जानिये नये दस रूपये की खूबियां

केन्द्रीय रिजर्व बैंक ने महात्मा गांधी (नई) श्रृंखला में 10 रुपये मूल्य के बैंकनोट जारी कर दिए हैं। दस रूपये का नया नोट चॉकलेटी रंग का है, इसे जल्द ही संचार हेतु शुरू कर दिया जाएगा। 10 रुपये की नई नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. उर्जित आर. पटेल के हस्ताक्षर होंगे।

नई करेंसी के पृष्ठभाग पर सूर्य मंदिर,कोणार्क का चित्र है जो देश की सांस्कृतिक विरासत का चित्रण करता है। नोट का आधार रंग चॉकलेट भूरा है। नोट के अग्र और पृष्ठ दोनों भागों पर अन्य डिजाइन, ज्यामितिक पैटर्न हैं जिन्हें समग्र रंग योजना के साथ संरेखित किया गया है।

रिजर्व बैंक द्वारा पहले की श्रृंखलाओं में जारी 10 रुपये के पुरानी करेंसी भी पूरी तरह से वैध मुद्रा बनी रहेगी।
नई करेंसी की खास बातें इस प्रकार है। करेंसी के आगे हिस्से में मूल्यवर्ग अंक 10 के साथ आर-पार मिलान, देवनागरी में मूल्यवर्ग अंक १०, मध्य में महात्मा गांधी का चित्र, सूक्ष्म अक्षर आरबीआई ‘भारत’, इंडिया और ‘10’, ‘भारत’ और आरबीआई उत्कीर्ण लेखों के साथ विंडोड गैर-धातुयी सुरक्षा धागा, महात्मा गांधी के चित्र के दायीं तरफ गारंटी खंड, वचन खंड सहित गवर्नर के हस्ताक्षर तथा भारतीय रिजर्व बैंक का प्रतीक, दायीं ओर अशोक स्तंभ प्रतीक, महात्मा गांधी का चित्र और इलेक्ट्रोटाइप (10) वॉटरमार्क, संख्या पैनल जिसमें ऊपर बायीं ओर तथा नीचे दायीं ओर छोटे से बढ़ते आकार के अंक।
वहीं करेंसी के पीछे के हिस्से में नोट के बायीं तरफ मुद्रण वर्ष, स्लोगन सहित स्वच्छ भारत लोगो, भाषा पैनल, सूर्य मंदिर, कोणार्क का चित्र, देवनागरी में मूल्यवर्ग अंक १०, बैंकनोट का आकार 63 मिमी और 123 मिमी होगा।

यहां दिन की शुरूआत होगी राष्ट्रगीत से

एक तरफ जहां पूरे देश में वंदे मातरम और राष्ट्रगान को लेकर बहस चल रही है। दूसरी ओर हरियाणा के एक गांव ने ऐसा फैसला किया है, जिससे पूरे गांव की दिन की शुरुआत राष्ट्रगान की आवाज से ही होगी। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के जाट बहुल भनकपुर गांव में अब रोज सुबह 8 बजे राष्ट्रगान बजेगा, इसके लिए गांव वालों ने 3 लाख रुपये खर्च कर करीब 20 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे।

गांव में करीब 5000 की आबादी है। ऐसा करने वाला भनकपुर हरियाणा का पहला गांव होगा। गुरुवार को गांव के सरपंच सचिन मदोतिया ने इस बात का ऐलान किया। उनके साथ स्थानीय विधायक और अन्य नेता भी मौजूद रहे।

ऐसा बताया जा रहा है कि गांव का सरपंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए उनके ही घर में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। उनका कहना है कि उन्हें ये आइडिया जब आया, जिस दौरान उन्होंने तेलंगाना के जम्मीकुंटा के बारे में सुना। वहां पर भी लोग अपने दिन की शुरुआत राष्ट्रगान से ही करते हैं।

भनकपुर गांव इससे पहले भी चर्चा का विषय बना रहा है। इस गांव में कुल 22 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, इसके अलावा गांव को स्वच्छता के अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।

गौरतलब है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर पिछले कुछ समय से बवाल जारी रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही सिनेमा हॉल में भी फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो गया है।

अनुकृति की शादी में नजर आयेगी पर्वतीय संस्कृति की झलक

फेमिना मिस इंडिया ग्रैंड इंटरनेशनल अनुकृति गुसाईं जल्द ही परिणय सूत्र में बंधने जा रही है। इतना ही नहीं उन्होंने शादी को भव्य शाही अंदाज से कराने के लिये राजस्थान के उदयपुर पैलेस को चुना है। बता दें कि अनुकृति की शादी वन मंत्री हरक सिंह रावत व पौड़ी की जिला पंचायत अध्यक्ष दीप्ति रावत के पुत्र तुषित रावत के साथ तय हुयी है। तुषित दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के एमडी भी है।

फेमिना मिस इंडिया ग्रैंड इंटरनेशनल अनुकृति गुसाईं के अनुसार वह चाहती हैं कि शादी शाही अंदाज में तो हो, लेकिन उसमें पहाड़ की संस्कृति एवं परंपराओं का भी ध्यान रखा जाए। इसके लिए राजस्थान के उदयपुर पैलेस में शादी समारोह आयोजित करने की योजना है। हालांकि, शादी के सभी प्रमुख कार्यक्रम उत्तराखंड में ही होंगे। अनुकृति कहती हैं कि शादी में कुमाऊंनी और गढ़वाली परंपराओं का निर्वाह किया जाएगा। इसके अलावा 19 अप्रैल को देहरादून में रिसेप्शन रखा गया है।
अनुकृति बताती हैं कि दोनों परिवार एक-दूसरे को काफी लंबे समय से जानते हैं। दोनों का ही एक-दूसरे के घर आना जाना है। सो, मम्मी-पापा ने ही शादी तय की। जब उन्होंने मुझसे इस बारे में पूछा तो मैंने भी अपनी सहमति जता दी।

अनुकृति ने बताया कि शादी और रिसेप्शन के लिए लहंगे मुंबई में अलग-अलग डिजाइनर तैयार कर रहे हैं। लेकिन, शादी में वह कुमाऊंनी पिछौड़ा और टिहरी की नाथ जरूर पहनेंगी। बता दें कि अनुकृति की मां कुमाऊं और पापा गढ़वाल से ताल्लुक रखते हैं।

अनुकृति ने बताया कि शादी के बाद वह उत्तराखंड की बेटियों को आगे लाने के लिए काम करेंगी। राजनीतिक परिवार की बहू बनने जा रही अनुकृति से जब राजनीति में प्रवेश के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था, अभी इस बारे में कुछ सोचा नहीं है। लेकिन, महिलाओं को लेकर काम करती रहेंगी। उधर, वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि गुसाईं परिवार से हमारे पारिवारिक रिश्ते हैं। दोनों परिवार यही चाहते थे। फिर दोनो बच्चे भी सेटल हैं तो जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने भी इसके लिए सहमति दे दी।

स्वरोजगार बनाने को राज्य सरकार की नयी पहल

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में एलईडी आधारित बल्ब, ट्यूबलाइट, झालर, स्ट्रीट लाइट, इमरजेंसी लाइट, टॉर्च जैसे उपकरण बनाने के लिए गढ़वाल मंडल में थानो और कुमाऊं के कोटाबाग में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 50-50 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देने का फैसला लिया है। इसके लिये मुख्यमंत्री ने वीएस एनर्जी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार को निर्देश दिए है।

योजना से संबंधित प्रस्तुतीकरण देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों के समूह में 40 महिलाएं और 10 आइटीआई प्रशिक्षणार्थी शामिल होंगे। वीएस एनर्जी प्रशिक्षण देगी। इस प्रोजेक्ट के तहत उत्पाद तैयार करने के लिए पांच दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उत्पादित वस्तुओं की मार्केटिंग भी इसी कंपनी द्वारा की जाएगी। प्रशिक्षण के लिए कंपनी प्रति प्रशिक्षाणार्थी 1200 रुपये की दर से राशि लेगी, जिसे उत्तराखंड कौशल विकास मिशन वहन करेगा।

मुख्यमंत्री ने योजना में महिला स्वयं सहायता समूहों और आईटीआई डिप्लोमाधारियों को शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसके लिए वृहद कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिजली की खपत में कमी लाने को एलईडी की बड़ी उपयोगिता है। इसीलिए सभी सरकारी-अर्धसरकारी दफ्तरों में एलईडी बल्बों का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। इसके वितरण को महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

उन्होंने कहा कि स्वरोजगार के मद्देनजर छोटे शहरों में महिला स्वयं सहायता समूहों एवं न्याय पंचायतों में इन उपकरणों को बनाने के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है। इसके प्रथम चरण में स्वयं सहायता समूहों और द्वितीय चरण में आईटीआई डिप्लोमाधारियों के समूह को प्रशिक्षण देने के उपरांत इन संस्थानों में प्रोडक्शन यूनिट स्थापित की जाएंगी।

केजरीवाल का कद आप में सबसे बड़ा

आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए जिन तीन लोगों के नाम तय किए गए हैं, उससे साफ है कि पार्टी में केजरीवाल का कद सबसे बड़ा है। पार्टी में केजरीवाल का साफ हस्तक्षेप है। 
आम आदमी पार्टी के ये तीन उम्मीदवारों के नाम के ऐलान से और स्पष्ट हो गया है। यही नहीं इससे इस तथ्य पर भी मुहर लगती है कि जिस-जिस ने भी केजरीवाल से असहमति दिखाई और उनके काम करने के तौर तरीकों पर सवाल उठाए आम आदमी पार्टी के संरक्षक ने उसको निपटा दिया। ऐसे लोगों की काफी लंबी लिस्ट है।
आम आदमी पार्टी के मंचीय कवि कुमार विश्वास केजरीवाल से असहमति रखने के ताजा शिकार हैं। विश्वास और केजरीवाल के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग राय देखने को मिली है। चाहे वो मामला कपिल मिश्रा का हो या अमानतुल्लाह खान का।
केजरीवाल के गुट में कुमार विश्वास को राष्ट्रवादी और बीजेपी से हमदर्दी रखने वाले व्यक्ति के तौर देखा जाता है, जबकि केजरीवाल के राजनीति इसके विरोध में है। हाल के दिनों में विश्वास आप में ढांचागत बदलाव की बात करते रहे हैं। जाहिर है पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को ये बर्दाश्त नहीं होता।कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी में कुमार का विश्वास सिमटता दिख रहा है। हालांकि उनके पास राजस्थान का प्रभार है।

कभी केजरीवाल के पुराने और मजबूत रणनीतिकार रहे योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की आम आदमी पार्टी से विदाई बड़ी हृदय विदारक रही। 2015 के विधानसभा चुनावों के बाद योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण और केजरीवाल के बीच जबरदस्त मतभेद उभरकर सामने आए। हालात ये बन गए कि पार्टियों की बैठकों में नेताओं के बीच गाली गलौज और हाथापाई की नौबत आ गई।
योगेंद्र और प्रशांत भूषण पार्टी से अलग हो गए। दोनों नेता आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से थे, लेकिन केजरीवाल ने दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया। योगेंद्र और प्रशांत ने स्वराज अभियान नाम से एक दल बनाया और दिल्ली में अपनी लड़ाई लड़ने की ठानी।
योगेंद्र यादव की अगुवाई में स्वराज अभियान ने एमसीडी चुनावों में भी हिस्सा लिया, लेकिन उन्हें आशातीत सफलता नहीं मिली। राज्यसभा के उम्मीदवारों के ऐलान के बाद योगेंद्र और प्रशांत ने ट्वीट कर इसे पार्टी का घोर पतन करार दिया।
कभी दिल्ली में सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर दो करोड़ घूस लेने का सनसनीखेज आरोप लगाया था। 2017 की गर्मियों में कपिल मिश्रा और केजरीवाल टीम के बीच जबरदस्त जंग चलती रही। कपिल को कुमार विश्वास का समर्थन हासिल था और संघर्ष धीरे-धीरे बढ़ता गया। बाद में कपिल मिश्रा बीजेपी की ओर खिसकते गए और विवाद मंद पड़ता गया, लेकिन पूरे मामले में चुप्पी साधे केजरीवाल कपिल मिश्रा के लिए सियासी तौर पर साइलेंट किलर साबित हुए।
केजरीवाल के खिलाफ सबसे पहले बगावती सुर छेड़ने वाले विनोद कुमार बिन्नी ने आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा के खिलाफ सबसे आवाज उठाई और चुनावी मैदान में भी उन्हें चुनौती दी।
कभी दिल्ली में केजरीवाल के साथ मिलकर राजनीति करने वाले बिन्नी ने केजरीवाल की पहली सरकार में मंत्री पद न मिलने के बाद बगावती सुर अपना लिए थे।
इसके बाद अगले चुनाव के लिए पार्टी की ओर से टिकट न मिलने पर उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बाद में बिन्नी को पार्टी से निलंबित कर दिया।

डा. आरके गुप्ता को नशे की दवा देने पर मिली सजा

ऋषिकेश में मिर्गी का गारंटीड इलाज कराने के नाम मरीजों को नशे की दवायी देने के आरोप में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विवेक द्विवेदी की अदालत ने डा आरके गुप्ता समेत 15 लोगों को सजा सुनाई है।

सहायक अभियोजन अधिकारी यशदीप श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि डॉ. आरके गुप्ता का ऋषिकेश में नीरज क्लीनिक प्राईवेट लिमिटेड के नाम से अस्पताल है। जहां मिर्गी के रोगियों का शर्तिया इलाज का दावा किया जाता है। वर्ष 2004 में एक एनआरआइ ने शासन को शिकायत भेजी कि डॉ. गुप्ता आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर मरीजों को नशा देता हैं।

एनआरआइ ने विदेश में कराई गई दवाओं की जांच रिपोर्ट भी भेजी थी। इस पर शासन ने जांच के आदेश दिए। राज्य औषधि नियंत्रक की अगुआई में अस्पताल में छापे के दौरान प्रतिबंधित दवाएं मिली थीं, जिसके बाद डॉ. आरके गुप्ता को हिरासत में ले लिया गया। मगर, छापे की भनक लगने के बाद मौके पर जुटी भीड़ ने अस्पताल कर्मियों की मदद से डॉक्टर को छुड़ा लिया।

इधर, टीम मामले में मुकदमा दर्ज कराने ऋषिकेश कोतवाली पहुंची तो तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष दीप शर्मा, पूर्व दायित्वधारी अनीता वशिष्ठ समेत कई सभासद और व्यापारी नेताओं की अगुआई में डेढ़-दो सौ लोगों की भीड़ कोतवाली पहुंच गई और हंगामा काटा कर दिया। मामले में डॉ. आरके गुप्ता समेत 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

सीजेएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए। अदालत ने गवाहों और सबूतों के आधार पर डॉ. आरके गुप्ता को पांच वर्ष सश्रम कैद और 21 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं अन्य 14 आरोपियों को एक-एक वर्ष सश्रम कैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद आरके गुप्ता को सुद्धोवाला जिला कारागार भेज दिया गया, जबकि अन्य आरोपियों को जमानत दे दी गई।

भीड़ द्वारा छुड़ाए जाने के बाद फरार डॉ. आरके गुप्ता को 11 दिन बाद देहरादून के क्लेमेनटाउन इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद वह करीब 27 माह तक जेल में रहा, बाद उसे जमानत मिल गई थी।

जहां आज तक कोई सीएम नहीं आया, वहां योगी जाएंगे

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पूरे पांच साल तक नोएडा में कदम नहीं रखा। यूपी की सियासत में एक भ्रम है कि सत्ता में रहते हुए जिस सीएम के कदम नोएडा में पड़े हैं वो दोबारा से सत्ता में वापसी नहीं कर सके। अखिलेश से लेकर मायावती तक इसी भ्रम में पड़ी रही और नोएडा में मुख्यमंत्री रहते हुए कदम नहीं रखा, लेकिन उत्तर प्रदेश के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस अंधविश्वास को धता बताते हुए नोएडा आने का फैसला किया है।
योगी आदित्यनाथ 25 दिसंबर को नोएडा पहुंच रहे हैं। यहां वे मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। ये मेट्रो नोएडा के बोटेनिकल गार्डन से दिल्ली के कालका जी तक जाएगी। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नई मेट्रो लाइन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।

बता दें कि अखिलेश को उसी टोटके का डर से तमाम मुख्यमंत्री नोएडा आने से कतराते रहे। उन्होंने पांच साल तक सत्ता में रहते हुए एक बार भी नोएडा में कदम नहीं रखा। इसके बावजूद 2017 के विधानसभा चुनाव में वो अपनी सत्ता को बरकरार नहीं रख सके हैं।

मायावती 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही हैं, लेकिन इन पांच सालों में मायावती ने नोएडा में कदम तक नहीं रखा। जबकि ग्रेटर नोएडा के दादरी के पास उनका पैतृक गांव है।
इसके बावजूद वे नहीं आई। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने कार्यकाल में नोएडा को सजाने सँवारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। अंबेडकर पार्क से लेकर नोएडा एक्सप्रेस वे भी बनवाया। हालांकि, एक बार मायावती यहां आई थी, लेकिन उनकी सत्ता चली गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों नोएडा आ रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या यह अंधविश्वास महज एक भ्रम रह जाता है या सच साबित होगा।

शोध की जिम्मेदारी हमारे विश्वविद्यालयों की: त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कृषि विभाग द्वारा आयोजित किसानों की आय दोगुना करने संबन्धी कार्यशाला का उद्घाटन किया। उद्यान और कृषि विभाग की मृदा स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के कार्यों का एकीकरण मुख्यमंत्री ने उद्यान और कृषि विभाग द्वारा अलग-अलग प्रदान किये जा रहे मृदा स्वास्थ्य कार्डों की व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश देते हुए दोनों विभागों की प्रयोगशालाओं को एकीकृत रूप में कार्य करने को कहा।

अब किसान किसी भी लैब से कृषि अथवा औद्यौनिकी के लिये सॉयल हेल्थ कार्ड ले सकेंगे। वर्तमान में कृषि विभाग की प्रत्येक जनपद में एक सॉयल हेल्थ लैब है तथा उद्यान विभाग की दो प्रयोगशाला कुमाऊं मण्डल तथा गढवाल मण्डल में स्थापित है। अब कृषकों को कृषि अथवा औद्यौनिकी किसी भी कार्य हेतु सभी 15 प्रयोगशालाओं की सुविधा मिल सकेगी। अफसर फार्म और फार्मर तक पहुंचे। सीएम किसानों की आय दोगुनी करने संबन्धी कार्यशाला के आयोजन का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर जनपद, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर तक भी ऐसी गोष्ठियां आयोजित की जाय। कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारी किसानों के साथ प्रतिमाह मीटिंग करें।

‘‘ऑफिस में बैठकर नही, खेतों तक जाकर खेती होगी। अफसर फार्म और फार्मर तक पहुंचें’’ मुख्यमंत्री ने कहा। मुख्यमंत्री ने नई तकनीकि को बढ़ावा देने के लिये विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

‘‘प्रयोग और शोध की जिम्मेदारी हमारे विश्वविद्यालयों की है’’ मुख्यमंत्री ने कहा। ऐसे निजी उच्च शिक्षण संस्थान जहां कृषि की पढ़ाई होती है उनका भी उपयोग किया जाय। आर्गेनिक खेती को बढावा दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में दस विकासखण्डों को आर्गेनिक खेती के लिये चिन्हित किया गया है। आर्गेनिक खाद के उत्पादन के वर्तमान पारंपरिक तरीके में समय लगता है।

किसानों को नई तकनीकि और प्रक्रियाओं के प्रति प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केन्द्रों को इस दिशा में आगे आना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘लैब’’ और ‘‘लैण्ड’’ दोनों के ही विशेषज्ञ कार्यशाला में बैठे हैं। किसानेां की आय दोगुना करना, उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने के लिये ठोस कार्ययोजना बनाकर मिशनरी भाव से काम करना होगा। सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं है। लोगों तक जाकर उनको जानकारी देना तथा उनकी मदद करना भी बहुत जरूरी है।

कृषि विभाग ने तैयार की है विस्तृत कार्ययोजना कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सचिव कृषि डी.सेंथिल पाण्डियन द्वारा एक प्रस्तुतिकरण दिया गया। पाण्डियन ने बताया कि कृषि और औद्यानिकी के क्षेत्र में सेक्टरवार विशेषज्ञ समितियों का गठन कर प्रारंभिक रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इससे मधुमक्खी पालन, आर्गेनिक फार्मिंग, मृदा परीक्षण एवं प्रबंधन, कृषि विपणन, फलफूल, सब्जी, मशरूम उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज चेन, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, भेड़ एवं बकरी पालन, मत्स्य पालन आदि क्षेत्र सम्मिलित है।

अगले माह जनवरी से 2000 रूपये के कैशलेस पर नहीं देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज

डेबिट कार्ड से किसी दुकान पर 2000 रुपये तक की खरीदारी करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के तौर पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा। यह चार्ज केंद्र सरकार दो साल तक स्वयं ही वहन करेगी।

डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से उठाया जा रहा यह कदम अगले साल जनवरी से लागू होगा। केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह व्यवस्था ठीक से लागू हो, इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल-सितंबर-2017 में केवल डेबिट कार्ड से दो लाख 18 हजार, 700 करोड़ का कैशलेस लेनदेन हुआ है।

अगर यही रफ्तार रही तो इस वित्त वर्ष के अंत तक यह चार लाख 37 हजार करोड़ का हो जाएगा। उन्होंने इसके साथ ही बताया कि सरकार देश केा एक ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए लगातार नये प्रयास कर रही है और देश इसकी तरफ अग्रसर हो रहा है।

बता दें कि इससे पहले आरबीआई ने एमडीआर चार्जेज घटा दिए थे। इनको लेकर कारोबारियों ने आपत्ति जताई थी। कारोबारियों का कहना था कि इससे व्यापारियों का खर्च बढ़ेगा। इसको देखते हुए ही सरकार ने यह कदम उठाया है।

एमडीआर क्या है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह रेट है, जो बैंक किसी भी दुकानदार अथवा कारोबारी से कार्ड पेमेंट सेवा के लिए लेता है। ज्यादातर कारोबारी एमडीआर चार्जेज का भार ग्राहकों डालते हैं और बैंकों को दी जाने वाली फीस का अपनी जेब पर भार कम करने के लिए ग्राहकों से भी इसके बूते फीस वसूलते हैं।

तलाक, तलाक, तलाक पर होगी सजा, जाने कौन से है प्रावधान?

तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट से बैन किए जाने के बाद मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। तीन तलाक के खिलाफ सख्त कानून वाले बिल को कैबिनेट की मंजूरी शुक्रवार को मिल गई। इस बिल के तहत अगर कोई शख्स एक समय में अपनी पत्नी को तीन तलाक देता है, तो वह गैरजमानती अपराध माना जाएगा और उसे तीन साल की सजा भी हो सकती है।

बता दें कि मोदी सरकार ने इस बिल को लाने का तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के बैन किए जाने के बाद भी लगातार तीन तलाक के मामले हो रहे हैं। कानून में तीन तलाक को लेकर सजा का कोई प्रावधान नहीं था। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ सख्त कानून बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है।

मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे बिल के प्रारुप को सभी राज्य सरकारों भेजा गया था और राज्यों की राय मांगी गई थी। इसमें बीजेपी शासित ज्यादातर राज्यों ने इस पर मंजूरी दे दी है। इनमें असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने मंजूरी दे दी हैं।

तीन तलाक के खिलाफ बिल में यह प्रावधान है कि एक वक्त में तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा।

दूसरा यह कि एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी और शून्य होगा। ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है। यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा।

तीसरा यह कि ड्रॉफ्ट बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा।

चौथा यह कि पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है। मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेंगे।
यह प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा।