चीन ने सेना प्रमुख के बयान को बताया तनावपूर्ण

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान से चीन बौखलाया हुआ है। बतौर चीन, जनरल का बयान दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाएगा। चीन ने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से सीमा पर हालात और तनावपूर्ण होंगे।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने जनरल बिपिन रावत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीते एक साल में भारत और चीन के संबंधों में काफी उथल-पुथल रही है। पिछले साल भारत-चीन के रिश्तों ने कुछ उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन पिछले साल सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन के इतर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात में रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए उनमें आम राय बनी थी।

लू कांग ने कहा कि ऐसी बयानबाजी दोनों देशों के संबंधों को बेहतर करने के प्रयासों पर विपरीत असर डालेगी। इससे सीमा पर शांति बनाए रखने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। लू ने कहा कि चीन और भारत अहम पड़ोसी हैं। वे राष्ट्रीय विकास एवं उत्थान के निर्णायक चरण में हैं। दोनों देशों को सामरिक संवाद बढ़ाना चाहिए, सामरिक संदेह दूर करना चाहिए और सामरिक सहयोग संचालित करना चाहिए।

डोकलाम पर फिर चीन ने जताया अपना हक

प्रवक्ता ने कहा कि हम भारतीय पक्ष से अपील करते हैं कि वह दोनों नेताओं की ओर से बनी आम राय के बाद के कदमों पर काम करे ताकि सीमाई इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उपाय किए जा सकें और ऐसी चीजों से परहेज किया जाए, जिससे हालात जटिल होते हों। जरूरी मामलों को रचनात्मक तरीके से संभाला जाए और द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास को बढ़ावा दिया जाए। इससे समूचे क्षेत्र एवं भारतीय पक्ष के साझा हित सधेंगे। एक सवाल के जवाब में लू कांग ने जनरल बिपिन रावत के बयान का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम पर हमारा रुख साफ है। डोकलाम चीन का हिस्सा है और हमेशा चीन के अधिकार क्षेत्र में रहा है।

गौरतलब है, बिपिन रावत ने कहा था चीन मजबूत तो भारत भी कमजोर नहीं। भारत को पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के साथ-साथ पूर्वी सीमा पर भी ध्यान देने की जरूरत है। भारत अपनी सीमा पर किसी भी देश को अतिक्रमण नहीं करने देगा। अब हालात 1962 जैसे नहीं है, हर क्षेत्र में भारतीय सेना की ताकत बढ़ी है। रावत ने यह भी कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास बीजिंग की ओर से दबाव बनाया जा रहा है।

चावल व गेंहू के अलावा अन्य फसलों पर सरकार देगी खरीद की गांरटी

सरकार ने कृषि की ओर कदम बढ़ाते हुये आगामी वित्त वर्ष के आम बजट में कुछ कारगर पहल किये जाने की संभावना जताई है। जिसके तहत सरकार गेहूं और चावल को छोड़ अन्य सभी फसलों की खरीद की गारंटी देने की योजना बना रही है।

योजना के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गेहूं व चावल को छोड़कर सभी फसलों की न्यूनतम गारंटी देनी होगी। आम बजट में इस पर प्रावधान किये जाने की संभावना है। दरअसल, सरकार दो दर्जन से अधिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करती है, लेकिन गेहूं व चावल को छोड़ बाकी फसलों की खरीद आमतौर पर नहीं होती है। छिटपुट राज्यों में कुछ-कुछ फसलों की खरीद कर ली जाती है। हालांकि, गेहूं व चावल की खरीद की शत प्रतिशत गारंटी नहीं होती है।

गेहूं व चावल की सरकारी खरीद पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में की जाती है। बाकी राज्यों में छिटपुट तौर पर थोड़ी बहुत होती है। इनके अलावा ढेर सारी फसलें होती हैं, जो किसानों की आमदनी को प्रभावित करती हैं। इसे लेकर किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जिन फसलों की एमएसपी घोषित भी होती है, लेकिन उनकी खरीद नहीं होती है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है। किसानों की यह मांग लंबे समय से होती आ रही है कि उनकी उपज की खरीद की गारंटी होनी चाहिए।

कृषि मंत्रालय ने आम बजट के लिए इस आशय का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें जिंस बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को नुकसान से बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके मुताबिक राज्यों को इन फसलों के मूल्य कम होने की दशा में उपज की खरीद का पूरा हक होगा, जिसके लिए केंद्र भरपाई की गारंटी देगा। किसानों को बाजार मूल्य में उतार चढ़ाव के जोखिम से बचाने की रणनीति तैयार की गई है।

योजना का उद्देश्य खरीद लागत, भंडारण, विक्रय लागत, पूंजी पर ब्याज और अन्य आकस्मिक खर्च को कवर करते हुए खरीद और विक्रय मूल्य के अंतर में अगर घाटा हुआ तो केंद्र सरकार भरपाई करेगी। यह विशेष प्रावधान मध्य प्रदेश सरकार की शुरु की गई भावांतर योजना से मिलती जुलती होगी। घाटे के इस अंतर का 40 से 50 फीसद केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी राज्य सरकारों को वहन करना होगा। खरीद किये जाने वाली जिंसों की बिक्री का पूरा दायित्व राज्य सरकारों का होगा।

सेना प्रमुख बोले, जम्मू में शांति को राजनीतिक हस्तक्षेप आवश्यक

एक साक्षात्कार में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने स्पष्ट कहा है कि सैन्य ऑपरेशन के अलावा राजनीतिक पहल भी जम्मू कश्मीर में शांति व्यवस्था बनाने के लिये जरूरी है। उन्होंने कहा कि सेना आतंकवाद से निपटने को पूरी तरह तैयार है और वह अपना काम कर रही है, परंतु इसके अलावा राजनीतिक पहल से भी शांति कायम की जानी चाहिये।

रविवार को सेना प्रमुख ने कहा कि एक साल पहले जब उन्होंने पद संभाला था, उसकी तुलना में आज हालात बेहतर हुए हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि सेना आतंकवाद से सख्ती से निपटने की अपनी नीति पर चलती रहेगी। जनरल रावत ने कहा कि राजनीतिक पहल और दूसरे सभी उपाय साथ-साथ चलने चाहिए। जब हम सभी मिलकर काम करेंगे तभी कश्मीर में शांति की स्थापना की जा सकती है। हमें राजनीतिक-सैन्य नजरिया अपनाने की जरूरत है।

पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने आइबी के पूर्व प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को जम्मू-कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत करने के लिए अपना वार्ताकार नियुक्त किया था। इस पर आर्मी चीफ ने कहा कि जब सरकार ने अपनी ओर से वार्ताकार नियुक्त किया था, तो इसका एक मकसद था। वह सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर कश्मीर के लोगों तक अपनी बात पहुंचाएंगे। वे देखेंगे कि लोगों की शिकायतें क्या हैं, जिन्हें राजनीतिक स्तर से सुलझाया जा सकता है।

जनरल रावत ने कहा कि कश्मीर मसले को सुलझाने के प्रयासों में सेना केवल एक हिस्सा है। हमारा मकसद आतंकियों को रोकना और कट्टरपंथ के रास्ते जा रहे लोगों को बचाकर शांति के रास्ते पर लाना है। कुछ स्थानीय युवाओं को कट्टरता के रास्ते पर ले जाने की कोशिश हो रही है और वे आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। इससे निपटने के लिए सेना आतंकी सगठनों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

इजरायली पीएम से मोदी बोले, मेरे दोस्त भारत में आपका स्वागत है

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत दौरे पर पहुंच गए हैं। दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक यात्रा पर उनका स्वागत किया है। भारत यात्रा के दौरान नेतन्याहू कड़ी सुरक्षा घेरे के बीच रहेंगे।

तीन मूर्ति स्मारक पर बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय सेना के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ पीएम मोदी और सारा नेतन्याहू भी मौजूद रहे। दरअसल, तीन मूर्ति स्मारक का इजरायल से गहरा संबंध है। यही वजह है कि इसका नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफा चौक कर दिया गया है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन मूर्ति हाइफा चौक पर विजिटर्स बुक में लिखा कि तीन मूर्ति चौक के नाम के साथ हाइफा जोड़ना एक ऐतिहासिक घटना है। इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने कहा कि हम अपने बहादुर जवानों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भारत के स्वार्थरहित बलिदान की भावना को सलाम करते हैं। पहले और दूसरे विश्व युद्ध के इतिहास की किताब का एक पन्ना 100 साल पहले लिखा गया था, जब हाइफा युद्ध में भारतीय जवानों ने बलिदान दिया था। यह प्रथम विश्व युद्ध के खत्म होने की 100वीं वर्षगांठ है। दोनों विश्व युद्ध के इतिहास की किताब में ऐसे कई सुनहरे पन्ने हैं, जिनमें भारत के बहादुरों के त्याग की कहानियां लिखी हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर नेतन्याहू का स्वागत किया। पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, मेरे दोस्त पीएम नेतन्याहू भारत में आपका स्वागत है। आपकी भारत यात्रा ऐतिहासिक और विशेष है। ये दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगी।

क्यों बदला गया चौक का नाम

हाइफा की लड़ाई 23 सितंबर 1918 को लड़ी गई थी। इस वक्त देश में अंग्रेजों का राज था और अंग्रजों ने जोधपुर, हैदराबाद, मैसूर रियासत की सेना को हाइफा पर कब्जा करने के आदेश दिए और उसके बाद भारतीय सैनिकों ने हाइफा में तुर्की की सेना का सामना किया।

यह लड़ाई उस वक्त हुई, जब जर्मनी के साथ संबद्ध शक्तियों और तुर्क साम्राज्य के बीच एक के बाद एक लड़ाई हो रही थी, जिसे सिनाई और फिलिस्तीन अभियान कहा जाता था।

जल्द हटेगा अंग्रेजों कानून, पटवारी के बजाए पुलिस संभालेगी कानून व्यवस्था

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के लगभग बारह हजार गांवों में अंग्रेजों के बनाये कानून को दरकिनार करते हुये पर्वतीय जिलों में सभी जगह पुलिस थानों खोले जायेंगे।

दरअसल, अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1816 में कुमाऊं के तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर ने पटवारियों के 16 पद सृजित किए थे। इन्हें पुलिस, राजस्व संग्रह, भू अभिलेख का काम दिया गया था। साल 1874 में पटवारी पद का नोटिफिकेशन हुआ। रजवाड़ा होने की वजह से टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी में पटवारी नहीं रखे गए। साल 1916 में पटवारियों की नियमावली में अंतिम संशोधन हुआ। 1956 में टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून जिले के गांवों में भी पटवारियों को जिम्मेदारी दी गई।

वर्ष 2004 में नियमावली में संशोधन की मांग उठी तो 2008 में कमेटी का गठन किया गया और 2011 में रेवेन्यू पुलिस एक्ट अस्तित्व में आया। मगर गौर करने वाली बात यह कि रेवेन्यू पुलिस एक्ट बना तो दिया गया, लेकिन आज तक कैबिनेट के सामने पेश नहीं किया गया।

अंग्रेजों ने अपनी नीतियों के लिहाज से राजस्व वसूली और कानून व्यवस्था संभालने के लिए दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में पटवारी पद सृजित किए थे। तब से लेकर आज तक पर्वतीय जिलों में इसके मुताबिक काम हो रहा है। इन जिलों में सिविल पुलिस नहीं है। हालांकि, उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पटवारियों ने ब्रिटिश कमिश्नर की नियमावली में संशोधन की मांग उठाई, मगर उनकी आवाज दबकर रह गई।
कैबिनेट मंत्री एवं प्रवक्ता राज्य सरकार मदन कौशिक का कहना है कि पर्वतीय राज्यों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में आए हाइकोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद सरकार इस दिशा में आगे कदम बढ़ाएगी।

इस संबंध में एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार का कहना है कि पर्वतीय जिलों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में हाइकोर्ट के आदेश को पढने के बाद आगे कदम उठाए जाएंगे।

पहली बार क्षेत्र में बॉलीवुड कलाकार देख उत्साहित हो रहे ग्रामीण

इन दिनों जौनसार बावर क्षेत्र में बॉलीवुड के कलाकार पहुंच रहे है। जिन्हें देखने के लिये ग्रामीण सुबह से ही एकत्र हो जाते है। दरअसल में वैराटखाई क्षेत्र में हिन्दी फिचर फिल्म राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की शूटिंग शुरू हो गयी है। इस फिल्म के भारत-चीन युद्ध के दृश्यों को फिल्माने के लिये इस क्षेत्र को चुना गया है।
जौनसार-बावर के वैराटखाई क्षेत्र में हिंदी फिल्म राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की शूटिंग शुरू हो गई है। क्षेत्र में पहली बार बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग देखकर ग्रामीण खासे उत्साहित हैं। फिल्म की शूटिंग के लिए वैराटखाई पहुंच रहे बॉलीवुड कलाकारों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। वैराटखाई में भारत-चीन युद्ध के कुछ दृश्यों का फिल्मांकन होना है।

जेएसआर प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही इस फिल्म में संध्या इंटरप्राइजेज सहयोगी की भूमिका में है। अभिनेता गिरीश सचदेवा समेत फिल्म के अधिकांश कलाकार वैराटखाई पहुंच चुके हैं। सचदेवा दबंग-टू, रामलीला, जब तक है जान समेत 37 फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। राइफलमैन जसवंत सिंह रावत उनकी 38वीं फिल्म है। बता दें कि किसी बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग के लिए पहली बार जौनसार-बावर के प्रमुख पर्यटन स्थल वैराटखाई का चयन किया गया।

फिल्म में वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दृश्यों का फिल्मांकन किया जाना है। शूटिंग के लिए मुंबई से देहरादून पहुंचे बॉलीवुड कलाकार मुकेश तिवारी इन दिनों निर्माता तरुण रावत, क्रिएटिव प्रोड्यूसर सुमित अधलखा, कलाकार इश्तियाक खान, शिशिर तिवारी आदि यूनिट मेंबर के साथ वैराटखाई में हैं।

चाइना गेट, गंगाजल व गोलमाल जैसी सुपरहिट फिल्मों में अहम भूमिका निभाने वाले मुकेश तिवारी को देखने के लिए ग्रामीणों में खासा उत्साह है। ग्रामीणों का मानना है कि आगे भी क्षेत्र में यदि इसी तरह यहां फिल्मों की शूटिंग होती रही तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

इसरो ने पीएसएलवी के जरिये लांच किये 31 उपग्रह

भारत ने 12 जनवरी को अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर इसरो ने श्रीहरिकोटा से 31 उपग्रहों की लॉन्च किया। इसी के साथ ही इसरो के उपग्रहों का शतक पूरा हो गया है। शुक्रवार को लॉन्च उपग्रहों में से एक काफी खास है, जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान भी सावधान है। ये उपग्रह है कार्टोसैट-2, जिसे आई इन द स्काई भी कहा जा रहा है।

क्यों घबरा रहे हैं चीन और पाकिस्तान?

इस उपग्रह के जरिए धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं। बॉर्डर पर आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने में भारत को आसानी होगी। यह एक अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है जो कि दुश्मन पर नजर रखने के काम आएगा। इस उपग्रह की मदद से हम बॉर्डर पार भी पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

आपको बता दें कि इसरो ने शुक्रवार सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर पीएसएलवी के जरिए एक साथ 31 उपग्रह को लॉन्च किया। भेजे गए कुल 31 उपग्रहों में से तीन भारतीय हैं और 28 छह देशों से हैंरू कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका भी शामिल हैं।

इसलिए भी है खास

पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है। इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं। कुल 28 अंतरराष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।

बौखलाया पाकिस्तान

भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

साल की पहली अंतरिक्ष परियोजना

31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था। पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है। अन्नादुरई ने कहा, पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था, पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे।

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार वकील से सीधे जज बनेंगी इंदु

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश केएम जोसेफ व वरिष्ठ अधिवक्ता इंदू मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सरकार से इन दोनों ही लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। इंदू मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था। वे सुप्रीम कोर्ट में अभी तक नियुक्त हुईं सातवीं महिला जज होंगी। अभी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आर. भानुमति अकेली महिला जज हैं। स्वतंत्रता के बाद से अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ छह महिला जज हुई हैं।

जस्टिस केएम जोसेफ फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज हैं। वे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का आदेश रद करने वाली पीठ में शामिल थे। उसके बाद उनके स्थानांतरण की चर्चाएं रहीं लेकिन उत्तराखंड से उनका स्थानांतरण नहीं हुआ।

कोलेजियम ने इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस शिव कुमार सिंह को स्थाई करने की सिफारिश की है। हालांकि कोलेजियम के समक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुल 11 अतिरिक्त जजों को स्थाई करने का प्रस्ताव था, लेकिन शिव कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसलिए फिलहाल उनके बारे में सिफारिश की गई है। बाकी प्रस्तावों पर कोलीजियम बाद में विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में महिला जज

सुप्रीम कोर्ट 1950 में बना उसके 39 साल बाद 1989 में एम फातिमा बीवी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज नियुक्त हुईं। फातिमा बीवी केरल हाईकोर्ट से सेवानिवृत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुईं थी। वे 29 अप्रैल 1992 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुईं। बाद में वे तमिलनाडु की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं।

सुप्रीम कोर्ट में दूसरी महिला जज सुजाता वी मनोहर हुईं जिन्होंने जज के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत बाम्बे हाईकोर्ट जज से की थी। वे सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर 1994 से 27 अगस्त 1999 तक न्यायाधीश रहीं। जस्टिस सुजाता मनोहर के सेवानिवृत होने के करीब पांच महीने बाद जस्टिस रूमा पाल सुप्रीमकोर्ट की जज बनीं। जस्टिस पाल सबसे लंबे समय तक रहीं। वे 28 जनवरी 2000 से लेकर 2 जून 2006 तक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रहीं। उनके बाद चार साल तक सुप्रीम कोर्ट मे कोई महिला जज नहीं रही।

चार साल बाद झारखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुईं। जस्टिस मिश्रा 30 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट जज बनी और 27 अप्रैल 2014 को सेवानिवृत हुईं। इसी दौरान जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं। जस्टिस देसाई 13 सितंबर 2011 से लेकर 29 अक्टूबर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट जज रहीं। इस दौरान पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ दो महिला जज रहीं।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की सेवानिवृति के करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान महिला जज आर. भानुमति सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुईं। जस्टिस भानुमति 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश नियुक्त हुईं वे 19 जुलाई 2020 को सेवानिवृत होंगी। सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में सिर्फ दो बार एक साथ दो महिला जज रहीं।

अब उत्तराखंड बोर्ड की राह पर चले मदरसे

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने अहम निर्णय लेते हुये यह फैसला लिया है कि मदरसों में दसवीं और बारहवीं की परीक्षायें उत्तराखंड बोर्ड पैटर्न की तर्ज पर होंगी। अब यह कहा जा सकता है कि मदरसे भी सरकारी व निजी स्कूलों की राह पर चलेंगे।

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड कार्यालय में हुई बैठक में मदरसों की बोर्ड परीक्षा को सरल बनाने पर चर्चा की गई। लंबे विचार-विमर्श के बाद सदस्यों ने उत्तराखंड के मदरसों की परीक्षाओं में भी उत्तराखंड बोर्ड के समान परीक्षा पैटर्न लागू करने का फैसला लिया। बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अहमद अखलाक अंसारी ने बताया कि मदरसों में बोर्ड की परीक्षा का पैटर्न बहुत जटिल था। इसके कारण बच्चों को कई तरह की परेशानियां भी होती थीं।

इसलिए बोर्ड ने पैटर्न को सरल बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने मदरसों के पुराने पैटर्न का जिक्र करते हुए बताया कि 10वीं कक्षा में 10, जबकि 12वीं में नौ पेपर होते थे। लेकिन अब उत्तराखंड बोर्ड की भांति 10वीं में छह और 12वीं में पांच ही परीक्षा होंगीं। इसके अलावा अभी तक मदरसों में 10वीं की परीक्षा में एक हजार अंकों से मूल्यांकन होता था। लेकिन, अब 10वीं में पांच सौ और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में छह सौ अंकों से मूल्यांकन होगा। बताया कि इस दिशा में अन्य संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। जल्द ही कुछ निर्णय भी लिए जा सकते हैं।

रूड़की के छह साल के मासूम को एचआईवी

छह साल के एक बच्चे में एचआईवी पॉजीटिव होने के पता चला है। बच्चा थैलीसीमिया से पीड़ित बताया जा रहा है। बच्चे के पिता का कहना है कि संक्रमित खून चढ़ाने की वजह से एचआईवी हुआ है। इस मामले में बच्चे के पिता ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से की है। जेएम ने सिविल अस्पताल के सीएमएस को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। बच्चे को छह बार सिविल अस्पताल रुड़की से और 48 बार हरियाणा के कैथल में रक्त चढ़ाया जा चुका है।

जिला कैथल, हरियाणा निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसके छह वर्षीय बच्चे को थैलीसीमिया है। 28 अगस्त 2017 से उसके बच्चे का उपचार सिविल अस्पताल रुड़की में चल रहा है। 28 अगस्त से अब तक उसके बच्चे को छह बार खून चढ़ाया जा चुका है। जबकि इससे पहले कैथल में उसका उपचार चल रहा था। वहां पर 48 बार बच्चे को खून चढ़ा है।

सिविल अस्पताल रुड़की में तीन दिन पहले उसके बच्चे की खून की जांच की गई थी। जांच में उसके बच्चे के खून में एचआइवी पॉजिटिव पाया गया है। बच्चे के पिता ने आशंका जताई है कि उसके बच्चे को किसी ऐसे व्यक्ति का खून चढ़ा है, जो एचआइवी पॉजिटिव होगा। इसी कारण उसके बच्चे को भी एचआइवी हो गया है। पीड़ित बच्चे के पिता ने मामले की शिकायत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल से की है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके मिश्रा को जांच के निर्देश दिए हैं।

वहीं सिविल अस्पताल रुड़की के सीएमएस डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चे में एचआइवी पॉजिटिव की बात सामने आई है। अस्पताल में बच्चे का उपचार पिछले चार माह से चल रहा है। अस्पताल के ब्लड बैंक से वही रक्त मरीज को चढ़ाया जाता है जिसकी सभी जांचें सही हो।