शिक्षक दिवस पर यंग एजुकेटर सम्मान से सम्मानित हुए ऋषिकेश के राजेश चंद्र

तीर्थनगरी के युवा व प्रसिद्ध कलाकार राजेश चंद्र को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय स्तर का सम्मान मिला है। यह अवार्ड उन्हें तमिलनाडु की ओर से दिया गया है।

शिक्षक दिवस पर नेशनल फॉउंडेशन फ़ॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलोपमेन्ट तमिलनाडु द्वारा कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें देशभर से शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए शिक्षको को सम्मानित किया गया। इस वर्ष उत्तराखंड से चित्रकार राजेश चन्द्र को यंग एजुकेटर सम्मान से नवाज़ा गया। यह सम्मान राजेश को 2020-2021 कला के क्षेत्र में उनके बतौर कला शिक्षक किये गए उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए दिया गया।

बता दें कि चित्रकारी के क्षेत्र में राजेश ने राष्ट्रीय व अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की। जिसमे सयुंक्त राष्ट्र संघ में की सागर दिवस की प्रदर्शनी में दो बार देश का प्रतिनिधित्व करने वाले व पहले चित्रकार है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण व उत्तराखंड की संस्कृति को कई दफा अपनी कला के द्वारा उन्होंने विश्व स्तर पर किया है जिसके लिए हाल ही में मुख्यमंत्री से भी सम्मानित हुए है।

शिक्षक दिवस के दिन ऑनलाइन माध्यम से तमिलनाडु द्वारा उनको ये राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। 25 सितम्बर तक उन्हें मेडल, प्रमाण पत्र व शिक्षकों की मैगजीन दी जाएगी, जिसमें 2021 के सभी सम्मानित शिक्षकों के बारे में कहानी होगी। राजेश ने बताया कि यह पुरुस्कार निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकादमी को समर्पित करना चाहते है। जहाँ मुफ्त शिक्षा पाकर वह इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

वीकेंड पर घूमने आए दो लोग गंगा की तेज धारा में बहे

नोएडा की एक एंड्राइड कंपनी का नौ सदस्यीय दल वीकेंड पर ऋषिकेश घूमने आया था। वह रामझूला के समीप दर्शन महाविद्यालय घाट पहुंचे। इस बीच एक व्यक्ति गंगा में हाथ धोने गया और अचानक पैर फिसलने से बहने लगे। तभी एक साथी उसे बचाने के लिए आगे बढ़े तो वह भी गंगा के तेज बहाव की चपेट में आ गये। किनारे पर खड़े साथियों को दोनों कुछ दूर तक बहते दिखे। इसके बाद दोनों ही गंगा की लहरों में ओझल हो गए। हादसे से पूरे ग्रुप के लोग सकते में है।

थानाध्यक्ष मुनिकीरेती कमल मोहन भंडारी ने बताया कि नोएडा की एक मोबाइल कंपनी से नौ लोगों का ग्रुप वीकेंड पर यहां घूमने आया था। वह रामझूला पुल के पास दर्शन महाविद्यालय का घाट पहुंचे। उनमें से दो लोग सुबह करीब नौ बजे गंगा में डूब गए। आपदा प्रबंधन दल को मौके पर बुलाकर रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है। एसडीआरएफ की टीम भी गंगा में उनकी तलाश में जुटी रही। बताया कि डूबने वालों में एक कंपनी के सेंटर हेड राहुल सिंह पुत्र स्व. प्रेमपाल सिंह निवासी 190 तहरी वाली गली कलाम, पुलिस लाइन मार्ग, बुलंदशहर, यूपी और दूसरे मैनेजर भानू मूर्ति पुत्र एबीएम नारायण, निवासी प्लैट 8 थर्ड फ्लोर, मयूर विहार फेस वन ईस्ट पूर्व दिल्ली के रूप में हुई है।

हरदा के तीन-तीन राजनीतिक दलों के लिए लगाया पूर्व आईएएस पर उगाही का आरोप

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चडीगढ़ से फेसबुक पर एक ऐसा पोस्ट लिखा है, जिसने उत्तराखंड के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है । हरदा ने एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पर अवैध उगाही का आरोप लगाया है। साथ ही तीन राजनीतिक दलों के साथ उगाही करने की बात भी कही है। दरअसल, पूर्व सीएम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा है । जिसमें उन्होंने लिखा है, चंडीगढ़ में हूं और आज सुबह बहुत जल्दी आंख खुल गई थी । मन में बहुत सारे अच्छे और आशंकित करने वाले दोनों भाव हैं। कभी अपने साथ लोगों के द्वेष को देख कर मन करता है कि सब किस बात के लिए और फिर भी मैं तो राजनीति में वह सब कुछ प्राप्त कर चुका हूं, जिस लायक मैं था । फिर भी मेरे मन में एक भाव आ रहा है कि सभी लड़ाइयां चाहे, वह राजनीतिक क्यों ना हो, वो स्वयं सिद्धि के लिए नहीं होती हैं।हरीश रावत ने कहा है कि मैं जानता हूं कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल मेरे ऊपर कई प्रकार के अत्याचार ढाने की भी कोशिश करेगा, जिसकी तैयारियां हो रही हैं। इसका मुझे आभास है, लेकिन जैसे-जैसे ऐसा आभास बढ़ता जा रहा है, चुनाव में लड़ने की मेरी संकल्प शक्ति भी बढ़ती जा रही है।

हरीश रावत का कहना है कि एक नहीं बल्कि कई निहित स्वार्थ जो अलग-अलग स्थानों पर विद्यमान हैं, मेरी राह को रोकने के लिए एकजुट हो रहे हैं। हरीश रावत ने एक पूर्व नौकरशाह पर अवैध उगाही का आरोप लगाते हुए कहा कि एक रिटायर्ड नौकरशाह आज तो सत्तारूढ़ दल ही नहीं, बल्कि तीन-तीन राजनीतिक दलों के लिए एक साथ राजनीतिक उगाही कर रहा है । इसमें खनन की उगाई भी बंट रही है, क्योंकि उत्तराखंड में बहुत सारे लोगों के आर्थिक स्वार्थ जुड़े हुए हैं। उन सभी लोगों के एकजुट होने का प्रयास चल रहा है, ताकि वो सत्तारूढ़ दल की कुछ मदद कर सकें। वहीं, हरदा ने आगे लिखा है कि कहीं-कहीं 2022 नहीं तो 2027 की सुगबुगाहट भी हवाओं में है, मगर चंडीगढ़ का यह एकांत मुझे प्रेरित कर रहा है कि जितनी शक्ति बाकी बची है, उससे उत्तराखंड और उत्तराखंडियत की रक्षा, पार्टी की मजबूती के लिए, जो मैं अपने व्यक्तिगत कष्ट मान-अपमान और यातनाओं को झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।

टिहरी निवासी जबर सिंह के पार्थिव शरीर को भारत में लाने का अनुरोध

टिहरी जिले के कंदीसौड़ स्थित थौलधार ब्लाक निवासी जबर सिंह के पार्थिव शरीर को नाइजीरिया से भारत वापस लाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विदेश मंत्री एस जय शंकर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि भारत सरकार इस मसले पर गंभीरता से प्रयास करे।

ज्ञातव्य है कि टिहरी जनपद के कंदीसौड़ गांव के निवासी जबर सिंह नाइजीरिया स्थित ताज रेस्टोरेंट में काम में कार्यरत थे, बीते 24 अगस्त को देर रात को अचानक उनका स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका आकस्मिक निधन हो गया था। जबर सिंह के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिजनों द्वारा उनका पार्थिव शरीर अपने गाँव लाये जाने हेतु नाइजीरिया सरकार से सम्पर्क किया गया, लेकिन उनके द्वारा स्व. जबर सिंह के पार्थिव शरीर को भारत वापस भेजे जाने में असमर्थता व्यक्त कर दी गई। स्व. जबर सिंह के परिवारजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्वयं के संसाधनों से वे मृतक का शरीर भारत वापस लाने में असमर्थ है।

इस बात का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने भारत सरकार के विदेश मंत्री से विशेष अनुरोध करते हुए इस मामले की गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर स्व. जबर सिंह के पार्थिव शरीर भारत वापस लाये जाने हेतु केन्द्र सरकार से आग्रह किया है. विदेश मंत्रालय से इस सम्बन्ध में राज्य सरकार को सकारात्मक आश्वासन मिला है।

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में 13वां विश्वस्तरीय एटीएलएस एवं 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत शुरू हो गया। जिसमें एम्स के साथ ही अन्य मेडिकल संस्थानों के 16 चिकित्सक एवं 16 सीनियर नर्सिंग ऑफिसर व नर्सिंग ऑफिसर टर्सरी केयर सेंटर में भर्ती होने वाले दुर्घटना में घायल ट्रॉमा मरीजों के उपचार संबंधी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

आज एडवांस सेंटर फॉर कंटिनिवस प्रोफेशनल डेवलपमेंट (एसीसीपीडी विभाग) में एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में तीन दिवसीय एटीएलएस एवं एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। निदेशक ने कहा कि दुनिया का कोई भी ट्रॉमा सिस्टम ट्रेंड ट्रॉमा चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के बिना प्रभावी नहीं हो सकता। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए इस तरह का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नितांत आवश्यक है, इसकी सबसे मुख्य वजह यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न तरह की दुर्घटनाओं के कारण ट्रॉमा के मामले सर्वाधिक होते हैं, लिहाजा प्रत्येक हैल्थ केयर वर्कर को टर्सरी केयर लेवल पर चिकित्सा कार्य करने के लिए यह प्रशिक्षण लेना जरुरी है, तभी वह दुर्घटना में घायल मरीजों की ठीक प्रकार से देखभाल कर सकते हैं।
उनका कहना है कि ट्रॉमा मैनेजमेंट एक टीमवर्क है, लिहाजा उसकी ट्रेनिंग भी विश्वस्तरीय मानकों के तहत कराई जानी जरुरी है। ट्रेनिंग प्रोग्राम डा. अजय कुमार व दीपिका कांडपाल के संयोजन में आयोजित किया जा रहा है।
ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम की अगुवाई में आयोजित एटीएलएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर प्रोग्राम डायरेक्टर डा. मधुर उनियाल व ट्रेनिंग फैकल्टी डा. फरहान उल हुदा, डा. अजय कुमार,डा. जितेंद्र चतुर्वेदी, डा. दिवाकर कोयल, डा. अंकिता काबि, दिल्ली एम्स ट्रामा सेंटर से डा. दिनेश बगराई ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया, जबकि एटीसीएन कोर्स में महेश देवस्थले, डा. राजेश कुमार, चंदू राज बी., अरुण वर्गीस, जोमोन चाको ने प्रशिक्षणार्थियों को ट्रॉमा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।

अफगानिस्तान से वापस लौटे उत्तराखण्ड वासियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय के जनता मिलन हॉल में अफगानिस्तान से सकुशल लौटे 56 उत्तराखण्ड वासियों का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन संघर्ष एवं जतन के बाद वतन वापस आने वालों का वे प्रदेश में स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से उत्तराखण्ड वासियों की सकुशल वापसी के लिये वे निरंतर प्रयासरत रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का भी आभार व्यक्त करते हुए उनके सहायोग के लिये धन्यवाद भी ज्ञापित किया। कहा कि यह सब प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व के कारण संभव हो पाया। प्रधानमंत्री मोदी के कारण आज दुनिया में भारत का स्वाभिमान व इज्जत बढ़ी है। शक्तिशाली भारत की पहचान बनी है। देश के सक्षम एवं मजबूत लीडरशिप के कारण हमारे लोग विदेशों में सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में फंसे लोगों को सकुशल वापसी के प्रयास जारी रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के लोगों को दिल्ली से उनके घरों तक वापस लाने के लिये आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये स्थानिक आयुक्त को भी निर्देश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक 400 से अधिक लोगों की उत्तराखण्ड वापसी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड लौटे लोगों के स्वास्थ्य एवं स्वरोजगार की समस्याओं के समाधान का भी रास्ता तलाशा जायेगा। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित 56 लोगों के साथ ही सभी वापस लौटे लोगों के सुखद भविष्य की भी कामना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि वे भी निरंतर अफगानिस्तान में फंसे लोगों के परिवार के सम्पर्क में रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड लौटे लोगों में से यदि कोई अपना उद्यम स्थापित करना चाहेगा तो उसके लिये सहयोग दिया जायेगा।

इस अवसर पर गोरखाली सुधार सभा के पदाधिकारियों ने गोरखा समाज की विभिन्न समस्याओं से सम्बन्धित ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को सौंपा। इस अवसर पर विशेष सचिव मुख्यमंत्री डॉ पराग मधुकर धकाते, जिलाधिकारी आर राजेश कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, संयोजक चेतन गुरंग, केंट वार्ड के पूर्व उपाध्यक्ष विष्णु गुप्ता, गोरखाली सुधार सभा की पुष्पा, सुधा, उमा के साथ ही बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित थे।

तीर्थ पुरोहितों से मुलाकात में सीएम ने कहा, नहीं होगा अहित


सीएम आवास में देवप्रयाग विधायक विनोद कण्डारी और केदारनाथ की पूर्व विधायक शैलारानी रावत के नेतृत्व में केदारनाथ व बदरीनाथ के तीर्थ पुरोहितों के प्रतिनिधिमण्डल ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से भेंट की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड से तीर्थ पुरोहितों, हक हकूक धारियों और पण्डा समाज का किसी प्रकार का अहित नहीं होने दिया जाएगा। वरिष्ठ नेता श्री मनोहर कांत ध्यानी जी को संबंधित तीर्थ पुरोहितों के पक्ष को जानकर पूरी रिपोर्ट देने का आग्रह किया गया है। राज्य सरकार सभी को सुनेगी और उनकी चिंताओं का समाधान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कम्यूनिकेशन गैप नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालेगी। बातचीत से सभी शंकाएं दूर की जाएगी और जहां सुधार की जरूरत होगी, राज्य सरकार सुधार करेगी।

बदरीनाथ मास्टर प्लान को मूर्त रूप देने से पूर्व सभी संबंधित पक्षों की भी बात सुनी जाएगी और उनकी शंकाओं का निवारण किया जाऐगा। सभी के हित यथासंभव सुरक्षित रहेंगे।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी वार्ता के माध्यम से रास्ता निकाले जाने पर सहमति व्यक्त की।

बुलंदशहर में कल्याण सिंह की निकली अंतिम यात्रा, सीएम धामी भी हुए सम्मिलित


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नरोरा, बुलंदशहर जाकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, राजस्थान के निवर्तमान राज्यपाल कल्याण सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल होकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. कल्याण सिंह योग्य प्रशासक एवं कुशल राजनीतिज्ञ थे, वे हम सभी के लिये हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगे।

मुख्यमंत्री के साथ ही केन्द्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक एवं भाजपा प्रदेश अक्ष्यक्ष मदन कौशिक ने भी स्व. कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।

11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है इंजीनियरिंग का नायाब नमूना गरतांग गली की सीढ़ियां

भारत-तिब्बत व्यापार की गवाह रही उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का देश-विदेश के पर्यटक दीदार करने लगे हैं। गरतांग गली की सीढ़ियों का पुनर्निर्माण कार्य जुलाई माह में पूरा किया जा चुका है। इसके बाद से ही ऐसे में रोमांचकारी जगहों पर जाने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह जगह एक शानदार विकल्प है।

गरतांग गली की करीब 150 मीटर लंबी सीढ़ियां अब नए रंग में नजर आने लगी हैं। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी गरतांग गली की सीढ़ियां इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। इंसान की ऐसी कारीगरी और हिम्मत की मिसाल देश के किसी भी अन्य हिस्से में देखने के लिए नहीं मिलेगी।

1962 भारत-चीन युद्ध के बाद इस लकड़ी की सीढ़ीनुमा पुल को बंद कर दिया गया था, अब करीब 59 सालों बाद वह दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया है। कोरोना गाइडलाइन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस ही लोगों को पुल में भेजा जा रहा है। पेशावर से आए पठानों ने 150 साल पहले इस पुल का निर्माण किया था। आजादी से पहले तिब्बत के साथ व्यापार के लिए उत्तकाशी में नेलांग वैली होते हुए तिब्बत ट्रैक बनाया गया था। यह ट्रैक भैरोंघाटी के नजदीक खड़ी चट्टान वाले हिस्से में लोहे की रॉड गाड़कर और उसके ऊपर लकड़ी बिछाकर रास्ता तैयार किया था। इसके जरिए ऊन, चमड़े से बने कपड़े और नमक लेकर तिब्बत से उत्तरकाशी के बाड़ाहाट पहुंचाया जाता था। इस पुल से नेलांग घाटी का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। यह क्षेत्र वनस्पति और वन्यजीवों के लिहाज से काफी समृद्ध है और यहां दुर्लभ पशु जैसे हिम तेंदुआ और ब्लू शीप यानी भरल रहते हैं।

सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है नेलांग घाटी
नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। गरतांग गली भैरव घाटी से नेलांग को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर जाड़ गंगा घाटी में मौजूद है। उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी चीन सीमा से लगी है। सीमा पर भारत की सुमला, मंडी, नीला पानी, त्रिपानी, पीडीए और जादूंग अंतिम चौकियां हैं।

वहीं, सतपाल महाराज पर्यटन मंत्री उत्तराखंड कहा ने भारत सरकार ने पर्यटकों की आवाजाही पर लगाई थी रोक। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। यहां के ग्रामीणों को एक निश्चित प्रक्रिया पूरी करने के बाद साल में एक ही बार पूजा अर्चना के लिए इजाजत दी जाती रही है। इसके बाद देश भर के पर्यटकों के लिए साल 2015 से नेलांग घाटी तक जाने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इजाजत दी गई।

पर्यटन सचिव ने बताया कि दिलीप जावलकर उत्तराखंड धरोहर संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके तहत नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का 64 लाख रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कार्य पूरा करने के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। गरतांग गली के खुलने के बाद स्थानीय लोगों और साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों को फायदा मिल रहा है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह एक मुख्य केंद्र बन रहा है।

वहीं, मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी ने कहा के पुनर्निर्माण कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुरानी शैली में पुननिर्माण कार्यों को जुलाई माह में पूरा कर लिया गया था। कोरोना नियमों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

नेलांग घाटी के आसपास-हर्षिल
हर्षिल, हिमालय की तराई में बसा एक गांव, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से गंगोत्री की दूरी मात्र 21 किलो मीटर ही बचती है, जो कि हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। गंगोत्री तक रास्ता अपने आप में इतना मनमोहक है कि एक बार से आपका मन नहीं भरेगा।

केदारताल
केदारताल उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत झीलों में से एक ताल है। यह गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्थित, गढ़वाल हिमालय में दूर केदार ताल निश्चित रूप से साहसिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जो भागीरथी की एक सहायक नदी है।

अफगानिस्तान में उत्तराखंड के लोग भी फंसे, सरकार हुई सक्रिय

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि अफगानिस्तान में उत्तराखण्ड के जो लोग फंसे हुए हैं, उन्हें वापिस सकुशल लाने के लिए राज्य सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। ये लोग जल्द ही सकुशल अपने घर वापस आ जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने आज ही इस संबंध में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में भी बात कर आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम केन्द्र सरकार के लगातार सम्पर्क में हैं। केन्द्र सरकार द्वारा अफगानिस्तान से प्रत्येक भारतीय की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा रही है।