चावल व गेंहू के अलावा अन्य फसलों पर सरकार देगी खरीद की गांरटी

सरकार ने कृषि की ओर कदम बढ़ाते हुये आगामी वित्त वर्ष के आम बजट में कुछ कारगर पहल किये जाने की संभावना जताई है। जिसके तहत सरकार गेहूं और चावल को छोड़ अन्य सभी फसलों की खरीद की गारंटी देने की योजना बना रही है।

योजना के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गेहूं व चावल को छोड़कर सभी फसलों की न्यूनतम गारंटी देनी होगी। आम बजट में इस पर प्रावधान किये जाने की संभावना है। दरअसल, सरकार दो दर्जन से अधिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करती है, लेकिन गेहूं व चावल को छोड़ बाकी फसलों की खरीद आमतौर पर नहीं होती है। छिटपुट राज्यों में कुछ-कुछ फसलों की खरीद कर ली जाती है। हालांकि, गेहूं व चावल की खरीद की शत प्रतिशत गारंटी नहीं होती है।

गेहूं व चावल की सरकारी खरीद पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में की जाती है। बाकी राज्यों में छिटपुट तौर पर थोड़ी बहुत होती है। इनके अलावा ढेर सारी फसलें होती हैं, जो किसानों की आमदनी को प्रभावित करती हैं। इसे लेकर किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जिन फसलों की एमएसपी घोषित भी होती है, लेकिन उनकी खरीद नहीं होती है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है। किसानों की यह मांग लंबे समय से होती आ रही है कि उनकी उपज की खरीद की गारंटी होनी चाहिए।

कृषि मंत्रालय ने आम बजट के लिए इस आशय का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें जिंस बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को नुकसान से बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके मुताबिक राज्यों को इन फसलों के मूल्य कम होने की दशा में उपज की खरीद का पूरा हक होगा, जिसके लिए केंद्र भरपाई की गारंटी देगा। किसानों को बाजार मूल्य में उतार चढ़ाव के जोखिम से बचाने की रणनीति तैयार की गई है।

योजना का उद्देश्य खरीद लागत, भंडारण, विक्रय लागत, पूंजी पर ब्याज और अन्य आकस्मिक खर्च को कवर करते हुए खरीद और विक्रय मूल्य के अंतर में अगर घाटा हुआ तो केंद्र सरकार भरपाई करेगी। यह विशेष प्रावधान मध्य प्रदेश सरकार की शुरु की गई भावांतर योजना से मिलती जुलती होगी। घाटे के इस अंतर का 40 से 50 फीसद केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी राज्य सरकारों को वहन करना होगा। खरीद किये जाने वाली जिंसों की बिक्री का पूरा दायित्व राज्य सरकारों का होगा।

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार वकील से सीधे जज बनेंगी इंदु

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश केएम जोसेफ व वरिष्ठ अधिवक्ता इंदू मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सरकार से इन दोनों ही लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। इंदू मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था। वे सुप्रीम कोर्ट में अभी तक नियुक्त हुईं सातवीं महिला जज होंगी। अभी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आर. भानुमति अकेली महिला जज हैं। स्वतंत्रता के बाद से अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ छह महिला जज हुई हैं।

जस्टिस केएम जोसेफ फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज हैं। वे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का आदेश रद करने वाली पीठ में शामिल थे। उसके बाद उनके स्थानांतरण की चर्चाएं रहीं लेकिन उत्तराखंड से उनका स्थानांतरण नहीं हुआ।

कोलेजियम ने इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस शिव कुमार सिंह को स्थाई करने की सिफारिश की है। हालांकि कोलेजियम के समक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुल 11 अतिरिक्त जजों को स्थाई करने का प्रस्ताव था, लेकिन शिव कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसलिए फिलहाल उनके बारे में सिफारिश की गई है। बाकी प्रस्तावों पर कोलीजियम बाद में विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में महिला जज

सुप्रीम कोर्ट 1950 में बना उसके 39 साल बाद 1989 में एम फातिमा बीवी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज नियुक्त हुईं। फातिमा बीवी केरल हाईकोर्ट से सेवानिवृत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुईं थी। वे 29 अप्रैल 1992 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुईं। बाद में वे तमिलनाडु की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं।

सुप्रीम कोर्ट में दूसरी महिला जज सुजाता वी मनोहर हुईं जिन्होंने जज के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत बाम्बे हाईकोर्ट जज से की थी। वे सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर 1994 से 27 अगस्त 1999 तक न्यायाधीश रहीं। जस्टिस सुजाता मनोहर के सेवानिवृत होने के करीब पांच महीने बाद जस्टिस रूमा पाल सुप्रीमकोर्ट की जज बनीं। जस्टिस पाल सबसे लंबे समय तक रहीं। वे 28 जनवरी 2000 से लेकर 2 जून 2006 तक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रहीं। उनके बाद चार साल तक सुप्रीम कोर्ट मे कोई महिला जज नहीं रही।

चार साल बाद झारखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुईं। जस्टिस मिश्रा 30 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट जज बनी और 27 अप्रैल 2014 को सेवानिवृत हुईं। इसी दौरान जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं। जस्टिस देसाई 13 सितंबर 2011 से लेकर 29 अक्टूबर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट जज रहीं। इस दौरान पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ दो महिला जज रहीं।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की सेवानिवृति के करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान महिला जज आर. भानुमति सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुईं। जस्टिस भानुमति 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश नियुक्त हुईं वे 19 जुलाई 2020 को सेवानिवृत होंगी। सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में सिर्फ दो बार एक साथ दो महिला जज रहीं।

अगले माह जनवरी से 2000 रूपये के कैशलेस पर नहीं देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज

डेबिट कार्ड से किसी दुकान पर 2000 रुपये तक की खरीदारी करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के तौर पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा। यह चार्ज केंद्र सरकार दो साल तक स्वयं ही वहन करेगी।

डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से उठाया जा रहा यह कदम अगले साल जनवरी से लागू होगा। केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह व्यवस्था ठीक से लागू हो, इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल-सितंबर-2017 में केवल डेबिट कार्ड से दो लाख 18 हजार, 700 करोड़ का कैशलेस लेनदेन हुआ है।

अगर यही रफ्तार रही तो इस वित्त वर्ष के अंत तक यह चार लाख 37 हजार करोड़ का हो जाएगा। उन्होंने इसके साथ ही बताया कि सरकार देश केा एक ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए लगातार नये प्रयास कर रही है और देश इसकी तरफ अग्रसर हो रहा है।

बता दें कि इससे पहले आरबीआई ने एमडीआर चार्जेज घटा दिए थे। इनको लेकर कारोबारियों ने आपत्ति जताई थी। कारोबारियों का कहना था कि इससे व्यापारियों का खर्च बढ़ेगा। इसको देखते हुए ही सरकार ने यह कदम उठाया है।

एमडीआर क्या है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह रेट है, जो बैंक किसी भी दुकानदार अथवा कारोबारी से कार्ड पेमेंट सेवा के लिए लेता है। ज्यादातर कारोबारी एमडीआर चार्जेज का भार ग्राहकों डालते हैं और बैंकों को दी जाने वाली फीस का अपनी जेब पर भार कम करने के लिए ग्राहकों से भी इसके बूते फीस वसूलते हैं।

राहुल के नेतृत्व में कई दल आ सकते है करीब

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान संभालते ही अब चर्चा 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी शुरू हो गई है। राहुल ने गुजरात में चुनाव प्रचार करने के बाद अध्यक्ष के तौर पर अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भविष्य की रूपरेखा पर संक्षिप्त जानकारी दी। तो वहीं इससे पहले बिहार के पूर्व सीएम और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी राहुल को विपक्षी एकता के नेता के तौर स्वीकार्यता के संकेत दे चुके हैं।

ऐसे में अब राहुल की कोशिश भी बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत होते जनाधार को विपक्षी एकता के साथ तोड़ने की रहेगी। 12 दिसम्बर को आरएसएस के गढ़ नागपुर में एक ऐसी कोशिश भी देखने को मिली। जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की दोस्ती एक बार फिर ट्रैक पर लौटती नजर आई।

किसानों की कर्जमाफी पर महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ नागपुर में दोनों दलों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने बताया कि 2019 में कांग्रेस और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर डाली।

आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन पर एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि दोनों पार्टियों को यूनाइटेड रहना चाहिए और 2019 में उनकी सरकार आएगी। इस घोषणा के साथ ही एनसीपी ने बीजेपी के प्रति अपने सख्त तेवर भी दिखाने शुरू कर दिए हैं।

वहीं शरद पवार ने किसानों से राज्य सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया और कहा कि सरकार जब तक किसानों का कर्ज माफ नहीं करती, तब तक किसान न तो बिजली का बिल भरें और न ही बैंकों का कर्ज चुकाएं।

यूपीए में सहयोगी रही एनसीपी ने अपना स्टैंड लगभग क्लीयर कर दिया है. लेकिन अब लेफ्ट समेत दूसरे विपक्षी दलों को साथ लाना राहुल की रणनीति का हिस्सा बन सकता है। यूपी में 2017 का विधानसभा चुनाव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की दोस्ती में लड़ने वाले राहुल के लिए उन्हें 2019 में साथ लाना आसान माना जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ बसपा भी कांग्रेस को सरकार में समर्थन दे चुकी है।

वहीं बिहार, बंगाल और केरल की बात की जाए तो लालू कांग्रेस के सहयोग के साफ संकेत दे चुके हैं। केरल में बीजेपी ने ताकत फूंकी हुई है और आरएसएस नेताओं की हत्याओं को राष्ट्रव्यापी मुद्दा बनाया है। जिसने वहां सत्ताधारी लेफ्ट के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। पहले भी कांग्रेस को लेफ्ट का समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में राहुल वाम दलों को एकजुट लाकर भी बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ आती-जाती रही हैं। ऐसे में राहुल उन्हें भी साधने को भरपूर कोशिश करेंगे।

राहुल के सामने जहां कांग्रेस संगठन को नया रूप देने और उसमें जान फूंकने का चौलेंज है, वहीं 2014 में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाले एनडीए और बीजेपी के खिलाफ विपक्षी खेमों को एकजुट करना भी उनके लिए बड़ा टास्क रहेगा।

व्यभिचार के लिये सिर्फ पुरूषों को सजा देने वाले कानून की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट

विवाहित महिला किसी गैर मर्द से शारीरिक संबंध बनाए तो सिर्फ उस मर्द को सजा क्यों? सुप्रीम कोर्ट इससे जुड़े कानून की समीक्षा करेगा। इस मसले पर दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

औरत को मुकदमे से छूट हासिल है
दरअसल, एडल्ट्री यानी व्यभिचार की परिभाषा तय करने वाली आईपीसी की धारा 497 में सिर्फ मर्द को सजा का प्रावधान है। किसी विवाहित महिला से उसके पति की मर्जी के बिना संबंध बनाने वाले मर्द को पांच साल तक की सजा हो सकती है, लेकिन महिला पर कोई कार्रवाई नहीं होती। याचिकाकर्ता ने इसे भेदभाव भरा कानून बताया है।
केरल के जोसफ शाइन की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि 150 साल पुराना ये कानून मौजूदा दौर में बेमतलब है। ये उस समय का कानून है जब महिलाओं की स्थिति बहुत कमजोर थी। इसलिए, व्यभिचार के मामलों में उन्हें पीड़ित का दर्जा दे दिया गया।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आज औरतें पहले से मजबूत हैं। अगर वो अपनी इच्छा से दूसरे मर्द से संबंध बनाती हैं, तो मुकदमा सिर्फ उस मर्द पर नहीं चलना चाहिए। औरत को किसी भी कार्रवाई से छूट दे देना समानता के अधिकार के खिलाफ है।
बेंच ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा, आपराधिक कानून लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता, लेकिन ये धारा एक अपवाद है। इस पर विचार की जरूरत है। कोर्ट ने ये भी कहा कि पति की मंजूरी से किसी और से संबंध बनाने पर इस धारा का लागू न होना भी दिखाता है कि औरत को एक संपत्ति की तरह लिया गया है।
पत्नी को शिकायत का अधिकार नहीं
याचिकाकर्ता ने बताया कि 1971 में लॉ कमीशन और 2003 में जस्टिस मलिमथ आयोग आईपीसी 497 में बदलाव की सिफारिश कर चुके हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने कानून में संशोधन नहीं किया।
कोर्ट में ये सवाल भी उठा कि आईपीसी 497 के तहत पति तो अपनी पत्नी के व्यभिचार की शिकायत कर सकता है, लेकिन पति के ऐसे संबंधों की शिकायत पत्नी नहीं कर सकती। कोर्ट ने माना कि मौजूदा हालात में ये कानून न कहीं पुरुष से तो कहीं महिला से भेदभाव करता है।
इससे पहले 1954, 2004 और 2008 में आए फैसलों में सुप्रीम कोर्ट आईपीसी 497 में बदलाव की मांग को ठुकरा चुका है। ऐसे में नई याचिका पर पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई हो सकती है।

चर्चित राधे मां की तस्वीर से पुलिस पर हुयी कार्यवाही

इस देश में बाबाओं की शामत आई हुई है। बड़े-बड़े बाबा सत्संगी महफिल से दूर जेल में बंद पड़े हैं। मगर ऐसा पहली बार हुआ है जब बाबाओं की इस जमात के बीच एक मां को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और ये मां हैं राधे मां। जो कभी भक्तों की गोद में जाने, तो कभी किस करने, कभी आई लव यू बोलने तो कभी अपने कपड़ों को लेकर सुर्खियों बटोरती रहीं। इस बार उन्होंने कुछ अलग किया है। इस बार वह खुद थाने गईं और थाने में जाकर सीधे एसएचओ की कुर्सी विराजमान हो गईं। ये अलग बात है कि राधे मां की इस कृपा के बाद एसएचओ समेत छह पुलिस वाले नप गए।
राधे मां की जो तस्वीरें दिल्ली के एक थाने से बाहर आईं वो सबको हैरान कर देंगी। तस्वीर में विवादास्पद धर्मगुरु राधे मां दिख रही हैं। कमरे में कुछ पुलिस वाले भी भक्त की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। धर्म अच्छा है। आध्यात्म भी अच्छा है। भक्ति करना और महिलाओं की इज्जत करना तो बहुत ही अच्छा है, लेकिन ये क्या कि भक्ति करते-करते कोई सरकारी अफसर इतना आगे निकल जाए कि उसे भक्ति की जगह और अपनी ड्यूटी के डेकोरम या फिर यूं कहें कि नियम कानूनों का ख्याल ही ना रहे।
दिल्ली के विवेक विहार थाने के तस्वीरें उसी का सुबूत हैं। अक्सर विवादों में घिरी रहने वाली धर्मगुरु राधे मां पूरे ठसके से थानेदार की कुर्सी पर बैठी और कैसे थानेदार संजय शर्मा हाथ जोड़कर उसके सामने खड़े रहे। ये वही राधे मां हैं जो हाथ में त्रिशूल लेकर अपने भक्तों के बीच अजब-गजब मुद्रा को लेकर चर्चित रहती हैं।
थाने के जिस कमरे में एसएचओ की कुर्सी पर इंस्पेक्टर संजय शर्मा को होना चाहिए था, उस कुर्सी पर राधे मां विराजमान थी। खाकी वर्दी की इज्जत से बेपरवाह दारोगा साहब भक्त की मुद्रा में हाथ जोड़े राधे मां के सामने अभिभूत से खड़े थे। वर्दी के ऊपर एसएचओ ने मातारानी की चुनरी डाल रखी है। मानो वो अपने कर्तव्यों के मंदिर यानी थाने में ना होकर किसी देवी के मंदिर में खड़े हों। जब थाने के मुखिया का ये हाल हो तो फिर दूसरे पुलिसवाले कैसे पीछे रहते। राधे मां का आशीर्वाद लेने के लिए वो भी कतार में लग गए।
विवेक विहार थाने की ये तस्वीर नवरात्रि के दौरान महाअष्टमी की है। थाने के एक कांस्टेबल का कहना है कि राधे मां रामलीला में आई थी। काफी भीड़ जुटने की वजह से एसएचओ संजय शर्मा उन्हें थाने ले आए।
राधे मां का विवादों से चोली दामन का रिश्ता रहा है। कभी वो अपने तंग कपड़ों की वजह से चर्चे में रहती हैं, कभी संत का चोला पहन कर अश्लीलता फैलाने के इल्जाम की वजह से, तो कभी आधी रात को किसी को फोन कर डराने धमकाने की वजह से। फिर भी राधे मां के भक्तों में आम लोगों से लेकर कई सेलिब्रिटीज तक शामिल हैं।
राधे मां की शादी पंजाब के होशियारपुर में हुई थी। पति की मिठाई की दुकान थी, लेकिन धंधे में घाटा क्या हुआ, पति ने कमाई के लिए खाड़ी देशों का रुख कर लिया। इधर, राधे मां एक बाबा के संपर्क में आ गई और दीक्षा लेकर सीधे बब्बो से राधे मां बन गई और फिर तो राधे मां ने ऐसे-ऐसे कारनामे किए, जो सुर्खियां बनती रहीं।

नन्हीं लड़की से किया रेप, आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली के मालवीय नगर में एक स्कूल के अंदर मासूम छात्रा से रेप की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पीड़िता छात्रा ने परिजनों को आपबीती सुनाई, तो वे लोग सन्न रह गए। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, राजधानी के मालवीय नगर थाना स्थित निरंकारी स्कूल में कक्षा एक की छात्रा के साथ उसके स्कूल के कर्मचारी ने टॉयलेट में रेप की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद पीड़िता की हालत बिगड़ने पर इसका खुलासा हुआ है। परिजनों की सूचना पर पहुंच पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच कराई हैं।
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर आरोपी स्कूल कर्मचारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता की मेडिकल जांच के साथ ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। स्कूल के कर्मचारियों और प्रसाशन से भी पूछताछ हो रही है।

अन्ना जल्द शुरू करेंगे जनआंदोलन

जनलोकपाल के लिए आंदोलन करने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे अब मोदी सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल बजाने वाले हैं। लोकपाल की नियुक्ति न होने के चलते अन्ना ने आंदोलन का ऐलान किया है। रायपुर में अन्ना हजारे ने कहा है कि वो जल्द ही मोदी सरकार के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करेंगे। उन्होंने कहा, केंद्र में नई सरकार को साढ़े तीन साल हो गए, बावजूद इसके अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं की गई है।
व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं
इस ऐलान के साथ ही अन्ना ने ये भी साफ कर दिया कि वह किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है।. मगर, लोकपाल की नियुक्ति में देरी स्वीकार्य नहीं है।
अन्ना ने ये भी साफ किया कि उन्होंने कभी किसी राजनीतिक दल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं किया। अन्ना ने कहा, मैंने हमेशा राष्ट्रहित में आवाज उठाई है।
देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ी
अन्ना हजारे ने लोकपाल के अलावा देश की अर्थव्यवस्था पर भी टिप्पणी की। अन्ना ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था हर दिन बिगड़ती जा रही है। जिसके चलते महंगाई बढ़ रही है।
हाल ही में गांधी जयंती के अवसर पर अन्ना हजारे दिल्ली पहुंचे थे। यहां राजघाट पर बापू को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने एक दिन का सत्याग्रह किया था। जिसके बाद उन्होंने जनलोकपाल का मुद्दा फिर से उठाने की बात कही थी। अन्ना ने ये भी कहा था उनके आगामी आंदोलन में वही लोग हिस्सा लें, जिन्हें भविष्य में राजनीतिक दल में न जाना हो। इसके लिए उन्होंने आंदोलन में शामिल होने वालों से बाकायदा एफिडेविट मांगने की बात कही है।

आखिर क्यों नहीं मिल रही हनीप्रीत?

हनीप्रीत एक ऐसी पहेली बन गई। जो सुलझने का नाम नहीं ले रही। पिछले 35 दिनों से सात सूबों की पुलिस उसके पीछे पड़ी है, लेकिन हनीप्रीत का कोई अता-पता नहीं है। ऐसा तब है जबकि शहर-शहर उसके देखे जाने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन जब तक पुलिस पहुंचती है, हनीप्रीत रफूचक्कर हो जाती है।
25 अगस्त को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद गुरमीत को जब रोहतक के सुनारिया जेल ले जाया जा रहा था, तब हनीप्रीत भी हेलीकॉप्टर पर उसके साथ बैठी थी। उसके बाद से हनीप्रीत की कोई तस्वीर सामने नहीं आई है, सिवाय दिल्ली में मिले सीसीटीवी के तस्वीर के।
जी हां, 25 अगस्त को आखिरी बार हेलीकॉप्टर पर हनीप्रीत नजर आई थी। इसके ठीक एक महीने बाद हनीप्रीत के वकील प्रदीप आर्या के लाजपतनगर स्थित दफ्तर के बाहर लगी सीसीटीवी से हरियाणा पुलिस ने ये वीडियो हासिल किया था, जिसमें एक बुर्केवाली लड़की एक वकील के साथ दिख रही है, जिसके हनीप्रीत होने का शक है।
हालांकि हनीप्रीत के वकील के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए हनीप्रीत जरूरी कागगात पर साइन करने उनके दफ्तर आई थी। राम रहीम की राजदार और डेरा सच्चा सौदा सिरसा की चेयरपर्सन विश्यना इंसां ने दावा किया है कि हनीप्रीत से उसका आखिरी बार संपर्क 26 अगस्त को हुआ था।
विपश्यना के मुताबिक, हनीप्रीत 25-26 अगस्त की दरम्यानी रात सिरसा डेरे में आई थी। उस वक्त डेरे में विपश्यना खुद मौजूद थी। डेरे में रात गुजारने के बाद हनीप्रीत बगैर बताए निकल गई। डेरा से आखिरी बार उसने अगले रोज यानी 27 अगस्त को संपर्क किया। उसके बाद से उसने किसी से कोई बात नहीं की है।
इस तरह 26 अगस्त से 2 अक्टूबर. पूरे 35 दिन बीत चुके हैं। हनीप्रीत की तलाश में पुलिस के हाथ खाली हैं, जबकि हर दूसरे और तीसरे दिन उसके ठिकानों को लेकर ढेरों दावे सामने आते रहे। सिरसा से लेकर हनुमानगढ़ तक, दिल्ली से लेकर नेपाल तक हर जगह खाक छान चुकी है पुलिस, लेकिन हनीप्रीत का कोई सुराग नहीं।

आधी रात में हथियारबंद बदमाशों का कहर

झबरेड़ा थाना क्षेत्र के लखनौता-झबरेड़ा मार्ग पर शेरपुर गांव के समीप हथियारबंद बदमाशों ने सड़क पर पेड़ डालकर कई वाहनों में चढ़कर लूटपाट कर ली। लूटपाट के शिकार लोगों में देहरादून ग्रामीण रोडवेज डिपो के सहायक महाप्रबंधक, उनके स्टाफ के अलावा ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के एक कर्मचारी भी शामिल हैं। करीब पौने घंटे तक बदमाशों ने लूटपाट की।
झबरेड़ा की लखनौता पुलिस चौकी से थोड़ा आगे शेरपुर गांव के समीप बीती रात्रि करीब दो बजे बदमाशों ने एक पेड़ काटकर सड़क पर गिरा दिया। इसी बीच यहां से कार से परिवार के साथ गुजर रहे देहरादून नेहरू ग्राम निवासी प्रकाश चंद्र पंत ने रास्ता बंद होने पर कार को रोक दिया। बदमाशों ने जबरन कार की खिड़की खुलवाकर आठ हजार की नकदी, सूटकेस और मोबाइल लूट लिया। प्रकाश चंद पंत ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में कार्यरत हैं। इसी बीच देहरादून ग्रामीण डिपो के सहायक महाप्रबंधक प्रतीक जैन, यातायात निरीक्षक राजबीर, संजय और चालक राजकुमार सरकारी गाड़ी से दिल्ली से बसों की चेकिंग कर लौट रहे थे। तभी बदमाशों ने उनकी गाड़ी को भी रोककर उनसे 12 हजार की नकदी और अन्य सामान लूट लिया।
इसके बाद बदमाशों ने एक लोडर को लूटा। लोडर के बाद बदमाशों ने एक ट्रक चालक और उसके क्लीनर से 700 रुपये की नकदी और तीन मोबाइल फोन लूट लिये। इसी बीच एक ट्रक चालक ने वाहनों को खड़े देखा तो वह समझ गया कि बदमाश हैं, उसने ट्रक को पीछे मोड़ दिया और लखनौता चौकी पर तैनात होमगार्ड को इसकी सूचना दी।
होमगार्ड ने इसकी सूचना पुलिसकर्मियों को दी। इस बीच, दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे तो चारों बदमाश दो बाइक पर सवार होकर भाग निकले। रात में ही एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। डीआइजी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। साथ ही लापरवाही बरतने पर एक सिपाही को निलंबित करते हुये एसओ को फटकार लगाई। प्रकाश चंद पंत और रोडवेज के अधिकारी रामवीर ने मामले में पुलिस को तहरीर दी गई है।