उत्तराखंड के नकलरोधी कानून को मॉडल के रूप में लागू करेगी केंद्र सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के नकलरोधी कानून को केंद्र सरकार ने भी मॉडल के रूप में लिया है। सोमवार को लोकसभा में केंद्र सरकार ने इसका बिल पेश कर उत्तराखंड के धामी सरकार के कठोर कानून पर भी अपनी मुहर लगा दी है। इधर, मुख्यमंत्री धामी ने केंद्र सरकार के इस निर्णय पर आभार जताया और कहा कि यह कानून नकल माफियों पर करारी चोट करेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कवच बनेगा।
केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण बिल पेश किया है। यह बिल जल्द देश में नकलरोधी कानून का रूप लेगा। खासकर उत्तराखंड में इस तरह का कानून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने फरवरी 2023 में लागू किया। यह कानून अब तक देश के सबसे कठोर कानून में शुमार है। अब धामी सरकार के इस नकलरोधी कानून को केंद्र ने भी मॉडल के रूप में लेते हुए , जल्द देशभर में लागू करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार का यह निर्णय निश्चित ही उत्तराखंड की धामी सरकार के नकलरोधी कानून पर मुहर लगाता है। खासकर धामी सरकार ने भी कठोर नकलरोधी कानून लाकर नकल माफिया की कमरतोड़ कर दी है। कानून लागू होने के बाद इसके परिणाम भी देखने को मिले हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में नकल माफियाओं के पूरे तंत्र को ध्वस्त कर धामी सरकार ने बड़ा संदेश दिया है। कानून का परिणाम यह है कि अब राज्य में प्रतियोगी परीक्षाएं न केवल समय पर हो रही हैं। बल्कि रिकॉर्ड समय में परिणाम जारी होने के बाद युवाओं को नौकरी भी मिल रही हैं। उधर, केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में सख्त नकलरोधी कानून का बिल पेश करने पर मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में लागू कठोर नकलरोधी कानून जैसा बिल पेश कर हमारा मनोबल बढ़ाया है।

ये है उत्तराखंड का कठोर नकलरोधी कानून
उत्तराखंड के कठोर नकलरोधी कानून में संगठित होकर नकल कराने और अनुचित साधनों में लिप्त पाए जाने वाले मामलों में आजीवन कैद की सजा तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही आरोपियों की संपत्ति भी जब्त करने की व्यवस्था कानून में है। इसके अलावा नकल करते पकड़े जाने पर 10 वर्ष की सजा के साथ ही 10 लाख रुपये जुर्माना है। अभ्यर्थी के नकल करते पाए जाने पर आरोप पत्र दाखिल होने की तिथि से दो से पांच वर्ष के लिए निलंबित किया जाएगा। दोष साबित होने पर उसे 10 वर्ष के लिए सभी परीक्षा देने से निलंबित कर दिया जाएगा। दोबारा नकल करते पाए जाने पर आरोप पत्र दाखिल करने से पांच से 10 साल के लिए निलंबित किया जाएगा। दोष साबित होने पर उसे आजीवन सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

यूसीसी ड्राफ्ट को मिली मंजूरी, अब विधानसभा में होगा पेश

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून लागू करने के लिए धामी मंत्रिमंडल ने यूसीसी ड्राफ्ट को हरी झंडी दे दी है। 6 फरवरी को प्रदेश सरकार विधानसभा पटल पर यूसीसी बिल पेश करेगी।
रविवार शाम को सीएम आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल बैठक हुई। जिसमें सुप्रीमकोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई समिति की ओर से तैयार यूसीसी ड्राफ्ट का प्रस्तुतिकरण दिया गया। चार खंडों में 740 पेज के यूसीसी रिपोर्ट पर चर्चा के बाद मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से मुहर लगा दी। साथ ही यूसीसी विधेयक तैयार कर विधानसभा के पटल पर रखने को मंजूरी दे दी।
यूसीसी ड्राफ्ट में बहु विवाह रोकने, लिव इन की घोषणा, बेटियों को उत्तराधिकार में बराबरी का अधिकार देने, विवाह का रजिस्ट्रेशन करने, एक पति-एक पत्नी का नियम समान रूप से लागू करने जैसे तमाम प्रावधान हैं। बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, प्रेमचंद अग्रवाल, डॉ.धन सिंह रावत, गणेश जोशी, रेखा आर्या के अलावा मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन भी मौजूद थे।

कई दशक बाद धरातल पर उतरेगा यूसीसी
– 1962 में जनसंघ ने हिंदू मैरिज एक्ट और हिंदू उत्तराधिकार विधेयक वापस लेने की बात कही। इसके बाद जनसंघ ने 1967 के उत्तराधिकार और गोद लेने के लिए एक समान कानून की वकालत की। 1971 में भी वादा दोहराया। हालांकि 1977 और 1980 में इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई।
– 1980 में भाजपा का गठन हुआ। भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी बने। पार्टी ने 1984 में पहली बार चुनाव लड़ा, जिसमें केवल दो सीटें मिली।
– 1989 में 9वां लोकसभा चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा ने राम मंदिर, यूनिफॉर्म सिविल कोड को अपने चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल किया। पार्टी की सीटों की संख्या बढ़कर 85 पहुंची।
– 1991 में देश में 10वां मध्यावधि चुनाव हुआ। इस बार भाजपा को और लाभ हुआ। उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 100 के पार हो गई। इन लोकसभा चुनावों में भाजपा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, राम मंदिर, धारा 370 के मुद्दों को जमकर उठाया। ये सभी मुद्दे बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में शामिल थे, मगर संख्या बल के कारण ये पूरे नहीं हो पाए थे।
– इसके बाद 1996 में भाजपा ने 13 दिन के लिए सरकार बनाई। 1998 में पार्टी ने 13 महीने सरकार चलाई। 1999 में बीजेपी ने अपने सहयोगियों के साथ बहुमत से सरकार बनाई। तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।
– वर्ष 2014 में पहली बार भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई और केंद्र में मोदी सरकार आई। मोदी सरकार ने पूरे जोर-शोर से अपने चुनावी वादों पर काम करना शुरू किया। अब केंद्र की सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इसी कड़ी में यूसीसी को लागू कर उत्तराखंड, देश का पहला राज्य बनने की ओर अग्रसर है।
-उत्तराखंड में 2022 में भाजपा ने यूसीसी के मुद्दे को सर्वाेपरि रखते हुए वादा किया था कि सरकार बनते ही इस पर काम किया जाएगा। धामी सरकार ने यूसीसी के लिए कमेटी का गठन किया। जिसने डेढ़ साल में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार किया। अब विधानसभा का विशेष सत्र पांच फरवरी से शुरू होने जा रहा है, जिसमें पास होने के बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा।

ये हैं ड्राफ्ट के संभावित प्रावधान
1- लड़कियों की विवाह की आयु बढ़ाई जाएगी, जिससे वे विवाह से पहले ग्रेजुएट हो सकें।
2- विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बगैर रजिस्ट्रेशन किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। ग्राम स्तर पर भी शादी के रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी।
3- पति-पत्नी दोनों को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे। तलाक का जो ग्राउंड पति के लिए लागू होगा, वही पत्नी के लिए भी लागू होगा। फिलहाल पर्सनल लॉ के तहत पति और पत्नी के पास तलाक के अलग-अलग ग्राउंड हैं।
4- पॉलीगैमी या बहुविवाह पर रोक लगेगी।
5- उत्तराधिकार में लड़कियों को लड़कों के बराबर का हिस्सा मिलेगा। अभी तक पर्सनल लॉ के मुताबिक लड़के का शेयर लड़की से अधिक है।
6- नौकरीशुदा बेटे की मृत्यु पर पत्नी को मिलने वाले मुआवजे में वृद्ध माता-पिता के भरण पोषण की भी जिम्मेदारी होगी। अगर पत्नी पुर्नविवाह करती है तो पति की मौत पर मिलने वाले कंपेंशेसन में माता-पिता का भी हिस्सा होगा।
7- मेंटेनेंस- अगर पत्नी की मृत्यु हो जाती है और उसके माता पिता का कोई सहारा न हो, तो उनके भरण पोषण का दायित्व पति पर होगा।
8- एडॉप्शन- सभी को मिलेगा गोद लेने का अधिकार। मुस्लिम महिलाओं को भी मिलेगा गोद लेने का अधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया आसान की जाएगी।
9- हलाला और इद्दत पर रोक होगी।
10- लिव इन रिलेशनशिप का डिक्लेरेशन आवश्यक होगा। ये एक सेल्फ डिक्लेरेशन की तरह होगा जिसका एक वैधानिक फॉर्मैट लग सकती है।
11- गार्जियनशिप- बच्चे के अनाथ होने की स्थिति में गार्जियनशिप की प्रक्रिया को आसान किया जाएगा।
12- पति-पत्नी के झगड़े की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उनके ग्रैंड पैरेंट्स को दी जा सकती है।
13- जनसंख्या नियंत्रण को अभी सम्मिलित नहीं किया गया है।

देवभूमि से देशभर में ट्रेंड होता रहा #UCCInUttarakhand

देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट मिलते ही सोशल मीडिया में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मुहिम के मुरीद उमड़ पड़े। इस दौरान नामी शख्सियत से लेकर प्रसिद्ध सोशल मीडिया इंफ्यूलेन्सर ने यूसीसी के ड्राफ्ट पर धाकड़ धामी के फैसले की जमकर तारीफ की। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत श्रेष्ठ भारत के विजन को देवभूमि से धामी सरकार सच में बदल रही है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ठीक 20 माह बाद देश के सबसे बड़े कानून समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट मिल गया है। यह ड्राफ्ट मुख्यमंत्री धामी के राज्य के विकास को लेकर लिए गए बड़े संकल्पों में से एक है। शुक्रवार को जैसे ही यूसीसी की कमेटी ने ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपा तो सोशल मीडिया में “हैशटैग यूसीसी इन उत्तराखंड” तेजी से ट्रेंड हो गया। देखते ही देखते ड्राफ्ट के समर्थन में देशभर से सोशल मीडिया इंफ्यूलेन्सर से लेकर बड़ी शख्सियत, विचारक एवं टिप्पणीकार आगे आ गए। सोशल मीडिया में ट्वीट, पोस्ट, शेयरिंग, ग्रफिक्स, वीडियो के साथ यूसीसी पर धामी सरकार के निर्णय का समर्थन होने लगा। हर कोई इस फैसले पर मुख्यमंत्री धामी के मुरीद दिखे और बेबाकी से लिखते गए कि समान नागरिक संहिता कानून समय की जरूरत है। खासकर यूसीसी के समर्थन में सबसे ज्यादा लोग सोशल मीडिया एक्स( X) पर ट्रेंड करते नजर आये।अक्सर सोशल मीडिया में अपनी बात बेबाकी से रखने वाली इनफ्लुएंसर्स प्रीति गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” का विजन सच में बदल रहा है।” इसी तरह इंफ्लुयेंसर रमेश सोलंकी ने लिखा कि “समृद्धि और समानता की दिशा में यूसीसी से देवभूमि एक समृद्ध समाज की ओर कदम बढ़ा रहा है।” सौरभ गुप्ता नाम के यूजर ने ट्वीट पर मुख्यमंत्री धामी के इस ऐतिहासिक निर्णय हेतु बधाई देते हुए लिखा कि “निश्चित तौर पर यह सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जल्द ही यूसीसी को कानून बनाकर उत्तराखंड में लागू भी कर दिया जाएगा।” इधर, उत्तराखंड भाजपा ने भी सरकार की इस उपलब्धि पर ट्वीट करते हुए लिखा कि आगामी विधानसभा सत्र में भाजपा सरकार समान नागरिक संहिता का विधेयक पेश कर अतिशीघ्र कानून के रूप में लागू करने की ओर कदम बढ़ाएगी। इसके साथ ही उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सुरेश गडिया जैसे तमाम नेताओं, मीडिया से जुड़े लोग भी धाकड़ धामी की इस मुहिम के समर्थन में ट्वीट करते हुए मुरीद दिखे।

यह ड्राफ्ट उत्तराखंड की देवतुल्य जनता की आंकाक्षाओं के अनुरूप बनाया गया है। यह प्रधानमंत्री जी के एक भारत-श्रेष्ठ भारत के स्वप्न को साकार करने वाला ड्राफ्ट है। जल्द इसका विधिक परीक्षण और चर्चा कर विधानसभा में विधेयक के रूप में लाया जाएगा।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।

केंद्र का अंतरिम बजट सर्वस्पर्शी बजट किसानों, महिलाओं, युवाओं और वंचितों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने भारतवासियों के लिए एक गतिशील एवं विकासोन्मुखी बजट पेश किया है। सीएम ने केंद्रीय मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को आर्थिक महाशक्ति के साथ ही विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में यह अंतरिम बजट नई गति प्रदान करेगा।

यह सर्वस्पर्शी बजट किसानों, महिलाओं, युवाओं और वंचितों के उत्थान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही प्रधानमंत्री जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को मूर्त स्वरुप देने में सहायक सिद्ध होगा।

समावेशी विकास के साथ ही यह बजट नए भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, कृषि, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को नए आयाम प्रदान करेगा, जिसके द्वारा विकसित भारत /2047 के विजन को सार्थकता मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश का चहुंमुखी विकास हो रहा है। यह बजट प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प के अनुरूप भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। बजट में महिला, गरीब, युवा और किसानों को सरकार ने अपनी प्राथमिकता में रखा है।

सीएम धामी ने कहा कि इसमें जहां खेती किसानी के साथ ही पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन पर फोकस किया गया है, वहीं मातृशक्ति को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी योजना का लक्ष्य दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अंतरिम बजट में पर्यटन, उद्योग, हवाई कनेक्टिविटी आदि पर भी खास जोर दिया गया है। इससे उत्तराखंड में पर्यटन विकास को पंख लगेंगे और औद्योगिक निवेश की ग्राउंडिंग में और तेजी आएगी। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए संकल्पित है। यह अंतरिम बजट इस संकल्प को पूरा करने की दिशा में सहायक बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के लिए यह अंतरिम बजट महत्वपूर्ण है। वर्ष 2023-24 के संशोधित अनुमान जो आज प्रस्तुत किये गये हैं में केंद्रीय करों में राज्यांश बढ गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में उत्तराखण्ड राज्य के लिए 11419.78 करोड़ रूपये का प्रावधान था, जो कि संशोधित अनुमान में 12348 करोड हो गया है। इस प्रकार लगभग 928 करोड इस वर्ष में अधिक मिलने की संभावना है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 13637 करोड़ हो गया है। यह गत वर्ष के मूल अनुमान से 2217 करोड अधिक है। प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए यह केन्द्र सरकार का महत्वपूर्ण उपहार है।

नजरियाः यूसीसी में महिला सुरक्षा, सम्मान और अधिकार को दी गई है प्राथमिकता

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने से पहले राज्य में पहली महिला मुख्य सचिव की जिम्मेदारी आईएएस राधा रतूड़ी को सौंपते हुए देवभूमि से मातृशक्ति सम्मान का बड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री धामी का यह निर्णय महिला सम्मान, सुरक्षा और महिला प्रधान वाले राज्य की परिकल्पना को साकार कर रहा है। खासकर नौकरशाही के सर्वाेच्च पद पर राज्य में महिला अधिकारी की ताजपोशी भी यूसीसी लागू होने से पहले बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नारी सशक्त भारत की परिकल्पना पर खरा उतर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में राज्य के 7 से ज्यादा जनपदों में महिला सशक्तिकरण और सम्मान को लेकर मातृ शक्ति वंदन महोत्सव में प्रतिभाग कर महिलाओं की राज्य के विकास में अहम भागीदारी का संदेश जन जन तक पहुंचाया है। यह कार्यक्रम अभी जारी हैं। इसके अलावा राज्य की महिलाओं को नौकरी-पेशे में 30 फीसद आरक्षण देकर मुख्यमंत्री धामी ने पहले ही नारी शक्ति सम्मान पर बड़ा निर्णय ले लिया था। जबकि महिला सुरक्षा, सम्मान और अधिकार को लेकर देश के सबसे बड़े कानून समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की तिथि का भी ऐलान एक दिन पहले मुख्यमंत्री कर चुके हैं। इन बड़े निर्णयों के बाद मुख्यमंत्री धामी ने आज नौकरशाही के सबसे बड़े पद पर राज्य गठन के 23 साल बाद पहली बार मुख्य सचिव की जिम्मेदारी वरिष्ठ महिला अधिकारी आईएएस राधा रतूड़ी को सौंपी है। सरकार का यह निर्णय भी महिलाओं को सशक्त और सम्मान से जुड़ा देखा जा रहा है। इसके पीछे सरकार ने दो फरवरी को यूसीसी के ड्राफ्ट आने और उस पर होने वाले फैसले को लेकर भी अपनी मंशा साफ कर दी है। गौरतलब है कि धामी सरकार ने यूसीसी कानून में महिला सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को सर्वाेच्च प्राथमिकता में शामिल किए गया है। अब यूसीसी राज्य में लागू होने जा रहा है तो इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी बड़ी है। ऐसे में राज्य सरकार ने यूसीसी कानून लागू करने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विचारधारा पर अनुकूल बैठने, राज्य की रीति-नीति से वाकिफ महिला अफसर को नौकरशाही के सर्वाेच्च पद पर स्थापित कर देवभूमि से पूरे देश में बड़ा संदेश दिया है।

राज्य के 13 जिलों में 7 महिला अफसर
उत्तराखंड इतिहास में पहली बार देखने को मिल रहा कि जिलों में डीएम, एसपी और एससपी के पदों पर 7 से ज्यादा महिला अफसर हैं। मुख्यमंत्री धामी ने पहले दिन से ही मातृशक्ति प्रदान उत्तराखंड में महिला अफसरों को जिम्मेदारी दी हैं। इनमें राजधानी देहरादून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, नैनीताल, बागेश्वर जैसे जिलों में डीएम और एसपी की जिम्मेदारी महिलाओं के पास हैं। जबकि सीडीओ, सीओ समेत अन्य महत्वपूर्ण विभागों के मुखिया भी महिला अफसरों को बनाया है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि ठेठ पहाड़ के दुर्गम क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं की समस्याओं का समाधान हो या फिर महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को क्रियान्वित करने में महिला अफसरों से देवभूमि की मातृशक्ति को सहायता मिलेगी।

समान नागरिक संहिता कानून लागू करने के लिए बुलाया जायेगा विधानसभा सत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, संविधान निर्माताओं और राज्य आन्दोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे संविधान निर्माण का एक पर्व है। हमारा यह विशिष्ट संविधान हमारे राष्ट्र का निरंतर मार्गदर्शन करता आ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे स्वाधीनता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान का स्मरण भी कराता है। यह अवसर हमें देशभक्तों के सपनों को साकार करने और अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध होने का संकल्प लेने की भी प्रेरणा देता है। संविधान के अंतर्गत ही हम सभी की जिम्मेदारी यह भी है कि हम न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के मूलभूत लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता के लिए बनाई गई 5 सदस्यों की कमेटी ने ड्राफ्ट पूरा कर लिया है। ड्राफ्ट मिलते ही जल्दी विधानसभा का सत्र बुलाकर विधानसभा में समान नागरिक संहिता का कानून पूरे उत्तराखण्ड में लागू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अंत्योदय की भावना के साथ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के विकास, कल्याण और उन्नति हेतु संकल्पबद्ध है। जीरो टॉलरेंस आन करप्शन की नीति का अनुसरण कर राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। जनसेवा से संबंधित अधिकांश सेवाएं ऑनलाईन की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मागदर्शन में उत्तराखण्ड को 2025 तक देश के अग्रणी राज्यों के श्रेणी में लाने के लिए राज्य सरकार हर क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता के सहयोग से इस दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाने के लिए राज्य सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य की आर्थिकी को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए 3.56 लाख करोड़ के करारों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्यवाही गतिमान है। राज्य में निवेश के लिए निवेशकों ने जो उत्साह दिखाया है, आने वाले समय में इससे स्थानीय स्तर पर लोगों के रोजगार के संसाधन तेजी से बढ़ेंगे और पलायन पर भी नियंत्रण होगा। राज्य में धार्मिक पर्यटन के साथ ही पर्यटन की अन्य गतिविधियों पर भी तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। राज्य में चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। कुमांऊ मण्डल में धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत तेजी से कार्य किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति का सम्मान भी हमारे लिए सर्वाेपरि है। राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने का प्राविधान किया है। राज्य में महिला सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य की 1.25 लाख महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का आह्वान किया।

15 दिनों में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ की वेबसाइट और पोर्टल तैयार करने के निर्देश

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित अधिकारियों को अगले 15 दिनों में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ की वेबसाइट एवं पोर्टल तैयार करने की डेडलाइन दी हैं। इसके साथ ही एसीएस ने देश और दुनियाभर में रह रहे उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों का सटीक डाटा बेस प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि जल्द ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य में प्रत्येक वर्ष प्रवासी उत्तराखण्ड दिवस मनाने की परम्परा आरम्भ की जाएगी। सचिवालय में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ के गठन की औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा करने के सम्बन्ध में बैठक लेते हुए एसीएस राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ से जुड़े अधिकारियों को हिदायत दी कि उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों के लिए लॉंच की जाने वाली वेबसाइट पर प्रवासियों को पंजीकरण की सुविधा दी जाए तथा वेबसाइट पर ही उनकी शिकायतों निवारण हेतु सिस्टम विकसित जाए। एसीएस ने उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ के गठन के लिए अन्य राज्यों के प्रवासी सेल के तुलनात्मक अध्ययन के पश्चात उत्तराखण्ड हेतु एक ठोस एक्शन प्लान बनाने तथा फोकस एरिया तय करने के निर्देश दिए। राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए हैं कि उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ में उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों के भूमि सम्बन्धित एवं अन्य मुद्दों व शिकायतों के निवारण हेतु भी व्यवस्था की जाय।
आज के बैठक में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ के कार्यालय में अधिकारियों एवं कार्मिकों तैनाती, उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों के संबंध में डाटा बेस तैयार करने हेतु देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और विदेशों में उत्तराखण्डी प्रवासियों के संगठनों, एसोसिएशन एवं संस्थानों से सहयोग लेने के सम्बन्ध में निर्णय लिए गए।
एसीएस राधा रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ दुनिया भर में रह रहे उत्तराखण्ड मूल के लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने वाले सेतु का कार्य करेगा। इसके साथ ही यह प्रकोष्ठ प्रवासियों के निवेश प्रस्तावों पर शीघ्र कार्यवाही, उनकी समस्याओं के समाधान तथा सरकार एवं प्रवासियों के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने में मदद करेगा।
बैठक में सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, विनय शंकर पाण्डेय, महानिदेशक सिडकुल रोहित मीणा, सदस्य सुधीर नौटियाल सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।

देवभूमि स्पोर्ट्स फाउंडेशन के तत्वावधान में मुम्बई कौथिग सीजन-15 का आयोजन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नवी मुंबई में आयोजित मुम्बई कौथिग सीजन-15 में प्रतिभाग कर कौथिग का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई में देवभूमि स्पोर्ट्स फाउंडेशन जैसी संस्थाएं न केवल अपने सामाजिक दायित्व को पूरा कर रही हैं बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कौथिग में भारी संख्या में आए दर्शकों और श्रोताओं को देखकर इस कार्यक्रम की सफलता का पता चलता है, जिसका श्रेय देवभूमि स्पोर्ट्स फाउंडेशन की पूरी टीम को जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब-जब उत्तराखंड के दौरे पर आते हैं तो इस बात का विशेष रूप से जिक्र करते हैं कि 21 वीं सदी का यह तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कहे अनुसार उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में देहरादून में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया था, जिसके लिए ढाई हजार करोड़ के एमओयू का हमने लक्ष्य तय किया था लेकिन हमने इससे कहीं ज्यादा साढ़े तीन लाख करोड़ के न केवल एमओयू किये बल्कि अब तक लगभग 46 हजार करोड़ की ग्राउंडिंग भी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे यह जानकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई है कि यहाँ पर पहाडों के लोक गीत, लोक नृत्य और संस्कृति के विविध रूप दर्शकों को देखने के लिए मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारी युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत की ताकत को पहचानेगी तथा इसके विस्तार के लिए आगे आएगी। उन्होंने कहा कि इस बार का कौथिग उत्तराखंड के पर्यटन, विकास और स्वरोजगार को समर्पित है। यह अद्वितीय आयोजन जहां एक ओर पर्यटकों को उत्तराखंड की सुंदरता से परिचित कराएगा, वहीं उत्तराखंड के चहुंमुखी विकास और पर्यटन की अपार संभावनाओं को भी प्रमोट करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सागर और पर्वतों के बिना हमारी जीवन रूपी रेखा अधूरी है, जैसे मुंबई के सागर की लहरें और हमारे उत्तराखंड के पहाड़, दोनों हमें कुछ न कुछ सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। दोनों की गंभीरता ,दोनों की सुंदरता,दोनों की शालीनता हमें सीख देती है कि चाहे कुछ भी हो जाए ,जीवन में हारना नहीं है। यह संबंध हमें यह भी याद दिलाता है कि हम सभी, चाहे कहीं भी हों, एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार अपनी लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देश और दुनिया का नम्बर वन पर्यटन प्रदेश बनने के साथ ही अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण जल्द ही वैश्विक पटल पर सबसे बड़े कल्चरल हब के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि आज पहाड़ी समाज को हर क्षेत्र में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है तो उसके पीछे हमारा लंबा संघर्ष, परिश्रम और सादगी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने 60-70 साल पहले जब महाराष्ट्र का रुख किया था तब वे छोटे कामों तक सीमित थे, परन्तु आज वक्त बदल गया है। आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां उत्तराखंड के लोग आपको न मिलते हों।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कौथिग के इस मंच पर आज उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में खड़ा हूं तो ये इस बात का द्योतक है कि हम तरक्की कर रहे हैं। उन्होंने प्रवासियों से आह्वान किया कि आप अपनी बोली-भाषा, संस्कृति और संस्कारों को न भूलें। क्योंकि जो समाज अपनी बोली भाषा और संस्कृति से दूर हो जाता है, उसका पतन उसी दिन शुरू हो जाता है। अपनी बोली भाषा, अपने खान पान और संस्कृति के बारे में अपने बच्चों को अवश्य बताएं। पीढ़ियों के मध्य ये अंतर नहीं आना चाहिए कि माता-पिता तो पहाड़ के हैं और हम मुंबईवासी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति में जो मधुरता है, विनम्रता है और एक अपनापन है, वो अपने आप में विशिष्ट है। हमारे खान-पान में, हमारे रहन-सहन में, हमारी बोल-चाल में, एक भावनात्मक लगाव है। हमारी मंडुवे की रोटी, झिंगोरे की खीर, पहाड़ी ककड़ी का रायता, आलू के गुटके, भट्ट का चुड़कानी, मूली की थीचयौणी, कंडाली के साग के स्वाद को कौन भूल सकता है। उन्होंने कहा कि आज के इस अवसर पर आपसे आग्रह करूंगा कि आप सभी उत्तराखंड अवश्य आएं और हमारे प्रदेश की विशेषताओं का आनंद लें और जो उत्तराखंड के ही हैं, वे अवश्य वर्ष में एक बार परिवार सहित अपनी मातृभूमि आने का प्रयास करें। अपने आपको तथा अपने बच्चों को अपने गांव से, अपने मूल निवास से जोड़े रखिये, अपने ग्राम देवता, अपने कुल देवी-देवता से जोड़े रखिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सम्पूर्ण देश में जो सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महाअभियान चल रहा है, उसमें उत्तराखंड भी अपना योगदान दे रहा है। उत्तराखंड में केन्द्र सरकार के सहयोग से प्राचीन धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों के पुर्नद्धार और संरक्षण का कार्य मिशन मोड पर किया जा रहा है। हमारी सरकार भी वो सब कार्य कर रही है,जो या तो बहुत पहले हो जाने चाहिए थे,या बहुत समय से लटके हुए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्य पूरा हो गया है। इसके लिए सभी को बहुत शुभकामनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने उत्तराखंड में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया, वहीं धर्मांतरण रोकने के लिए भी कानून बनाया है, प्रदेश में पहली बार लैंड जिहाद के खिलाफ कार्रवाई की गई, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी पहली बार कार्रवाई करने से हम पीछे नहीं हटे, इसके साथ ही प्रदेश की महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था भी प्रारंभ की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में अब हम जल्द समान नागरिक आचार संहिता को भी लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना के इन 23 वर्षों में हमने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, परन्तु राज्य के संर्वागीण विकास का लक्ष्य अभी भी दूर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना है।
इस अवसर पर देवभूमि स्पोर्ट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेश राणा, मुख्य आयोजक भरत कुकरेती, धारचूला के विधायक हरीश धामी आदि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री के कैंची धाम दर्शन के दौरान गौरी शर्मा नाम की बच्ची ने भेंट कर सौंपा था पवलगढ़ कन्जर्वेशन रिजर्व का नाम बदलने के लिए पत्र

श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन उत्तराखंड सरकार ने पवलगढ़ कन्जर्वेशन रिजर्व का नाम सीतावनी कन्जर्वेशन रिजर्व करने का बड़ा फैसला लिया था। अब जानकारी सामने आई है कि गौरी शर्मा नाम की बच्ची ने सीएम धामी के कैची धाम दर्शन के दौरान उन्हें एक पत्र देकर इस रिजर्व का नाम सीतावनी किये जाने की इच्छा प्रकट की थी, जिस पर सीएम धामी ने बच्ची की भावनाओं का सम्मान करते हुए अधिकारियों को तत्काल इस पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
सीतावनी कंजर्वेशन रिजर्व में मां सीता का पौराणिक मंदिर और महाऋषि वाल्मीकि आश्रम स्थित हैं जिसकी देख-रेख भारतीय पुरातत्व विभाग करता है और यहां जाने की अनुमति वन विभाग देता है।
उत्तराखंड की धामी सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है जिसने एक संरक्षित क्षेत्र का नाम मां सीता के नाम पर रखा है। ये जंगल 5824.76 हैक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है जो टाईगर, हाथी, पक्षी व तितलियों के लिए प्रसिद्ध है और यहां बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री भी जाते हैं।
सीतावनी कंजर्वेशन रिजर्व में मां सीता का पौराणिक मंदिर और महाऋषि वाल्मीकि आश्रम स्थित होने के कारण आसपास के लोगों की भी मांग थी कि इस रिजर्व का नाम सीतावनी किया जाए। इस बीच, सीएम धामी जब बीते दिनों कैंची धाम में दर्शनों के लिए गए तो यहां गौरी शर्मा नाम की एक बच्ची ने उनसे भेंट कर उनसे मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि पवलगढ़ का नाम बदलकर सीतावनी किया जाए, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए और 22 जनवरी के ऐतिहासिक दिन राज्य सरकार ने इस रिजर्व का नाम बदलकर सीतावनी कर दिया।

’बच्ची ने सीएम को जय श्रीराम लिखकर की पत्र की शुरुआत…’

मुख्यमंत्री जी,
जय श्री राम सबको पता है कि अयोध्या में भगवान श्री राम जी का मंदिर बन रहा है। हमारे यहाँ सीतावनी जंगल है, जहाँ माँ सीता और उनके बच्चों लव-कुश की पूजा होती है।
मेरी इच्छा है कि पवलगढ कन्जरवेशन रिजर्व का नाम बदलकर सीताबनी कन्जरवेशन रिजर्व रखा जाए। धन्यवाद
गौरी शर्मा

ड्रोन के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन पॉलिसी का प्रचार प्रसार करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में प्रदेश को ड्रोन पॉलिसी के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि ड्रोन क्षेत्र में नवोन्मेषी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए देश के प्रौद्योगिकी संस्थानों से सहयोग लेने के लिए अनुबंध किए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड मोस्ट हेलीकॉप्टर फ्रेंडली स्टेट है। इससे एक ओर हैली सेवा को अत्यधिक फायदे हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन कॉरिडोर के लिए जीरो रिस्क एरिया पर फोकस किया जाए। कहा कि पिटकुल और यूपीसीएल की बहुत सी हाई टेंशन और लो टेंशन लाइन्स को ध्यान में रखते हुए यूपीसीएल और पिटकुल से आपसी सामंजस्य स्थापित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ड्रोन के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन पॉलिसी का प्रचार प्रसार किया जाए। साथ ही प्रदेश के युवाओं को ड्रोन के क्षेत्र में प्रशिक्षण और रोजगार की दिशा में भी कार्य किए जाने की आवश्यकता है। कहा कि प्रदेश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों से ड्रोन के विभिन्न प्रकार के कोर्स कराए जा सकते हैं।
इस अवसर पर सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, निदेशक आईटीडीए विनीत कुमार एवं आईजी (सुरक्षा) राजीव स्वरूप सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।