प्रधानमंत्री का पुतला फूंक सिख समाज ने किया किसानों आंदोलन का समर्थन

तीर्थनगरी में भी किसान आंदोलन को जायज ठहराते हुए सिख समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला आग के हवाले किया। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई। वहीं, सिख समाज ने किसान आंदोलन के पक्ष में नारे भी लगाए।

आज त्रिवेणी घाट चैक पर किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए ऋषिकेश का सिख समाज व कई दलों के लोग एकत्र हुए। यहां केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने की मांग उठी।

पुतला दहन व प्रदर्शन करने वालों में श्री गुरू सिंह सभा ऋषिकेश के प्रधान, गोबिंद सिंह, दिनेश कोठारी, ललन राजभर, ललित मोहन मिश्रा, सरदार मंगा सिंह, इदंरपाल सिंह, तजिंदर सिंह चिटकारा, जगमीत सिंह, परमजीत सिंह, मोहिंदर सिंह, जय्मल सिंह, इकबाल सिंह, हिम्मत सिंह, हरविंदर सिंह, अजित सिंह, सिमरजीत सिंह, तीर्थ सिंह, करनप्रीत सिंह, सतवीर सिंह, राजिंदर सिंह, जगजीत सिंह आदि उपस्थित रहें।

ज्यूडिशन सर्विस में स्थान बनाकर बहू ने भाजपा नेता सास का सिर किया गर्व से ऊंचा

भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष कुसुम कंडवाल का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है, उनकी बहू कात्यायनी कंडवाल ने दिल्ली की ज्यूडिशन सर्विस में दूसरा स्थान कब्जाया है, इसकी बदौलत अब वह दिल्ली में न्यायधीश बनकर वादों का निस्तारण करेंगी।

मूल रूप से मवाल स्यूं, पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली कात्यायिनी के पिता मदनमोहन सुंदरियाल गोपेश्वर में सिंचाई विभाग में कार्यरत थे। कात्यायिनी का जन्म भी गोपेश्वर में ही हुआ था। कात्यायिनी की मां कुसुम सुंदरियाल जूनियर हाई स्कूल में शिक्षिका है। शिक्षा पूरी करने के बाद 2015 में कात्यायिनी का विवाह प्रांशु कंडवाल से हुआ। प्रांशु का दिल्ली में खुद का बिजनेस है। जिसमें वह डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।

प्रत्येक सास-ससुर का सपना होता है कि उनकी बहू ससुराल में घर की जिम्मेदारी संभाले। लेकिन सास भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कुसुम कंडवाल और ससुर सेवानिवृत्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि कंडवाल ने कात्यायिनी को बहू न समझ कर अपनी तीसरी संतान बेटी के रूप में स्वीकार कर उसका लक्ष्य पूछा। वहीं कात्यायिनी ने भी सास ससुर में अपने माता पिता का रूप देखकर अपना लक्ष्य बताया। और फिर क्या था यहीं से कात्यायनी के सपनों को पंख लगने शुरू हो गए। कात्यायिनी के पति प्रांशु कंडवाल ने भी उनको लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए जी तोड़ मेहनत की और हर कदम पर उनका साथ दिया।

इसी का परिणाम है जो आज 5 साल के बाद उन्होंने उत्तराखंड दिल्ली ज्यूडिशल सर्विसेज पीसीएस जे 2019 में द्वितीय स्थान प्राप्त कर उत्तराखंड के साथ ही तीर्थनगरी का नाम भी रोशन किया है।

एक्शन में मुख्यमंत्री, ई-गवर्नेंस को लेकर अब होगी कार्रवाई

उत्तराखंड सरकार ने 2017 के बाद भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के साथ सुशासन को अपने शीर्ष एजेंडे में रखा है। इसके लिए सरकारी कामकाज और सेवाओं को सुधारने को प्राथमिकता दी गई है। उत्तराखंड के जिलों में ई-गवर्नेंस का क्रियान्वयन प्रारंभ किया जा चुका है। राज्य स्तर पर प्रारंभ की गई सुशासन की योजनाओं की अब मुख्यमंत्री खुद मॉनीटरिंग करेंगे। इसके लिए सीएम डैश बोर्ड को ज्यादा दुरुस्त किया जा रहा है। यह पहली बार होगा कि डैश बोर्ड पर विभागों के कामकाज को लेकर जनता की शिकायतों और सुझावों को दोनों को शामिल किया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह विभागों में जन समस्याओं के समाधान को लेकर की जा रही कार्यवाही का सच मुख्यमंत्री के सामने रहे। इसमें पहली बार जवाबदेही भी तय की जा रही है।
इसी वजह से सीएम डैश बोर्ड और सीएम हेल्पलाइन को जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इस हेल्पलाइन में आम आदमी जन सेवाओं से जुड़े विभागों से संबंधित शिकायतों को दर्ज कराता है। हेल्पलाइन में शिकायतों के निवारण के लिए समयबद्ध व्यवस्था की गई है। डैश बोर्ड से जुड़ने के बाद हेल्पलाइन में दर्ज होने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर विभागों के स्तर पर की जाने वाली तैयारी और सतत रणनीति भी सामने आएगी।
सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा ने बताया कि सीएम डैश बोर्ड से जुड़े विभागों ने जन सुझावों पर अमल और शिकायतों का त्वरित निराकरण नहीं किया तो उनकी वार्षिक प्रविष्टियों में रेड एंट्री होगी। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को जन शिकायतों में देरी या ढिलाई बरतने का दोषी पाया गया तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डैश बोर्ड पर 50 फीसद से कम प्रगति वाले विभागों को डैश बोर्ड से स्वतः पत्र जारी किए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने ईवीएम गड़बड़ी के आरोपों को नकारा, याचिकाएं खारिज

हाईकोर्ट ने विधान सभा चुनाव 2017 में ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा दायर पांचों चुनाव याचिकाओं को खारिज कर दिया है ।
न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने प्रदेश के 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में ईवीएम मशीनों में हुई गड़बड़ी के मामले में मंगलवार को अपना निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने पांच चुनाव याचिकाओं को वेरिफाइड नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया है। जिनकी 14 अक्टूबर को सुनवाई पूरी करते हुए निर्णय सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट के फैसले से ईवीएम को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठा रही कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। जबकि भाजपा को विपक्ष पर हमलावर होने का अवसर मिल गया है। हालांकि याचिकाकर्ताओं की अधिवक्ता की ओर से कहा गया है कि हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
कांग्रेस के पराजित प्रत्याशी व पूर्व मंत्री नवप्रभात, विक्रम सिंह नेगी, राजकुमार, अम्बरीष कुमार, मसूरी की गोदावरी थापली ने बीजेपी के जीते हुए प्रत्याशी मुन्ना सिंह चैहान, खजान दास, आदेश कुमार चैहान और गणेश जोशी व अन्य के निवार्चन को चुनौती दी थी। याचिका में उन्होंने चुनाव आयोग व सरकार पर आरोप लगाया गया था कि इन भाजपा प्रत्याशियों को जिताने के लिए ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की हुई है, लिहाजा इनके निवार्चन को निरस्त किया जाय, जबकि जीते हुए प्रत्याशियों की तरफ से कहा गया था कि ये याचिकाएं आधारहीन हैं। ईवीएम मशीनों में किसी भी तरह की गड़बड़ी नही हुई है, अभी तक याचिकर्ताओ ने गड़बड़ी होने का कोई सबूत पेश नही किया है लिहाजा सभी याचिकाएं निरस्त किए जाने योग्य है।

किसानों की हर मांग को गंभीरता से लेती है सरकार-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से सचिवालय में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने किसानों की विभिन्न समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए उनके निराकरण का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में अनेक निर्णय लिये गये हैं। किसानों को 3 लाख रूपये तक का बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध कराये जाने के साथ ही उत्पादों के क्रय की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपनी किसी भी समस्या के समाधान के लिये टोल फ्री नम्बर 1905 पर अपनी समस्यायें बतायें इससे उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बिजली, पानी सहित कृषि सम्बन्धी कार्यों में आवश्यक सहयोग के लिये सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हित में देहरादून में किसान भवन बनाया गया है। राज्य सरकार द्वारा गन्ना किसानों को सहकारी चीनी मिलों के स्तर पर लम्बित सौ प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया गया है। धान मूल्य का भुगतान ऑनलाइन 24 घण्टे के अन्दर ही बिल प्राप्त होते ही आरटीजीएस के माध्यम से उनके खाते में जमा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार हुआ है कि नये पैराई सत्र से पहले गन्ना किसानों को उनके गन्ना मूल्य का भुगतान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की इकबालपुर शुगर मिल जो बन्द हो गई थी जिससे 22,500 किसान जुड़े थे, राज्य सरकार ने इस मिल को 36 करोड़ की गारन्टी देकर खुलवाया है ताकि किसानों को उनके गन्ना मूल्य का भुगतान हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के व्यापक हित में खाण्डसारी नीति बनाई गई है ताकि जो भी किसान खाण्डसारी उद्योग शुरू करना चाहे शुरू कर सकता है। मुख्यमंत्री ने किसानों को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने किसानों से किसान पेंशन निधि का लाभ लेने की भी अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को वृद्धावस्था पेंशन भी दी जा रही है। इस योजना का भी लाभ किसान भाई ले सकते हैं।
इस अवसर पर किसान यूनियन के प्रतिनिधियों द्वारा रखी गई समस्याओं में प्रत्येक जनपद में किसान भवन बनाये जाने, किसानों को पेंशन दिये जाने, निजी चीनी मिलों के स्तर पर किसानों को लम्बित गन्ना मूल्य का भुगतान किये जाने, धान क्रय केन्द्रों पर एवं मण्डियों में सुविधायें उपलब्ध कराये जाने से सम्बन्धित समस्यायें प्रमुख थी। किसानों का उत्पीड़न न हो इसकी व्यवस्था के निर्देश दिये जाने का भी अनुरोध उन्होंने मुख्यमंत्री से किया।
इस अवसर पर इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार डॉ धन सिंह रावत, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चैधरी संजीव तोमर, प्रदेश अध्यक्ष सोम दत्त शर्मा, इन्द्रजीत सिंह सांगवान, राममेहर तोमर, चैधरी सुदेश पाल सिंह, चैधरी राजीव मलिक, विकेरा बालियान, पवन त्यागी, अजय त्यागी, श्रवण त्यागी एवं जावेद अली आदि उपस्थित थे।

कृषि कानून किसानों के हित में लाई है केन्द्र सरकार-मुख्यमंत्री

कृषि कानून के विरोध में भारत बंद में विपक्षी दलों के शामिल होने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कृषि कानून बनाने का वादा किया था, लेकिन आज वह विरोध में उतर आई है। उन्होंने कांग्रेस पर दोगला होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद तो बर्बाद है ही, वह किसानों को भी बर्बाद करना चाहती है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके हितों के प्रति सौ फीसदी प्रतिबद्ध है। वे किसी भ्रम में न पड़े। कोई ऐसा काम न हो, जिससे राज्य के अमन को नुकसान पहुंचे।
मुख्यमंत्री बीजापुर अतिथि गृह में किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। पंजाब की कांग्रेस सरकार ने आंदोलन को गलत दिशा में मोड़ने का प्रयास किया। कृषि कानून किसानों के हित में है। इसकी बहुत लंबे समय से डिमांड चल रही थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रसिद्ध कृषि विज्ञानी रहे स्वामीनाथन की रिपोर्ट के आधार पर कृषि कानून है। कानून के तहत किसानों के लिए अनेक विकल्प खोल दिए गए हैं। पहले किसान मंडी मे खरीदारी करता था। आज ओपन मार्केट कर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि एमएसपी समाप्त हो रहा है। एमएसपी समाप्त नहीं हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों से अपील की कि वे बिल्कुल भ्रमित न हों। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भजापा आपके हितों की संरक्षक है। लेकिन कांग्रेस जो कृषि कानून के विरोध में खुलकर आ रही है, दोगली है। उसने  2019 के घोषणा पत्र में है साफ लिखा कि वह एपीएमसी एक्ट को निरस्त कर देगी। कृषि उत्पादों के व्यापार की व्यवस्था करेगी।
आज वही कांग्रेस और उस राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं इस आंदोलन में कूद गए। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने  कहा कि जिस तरह के नारे लगाए जा रहे हैं, ऐसा लगता है कि कुछ लोग देश की अखंडता और एकता को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।  हम इसकी तीव्र भर्त्सना करते हैं। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के गुजरात के किसानों को दी गई सस्ती बिजली का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसानों को दोगली कांग्रेस से बचने की जरूरत है। 

पेराई सत्र से पहले किसानों को भुगतान
मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों को लेकर राज्य सरकार के फैसलों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शायद पहली बार हुआ कि नए पेराई सत्र से पहले किसानों को उनकी फसल का पूरा भुगतान कर दिया गया। किसानों से धान की खरीदारी हो रही है। 24 घंटे में बिलों का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से हो रहा है। इकबालपुर निजी मिल को सरकार ने 36 करोड़ की गारंटी देकर 22 हजार से अधिक किसानों को राहत दी।

ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से कार्यों में आएगी पारदर्शिता-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने सचिवालय में ई-ऑफिस की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि 25 दिसम्बर, 2020 से सचिवालय के सभी अनुभागों को ई-ऑफिस सिस्टम से जोड़ा जाना है। इसके लिए सभी विभाग अपनी ओर से सभी आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण कर लें।
मुख्य सचिव ने कहा कि ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से कार्य में पारदर्शिता आएगी इसके साथ ही कार्यों की गति भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए लगातार प्रशिक्षण कराया जा रहा है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अनुभागों के निरीक्षण की भी व्यवस्था की जाए। विभागों एवं अनुभागों से फीडबैक लेते हुए उनकी समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था भी की जाए।
बैठक में सचिव आर.के. सुधांशु ने बताया कि ई-ऑफिस सिस्टम की दिशा में आईटीडीए, जिलाधिकारी देहरादून कार्यालय, शहरी विकास एवं वन विभाग का पीसीसीएफ ऑफिस ने 100 प्रतिशत ई-ऑफिस सिस्टम लागू कर लिया है। बाकी विभाग भी तेजी से ई-ऑफिस पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सचिवालय में इस सम्बन्ध में लगातार प्रशिक्षण कराया जा रहा है। जिस भी अनुभाग में कोई समस्या आ रही है। 20 मिनट के अन्दर हमारी टीम वहां पहुंच कर उन्हें आवश्यक जानकारी देते हुए उनकी समस्या का निराकरण कर रही है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, मनीषा पंवार, सौजन्या, निदेशक आईटीडीए, अमित सिन्हा सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार कर गये नड्डा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा उत्तराखंड में अपना चार दिवसीय प्रवास पूरा कर सोमवार को लौट गए। जाने से पहले वह संगठन और सरकार को खास पांच मंत्र दे गए। तीन दिन चली मैराथन बैठकों में शीर्ष नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ताओं से हुए संवाद में उन्होंने साफ किया कि 2022 और 2024 में मिशन इलेक्शन का लक्ष्य हिंदुत्व कार्ड, मोदी मैजिक, मजबूत और सक्रिय सांगठनिक नेटवर्क, निरंतर प्रवास और सहज आचरण से ही सधेगा।
ये सारी बातें नड्डा के विचारों और आचरण से बार-बार सामने आई। अपने 120 दिन के देशव्यापी प्रवास की शुरुआत उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड से यूं नहीं की। कुंभनगरी हरिद्वार के गंगा तट हर की पौड़ी से प्रवास की शुरुआत के विशेष निहितार्थ हैं। बेशक नड्डा कहें कि यह उनकी दिली इच्छा थी, लेकिन सियासी जानकार इसे आरएसएस और भाजपा का हिंदुत्व एजेंडा मानते हैं। नड्डा ने गायत्री परिवार के संचालक उन प्रणव पंड्या से मुलाकात की, जिनकी संस्था के देश दुनिया में करीब 20 करोड़ अनुयायी हैं। 
उत्तराखंड में राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर प्रवास अमित शाह ने भी किया था। शाह के दौरे के अनुभव के आधार पर पार्टी नेताओं ने नड्डा के दौरे को लेकर उसी तरह की धारणाएं बनाई थी, लेकिन शाह के आक्रामक रुख से जुदा नड्डा ज्यादा सहज और संतुलन साधते नजर आए।

अनुभवी और हिमाचली होने के फायदा
उनकी बातों ने सरकार और संगठन दोनों को सहज किया। कोविडकाल की बंदिशों के बीच पार्टी नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं से उन्होंने जितना भी संवाद बनाया, उसमें उन्होंने निरंतर प्रवास पर फोकस किया। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर शक्ति केंद्र के मुखिया और उसकी टीम को निरंतर प्रवास करने की सलाह दी। बदलती राजनीतिक चुनौती से मुकाबला करने के लिए उन्होंने सांगठनिक नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया। उनका मानना था कि भाजपा को रोकने के लिए सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर लड़ेंगे, लिहाजा पार्टी को उसी हिसाब से तैयारी करनी है। इसके लिए उन्होंने अपना एजेंडा तय करने का मंत्र दिया।
नड्डा का यह मंत्र पीएम मोदी के नेतृत्व कौशल, केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की चाशनी में लिपटा है, जिसे जन जन के कान में फूंकने की उनकी योजना है। इससे साफ हो गया कि प्रदेश में पार्टी के शीर्ष नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ता की जुबान पर मोदी ही नजर आएंगे। सांगठनिक नेटवर्क की रीढ माने जाने वाले जमीनी कार्यकर्ता के बीच भी उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि संगठन नेतृत्व के जेहन में उनका सबसे ज्यादा ख्याल है। जिला, मंडल और बूथ अध्यक्ष के साथ मंच साझा करना इसी रणनीति का हिस्सा माना गया। साथ ही इसे प्रदर्शित करके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सहजता का संदेश भी दिया। 
राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रवास के दौरान पहाड़ के मर्म पकड़ पाए। उन्होंने कहा भी, मैं पहाड़ी हूं, इसलिए पहाड़ का दर्द खूब समझता हूं। उन्होंने पहाड़ पर महिलाओं के संघर्ष को बयान किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ हिमाचल का हो या उत्तराखंड का, संघर्ष दोनों ही जगह समान है। साथ ही उन्होंने मोदी सरकार की उज्ज्वला और सौभाग्य योजनाओं का जिक्र किया, कहा कि दोनों योजनाओं ने पहाड़ के लोगों और महिलाओं का संघर्ष कम किया है।

कोरोना के मामले एक बार फिर बढ़ने से एक्शन में सरकार

प्रदेश में कोरोना संक्रमित मामले और मरीजों की मौत होना थम नहीं रहा है। बीते 24 घंटे के भीतर 512 नए संक्रमित मिले हैं और 10 मरीजों की मौत हुई है। कुल संक्रमितों का आंकड़ा 78 हजार पार हो गया है। वहीं, मरने वालों की संख्या 1295 पहुंच गई है। 
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को 12637 सैंपलों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है। जबकि 512 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। देहरादून समेत चमोली, पौड़ी जिले में संक्रमित मामले बढ़े हैं। देहरादून में सबसे अधिक 229 कोरोना मरीज मिले हैं। हरिद्वार में 60, नैनीताल में 53, चमोली में 37, पौड़ी में 25, टिहरी में 20, ऊधमसिंह नगर में 19, उत्तरकाशी में 19, अल्मोड़ा में 18, पिथौरागढ़ में 15, चंपावत में 12, रुद्रप्रयाग में चार और बागेश्वर में एक संक्रमित मिला है। 
प्रदेश में 24 घंटे में 10 कोरोना मरीजों की मौत हुई है। इसमें श्री महंत इन्दिरेश हास्पिटल में छह, एम्स ऋषिकेश में एक, दून मेडिकल कॉलेज में दो, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में एक मरीज ने उपचार के दौरान दम तोड़ा है। अब तक प्रदेश में मरने वालों की संख्या 1295 हो गई है। वहीं, 471 मरीजों के इलाज के बाद घर भेजा गया। इन्हें मिला कर 71105 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। 

देहरादून नगर निगम 2 दिन के बंद
देहरादून नगर निगम के लेखा अनुभाग के एक अधिकारी के कोरोना संक्रमित पाए जाने पर नगर निगम में फिलहाल जरूरी कार्य रोक दिए गए हैं। साथ ही सैनिटाइजेशन का कार्य भी शुरू कर दिया गया। मेयर सुनील उनियाल गामा ने जानकारी दी कि नगर निगम पब्लिक के लिए 2 दिन के लिए बंद किया गया है।

जिपं अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री कोरोना पॉजिटिव
चमोली की जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी और उनके पति पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। सोमवार को दोनों स्वास्थ्य लाभ के लिए हेलीकॉप्टर से देहरादून एम्स अस्पताल रवाना हुए। पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी ने चार दिसंबर को अपनी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी सोशल मीडिया पर दी थी, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष की रिपोर्ट इससे पहले पॉजिटिव आई थी।
डिप्टी सीएमओ डा. एमएस खाती ने बताया कि दोनों दोनों का स्वास्थ्य सामान्य है। वह कई दिनों से घर में ही आइसोलेट थे, लेकिन सोमवार को स्वास्थ्य लाभ के लिए हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश रवाना हुए।

जो हमारे विचारों का जन्मजात विरोधी है, उनकी चिंता न करेः नड्डा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने 70 साल राज किया। लेकिन जितने काम पीएम मोदी ने छह साल में किए, कांग्रेस सपने में भी नहीं सोच सकती है।

उत्तराखंड के दौरे के तीसरे दिन नड्डा ने सोशल मीडिया वॉलंटियरों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया वॉलंटियर परिवर्तन के वाहक हैं। भाजपा ही पहली पार्टी है, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। इसका लाभ पार्टी को मिला है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जो हमारे विचारों का जन्मजात विरोधी है, उनकी चिंता न करें।

इनकी अपने घर में भी नहीं बनती है। कार्यकर्ता को बुरी बातों से दूर रहना चाहिए। भाजपा देश के उज्ज्वल भविष्य की यात्रा में लगी हुई है। हमारी सोच में भारत के हर वर्ग के नागरिकों के उत्तम जीवन की होनी चाहिए। लाल सलाम बोलने वाले समाप्ति के कगार पर है और वंदे मातरम बोलने वाले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। विदेशों में भी वंदे मातरम वालों का गुणगान हो रहा है।

सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं से कहा कि जिन लाभार्थियों को हमारी योजनाओं का लाभ होता है। उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर साझा करें। हर कार्यकर्ताओं को अपना लक्ष्य तय करना है।

बैठक में प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी शेखर वर्मा ने कार्यकर्ताओं को आने वाली विभिन्न प्रकार की सोशल मीडिया की कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी। बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिव प्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।