कोर्ट का फैसला आने के बाद बोले मुख्यमंत्री, राज्य गठन के बाद सबसे बड़ा सुधारात्मक कदम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दृष्टि से बोर्ड का गठन किया गया है। पिछले वर्ष 36 लाख श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आए। आने वाले समय में इसमें बहुत वृद्धि होने की सम्भावना है। इसलिए इतनी बड़ी संख्या मे आने वाले यात्रियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। माननीय उच्च न्यायालय ने एक तरह से राज्य सरकार के निर्णय पर अपनी मुहर लगाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि तीर्थ पुरोहित और पण्डा समाज के लोगों के हक हकूक और हितों को सुरक्षित रखा गया है। जहां भी धर्म और संस्कृति का विषय होता है, वहां परम्पराओं का बहुत महत्व है। हमने चारधाम के संबंध में सभी परम्पराओं का बनाए रखा है। सैंकड़ों सालों से स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और पण्डा समाज ने चारधाम की पवित्र परम्पराओं का संरक्षण किया है। विपरीत परिस्थितियों के होने पर भी दूर दूर से आने वाले श्रद्धालुओं का ध्यान रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं देखा है कि बरसात में रास्ते बंद हो जाने पर किस प्रकार तीर्थ पुराहितों ने श्रद्धालुओं के रूकने, खाने आदि की व्यवस्था की है। इसी भावना के कारण उत्तराखण्ड को देवभूमि का मान मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थ पुराहितों ने यहां की परम्पराओं का संरक्षण किया है और देवभूमि का मान बढ़ाया है, उनके हितों की रक्षा, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चारधाम देवस्थानम बोर्ड को लेकर किसी प्रकार का संशय नहीं होना चाहिए। राज्य गठन के बाद चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन सबसे बड़ा सुधारात्मक कदम है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय को किसी की जीत हार से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह राजनीतिक विषय नहीं है। आने वाले समय में चारधाम देवस्थानम बोर्ड, चारधाम यात्रा के प्रबंधन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहा है।

एसटीपी निर्माण कार्य में देरी करने पर नाराजगी डीएम ने जताई नाराजगी

मृत पशुओं के अवशेष गंगा नदी में न डाले जाएं, इसके लिए नगर निगम और प्रशासन मिलकर भूमि की जल्द तलाश करें। साथ ही कांजी हाउस को भी इसी भूमि के समीप बसाया जाए। यह निर्देश जिलाधिकारी देहरादून डा. आशीष श्रीवास्तव ने जिला गंगा सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान दिए।
मंगलवार को नगर निगम के स्वर्ण जयंती सभागार में जिला गंगा सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी देहरादून डा. आशीष श्रीवास्तव ने नगर निगम से प्रगति कार्यों की जानकारी जुटाई। इस पर एमएनए ने उन्होंने बताया कि गंगा की सहायक नदी चंद्रभागा में मिल रहे पांच नालों में से तीन को पूरी तरह से टैप किया जा चुका है, जबकि दो नालों को टैप करने का कार्य चल रहा है। वहीं, नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप ने बताया कि गंगा नदी में गिर रहे अलग-अलग सात नालों को टैप किया जा चुका है। जिलाधिकारी डा. आशीष श्रीवास्तव ने नमामि गंगे की ओर से एसटीपी निर्माण कार्य में देरी करने पर नाराजगी भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य कर रही संस्था एसपीएमजी को पत्र भेजकर कोई भी कार्य करने से पूर्व जिला गंगा सुरक्षा समिति से सहमति लेनी होगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा नदी में मानसूत्र सत्र के बाद जहां तेज धारा नहीं हो, जाली लगाई जाए। इससे गंगा में गिरने वाले फूल, पूजन सामग्री, हवन सामग्री को निकाला जा सके। उन्होंने एसडीएम वरूण चैधरी को गुमानीवाला स्थित कांजी हाउस की खाली पड़ी करीब तीन बीघा भूमि की स्थिति स्पष्ट करने तथा वहां पर पशुओं की संख्या नियंत्रण केंद्र (बन्ध्याकरण) की स्थापना करने के निर्देश दिए। इस मौके पर नगर आयुक्त नरेन्द्र सिंह क्वीरियाल, एसएनए विनोद लाल, डीएफओ राजीव धीमान, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अनुभव नौटियाल, सहायक अभियंता सीवर विंग हरीश बंसल, अधिशासी अभियंता पीडल्ब्यूडी विपुल सैनी, समिति सदस्य पर्यावरण विद विनोद जुगलान आदि उपस्थित रहे।

खादर क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा का प्रबंधन किया जाए
सम‌ित सदस्य ‌विनोद जुगलान ने खड़गमाफ के खादर क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा का मामला उठाया। इस पर सिंचाई विभाग के एई अनुभव नौटियाल ने बताया कि सौंग नदी से बाढ़ सुरक्षा के लिए छिद्दरवाला से ठाकुरपुर तक तीन किलोमीटर की सुरक्षा तटबंध बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। इस पर विनोद जुगलान ने असंतोष जताया। इसके बाद जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को छोटे तटबंध बनाने के ‌संबंध में एई को मौके पर जाकर निरीक्षण कर सुरक्षा तटबंध बनाने को कहा।

सीएम त्रिवेन्द्र ने हरेला पर्व पर एक पौधा लगाने की अपील की

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को समर्पित ‘‘हरेला‘‘ पर्व उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक परम्परा का प्रतीक है। यह त्योहार सम्पन्नता, हरियाली, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देता है। उत्तराखण्ड में हरेला पर्व को पौधारोपण त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है। श्रावण मास में हरेला पूजने के उपरान्त पौधे लगाये जाने की भी हमारी परम्परा रही है।

उन्होंने कहा कि हरेला पर्व हमारी लोक संस्कृति, प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ जुड़ाव का भी प्रतीक है। प्रकृति को महत्व देने की हमारी परम्परा रही है। प्रकृति के विभिन्न रूपों की हम पूजा करते हैं। हमारी इन परम्पराओं का वैज्ञानिक आधार भी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि हमारे लोकगीत तथा लोकपर्व प्रकृति से जुड़ाव एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ ही बेहतर जीवन जीने का भी मार्गदर्शन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा की हरेला हरियाली तथा ऋतुओं का पर्व है हमें प्रकृति संरक्षण व प्रेम की अपनी संस्कृति, तथा उत्सवों को मनाये जाने की परम्परा को बनाए रखना होगा। उन्होंने सभी से इस महत्वपूर्ण अवसर पर सक्रिय भागीदारी के साथ हर व्यक्ति से एक पौधा लगाने की अपील की है।

रमेश भट्ट के नए गीत का टीजर लांच, ’’मेरी शान उत्तराखण्ड’’ स्वरोजगार अपना रहे युवाओं को समर्पित

कोरोना संकट के बीच अपने घर लौटे प्रवासियों के उत्साहवर्धन के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट का गीत जल्द ही सामने आने वाला है। रमेश भट्ट ने ‘मेरी शान उत्तराखण्ड’ नाम के गीत का एक टीजर अपने फेसबुक पेज पर डाला है, जिसे बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

जय जय हो देवभूमि गीत से धूम मचा चुके रमेश भट्ट का नया गीत ‘मेरी शान उत्तराखण्ड’ बेहद ही खास है और यह जल्द ही सामने आने वाला है। फिलहाल इस गीत के पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है।

इस गीत की खासियत ये है कि इस गीत में कोरोना संक्रमण के चलते घर लौटे प्रवासियों को नई दिशा मिलेगी। देवभूमि उत्तराखंड की महिमा का वर्णन करते हुए रमेश भट्ट ने इस गीत के माध्यम से प्रदेश युवाओं से स्वरोजगार अपनाने और अपनी माटी को संवारने की अपील की है। गीत के बोल हर उत्तराखण्डी में जोश भरने वाले हैं।

फेसबुक में लिंक को देखने के लिए यहां क्लिक करें…
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खासतौर से युवाओं से किया गया आह्वाहन स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। रमेश भट्ट का कहना है कि प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत बनाने का जो संकल्प लिया है, वो हर भारतीय को प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री ने भी कोरोना संकट को अवसर मानते हुए स्वरोजगार के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। इन्हीं बातों को सोचकर ये ख्याल आया कि क्यों न घर लौटे युवाओं को प्रेरित किया जाय। उनमें जोश भरा जाय, ताकि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी यहां के काम आ सकें, मैं समझता हूं, गीत संगीत इस संदेश को पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उत्तराखण्ड में वो तमाम संसाधन, वो तमाम खूबियां मौजूद हैं जिनका सही इस्तेमाल करके हम उत्तराखण्ड को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, ऐसी ही सोच मुख्यमंत्री की भी है। हम सब आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड बनाने के लिए संकल्पित हैं।*

अजय ढौंडियाल के निर्देशन में तैयार हो रहे इस गीत के बोल स्वयं रमेश भट्ट ने लिखे हैं, जबकि ईशान डोभाल ने संगीत तैयार किया है। सिनेमैटोग्राफी संदीप कोठारी ने की है। जल्द ही शिल्पा प्रोडक्शन के बैनर तले यह गीत सबके सामने होगा।

संस्कृति विभाग के निर्माणाधीन प्रेक्षागृह और संग्रहालय का निरीक्षण, शेष कार्य समय से पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गढ़ीकैंट स्थित संस्कृति विभाग के निर्माणाधीन प्रेक्षागृह और संग्रहालय का निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि काफी कुछ कार्य किया जा चुका है। शेष कार्य को भी समयबद्धता से पूरा कर लिया जाए। निर्माण में गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए।
बताया गया कि लगभग 95 प्रतिशत कार्य किया जा चुका है। ग्रीन बिल्डिंग की कन्सेप्ट पर बनने वाले प्रेक्षागृह और संग्रहालय की लागत 67 करोड़ रूपए है। प्रेक्षागृह का भवन 2518 वर्गमीटर में बन रहा है। एक हजार क्षमता का यह प्रेक्षागृह पूरी तरह से वातानुकूलित होगा। इसमें फायर फाईटिंग सिस्टम, अत्याधुनिक आडियो/वीडियो सिस्टम, सीसीटीवी सिस्टम होगा। संग्रहालय के भवन में प्रदर्शनी गैलरी, संग्रहालय, लाईब्रेरी, कान्फ्रेंस हॉल, मीटिंग हॉल बनाए जा रहे हैं। इसमें ग्राउंड वाटर रिचार्ज और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी है। इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, निदेशक बीना भट्ट भी उपस्थित थे।

कैबिनेट के 21 अहम फैसलों पर मुहर, जानिए पूरी खबर

राज्य सचिवालय में कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में 21 अहम फैसलों पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई। कैबिनेट निर्णय की जानकारी शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने दी।

1. श्रीकोट सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज के लिए 0.326 हैक्टेयर पटटे पर दी गई भूमि का नजराना और मालगुजारी को निशुल्क करने का निर्णय लिया गया।

2. कैम्पा योजना निधि प्रबन्धन के लिए विभागीय ढ़ांचा 29 पद की मंजूरी।

3. उत्तराखण्ड राज्य परिवहन निधि नियमावली 2020 में संशोधन करते हुए प्राप्त धनराशि सीधे ट्रेजरी में लेने के निर्देश।

4. उत्तराखण्ड स्टोन क्रेशर प्लांट, मोबाईल, हॉट मिक्स प्लांट निति 2020 के अन्तर्गत कृषि मंत्री की संस्तृति के आधार पर गंगा नदी के किनारे 1.5 कि0मी0, मैदानी नदी के किनारे 1 कि0मी0, बरसाती नदी के किनारे 500 मीटर तक प्लांट लगाने की अनुमति दी गई।

5. उत्तराखण्ड खनिज अवैध खनन भण्डारण नियमावली 2020 को अनुमति। शासन स्तर से जिलाधिकारी स्तर पर अधिकार दिया गया। मोबाईल स्टोन क्रेशर हेतु दो वर्ष, रिटेल भण्डारण हेतु पांच वर्ष की अनुमति। लाइसेंस शुल्क 25,000 हजार। क्रय विक्रय नगद पर प्रतिबंध।

6. औद्योगिक नियोजन आर्दश नियमावली 1992 के तहत कर्मकारों को रखने के लिए नियत अवधि नियोजन कर्मकार नियमावली 2020 लाया गया।

7. उद्योग विभाग में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग नियमावली को मंजूरी। विभागीय चयन समिति के स्थान पर समुह ग के अन्तर्गत पद पर चयन उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से होगा।

8. ऋषिकेश भोगपुर मैसर्स गंगा डिजायन स्टूडियों फर्म के न्यूनतम मार्ग में छूट दी गई।

9. देहरादून अर्बन सिलींग होम हेतु एमडीडीए को स्थानांतरित भू उपयोग भूमि के लिपिकीय त्रुटि में सुधार।

10. मुख्यमंत्री राहत कोष में प्राप्त धनराषि में पारदर्शिता के लिए वित्त विभाग के अधिकारी को रखा जायेगा। अभी तक 15 मार्च से 26 जून 2020 तक कुल 154 करोड़ 56 लाख रूपये प्राप्त किया गया। इनमें से 85 करोड़ 60लाख व्यय किया गया।

11. राज्य सरकार के कल्याणकारी नीति के प्रचार प्रसार हेतु भारत सरकार की एजेंसी ब्राडकास्ट इंजीनियरिंग कंसलटेंट लि0 से अनुबंध किया गया।

12. उत्तराखण्ड विज्ञापन अनुश्रवण समिति में भारतीय प्रेस परिषद् के सदस्य के स्थान पर वरिष्ठ पत्रकार को लेने की अनुमति।

13. श्रम विभाग में इएसआई चिकित्साधिकारी के लिए प्रेक्टिस भत्ता की अनुमति।

14. एकीकृत आर्दश कृषि ग्राम योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तहत मंजूरी। 95 ब्लॉक में 95 ग्राम पंचायत का चयन करके 100 कृषकों हेतु 10 हैक्टेयर का क्लस्टर बनेगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत को 15 लाख रूपये सीड मनी के रूप में दिया जायेगा।

15. अमृतसर, कलकता इंडस्ट्रीयल समेकित निर्माण समूह, उधम सिंह नगर में, फिल्म सिटी, साईबर पार्क, एसइजेड के लिए तीन हजार एकड़ भूमि में से प्रथम चरण के लिए एक हजार एकड़ भूमि दी जायेगी।

16. राज्य सरकार की भूमि के आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जायेगी। जिलाधिकारी द्वारा निलामी न्यूनतम बाजार मूल्य के आधार पर आवंटन प्रक्रिया की जायेगी। पर्यटन, उद्योग, पेयजल व उर्जा इत्यादि विभाग को सूखा अधिकार के तहत सर्किल रेट पर भूमि दी जायेगी लेकिन इसका प्रयोग सार्वजनिक कार्यो के लिए भी होगा।

17. ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व में 2220 रूपये जल संयोजन को कम करके केवल 1 रूपये संकेत के रूप में लेने का निर्णय लिया गया है।

18. कोविड स्वास्थ्य सेवा एवं मेडिकल कॉलेज भर्ती के लिए 1020 नर्सिंग स्टाफ को तत्काल भरने का निर्णय लिया गया है।

19. नर्सिंग शिक्षक सेवा नियमावली को मंजूरी।

20. दीनदयाल उपाध्याय सहकारी कृषक कल्याण योजना के ऋण सीमा शुन्य प्रतिशत पर बढ़ाकर 1 लाख से 3 लाख किया गया। इसके अन्तर्गत 3 लाख 68 हजार कृषक, 1247 स्वंय सहायता समुह लाभान्वित होंगे।

21. विधानसभा सदस्यों के लोन लेने की नियमावली संशोधन किया गया।

दिनेश कोठारी के कार्यों को सराहा, लगातार तीसरी बार बनाया अध्यक्ष

दिनेश कोठारी को रियल स्टेट एसोसिएशन ऋषिकेश के अध्यक्ष पद की लगातार तीसरी बार कमान सौंपी गई है। दिनेश कोठारी के अध्यक्ष पद पर नियुक्त होने पर प्रॉपर्टी से जुड़े व्यवसाइयों ने हर्ष जताया है।
एसोसिएशन की कार्यकारिणी को लेकर पदाधिकारियों की एक बैठक हरिद्वार रोड स्थित कार्यालय में आयोजित हुई। इसमें रियल एस्टेट के कारोबार में आ रही परेशानियों से निपटने के लिए कार्य योजना तैयार की गई। साथ ही कोरोना महामारी में एसोसिएशन की ओर से जरूरतमंद व्यक्तियों की बढ़-चढ़कर मदद करने पर सभी सदस्यों ने सराहना की। इसके बाद नवीन कार्यकारिणी को लेकर मंथन किया गया। इसमें सभी पदाधिकारियों ने सर्वसहमति से अध्यक्ष पद पर दिनेश कोठारी के नाम को मुहर लगाई। इसी के साथ दिनेश कोठारी को रियल ‌स्टेट एसोसिएशन की तीसरी बार लगातार कमान सौंपी गई। इस दौरान सभी ने हर्ष व्यक्त किया। मौके पर एसोसिएशन के महामंत्री दीपक चुग, कोषाध्यक्ष नितिन गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य मानव जौहर, निशांत मलिक, संजय व्यास, विशाल कक्कड़, सरदार मंगा सिंह, राजीव खुराना, अनिल कुकरेती, विवेक तिवारी, नितिन गवाडी, अजीत कवल, गोपाल सती, अशोक पाल, धीरज मखीजा, प्रदीप गुप्ता, विजय रावत, कोमल सिंह, आशीष शर्मा, निपुण गुप्ता, अंकित अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।

ऋषिकेश के द्वितीय महंत अशोक प्रपन्नाचार्य का निधन, शोक की लहर

(एनएन सर्विस)
आज प्रात: 7:30 बजे श्री भरत मन्दिर के महन्त अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज ने अतिंम सांस ली। उनके देहावसान की खबर से पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गयी। शहर के साथ ही देहरादून और अन्य स्थानों से लोगो ने उनके आवास पहुचकर परिवार को सान्त्वना दी। शहर के कई व्यापारियों ने अपने अपने प्रतिष्ठानों को बंद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
आपको बता दे कि श्री महन्त का जन्म 10 फ़रवरी 1942 को तत्कालीन महंत परशुराम जी के घर उनके बेटे ज्योति प्रसाद शर्मा के यहा हुआ। अशोक प्रपन्नाचार्य परिवार में बड़े पुत्र थे उनसे बड़ी एक बहन व छोटी बहन व छोटे भाई श्री हर्षवर्धन शर्मा हैं। उनके दादा श्री भरत मन्दिर के गद्दी नसीन मंहन्त परशुराम जी महाराज जोकि नगर पालिका परिषद ऋषिकेश के प्रथम अध्यक्ष भी रहे। उनके पश्चात अशोक प्रपन्नाचार्य श्री भरत मन्दिर ऋषिकेश की गद्दी वर्ष 1956 में शुषोभित हुए। इसके साथ ही श्री भरत मन्दिर द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज, श्री भरत मन्दिर संस्कृत महाविद्यालय, ज्योति विशेष विद्यालय के साथ ही उत्तराखंड एवं अन्य स्थानों की धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के संचालन व संवर्द्धन में सराहनीय भूमिका रही।
अशोक प्रपन्नाचार्य श्री भरत मंदिर एजुकेशन सोसाइटी व शिक्षण संस्थाओं के संचालक मंडल के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे।
पंडित ललित मोहन शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शान्तिप्रपन्न शर्मा राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश व कई अन्य संस्थाओं को वृहत्तर भूखंड प्रदान कर क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के प्रवेश द्वार खोले व नगरीय क्षेत्र के साथ गढ़वाल के नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं के संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध में भारतीय सेनाओं को शिविर कैम्प संचालित करने के लिये महन्त अशोक प्रपन्नाचार्य ने श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज के विशाल प्रांगढ को प्रदान करने के साथ ही रायवाला में सेना को छावनी बनाने का सुझाव प्रदान किया था।
स्वाधीनता संग्राम में भी श्री भरत मंदिर परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी के चाचा शान्ति प्रपन्न शर्मा कई वर्षों तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक व उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन, उद्योग व ऊर्जा मंत्री पद पर रहे। ऋषिकेश में आईडीपीएल की स्थापना का सुझाव तत्कालीन केन्द्र सरकार को उनके द्वारा ही प्रदान किया गया था।
स्वर्गीय मंहन्त अशोक प्रपन्न शर्मा के छोटे भाई हर्षवर्धन शर्मा क्षेत्र के सार्वजनिक, सामाजिक सेवा जीवन के साथ शिक्षण संस्थाओं के संचालन में प्रबंधकीय व्यवस्था देखते हैं।
उत्तरकाशी भूकंप,केदारनाथ आपदा व कोरोना महामारी में लॉक डाउन के दौरान स्व० मंहन्त जी व उनके परिवार द्वारा राहत कार्यों में बड़े स्तर सहायता प्रदान की।
स्वर्गीय मंहन्त अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं आपके दो पुत्र वत्सल शर्मा व वरुण शर्मा हैं। वे भी सामाजिक, शिक्षण संस्थाओं व धार्मिक संस्थाओं के संचालन व संवर्धन में सक्रिय हैं। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, उनका अंतिम संस्कार ऋषिकेश चंद्रेश्वर घाट मुक्ति धाम पर अपराह्न 3 बजे सम्पन्न होगा।

मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता के लिए डीएसओ को दी जिम्मेदारी

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित जिला पूर्ति अधिकारी की जिम्मेवारी तय की जाएगी। योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की गड़बड़ी या कोताही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सचिव खाद्य, अपने स्तर पर इसकी नियमित रूप से समीक्षा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवम्बर माह तक विस्तारित किया गया है। इससे देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। सरकार का संकल्प है कि कोई गरीब भूखा न सोए। पिछले लगभग 4 माह में हर व्यक्ति को राशन उपलब्ध कराया गया है। राज्य में लौटे प्रवासियों के लिए भी राशन की व्यवस्था की गई।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य के 61.94 लाख व्यक्तियों को अप्रैल, मई व जून माह का खाद्यान्न दिया गया है। इसमें प्रति माह प्रति व्यक्ति 5 किलो चावल और प्रति परिवार 1 किलो दाल निशुल्क वितरित की गई है।
अब योजना का विस्तार करने से जुलाई से नवम्बर तक 5 माह और यह लाभ पात्र व्यक्तियों को मिलता रहेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत नियमित खाद्यान्न भी वितरित किया जाता रहेगा।
बताया गया कि आत्मनिर्भर भारत योजना में लगभग 12 हजार प्रवासियों को मई व जून माह में प्रति माह 5 किलो चावल प्रति व्यक्ति और 1 किलो दाल प्रति परिवार निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। वन नेशन वन राशन कार्ड 1 जुलाई से लागू की जा चुकी है। इसके तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के राशनकार्ड धारकों को अन्य राज्यों में और अन्य राज्यों के राशनकार्ड धारकों को राज्य में लाभ मिलेगा।

जल संरक्षण के लिए पौधे लगाना जरुरीः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चन्द्रबनी खालसा, क्लेमेंटाउन में वृक्षारोपण किया। वन विभाग द्वारा वन महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सीजन में प्रदेश में 2 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे। वृक्षारोपण अभियान की शुरूआत आज से हो चुकी है। हरेला पर्व पर भी प्रदेश में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जायेगा। कोविड-19 के कारण अलग-अलग चरणों में पौधे रोपे जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में वनों एवं पर्यावरण के प्रति लोगों में सजगता है। जल संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। पर्यावरण संतुलन के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण जरूरी है। वृक्षारोपण के साथ ही उनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि चन्द्रबनी में वन विभाग द्वारा एक पार्क विकसित किया जायेगा।
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है। प्रकृति के साथ हमें सामंजस्य बनाकर चलना होगा। एक अदृश्य वायरस ने हमें जीवन जीना सिखा दिया है। इस समय का हमें सदुपयोग करना होगा। प्रकृति का दोहन करने पर उसके दुष्परिणाम भी हमें झेलने पड़ते हैं। यह इस वायरस ने दुनिया को सिखा दिया है। राज्य सरकार द्वारा जल एवं वन संवर्द्धन की दिशा में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्य दीर्घकालिक सोच पर आधारित होते हैं, जिसके बाद में सुखद परिणाम देखने को मिलते हैं।
विधायक विनोद चमोली ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण पर इस समय दुनिया का जोर है। कोरोना वायरस ने सबको सोचने पर विवश कर दिया है। यह समय चुनौतियों को अवसर में बदलने का है। मेडिसनल और ऐरोमैटिक प्लांट की दिशा में उत्तराखण्ड में अच्छा कार्य हो रहा है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जयराज एवं वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।