मुख्यमंत्री ने की हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह के सौंदर्यीकरण की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज “आवाज़ सुनो पहाड़ों की फिल्म फेस्टिवल 2026” में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह के सौंदर्यीकरण की घोषणा की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “श्रद्धा सम्मान” पुस्तिका का विमोचन किया तथा “आवाज़ सुनो पहाड़ों की – सीजन 2” लॉन्च किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शारदा स्वर संगम फिल्म प्रोडक्शन हाउस द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक फिल्म फेस्टिवल नहीं, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक फिल्म निर्माण के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से राज्य की समृद्ध संस्कृति, खान-पान और प्राकृतिक सौंदर्य का व्यापक प्रचार-प्रसार होता है। साथ ही स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी लोक-संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने तथा आधुनिक परिवेश को समझने का अवसर भी प्राप्त होता है। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए शारदा स्वर संगम फिल्म प्रोडक्शन हाउस की पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को आधुनिक पहचान देने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक सशक्त साधन भी है। समाज की सच्चाइयों को सिनेमा ने हर दौर में प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है, चाहे वह छुआछूत, दहेज प्रथा, भ्रष्टाचार, अन्याय, प्रतिभा पलायन या सामाजिक कुरीतियां रही हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ईश्वर द्वारा प्रदत्त प्रकृति की अनमोल धरोहरों से समृद्ध है। यहां के पर्वत, नदियां, झरने, मौसम और संस्कृति फिल्मकारों को आकर्षित करते हैं। नैनीताल, मसूरी, औली, चकराता, मुन्स्यारी, कौसानी और चोपता जैसे अनेक स्थल देश-विदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से भी बेहतर हैं। साथ ही चारधाम, हरिद्वार, ऋषिकेश, कैंची धाम, हेमकुंड साहिब और रीठा साहिब जैसे दिव्य स्थल भी फिल्म निर्माताओं के लिए विशेष आकर्षण हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केदारनाथ की धरती से दिए गए “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा” के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को एक विशिष्ट फिल्म हब के रूप में विकसित करना है, जिससे युवाओं को रोजगार और संस्कृति को वैश्विक पहचान मिल सके।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहन देने के लिए नई फिल्म नीति लागू की है। इसके अंतर्गत उत्तराखंड में फिल्माई गई हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वहीं कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी फिल्मों के लिए सब्सिडी बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म शूटिंग की अनुमति अब ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत 7 दिनों के भीतर शूटिंग की अनुमति दी जाती है और प्रदेश में किसी प्रकार का शूटिंग शुल्क नहीं लिया जाता। क्षेत्रीय फिल्मों को सप्ताह में कम से कम एक बार स्थानीय सिनेमाघरों में दिखाना अनिवार्य किया गया है। शूटिंग के दौरान सुरक्षा के लिए न्यूनतम पांच पुलिसकर्मियों की व्यवस्था तथा जीएमवीएन और केएमवीएन गेस्ट हाउसों में विशेष छूट भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का अपना ओटीटी प्लेटफॉर्म “वीडियोज़ अलार्म” है, जिसके माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी संस्कृति की खुशबू 18 से अधिक देशों तक पहुंच रही है। सरकार 3Ts—Talent, Technology और Training—के ईकोसिस्टम पर भी कार्य कर रही है ताकि युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म शूटिंग से केवल सिनेमा जगत को ही नहीं, बल्कि स्थानीय होटल व्यवसायियों, टैक्सी चालकों, गाइडों, लाइन प्रोड्यूसरों और स्थानीय कलाकारों को भी रोजगार मिलता है। उन्होंने फिल्मकारों को उत्तराखंड में फिल्म और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए आमंत्रित करते हुए सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग, सुरक्षा और सुविधा का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में राज्य में फिल्म सिटी, फिल्म संस्थान, शूटिंग स्टूडियो, पोस्ट-प्रोडक्शन हाउस और सिनेमा हॉल विकसित किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फिल्म फेस्टिवल युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा और उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के “विकल्प रहित संकल्प” को मजबूती प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल राज्य की संस्कृति को समृद्ध करते हैं, बल्कि पहाड़ी पहचान और सामूहिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करते हैं।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, प्रसिद्ध अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी, सचिव संस्कृति युगल किशोर पंत, कार्यक्रम के आयोजक नरेन्द्र रौथाण, संस्कृति विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर है यूसीसी: धामी

नैनीताल में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य सरकार ने प्रदेश की जनता से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया था, जिसे सरकार ने अपने संकल्प के अनुरूप पूरा किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार की जनता के प्रति प्रतिबद्धता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड गंगा, यमुना, आदि कैलाश, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसी पवित्र धार्मिक स्थलों की भूमि है, और इसी पावन भूमि से समानता, न्याय और सामाजिक समरसता का संदेश पूरे देश को दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित भावना के अनुरूप समान नागरिक संहिता को लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि 27 जनवरी को राज्य में यूसीसी लागू होने के एक वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जिसे राज्यभर में “यूसीसी दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम, जनसंवाद एवं अन्य आयोजन किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यूसीसी महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और सभी नागरिकों की सुरक्षा की दृष्टि से एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम साबित हुआ है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य की जनता ने सक्रिय सहयोग दिया है तथा विवाह, तलाक, वसीयत एवं अन्य प्रावधानों के अंतर्गत बड़ी संख्या में पंजीकरण कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी दिवस मनाने का उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक लोगों को इसके प्रावधानों, लाभों और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी मिले, ताकि समाज में समान अधिकार और न्याय की भावना और अधिक सशक्त हो।

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वन्य मानव संघर्ष और जंगली जानवरों के हमलों से संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस वर्ष कई क्षेत्रों में वन्य जीवों के कारण ग्रामीण जनता को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में कई बच्चों, युवाओं और ग्रामीणों ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए न केवल अपनी रक्षा की, बल्कि अन्य लोगों की जान भी बचाई।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठा रही है। वन्य जीव प्रबंधन, सुरक्षा उपायों, त्वरित राहत, मुआवजा व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि भविष्य में आम नागरिकों को इस प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े।

नैनीताल में यातायात जाम की समस्या के समाधान से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मानसखंड क्षेत्र के अंतर्गत कैंचीधाम सहित कई प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल आते हैं, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का भारी आवागमन रहता है। इसी कारण यहां यातायात दबाव बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए बाईपास, वैकल्पिक मार्ग, सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग जैसी कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों—दोनों को जाम से राहत मिले और आवागमन सुरक्षित एवं सुगम हो।

आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियों से संबंधित प्रश्न पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन—तीनों दृष्टियों से राज्य की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए हर वर्ष की भांति सभी हितधारकों के साथ विस्तृत बैठकें की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष के अनुभवों, सुझावों और फीडबैक के आधार पर इस वर्ष की तैयारियां और भी अधिक प्रभावी एवं बेहतर की जाएंगी। सड़क, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन सहित सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो |

होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद से जुड़ा घोटाला, डीआईजी निलंबन के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद से जुड़े घोटाले में संलिप्त पाए जाने पर निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रकरण वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान होमगार्ड्स के लिए वर्दी सामग्री की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। महानिदेशक, होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा, देहरादून की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।

महादिनदेशक की संतुति पर सीएम धामी ने डिप्टी कमांडेंट को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता बनी तकनीकी उत्कृटता का मॉडल

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की सेवाएं, अंग्रेजी के अलावा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं। साथ ही आवेदक एआई की सहायता से भी यूसीसी की प्रक्रिया को समझने के साथ ही अपना पंजीकरण करवा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि, यूसीसी के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा जाए, साथ ही वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली रखा जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति स्वयं ही अपना पंजीकरण करवा सके। इसी क्रम में आईटीडीए ने यूसीसी की वेबसाइट को आठवीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं — असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी के साथ अंग्रेजी में तैयार किया है। इस तरह आवेदक अपनी भाषा के अनुसार ना सिर्फ यूसीसी के नियम, प्रक्रिया और पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ले सकता है, बल्कि अपनी भाषा में ही आवेदन भी कर सकता है। इस काम में एआई की भी मदद ली जा सकती है।

*हमारी सरकार पहले ही दिन से सरलीकरण से समाधान तक के मूलमंत्र लेकर चल रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनसामान्य को पंजीकरण में किसी तरह की मुश्किल न आए। यूसीसी तकनीकी उत्कृटता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यही कारण है कि बीते एक साल में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत नहीं आई है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गीता भवन में कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का किया विमोचन

ऋषिकेश, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज दो दिनी उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे हुए हैं। उन्होंने आज स्वर्गाश्रम के गीताभवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध कल्याण पत्रिका के शताब्दी महोत्सव में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन भी किया।

गीताभवन में गीताप्रेस गोरखपुर की प्रसिद्ध कल्याण पत्रिका के शताब्दी महोत्सव में पहुंचे। हेलीपैड पर उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद शाह गीताभवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन किया। अब तक कल्याण पत्रिका की 17 करोड़ पचास लाख प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोग्य अंक का भी विमोचन किया गया। आरोग्य अंक की दो लाख 22 हजार प्रतियां छप चुकी हो चुकी हैं। गीता भवन में करीब दो घंटे रहने के बाद गृह मंत्री हरिद्वार में प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए थे। गृह मंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। रूट भी डायवर्ट किया गया है।

गीता भवन में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी भाग लिया। सीएम धामी ने कहा कि गीता प्रेस पिछले सौ वर्षों से हमारी सनातन संस्कृति, धर्मग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में अतुलनीय योगदान देती आ रही है। कहा कि प्राचीन भारत में जब विदेशी शक्तियां वैचारिक भ्रम उत्पन्न कर रही थी, समाज को दिग्भ्रमित करने का काम कर रही थी, तब गीता प्रेस परिवार ने श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस, उपनिषदों, पुराणों आदि का हमारे महान सनातनी ग्रंथों का जो सूक्ष्म मूल्य में शुद्ध और प्रमाणिक प्रकाशन कर भारतीय जनमानस को जागृत करने का ऐतिहासिक काम है।

स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी States’ Startup Ecosystem Ranking (5वां संस्करण) में उत्तराखण्ड को मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने में ‘लीडर’ के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार के उद्योग विभाग को Certificate of Appreciation प्रदान किया गया।
इस सम्मान से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड में स्टार्टअप नीति के जरिए नवाचार, उद्यमिता, निवेश प्रोत्साहन और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में कामयाब रहा है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। उत्तराखंड की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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*यह सम्मान उत्तराखण्ड के लिए गर्व का विषय है। हमारी सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतियां, सरल प्रक्रियाएं और मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया है। राज्य के युवाओं में नवाचार की अद्भुत क्षमता है और सरकार हर स्तर पर उन्हें सहयोग प्रदान कर रही है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी उद्यमियों, स्टार्टअप्स और अधिकारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

मुख्यमंत्री धामी का शेफ समुदाय से आवाहन, उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम्रपाली विश्वविद्यालय परिसर से आयोजित श्रीअन्न आधारित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े युवा शेफ, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों, श्रीअन्न आधारित खानपान और इससे जुड़े रोजगार व पर्यटन अवसरों पर सार्थक संवाद स्थापित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से युवा शेफों ने उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन के प्रचार–प्रसार, गुणवत्ता मानकों, सरकारी प्रयासों और इस क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को लेकर अनेक प्रश्न किए। शेफ शक्ति प्रसाद के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सभी होटलों के मेन्यू में उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री आवास तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में मेहमानों को उत्तराखंड का पारंपरिक भोजन प्राथमिकता से परोसा जाता है, जिससे स्थानीय व्यंजनों को सम्मान और पहचान मिल सके।

शेफ संजीव जुयाल द्वारा उत्तराखंड के सभी शेफों को एक साझा मंच पर लाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिशा में पर्यटन विभाग को एक समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि राज्य के शेफ समुदाय को एक अंब्रेला प्लेटफॉर्म के तहत जोड़ा जा सके और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकें।

वहीं, शेफ सुनील उपाध्याय द्वारा पारंपरिक उत्तराखंडी भोजन की शुद्धता, प्रमाणिकता और मानक तय करने को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से कार्य कर रही है। पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता बनाए रखने, उनकी पहचान संरक्षित करने और मानकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि उत्तराखंड के स्वाद की मौलिकता बनी रहे।

उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विभाग और कौशल विकास विभाग मिलकर इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वरोजगार एवं उद्यमिता की ओर अग्रसर हों।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह संवाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी शेफ साथियों, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए आम्रपाली विश्वविद्यालय और उसकी पूरी टीम को इस विचारशील और सार्थक “शेफ संवाद” कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड संस्कारों, संस्कृति और विविध व्यंजनों की भूमि है। यहां के व्यंजन पहाड़ों की जीवनशैली, परंपराओं और आत्मा की कहानी कहते हैं। आज का पर्यटक केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और खानपान का अनुभव भी करना चाहता है। ऐसे में शेफों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे स्थानीय स्वाद के माध्यम से राज्य की पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाते हैं।

मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी कहा कि आज का शेफ केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संस्कृति का संवाहक, पर्यटन का ब्रांड एम्बेसडर और रोजगार सृजन का माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में स्थानीय व्यंजनों, आतिथ्य परंपरा और शेफ समुदाय का योगदान अतुलनीय है।

श्रीअन्न पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल भोजन या फसल नहीं, बल्कि उत्तराखंड के समग्र विकास का सशक्त माध्यम बन रहा है। श्रीअन्न के माध्यम से गांव, किसान और समाज का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। मंडुवा, झंगोरा, कोदा और रामदाना जैसी फसलें कम पानी में उगने वाली, पोषक तत्वों से भरपूर और किसानों की आय बढ़ाने वाली हैं, जो उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज श्रीअन्न के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है। भारत वैश्विक स्तर पर मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक है और कुल वैश्विक उत्पादन में लगभग 38.4 प्रतिशत योगदान देता है। बदलती वैश्विक खाद्य प्राथमिकताओं के बीच फूड प्रोसेसिंग, हेल्थ फूड, होटल, कैफे, होम-स्टे और फूड स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।

राज्य सरकार की सोच को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में लगभग 44 प्रतिशत युवा देश के विभिन्न हिस्सों से उत्तराखंड वापस लौटे हैं, जो राज्य में बढ़ते अवसरों का प्रमाण है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने शेफ समुदाय से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि सभी मिलकर उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को “लोकल से ग्लोबल” बनाने की दिशा में कार्य करें। उनकी रचनात्मकता और प्रस्तुति उत्तराखंड के स्वाद को दुनिया की थाली तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “शेफ संवाद” से निकले विचार उत्तराखंड को पर्यटन, रोजगार और संस्कृति के क्षेत्र में एक नए विजन के साथ आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे और उत्तराखंड को सशक्त, आत्मनिर्भर व गौरवशाली राज्य बनाने का संकल्प अवश्य पूरा होगा।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, आम्रपाली विश्वविद्यालय से संजय मिश्रा सहित देश भर से आए अनेक प्रतिष्ठित शेफ उपस्थित रहे।

सीएम के निर्देश पर तत्काल शासनादेश हुआ जारी, अंकिता के नाम से अब राजकीय नर्सिंग कॉलेज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ (श्रीकोट) पौड़ी का नाम परिवर्तित करते हुए ‘स्व. अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ (श्रीकोट) पौड़ी‘ किया गया है। इस संबंध में चिकित्सा सवास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के द्वारा गुरुवार को कार्यालय ज्ञाप जारी कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गत दिवस स्व. अंकिता के माता-पिता से भेंट कर दोहराया था कि था सरकार पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने स्व. अंकिता भंडारी के माता-पिता के द्वारा प्रस्तुत मांगों पर विधि-सम्मत, निष्पक्ष एवं त्वरित कार्यवाही का भरोसा दिलाते हुए कहा कि उन्हें न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सीएम के मार्गदर्शन में बड़ा कदम: देहरादून जिला प्रशासन ने डिस्ट्रिक्ट प्लान से 54 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए मॉडर्न प्ले स्कूल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में देहरादून जिला प्रशासन ने जिला योजना वर्ष 2024-25 के अंतर्गत जनपद में 54 ग्रामीण आंगनवाड़ी केन्द्रों को प्ले स्कूल की तर्ज पर मॉडर्न बनाया गया है। कार्यदायी संस्था लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से इन सभी आंगनबाड़ी केन्द्रो को ट्रांसफॉर्म व मॉडर्नाइज प्ले स्कूल का रूप दिया है।

जिलाधिकारी सविन बंसल एवं मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह के प्रयासों से राजधानी देहरादून में एकीकृत बाल विकास सेवा के अंतर्गत विकासखंड डोईवाला, रायपुर, सहसपुर, कालसी, विकास नगर और चकराता के 54 आंगनबाड़ी केन्द्रो को मॉडर्न प्ले स्कूल के तौर पर विकसित किया गया। इन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बनाया गया है, ताकि छोटे बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण मिल सके।

विकासखंड रायपुर में 2, डोईवाला से 8, सहसपुर से 4 कालसी से 8 विकास नगर से 8 और चकराता में 24 आंगनबाड़ी केन्द्रो को मॉडर्न प्ले स्कूल की तस्वीर में बदला गया। वही जिला प्रशासन ने आगे वर्ष 2025-26 के लिए 150 प्लस आंगनबाड़ी केन्द्रो को ट्रांसफार्मर मॉर्डनाइजेशन करने का लक्ष्य रखा है, जिसका कार्य बहुत जल्द शुरू होगा।

लघु सिंचाई द्वारा इन सभी आंगनबाड़ी केंद्र के मरम्मत के कार्य के साथ अंदर और बाहर की दीवारों को सुंदर चित्रों के माध्यम से रंगाई पुताई की गई है बच्चों को बेहतर लर्निंग सुविधा प्रदान करने के लिए सभी केंद्रों में स्मार्ट टीवी भी मौजूद है। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में छोटे बच्चों को अट्रैक्टिव लर्निंग स्किल को विकसित करने के लिए तमाम खिलौने, कलरफुल कारपेट व प्लास्टिक चेयर, राउंड टेबल और खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। वही मॉडर्न आंगनबाड़ी केदो में वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, शौचालय सुविधा, बिजली व्यवस्था बच्चों को प्रदान की गई है। साथ ही भोजन माता द्वारा नियमित पोषण आहार भी बच्चों को समय-समय पर दिया जा रहा है।

इन केंद्र को प्ले स्कूल की तर्ज पर स्मार्ट और सुविधायुक्त बनाया गया है। बच्चों के लिए यहां बेहतर शिक्षा, मनोरंजन, स्वच्छता और पोषण संबंधी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

जिला प्रशासन की इस पहल से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है। बच्चों के माता-पिता भी प्रशासन के इस कार्य की सराहना कर रहे हैं। साथ ही जिला प्रशासन की इस सोच को बच्चों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक कदम बता रहे हैं।

अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विनय कुमार सिंह ने बताया जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा जिला परियोजना के अंतर्गत 54 आंगनबाड़ी केन्द्रो का सुधार का कार्य सौंपा गया था। बताया कि चकराता ब्लॉक की आंगनवाडी केन्द्र कोटा-तपलाड, धारौपुडिया, मंझगॉव, खन्नाड, रडू, खबऊ, चान्जोई, कुनवा, खारसी और नाईली आंगनबाड़ी के ट्रांसफार्मेशन का कार्य चल रहा है जो कि जल्द अब पूरा होने वाला है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि इन सभी तमाम आंगनबाड़ी केन्द्रो में जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में केवल रिपेयरिंग कार्य तक सीमित नहीं रहा। इन सभी केन्द्रो पर स्मार्ट कंटेंट भी प्रोवाइड किया गया है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि वर्ष 2024- 25 की जिला योजना के अंतर्गत 54 आंगनबाड़ी केन्द्रो को ट्रांसफॉर्म और मॉडर्नाइज किया गया। जहां इन सभी आंगनबाड़ी केन्द्रो की टूट फूट, इलेक्ट्रिक कनेक्शन और इन सभी आंगनबाड़ी केदो में स्मार्ट टीवी के साथ उनके लिए स्मार्ट लर्निंग कंटेंट भी उपलब्ध कराया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025- 26 की जिला योजना के अंतर्गत 150 प्लस आंगनबाड़ी केन्द्रो का भी ट्रांसपोर्टेशन और मॉर्डनाइजेशन कार्य किया जाएगा।

आपदा एवं महामारी प्रबंधन की दिशा में राज्य के प्रयासों को नई मजबूती प्रदान करेगा हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (HEOC) की स्थापना को मंज़ूरी देने के बाद राज्य में स्वास्थ्य आपात प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निरंतर मार्गदर्शन में HEOC की स्थापना का कार्य देहरादून स्थित महानिदेशालय चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिसर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार की एक उच्च स्तरीय टीम ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में बन रहे निर्माणाधीन हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर HEOC का निरीक्षण किया। टीम ने महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. सुनीता टमटा से भेंट की और निर्माण कार्य की गुणवत्ता, संरचना और डिज़ाइन पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद टीम ने नोडल अधिकारी डॉ. पंकज सिंह के साथ निर्माण स्थल का दौरा किया और केंद्र की तैयारियों का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने कार्य प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी एवं व्यवस्थित कार्यप्रणाली की सराहना की। इस निरीक्षण प्रक्रिया ने न केवल परियोजना की विश्वसनीयता को मजबूत किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर HEOC को एक मॉडल संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत सरकार की टीम में डॉ. सैयद जुल्फेकार अहमद, क्षेत्रीय निदेशक, आरओएचएफडब्ल्यू, लखनऊ, डॉ. निश्चय केशरी, चिकित्सा अधिकारी, आरओएचएफडब्ल्यू, लखनऊ, आशिष, परामर्शदाता, हेमंत नेगी मौजूद रहे तथा स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड की तरफ से HEOC नोडल अधिकारी डॉ पंकज सिंह तथा डॉक्टर सुजाता सिंह उपस्थित रहे।

*भारत सरकार की टीम का निरीक्षण, गुणवत्ता पर संतुष्टि*
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर ( HEOC ) के निर्माण कार्य का लगभग आधा हिस्सा पूरा हो चुका है और शेष कार्य भी निर्धारित गति से प्रगति पर है। उम्मीद है कि यह केंद्र जनवरी 2026 के अंत तक पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसे औपचारिक रूप से केंद्र सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग, उत्तराखंड को हस्तांतरित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस केंद्र के संचालन को लेकर पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसके तहत प्रशिक्षित और अनुभवी अधिकारियों को आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य आपात प्रतिक्रिया से संबंधित विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि केंद्र के शुरू होते ही यह अत्याधुनिक क्षमता के साथ प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत उत्तराखंड राज्य को स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, केंद्र सरकार ने राज्य में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (HEOC) की स्थापना को मंज़ूरी प्रदान की थी। इस केंद्र के निर्माण का आधा कार्य पूरा हो चुका है। इस केंद्र के जनवरी 2026 के अंत तक पूर्ण होने की संभावना है तत्पश्चात यह केंद्र सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड राज्य को हस्तांतरित कर दिया जाएगा जिसका संचालन स्वास्थ्य विभाग के प्रशिक्षित एवं अनुभवी अधिकारियों द्वारा किया जाएगा । यह केंद्र भविष्य में उत्तराखंड की स्वास्थ्य सुरक्षा का मुख्य आधार बनने जा रहा है और आपदा एवं महामारी प्रबंधन की दिशा में राज्य के प्रयासों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि HEOC की स्थापना से उत्तराखंड स्वास्थ्य आपात प्रबंधन के एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। यह केंद्र न केवल आपदाओं के समय तेजी से प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगा, बल्कि सामान्य परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य संबंधी निगरानी, डेटा विश्लेषण और निर्णय प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगा। इससे जिलों के बीच समन्वय बेहतर होगा और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में एकरूपता व गति आएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता सूची में स्वास्थ्य क्षेत्र लगातार शीर्ष पर रहा है और HEOC परियोजना इस प्रतिबद्धता का एक जीवंत उदाहरण है। राज्य सरकार का विश्वास है कि केंद्र के पूर्ण रूप से कार्यरत हो जाने पर उत्तराखंड न केवल अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान भी स्थापित करेगा। यह केंद्र उत्तराखंड की स्वास्थ्य सुरक्षा को नई ऊर्जा, नई मजबूती और नई दिशा प्रदान करेगा, यही राज्य सरकार का दृढ़ संकल्प है।

*आपदाओं और महामारियों पर त्वरित प्रतिक्रिया का केंद्र बनेगा HEOC*
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि HEOC की स्थापना से राज्य को स्वास्थ्य आपात स्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में बड़ी सहायता मिलेगी। केंद्र स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों को हर समय मजबूत रखेगा और संभावित खतरों की समय पर पहचान कर उचित कार्रवाई को संभव बनाएगा। यह केंद्र कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारियों के दौरान हुए अनुभवों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक निगरानी तंत्र से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे किसी भी महामारी का प्रारंभिक चरण में पता लगाकर नियंत्रण किया जा सके। धराली जैसी आपदा स्थितियों में राज्य की प्रतिक्रिया क्षमता को भी यह केंद्र कई गुना बढ़ा देगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि HEOC न केवल एक भवन या संरचना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होगा।

*राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत बनाने का प्रयास*
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि देशभर में HEOC केंद्रों की स्थापना केंद्र सरकार की उस व्यापक दृष्टि का हिस्सा है, जिसमें भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए देश को तैयार करना शामिल है। यह केंद्र सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने और आपदा एवं महामारी प्रबंधन में राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देगा। उत्तराखंड के लिए यह परियोजना विशेष महत्व रखती है क्योंकि पहाड़ी भूगोल, प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता और भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए यहां स्वास्थ्य आपात प्रबंधन के लिए एक मजबूत तंत्र की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। HEOC की स्थापना इस दिशा में एक ठोस और प्रभावी कदम है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई पहचान दिलाएगा।