सुप्रीम कोर्ट ने गरीब सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण जारी रखने का किया ऐलान

उच्‍चतम न्‍ययालय की पांच न्‍यायाधीशों की संविधान पीठ ने आज तीन-दो के बहुमत से 103वें संविधान संशोधन की वैधता बरकरार रखी है जिसमें दाखिलों और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

न्‍यायाधीश दिनेश माहेश्वरी, न्‍यायाधीश बेला त्रिवेदी और न्‍यायाधीश जेबी पारदीवाला ने अधिनियम के पक्ष में राय दी है जबकि न्यायमूर्ति एस रवींद्र भटट ने कानून को भेदभावपूर्ण और बुनियादी ढांचे का उल्लंघन बताते हुए इस पर असहमति व्‍यक्‍त की। प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित ने न्यायमूर्ति एस रवींद्र भटट की राय का समर्थन किया।

न्‍यायमूर्ति त्रिवेदी ने फैसला सुनाया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने संबंधी कानून भेदभावपूर्ण नहीं है। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि आर्थिक मानदंड को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण देने संबंधी कानून बुनियादी ढांचे या समानता संहिता का उल्लंघन नहीं करता। उनका कहना था कि इस प्रावधान से 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने की सीमा के किसी प्रावधान को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

बता दें कि जनवरी 2019 में संसद ने 103वें संविधान संशोधन को मंजूरी दी थी और इसे तुरंत ही उच्‍चतम न्‍यायालय में चुनौती दी गई थी। पहले इस मामले की सुनवाई तीन न्यायाधीशों ने की थी लेकिन बाद में 2019 में इसे पांच-न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया गया। संविधान पीठ ने सितम्‍बर में छह दिन से अधिक समय तक इस मामले की सुनवाई की और अपना फैसला सुरक्षि‍त रखा था। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण दिए जाने को बराकरार रखने के उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले का स्‍वागत किया है। ट्वीट संदेश में पार्टी महासचिव बी एल संतोष ने कहा कि गरीब कल्‍याण का एक और श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को जाता है। उन्‍होंने कहा कि सामाजिक न्‍याय की दिशा में यह एक बड़ा निर्णय है।

मंगलवार को चंद्रग्रहण का सूतक नौ घंटे पूर्व लगेगा

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर को पड़ने जा रहा है। चंद्र ग्रहण पर 200 साल बाद दो अशुभ योग बन रहे हैं, जो कुछ राशियों पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। यह खग्रास चंद्रग्रहण है जो भारत में ग्रस्तोदय होगा। अर्थात मंगलवार को ग्रहण लगा हुआ चंद्रमा उदय होगा।

बता दें कि सूर्य व चंद्रमा के बीच पृथ्वी के आने से चंद्र ग्रहण लगता है। साथ ही चंद्र ग्रहण का सूतक काल नौ घंटे पहले शुरू हो जाता है। अभी विगत 25 अक्‍टूबर के दिन इस वर्ष का आखिरी सूर्यग्रहण लगा था तो ज्योतिष शास्त्र अनुसार 15 दिन के अंदर दो ग्रहण होना अशुभ माना जा रहा है। इस कारण भी कुछ राशियों पर ग्रहण बुरा प्रभाव डाल सकता है।

ग्रहण पर शनि और मंगल के आमने-सामने होने से अशुभ संयोग
ज्‍योतिषाचार्य आचार्य सुशांत राज के अनुसार ग्रहण पर शनि और मंगल के आमने-सामने होंगे।
इस कारण षडाष्टक और नीचराज भंग अशुभ योग बन रहा है।
यह योग मेष राशि और भरणी नक्षत्र में लगेगा।

साइबर इश्यू प्रस्तुतिकरण में उत्तराखंड भी रहा शामिल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गृह मंत्रालय के चिंतन शिविर में प्रतिभाग किया। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित चिंतन शिविर के द्वितीय दिन गृह मंत्रालय द्वारा चार राज्यों को साइबर इश्यू प्रस्तुतिकरण देने हेतु चुना गया। जिसमें उत्तराखण्ड राज्य भी शामिल था। इस क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व, मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देशन में उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य पुलिस का प्रतिनिधित्व करते हुए साइबर विषयों का प्रस्तुतिकरण समस्त राज्यों के सामने किया गया।

उनके द्वारा वर्तमान में प्रचलित उत्तराखण्ड के ई-सुरक्षा के मॉडल को विस्तार से बताया गया। उसके उपरान्त उनके द्वारा वर्ष 2021 के पॉवर बैंक घोटाले एवं वर्ष 2022 में फर्जी चाईनीज वेबसाइट के माध्यम से घोटालों में उत्तराखण्ड द्वारा पूरे देशभर में अभियोगों का अनावरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया। उत्तराखण्ड राज्य द्वारा कुछ अच्छी पहलों पर भी प्रकाश डाला गया। जैसे कि राज्य में साइबर थाने में शून्य अभियोग पंजीकृत करना जिससे कि पीड़ित को तत्काल अभियोग पंजीकरण कर उस पर कार्यवाही करते हुए पीड़ित को न्याय दिलाया जा सके, थानों की दीवारों पर साइबर जागरुकता सन्देश, साइबर बुलेटिन जागरूकता हेतु आदि।

टीम द्वारा साइबर समस्याओं के सम्बन्ध में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये। जैसे कि साइबर अपराध की विवेचना की शक्ति उप निरीक्षक स्तर अधिकारियों को देना जिससे कि विवेचनाओं का समयबद्ध विधिक निस्तारण किया जा सके, आई0टी0 एक्ट कानून को मजबूत करने हेतु सजा का प्रावधान और कठोर किया जाना सम्बन्धी जिससे अभियुक्तगण को शीघ्र जमानत न मिल सके व अपराध की पुर्नावृत्ति न कर सके तथा बढ़ते हुए साइबर अपराधों की चुनौतियों के क्रम में नये साइबर कानून की आवश्यकता लाना। भारत सरकार की पहल 1930 को 112 से जोड़ा गया व उक्त हेल्पलाईन नम्बर को प्रभावी करने हेतु बैंकों एवं इस प्रकार के वित्तीय कम्पनियों को प्रभावी रूप से प्रेरित करने हेतु निर्देश जारी करना। कानून व्यवस्था को बाधित करने हेतु बल्क सन्देशों (ठनसा ैडै) पर लगाम लगाने हेतु भी कुछ सुझाव प्रस्तुत किये गये।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वोकल फॉर लोकल मूल मंत्र के उद्देश्य से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड राज्य द्वारा द्वितीय हैकॉथान चरण से क्रिप्टो करेंसी डार्क नेट और रोड दुर्घटना रोकने हेतु स्वदेशी समाधान मिलेंगे जिससे देश के अन्य राज्यों की भी मदद होंगी। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर प्रकाशित फर्जी खबर व भड़काऊ पोस्ट पर भी सख्ती से कानून बनाया जाने तथा ऐसी पोस्ट को तत्काल सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटाने की त्वरित प्रक्रिया करने सम्बन्धी सुझाव भी प्रस्तुत किये गये।

केदारनाथ यात्राः महिला समूहों ने करीब 48 लाख रुपए का किया कारोबार

कोरोनाकाल के बाद पटरी पर लौटी श्री केदारनाथ धाम यात्रा इस बार जिले के लिए कई सौगात दे गई। यात्रा से सीधे तौर पर जुड़े लोग दो सालों से सुचारु यात्रा का इंतजार कर रहे थे, इस वर्ष रिकॉर्ड 15 लाख, 63 हजार से ज्यादा यात्रियों ने केदारनाथ धाम पहुंचकर इस इंतजार को समाप्त किया। जिले में संचालित महिला समूहों के लिए भी यह यात्रा सुखद साबित हुई, कोरोनाकाल के बाद इस वर्ष महिला समूहों के व्यवसाय को नई ऊंचाइयां मिली। केदारनाथ यात्रा से जुडे़ विभिन्न महिला समूहों ने इस वर्ष करीब 48 लाख रुपए का व्यापार किया।

’यात्रा से मिला आत्मनिर्भरता को आधार’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भरता एवं स्वरोजगार का मंत्र अपना कर दूसरों को रोजगार देने की अपील से प्रभावित जिले की महिलाएं सीधे तौर पर केदारनाथ यात्रा में अपना योगदान दे रही हैं। जिले में महिलाएं बाबा केदारनाथ धाम के लिए स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद तैयार करने के साथ ही यात्रा मार्ग पर रेस्तरां, कैफे संचालित करने के साथ ही अन्य उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि बाबा केदारनाथ में दुनियाभर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद एवं बाबा केदारनाथ के सोविनियर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय शहद, हर्बल धूप समेत कई उत्पाद महिलाएं तैयार कर यात्रियों को उपलब्ध करवा रही हैं। इसके अलावा स्थानीय खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के लिए सरस रेस्तरां एवं हिलांस कैफे भी यात्रा मार्ग पर संचालित हो रहे हैं। करीब 20 महिला समूहों से जुड़ी महिलाएं यात्रा में योगदान देकर आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम उठा रही हैं। प्रशासन विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रयासरत है।

’केदारनाथ में प्रसाद बेच कर महिलाओं ने किया 43.50 लाख रुपए का व्यवसाय’

श्री केदारनाथ धाम में जिले की महिलाओं द्वारा तैयार प्रसाद का विपणन करने वाले व्यापारी अर्जुन कुर्मांचली ने बताया कि कोरोनाकाल के बाद शुरू हुई यह यात्रा बेहद लाभदायक सिद्ध हुई है। उन्होंने विभिन्न हैलीपैड़ एवं मंदिर परिसर में तीर्थ यात्रियों को करीब 43 लाख रुपए का प्रसाद बेचा। बताया कि उनके पास जिले भर के करीब 20 महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार चौलाई के लड्डू, हर्बल धूप, चूरमा, बेलपत्री, शहद, जूट एवं रेशम के बैग आदि पहुंचता है। इसके अलावा गंगा जल के लिए पात्र एवं मंदिर की भस्म भी प्रसाद पैकेज का हिस्सा हैं। पूरे पैकेज की कीमत 250 रुपए निर्धारित की गई है, जिसके अतिरिक्त 50 रुपए मंदिर समिति एवं हैली कंपनियों को रॉयल्टी दी जाती है। उधर एनआरएलएम के ब्लॉक समन्वयक सतीश सकलानी ने बताया कि देवीधार उन्नत्ति क्लस्टर ने पूरी यात्रा के दौरान ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से प्रसाद बेचकर करीब 42 रुपए का कारोबार किया है।

’रोजगार के साथ स्थानीय उत्पादों को भी मिला बढ़ावा’

केदारनाथ प्रसाद उत्पादक फेडरेशन के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सजवाण ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने करीब 50 कुंतल चौलाई के लड्डू एवं चूरमा तैयार कर केदारनाथ में बेचा है। पिछले छह महीनों मेें उन्होंने 60 महिलाओं को रोजगार दिया, जिसमें 30 महिलाएं एनआरएलएम के तहत गठित समूहों के माध्यम से उनसे नियमित तौर पर जुड़ी हैं। पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने करीब 22 लाख रुपए के लड्डू एवं चूरमा बेचा। समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रतिदिन 300 रुपए मेहनताना देने के साथ ही समय-समय पर प्रशिक्षण भी देते हैं। सजवाण ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रसाद योजना शुरू होने से पहले चौलाई का उत्पादन बेहद सीमित हो गया था जबकि अब इसके उत्पादन में बढोतरी हुई है। बताया कि वे 55 रुपए प्रति किलो के हिसाब से किसानों से चौलाई की खरीद करते हैं। अगले वर्ष के लिए 100 कुंतल चौलाई की खरीद के लिए किसानों को उत्पादन करने को कहा गया है। इसके अलावा बेलपत्री का उत्पादन करने वाले किसानों को भी योजना का सीधा लाभ मिल रहा है।

’सरस रेस्तरां एवं विपणन केंद्र को मिली नई पहचान’

श्री केदारनाथ यात्रा मार्ग के अगस्त्यमुनि में जिला प्रशासन ने एनआरएलएम के माध्यम से गठित महिला समूहों की मदद से सरस रेस्तरां एवं विपणन केंद्र की शुरुआत इसी यात्रा के दौरान की। सरस रेस्तरां संचालित कर रही महादेव स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पूनम देवी ने खुशी जताते हुए बताया कि पहली ही यात्रा के दौरान उन्होंने करीब 4 लाख रुपए का व्यवसाय किया। सरस रेस्तरां के माध्यम से 8 लोगों को नियमित रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि अगली यात्रा के लिए समूह द्वारा अभी से और बेहतर तैयारियों हेतु रणनीति तैयार की जाएंगी। उधर सरस विपणन केंद्र संचालित कर रही शिवानी ने बताया कि श्री केदारनाथ यात्रा के दौरान जिले भर के किसानों से एकत्रित स्थानीय उत्पाद बेचकर करीब 80 हजार रुपए का कारोबार किया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पीएम और केंद्रीय मंत्री का जताया आभार

हल्द्वानी एचएमटी की भूमि राज्य सरकार को मिलने से भाजपा संगठन ने इसे धामी सरकार की एक और बड़ी उपलब्धि करार दिया है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उद्योग मंत्री डॉ महेंद्र नाथ का आभार जताया। भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लंबे समय से किये जा रहे प्रयास के फलस्वरूप आखिरकार राज्य को हल्द्वानी एचएमटी की 45.33 एकड़ जमीन मिल गयी। उन्होंने कहा कि इस जमीन के मिलने से जनकल्याण के कई योजनाओं को क्रियान्यवयन मे मदद मिलेगी। लंबे समय से इस जमीन को राज्य सरकार को दिलाने की दिशा मे प्रयास किये जा रहे थे, लेकिन इस बार प्रभावी पहल और सीएम के द्वारा इस पर विशेष फोकस किये जाने से इसे हस्तानतरण का मार्ग प्रशस्त हो पाया। उन्होंने से डबल इंजन की सरकार का एक और तोहफा भी उतराखंड को करार दिया।

उन्होंने कहा कि इस जमीन के खाली पड़े रहने से इसका कोई प्रायोजन भी हासिल नही हो पा रहा था। अब एकमुश्त इतनी जमीन मिलने से यह रोजगारपरक कार्याे के लिए उपयोग मे लायी जा सकेगी। सीएम की दूरदर्शिता और सतत् प्रयास से यह भूमि एक बेहतर रोजगार का मॉडल बनेगा।

राज्य की सुरक्षा से केंद्रीय मंत्री को सीएम ने कराया अवगत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरियाणा के सूरजकुंड में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के गृह मंत्रियों के चिंतन शिविर में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य कठिन एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों से युक्त राज्य है, जिसकी अन्तर्राष्ट्रीय सीमाएँ उत्तर में तिब्बत चीन एवं पूर्व में नेपाल के साथ जुड़ी हुई हैं। इस प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य का सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है।

उन्होंने कहा कि हमारे राज्य द्वारा कानून व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन हेतु संविधान के अनुच्छेद 44 जो कि समान नागरिक संहिता लागू किये जाने से सम्बन्धित है, की भावना का सम्मान करते हुये राज्य में समान नागरिक संहिता लागू किये जाने हेतु गठित विशेषज्ञ समिति वर्तमान में एक विस्तृत रिपोर्ट बनाने का कार्य कर रही है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के उपरान्त राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने से राज्य में सभी धर्मों व सम्प्रदायों के निवासी लाभान्वित होंगे। तथा सभी धर्मों को मानने वाली महिलाओं की स्थिति में गुणात्मक सुधार होगा ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के समक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों से राज्य के नागरिकों द्वारा किया जाने वाला पलायन अत्यन्त चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसे रोकने हेतु विगत 5 व 6 वर्षों में प्रभावित क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद पिथौरागढ़, उत्तरकाशी एवं चमोली में 13 सड़कों का लगभग 600 कि०मी० निर्माण कार्य गतिमान है, जिसमें से 04 सड़कों का लगभग 150 कि०मी० निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जनपद पिथौरागढ़ में नेपाल सीमा से लगे छारछुम नामक स्थान पर मैंने हाल ही में एक पुल का शिलान्यास किया, जिसके पूर्ण होने पर सामारिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमान्त क्षेत्र के नागरिकों का आवागमन सहज एवं सुगम हो सकेगा। हाल ही में बद्रीनाथ में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में गांवों की महत्ता को रेखांकित करते हुये सीमान्त गांव माणा को देश के अंतिम गांव की जगह प्रथम गांव की संज्ञा दी है। जिसके लिये प्रधानमंत्री जी ने भी अपनी संस्तुति दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमान्त गांव देश के प्रथम प्रहरी है और इनका समुचित विकास करना हमारा कर्तव्य है। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा बनाये रखने हेतु राज्य सरकार द्वारा इन क्षेत्रों से हो रहे स्थानीय निवासियों के पलायन को रोकने और उन्हें यहीं पर चिकित्सा स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा एवं रोजगार इत्यादि की सुविधा प्रदान किये जाने के प्रयास शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर किये जा रहें है। प्रधानमंत्री जी द्वारा जगायी गयी अलख के क्रम में राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को एन०सी०सी० से जोड़े जाने का अभियान गतिमान है। इसी प्रकार सीमाओं की सुरक्षा के दृष्टिगत राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों के 10 हजार सेवानिवृत्त सैनिकों, अर्द्धसैनिकों एवं युवाओं को सीमा सुरक्षा के सम्बन्ध में प्रशिक्षित कर उन्हें राज्य के सीमान्त जिलों में तैनात किये जाने हेतु हम “हिम प्रहरी” योजना पर काम कर रहे है, जिसमें 05 करोड़ रूपये प्रतिमाह का सहयोग केन्द्र सरकार से अपेक्षित है।

उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा की दृष्टि से राज्य सरकार द्वारा राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन सम्बन्धी गतिविधियों में वृद्धि हेतु इनर लाईन प्रतिबन्धों पर छूट प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में हमने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा राज्य की आन्तरिक सुरक्षा से सम्बन्धित चुनौतियों का भी दृढ़ता से सामना कर उन पर प्रभावी नियन्त्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। देश के कई महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील केन्द्रीय प्रतिष्ठान तथा कार्यालय राज्य में स्थित है, जिनकी सुरक्षा का प्राथमिक दायित्व राज्य सरकार पर है। इसी प्रकार राज्य में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों तथा चारधाम यात्रा एवं कांवड यात्रा में आने वाले करोड़ो तीर्थ यात्रियों की सुरक्षित यात्रा का दायित्व भी राज्य सरकार पर ही है, जिसका निवर्हन हम पूरी क्षमता के साथ कर रहे हैं। जिसके फलस्वरूप इस वर्ष हम 4 करोड़ शिवभक्तों को कांवड़ यात्रा व अभी तक करीब 45 लाख श्रद्धालुओं को सफलतापूर्वक चारधार यात्रा कराने में सफल हुये हैं। इन कार्यों हेतु आवश्यक सहयोग की भी हमें केन्द्र सरकार से निरन्तर आवश्यकता रहेगी।

उन्होंने कहा कि आन्तरिक सुरक्षा के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा विभिन्न संगठनों की अवैध गतिविधियों, पर कड़ी नजर रखते हुये उनके विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। इसी प्रकार राज्य सरकार द्वारा राज्य में धार्मिक उन्माद एवं कट्टरपन्थी गतिविधियों को हतोत्साहित करने के क्रम में राज्य में अतिवामपन्थी एवं माओवादी गतिविधियों को भी प्रभावी ढंग से नियन्त्रित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य कठिन एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों से युक्त पर्वतीय राज्य है, जिसमें अतिवृष्टि, बाढ़, भू-स्खलन एवं वाहन दुर्घटनाओं का निरन्तर सामना करना पड़ता है। वर्ष 2013 में श्री केदारनाथ आपदा के उपरान्त राज्य में एस०डी०आर०एफ० का गठन किया गया, जिसके द्वारा राज्य में आपदा से पीडित व्यक्तियों के साथ-साथ वन विभाग के साथ समन्वय एवं सहयोग स्थापित करते हुये वनाग्नि से मानव, पशु एवं वन सम्पदा की रक्षा हेतु प्रभावी भूमिका निभाई जा रही है। बेहतर आपदा प्रबन्धन के दृष्टिगत राज्य में आपदा प्रबन्धन शोध संस्थान की नितान्त आवश्यकता है, जिससे न केवल उत्तराखण्ड राज्य अपितु आपदा से पीड़ित अन्य राज्य भी लाभान्वित होंगे। राज्य में आपदा एवं वनाग्नि की घटनाओं के दौरान परिस्थिति पर नियन्त्रण स्थापित किये जाने हेतु हवाई सेवायें केन्द्र सरकार द्वारा प्रदान की जाती है, ऐसे में यदि आपदा में त्वरित कार्यवाही हेतु एक हेलीकॉप्टर केन्द्र सरकार द्वारा एस०डी०आर०एफ० को उपलब्ध करा दिया जाता है तो यह आपदा के नियन्त्रण में अति सहायक सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में अपराध अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है, जिसकी पुष्टि एन०सी०आर०बी० के आंकड़ों ने भी की है। हम भविष्य में भी इस विशिष्ट उपलब्धि को कायम रखने हेतु प्रयासरत रहेंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य में सरलीकरण, समाधान, निस्तारिकरण एवं संतुष्टि के मंत्र को अपनाकर Smart Policing के माध्यम से कानून व्यवस्था के प्रभावी नियंत्रण का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में E-FIR की व्यवस्था प्रारम्भ की जा चुकी है। इसी प्रकार जनसामान्य के सेवार्थ राज्य की पुलिस द्वारा लांच किये गये विभिन्न Apps को “उत्तराखण्ड पुलिस एप के रूप में एकीकृत किया गया है ।हमने भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए एक विजिलेंस हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जो हमारे भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को पुष्ट करता है। एक पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड में बहुत से गांवों में आज भी राजस्व पुलिस ही नियमित पुलिस के कार्यों को देखती रही है। हाल ही में राज्य के कतिपय राजस्व पुलिस क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियों में वृद्धि का संज्ञान लेते हुये राजस्व पुलिस का क्षेत्राधिकार चरणबद्ध रूप से नियमित पुलिस को दिये जाने के संबंध में हमारी सरकार द्वारा निर्णय लिया जा चुका है, जिससे राज्य में अपराधों पर ओर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में बालिकाओं एवं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति अत्यन्त संवेदनशील है और इसे अपनी शीर्ष प्राथमिकता पर रखते हुये अपराधियों के विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही कर रही है। इसी क्रम में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने के उद्देश्य से एप बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें पंजीकरण के उपरान्त महिलाओं को प्रभावी सुरक्षा दी जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य को वर्ष 2025 तक नशामुक्त राज्य बनाये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस हेतु राज्य, जनपद एवं थाना स्तर पर ए०एन०टी०एफ० का गठन किया गया है, जिसके द्वारा मादक पदार्थों के नियन्त्रण हेतु प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। कानून व्यवस्था के नियन्त्रण हेतु राज्य के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का सामना किये जाने के लिये पुलिस बल का आधुनिकीकरण किया जाना नितान्त आवश्यक है, इस हेतु राज्य के पुलिस बल को अत्याधुनिक हथियारों के एवं उपकरणों से सुसज्जित किया जाना है। वर्तमान में उत्तराखण्ड पुलिस में 18 प्रतिशत आवासीय भवन उपलब्ध है और इसी क्रम में नये थानों, पुलिस चौकियों एवं पुलिस कार्मिकों हेतु आवासीय भवनों का निर्माण कार्य किया जाना अपरिहार्य है क्योंकि इस कार्य को सम्पादित किये जाने हेतु राज्य सरकार को विशेष अनुदान के रूप में एकमुश्त 750 करोड़ रूपये की अविलम्ब आवश्यकता है और हमें आशा है कि इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार द्वारा हमारी सहायता अवश्य की जायेगी।

भारी उद्योग मंत्रालय ने दिया आदेश, एचएमटी की जमीन राज्य सरकार को मिली

भारत सरकार द्वारा एचएमटी की 45.33 एकड़ जमीन उत्तराखण्ड सरकार को हस्तांतरित कर दी गई है। इस संबंध में भारी उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया है। इसके अनुसार रानीबाग और हल्द्वानी स्थित एचएमटी की 45.33 एकड़ भूमि उत्तराखण्ड सरकार को 72 करोड़ 02 लाख 10 हजार रुपये की रिजर्व प्राईस पर हस्तांतरित की गई है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एचएमटी की भूमि उत्तराखण्ड सरकार को हस्तांतरित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह डबल इंजन सरकार की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित माँग को पूरा किया गया है। यह मामला काफी लम्बे समय से लम्बित था। अब प्रदेश सरकार को भूमि हस्तांतरित हो गई है। इसका उपयोग प्रदेश के हित में और प्रदेश के विकास हेतु किया जाएगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इसके लिये अनुरोध किया था। साथ ही अगस्त माह में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय के साथ बैठक में भी इस बात को उठाते हुए एचएमटी की उक्त भूमि उत्तराखण्ड सरकार को हस्तांतरित किये जाने का अनुरोध किया था।

रक्षा मंत्रालय कर सकता है लैंसडौंन का नाम परिवर्तन, जानिए क्या हो सकता है नया नाम


देहरादून। रक्षा मंत्रालय ने प्रस्ताव पर अमल किया तो उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले में स्थित सैन्य छावनी क्षेत्र लैंसडौन का नाम बदलकर ‘कालौं का डांडा (अंधेरे में डूबे पहाड़)’ हो जाएगा। 100 साल से भी अधिक पुराने लैंसडौन नाम को बदलने की तैयारी है। रक्षा मंत्रालय ने लैंसडौन के सैन्य अधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। लैंसडौन नाम से पहले इस इलाके को ‘कालौं का डांडा’ नाम से पुकारा जाता था। रक्षा मंत्रालय ने ब्रिटिशकाल में छावनी क्षेत्रों की सड़कों, स्कूलों, संस्थानों, नगरों और उपनगरों के रखे गए नामों को बदलने के लिए उत्तराखंड सब एरिया के साथ सेना के अधिकारियों से प्रस्ताव मांगें हैं।

उनसे ब्रिटिशकाल के समय के नामों के स्थान पर क्या नाम रखे जा सकते हैं, इस बारे में भी सुझाव देने को कहा गया है। बता दें कि स्थानीय स्तर पर लंबे समय से लैंसडौन का नाम बदलने की मांग होती आ रही है। स्थानीय लोग लैंसडौन का नाम कालौं का डांडा रखने की मांग करते आए हैं। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को भी पत्र भेजे जा चुके हैं।

तत्कालीन वायसराय लैंसडौन के नाम से बदल गया नाम
गढ़वाली जवानों की वीरता और अद्वितीय रणकौशल से प्रभावित होकर 1886 में गढ़वाल रेजीमेंट की स्थापना हुई। पांच मई 1887 को ले.कर्नल मेरविंग के नेतृत्व में अल्मोड़ा में बनी पहली गढ़वाल रेजीमेंट की पलटन चार नवंबर 1887 को लैंसडौन पहुंची। उस समय लैंसडौन को कालौं का डांडा कहते थे। इस स्थान का नाम 21 सितंबर 1890 तत्कालीन वायसराय लार्ड लैंसडौन के नाम पर लैंसडौन रखा गया।

608 हेक्टेयर में फैला है लैंसडौन
लैंसडौन नगर सैन्य छावनी क्षेत्र है, जो 608 हेक्टेयर में फैला है। नगर के आधे से अधिक भाग में बांज, बुरांस और चीड़ के वृक्षों के सदाबहार वनों का विस्तार है। यह एक प्रसिद्ध और पसंदीदा पर्यटक स्थल भी है।

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा समय-समय पर क्षेत्र के लोग नाम बदलने की मांग करते हैं। ऐसे प्रस्तावों का रक्षा मंत्रालय परीक्षण करता है। देश, काल और परिस्थितियों को देखकर प्रस्ताव पर विचार किया जाता है।

भैया दूज पर शीतकाल के लिए बंद हुए बाबा केदारनाथ के कपाट

भैया दूज के पावन अवसर पर प्रात: 8.30 बजे 11वें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा के कपाट बंद हुए और सेना के बैंड की मधुर धुन के बीच बाबा केदार की चल विग्रह डोली को मंदिर से बाहर लाकर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कराया गया। इस अवसर पर 2500 से ज्यादा श्रद्धालु कपाट बंद होने के साक्षी बने। (portal of shri kedarnath dham closed for winter season)

प्रांत 3.30 बजे ही केदारनाथ मंदिर खुल गया था। चार बजे से कपाट बंद करने की समाधि पूजन प्रक्रिया शुरू हो गयी। पुजारी टी गंगाधर लिंग ने भगवान केदारनाथ के स्यंभू ज्योर्तिलिंग को श्रृंगार रूप से समाधि रूप दिया गया ज्योर्तिलिंग को बाघंबर, भृंगराज फूल,भस्म, स्थानीय शुष्क फूलों- पत्तों, आदि से ढ़क दिया गया।इसके साथ ही भकुंट भैरव नाथ के आव्हान के साथ ही गर्भगृह तथा मुख्य द्वार को जिला प्रशासन की मौजूदगी में बंद किया गया। इसके साथ ही पूरब द्वार को भी सीलबंद किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के अवसर पर तीर्थयात्रियों का आभार जताया। कहा कि इस बार चारधाम यात्रा रिकार्ड पैंतालीस लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में नयी केदार पुरी अस्तित्व में आ चुकी है जहां तीर्थयात्रियों को हर संभव सुविधाएं मुहैया हो रही है। गौरीकुंड- केदारनाथ रोप वे के बनने से केदारनाथ यात्रा अधिक सुगम हो जायेगी।

इस अवसर पर सेना की 11 मराठा लाईट इ़फ्रंट्री रूद्रप्रयाग के बैंड की भक्तिमय धुनों तथा बाबा केदार की जय उदघोष से केदारनाथ धाम गुंजायमान रहा। मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि सामूहिक सहयोग समन्वय से यात्रा का सफलतापूर्वक समापन हुआ है।

कपाट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ के लिए प्रस्थान हुई। आज पंचमुखी डोली प्रथम पड़ाल राम पुर पहुंचेगी। कल 28 अक्टूबर शुक्रवार को देवडोली श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी प्रवास करेगी तथा 29 अक्टूबर शनिवारको श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। इसी के साथ इस वर्ष श्री केदारनाथ यात्रा का समापन हो जायेगा तथा पंचकेदार गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में भगवान केदारनाथ जी की शीतकालीन पूजाएं शुरू हो जायेगी।

इस यात्रा वर्ष चार धाम यात्रा में 43 लाख से अधिक तीर्थ यात्री दर्शन को पहुंचे। हेमकुंट साहिब को मिला कर यह संख्या पौने छयालीस लाख पहुंच गयी। 26 अक्टूबर गौवर्धन पूजा के अवसर पर श्री गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो गये है। आज दोपहर में श्री यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे।

27 अक्टूबर को बंद होंगे बाबा केदार और यमुनोत्री के कपाट, आज गंगोत्री के हुए बंद

विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट पर्व पर आज दोपहर 12 बजकर 01 मिनट पर बंद हो गए। इस अवसर पर तीर्थ यात्रियों की भीड़ उमड़ी। साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु भी पहुंचे हैं।

इस कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री के जवान सेना के बैंड के साथ मौजूद हैं। अब कपाट बंद होने के बाद देश-विदेश के श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास मुखीमठ (मुखवा) में कर सकेंगे।

27 अक्टूबर को बंद होंगे केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट
वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज पर 27 अक्टूबर को दोपहर 12रू 09 बजे बंद होंगे। यमुना की डोली लेने के लिए खरशाली गांव से शनि महाराज की डोली 27 अक्टूबर की सुबह यमुनोत्री पहुंचेगी। शीतकाल में यमुना के दर्शन खरशाली स्थित यमुना मंदिर में होंगे।

उधर, द्वादश ज्योर्तिलिंगों में शामिल भगवान केदारनाथ के कपाट 27 अक्टूबर यानी भैयादूज पर्व पर सुबह साढ़े आठ बजे वैदिक मंत्रोच्चार एवं पौराणिक परंपराओं के साथ विधिविधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
कपाट बंद होने के बाद भगवान की पंचमुखी उत्सव डोली रात्रि विश्राम के लिए प्रथम पड़ाव फाटा, 28 अक्टूबर को भोले बाबा की उत्सव डोली रात्रि विश्राम के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी तथा 29 अक्टूबर को पंचगद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी। शीतकाल के छह माह तक यहीं पर भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजाएं व भक्त दर्शन कर सकेंगे।