राखी पर निशुल्क रोडवेज का लाभ 6.5 लाख महिलाओं ने उठाया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तराखंड रोडवेज की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान किए जाने का लाभ प्रदेश की साढ़े छह लाख से अधिक महिलाओं को मिलेगा। इससे पूर्व सरकार, महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए, सरकारी नौकरियों में महिला आरक्षण, लखपति दीदी, एकल महिला स्वरोजगार, महालक्ष्मी किट जैसी सफल योजनाएं लागू कर चुकी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षा बंधन के मौके पर 60 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को रोडवेज की बस में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है। यानि प्रदेश की 60 साल से अधिक उम्र की किसी भी महिला को रोडवेज की बस में सफर करने के कोई किराया नहीं चुकाना होगा। इससे जहां पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को विशेष तौर पर लाभ मिलेगा, वहीं मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित और आरामदायक परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत देहरादून में 10 पिंक ई-बसें महिलाओं को समर्पित करने की घोषणा की है, जिसे बाद में पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा।

लखपति दीदी अब बनेगी उद्यमी
धामी सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए लखपति दीदी योजना संचालित कर रही है, इसके लिए तहत अब तक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3 लाख से अधिक महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख से अधिक हो चुकी है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं को उद्मी बनाने के लिए महिला स्वरोजगार योजना में रियायती बैंक ऋण की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये करने की घोषणा की है। इससे महिलाएं अपना कारोबार शुरू करने या मौजूदा स्वरोजगार को विस्तार देने के लिए अधिक पूंजी जुटा सकेंगी। इसी कड़ी में सरकार एकल महिला स्वरोजगार योजना भी संचालित कर रही है, जिसके जरिए जरिए अकेले परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

सशक्तिकरण से गरिमा तक
प्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम उठाते हुए, प्रदेश की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है। इसके बाद सरकारी सेवाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढा है। महिला सशक्तिकरण के बाद मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आधुनिक हाईटेक टॉयलेट बनाने की धोषणा की है।

उत्तराखंड की मातृशक्ति ने हमेशा प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमारी सरकार हर उम्र की महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुझे उम्मीद है कि रोडवेज की बस में निशुल्क यात्रा और पिंक ई बस सेवा के जरिए महिलाएं, सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सकेंगी।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।।

ऋषिकेश में आवास से लेकर पर्यटन और यातायात तक बदलेगी तस्वीर, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी रखा जाएगा ध्यान

देहरादून। धार्मिक और पर्यटन नगरी ऋषिकेश के सुनियोजित और सर्वांगीण विकास को लेकर धामी सरकार ने कवायद तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने ऋषिकेश महायोजना को जल्द अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज करते हुए इससे जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर दिया है। इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल के संबंधित विकास प्राधिकरणों के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक में भवन ऊंचाई, सड़क चौड़ाई, यातायात, आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों सहित महायोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी और नियोजन संबंधी विषयों पर चर्चा की गई।

तीनों प्राधिकरणों के प्रस्तावों पर शासन स्तर से होगी कार्रवाई
ऋषिकेश महायोजना का क्षेत्र तीन जिलों से जुड़ा होने के कारण देहरादून, टिहरी और पौड़ी के विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए थे। पूर्व में शासन स्तर पर हुई बैठक में संबंधित प्राधिकरणों को अपने-अपने बोर्ड से अनुमोदित प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके अनुपालन में टिहरी और पौड़ी प्राधिकरणों ने अपने प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराए। बैठक में प्राप्त प्रस्तावों और संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियों का परीक्षण किया गया। क्षेत्र की आवश्यकता और सड़क की चौड़ाई के अनुरूप भवनों की ऊंचाई निर्धारित करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

टिहरी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग की मौजूदगी और विकासात्मक

आवश्यकताओं को देखते हुए भवन ऊंचाई को मैदानी क्षेत्रों के मानकों के अनुरूप रखने का अनुरोध किया गया है। वहीं, पौड़ी जनपद का क्षेत्र राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटा होने के कारण यहां पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भवन ऊंचाई सीमित रखने के सुझाव को उपयुक्त माना गया।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को महायोजना से जुड़े सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश जैसे धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए महायोजना केवल भूमि उपयोग का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के शहरी और आर्थिक विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र है। यहां पर्यटकों की संख्या के साथ शहरी आबादी, यातायात दबाव और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी विकास योजना तैयार करना जरूरी है, जो शहर के विस्तार को व्यवस्थित दिशा देने के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखे।

पार्किंग, सड़क और यातायात को मिलेगी नियोजित दिशा

महायोजना में आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ पर्यटन गतिविधियों, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, सड़क नेटवर्क और आधारभूत ढांचे के विकास को भी समग्र रूप से शामिल किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि बढ़ते पर्यटन और शहरीकरण के बीच ऋषिकेश में नागरिकों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलें और यातायात व्यवस्था को भी प्रभावी बनाया जा सके।

स्थानीय जरूरतों और क्षेत्र की पर्यावरणीय

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास का संतुलित मॉडल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से लगे क्षेत्रों में निर्माण और विकास गतिविधियों के नियोजन में पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

अनावश्यक देरी पर सख्त रुख

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने ने संबंधित विभागों और विकास प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी या विभागीय स्तर पर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए। महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

धार्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक सुविधाओं पर फोकस

धामी सरकार की मंशा ऋषिकेश को धार्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक, सुविधायुक्त और सुव्यवस्थित पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की है। महायोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में भविष्य के आवासीय, व्यावसायिक, पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास को स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार के अनुसार ऋषिकेश का विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले, लेकिन शहर की पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय नागरिकों की आवश्यकताओं से समझौता न हो। इसी संतुलन के साथ महायोजना को शीघ्र अंतिम रूप देने की दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का दिया संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुंवावाला, देहरादून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 137वां संस्करण सुना।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने के साथ ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों और अभिनव प्रयासों को देश-दुनिया के सामने लाने का प्रभावी माध्यम बना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में युवाओं को नशे से दूर रखने और ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ के संकल्प को जन-आंदोलन बनाने का संदेश दिया है। नशा मुक्त युवा ही सशक्त और विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। प्रधानमंत्री के आह्वान से देश के युवाओं में नशे के विरुद्ध जागरूकता बढ़ने के साथ ही स्वस्थ, सकारात्मक और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित युवा शक्ति के निर्माण को नई ऊर्जा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत के गौरवशाली इतिहास और विरासत को नई पीढ़ी तक रोचक एवं सरल तरीके से पहुंचाने के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयासों का भी उल्लेख किया। ऐसे प्रयास युवाओं को देश के समृद्ध इतिहास से जोड़ने के साथ उनमें अपनी संस्कृति, विरासत और राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को और मजबूत करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में सामान्य नागरिकों द्वारा किए जा रहे असाधारण कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान प्रदान कर रहे हैं। इससे समाज के अन्य लोगों को भी अपने क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा मिलती है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं से प्रधानमंत्री के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए नशा मुक्त, स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, मदन कौशिक भरत चौधरी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।

मुख्यमंत्री धामी ने हल्द्वानी में व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों के साथ किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय खेल दिवस कार्यक्रम के उपरांत आईटीसी फॉर्च्यून, हल्द्वानी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कुमाऊं मंडल के व्यापारियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं विभिन्न व्यापार मंडलों के पदाधिकारियों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने व्यापारियों की समस्याओं, सुझावों एवं अपेक्षाओं को सुना और राज्य सरकार की ओर से उनके समाधान के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

संवाद के दौरान व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने जीएसटी से संबंधित प्रक्रियाओं के सरलीकरण, मंडी शुल्क, अतिक्रमण एवं पार्किंग की समस्या, लीज नवीनीकरण, औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने सहित विभिन्न विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारी और उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। व्यापारी न केवल रोजगार सृजन करते हैं, बल्कि उत्पादन और उपभोक्ता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में राज्य की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्यमी तक प्रत्येक व्यापारी प्रदेश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण भागीदार है। राज्य सरकार व्यापारियों एवं उद्यमियों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनके लिए सुरक्षित, पारदर्शी तथा सरल व्यावसायिक वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड जैसे चुनौतीपूर्ण समय में भी प्रदेश के किराना एवं रिटेल व्यापारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों तक राशन एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाईं। संकट के समय व्यापारी वर्ग ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर यह सिद्ध किया कि वह देश और प्रदेश का मजबूत स्तंभ है। उन्होंने कहा कि हमारे व्यापारी “ब्रांड इंडिया” के सच्चे राजदूत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में व्यापार, उद्यमिता और नवाचार के प्रति नया विश्वास पैदा हुआ है। प्रधानमंत्री का निरंतर प्रयास रहा है कि देश में ऐसा वातावरण तैयार हो, जिसमें सामान्य परिवार का युवा भी नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने का सपना देख सके। केंद्र एवं राज्य सरकार इसी सोच के साथ युवाओं में उद्यमिता और स्वरोजगार को प्रोत्साहित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। निवेशकों एवं उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए “निवेश मित्र” की व्यवस्था की गई है और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया गया है। वर्तमान में 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट के दौरान उद्योग जगत एवं व्यापारियों से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने 30 से अधिक नीतियां तैयार की हैं। इन नीतियों के निर्माण में उद्योग एवं व्यापार जगत के सुझावों को प्राथमिकता दी गई, जिसके सकारात्मक परिणाम प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के रूप में सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनसे लगभग 1.27 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। सरकार की सोच स्पष्ट है कि शासन उद्योगों के लिए बाधा नहीं, बल्कि सहयोगी और भागीदार बने। उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और रोजगार बढ़ने से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को अपने विचारों, नवाचार एवं उद्यम के माध्यम से रोजगार देने वाला बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड स्टार्टअप नीति लागू की गई है। इसके साथ ही 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड भी स्थापित किया गया है। सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों का युवा भी अपने गांव में रहकर देश और दुनिया के बाजार के लिए कारोबार खड़ा कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का औद्योगिक विकास केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, इसके लिए पर्वतीय जनपदों में भी औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष औद्योगिक पार्कों हेतु भूमि चिन्हित की गई है। छोटे उद्यमियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरिद्वार में फ्लैटेड फैक्ट्री विकसित की जा रही है तथा भविष्य में सेलाकुई और पंतनगर में भी इस प्रकार की सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि जहां प्रतिभा हो, वहीं अवसर उपलब्ध हों और जहां युवा हों, वहीं रोजगार के साधन विकसित किए जाएं। उत्तराखंड का विकास केवल बड़े उद्योगों से संभव नहीं है। गांवों में तैयार होने वाले उत्पाद, शिल्पकार, किसान, छोटे व्यापारी एवं स्थानीय उद्यमी भी प्रदेश की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण भागीदार हैं।

उन्होंने कहा कि “वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट” जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों एवं पारंपरिक शिल्प को बड़े बाजारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि “मेड इन उत्तराखंड” केवल प्रदेश के उत्पादों की पहचान न रहे, बल्कि गुणवत्ता और विश्वास के साथ वैश्विक बाजार में एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित हो। राज्य में फार्मा, हर्बल, आयुष, इंजीनियरिंग और ऑटो-कंपोनेंट जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के रूप में विकसित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में व्यापार करने वाला प्रत्येक व्यक्ति राज्य की विकास यात्रा का भागीदार है। व्यापार की प्रगति में ही प्रदेश की प्रगति निहित है। जब व्यापारी का व्यवसाय बढ़ता है तो रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक व्यापारी को सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी व्यवस्था, सरल प्रक्रियाएं और निवेश के बेहतर अवसर उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि उत्तराखंड का व्यापारी केवल प्रदेश के बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि देश और दुनिया के बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। आज देश और उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़ रहे हैं तथा व्यापार और उद्योग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जो अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति के साथ आर्थिक शक्ति का भी प्रमुख केंद्र बने, जहां युवाओं के हाथ में रोजगार, व्यापारियों के मन में विश्वास और उद्यमियों के सामने नए अवसर हों।

मुख्यमंत्री ने व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों से प्रदेश में निवेश एवं व्यापारिक गतिविधियों को और आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा, “आप व्यापार बढ़ाइए, सरकार आपके साथ खड़ी है।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। व्यापार एवं उद्योग जगत के सहयोग और सहभागिता से विकसित उत्तराखंड का संकल्प साकार होगा और उत्तराखंड विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, मंत्री राम सिंह कैड़ा, दायित्वधारी नवीन लाल वर्मा, डॉ. अनिल कपूर ‘डब्बू’, शंकर कोरंगा, हुकुम सिंह कुंवर, व्यापार एवं उद्योग प्रतिनिधियों में कश्मीरी लाल गोयल, नीरज शारदा, राधेराम अग्रवाल, साकेत अग्रवाल, दीपक माहेश्वरी, गौरव गोयल सहित जीएसटी, उद्योग, सिडकुल एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली ने किया।

सीएम ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय खेल दिवस-2026 के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, गौलापार, हल्द्वानी में उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय, मानसखण्ड खेल परिसर के प्रथम चरण के ₹43.50 करोड़ के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रथम शैक्षणिक सत्र का भी शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों एवं उनके प्रशिक्षकों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार एवं हिमालय रत्न पुरस्कार प्रदान किए। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से खेल छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों एवं खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद की जयंती पर हल्द्वानी से उत्तराखण्ड के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास और प्रथम शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगा। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करते हुए ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने अपने असाधारण खेल कौशल से पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया। मेजर ध्यानचंद का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि प्रतिभा को महानता में बदलने के लिए कठोर परिश्रम, अनुशासन और समर्पण आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश के खेल क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अभी तक खेल शिक्षा और विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए प्रदेश के खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपनी देवभूमि में ही उच्च स्तरीय खेल शिक्षा, आधुनिक प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने का प्रमुख केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि देवभूमि और वीरभूमि उत्तराखण्ड अब ‘खेलभूमि’ के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ाया है। खिलाड़ियों की उपलब्धियां राज्य के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को खेल छात्रवृत्ति प्रदान करते हुए कहा कि यह छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के प्रति एक नया वातावरण बना है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश के कोने-कोने में छिपी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। छोटे गांवों, दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों और सामान्य परिवारों से निकलकर युवा खिलाड़ी आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरणा लेते हुए उत्तराखण्ड सरकार भी राज्य को खेलों का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी का सही दिशा में उपयोग करने के लिए खेल एक सशक्त माध्यम है। उत्तराखण्ड के युवाओं में अद्भुत ऊर्जा और प्रतिभा है। आवश्यकता उन्हें सही मंच, आधुनिक संसाधन, बेहतर प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के अंतर्गत 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को मासिक खेल छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के माध्यम से 14 से 23 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को मासिक खेल छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। खिलाड़ियों के लिए खेल इंजरी एवं आकस्मिक परिस्थितियों में बीमा और आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने तथा स्थानीय एवं पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खेल विकास निधि का गठन किया गया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवायोजन की व्यवस्था की गई है। इसके तहत अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी विभिन्न विभागों में सेवायोजित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश का पहला बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में संचालित किया जा रहा है। भविष्य की खेल चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड खेल नीति-2026 का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘एक जनपद-एक खेल’ योजना के माध्यम से प्रत्येक जनपद की विशिष्ट खेल पहचान विकसित करने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग खेल विधाओं के लिए 23 नई हाईटेक खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों में अधिक से अधिक पदक जीतने और ओलंपिक-2036 में उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अभी से विशेष रोडमैप पर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक खेलों के विकास और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी सोच के साथ ‘मौली एआई एप्लीकेशन’ विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से उदीयमान खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। भविष्य में आधुनिक खेल तकनीकों के अधिकाधिक प्रयोग के माध्यम से खिलाड़ियों के कौशल और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे मैदान में उतरकर पूरी मेहनत और समर्पण के साथ अपना शत-प्रतिशत दें। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि साधनों की कमी, आर्थिक कठिनाई अथवा अवसरों का अभाव किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी के सपनों की राह में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का प्रत्येक खिलाड़ी हिमालय की तरह अडिग रहकर न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन करे।

देवभूमि खेल पुरस्कार से खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक सम्मानित
वर्ष 2024 के लिए एथलेटिक्स की अंकिता को देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार तथा एथलेटिक्स के ही लोकेश चौधरी को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2025 के लिए शूटिंग के अभिनव देशवाल को खेल रत्न पुरस्कार, क्याकिंग एंड कैनोइंग के मुकेश शर्मा को द्रोणाचार्य पुरस्कार तथा बॉक्सिंग के मुकेश चन्द्र बेलवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया। दिव्यांग श्रेणी में शूटिंग के शौर्य सैनी को हिमालय रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया। मॉडर्न पैंटाथलॉन में टीम श्रेणी में सक्षम प्रताप सिंह एवं ममता खाती तथा बॉक्सिंग में एकल श्रेणी में खुशी चंद को हिमालय खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी पुरस्कार विजेताओं को नकद धनराशि के साथ प्रशस्ति पत्र, ब्लेजर एवं शॉल प्रदान किए गए।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी और प्रशिक्षक भी पुरस्कृत
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मानित खिलाड़ियों में एथलेटिक्स की अंकिता, बॉक्सिंग की खुशी चंद, हॉकी की मनीषा चौहान, वॉलीबॉल के रफीक अहमद, कबड्डी की भूमिका एवं राहुल सिंह, बैडमिंटन के चिराग बरेठा, मनोज सरकार एवं मनदीप कौर, मॉडर्न पैंटाथलॉन के सक्षम प्रताप सिंह, ब्लाइंड फुटबॉल की शेफाली रावत, पैरा लॉन बॉल की निलिमा राय तथा शूटिंग के आर्यावंश त्यागी एवं भूमि शामिल रहे।

उत्कृष्ट प्रशिक्षकों में एथलेटिक्स कोच लोकेश कुमार, बॉक्सिंग कोच बिजेन्द्र मल्ल, शूटिंग कोच अमित, वॉलीबॉल कोच गिरीश कुमार एवं कबड्डी कोच नितिन कुमार को भी पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या, सांसद अजय भट्ट तथा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में खेल मंत्री रेखा आर्या, विधायक राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विधायक सरिता आर्या, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, दायित्वधारी डॉ. अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्या, शंकर कोरंगा सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

डाउन टू अर्थ सीएम धामी, लोहियाहेड में पैदल पहुंचकर स्थानीय स्टॉल पर लिया टिकी का स्वाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोहियाहेड में ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को आत्मसात करते हुए स्थानीय व्यवसाय और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री पैदल चलते हुए आम लोगों के बीच पहुंचे और स्थानीय रूप से लोकप्रिय रवि के स्टॉल पर रुककर टिकी का स्वाद लिया।

मुख्यमंत्री को अपने बीच सहज रूप से पैदल चलते हुए देखकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने स्टॉल संचालक रवि से बातचीत कर उनके व्यवसाय के बारे में जानकारी ली और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका अर्जित करने के प्रयासों की सराहना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम अपने आसपास के स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, तो उसका सीधा लाभ स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को मिलता है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि आत्मनिर्भर समाज और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को भी गति मिलती है।

मुख्यमंत्री धामी का स्थानीय लोगों के बीच इस सहज और आत्मीय अंदाज में पहुंचना क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री की सादगी तथा स्थानीय व्यवसायों के प्रति उनके प्रोत्साहन की सराहना की।

मुख्यमंत्री का यह कदम स्थानीय उद्यमियों के सम्मान, छोटे व्यवसायों के प्रोत्साहन और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में देखा गया।

प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत देहरादून में 10 पिंक ई-बसें महिलाओं को समर्पित होंगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक टॉयलेट विकसित किए जाने की घोषणा की है। इन टॉयलेट्स में स्वच्छता के साथ-साथ महिलाओं की निजता, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति की गरिमा और सम्मान सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है। प्रदेश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, पर्यटन स्थलों और अन्य आवश्यक स्थानों पर आधुनिक एवं सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराकर महिलाओं के लिए अधिक सुविधाजनक और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा।

महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में 60 वर्ष की आयु से मुफ्त सफर की घोषणा

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को बड़ी सौगात देते हुए घोषणा की कि प्रदेश में वर्तमान में 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को रोडवेज बसों में उपलब्ध मुफ्त सफर की सुविधा को महिलाओं के लिए 60 वर्ष की आयु से लागू किया जाएगा। इससे प्रदेश की अधिकाधिक बुजुर्ग महिलाओं को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

10 पिंक ई-बसें महिलाओं को होंगी समर्पित

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के अंतर्गत उत्तराखंड को मिलने वाली 137 इलेक्ट्रिक बसों में से देहरादून में संचालित होने वाली 100 बसों में 10 बसें महिलाओं के लिए पिंक ई-बस के रूप में समर्पित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक भी विस्तारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिल सके।

महिला स्वरोजगार योजना में ऋण की सीमा बढ़ाकर ढाई लाख रुपये की जाएगी

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री ने महिला स्वरोजगार योजना के तहत रियायती बैंक ऋण की सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹2.50 लाख करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार मांगने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

चकरपुर में मुख्यमंत्री ने बहनों से बंधवाई राखी
रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर चकरपुर स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उपस्थित बहनों ने मुख्यमंत्री को भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षासूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों का अभिवादन करते हुए उन्हें रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

बहनों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके लिए अत्यंत शुभ और भावनात्मक है। उन्होंने कहा कि बहनों का प्रेम और स्नेह उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। यही प्रेम उन्हें अधिक मेहनत और ऊर्जा के साथ प्रदेश की जनता की सेवा करने की शक्ति देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का पर्व भी है। जब हम एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारियों का संकल्प लेते हैं और सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं, तो रिश्ते और मजबूत होते हैं। भारतीय संस्कृति में बहन के स्नेह और भाई के संकल्प का यह रिश्ता सदियों से परिवार, समाज और संस्कारों को मजबूत करने की प्रेरणा देता आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व हमें समाज के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराता है तथा मातृशक्ति के सम्मान का संदेश देता है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। एक भाई अपनी बहन के सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली को अपना धर्म मानता है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 से मातृशक्ति को अपनी नीतियों और योजनाओं में सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने नारी सशक्तिकरण को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि धरातल पर योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए हैं। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से महिलाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया, मुद्रा योजना के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार के लिए पूंजी उपलब्ध कराने का अवसर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराकर उनकी रसोई को धुएं से मुक्त करने का कार्य किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से घर-घर शौचालय का निर्माण कर महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त किया है। लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में भी मातृशक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। नंदा गौरा योजना के माध्यम से बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा तक सरकार उनका साथ दे रही है। योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म पर ₹11 हजार तथा कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने पर ₹51 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के माध्यम से बच्चे के जन्म के बाद मां और शिशु की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामग्री से युक्त किट उपलब्ध कराई जा रही है। 181 महिला हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षा और सहायता का भरोसा दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश की महिलाएं केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाली न बनें, बल्कि हर क्षेत्र में आगे बढ़कर नेतृत्व करें और रोजगार देने वाली बनें। इसी सोच के साथ राज्य में स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के माध्यम से महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए सभी विकासखंडों में केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। देहरादून में प्रदेश के सभी 13 जिलों के उत्पादों की बिक्री के लिए 13 सेंटर स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रही हैं और अब उनके उत्पादों की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 3 लाख 9 हजार बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि है। उन्होंने बहनों का आह्वान करते हुए कहा कि अब लखपति दीदी से आगे बढ़कर करोड़पति बनने का लक्ष्य रखें। सरकार इस यात्रा में उनके साथ खड़ी है।

उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि महिलाओं के मजबूत होते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ें और नए कीर्तिमान स्थापित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं एक भाई के रूप में हमेशा अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी के साथ निभाऊंगा।” उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता माताओं और बहनों की सेवा है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि वे देवभूमि उत्तराखंड में अपनी माताओं-बहनों के भाई और बेटे के रूप में सेवा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि जब तक उत्तराखंड की प्रत्येक बहन सम्मानित, सशक्त और आत्मनिर्भर नहीं हो जाती, तब तक राज्य सरकार इसी संकल्प के साथ प्रदेश की उन्नति और मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए कार्य करती रहेगी।

देवीधुरा में आठ मिनट तक चले अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का किया गया प्रयोग

चम्पावत के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस प्रसिद्ध मेले में आस्था, परंपरा, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले में प्रतिभाग करने के लिए मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। हेलीपैड पर पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मा. मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के अंतर्गत कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसके अतिरिक्त घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट तथा लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर एवं डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी गतिमान हैं। विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना एवं सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाने के साथ ही व्यवस्थाओं को भी और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का मूल उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रदेशवासियों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया।

चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल
मुख्यमंत्री ने चार खामदृसात थोक के बीच खेले जाने वाले इस अनोखे प्राचीन पाषाण युद्ध का भी अवलोकन किया। रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों एवं महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया।

पाटी विकासखंड में स्थित माँ वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खामकृवालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)कृके बग्वालियों का प्रवेश हुआ। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों एवं पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ।

फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान मां के जयकारों से गूंज उठा। इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1रू48 बजे शुरू होकर 1रू55 बजे समाप्त हुई। 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का प्रयोग कर सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखा गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।खामों के आगमन एवं बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी पीठाचार्य श्री कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा, “माँ वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा गले मिलते हैं।”

मातृशक्ति के सम्मान, स्वावलंबन और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धः धामी

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामलीला मैदान धूरा चंपावत में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव-2026’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत के सर्वांगीण विकास के लिए कुल ₹62.97 करोड़ की 50 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें ₹11.08 करोड़ की 20 योजनाओं का लोकार्पण तथा ₹51.89 करोड़ की 30 नई विकास योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन योजनाओं से जनपद में सड़क, पेयजल, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा एवं धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की घोषणा की। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्थान धूरा में पेयजल योजना, धूरा से सेतीचौड़ ब्याला तक संपर्क मोटर मार्ग, ग्राम पंचायत ककनई के तोक बूंगा दुर्गापीपल तक सड़क, भागिना भंडारी में मुख्य सड़क से राजकीय इंटर कॉलेज एवं राजकीय प्राथमिक विद्यालय दयारतोली तक सीसी मार्ग व इंटरलॉकिंग टाइल्स, धन एवं बस्तियागूंठ के विभिन्न मंदिरों का सौंदर्यीकरण शामिल है।

इसके साथ ही अमोड़ी, भलुवागाड़ी, डोलाकांडा, फुरकियाझाला, छतकोट, बेलखेत, खिरद्वारी , बुडम, झालाकुड़ी, नौलापानी एवं बस्तियागूंठ के मास्वाड तोक सहित विभिन्न क्षेत्रों में भूकटाव एवं बाढ़ सुरक्षा हेतु वायरक्रेट कार्य, ग्राम पंचायत पोथ के लदिया नदी में झूला पुल, दियूरी से चौड़ा तक सड़क का सुधारीकरण एवं डामरीकरण, डांडा ककनई में सिंचाई हेतु नलकूप, सुखीढांग-डांडा-मीनार मोटर मार्ग में हॉटमिक्स तथा बुडम के कठोल में झूला पुल निर्माण कार्य किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपनी बहनों, माताओं, बेटियों और भांजियों के बीच अपने घर आए हैं। चम्पावत से मिलने वाला प्रेम और अपनापन उन्हें हमेशा ऊर्जा देता है। मुख्यमंत्री ने कुमाऊंनी भाषा में मातृशक्ति से संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति से रक्षा सूत्र बंधवाकर सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि राज्य की प्रत्येक मातृशक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा चम्पावत के विकास के लिए क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालयी चोटियों और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि यहां की मेहनती, साहसी और आत्मनिर्भर मातृशक्ति से भी है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल सरकारी योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि महिलाओं को शिक्षित, स्वस्थ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाकर परिवार एवं समाज के निर्णयों में भागीदार बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। चम्पावत में बेटियों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज हॉस्टल, आईटीआई लैब, ₹256.97 करोड़ की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, इंटीग्रेटेड नर्सिंग संस्थान तथा महिला प्रौद्योगिकी पार्क जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, ताकि बेटियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए गांव या जनपद से बाहर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि लखपति दीदी बनने के बाद प्रदेश की माताएं-बहनें आगे बढ़कर करोड़पति बनें। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि इन उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फॉर लोकल, हाउस ऑफ हिमालयाज, हिलांस आउटलेट, फूड वैन और ई-रिक्शा जैसे माध्यम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनने के अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक महिला आत्मनिर्भर होती है तो पूरा परिवार आत्मनिर्भर होता है। परिवार से गांव, गांव से समाज और समाज के सशक्त होने से पूरा उत्तराखंड सशक्त एवं समृद्ध बनता है। सरकार का उद्देश्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां किसी बेटी को अवसरों की कमी के कारण पलायन न करना पड़े और चम्पावत की मातृशक्ति विकास की मुख्यधारा में नेतृत्वकर्ता बनकर उभरे।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। बाल विकास विभाग के स्टॉल में उन्होंने छोटी बच्चियों के साथ केक काटकर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री की ओर से उपहार भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, जिलाध्यक्ष भाजपा गोविन्द सामन्त, जिला महामंत्री भाजपा मुकेश कलखुड़िया, दायित्वधारी श्याम नारायण पाण्डेय, मुकेश महराना, सुभाष बगौली, मनोज कालाकोटी, हेमा जोशी जिला अधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने मेरे सपनों का उत्तराखंड पर विद्यार्थियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नेरुद्रपुर स्थित निजी विद्यालय में मेरे सपनों का उत्तराखंड पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवा विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विचारों, सुझावों और भविष्य के उत्तराखंड को लेकर उनकी परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा विद्यार्थियों की ऊर्जा, सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की भावी पीढ़ी, सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बने, यही हमारी प्राथमिकता है। युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने के लिए शिक्षा, रोजगार, नवाचार, कौशल विकास, पर्यटन, कृषि, खेल और तकनीक सहित प्रत्येक क्षेत्र को सशक्त बनाया जा रहा है। युवा शक्ति उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत है और उनके सपनों, विचारों एवं प्रतिभा को अवसर देकर हम एक आत्मनिर्भर, सक्षम और विकसित उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा केवल आज का नहीं बल्कि कल के भविष्य भी हैं। मेरे सपनों का उत्तराखंड विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पर्यटन, विकास, नवाचार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। और इन क्षेत्रों के लिए सरकार ने नई नीतियां लागू की हैं।

विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं को बढ़ावा देने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में देश की 5वीं सबसे बड़ी साइंस सिटी का निर्माण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के होनहार विद्यार्थियों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश और दुनिया पर नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने लीडरशिप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नेतृत्व क्षमता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। बल्कि खेल, चिकित्सा, विज्ञान, मीडिया और उद्योगकृहर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में सच्चे लीडर होते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से जुड़कर देश व राज्य के विकास में अपना योगदान देने का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी को राखी त्यौहार की बधाईयां व शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ प्रतियोगिता को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच और संकल्प को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी राज्य के भविष्य को लेकर सजग और जागरूक है। विद्यार्थियों के सपनों, सुझावों और नवाचारपूर्ण विचारों को विकास की दिशा से जोड़ते हुए एक ऐसे उत्तराखंड के निर्माण किया जाएगा, जो सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित हो।

कार्यक्रम में विभिन्न विधालयों के लगभग 800 छात्र-छात्राएं, शिक्षक सहित महापौर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, रामपाल सिंह, दिनेश मानसेरा, उत्तम दत्ता, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।