उत्तरायणी का त्योहार और मकर सक्रांति का पर्व हिन्दुओं के लिए है महत्वपूर्ण

उत्तराखंड में हर तीज-त्योहार का अपना अलग ही उल्लास है। यहां शायद ही ऐसा कोई पर्व होगा, जो जीवन से न जोड़ता हो। ये पर्व-त्योहार उत्तराखण्डी संस्कृति के प्रतिनिधि भी हैं और संस्कारों के प्रतिबिंब भी। हम ऐसे ही अनूठे पर्व ‘मकरैंण’ से आपका परिचय करा रहे हैं। यह पर्व गढ़वाल, कुमाऊं व जौनसार में अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है।
मकर संक्रान्ति का त्यौहार उत्तराखण्ड में उत्तरायणी, उत्तरैण आदि नामों से जाना जाता है। उत्तरायणी शब्द उत्तरायण से बना है। उत्तरायण मतलब जब सूर्य उत्तर की ओर जाना शुरू होता है। दरअसल, त्योहार एवं उत्सव देवभूमि के संस्कारों में रचे-बसे हैं। पहाड़ की ‘पहाड़’ जैसी जीवन शैली में वर्षभर किसी न किसी बहाने आने वाले ये पर्व-त्योहार अपने साथ उल्लास एवं उमंगों का खजाना लेकर भी आते हैं।
हिन्दुओं के सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक मकर सक्रांति भी है। सूर्य ग्रह के मकर राशि में प्रवेश करने के कारण मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 14 जनवरी को पड़ रहा है। मकर संक्रान्ति के दिन गंगा स्नान और दान पुण्य का विशेष महत्व है। साल 1982 में उत्थान मंच में उत्तरायणी मेले का पहली बार आयोजन किया गया था। चार दशक बाद भी पूरे रीति-रिवाजों के साथ इस त्योहार को मनाया जाता है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे “संक्रांति” कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे “पोंगल पर्व” के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। वहीं असम में “बिहू पर्व” के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है।
इस अवसर पर कुमाऊ क्षेत्र के बागेश्वर जिले में प्रसिद्ध उत्तरायणी कौथिक (मेला) का आयोजन किया जाता है। यह उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में आयोजित सबसे बड़े मेलों में से एक है और हर साल 14 जनवरी को आयोजित होने वाले मकर संक्रांति उत्सव के दौरान मनाया जाता है। उत्तरायणी महोत्सव उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में मनाया जाता है। मेले में आने वाले देश-विदेश के पर्यटक व स्थानीय लोग यहां पर होने वाली विभिन्न गतिविधियों के साथ मनोरंजन का भी आनंद लेते हैं। साथ ही, स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठा सकते हैं और राज्य के हस्तनिर्मित शिल्प खरीद सकते हैं। भारत में सबसे लोकप्रिय मेलों में से एक के रूप में जाना जाता है, उत्तरायणी मेला बागेश्वर में शुरू हुआ, लेकिन अब उत्तराखंड के अंदर और बाहर विभिन्न शहरों में फैल गया है। यह त्योहार स्थानीय लोगों के लिए अपनी संस्कृति, विरासत, नृत्य और संगीत को प्रदर्शित करने का एक अवसर है।

यह है घुघुति की कथा
एक राजा था, जिसकी कोई संतान नहीं थी तो मंत्री हर वक्त इस षड्यंत्र में रहता था कि राजा के बाद राज्य उसे मिल जाए। लेकिन एक संत के आशीर्वाद से राजा को एक पुत्र की प्राप्ति हुई। प्रसन्न होकर रानी मां बेटे को एक माला पहना दी। युवराज थोड़ा बड़ा हुआ और खेलने-कूदने लगा। उसे ये माला बहुत प्रिय थी। रानी अपने बेटे को प्यार से घुघुतिया कहकर बुलाती थी। जब राजकुमार शैतानी करता तो वह कहती कि तंग मत कर नहीं तो तेरी माला कौंवे को दे दूंगी।
फिर वह कहने लगती, काले कौंवा काले घुघुति माला खा ले। यह सुनकर बहुत से कौंवे आ जाते थे। रानी मां उनके लिए भी रोटी और दाने डाल देती। धीरे-धीरे वे कौंवे राजकुमार के मित्र बन गए। उधर मंत्री का षड्यंत्र जारी था। एक दिन उसने राजकुमार का अपहरण कर लिया। जब मंत्री के साथी राजकुमार को लेकर जंगल जा रहे थे तो उसके रोने की आवाज सुनकर बहुत से कौवे आ गए। उन्होंने उसकी घुघती माला पहचान ली और गले से झपट कर उड़ गए। तभी से उत्तराखंड में घुघुती माला बनाए जाने की पंरपरा चल पड़ी। बच्चे घुघुती की बनी माला गले में डाल लेते हैं और कौवों को बुलाते हैं। काले कौवा काले घुघुति माला खा ले। उत्तराखंड की वादियों में ये आवाज आज भी गूंज रही है।

उत्तरायणी का त्यौहार जीवन में सकारात्मक सोच के साथ सदैव कर्म के पथ पर आगे बढ़ने की भी प्रेरणा देता है। यह पावन पर्व मांगलिक कार्यों के शुभारम्भ से भी जुड़ा है। भगवान सूर्य की आराधना का यह पर्व हम सबके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। कोरोना काल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोरोना गाइडलाइन का पालन कर पर्व मनाएं। शासन व प्रशासन की ओर से सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं।
-दिलीप जावलकर, सचिव पर्यटन

श्रीमद्भागवत कथा कभी सम्पूर्ण नही होती, विश्राम के बाद दूसरे स्थान में शुरु हो जाती है-व्यास

गुमानीवाला कैनाल रोड़ गली नम्बर 6 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ विधिविधान एवं शांति पूर्वक सम्पन्न हो गयी। इस अवसर पर कथा व्यास वैष्णवाचार्य पण्डित शिव स्वरूप आचार्य ने कहा कि प्रभु नाम संकीर्तन कथाएं कभी सम्पूर्ण नहीं होती बस स्थान परिवर्तन होता है। इसलिए कथा विश्राम लेती हैं। कथा विश्राम के अवसर पर ग्रामीणों ने कथा व्यास सहित कथा में सम्मिलि आचार्यों का अंग वस्त्र भेंटकर सम्मान किया।
कथा विश्राम के बाद भव्य भण्डारे का आयोजन किया गया। कथा के समापन पर ग्रामीणों ने राष्ट्रीय कथा वक्ता कथा व्यास वैष्णवाचार्य पण्डित शिव स्वरूप नौटियाल को सम्मानित कर राज्य के वाद्य यंत्र ढोल दमाऊ के साथ विदाई दी।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य संजीव चौहान, आचार्य दिल मणि पैन्यूली, दर्शन लाल सेमवाल, दिनेश खण्डूरी, शिव प्रसाद सेमवाल, आचार्य महेश पन्त, उदय पैन्यूली, जगदीश नौटियाल, प्रमोद चौहान, धनी राम नौटियाल, नंद लाल यादव, रोशन लाल बेलवाल, विजय राम जोशी, पुष्कर सिंह रावत, मंगला देवी नौटियाल, अनुराधा, रेखा सिलस्वाल, शोभा नेगी, मंगसिरी रावत, सविता रतूड़ी, शिवि रतूड़ी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

हरिनाम कथा जीवन की व्यथाओं का हरण करती हैं-कथा व्यास

गुमानीवाला कैनाल रोड़ गली नम्बर 6 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए कथा व्यास वैष्णवाचार्य पंडित शिव स्वरूप नौटियाल ने द्वितीय दिवस की कथा में कहा कि हरिनाम कथा जीवन की व्यथाओं का हरण करती हैं। जो सच्चे मन से प्रभु नाम का स्मरण करता है, उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
कथा श्रवण करने वालों में धनी राम नौटियाल, नन्द लाल यादव, उदय पैन्यूली, जगदीश नौटियाल, रोशन लाल बेलवाल, विजय राम जोशी, प्रमोद चौहान, पुष्कर सिंह रावत, मंगला देवी, अनुराधा नौटियाल, रेखा सिलस्वाल, शोभा नेगी, मंगसीरी रावत सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

ब्रह्मलीन महंत प्रदीप दास महाराज को उनके कार्यो के लिए याद किया

ब्रह्मलीन महंत प्रदीप दास महाराज की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर कबीर चौरा आश्रम में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंन्द महाराज ने की।
इस अवसर पर संतों ने कहा कि प्रदीप दास महराज ने जो वृक्ष लगाया आज वह फल फूल रहा है। उनके उत्तराधिकारी के रूप में महंत कपिल मुनि महाराज के द्वारा गुरु परंपरा को सदैव आगे बड़ा रहे है। उनके द्वारा गौ सेवा अन्न क्षेत्र निर्धन असहाय लोगों की मदद निरंतर चल रही है।
कार्यक्रम में हरिद्वार और ऋषिकेश के महामंडलेश्वर रिशेश्वार नन्द, महामंडलेश्वर जगदीश आनंद, महामंडलेश्वर हठयोगी, महाराज महंत दुर्गा दास महाराज, महंत हरि बल्लभ दास केशवानंद, आनंदमय, आशुतोष, परमानंद, महंत बलवीर सिंह, महंत प्रकाशानंद, रतन स्वरूप, महंत विनय सारस्वती, महंत रवि प्रपन्नाचार्य, महाराज महंत शिवानंद, महंत निर्मल दास, गोपाल गिरी, रामानुजाचार्य, गोपालाचार्य, हर्षवर्धन शर्मा, महंत वत्सल शर्मा आदि ने उन्हें श्रद्धांजली अर्पित की।

संतों के सानिध्य में ही व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है-खरोला

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजपाल खरोला ने जानकारी देते हुए बताया कि आज ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कबीर चौराहा आश्रम में स्व. प्रदीप दास महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में सम्मलित होकर उनकी स्मृति को नमन करते हुए अपने विचार रखे।
खरोला ने कहा कि श्रद्धांजलि समारोह की अध्यक्षता महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज ने की और कार्यक्रम के आयोजक महंत कपिल मुनि और सैकड़ो की संख्या ने संत समाज समारोह में उपस्थित रहा।
खरोला ने कहा कि स्व. प्रदीप दास महाराज समाज के लिये सोचते और उसके भले के लिये प्रयास करते थे और धर्मकर्म के काम के साथ ही समाज को आधुनिक बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
खरोला ने कहा कि संतो का जीवन गंगा नदी के सामान होता है जिस प्रकार माँ गंगा का जल जिस-जिस स्थान से जाता है वह की भूमि, वातावरण को शुद्ध कर देती है उसी प्रकार संत के चरण जिस जिस स्थान से होकर जाते है वहा की भूमि और वहा के लोगो की सोच और वातावरण को शुद्ध करने का काम करते है।
खरोला ने कहा कि राष्ट्र की एकता अखंडता बनाए रखने में संत महापुरुषों की निर्णायक भूमिका रही है। संत महापुरुष ही अपना पूरा जीवन लोक कल्याण के कार्यों और भक्तों के कल्याण के लिए ईश्वर की भक्ति में समर्पित करते हैं। खरोला ने कहा कि संतों से ही भारतीय संस्कृति की पहचान है। संतों के सानिध्य में ही व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है।

ऋषिकेश विधानसभा में आसराहीन बुजुर्गों को जल्द मिलेगी छत

रायवाला और आसपास के क्षेत्रों के आसराहीन बुजुर्गों को जल्द छत मिलेगी। गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने रायवाला क्षेत्र में 5 करोड़ की लागत से बनने वाले वृद्ध आश्रम का शिलान्यास किया है।
समाज कल्याण विभाग की ओर से स्वीकृत वृद्ध आश्रम का शिलान्यास करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि दुर्भाग्यवश जिन वृद्धजनों को परिवार ने त्याग दिया और जो आसराहीन हैं, उन सभी लोगों के लिए यह आश्रम वरदान साबित होगा। कहा कि वृद्ध आश्रम भवन का निर्माण ग्रामीण विकास विभाग करेगा।
मौके पर जिला समाज कल्याण अधिकारी गोवर्धन सिंह, आरडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता तेजपाल सिंह, अवर अभियंता राजेश थपलियाल, बृजपाल सिंह, प्रधान रोहित नौटियाल, सागर गिरी, भाजपा मंडल अध्यक्ष गणेश रावत, जिला पंचायत सदस्य दिव्या बेलवाल, अंजना चौहान आशीष जोशी, बबीता रावत, सतपाल सैनी, सपना गुसाईं, ऋषिराम शर्मा, गोपाल रावत, बबीता, कमल कुमार, लक्ष्मी गुरुंग, तुलसी पांडे, अजय पांडे, महेंद्र प्रताप आदि मौजूद रहे।

केन्द्रीय कैबिनेट का निर्णय, धारचूला में महाकाली नदी पर बनेगा पुल

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के संबंध में अनुराग ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत द्वारा धारचूला में महाकाली नदी पर पुल का निर्माण किया जाएगा। उक्त संबंध में शीघ्र दोनों देशों के मध्य एमओयू साइन किया जाएगा। उक्त पुल का निर्माण 3 वर्षों में पूर्ण किया जाएगा।
धारचूला में भारत-नेपाल के मध्य पुल निर्माण से धारचूला के सीमांत निवासियों के साथ-साथ सीमान्त नेपाली नागरिकों को भी फायदा होगा जिससे भारत-नेपाल के रोटी-बेटी एवं व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिलेगी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत व नेपाल के रिश्ते और मजबूत होंगे।
उल्लेखनीय है छारछुम (धारचूला) व धाप (नेपाल) के मध्य लगभग 110 मीटर टू-लेन सड़क पुल के निर्माण हेतु पीडब्ल्यूडी द्वारा मिट्टी की जांच/हाइड्रोलॉजी विश्लेषण हेतु डीपीआर, आईआईटी दिल्ली को भेजी गई थी।

बेंगलुरु में साहित्यकार डॉ. धीरेंद्र रांगड़ को साहित्य गौरव सम्मान मिला

ऋषिकेश के साहित्यकार डॉ. धीरेंद्र रांगड़ को साहित्य गौरव सम्मान मिला है। उन्हें यह सम्मान बेंगलुरु में आयोजित कर्नाटक साहित्य महोत्सव में साहित्य साधक सम्मान तथा कर्नाटक साहित्य साधक मंच बेंगलुरु ने दिया है।
ऋषिकेश निवासी साहित्यकार डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने बताया कि बीते रोज बेंगलुरु में कर्नाटक साहित्य महोत्सव का आयोजन हुआ। इसमें साहित्य साधक सम्मान तथा कर्नाटक साहित्य साधक मंच बेंगलुरु द्वारा उन्हें साहित्य गौरव सम्मान से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान साहित्य की विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय रचनात्मक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। कहा कि इस कार्यक्रम में देशभर से कई कवियों, कलाकारों, समाजसेवियों आदि को सम्मानित किया गया। मौके पर कार्यक्रम अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव, अरुण चौधरी, आकाशवाणी के पूर्व निर्देशक मिलन अहमद, जीवेंद्र झा, प्रदीप जोशी, ज्ञानचंद मर्मज्ञ आदि उपस्थित रहे।

कृषि मंत्री ने पर्यावरण मित्रों को सम्मानित किया

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मुनिकीरेती को स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में प्रदेश में प्रथम स्थान दिलाने में पर्यावरण मित्रों का अहम योगदान है। कोरोनाकाल के दौरान जिस तरह से उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था को दुरस्त रखा, वह काबिले तारीफ है। पर्यावरण मित्रों को उन्होंने पुरस्कार देकर नवाजा।
मंगलवार को नगर पालिका मुनिकीरेती की ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में प्रदेश में प्रथम स्थान पाने पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने पालिका के पर्यावरण मित्रों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण मित्रों की मेहनत के दम पर ही चौथी बार मुनिकीरेती पालिका स्वच्छता में अव्वल रही है। उनके काम की सराहना करते हुए उनकी पीठ थपथपाई।
पालिका अध्यक्ष रोशन रतूड़ी और अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने अपने कर्मचारियों के काम की तारीफ की। बताया कि पालिका को साढ़े सात लाख रुपये मिले हैं। ईनाम की राशि में सफाई निरीक्षक को 15 हजार और कर्मचारियों को 5715 रुपये दिए जा रहे हैं। मौके पर मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती, सभासद सुभाष चौहान, बिन्नू चौहान, सुषमा नेगी, मीनू गौडियाल, विनोद सकलानी, धर्म सिंह, मनोज बिष्ट, गजेंद्र सजवाण, बीना जोशी, कुंती उनियाल, कौशल चौहान, रोहित आदि रहे।

कूड़ा लाओ, काफी पियो
पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने बताया कि पालिका की ओर स्वच्छता में और बेहतर प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत एक कॉफी मशीन खरीदी गई है। जो व्यक्ति कूड़ा लायेगा उसे काफी पिलाई जायेगी। साथ ही इसके साथ उनका पंजीकरण किया जायेगा। लकी ड्रॉ के माध्यम से उन्हें पुरस्कार भी दिया जायेगा।

जहां भी रहूं उत्कृष्ट कार्य करूंगा-भट्ट
मंगलवार को नगर पालिका मुनिकीरेती के ईओ बद्री प्रसाद भट्ट को अध्यक्ष रोशन रतूड़ी समेत समस्त कर्मियों ने भावभीनी विदाई दी। अध्यक्ष ने पुष्प गुच्छ तो कर्मियों ने ईओ स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस दौरान डोईवाला से स्थानांतरित होकर आए ईओ उपेन्द्र तिवारी ने चार्ज संभाला।
पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने कहा कि कहा कि ईओ बीपी भट्ट मुनिकीरेती पालिका में सिर्फ अधिकारी के तौर नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़ कर यहाँ पर कार्य किया है। जिसका परिणाम यह रहा कि इस निकाय ने प्रदेश में स्वच्छ सर्वेक्षण में दो बार प्रथम स्थान प्राप्त किया है। कहा कि स्थानांतरण सरकारी विभागों की एक रूटीन प्रक्रिया हैं। ईओ भट्ट ने कहा कि हमें जो जिम्मेदारी दी जाती है, उसे बखूबी ढंग से पूरा करना चाहिए। यहां गंगा किनारे काम करना अच्छा अनुभव सदैव स्मरणीय और बेहतरीन रहेगा। आगे भी यही कोशिश जारी रहेगी कि जहां रहूं वहां उत्कृष्ट कार्य करूं।

हीरा अवार्ड-2021 से सम्मानित हुए डॉ एसडी जोशी और समाजसेवी राकेश बिजल्वाण

ड्रीम्स संस्था की ओर उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ठ कार्यों के लिए डॉ एसडी जोशी और समाजसेवी राकेश बिजल्वाण को “हीरा अवार्ड-2021 सम्मान” से नवाजा गया। राजधानी देहरादून में ड्रीम्स संस्था की ओर से आयोजित हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 25 हस्तियों को ड्रीम्स संस्था (डेवलेपमेंड इन रूरल एम्बोसमेंट एंड मोटिवेशन सोसायटी) की ओर से हीरा अवॉर्ड-2021 से सम्मानित किया गया। कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, पद्श्री कल्याण रावत, पद्श्री प्रीतम भरतवाण ने सभी को स्मृति चिन्ह देकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। संस्था के महासचिव दीपक नौटियाल ने बताया कि उनकी संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, स्वरोजगार, ग्रामीण कृषि, कौशल विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही है। पिछले 14 सालों से उनकी संस्था इस कार्य में लगी हुई है।

डॉ एसडी जोशी और राकेश बिजल्वाण बने जरूरतमंदों के लिए देवदूत
उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में डॉ एसडी जोशी और समाजसेवी राकेश बिजल्वाण की जोड़ी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। विचार एक नई सोच संस्था के बैनर तले शुरू हुआ डॉ एसडी जोशी का ”स्वस्थ घर-स्वस्थ उत्तराखंड“ निशुल्क हैल्थ कैंप अभियान आज जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। डॉ जोशी के इस काम में समाजसेवी राकेश बिजल्वाण कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ निभा रहे हैं। राज्य के पर्वतीय जनपदों में दोनों की जोड़ी घर-घर जाकर लोगांें को स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करने का काम कर रही है।
डॉ जोशी जरूरतमंद मरीजों के लिए देवदूत से कम नही है। आर्थिक अभावों में जो लोग अपना और अपनों का ईलाज नहीं करा पाते हैं ऐसे मरीजों को जब उनके गांव उनके घर में निशुल्क हैल्थ कैंप लगाकर देखने डॉ जोशी पहुंचते हैं तो मरीज का आधा रोग पहले ही दूर हो जाता है। राकेश बिजल्वाण डॉ जोशी के सारथी की भूमिका में नजर आते हैं। मरीजों को डॉ जोशी के निर्देशानुसार निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही कई प्रकार की जांचें भी निशुल्क की जाती है।
डॉ जोशी का कहना है कि उनका फोकस पर्वतीय जिलों के हर दुर्गम गांवों में जाकर निशुल्क हैल्थ कैंप लगाने का है। उनको सुकून मिलता है जब वह जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचते हैं और उनकी बीमारियों का इलाज कर पाते हैं। उनका यह अभियान लगातार जारी रहेगा। पुरस्कार पाकर और बेहत्तर करने की प्रेरणा मिलती है। अगर आपके काम का आकलन लोग कर रहे हैं तो आपकी मेहनत सफल हो जाती है।
समाजसेवी राकेश बिजल्वाण ने कहा डॉ जोशी उनके प्रेरणासोत्र हैं। उनकी संस्था और वह डॉ जोशी के साथ सारथी की भूमिका में है। इस अभियान में अब लोग जुड़ने लगे हैं। राज्य के बिभिन्न गांवों से निशुल्क हैल्थ कैंप लगाने के लिए लोग लगातार मांग कर रहे हैं। हमारा भी प्रयास है कि हम राज्य के हर गांव में कैंप लगा सकें। संस्था ने हमारे प्रयास की सराहना करते हुए हमें पुरस्कार दिया इसके लिए हम आभारी हैं। पुरस्कार और अधिक जिम्मेदारे से काम करने का अहसास कराते हैं।