पार्क की सौंदर्यता देख सीएम बोले, प्रकृति को संरक्षित करने का बेहतर प्रयास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को कुठाल गेट के समीप स्थित आनन कानन एजुकेशनल एम्यूजमेंट पार्क का भ्रमण किया। डॉ. योगी एरन द्वारा विकसित किये गये इस पार्क को उन्होंने प्रकृति को संरक्षित करने का बेहतर प्रयास बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पार्क में प्रकृति से जुड़ कर जिस प्रकार तालाबों, गुफाओं व म्यूजियम के साथ ही बड़ी संख्या में बरगद के पेड़ो को संजोकर उन्हें आकर्षक स्वरूप प्रदान करने का कार्य भी निश्चित से सराहनीय है। पार्क में बरगद के पेड़ पर कमरो के निर्माण को भी उन्होंने नया प्रयोग बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पार्क विद्यार्थियों को प्रकृति एवं पर्यावरण को संरक्षित करने की प्रेरणा प्रदान करने के साथ ही प्रकृति विज्ञान से भी उन्हें परिचित कराने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने ऐसे प्रयासों को समाज के लिए भी हितकर बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पार्क को देखने आये स्कूली छात्रों से भी बातचीत की।

डॉ योगी ऐरन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 5 एकड़ में निर्मित यह पार्क स्कूली छात्रों के आकर्षण का केन्द्र बना है। इस पार्क में शारारिक व मानसिक रूप से कमजोर छात्रों के लिये विशेष व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ा यह पार्क छात्रों को प्रकृति से जोड़ने तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में भी मदद करता है।

खतरनाक एडवेंचर रेस में राज्य का प्रतिनिधित्व करेगी ताशी और नुग्शी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में दुनिया की मुश्किल एवं खतरनाक एडवेंचर रेस इको चैलेंज में प्रतिभाग के लिए जा रही उत्तराखंड की पर्वतारोही ताशी एवं नुग्शी को उनकी टीम के साथ रवाना किया। मुख्यमंत्री ने इस प्रतियोगिता के लिए दोनों बहनों को शुभकामनाएं दी। फिजी में 9 सितंबर से 21 सितंबर 2019 तक इको चैलेंज 2019 के नाम से आयोजित होने वाली इस एडवेंचर रेस में 30 देशों की 67 टीमें भाग ले रही हैं। 675 किमी की इस एडवेंचर रेस में 12 एडवेंचर से संबंधित एक्टिविटी होंगी। ये सभी एक्टिविटी फिजी के घने जंगलों, पहाड़ों, नदियों एवं समुद्र के जरिए होंगी। इस रेस की मेजबानी प्रसिद्ध एडवेंचर्स बेयर ग्रिल्स कर रहे हैं। उत्तराखंड से ताशी के नेतृत्व में 4 सदस्यों की टीम इस प्रतियोगता में भाग ले रहे हैं। इस टीम के मैनेजर रिटायर्ड कर्नल वी. एस.मलिक हैं। इस मौके पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत और विधायक गणेश जोशी भी उपस्थित रहे।

पूर्व सैनिकों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, सरकार ने की थी महत्वूपर्ण घोषणा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मुख्यमंत्री आवास में पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसियेशन के सदस्यों ने भेंट की। उन्होंने शौर्य दिवस के अवसर पर सैनिकों के हित में की गई कल्याणकारी घोषणाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने शौर्य दिवस के अवसर पर सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिये विशेष रूप से अपर सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करने, उत्तराखण्ड के शहीद सैनिकों के लिये उनकी याद में विशाल मेमोरियल बनाना और सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश के सचिवालय में पूर्व सैनिकों को प्रवेश करने के लिये उनका आई कार्ड ही प्रवेश पत्र माने जाने की घोषणा की थी, इन घोषणाओं के प्रति प्रदेश के सैनिक बहुत प्रभावित हुए हैं जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा सैन्य बाहुल्य प्रदेश है। देव भूमि के साथ ही हमारे वीर सैनिकों ने अपने अदम्य साहस एवं शौर्य के बल पर इसे वीर भूमि बनाया है। वीर सैनिकों व उनके आश्रितों के कल्याण के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चैहान, पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसिएशन के केन्द्रीय अध्यक्ष पी.टी.आर शमशेर सिंह बिष्ट, महासचिव ओ. कैप्टन आर.डी.शाही, पी.बी.ओ.आर की अध्यक्षा महिला प्रकोष्ठ राजकुमारी थापा, उपाध्यक्षा कमला गुरूंग सहित बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य उपस्थित थे।

हिमालयी राज्यों की सुरक्षा और विकास को केन्द्र सरकार से मांगी मदद

हिमालयन कॉन्क्लेव में गहन मंथन के पश्चात प्रतिभागी हिमालयी राज्यों द्वारा ‘‘मसूरी संकल्प’’ पारित किया गया। इसमें पर्वतीय राज्यों द्वारा हिमालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और देश की समृद्धि में योगदान का संकल्प लिया गया। साथ ही, प्रकृति प्रदत्त जैव विविधता, ग्लेशियर, नदियों, झीलों के संरक्षण का भी प्रण लिया गया। भावी पीढ़ी के लिए लोककला, हस्तकला, संस्कृति आदि का संरक्षण किया जाएगा। पर्वतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परम्परा के संरक्षण व मानवता के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया। समानता व न्याय की भावना के साथ पर्वतीय क्षेत्रों के सतत विकास की रणनीति पर काम किया जाएगा। पर्वतीय सभ्यताओं के महान इतिहास व विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया गया।

इससे पूर्व हिमालयन कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हिमालयन राज्यों के सम्मेलन के आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निश्चित रूप से यह आयोजन हिमालयी राज्यो के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हिमालयन राज्य भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन सभी राज्यों का विकास भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इसमें पंचायतीराज संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा कर ही पलायन को रोका जा सकता है। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोग देश की सुरक्षा में आंख और कान का काम करते हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। हमे विकास के साथ ही पर्यावरणीय सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। पर्वतीय राज्यों में ऑर्गेनिक कृषि पर फोकस किया जाना चाहिए। इसमें स्थानीय युवाओं को जोड़े जाने की जरूरत है। पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए स्टार्ट-अप महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे पलायन तो रुकेगा ही साथ ही क्षेत्र भी आर्थिक रूप से विकसित होगा। केन्द्रीय वितमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। विकास योजनाओं को फलीभूत करने के लिए स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सम्मेलन में प्रतिभागी राज्यों द्वारा चर्चा किये गये विषयों पर केन्द्र द्वारा गंभीरता से विचार किया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कॉन्क्लेव में आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि हमें गर्व है कि देश की सीमाओं की चैकसी की जिम्मेदारी मिली है। हिमालय राज्यों के सम्मेलन की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ है यह उत्तराखण्ड के लिए सम्मान की बात है। हिमालय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां समान हैं। मुझे आशा है कि देश की समृद्धि में योगदान करने के लिए यह एक अच्छा मंच साबित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जल की एक-एक बूंद बचाने के संकल्प में हिमालयी राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम सभी को मिलकर जल संचय एवं जल संरक्षण के लिए काम करना होगा। नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए केन्द्रीय स्तर पर अलग से बजटीय प्रावधान किया जाना चाहिए। इको सिस्टम सर्विसिज के लिए हिमालयी राज्यों को और प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2025 तक आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हिमालयी राज्यों में वैलनेस व टूरिज्म पर काम करना होगा। आपदा, पलायन सभी हिमालयी राज्यों की एक समान समस्या है। हम सभी को मिलकर देश की प्रगति के लिए काम करना है।
15वें वित आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने हिमालयन कॉन्क्लेव को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अपनी साझा समस्याओं को रखने व उनके हल के लिए नीति निर्धारण में यह एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म साबित होगा। केन्द्र भी हिमालयी राज्यों के साथ है। वित आयोग, हिमालयी राज्यों की समस्याओं से भलीभांति अवगत है। सम्मेलन में उठायी गयी बातों से वित्त आयोग भी सहमत है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए संवैधानिक दायरे में हर सम्भव प्रयास किया जाएगा। हिमालयी राज्य वैश्विक पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहां जीवन स्तर को सुधारने के लिए क्या सिस्टम बनाया जा सकता है, इस पर विचार किया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन अत्यंत कठिन होता है। यहां की समस्याएं अन्य राज्यों से अलग हैं। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में रेल व हवाई कनैक्टीविटी विकसित किये जाने की आवष्यकता बतायी। छोटे राज्यों के सीमित संसाधनों को देखते हुए केन्द्र द्वारा वित्तीय सहायता में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि कि हिमालयी राज्यों में विकास की बहुत संभावनाएं हैं। इसके लिए हमें टारगेट सेट करने की आवश्यकता है। पर्यटन की संभावनाओं की दृष्टि से भी सभी हिमालयन राज्य बहुत ही समृद्ध हैं। अभी यहां घरेलू पर्यटकों की अधिकता है। पर्यटन को और अधिक तेजी से विकास करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जाना बहुत ही जरूरी है। वैल्यू एडेड एग्रीकल्चर को प्रोत्साहित करना जरूरी है। लक्ष्यों को निर्धारित कर समयबद्ध तरीके से योजनाओं का क्रियान्वयन करना जरूरी है। इस सम्मेलन के माध्यम से सभी हिमालयन राज्य आपसी तालमेल से नई योजनाओं को साझा कर नीति आयोग के समक्ष रख सकते हैं। हमे अपनी समस्याओं और संभावनाओं का अध्ययन कर उसके अनुसार योजनाओं को बनाना चाहिए। हमे अपनी कृषि की लागत को कम करने की आवश्यकता है। संसाधनों की समीक्षा करने की आवश्यकता है। भविष्य में पानी की समस्या को देखते हुए सभी राज्यों द्वारा जल संरक्षण के लिए विशेष नीतियां बनाई जानी चाहिए। इसके लिए वॉटरशेड मैनेजमेंट की अत्यधिक आवश्यकता है। हमें नदियों के स्रोतों को बचाने के प्रयास करने होंगे। जल संरक्षण के लिए सभी राज्यों को अंतरराजयीय सहयोग से नीतियां तैयार करनी होंगी। सीमांत राज्यों को पलायन को रोकने और सीमांत क्षेत्रों में विकास करने की आवश्यकता है। विकास के लिए आकांक्षी जनपदों में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड कोंगकल संगमा ने कहा कि हिमालयी राज्यों में विकास योजनाओं की लागत अधिक होती है। इसलिए केन्द्र द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं के मानकों में इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। आर्थिक विकास व पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाये रखना, हिमालयी राज्यों की दोहरी जिम्मेदारी होती है। हमें सतत विकास के लिए रिस्पोंसिबल टूरिज्म पर फोकस करना होगा। उन्होंने पर्वतीय राज्यों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की आवष्यकता पर बल दिया। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने सम्मेलन को बेहतर शुरूआत बताते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका संवर्द्धन व इको सिस्टम के महत्व पर जोर दिया। अरूणाचल के उप मुख्यमंत्री चोवना मेन ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विषेष ध्यान देना होगा। मिजोरम के मंत्री टी.जे.लालनुनल्लुंगा ने अपने सम्बोधन में प्राकृतिक आपदा, जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय लोगो की भागीदारी, डिजीटल कनैक्टीविटी पर जोर दिया। सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता भारत सरकार परमेष्वरमन अय्यर ने जल शक्ति अभियान पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने जल संरक्षण में स्प्रिंगषेड मैनेजमेंट को प्रभावी ढंग लागू करने की बात कही। इसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय उपयोगी सिद्ध होगा। जमींनी स्तर पर पैरा हाइड्रोलॉजिस्ट तैयार किये जाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में ट्रेंचध्खांटी के माध्यम से जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों की प्रधानमंत्री ने सराहना की है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने डिजास्टर रिस्क मैंनेजमेंट पर प्रस्तुतिकरण देते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में वहां की परिस्थितियों के अनुरूप भवन निर्माण पर जोर दिय जाने की बात कही। सिक्किम के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. महेन्द्र पी.लामा ने केन्द्रीय सहायता में ईको सिस्टम सर्विसेज को विषेष भार दिये जाने की बात कही।
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के.के.शर्मा, आई.आई.एफ.एम. की डॉ. मधु वर्मा व सुशील रमोला ने भी विचार व्यक्त किये। सम्मेलन के समापन अवसर पर उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव वित्त अमित नेगी, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, डी.जी.पी. अनिल रतूड़ी, सचिव सौजन्या, अपर सचिव सोनिका, महानिदेशक सूचना डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट सहित अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नेगी दा ने कहा, हिलटाॅप से किसानों को मिलेगा रोजगार

सरकार के लिए राहत की खबर है। हिलटाॅप शराब पर राज्य सरकार को अब लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का साथ मिल गया है। नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा है कि जब राज्य में शराब की बिक्री और खपत बहुत ज्यादा है तो शराब की फैक्ट्री पर बैन क्यों लगना चाहिए? इस बयान के बाद राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे है। सरकार के समर्थन में बयान देने के बाद सरकार के फैसले और बुलंद होने का अनुमान लगाए जाने लगे है।
दरअसल, आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के आवास पर पहंुचे। उन्होंने श्री नेगी को साहित्य अकादमी के द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिये जाने के लिए नामित होने पर बधाई दी। इसके बाद कुछ पत्रकारों ने श्री नेगी से सवाल किए। जिसमें उन्होंने हिलटाॅप शराब की फैक्ट्री पर उनकी राय जानी। जिस पर लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्या आपको पता है कि हमारे यहां शराब की खपत और बिक्री कितनी बढ़ गई है। ऐसे में हम बाहरी राज्यों से शराब मगांकर पी रहे है। या तो सरकार शराब पर पूर्ण पांबदी लगा दे। नही तो शराब फैक्ट्री लगाने का विरोध नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में शराब बनेगी तो किसानों और काश्तकारों को भी फायदा पहुंचेगा। माल्टा और अन्य पहाड़ी उत्पादों को अच्छा दाम मिलेगा। सरकार राजस्व भी कमायेगी और राज्य की शराब राज्य में ही बिकेगी। उन्होंने अप्रत्यक्ष कहा कि ऐसे में शराब का गुण कम से कम रोजगार देने के काम तो आयेगा। वरना सभी जानते है कि शराब स्वास्थ के लिए हानिकारक है।
इस बयान के बाद नेगी दा के लिए आम लोगों की सोच कितनी बदलती है। यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन अपनी स्पष्ट बात रखकर श्री नेगी ने सरकार को अप्रत्यक्ष रुप से बड़ी राहत दे दी है। कुछ लोग श्री नेगी के बयान को सही भी ठहरा रहे है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड केवल शराब का कंज्यूमर ही बन गया है। ऐसे में शराब से रोजगार और राजस्व बढ़ता है तो दिक्कत कहां है। या तो सरकार शराब राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगा दे। नही तो शराब पर राजनीति नही होनी चाहिए।

आप भी सुनिए श्री नरेन्द्र सिंह नेगी ने क्या कहा…

समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरतः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून की शहरी बस्ती चीड़ोवाली-कंडोली में उत्तराखण्ड महिला समेकित विकास योजना के अन्तर्गत कामन फेसिलिटी सेन्टर के अधीन संचालित द्विवर्षीय महिला कौशल प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया। इस प्रशिक्षण केन्द्र में 120 स्थानीय महिलाओं को जूट व सूती बैग बनाने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरत है। यदि महिलायें मजबूत हुई तो परिवार, समाज व देश मजबूत होगा। उन्होंने महिला व पुरूषों को समाज के विकास की गाड़ी के दो पहिए बताते हुए कहा कि दोनों सशक्त होंगे तो निश्चित रूप में समाज में बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती आदि के संसाधनों की सुविधा के साथ ही जीविका के साधनों का विकल्प रहता है, जिसका शहरी क्षेत्रों में अभाव रहता है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में जमीन आदि की कमी के कारण यह सुविधायें नहीं उपलब्ध हो पाती हैं। इसके लिये जरूरी है कि शहरों की गरीबों को दूर करने के लिये यहां की महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाय, कौशल विकास के जरिये हम वेस्ट को बेस्ट में बदल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की जा रही है। उद्यमिता के क्षेत्र में महिलायें 5 हजार तक ओवर ड्राफ्ट ले सकती हैं। महिला समूओं को एग्रोबेस उद्यम के लिये 5 लाख तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को दिये गये ऋण के सदुपयोग करने वाला बनाना है। ग्राम लाइट योजना व देव भूमि प्रसाद योजना महिलाओं को आर्थिक स्वावलम्बन की राह दिखा रही है। महिला समूह पहाड़ी भोजन भी तैयार कर रही है। पौड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक में उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया भोजन परोसा गया। कम लागत में सबको खाना खिलाने का यह अच्छा प्रयास रहा। इससे एक प्रकार की उद्यमिता भी विकसित हुई है। यह सब हुनरमंद होने का ही परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष केदारनाथ में महिला समूहों ने 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। प्रदेश के 625 मन्दिरों में देवभूमि प्रसाद योजना का शुभारम्भ किया जा रहा है। मंशादेवी, बदरीनाथ, जागेश्वर, बागेश्वर से भी इसकी शुरूआत हो गयी है, इसका परिणाम है कि आज चैलाई 55 रू. किलो बिक रहा है। उन्होंने महिलाओं से उत्पादों की बेहतर पैकिंग पर ध्यान देने को कहा। इसमें लोगों का आकर्षण उत्पादों के प्रति बढ़ता है। यदि हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो अपने उत्पादों की बिक्री में भी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से पुष्प उत्पादन, धूप-अगरबत्ती बनाने की दिशा में भी आगे आने को कहा। पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उत्पादन से उसकी मांग देश व दुनिया में बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कामन फेसिलिटी सेन्टर व प्रशिक्षण केन्द्र का भी निरीक्षण किया तथा प्रशिक्षार्थी महिलाओं से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री ने परियर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। क्षेत्रीय विद्यायक गणेश जोशी ने कहा कि इस प्रकार की पहल महिलाओं के आर्थिक उन्नयन में मददगार होती है, उन्होंने कहा कि महिलाओं की मजबूती समाज की मजबूती से जुड़ी है। महिलाओं को स्वालम्बी बनाने के लिये उन्हें प्रशिक्षित करने की भी उन्होंने जरूरत बतायी। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि महिला समेकित विकास योजना के तहत जानकी देवी एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इस प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। पालीथीन के स्थान पर जूट व सूती व फाइबर से बने विभिन्न उत्पादों व अन्य सामग्री का प्रशिक्षण एवं निर्माण यहां पर महिलाओं द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर निदेशक महिला एवं बाल विकास झरना कमठान, संस्था के चेयरमैन संजय जोशी, सचिव कविता चतुर्वदी और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलायें आदि उपस्थित थे।

लक्ष्मणझूला में आवाजाही को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से साझा किए विचार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि लक्ष्मण झूला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर है। पिछले 90 सालों से यह देश व दुनिया के पर्यटकों व श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण झूला को संरक्षित करने के लिए यथा संभव प्रयास किये जायेंगे। इस पुल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पर आवाजाही दुबारा शुरू होने की स्थिति के सम्बन्ध में विशेषज्ञों से और सुझाव लिये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारी हेरिटेज प्रोपर्टी है। इसे ठीक करने के सभी विषयों पर कार्य किया जायेगा। विशेषज्ञों की राय के बाद इसकी रेट्रोफिटिंग पर ध्यान दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारम्भ में इसके एक स्क्वायर मीटर में 200 किलो भार क्षमता आंकी गई थी। वर्तमान में इसका पिलर झुक रहा है, आज आधुनिक तकनीक के दौर में इसे कैसे ठीक किया जा सकता है यह देखा जायेगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस पुल से जन भावानायें जुड़ी हैं, इसका भी हमें ध्यान रखना होगा।
मंगलवार को ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से भेंट की, उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उनके संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा लक्ष्मण झूला का जीर्णोद्धार किया जा सकता है। ग्राफिक ऐरा के प्रो. पार्थो सेन ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग करके इस पुल को बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुल के लिए तकनीकी अध्ययन आई.आई.टी के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है उनकी सलाह के मद्देनजर ही जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसमें आवाजाही बन्द की गई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भी यदि इसके संरक्षण में कोई तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकती है तो इस दिशा में भी पहल की जा सकती है। उन्होंने ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि आईआईटी की रिपोर्ट के हर पहलू का गहनता से अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी लापरवाही नहीं बरती जायेगी जरूरत पड़ने पर लक्ष्मण झूला को बचाने के लिए अन्य विशेषज्ञों की राय भी ली जायेगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय से डा. सुभाष गुप्ता, डा. अंकुश मित्तल, डा. संजीव कुमार, डा. पवन कुमार इमानी, डा. प्रदीप जोशी, श्रीपर्णा शाह व अर्चना रावत उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने करोड़ो रुपये के बाढ़ सुरक्षा और नहर कार्यों का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कालूवाला देहरादून में सिंचाई विभाग की कुल 7 करोड़ 64 लाख 20 हजार की दो योजनाओं का लोकार्पण किया। जिसमें 4 करोड़ 94 लाख 58 हजार की लागत के बड़ोवाला नहर का पुनरोद्धार एवं 02 करोड़ 69 लाख 63 हजार की लागत का जौलीग्रांट नहर के हेड का विस्तारिकरण व पुनरोद्धार शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नथुवावाला-बालावाला-मियांवाला नहर सेवा मार्ग का जीर्णोद्धार, सांकरी नहर का पुनरोद्धार, धूड़ वाला नहर का पुनरोद्धार, राजीव नगर केशवपुरी बस्ती, सौंग नदी से बाढ़ सुरक्षा का कार्य, सीपैट संस्थान की सुरक्षा का कार्य, कालूवाला क्षेत्र में सिंचाई के लिए नलकूप निर्माण, कालूवाला में आंतरिक सड़कों के निर्माण, कालूवाला मंदिर के समीप खाली जमीन पार्क के निर्माण व कालूवाला क्षेत्र के लिए प्रवेश स्थल पर वीर शहीदों की स्मृति में शहीद द्वार बनाने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हैल्पलाईन 1905 बनाया गया है। किसी भी समस्या के लिए इस हैल्पलाईन पर कॉल किया जा सकता है। इसमें समाधान तब माना जायेगा, जब शिकायतकर्ता संतुष्ट हो जायेगा उनका समाधान हो चुका है। अभी तक सीएम हैल्पलाईन पर 23 फरवरी को शुरूआत होने से अब तक 14 हजार शिकायतें आयी हैं, जिनमें से 7 हजार शिकायतों का समाधान हो चुका है। सीएम हैल्पनाईन पर सुझाव भी प्राप्त हो रहे हैं, महत्वपूर्ण सुझावों को योजनाओं में सम्मिलित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फेसबुक, ट्वीटर, इंस्ट्राग्राम व यूट्यूब पर जेतंूंजइरच आईडी पर अपने सुझाव दे सकते हैं। जनता से कई ऐसे सुझाव मिलते हैं जो विकास व कई योजनाओं को बनाने में बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। जन सुझावों के आधार पर राज्य में थानो के लिए निधि बनाने का सुझाव आया। थानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए थाना विविध निधि बनाई गई जो काफी कारगर साबित हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढ़ाई साल में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार ने हर संभव प्रयास किये हैं। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने अनेक कदम उठाये और इसके सकारात्मक परिणाम आज हमारे सामने हैं। हर्रावाला में 300 बैड का जच्चा-बच्चा हॉस्पिटल खोला जा रहा है, जो लगभग 2 वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा। रानीपोखरी में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी बन रही है। जौलाग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। कुंआवाला (हर्रावाला) में कोस्ट गार्ड भर्ती सेंटर खोला जा रहा। इसमें प्रतिवर्ष 1500 भर्तियां होंगी। उत्तराखण्ड फिल्म की शूटिंग के लिए डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। पिछले ढ़ाई साल में उत्तराखण्ड में 200 से अधिक छोटी व बड़ी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी। सूर्यधार, सौंग व मलढ़ूग परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से देहरादून को पूर्ण ग्रेविटी का पानी उपलब्ध होगा। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 600 करोड़ रूपये का इन्वेस्टमेंट सोलर पैनल के माध्यम से सोलर इनर्जी के लिए योजना लाई गई है। इस और आगे बढ़ाया जायेगा। पांच मेगावाट तक के प्रोजक्ट चाहे वे सोलर के हों या हाइड्रो के हों उत्तराखण्ड के निवासियों के लिए रिजर्व किये गये हैं, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले व उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो।

कालसी मार्ग पर कार खाई गिरी, हरियाणा के पर्यटकों की मौत

चकराता घूमने जा रहे हरियाणा के पर्यटकों की कार कालसी से पांच किमी आगे चामड़खील नामक जगह पर अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। हादसे में कार सवार सभी 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटना देर रात की बताई जा रही है। जिसका पता स्थानीय पुलिस-प्रशासन को रविवार सुबह चला। मौके पर पहुंचे तहसीलदार केडी जोशी और थानाध्यक्ष कालसी के नेतृत्व में शवों को खाई से बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू चल रहा है। पुलिस प्रशासन की टीम स्थानीय लोगों की मदद से खाई में फंसे शवों को बाहर निकालने के लिए सुबह से जुटी है। मृतकों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई। बताया जा रहा पांचों लोग हरियाणा के निवासी है। तहसीलदार ने कहा शवों को बाहर निकालने के बाद ही मृतकों की सही पहचान का पता चल सकेगा।

जानिए किसने कहा-बीजेपी उत्तराखंड बहुत चतुराई से कौवे को भी तीतर बताकर खा जाती है

देवप्रयाग में शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर सियासी हमले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अपनी फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ई-पत्र लिखा है। चुटीले अंदाज में लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि उनके कार्यकाल में देवप्रयाग क्षेत्र में पानी व फ्रूटी बॉटलिंग प्लांट लगा। मेरा लगाया पौधा, पानी व फ्रूटी बॉटलिंग प्लांट का था। आपने कुशल माली के तौर पर उस पर अन्य कलम लगा दी। मेरे कार्यकाल में केवल लाइसेंस दिया गया, जिस पर आगे की कार्रवाई आपकी पार्टी सहित स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए रोक दी गई। यदि आप शराब बनाने का लाइसेंस नहीं देना चाहते तो आपकी सरकार रिन्युअल नहीं करती। बीजेपी उत्तराखंड बहुत चतुराई से कौवे को भी तीतर बताकर खा जाती है।
दरअसल, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बीते रोज उक्त बॉटलिंग प्लांट को अनुमति देने को पूर्व सीएम हरीश रावत पर यह कहते हुए हमला बोला था कि वह पहले पौधा लगाते हैं, फिर उसे उखाड़ने में लग जाते हैं। इस पर प्रतिक्रिया में पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि हमने मैदानों में डिस्टलरीज, फुटहिल्स में वाइनरीज व रागी बियर प्लांट व मध्य हिमालय में फ्रूट वाइन्स व वाटर व ऑयल बॉटलिंग प्लांट लगाने की नीति पर काम किया। समय कम मिला, हम इन नीतियों को पूरी तरह धरातल पर नहीं उतार पाए।

पूर्व मंत्री नैथानी ने बोला भाजपा सरकार पर हमला
पूर्व शिक्षा मंत्री एवं देवप्रयाग क्षेत्र के पूर्व विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी ने एनसीसी ट्रेनिंग एकेडमी श्रीकोट माल्दा (टिहरी) से हटाकर देवाल गांव (पौड़ी) ले जाने के मौजूदा भाजपा सरकार के फैसले पर सख्त आपत्ति की है। उन्होंने टिहरी जिलाधिकारी के श्रीकोट माल्दा के ग्रामीणों के सशर्त भूमि देने के कथन को झूठा करार दिया। उनके क्षेत्र में शराब के बॉटलिंग प्लांट लगाने के सरकार के फैसले को जनविरोधी करार देते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में कांग्रेस, उन्हें और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
देवप्रयाग क्षेत्र से एनसीसी एकेडमी हटाने और शराब के बॉटलिंग प्लांट मामले में पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी खुलकर सामने आए। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवनों में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दोनों मुद्दों पर भाजपा सरकार पर हमला बोला। साथ ही इस मामले में पिछली कांग्रेस सरकार का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि एनसीसी एकेडमी की श्रीकोट माल्दा में स्थापना को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पांच दिसंबर, 2016 को शिलान्यास किया था। एकेडमी के लिए श्रीकोट माल्दा के किसानों ने 200 नाली भूमि दान स्वरूप दी। उन्होंने कहा कि एनसीसी एकेडमी बचाओ संघर्ष समिति देवप्रयाग विकासखंड मुख्यालय हिंडोलाखाल में आंदोलन जारी रखेगी। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।

गैरसैंण में भूमि खरीद पर रोक हटाने के विरोध में उतरी प्रदेश कांग्रेस
कांग्रेस प्रदेश में सरकार के फैसलों के खिलाफ जन आक्रोश को भुनाने में जुट गई है। राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं से जुड़े गैरसैंण समेत आसपास के 27 गांवों में जमीनों की खरीद-फरोख्त पर लगी पाबंदी हटाने के त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने आंदोलन को तेज करने की ठान ली है। गैरसैंण में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अपनी दिल्ली यात्रा के बीच से ही वापस गैरसैंण लौटने और शुक्रवार को वहां गिरफ्तारी देने की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी कहा कि गैरसैण में पूर्व में लागू भू कानून को यथावत रखा जाए अन्यथा पार्टी पूरे प्रदेश में सड़कों पर उतर कर इसका विरोध करेगी।
गैरसैंण को लेकर एक बार फिर सरकार व सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस फिर आमने-सामने हो गई हैं। मंत्रिमंडल ने बीते रोज चमोली जिले के गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों में भूमि खरीद पर पाबंदी खत्म करने का फैसला लिया है। पिछली कांग्रेस सरकार ने 16 नवंबर, 2012 को आदेश जारी कर गैरसैंण व आसपास के क्षेत्रों में भूमि खरीद पर पाबंदी लगाने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद चमोली के तत्कालीन जिलाधिकारी ने 23 नवंबर, 2012 को आदेश जारी कर गैरसैंण तहसील के 27 गांवों में भूमि की खरीद-बिक्री पर रोल लगा दी थी। अब भाजपा सरकार ने गैरसैंण व आसपास के क्षेत्रों में भूमि खरीद-बिक्री का बैनामा या रजिस्ट्री न होने और 10 रुपये के स्टांप पेपर पर भूमि की खरीद किए जाने से मालिकाना हक को लेकर विवाद को आधार बनाकर उक्त रोक हटाने का निर्णय लिया है।
कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले का विरोध करने का निर्णय लिया है। गैरसैंण में इस मामले पर हो रहे प्रदर्शन को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने समर्थन तो दिया ही, साथ में खुद भी गैरसैंण पहुंचकर गिरफ्तारी देने की घोषणा की है। कांग्रेस इस मुद्दे को तूल देने जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य की प्रस्तावित राजधानी गैरसैंण में जमीनों की खरीद फरोख्त पर लगाई गई रोक हटाने का फैसला राज्य निर्माण आंदोलन की भावना के विपरीत है। इस मामले में भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए प्रीतम ने कहा कि इस निर्णय से राज्य निर्माण की भावनाएं आहत हुई हैं। गैरसैंण को राजधानी बनाने के सपने को ग्रहण लगा है। राज्य सरकार खनन माफिया, भू-माफिया और शराब माफिया के हाथों की कठपुतली बन गई हैं।

गैरसैंण तहसील के इन क्षेत्रों में भूमि खरीद पर लगी रोक हटाई
आदि बदरी के हालीसेरा एफ आदि बदरी, खेती व मालसी गांव
गैरसैंण के मरोड़ा, कुनेली लग्गा मरोड़ा, सलियाणा, ग्वाड, जैंतोली ग्वाड, पटौडी लग्गा गैड़, गैड, कोलियाणा, गडोली, धार गैड़, सौनियाणा, रीठिया व निगालसैंण गांव
सिलपाटा के सारकोट व परवाड़ी गांव
पंचाली के सिंलगी, बौसाड व सैंजी गांव
महलचैरी के आगर लग्गा गांवली, फरसौं, विसराखेत, भनोट ग्वाड, मैहलचैरी व रंगचैड़ा गांव।