मुख्य सचिव ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के दिए निर्देश

‘‘सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इनोवेटिव विकल्पों और हरसंभव प्रयासों को संजीदगी से अमल में लायें‘‘। मुख्य सचिव एस.एस.संधु ने सचिवालय सभागार में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में संबंधित अधिकारियों को उपरोक्त दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों का जीवन बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए विभिन्न विभागों को अपने विभागीय स्तर पर तथा सामूहिक समन्वय से जरूरी कदम उठाये जाने चाहिए। सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए और सुधारीकरण के कार्यों की तीव्र प्रगति के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

लाइसेंस जारी करते समय पूरी प्रक्रिया का ठीक ने अनुपालन करें
परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि विभिन्न श्रेणी के लाइसेंस बनाते समय ट्रायल-ट्रेस्टिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग रखें तथा ट्रायल का डेटा पोर्टल पर अपलोड करें ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी मीडिएटर(मध्यस्थ) के माध्यम से लाइसेंस न बनवा सके। उन्होंने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को निर्देश दिए कि मुख्य चैराहों और मुख्य सार्वजनिक रूट पर सी.सी.टी.वी कैमरे के साथ ही राडार और स्पीड इन्टरसेप्टर तकनीक का इस्तेमाल करें और इस तकनीक को चैपहिया और दो पहिया वाहनों में भी लगाएं। साथ ही इसका नियमित सुपरविजन करते हुए ओवरस्पीडिंग, रैश डाइविंग और सड़क सुरक्षा के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों पर सक्रियता से एक्शन लेते हुए सड़क सुरक्षा के जोखिम को न्यूनतम करें।
मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को ब्लैक स्पॉट और वलनरेबल (दुर्घटना की दृष्टि से जोखिम वाले) क्षेत्रों को ए, बी व सी श्रेणी में वर्गीकृत करते हुए तद्नुसार जोखिम की अधिकता के अनुसार सुधारीकरण से संबंधित सभी कार्य संपन्न करने के निर्देश दिये। निर्देशित किया कि जहां तक संभव हो सके सड़क मार्गों पर साईकिल ट्रैक का भी निर्माण करें, विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में जहां पर कामगारों (श्रमिकों) का आना-जाना रहता है, वहां पर साईकिल ट्रैक जरूर बनायें। विभिन्न रूट पर स्पीड ब्रेकर व रम्बल स्ट्रीप इस तरह से बनायें ताकि औसतन गति से वाहन चलाने वाले को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही तीव्र गति से वाहन चलाने वाले का वाहन धीमा हो जाए। उन्होंने सड़क सुरक्षा का अच्छी ऐजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने और माननीय न्यायालय तथा सड़क सुरक्षा समिति के समय-समय पर प्राप्त होने वाले सुझावों को अमल में लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने अवैध मीडियन्स को तत्काल बंद करने, मुख्य मार्ग से 90 डिग्री पर सीधे मिलने वाले संपर्क मार्ग अथवा रास्तों पर जरूरी सुरक्षा उपाय करने और पहाड़ी क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश दिए। परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि सुरक्षा मानकों का दूसरी बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालक के डाइविंग लाईसेंस को छः माह के लिए तथा तीसरी बार उल्लंघन करने पर एक वर्ष के लिए लाईसेंस को निलंबित करें। कहा कि बिना हेलमेट वाहन चलाने वालो से हेलमेट का चार्ज लेते हुए नया हेलमेट दें, साथ ही मानक के अनुरूप जुर्माना की जितनी धनराशि है, उसका 50 प्रतिशत धनराशि भी वसुले।
मुख्य सचिव ने कहा कि दुर्घटना होने के पश्चात् गोल्डन अवर में लोगों का जीवन बचाने में स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटना में घायल लोगों के त्वरित इलाज हेतु व्यवहारिक समाधान तलाशने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने वीडियो कन्फ्रेसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित पूर्व की जितनी भी मजिस्ट्रेट जांच अभी तक लंबित है, उसका दो माह के भीतर निस्तारण करें, साथ ही आगे से प्रत्येक मजिस्ट्रियल जांच को प्रत्येक हाल में तीन माह के भीतर निस्तारित करें। ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन, डाइविंग स्कूल और फिटनेस टेस्ट लेन बनवाने के लिए भूमि का तत्काल सर्वे किया जाए तथा इस संबंध में यदि निजी संस्थानों का भी सहयोग लिया जा सकता है तो उस पर भी विचार करें। उन्होंने अग्रिम निर्देश देते हुए कहा कि सभी जनपदों में ‘इन्स्टिट्यूट सोशल रेस्पोंसिबिल‘ इनिशिएटिव प्रारंभ करें जिसके अंतर्गत विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों में अध्यनरत छात्रों, रिटायरमेंट इंजीनियरों अथवा समाज के सक्रिय और रचनात्मक नागरिकों को सड़क सुरक्षा के संबंध में बेहतरीन सुझाव और फीडबैक देने के लिए मंच प्रदान करें। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर भी उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति गठित करने के निर्देश दिये जिसमें उपरोक्त सभी लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
इस दौरान बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, रंजीत सिन्हा, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, प्रभार सचिव विनोद कुमार सुमन, वी. षणमुगम, आयुक्त परिवहन दीपेन्द्र कुमार चैधरी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

स्वतंत्रता दिवस को भव्य रुप से मनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने विभागीय अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस को भव्य तरीके से मनाने के लिए कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों को जो तैयारियां की जानी हैं उसको समय से संपादित करें। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले लोग अनिवार्य रूप से मास्क पहनकर प्रतिभाग करेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करेंगे। आमंत्रित किये गये लोगों को ई-पास जारी करें तथा विगत वर्षों में विभिन्न विभागों के कार्मिकों द्वारा किये गये बेहतर कार्यों तथा कोरोना काल में बेहतरीन कोरोना वारियर्स को सम्मानित करवाने के लिये सभी विभाग ऐसे लोगों की सूची खेल विभाग को सौंप दें।
उन्होंने निर्देश दिये कि सभी जिलाधिकारी सुनिश्चित करें कि स्वतंत्रता सेनानियों को उनके आवास पर जाकर सम्मानित किया जाये तथा मुख्य कार्यक्रम में जिन लोगों को सम्मानित किया जाना है उनका अनिवार्य रूप से आरटीपीसीआर टेस्ट करके ही उन्हें सम्मिलित किया जाये। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को कार्यक्रम से जोड़ने और एक भारत श्रेष्ठ भारत तथा आत्म निर्भर भारत का संदेश प्रसारित करने को कहा।
राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम परेड ग्राउंड में आयोजित होना प्रस्तावित हैं जहां पर मुख्यमंत्री द्वारा प्रातः 10 बजे ध्वजारोहण करके कार्यक्रम की शुरूआत करेंगे। तत्पश्चात परेड की सलामी और सम्मान समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करेंगे। इस बार भी परेड में पैरामिलिट्री फोर्स, पी.ए.सी, नागरिक पुलिस, होमगार्ड आदि के दस्ते भाग लेंगे।
विभिन्न जनपदों में प्रभारी मंत्री ध्वजारोहण करके कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। सभी सरकारी और गैर सरकारी भवनों पर सम्बन्धित विभागाध्यक्ष, कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रातः 9 बजे ध्वजारोहण किया जायेगा तथा जनपद देहरादून के कलक्ट्रेट में जिलाध्यक्ष द्वारा प्रातः 9ः30 बजे ध्वजारोहण किया जायेगा।
इस बार के मुख्य कार्यक्रम में कोविड-19 के चलते बच्चों का प्रतिभाग नहीं कराया जायेगा। एन.सी.सी को परेड में सम्मिलित नहीं किया जायेगा, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किये जायेंगे तथा कवि सम्मेलन भी आयोजित नहीं किया जायेगा। विगत वर्ष की तरह स्वतंत्रता सेनानियों को उनके घर जाकर सम्मानित किया जायेगा। विभिन्न सार्वजनिक भवन में साफ-सफाई और उनको प्रकाशमान किया जायेगा और विभिन्न जनपदों में वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जायेगा।
महत्वपूर्ण स्थलों, चैराहों पर देश भक्ति गीतों का प्रसारण किया जायेगा। एक सप्ताह पूर्व से ही शहीद स्थल, पार्क व स्मरणीय व्यक्तियों के स्टैच्यू इत्यादि की साफ-सफाई की जायेगी तथा टी.वी, रेडियो, सोशल मीडिया के माध्यम से देश भक्ति के गीतों का प्रसारण किया जायेगा।
इस दौरान बैठक में अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल.एल. फैनई, पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. रंजीत सिन्हा, एस.ए. मुरूगेशन, एच.सी. सेमवाल, प्रभारी सचिव डॉ. वी. षणमुगम, विनोद कुमार सुमन, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चैहान सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे तथा सभी जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े हुए थे।

मनमानी का केन्द्र बना उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में हुईं भर्तियों की शासन ने जांच बैठा दी है। शासन ने कुलसचिव से बिंदुवार सभी भर्तियों पर रिपोर्ट तलब की है। अपर सचिव राजेंद्र सिंह की ओर से कुलसचिव को भेजे गए आदेश में पिछले वर्षों में हुईं भर्तियों में की गई अनियमितता की जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने विवि में पीआरडी के माध्यम से की जा रहीं भर्तियों और पिछले दो माह में पीआरडी से हुईं भर्तियों की रिपोर्ट भी मांगी है।

इसके अलावा नर्सिंग भर्ती, प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती, विवि द्वारा अपने स्तर से शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव को हटाते हुए नए कुलसचिव की नियुक्ति, लेखा अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी के पद प्रमोशन के पद एवं वित्त विभाग के पद विज्ञापन जारी करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

शासन ने योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि द्वारा विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि द्वारा गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। विवि में पिछले दो माह में 60 से अधिक युवाओं पीआरडी जवानों को भर्ती कर दिया गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

मनमानी का अड्डा बना आयुर्वेद विवि
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय मनमानी का अड्डा बन गया है। शासन से जिस अधिकारी को कुलसचिव बनाकर भेजा जाता है, उसे विवि प्रशासन की ओर से खुद ही हटाकर नए कुलसचिव की नियुक्ति की जाती है। भर्तियों में न रोस्टर का कुछ अता-पता है और न ही शासन का कोई संज्ञान। आखिरकार अब जांच के निशाने पर अब कई अधिकारी आ गए हैं।

आयुर्वेद विवि में वर्ष 2017 से लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के बाद से भी यहां मनमानी का सिलसिला जारी है। शासन ने 2017 से अब तक की नियुक्तियों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। फिर चाहे प्रोफेसर की भर्ती हो या नर्सिंग स्टाफ की। हद तो तब है कि जो पद विवि में हैं ही नहीं, उन पदों पर प्रमोशन और एसीपी का भुगतान किया जा रहा है।
नियमानुसार भर्तियों के लिए शासन की अनुमति जरूरी होती है लेकिन विवि के अधिकारी किसी की अनुमति की जरूरत ही महसूस नहीं कर रहे हैं। हालात यह हैं कि खुद ही विज्ञप्ति जारी की जाती है और खुद ही उसे रद्द कर दिया जाता है। युवा भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

पीआरडी से भर्तियों की बरसात
आयुर्वेद विवि में ताजा मामला पीआरडी के माध्यम से होने वाली भर्तियों का है। यहां पिछले दो माह में ही बिना शासन की अनुमति, बिना नियमों का पालन किए 60 से अधिक नौजवानों को पीआरडी के माध्यम से भर्ती कर दिया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि विवि के अधिकारी किसी शह पर यह भर्तियां कर रहे हैं।

मनमानी का आलम यह है कि एक अधिकारी को बुलाया, कार्यमुक्त किया फिर रख लिया गया। इसी तरह आयुर्वेद विवि में आयुष विभाग से एक अधिकारी को पहले बुलाया गया, फिर कार्यमुक्त किया गया और फिर वहीं रख लिया गया। इस पूरे प्रकरण में शासन को संज्ञान में ही नहीं लिया गया है। ऐसे तमाम प्रकरण हैं, जिसमें मनमानी खुलकर सामने आ रही है। 

15 विषयों में प्री पीएचडी के लिए 70 सीटें निर्धारित

श्रीदेव सुमन विवि इसी सत्र से पहली बार प्री पीएचडी शुरू करने जा रहा है। कोरोना संक्रमण की स्थिति सामान्य होते ही अक्तूबर-नवंबर तक प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी। 15 विषयों में प्री पीएचडी के लिए 70 सीटें निर्धारित की गई हैं। प्री पीएचडी के छह माह का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विवि प्रशासन ने सभी 15 विषयों के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की कमेटियों का गठन कर लिया है। पहले बैच में सिर्फ विवि से संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों में ही प्री पीएचडी होगी।
प्री पीएचडी में दाखिले के लिए विवि प्रशासन ने पहले जुलाई में प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की तैयारी की थी, लेकिन कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए विवि ने सेंट्रल हिमालयन एनवायरमेंट एसोसिएशन से 2019 में एमओयू भी कर लिया है, लेकिन विवि से संबद्ध महाविद्यालयों से सीटों और विषयों की संख्या की रिपोर्ट मिलने में हुए विलंब के चलते विवि सीटों की संख्या का सही निर्धारण नहीं कर पाया था। 
विवि के प्रभारी कुलसचिव डा. एमएस रावत ने बताया कि प्री पीएचडी के लिए 15 विषयों में 70 सीटें निर्धारित कर ली गई हैं। प्री पीएचडी में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेस टेस्ट के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए सभी विषयों में कमेटियों का गठन कर लिया गया है। जल्द ही कमेटियों की बैठक आयोजित कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिसर्च डिग्री कमेटी की रिपोर्ट मिलते ही प्री पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तिथि घोषित की जाएगी। स्थानीय विषयों पर ही विवि का शोध कराने पर विशेष फोकस रहेगा। तभी विवि के शोध कार्यों का लाभ स्थानीय समुदाय को मिल सकता है।

इन विषयों में होगी प्री पीएचडी
हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, सैन्य विज्ञान, कामॅर्स, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, भू-गर्भविज्ञान, गणित।

चार स्कूलों की लापरवाही छात्रों पर पड़ी भारी, रिजल्ट रोका गया

लंबे इंतजार के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं का रिजल्ट जारी किया। लेकिन देहरादून रीजन के चार स्कूलों को बोर्ड रिजल्ट के लिए अभी भी इंतजार करना होगा। दरअसल, सीबीएसई बोर्ड के पोर्टल पर गलत जानकारी अपलोड करने के चलते दून रीजन के चार स्कूलों का रिजल्ट रोक दिया गया है। 
कोरोनाकाल में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार बोर्ड परिक्षाओं को रद्द किया गया था। जिसके बाद बोर्ड ने छात्रों का रिजल्ट पिछली कक्षाओं के आधार पर तैयार किया है्, लेकिन बोर्ड के पोर्टल पर छात्रों से जुड़ी जानकारी जैसे रोल नंबर, नाम, जन्म तिथि, जिला या राष्ट्रीय स्तर का डाटा या विषयवार नंबर गलत भरने पर बोर्ड की ओर से महाश्री विद्या मंदिर रामपुर, सेंट एजीएम स्कूल सहारनपुर, हैप्पी होम कोटद्वार और एस पब्लिक स्कूल रुड़की का रिजल्ट जारी नहीं किया गया।

छात्रों का रिजल्ट जारी न होने से परेशान स्कूल प्रबंधकों ने सीबीएसई के कार्यालय से संपर्क किया तो उन्हें बोर्ड की ओर से बताया गया कि आपकी ओर से जानकारी गलत देने के चलते छात्रों का रिजल्ट रोका गया है। बोर्ड की ओर से इन सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि पोर्टल पर सही डाटा उपलब्ध कराया जाए। जिसके बाद 10वीं का रिजल्ट जारी किया जाएगा। 

वहीं, सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी रणबीर सिंह ने बताया कि छोटी सी गलती को भी ऑनलाइन पोर्टल पर पकड़ लिया जाता है। ऐसे में छात्रों के हितों को देखते हुए ही रीजन के चार स्कूलों का रिजल्ट को रोका गया है। इस संबंध में छूटे हुए स्कूलों को सूचित कर दिया गया है। सही डाटा मिलने के बाद स्कूल का रिजल्ट सप्ताह भर में जारी किया जाएगा। 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और बलिदान को युवा पीढ़ी का बताया जाये-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय में देश की स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहे आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की आयोजन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ’राष्ट्र सर्वप्रथम’ के विजन को बताता है। इस आयोजन के लिये भारत सरकार द्वारा जो निर्देश दिये गये हैं उसके अनुसार कार्यक्रमों का गरिमा व भव्यता के साथ आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि अब इसकी समयावधि वर्ष 2023 तक बढ़ाई गई है। अतः इस अवधि में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की स्पष्ट रूप रेखा निर्धारित कर ली जाय। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव का संदेश आमजन तक पहुंचे, इसकी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।

गरिमामयी आयोजन हो

मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के तहत अब तक हुए कार्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि भावी कार्यक्रमों के आयोजन के लिये सभी जिलाधिकारियों एवं विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिये जाय। आयोजन गरिमा के साथ आयोजित हो इसके लिये सभी सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

युवा जानें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान हमारे लिये सर्वोपरि है। इस अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम, आजादी के लिये हमारे पूर्वजों द्वारा दिये गये बलिदान से भावी पीढ़ी को परिचित कराने में भी मददगार होंगे। उन्होंने इस आयोजन में विभिन्न संस्थानों, संगठनों, स्वयं सेवी संस्थाओं, एन.सी.सी, एन.एस.एस. की भी भागीदारी सुनिश्चित कराने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी महान विभूतियों के जीवनवृत्त पर प्रदर्शनी आदि के साथ ही उनके जीवन दर्शन पर आधारित लघु फिल्में भी तैयार की जाय। उन्होंने इस आयोजन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान आदि से सम्बन्धित राज्य स्तरीय गीत तैयार कर उसके माध्यम से भी प्रचार प्रसार के निर्देश दिये।

हर घर झंडा

मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के तहत आयेजित होने वाले ‘‘हर घर झंडा कार्यक्रम’’ के सम्बंध में प्रभावी कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने इस सम्बंध में आवश्यक दिशा निर्देशों का भी अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।

इस सम्बंध में सचिव संस्कृति हरि चन्द्र सेमवाल ने बताया कि इस आयोजन के तहत पूरे देश में 75 ऐतिहासिक महत्व के विशिष्ट स्थलों से प्रत्येक राज्य से दो या तीन विशिष्ट स्थलों को शामिल किये जाने की प्रक्रिया में राज्य से अल्मोड़ा एवं देहरादून को चयनित किया गया है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समिति का भी गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के अंतर्गत अब तक सभी जनपदों में संबंधित विभागों द्वारा मैराथन दौड़, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर प्रदर्शनी, नशा मुक्ति कार्यक्रम, विचार गोष्ठी, सम्मेलनध्सेमिनार, वृक्षारोपण का आयोजन किया गया है, जबकि खादी प्रदर्शनी, क्विज कार्यक्रम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवनवृत्त पर नुक्कड़ नाटक पेंटिंग प्रतियोगिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से सम्बन्धित स्थलों का भ्रमण, निबंध प्रतियोगिता, साइकिल रैली के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

इस अवसर पर पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, अपर प्रमुख सचिव अभिनव कुमार, सचिव राधिका झा, प्रभारी सचिव डॉ. वी षणमुगम, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चैहान, अपर सचिव युगल किशोर पंत, निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल, निदेशक संस्कृति वीणा भट्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

योगनगरी में कांग्रेस के दिग्गज खोजेंगे जीत की राह, विधानसभा चुनाव को लेकर तय होगा एजेंडा

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के तीन दिवसीय विचार मंथन शिविर का शुभारंभ ऋषिकेश में हुआ। जिसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कांग्रेस कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ ही ब्लॉक व जिले के पदाधिकारियों से कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी ली।

ऋषिकेश में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विचार मंथन शिविर के प्रथम दिवस में भाग लेने पहुँचे नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह का कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा सभी के असीम स्नेह से मैं अभिभूत हूं और सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पहले दिन पार्टी के पदाधिकारियों से मुलाकात की और उनसे विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा 2022 का विधानसभा चुनाव

प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए पदाधिकारियों को अभी से जुटने के निर्देश दिए। गोदियाल ने पदाधिकारियों को जल्द वार्ड ईकाइयों को गठित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का विधानसभा चुनाव 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा। कांग्रेस हाईकमान की ओर से प्रदेश में किए गए संगठनात्मक बदलाव का असर उत्तराखंड के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नजर आना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के दौरान प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गया है कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सरकार में मुख्यमंत्री बदले जाने के अलावा कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा है जिसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर राज्य की जनता को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है।

योगनगरी ऋषिकेश में कांग्रेस के दिग्गज विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत का रोड मैप तैयार करेंगे। कांग्रेस के विचार मंथन शिविर में पार्टी के घोषणापत्र, जनता से जुड़े अहम मुद्दे, नाकामियों पर भाजपा सरकार को घेरने, जनसंपर्क अभियान और चुनावी प्रचार जैसे विषयों पर मंथन होगा। कांग्रेस विचार मंथन शिविर के साथ राज्य में चुनावी बिगुल फूंकने जा रही है। नेतृत्व परिवर्तन, आरटीपीसीआर जांच घोटाले और कोविड की अधूरी तैयारियों को लेकर कांग्रेस पहले ही सत्तारूढ़ दल भाजपा को घेरने का पूरा प्रयास कर रही है। ये कांग्रेस को भी पता है कि केवल सरकार की नाकामियों को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए विचार मंथन शिविर में पार्टी के घोषणापत्र तैयार करने के लिए विभिन्न इकाइयों और कमेटियों के पदाधिकारियों से मिलने वाले सुझावों को तवज्जो दिया जाएगा।

आम जनता की नब्ज टोहने के लिए बूथ स्तर पर जनसंपर्क अभियान और नुक्कड़ बैठकों का रोस्टर तैयार करने को लेकर भी चर्चा होगी। वहीं चुनाव प्रचार की पूरी रणनीति भी शिविर में तय होगी। सबसे अहम शिविर में कांग्रेस की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का गुर बताए जाएंगे।

कांग्रेस के तीन दिवसीय मंथन शिविर के दौरान प्रत्येक दिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ तीन सत्रों में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर वार्ड स्तर तक के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के प्रथम सत्र में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेपा प्रतिपक्ष अध्यक्ष प्रीतम सिंह ,राजेश धर्माणि, दीपिका पांडे, किशोर उपाध्याय प्रदीप टम्टा, काजी निजामुद्दीन, प्रोफेसर जीतराम भुवन चंद्र कापड़ी, तिलक राज बेहड़ ,रणजीत रावत, करण मेहरा, प्रकाश जोशी, नवप्भात,राजेंद्र भंडारी मयूख मेहर, विजय सारस्वत नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के पहले चरण में 1062 बच्चे हुए लाभान्वित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोरोना काल में बेसहारा हुए बच्चों के लिए मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का विधिवत शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता दर्शन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने डीबीटी द्वारा योजना में चिन्हित बच्चों के बैंक खातों में 3-3 हजार रूपए की सहायता राशि ट्रांसफर की।

सरकार एक अभिभावक की तरह रखेगी बच्चों का ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में बच्चों के माता-पिता व संरक्षक के चले जाने की भरपाई करना मुमकिन नहीं है। परंतु राज्य सरकार एक अभिभावक की तरह इनका हमेशा ध्यान रखेगी। जिलों में डीएम इनके सह अभिभावक के रूप में काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाव में ही भगवान होते हैं। हमारा इन बच्चों के प्रति स्नेह, प्रेम और उत्तरदायित्व का भाव है। हम सभी इन बच्चों के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, पूरे मनोयोग से करें। इनकी सहायता से पुण्य प्राप्त होगा। वात्सल्य, माता-पिता में अपने बच्चों के लिए होने वाला नैसर्गिक प्रेम होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इन बच्चों के मामा की तरह ध्यान रखेंगे। कोरोना काल में जिन बच्चों की आंखों में आंसू आए हैं, उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रदेश की पहचान बनेंगे बच्चे
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली योजना होगी जिसमें हम चाहते हैं कि योजना में आच्छादित बच्चों की संख्या इतनी ही बनी रहे, और किसी बच्चे को इसकी जरूरत न हो। फिर भी हम इनकी पूरी देखभाल करेंगे। ये बच्चे पूरे प्रदेश की पहचान बनेंगे। अपने -अपने क्षेत्र में वे लीडर बनेंगे। पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डा. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अभावों में संघर्ष करने वाले अपनी संकल्प शक्ति से आसमान को छूते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना में आच्छादित बच्चों को प्रतिमाह 3-3 हजार रूपए की सहायता राशि दी जा रही है। इसके साथ ही इन्हें निशुल्क राशन, निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था भी की जा रही है। जिलों के डीएम इन बच्चों की सम्पत्ति का संरक्षण भी करेंगे। अनाथ बच्चों के लिए नौकरियों में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य है। सरकार इन बच्चों के कौशल विकास पर भी ध्यान देगी।

सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास सरकार का ध्येय
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार का भाव अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को आगे बढ़ाना है। सरकार एक सहयोगी के रूप में काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्येय वाक्य सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास पर राज्य सरकार चल रही है। वर्ष 2017 से जितनी भी घोषणाएं की गई है, वे सभी पूर्ण होने की ओर अग्रसर हैं। हाल ही में कोरोना से प्रभावित चार धाम यात्रा व पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए 200 करोड़ जबकि हेल्थ सेक्टर और हेल्थ सेक्टर में काम कर कोरोना योद्धाओं के लिए 205 करोड़ रूपए का पैकेज लाए हैं। युवाओं के लिए रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तेजी से शुरू करने जा रहे हैं। स्वरोजगार के लाखों अवसर उत्पन्न करने पर काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना सरकार के मानवीय पक्ष का प्रतीक
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना सरकार के मानवीय चेहरे को बताता है। कोरोना ने हमसे बहुत कुछ छीना है। हर किसी ने अपने किसी को खोया है। हमें इस दर्द से संघर्ष करके आगे बढ़ना है। कोरोना काल में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों की पीड़ा को मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने समझा है। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना अन्त्योदय की परिकल्पना को साकार करती है। यह योजना बच्चों को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक तौर पर सशक्त करेगी। सरकार इनके अभिभावक की भूमिका का निर्वाह कर रही है।

21 वर्ष की आयु तक 3 हजार रूपए प्रतिमाह की सहायता
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि दिनांक 01 मार्च, 2020 से 31 मार्च, 2022 तक कोविड-19 महामारी एवं अन्य बीमारियों से पिताध्माताध्संरक्षक की मृत्यु अथवा माता-पिता में से कमाऊ सदस्य की मृत्यु के कारण जन्म से 21 वर्ष तक के प्रभावित बच्चों की देखभाल, पुनर्वास, चल अचल सम्पत्ति, उत्तराधिकारों एवं विधिक अधिकारों के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना लागू की गयी है। इस योजना में आच्छादित बच्चों को 3 हजार रूपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता 01 जुलाई, 2021 से 21 वर्ष की आयु तक अनुमन्य की गयी है।

आर्थिक सहायता के साथ शिक्षा, पोषण व संरक्षण
सरकार द्वारा प्रभावित बच्चों के भरण-पोषण, सुरक्षा एवं सर्वांगीण विकास का दायित्व स्वयं लेते हुये ऐसे बच्चों का निरन्तर अनुश्रवण किया जा रहा है। उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक संरक्षण प्रदान करने हेतु प्रतिमाह रू0 3000.00 की आर्थिक सहायता के साथ-साथ उन्हें शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधाएं प्रदान करने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु समस्त जिलाधिकारियों को प्रभावित बच्चों की देखभाल, पुनर्वास, चल-अचल सम्पत्ति, उत्तराधिकारों एवं विधिक अधिकारों की रक्षा हेतु संरक्षक अधिकारी नामित किया गया है।

कुल 2347 बच्चे चिन्हित, प्रथम चरण में 1062 बच्चे लाभान्वित
दिनांक 01 अगस्त, 2021 तक जन्म से 21 वर्ष तक की आयु के कुल 2347 बालकध्बालिका चिन्हित किये गये है। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के शुभारम्भ के अवसर पर प्रथम चरण में कुल 1062 बच्चों को लाभान्वित किया जा गया है। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के संचालन हेतु एमआईएस पोर्टल बनाया जा रहा है, जिसमें समस्त बच्चों का विवरण जनपदों द्वारा ऑनलाइन भरा जायेगा। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजनान्तर्गत प्रतिमाह 3 हजार रूपए के मानकानुसार जुलाई, 2021 से प्रारम्भ करते हुए निदेशालय द्वारा पी०एफ०एम०एस० के माध्यम से डी०बी०टी० सीधे चिन्हित बच्चों के बैंक खातों में धनराशि भेजी जायेगी।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों की हर सम्भव मदद कर रही है। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा जनहित में बहुत सी योजनाएं शुरू की गई हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इण्टरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाली बालिका निकेतन की कुमारी तारा एवं कुमारी स्मृति को सम्मानित भी किया। बालिका निकेतन की बालिकाओं ने मुख्यमंत्री एवं अतिथियों को स्वनिर्मित पेंटिंग भेंट की। इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधायक मुन्ना सिंह चैहान, सहदेव पुण्डीर, रामसिंह कैड़ा, दीवान सिंह बिष्ट सहित विशिष्टजन और अधिकारी उपस्थित थे।

अपना स्तर खुद घटा रहे मीडिया संस्थान, भ्रामक खबरों से बचना चाहिए

उत्तराखंड में आज दिनभर से एक खबर को लेकर जमकर चर्चा हो रही है। दरअसल इस चर्चा का विषय मीडिया की घटती विश्वसनीयता है। यह इसलिए क्यूंकि आज सुबह से ही राज्य सरकार के दो विज्ञापन को लेकर आधारहीन खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि बिना तथ्यों की जानकारी के एक मनगढ़ कहानी बनाकर खबर के रूप में प्रसारित किया जा रहा है। दरअसल ताजा मामला मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। जिस पर कतिपय समाचार पोर्टल पर मुख्यमंत्री के तस्वीर के साथ विभागीय मंत्री की फोटो न लगाए जाने को लेकर भ्रामक स्थिति उत्पन्न की जा रही है।

एक नजर कोर्ट के आदेश पर

दरअसल 13 मई 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया गया था कि सरकारी विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की फोटो ही लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कर्नाटक सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार समेत कई राज्यों की सरकार ने इस बार सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से पुनर्विचार याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए ’18 मार्च 2016 को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष की पीठ ने यह आदेश संशोधित करते हुए निर्णय दिया कि सरकारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री की फोटो लगाई जा सकेगी, इसके अलावा कोर्ट ने इसी आदेश में विभागों के कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्रियों को भी फोटो लगाने हेतु अनुमति प्रदान की है. इस आदेश के तीसरे बिंदु में स्पष्ट कहा गया है कि यदि विभागीय मंत्री की फोटो लगती है तो उसमें मुख्यमंत्री की तस्वीर नहीं लगाई जाएगी यानी कि राज्य सरकार के विज्ञापन में या तो मुख्यमंत्री या फिर विभागीय मंत्री की तस्वीर ही लगाई जाएगी।

मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ज्यादातर राज्य सरकारों द्वारा सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री की ही तस्वीर लगाई जाती हैं, यह बात अलग है कि अगर विभाग अलग से विज्ञापन प्रकाशित कर रहा है तो उसमें विभागीय मंत्री की तस्वीर लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी के बिना कतिपय न्यूज पोर्टल इस तरह के मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। लिहाजा जनता के बीच भी भ्रामक जानकारी दी जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर हमला, बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रही है सरकार

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच उत्तराखंड सरकार ने आज से कक्षा 9 से 12 वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोल दिए हैं। जबकि संक्रमण से बचाव के लिए अभी बच्चों का कोविड टीकाकरण तक शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में स्कूली बच्चों को बिना सुरक्षा कवच के स्कूल जाना पड़ रहा है। जिससे बच्चों में संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर संक्रमण का असर ज्यादा होने को लेकर विशेषज्ञ पहले ही आगाह कर चुके हैं। सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस सवाल खड़ा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आधी-अधूरी तैयारियों के साथ स्कूल खोलने का फैसला बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाला है। हम स्कूल खोलने का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए स्कूलों में किस तरह की इंतजाम किए गए हैं। इसे लेकर पहले पूरी तैयारियां की जानी चाहिए थी। सभी स्कूलों में पूर्ण इंतजाम होने के बाद स्कूल खोले जाने चाहिए थे। प्रीतम सिंह ने कहा कि पहली लहर में कोरोना संक्रमण काबू में आने के बाद सरकार ने स्कूल खोलने का फैसला लिया था। लेकिन स्कूलों में बच्चों और अध्यापकों के संक्रमित होने पर फिर से स्कूल बंद करने पड़े। सरकार अपने पूर्व के फैसलों से सबक नहीं ले रही है। एक तरफ सरकार व स्वास्थ्य विभाग कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को संक्रमण से बचाव व उपचार की तैयारियां कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ आधी अधूरी तैयारियों के बीच जो स्कूल खोलने का फैसला लिया है हम उसका विरोध कर रहे हैं।

’शिक्षकों और कर्मचारियों का नहीं हुआ पूर्ण वैक्सीनेशन’

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार ने आनन-फानन स्कूल खुलवाकर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने का काम किया है। उनकी जानकारी में आया है कि स्कूलों के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का अभी तक वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। 20 फीसदी से अधिक शिक्षकों एवं कर्मचारियों का अभी वैक्सीनेशन भी नहीं हुआ है। सरकार ने किसी भी जिम्मेदारी से बचने के लिए कह दिया है कि स्कूल में उन छात्रों को ही प्रवेश मिल रहा है, जिनके पास अभिभावकों का सहमतिपत्र है। यानि आप समझ सकते हैं कि सारी जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी। लंबे समय से बंद स्कूलों में साफ-सफाई न होने कई स्कूलों में झाड़ियां उग आई हैं। इन स्कूलों में सफाई नहीं की गई है। ऐसे में आप खुद समझ सकते हैं कि सरकार को बच्चों की कितनी चिंता है।

’बिना बजट कहां से होगा सैनिटाइज’

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि स्कूलों के पास सैनिटाइजेशन करवाने तक के लिए अलग से फंड की व्यवस्था नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को सैनिटाइज करने के आदेश तो जारी किए गए हैं, लेकिन इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है। स्कूल खुलने से पहले विभाग को इसके लिए बजट की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

’स्कूलों में नहीं है शौचालय और पानी की सुविधा’

प्रतीम सिंह ने कहा कि राज्य के 1170 स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। वहीं 2109 स्कूलों में बच्चों को पीने के पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है और सरकार कह रही है कि उत्तरखंड खुले में शौच मुक्त हो चुका है। यही नहीं एक रूपये में हर घर नल, हर घर जल पहुंचाया जा रहा है। सरकार की पोल खुद सरकारी स्कूल खोल रहे हैं।