्ध करा दी गयी है। जरूरत पड़ने पर और भी राशन भेजी जाएगी।

क्या हुआ जब ग्रामीणों ने एसडीआरएफ टीम की मदद को किया मना

एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर सौंग नदी की बाढ़ से घिरे गौहरीमाफी के परिवारों को जरूरी सामान उपलब्ध कराया है। मगर, चाहे शासन हो या प्रशासन दोनों की यहां की समस्या का निदान करने में विफल साबित हो रहे है। यहां अभी तक बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में शायद कुछ दिन और लग सकते है।
क्षेत्र में एसडीआरएफ की टीम लगातार रेस्क्यू अभियान चलाये हुये है। सोमवार को भी टीम को संसाधन जुटाने में पांच घण्टे से अधिक का समय लग गया। जिससे लोगों आक्रोशित होने लगे। इस दौरान रेस्क्यू कर लाया जा रहा एक युवक पानी की लहरों में गोता खा गया। हालांकि टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया लेकिन इससे ग्रामीण भड़क उठे। गुस्साए लोगों ने प्रशासन पर उनकी जान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।

कुछ लोगों ने एसडीआरएफ की रैपिड की रस्सियां काट दी। हंगामा बढ़ता देख एडीआरएम वित्त वीएस बुदियाल और एसडीएम हरगिरि ने किसी तरह लोगों को समझाया। वहीं ग्रामीणों ने रैपिड में बैठने से मना कर दिया। इसके बाद रेस्क्यू रोक दिया गया। वहीं निर्देश के बाद भी रायवाला प्राथमिक केंद्र से चिकित्सक क मौके पर नहीं आए। हैंडपंप से दूषित पानी निकलने की वजह से संक्रामक व जल जनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ रहा है। दोपहर बाद फिर से रेस्क्यू शुरू किया गया।

एसडीएम हरगिरि ने बताया कि जिन घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है वहां से लोगों को आनंदमयी स्कूल में बने राहत कैंप में लाया गया है। गांव में रसद, रसोई गैस व् अन्य जरुरी सामग्री पहुंचाने का काम मंगलवार से शुरू किया जाएगा। जरुरी सामग्री मंगा ली गयी है, वितरण के लिए और सूची बनाने का काम चल रहा है।