आधी रात को बजा घंटा और फिर एक देश एक कर प्रणाली हुई लागू


एक देश-एक कर के लक्ष्य वाला जीएसटी बीती रात संसद के केन्द्रीय कक्ष में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घंटा बजाये जाने के साथ लागू हो गया। प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण कर सुधार की तुलना आजादी से करते हुए कहा कि यह देश के आर्थिक एकीकरण में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संसद के केंद्रीय कक्ष में हुई विशेष बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे ऐतिहासिक क्षण करार दिया और कहा कि यह कराधान के क्षेत्र में एक नया युग है जो कि केंद्र एवं राज्यों के बीच बनी व्यापक सहमति का परिणाम है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दायरे के लोगों द्वारा किया गया प्रयास है जिन्होंने दलगत राजनीति को परे रखते हुए राष्ट्र को आगे रखा। उन्होंने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र की परिपक्वता और बुद्धिमत्ता का सम्मान है।

जीएसटी सामूहिक प्रयासों की देनः मोदी
इससे पहले समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी सभी राजनीति दलों के सामूहिक प्रयासों की देन है। उन्होंने कहा कि यह सभी राज्यों एवं केंद्र के वर्षों तक चले विचार विमर्श का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सहकारी संघवाद का एक बेहतर उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार सरदार वल्लभ भाई पटेल ने विभिन्न रियासतों को मिलाकर भारत का एकीकरण संभव कराया था, उसी प्रकार जीएसटी के कारण देश का आर्थिक एकीकरण होगा। उन्होंने कहा कि इसमें शुरुआत में थोड़ी दिक्कत आ सकती है लेकिन इसके कारण सभी वर्गों के लोगों को लाभ मिलेगा।
मोदी ने देश के व्यापारी वर्ग से अपील की कि जीएसटी लागू होने से उन्हें जो लाभ होता है उसका फायदा वे गरीब तबके के लोगों तक पहुंचाएं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी लागू होने की लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसमें शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जीएसटी लागू होने से दीर्घकाल में महंगाई पर लगाम लगेगी और कर वंचना कम होगी।संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आजादी सहित यह चौथा ऐसा मौका है जब मध्य रात्रि के समय कोई कार्यक्रम हुआ। 14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि के अलावा, 1972 में स्वतंत्रता की रजत जयंती और 1997 में स्वर्ण जयंती के अवसर पर ऐसे कार्यक्रम हुए थे।

कांग्रेस सहित कुछ दलों ने किया बहिष्कार
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने भले ही आज के कार्यक्रम का बहिष्कार किया हो लेकिन आज केंद्रीय कक्ष में सपा, जदयू, जद-एस, राकांपा, टीआरएस, अन्नाद्रमुक, बीजद के सांसदों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, रतन टाटा सहित प्रमुख उद्योगपति एवं अन्य गणमान्य हस्तियां मौजूद थीं। इस समारोह में मंच पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री जेटली एवं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा मौजूद थे।
जीएसटी के लागू होने से केंद्र और राज्यों के स्तर पर लगने वाले एक दर्जन से अधिक कर समाप्त हो जाएंगे और उनके स्थान में केवल जीएसटी लगेगा। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस कार्यक्रम से दूर रही। कांग्रेस ने जीएसटी की शुरुआत के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को तमाशा करार दिया। कांग्रेस के इसी बहिष्कार के चलते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस कार्यक्रम से दूर रहे। तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके और वामपंथी दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया।

17 साल पुराना इंतजार हुआ खत्म
जीएसटी से देश की 2,000 अरब की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोग सभी एक साथ जुड़ जाएंगे और पूरा देश एक साझा बाजार बन जाएगा। इस समूची प्रक्रिया को पूरा होने में 17 सालों का लंबा समय लगा है। जीएसटी से वर्तमान बहुस्तरीय कर व्यवस्था समाप्त होगी और कर के ऊपर कर लगने से माल की लागत पर बढ़ने वाला बोझ भी समाप्त होगा।

स्मार्ट सिटी बनेगा देहरादून, केन्द्र ने दी मंजूरी


नई दिल्ली।
स्मार्ट सिटी की सूची में देवभूमि देहरादून का नाम भी शामिल हो गया है। लंबे समय से चल रही कवायद को अंततः मंजिल मिल ही गयी है। दून के स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से प्रदेश की राजधानी को विकास की नई दिशा मिलेगी। जिससे प्रदेश में पर्यटन और रोजगार के अवसर श्रृजित होंगे। बता दें कि दून को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से चल रही है। स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से प्रदेश को लोगों में खुशी की लहर हैं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकास के लिए जिन 30 शहरों की नई सूची जारी की गई है उनमें केरल का तिरूवनंपुरम, छत्तीसगढ़ का नया रायपुर और गुजरात का राजकोट शहर शामिल है। इस नई घोषणा के साथ केंद्र की स्मार्ट सिटी योजना के तहत चयनित शहरों की संख्या 90 हो गई है। नई सूची के ऐलान से जुड़े के कार्यक्रम में शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए सूची में 40 शहरों के लिए स्थान खाली थे, लेकिन व्यवहारिकता और कार्य करने योग्य योजना सुनिश्चित करने के लिए 30 शहरों का चयन किया गया। स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत 57,393 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केंद्र हर शहर को पांच साल की अवधि में 500 करोड़ रुपए प्रदान करता है ताकि विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जा सके।
 
आखिर जून माह में क्यों जुटते है कामाख्या मंदिर में देश विदेश के साधक!
नए शहरों की सूची

आंध्र प्रदेश का अमरावती
बिहार के पटना और मुजफ्फरपुर
यूपी से इलाहाबाद, अलीगढ़ और झांसी
तेलंगाना का करीमनगर
केरल के त्रिवेंद्रम,
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और नया रायपुर
गुजरात के दाहोद, गांधीनगर और राजकोट
पुडुचेरी का पुडुचेरी
जम्मू कश्मीर के जम्मू और श्रीनगर
मध्य प्रदेश के सतना और सागर
हरियाणा के करनाल
कर्नाटक के बेंगलुरू
हिमाचल प्रदेश के शिमला
उत्तराखंड के देहरादून
तमिलनाडु के तिरुनवेली
तिरुचिरापल्ली, त्रिपुरा और तूतुकुडी
महाराष्ट्र के पिंरी चिंचवड
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट
मिजोरम के आइजोल
सिक्किम के गंगटोक शहर

‘सरकारी स्कूलों का गिरता स्तर’ बिहार ने 65 प्रतिशत ‘फेल का बनाया रिकॉर्ड’

लगभग समूचे देश के सरकारी स्कूलों में लगातार गिरते जा रहे शिक्षा के स्तर और खराब परिणामों के कारण इनमें बच्चों के दाखिलों का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है और अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए सरकारी स्कूलों से मुंह मोड़ कर महंगी फीस के बावजूद प्राइवेट स्कूलों को ही प्राथमिकता देने लगे हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर किस कदर गिर चुका है यह कुछ राज्यों के ताजा घोषित नतीजों से स्पष्ट है।
09 मई को घोषित हिमाचल का 10वीं का नतीजा 67.57 प्रतिशत रहा। 20 मई को घोषित हरियाणा का 10वीं का परिणाम 55 प्रतिशत रहा। 22 मई को घोषित पंजाब का 10वीं का परिणाम 57.50 प्रतिशत रहा। 30 मई को घोषित झारखंड का 10वीं का परिणाम 57.91 प्रतिशत रहा जो वहां 10वीं का अब तक का सबसे खराब नतीजा है। झारखंड का 12वीं का नतीजा 52.36 प्रतिशत रहा। 30 मई को ही घोषित बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा की परीक्षा का परिणाम तो उक्त सभी परिणामों की तुलना में घोर निराशाजनक रहा। इस परीक्षा की सभी श्रेणियों में 65 प्रतिशत छात्र-छात्राएं फेल हो गए तथा सिर्फ 35 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को ही सफलता मिल पाई। ये सभी परिणाम देश के 2 दक्षिणी राज्यों केरल के 98.5 प्रतिशत व तमिलनाडु के 94.8 प्रतिशत के पिछले वर्ष के परिणाम के सामने कहीं ठहरते ही नहीं।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 12वीं कक्षा की बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में ‘नकल का महाघोटाला’ हुआ था तथा 67.66 प्रतिशत छात्र पास घोषित किए गए थे तब सिरे से नालायक छात्रों को परीक्षा में टॉपर घोषित कर दिया गया था। इस घोटाले का पर्दाफाश उस समय हुआ था जब टॉपर घोषित छात्रा रूबी राय टी.वी. इंटरव्यूज में साधारण से प्रश्रों के भी सही उत्तर न दे पाई।
जिसके चलते कोहराम मचने के बाद शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ललकेश्वर प्रसाद सिंह सहित अनेक उच्चाधिकारियों के विरुद्ध पुलिस में रपट दर्ज करवाई गई। ललकेश्वर सहित अनेक उच्चाधिकारियों और कुछ छात्रों की गिरफ्तारी भी हुई और टॉपर छात्रों के परिणाम रद्द किए गए। इस समय रूबी राय जमानत पर रिहा है तथा बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड के अनेक अधिकारी जेल में हैं ।
बोर्ड के नए अध्यक्ष आनंद प्रकाश के अनुसार पिछली परीक्षा में पक्षपात तथा अनियमितताओं के बोर्ड अधिकारियों पर लगे गम्भीर आरोपों के चलते इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में कठोरता बरतने तथा उत्तर पुस्तिकाओं की ‘बारकोड’ करने सेे हेराफेरी की गुंजाइश न रहने के कारण ‘मॉडरेशन’ के बावजूद पास प्रतिशत पिछली बार से 32 प्रतिशत कम रहा। बिहार के शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी के अनुसार, ‘‘खराब नतीजा बोर्ड द्वारा अतीत में होती रही अनियमितताओं का नतीजा है परंतु कुछ समय में शिक्षा ढांचे में सुधार के बाद शिक्षा के स्तर व परिणामों में भी सुधार दिखाई देगा।’’
सभी राज्यों में देश के अलग-अलग तीन मुख्य राजनीतिक दलों-कांग्रेस, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की सरकारें हैं जो स्पष्ट प्रमाण है कि बेशक इन तीनों दलों का राजनीतिक एजेंडा अलग-अलग है परंतु शिक्षा के प्रति उदासीनता के मामले में तीनों राज्यों की सरकारें लगभग एक जैसी हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए लम्बी छुट्टी लेकर विदेशों में बैठे अध्यापकों की सेवाएं तत्काल समाप्त करने तथा अध्यापकों द्वारा अपने स्थान पर रखे ‘प्रॉक्सी टीचरों’ को निकाल कर उनके स्थान पर नई भर्ती करने और दोषियों विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।

केंद्र ने कहा- विमान हादसे में हुई थी नेताजी की मौत, परिवार ने कहा- मांगें माफी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत को लेकर तस्वीर अब साफ होती दिख रही है। एक आरटीआई आवेदन का जवाब देते हुए भारत सरकार ने बताया है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में हुई थी। RTI में दिए गए जवाब से नेताजी का परिवार खुश नहीं है। नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने कहा कि यह काफी गैर जिम्मेदाराना है, केंद्र सरकार इस तरह का जवाब कैसे दे सकती है, जबकि मामला अभी भी सुलझा नहीं है।
यह आरटीआई सायक सेन नामक व्यक्ति ने दायर की थी, जिसके जवाब में गृह मंत्रालय ने अपना जवाब भेजा है। RTI के जवाब में साफ तौर पर कहा गया है कि नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को हुई थी। जवाब में कहा गया है कि भारत सरकार की और से नेताजी की मौत से जुड़ी 37 फाइलें जारी की थी, जिसमें पेज नंबर 114-122 पर इसकी जानकारी दी गई है। इस जवाब में शाहनवाज कमेटी, जस्टिस जी.डी. खोसला कमीशन, और जस्टिस मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।

माफी मांगे गृह मंत्रालय
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि गृह मंत्रालय को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए, हम चाहते हैं कि इस मामले में SIT का गठन किया जाए, जो कि जारी की गई फाइलों का अध्ययन कर सके, इसके साथ ही हम चाहते हैं कि ताइवान में मिली अस्थियों का केंद्र सरकार DNA टेस्ट करवाए। मैं पहले बोस परिवार का सदस्य हूं और बाद में बीजेपी का नेता… मेरा पहला लक्ष्य उनकी मौत की गुत्थी को सुलझाना है।

आपको बता दें कि इससे पहले भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रहस्यमय तरीके से गायब होने की गुत्थी नहीं सुलझने से नाराज उनके परिजनों ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेताजी के भाई के पोते एवं बीजेपी नेता चंद्र बोस ने बताया कि इस बाबत परिवार ने फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ इस सप्ताह आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मोदी ने नेताजी से जुड़ी फाइलें की थी सार्वजनिक
पिछले एक साल में मोदी सरकार ने हर महीने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 100 फाइलें जारी की। इसकी शुरुआत पिछले साल 23 जनवरी से हुई थी। अब ये सभी फाइलें सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं। 2015 में नेताजी के परिजनों से मिलने के बाद पीएम मोदी ने यह भी घोषणा की थी कि वह रूस सरकार से भी नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग करेंगे।

अच्छे रैंक की राह ने बनाया नंदिनी को टॉपर

देश के सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा, यूपीएससी के नतीजे आ गए हैं। यूपीएससी की परीक्षा में इस बार कर्नाटक की नंदिनी के आर ने टॉप किया है। उनका इस बार ये चौथा प्रयास था, उन्होंने अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने मां-बाप को दिया हैं। बेंगलूरू में नंदिनी के माता-पिता भी इस खुशी से फूले नहीं समा रहे। जबसे पता चला है कि उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में टॉप किया है तबसे उनके घर में पड़ोसियों और रिश्तेदारों का मजमा लगा हुआ है। उनके पिता सरकारी हाई स्कूल में टीचर हैं और मां हाउसवाइफ हैं। नंदिनी का कहना है कि वे आज जो कुछ भी हैं अपने माता पिता की बदौलत हैं।

खराब रैंक के बावजूद पलता रहा आईएएस बनने का ख्वाब
नंदिनी का पूरा नाम नंदिनी कोलार राजेश है। उन्होंने इस बार देश के सबसे कठिन माने जानेवाली परीक्षा यानि की सिविल सर्विसेज के एग्जाम में टॉप किया है। जब से रिजल्ट आया है तब से उन्हें मिलने वाली बधाइयों का सिलसिला नहीं रुक रहा है। ओबीसी पृष्टभूमि से आनेवाली 26 साल की नंदिनी कर्नाटक की रहने वाली हैं। उन्होने पिछले साल भी परीक्षा पास की थी लेकिन पिछले साल उनकी रैंक 849वीं थी और वे इससे खुश नहीं थीं। वैसे तो उन्होंने दिल्ली से सटे फरीदाबाद में इंडियन रेवेन्यू सर्विस के लिए ट्रेनिंग तो शुरु कर दी थी लेकिन फिर भी उन्होंने आईएएस बनने का ख्वाब नहीं छोड़ा था।
नंदिनी ने 10वीं तक की पढ़ाई कर्नाटक के कोलार में की, इसके बाद उन्होंने मैंगलोर से 12वीं की पढ़ाई की, 12वीं के बाद उन्होंने बेंगलूरू से एमएस रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई के बाद वे दो सालों तक कर्नाटक में पीडब्ल्यूडी इंजीनियर भी रहीं। यूपीएससी परीक्षा में उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट कन्नड़ लिटरेचर था। उनका कहना है कि कन्नड़ साहित्य पढ़ना उनके लिए पढ़ाई से ज्यादा एक हॉबी थी।

1099 छात्रों ने पास की है ये परीक्षा
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा से देश में आईएएस, आईएफएस और आईपीएस अफसर चुने जाते हैं। इस बार 1099 छात्रों ने ये परीक्षा पास की है। जिसमें से 180 छात्र आईएस बनेंगे. 45 छात्र आईएफएस यानि भारतीय विदेश सेवा का हिस्सा होंगे, वहीं 150 छात्र आईपीएस बनाए जाएंगे और इनके अलावा 834 छात्रों को सेंट्रल ग्रुप के ए और बी सर्विस का हिस्सा बनाया जाएगा।

पतंजलि अनुसंधान संस्थान का पीएम ने किया उद्घाटन

हरिद्वार।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पतंजलि अनुसन्धान केन्द्र का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पतंजलि अनुसंधान संस्थान से जड़ी-बूटियों एवं आयुर्वेदिक रिसर्च से सम्पूर्ण देश को फायदा होगा एवं विश्व पटल पर आयुर्वेद के विकास में नई पहचान मिलेगी। पतंजलि योगपीठ के माध्यम से योग के लिए जो आन्दोलन चलाया गया है उसी प्रकार आयुर्वेद के क्षेत्र में भी भारत को विश्व पटल पर लायेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सम्पूर्ण विश्व में योग का उत्सव मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव का संकल्प एवं समर्पण ही उनकी सफलता की जड़ी-बूटी है। कहा कि देश को सुखी एवं स्वस्थ रखने के लिए स्वच्छता अभियान पर विशेष बल देना होगा। सभी देशवासियों को संकल्प लेना होगा कि कोई भी व्यक्ति गंदगी नहीं करेगा। यदि स्वच्छ वातावरण रखेंगे और गंदगी नही होने देंगे तो अनेक बीमारियां स्वतः ही समाप्त हो जायेंगीं।
मोदी ने कहा कि देश की नई पीढ़ी स्वच्छता के प्रति सजग हो रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आचार्य बालकृष्ण के अनुसंधान ग्रन्थ वल्र्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया का भी विमोचन किया। इस पुस्तक में 70 हजार से अधिक जड़ी बूटियों पर अनुसंधान के बारे में जानकारी दी गई है। जिसमें पिछले 10 वर्षों से कार्य चल रहा है तथा 200 वैज्ञानिकों की टीम कार्य कर रही है। पंतजलि योगपीठ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राष्ट्र ऋषि के रूप में सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री देश सेवा को परमात्मा की सेवा के रूप में देखते हुए देश के समग्र विकास के लिए गतिशील हैं। कहा कि स्वामी रामदेव योग के माध्यम से देश को अलग पहचान दिलाई है एवं स्वदेशी अभियान को आगे बढ़ाया है। स्वामी रामदेव ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पांच लाख लोगों को योगाभ्यास कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि 11 लाख लोगों को निःशुल्क योग शिक्षा दी जायेगी। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी प्रधानमंत्री को पुष्प गुच्छ भेंट किया।
मौके पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल डॉ. केके पॉल, हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, आचार्य बालकृष्ण, आचार्य प्रद्युम्न, विधायक स्वामी यतीश्वरानन्द, विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, विधायक आदेश चैहान, विधायक संजय गुप्ता, विधायक देशराज कर्णवाल आदि मौजूद थे।

लंबी दुरी की ट्रेनों में थ्री एसी की बोगियां को बढ़ायेगी सरकार

नई दिल्ली।
वातानुकूलित बोगियों में यात्रा के शौकीन लोगों की मांग को देखते हुए रेलवे लंबी दूरी की ट्रेनों में थ्री एसी की बोगियों को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि एक अप्रैल 2016 से 10 मार्च 2017 तक थ्री एसी कोच में कुल यात्रियों के लिहाज से 17.15 प्रतिशत लोगों ने यात्रा की और इसके माध्‍यम से रेलवे को यात्री भाड़ा के तौर पर प्राप्‍त कुल आय की तुलना में 33.65 प्रतिशत आमदनी हुई।
रेलवे के अनुसार इस अवधि में थ्रीएसी बोगी से यात्रा करनेवाले लोगों की संख्‍या पिछले वर्ष के आंकड़े 16.69 से बढ़कर 17.15 प्रतिशत हो गया है। इस अवधि में पिछले वर्ष 32.60 प्रतिशत की आमदनी टिकटों की बिक्री से हुई थी। इसी अवधि में स्‍लीपर क्‍लाय (शयनयान श्रेणी) से 59.78 प्रतिशत लोगों ने यात्रा की और रेलवे को इन यात्रियों से कुल आमदनी के हिसाब से 44.78 प्रतिशत राजस्‍व प्राप्‍त हुआ। पिछले वर्ष स्‍लीपर कोच से यात्रा करनेवाले लोगों की संख्‍या 60 प्रतिशत थी और आमदनी 45.94 प्रतिशत।
रेलवे के एक वरीय अधिकारी ने बताया कि हाल के दिनों में लंबी दूरी की रेलगाडि़यों में थ्री एसी में यात्रा की चाहत रखनेवाले लोगों की संख्‍या बढ़ी है। शयनयान श्रेणी को कम पसंद किया जा रहा है। रेल अधिकारी ने बताया कि लंबी दूरी की ट्रेनों में धीरे-धीरे थ्री एसी कोचों की संख्‍या बढ़ाने का फैसला लिया गया है। कुछ दिनों पहले रेलवे ने एक नई ट्रेन हमसफर एक्‍सप्रेस की शुरुआत की जिसमें सिर्फ थ्री एसी बोगियां हैं और इसके परिणाम सकारात्‍मक हैं।

तीन तलाक पीढ़िता को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा देने की तैयारी

-योगी सरकार रानी लक्ष्मीबाई योजना सम्मान कोष के तहत आर्थिक सहारा उपलब्ध करायेगी

लखनऊ।
प्रदेश में तीन तलाक पीडि़ताओं के आश्रय की व्यवस्था करने के साथ ही साथ योगी आदित्यनाथ अब उनको आर्थिक मजबूती भी देने की तैयारी में है। तीन तलाक के मुद्दे पर गंभीर राज्य सरकार उत्पीडऩ की शिकार महिलाओं और परित्यक्ताओं को आर्थिक सुरक्षा देने की तैयारी कर रही है। इसके तहत एक वर्ष में दो लाख से कम आय वाली महिलाओं को रानी लक्ष्मीबाई योजना सम्मान कोष के तहत आर्थिक सहारा उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश का परिवार एवं महिला कल्याण मंत्रालय इस आशय का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। रानी लक्ष्मीबाई योजना सम्मान कोष के जरिए एसिड अटैक और उत्पीडऩ की शिकार महिलाओं की मदद की जाती है। इस कोष में एक हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं।
अब इसका दायरा बढ़ाते हुए तीन तलाक से प्रभावित महिलाओं को भी शामिल किए जाने की योजना है। प्रस्ताव में यह भी शामिल किया गया है कि दो लाख से कम आय वाली बेसहारा महिलाओं के पुनर्वास के साथ ही उनके बच्चों की शिक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा। कोष के जरिए ही बच्चों को स्कूल भेजने के साथ ही उनके लिए ड्रेस व किताबों की व्यवस्था भी की जाएगी। इस योजना को आगे चलकर कैबिनेट में रखा जा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रवादी मुस्लिम महिला संघ की अध्यक्ष फरहा फैज के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने डा. रीता बहुगुणा जोशी से मुलाकात की थी और उनसे तीन तलाक की शिकार महिलाओं को आर्थिक सहारा दिए जाने की बात उठाई थी। रीता जोशी ने आश्वस्त किया था कि इस बारे में प्रस्ताव बनाया जाएगा। अपने विभागीय प्रजेंटेशन में भी उन्होंने परित्यक्ता, बेसहारा और उत्पीडऩ की शिकार महिलाओं तथा एसिड अटैक की शिकार महिलाओं के लिए योजना का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि तीन तलाक के मुद्दे पर रायशुमारी के बाद मसौदा तैयार किया जाएगा।

मोदी राज में वीवीआईपी कल्चर पर खत्म

नई दिल्ली।
केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में वीआईपी कल्चर पर करारा वार करते हुए केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों के लाल बत्ती लगाने पर रोक लगा दी। वैसे तो यह फैसला एक मई से लागू होना था। लेकिन पीएम मोदी के मंत्रियों ने एक कदम आगे बढ़कर इस फैसले को लागू कर दिया है। सबसे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले को अपने पर लागू किया। उन्होंने बिना देरी करते हुए कैबिनेट के फैसले के ऐलान के तुरंत बाद अपनी गाड़ी से लाल बत्ती उतार दी। इस मामले पर उन्होंने कहा कि केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए बत्ती का चलन रहेगा अन्यथा नहीं, यहां तक मैंने भी अपनी कार से लाल बत्ती को हटा दिया है।
इसके बाद मंत्रियों की लाइन सी लग गई और फिर केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, महेश शर्मा ने अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी। तो वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने भी अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी है। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि देश में लालबत्ती लगाने के वीवीआईपी कल्चर को खत्म कर दिया गया है।
अब देश में कोई भी केंद्रीय मंत्री लालबत्ती का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। हालांकि ये नियम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर ये नियम लागू नहीं होता है। हालांकि कुछ आपात सेवाओं के लिए नीली बत्ती का इस्तेमाल जारी रहेगा। इसमें पुलिस, एंबुलेस और फायर ब्रिगेड जैसी सेवाओं को शामिल किया गया है।

हर दो मिनट समर्पित है 20600 शहीदों को

ऋषिकेश।
देश की सीमाओं पर जान की बाजी लगाने वाले अमर शहीदों की याद में मेजर जनरल (से.नि) सोमनाथ झा 1200 किमी का सफर साइकिल से तय कर रहे हैं। रविवार को सोमनाथ झा ने एम्स से रायवाला होते हुए रुड़की की ओर प्रस्थान किया। बताया कि अगला पड़ाव दिल्ली है। 19 अप्रैल को उनकी साइकिल यात्रा अमर जवान ज्योति में संपन्न होगी। उन्होंने दो दिनों तक पहाड़ों पर साइकिल से यात्रा की।
अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी साइकिल यात्रा देश के 20600 वीर सपूतों को समर्पित है। जिन्होंने अपने प्राणों को देश के लिए न्योछावर कर दिया। वे प्रत्येक अमर शहीद को साइकिल यात्रा का दो मिनट समर्पित कर रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों से होते हुए यात्रा सात महीने में पूरी हो रही है। बताया कि यात्रा के दौरान लोगों को विशेषकर स्कूल और कॉलेजों में जाकर वीर जवानों की शहादत को बताना उनका मूल उद्देश्य है। मौके पर कर्नल चिराग, लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल कुमार, सूबेदार रविन्द क्षेत्री आदि मौजूद रहे।