विभिन्न मोटर मार्गों के निर्माण के लिए मिली धनराशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र अल्मोड़ा के अन्तर्गत अल्मोड़ा में बेतालघाट स्यालीधार मोटर मार्ग का डामरीकरण एवं सुधारीकरण के कार्य के लिए ₹ 222.25 लाख (दो करोड़ बाईस लाख पच्चीस हजार) एवं जनपद चम्पावत की विधानसभा क्षेत्र लोहाघाट में राज्य योजना के अन्तर्गत टाक खंदक करौली मोटर मार्ग का सुधारीकरण/डामरीकरण के कार्य के लिए ₹ 119.35 लाख (एक करोड़ उन्नीस लाख पैंतीस हजार) की धनराशि स्वीकृत की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद उधम सिंह नगर के विधान सभा क्षेत्र सितारगंज के अन्तर्गत ग्राम निर्मल नगर एवं ग्राम राजनगर को ग्राम सिसौना से जोड़ने हेतु बैगुल नदी पर 60 मी. स्पान पैदल झूला पुल के निर्माण हेतु ₹ 386.22 लाख (तीन करोड़ छियालीस लाख बाईस हजार मात्र) की धनराशि स्वीकृत की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य योजना के अंतर्गत जनपद रूद्रप्रयाग के विधानसभा क्षेत्र केदारनाथ के अंतर्गत विकासखंड अगस्त्यमुनि में चन्द्रापुरी-गुगली आसों-जयकण्डी मोटर मार्ग के सुधार/ डामरीकरण कार्य एवं राज्य योजना के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र राजपुर में देहरादून शहर के डालनवाला क्षेत्र में बलवीर रोड, मोहिनी रोड, प्रीतम रोड, कर्जन रोड, सर्कुलर रोड, लक्ष्मी रोड, इन्दर रोड, म्युनिसिपल रोड, चन्दर रोड, नेमी रोड एवं तेग बहादुर रोड में माइक्रो सरफेसिंग से मार्ग सुधारीकरण के कार्य हेतु भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

धामी सरकार के बेहतर यात्रा प्रबंधन ने जीता यात्रियों का विश्वास

प्रदेश सरकार के बेहतर यात्रा प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों के चलते चार धाम यात्रा को लेकर यात्रियों में भारी उत्साह है। मानसून थमते ही यात्रा ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। बीते दिवस 30 सितंबर को 20497 श्रद्धालु चार धाम दर्शन को पहुंचे। इनमें केदारनाथ धाम में सर्वाधिक 7350 तीर्थयात्री पहुंचे। अभी तक के पूरे यात्राकाल की संख्या पर नजर दौडाएं तो करीब 38 लाख श्रद्धालु चारधाम दर्शन को आ चुके हैं। केदारघाटी आपदा से निपटने में सरकार ने पूरी ताकत झोंककर जिस तेजी से स्थिति को सामान्य बनाया है, उससे यात्रियों का सरकार के प्रति विश्वास गहराया है। यात्री पूरे उत्साह और आस्था के साथ बाबा केदार के दर्शन को उमड़ पड़े हैं।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सर्वाेच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री के इस ध्येय वाक्य के अनुसार राज्य सरकार के यात्रा इंतजामों और व्यवस्थाओं का असर यात्रा पर दिखाई दिया है। केदारघाटी में 31 जुलाई को आई बड़ी आपदा का जिस प्रकार सरकार ने सामना किया, उसकी आम यात्रियों ने खुले दिल से तारीफ की है। पैदल मार्ग और पड़ावों पर फंसे यात्रियों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित निकालने में जरा भी देरी नहीं की गई। करीब 18 हजार लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचा दिया गया। यही नहीं केदारघाटी में आम जनजीवन को बहाल करते हुए पैदल यात्रा मार्ग को सुधार कर यात्रा भी शुरू कर दी गई।
अब दूसरे चरण की यात्रा जोर पकड़ गई है। अक्टूबर और नवंबर माह में भी यात्रा के लिए बड़ी संख्या में यात्रियों ने पंजीकरण कराया है। 30 सितंबर को हेमकुंड और गोमुख समेत 22 हजार 244 श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर पहुंचे। इनमें केदारनाथ के अलावा बदरीनाथ में 6811, गंगोत्री 3619, यमुनोत्री 2717, हेमकुंट 1632 और 115 श्रद्धालु गोमुख पहुंचे।

रिकॉर्ड बनाएगी चारधाम यात्रा
इस यात्राकाल में बीते दिवस 30 सितंबर तक कुल 37 लाख 91 हजार 205 यात्री चारधाम दर्शन को आ चुके हैं जबकि बीते वर्ष पूरे यात्राकाल में 56.13 लाख यात्री पहुंचे थे। इसी प्रकार वर्ष 2022 में 46.29 लाख और वर्ष 2019 में 34.77 लाख यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे। वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा प्रभावित रही। इन दो वर्षों में यात्री संख्या क्रमशः 3.30 लाख और 5.29 लाख रही।

इस वर्ष 17 दिन की देरी से शुरू हुई चारधाम यात्रा
इस वर्ष चारधाम यात्रा 10 मई से शुरू हुई है जबकि पिछले वर्ष 23 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा का श्रीगणेश हो गया था। तब केदारनाथ के कपाट 25 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 27 अप्रैल को खुले थे। इस वर्ष गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 17 दिन बाद यानी 10 मई को खुले हैं, जबकि बदरीनाथ धाम की यात्रा 12 मई से शुरू हुई है। यात्रा अभी अगले माह नवंबर तक चलेगी।

केदारघाटी आपदा से भी प्रभावित रही यात्रा
केदारघाटी में 31 जुलाई की रात आई भीषण आपदा का असर भी यात्रा पर पड़ा है। हालांकि धामी सरकार ने तेजी से राहत और बचाव कार्य करते हुए कुछ दिनों के अंतराल में ही आम जनजीवन को बहाल कर दिया लेकिन सुरक्षा कारणों से यात्रा को कई दिनों के लिए रोक दिया गया था।

बेहतर यात्रा प्रबंधन पर नजर
केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर बनाए गए बीस पार्किंग स्थल।
पार्किंग प्रबंधन के लिए एक क्यूआर कोड-आधारित प्रणाली।
यातायात प्रबंधन के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती।
यात्रा पर निगरानी के लिए 850 सीसीटीवी कैमरे और 8 ड्रोन।
यात्रियों की सुविधा के लिए 56 पर्यटन सहायता केंद्रों की स्थापना।
ट्रैक रूट को साफ करने के लिए कुल 657 पर्यावरण मित्रों की तैनाती।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से यात्रा मार्ग पर 50 स्क्रीनिंग कियोस्क की स्थापना। स्वास्थ्य मित्र हैं तैनात।
यात्रा मार्ग पर 156 एम्बुलेंस तैनात। 8 ब्लड बैंक और 2 भंडारण इकाइयां स्थापित
49 स्थायी स्वास्थ्य सुविधाएं और 26 चिकित्सा राहत पोस्ट। 22 विशेषज्ञ, 179 चिकित्सा अधिकारी और 299 पैरामेडिकल स्टाफ तैनात।

सुगम, सुरक्षित, सुलभ और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। देश-विदेश से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आते हैं। यात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध हैं। चारधाम यात्रा राज्य की आर्थिकी से भी जुड़ी है। राज्य में आज जिस तेजी के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए हमें यात्रा व्यवस्थाओं को और विस्तार देना होगा। इसकी कवायद भी शुरू कर दी गई है। इस बार केदारघाटी आपदा के चलते व्यवस्थाएं प्रभावित हुई, लेकिन सरकार ने इस कठिन चुनौती का भी दृढ़तापूर्वक सामना कर केदार यात्रा को बहाल किया।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

पीएम मोदी ने जब भी अवसर आया, देश को दी देवभूमि की मिसाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देवभूमि उत्तराखंड से विशेष लगाव रहा है। प्रधानमंत्री के “मन की बात“ कार्यक्रम में उत्तराखंड छाया रहा है। शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ पर आगामी तीन अक्टूबर को “मन की बात कार्यक्रम“ दस वर्ष पूर्ण कर लेगा। इन दस वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार उत्तराखंड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपने कार्यों से पूरे देश और समाज के सामने आदर्श मिसाल पेश की है। कई कार्याे को प्रेरणाजनक बताते हुए उन्होंने पूरे देश का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया।

हर गांव में शुरू हो धन्यवाद प्रकृति अभियान
मन की बात के 114वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनपद उत्तरकाशी के सीमांत गांव झाला का जिक्र किया। इस गांव के ग्रामीण हर रोज दो-तीन घंटे गांव की सफाई में लगाते हैं। गांव का सारा कूड़ा कचरा उठाकर गांव से बाहर निर्धारित स्थान पर रख दिया जाता है। ग्रामीणों ने इसे धन्यवाद प्रकृति अभियान नाम दिया है। प्रधानमंत्री ने ग्रामीणों की मुहिम की सराहना कर कहा कि देश के हर गांव में यह अभियान शुरू होना चाहिए।

जखोली में महिलाओं ने जलस्रोत किए पुनर्जीवित
रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली ब्लॉक की ग्राम पंचायत लुठियाग में महिलाओं ने जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल की है। चाल-खाल (छोटी झील) बनाकर बारिश के पानी का संरक्षण किया। इस मुहिम से गांव में सूख चुके प्राकृतिक जलस्रोत पुनर्जीवित होने से पेयजल की किल्लत काफी हद तक दूर हो गई है और सिंचाई के लिए भी पानी मिलने लगा है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना कर इसे अनुकरणीय बताया। यहां ग्रामीणों को पानी के लिए तीन किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता था।

रोज 5-7 किमी पैदल सफर तय कर लगाए कोरोना के टीके
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में कोरोना काल में बेहतर काम करने वाली बागेश्वर की एएनएम पूनम नौटियाल की खूब सराहना की। कोरोना का टीका लगाने के लिए पूनम ने रोज पांच से सात किमी का पैदल सफर तय किया। जो लोग वैक्सीन लगाने से डर रहे थे, उन्हें भी पूनम जागरूक किया। पीएम ने स्वयं भी पूनम से बात की। पीएम ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र होने से वैक्सीनेशन का सारा सामान इन्हें खुद ही अपने कंधे पर उठाकर ले जाना होता था।

स्वच्छता अभियान में जुटे सुरेंद्र
गुप्तकाशी के सुरेंद्र प्रसाद बगवाड़ी स्वच्छता अभियान में जुटे हैं। उन्होंने रुद्रप्रयाग के तत्कालीन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल को गदेरे की सफाई करते देखा तो उन्होंने भी सफाई में जुटने का फैसला किया। वह केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित हैं।

बोली-भाषा को बचाने के लिए काम कर रहा रं समाज
प्रधानमंत्री ने अपनी मन की बात में धारचूला के रं समाज का जिक्र किया। अपनी बोली-भाषा को बचाने के लिए रं समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रधानमंत्री ने जमकर तारीफ की और इसे पूरी दुनिया को राह दिखाने वाली पहल बताया। पीएम ने कहा कि उन्होंने धारचूला में रं समाज के लोगों द्वारा अपनी बोली को बचाने के प्रयास की कहानी एक किताब में पढ़ी।

पवित्र स्थलों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने में जुटे मनोज
रुद्रप्रयाग के मनोज बैंजवाल पवित्र स्थलों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने में जुटे हैं। पीएम ने उनकी सराहना की है। जो घाट गंदगी से पटे थे, उन्होंने वहां सफाई कर आरती शुरू कर दी। अन्य लोगों को भी इससे जोड़ा। अब लोगों ने वहां गंदगी फैलाना बंद कर दिया। उन्होंने तुंगनाथ, बासुकीताल आदि बुग्यालों को कचरे से मुक्त करने के लिए अभियान चलाया। अब वह स्कूलों में छात्रों को जागरूक कर रहे हैं।

गायत्री ने रिस्पना की पीड़ा बताई
देहरादून के दीपनगर निवासी छात्रा गायत्री ने रिस्पना नदी की पीड़ा को प्रधानमंत्री के सामने रखा था। उन्होंने बताया कि यह नदी अब लगभग सूख चुकी है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग पूरे देश को सुनाई थी।

घोड़ा लाइब्रेरी से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही किताबें
नैनीताल जिले में कुछ युवाओं ने बच्चों के लिए अनोखी घोड़ा लाइब्रेरी की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री ने इस कार्य की सराहना की है। इस लाइब्रेरी की खासियत है कि दुर्गम से दुर्गम इलाकों में भी इसके जरिए बच्चों तक पुस्तकें पहुंच रही हैं और यह सेवा बिल्कुल निशुल्क है। अब तक इसके माध्यम से नैनीताल के 12 गांवों को कवर किया गया है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस नेक काम में मदद करने के लिए स्थानीय लोग भी खूब आगे आ रहे हैं।

स्कूल परिसर में उगाई हरियाली
राजकीय इंटर कालेज कोटद्वार में गणित के शिक्षक संतोष नेगी की ओर से जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयोग को प्रधानमंत्री ने सराहा था। संतोष नेगी ने कॉलेज परिसर में दो सौ गड्ढे बनाकर उनमें बारिश के पानी का संचय किया, जिससे पूरा परिसर हरियाली से भर गया।

दस साल से सूखा नाला हुआ पुनर्जीवित
पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक के उफ्रेखाल निवासी रिटायर्ड शिक्षक सचिदानंद भारती ने वर्ष 1989 में उफ्रेखाल में चाल खाल बनाकर बारिश के जल का संरक्षण किया। उन्होंने 30 हजार से अधिक चाल-खाल बनाकर बांज और बुरांश के पेड़ लगाए। इसका परिणाम हुआ कि 10 साल से सूखा नाला पुनर्जीवित हो उठा। उन्होंने अपने अभियान को पाणी राखो नाम दिया है।

भोजनमाता भी कर रही स्वच्छता के प्रति जागरूक
गुप्तकाशी के देवरगांव की चंपा देवी स्कूल में भोजन माता है और लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं। उन्होंने बंजर भूमि पर पेड़ लगाकर उसे हराभरा बनाया है।

भोजपत्र पर कलाकृतियां बना रही चमोली की महिलाएं
उत्तराखंड के चमोली जिले के उच्च हिमालय क्षेत्र में उगने वाले दुर्लभ भोजपत्र की छाल पर महिलाएं अपनी कलम चलाकर पुरातन संस्कृति की याद दिला रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बद्रीनाथ दौरे के दौरान सीमांत नीति माणा घाटी की महिलाओं ने उन्हें भोजपत्र पर लिखा एक अभिनंदन पत्र भेंट किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने भोजपत्र के सोवियत बनाने को लेकर अपने मन की बात कार्यक्रम में महिलाओं की इस पहल की सराहना की।

युवाओं ने बनाया घड़ियालों पर नजर रखने वाला ड्रोन
रुड़की क्षेत्र में स्थित रोटर कंपनी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वन्य जीव संरक्षण और इको टूरिज्म के लिए नए-नए इनोवेशन युवा सामने ला रहे है। रुड़की में रोटर प्रीसिश़न ग्रुप ने वन्य जीव संस्थान की मदद से ऐसा ड्रोन तैयार किया हैं, जिससे नदी में घड़ियालों पर नजर रखने में मदद मिल रही है।

लोक संस्कृति के संरक्षण में जुटे हैं पूरण सिंह
जनपद बागेश्वर के रीमा गांव के निवासी पूरण सिंह उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण में जुटे हैं। उत्तराखंड की लोक विधा जागर, न्योली, हुड़का बोल, राजुला मालूशाही लोकगाथा के गायन में उन्होंने खास पहचान बनाई है। पूरण सिंह की बचपन मे ही दोनों आंखें खराब हो गई थी। वह पहाड़ी गीत झोड़ा, छपेली, चाचरी, न्यौली, छपेली, जागर आदि सुना करते थे। आंखें खराब होने से वह पढ़ाई नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने बाल्यावस्था से ही गायन शुरू कर दिया।

प्रधानमंत्री के दिल में बसता है उत्तराखंड-धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड से अगाध प्रेम है। उत्तराखंड उनके दिल में बसता है। यह उनके देवभूमि से असीम लगाव को ही प्रदर्शित करता है कि प्रधानमंत्री ने “मन की बात“ कार्यक्रम में देवतुल्य जनता, प्राकृतिक संपदा, रीति-नीति और लोक परंपराओं का अक्सर जिक्र किया है। इस कार्यक्रम ने छोटे से छोटे स्तर पर काम करने वालों को भी देश-दुनिया मे पहचान दी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नवरात्रि के शुभारंभ पर आगामी तीन अक्टूबर को “मन की बात“ कार्यक्रम के 10 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। दस वर्षों में इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने सामाजिक संगठनों और लोगों द्वारा जनहित में किए गए अनेक कार्यों का जिक्र कर लोगों को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए हम सबको अपना योगदान देना है।

अवैध रूप से क्रय की गई भूमि को राज्य सरकार में किया जाएगा निहित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भू-कानून की दिशा में लिए गए निर्णय के बाद प्रदेश में अवैध रूप से जमीनों की खरीद फरोख्त करने वालों के ख़िलाफ़ सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है।
प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भू क़ानून को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भू-क़ानून को लेकर गंभीर है। जिन लोगों ने भी यहां भूमि ख़रीदी और उसका उपयोग उस प्रयोजन हेतु नहीं कर रहे हैं जिस प्रयोजन हेतु भूमि क्रय की है उनके विरुद्ध कार्यवाही करते हुए भूमि को राज्य सरकार में निहित किया जाएगा। इसके अतिरिक एक परिवार में 250 वर्ग मीटर से ज़्यादा भूमि ख़रीद कर जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है,उनकी भी अतिरिक्त ज़मीन राज्य सरकार में निहित की जाएगी।
वन मंत्री ने कहा भू-क़ानून में जो भी सुधार राज्य हित में अपेक्षित होंगे वह प्रयास किए जायेंगे लेकिन इसके लिए प्रदेश के नागरिकों को भी जागरूक होकर सरकार का सहभागी बनना होगा। वन मंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि प्रदेशवासी अपने पैतृक भूमि को संरक्षित करें और उसकी बिक्री ना करें। वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूर्व में भू-कानून में जो भी ऐसे संशोधन हुए हैं, और उनसे अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं, जन भावनाओं के अनुरूप उनमें भी संशोधन करने से पीछे नहीं हटा जाएगा। वन मंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों के हक हकूकों को संरक्षित करने को हर संभव कदम उठाये जा रहे हैं। राज्य का भावी भू कानून इसी सोच के साथ तैयार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि भू कानून को लेकर मुख्यमंत्री ने कई स्तर पर कार्यवाही करने और अगले बजट सत्र में राज्य की जनभावनाओं के अनुरूप भू क़ानून लागू करने दिशा में निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने सुभाष कुमार समिति का गठन किया है इसके साथ ही भू कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में गठित समिति सुझावों का अध्ययन कर लागू करने के लिए बैठकें कर के इसको अंतिम रूप दे रही है।

लोगों को मंच प्रदान कर प्रेरणादायक बनाता है मन की बात कार्यक्रम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अनारवाला, देहरादून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात का 114वां संस्करण सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम हमेशा सबको सामाजिक सरोकारों को लेकर बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के शुभारंभ अवसर पर 3 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 10 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। दस सालों में इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों और लोगों द्वारा जनहित में किये गये अनेक कार्यों का जिक्र कर लोगों को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। इस कार्यक्रम से प्रेरणा लेकर लोगों द्वारा अनेक सराहनीय कार्य किये भी जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज मन की बात कार्यक्रम में राज्य के उत्तरकाशी के सीमावर्ती गाँव झाला का जिक्र किया। यहां के युवाओं ने अपने गाँव को स्वच्छ रखने के लिए एक खास पहल शुरू की है। वे अपने गाँव में ‘धन्यवाद प्रकृति’ अभियान चला रहे हैं। यह स्वच्छता के क्षेत्र में एक सराहनीय पहल है। इसके तहत गाँव में रोजाना दो घंटे सफाई की जाती है। गाँव की गलियों में बिखरे हुए कूड़े को समेटकर, उसे, गाँव के बाहर, तय जगह पर डाला जाता है। इससे झाला गाँव भी स्वच्छ हो रहा है और लोग जागरूक भी हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि स्वच्छता के इस तरह के कार्यक्रम जनसहयोग से प्रदेश के हर क्षेत्र में चलाए जाए। राज्य में पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता अभियान पर राज्य सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वाहन किया है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए हम सबको अपना योगदान देना है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ पर विशेष ध्यान देना है। त्योहारों में स्थानीय उत्पादों की खरीददारी कर हमें स्थानीय स्तर पर लोगों की आजीविका को बढ़ाने में योगदान देना होगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि हमें विकास के साथ अपनी विरासत को भी बढ़ावा देना होगा। अपनी स्थानीय भाषा, बोलियों और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयास करने हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। उन्होंने हमेशा उत्तराखंड की चाहे बाल मिठाई हो या एपण कला और आज उत्तराखंड के जनपद उत्तरकाशी के झाला गांव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस गांव के युवा रोजाना गांव में दो घंटे सफाई करते हैं। इससे गांव स्वच्छ हो रहा है और लोग जागरुक भी हो रहे हैं। उन्होंने सभी से मन की बात कार्यक्रम को सुनने की अपील की।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लाभांवित हो रहे हैं प्रदेश के 8.88 लाख किसान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार, खेती किसानी की तरक्की के लिए प्रयासरत है। इसके लिए कृषि विभाग कई कल्याणकारी योजनाएं चला रहा है। साथ ही केंद्र सरकार की अहम योजनाओं के लाभ भी प्रदेश के किसानों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
कृषि विभाग किसानों को प्रमाणित बीज वितरण, कृषि उपकरणों की उपलब्धता, सिंचाई सुविधा, उर्वरक, कीट नियंत्रण, फसल बीमा की सुविधा देने के साथ ही केंद्र सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ दे रहा है। सरकार किसानों को अपने खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों की जांच करते हुए, उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, इसके लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत भारत सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष में 508.89 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।
इसी तरह परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत कलस्टर के आधार पर चयनित गांवों जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में यह योजना 3900 क्लस्टर में संचालित की जा रही है, इसके लिए भारत सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 13127.40 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।

सम्मान निधि से लाभांवित हो रहे हैं 8.88 लाख किसान
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश में 8.88 लाख पंजीकृत किसानों को प्रतिवर्ष छह हजार रुपए की धनराशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 178.04 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक प्रदेश में कुल 2757.20 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी की है। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एक अप्रैल से सभी जनपदों में चावल और मंडुआ फसल को योजना के तहत कवर किया जा रहा है।

एससी-एसटी बहुल गांवों के लिए विशेष योजना
सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छोटी जोत वाले किसानों के लिए विशेष कृषि विकास कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में चयनित गांवों के लिए 700 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। हमारी प्राथमिकता आधुनिक तकनीक और नवाचारों को किसानों तक पहुंचाना है, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके। उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जैविक खेती, फल उत्पादन और औषधीय पौधों की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सेंट जोसेफ एकेडमी से नहीं होगी भूमि वापस, सीएम के निर्देश के बाद हुआ निर्णय

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सेंट जोसेफ एकेडमी, देहरादून के भूमि एवं पार्किंग प्रकरण पर सचिव आवास, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून तथा एमडीडीए के साथ सचिवालय में बैठक की।
बैठक में निर्णय लिया गया है कि सेंट जोसेफ एकेडमी से भूमि वापस नहीं ली जाएगी। इसके साथ ही मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए हैं कि सेंट जोसेफ अकादमी द्वारा विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था विद्यालय परिसर के भीतर ही की जाएगी, ताकि मुख्य सड़क पर आमजन को ट्रैफिक की समस्या का सामना ना करना पड़े।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने आवास विभाग को सेंट जोसेफ एकेडमी के लीज नवीनीकरण पर नियमानुसार कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।

पिछले दस वर्षों में मोदी सरकार ने न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आठ हजार करोड़ से अधिक धनराशि खर्च कीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न्यायिक परिसर (पुरानी जेल) देहरादून में बार एसोसिएशन देहरादून के नवीन भवन का शिलान्यास और भूमि पूजन किया। मुख्यमंत्री ने सभी अधिवक्ततागणों को नए चैंबर भवन के शिलान्यास की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन बहुत ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड सहित पूरे देश में न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्य को मजबूत करने का काम अनवरत रूप से किया जा रहा है। पिछले दस वर्षों में मोदी सरकार ने न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 8000 करोड़ से ज्यादा की धनराशि खर्च की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने अंग्रेजों के जमाने के तमाम कानूनों को हटाकर आज की नई आवश्यकता के अनुसार नए कानूनों को लागू किया है। इन कानूनों के लागू होने के बाद न्याय की अवधारणा को और भी अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के तहत इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को भी मजबूत सबूत के रूप में मान्यता मिली है, जो कि आज की डिजिटल क्रांति के समय में अहम है। इससे सभी अधिवक्ताओं को अपना पक्ष कोर्ट में आसानी से रखने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार राज्य के अंदर प्रदेश में जितने भी न्याय से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर हैं उन्हें मजबूत करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून बार एसोसिएशन के चैंबर भवन की मांग भी काफी लंबे समय से चल रही थी, इसके संबंध में बार एसोसिएशन के साथ अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के पदाधिकारियों ने भेंट कर नए भवन हेतु जमीन की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां पर कुल साढ़े पांच हजार से ज्यादा लोग कार्यरत हैं। इसलिए सभी की समस्याओं को समझते हुए पांच बीघा जमीन बार एसोसिएशन देहरादून को देने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि इस जमीन पर 1500 चौम्बर, एक ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी, कैंटीन, पार्किंग से भरपूर नौ मंजिला भवन का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस भवन निर्माण के लिए हर संभव सहयोग दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नकल विरोधी कानून के अलावा धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी आदि कानूनों को लागू किया है। इनके लागू हो जाने से आज देश भर में उत्तराखंड की पहचान एक अनुशासित और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस रखने वाले राज्य के रूप में हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में 09 नवम्बर 2024 से पहले समान नागरिक संहिता लागू की जायेगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचन्द अग्रवाल, विधायक खजान दास, विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, जिला जज प्रेम सिंह खिमाल, बार एसोसिएशन देहरादून के अध्यक्ष राजीव शर्मा, सचिव राजवीर सिंह बिष्ट और अधिवक्तागण उपस्थित थे।

देहरादून में होगी फोरेंसिक साइंस एक्सपर्ट की तैनाती, वित्त मंत्री ने दिया अनुमोदन

अब प्रदेश में रजिस्ट्री में फ्रॉड केस होने पर गठित एसआईटी टीम को दस्तावेजों का सैंपल चंडीगढ़ नहीं भेजना पड़ेगा। इसके लिए देहरादून में ही फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट तैनात किया जाएगा। जो पुलिस और एसआईटी टीम के बीच समन्वय का काम करेगा। इस प्रस्ताव पर वित्त मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने अपना अनुमोदन दिया है।

वित्त मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में रजिस्ट्री में फ्रॉड केस जैसे फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी कागजात, फर्जी लेखनी आदि की शिकायतें मिलती हैं। इसके लिए पूर्व में एक एसआईटी टीम का गठन किया गया था। उन्होंने बताया कि एसआईटी टीम दस्तावेजों की प्रमाणिकता के लिए चंडीगढ़ स्थित फोरेंसिक लैब को दस्तावेज भेजती थी।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि चंडीगढ़ से दस्तावेजों की प्रमाणिकता की रिपोर्ट आने में अधिक समय लगता था। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट की तैनाती देहरादून में करने का विचार कर रही है इससे दस्तावेजों की प्रमाणिकता में लगने वाला समय में बचत होगी और निस्तारण समय पर किया जा सकेगा।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि फोरेंसिक साइंस एक्सपर्ट पुलिस और गठित एसआईटी के बीच समन्वय का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की धामी सरकार रजिस्ट्री में फ्रॉड केस के मामले में गंभीर है इसी क्रम में राज्य सरकार ने पूर्व में एसआईटी टीम का गठन किया था।

गृह मंत्रालय ने बढ़ाई एसडीआरएफ की रिकवरी व पुनर्निर्माण की दरें

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एसडीआरएफ की रिकवरी और पुनर्निर्माण की निर्धारित दरों को संशोधित कर बढ़ा दिया गया है। इस बढ़ोतरी से आपदा प्रभावित उत्तराखंड को सबसे ज्यादा लाभ होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से इस बढ़ोतरी के लिए लंबे समय से पैरवी की जा रही थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस संबंध में लगातार पत्र लिखने के साथ ही मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात कर रिकवरी और पुनर्निर्माण की इन दरों को बढ़ाने का अनुरोध किया था।
बता दें कि इससे पूर्व एसडीआरएफ की मदों में रिकवरी और पुनर्निर्माण के मानक तय नहीं थे। साथ ही दरें भी काफी कम थी। इस प्रकार धनराशि कम होने से क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों के मरम्मत कार्य में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से कई बार गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर एसडीआरएफ के मानक की धनराशि बढ़ाए जाने का अनुरोध किया गया था। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए इस मामले में विचार करने का अनुरोध किया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 14 अगस्त को एसडीआरएफ की रिकवरी और पुनर्निर्माण की दरों के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे आपदा प्रभावित उत्तराखंड को सबसे अधिक लाभ होगा। आपदा में क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों के मरम्मत कार्य में सुविधा होगी और जनसामान्य को होने वाली कठिनाइयों को दूर किया जा सकेगा।

’धामी कैबिनेट ने प्रधानमंत्री व गृहमंत्री का जताया आभार’
उत्तराखंड कैबिनेट ने एसडीआरएफ की रिकवरी और पुनर्निर्माण की दरें बढ़ाए जाने का स्वागत करते हुए इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया है। शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से की गई प्रभावी पैरवी के लिए उनका भी धन्यवाद व्यक्त किया गया। कहा गया कि मानकों में संशोधन का सबसे ज्यादा लाभ उत्तराखंड को मिलेगा।

’पहाड़ में घर की पूर्ण क्षति पर मिलेंगे ₹2 लाख’
पूर्व में मैदानी इलाकों में पक्के घरों के लिए निर्धारित मानक ₹01.20 लाख प्रति घर के स्थान पर अब 30 से 70 प्रतिशत क्षति होने की दशा में ₹90 हजार प्रति घर तथा 70 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर ₹1.80 लाख कर दिया गया है तथा पहाड़ी क्षेत्रों में पूर्व में निर्धारित मानक ₹01.30 लाख प्रति घर के स्थान पर अब 30 से 70 प्रतिशत क्षति होने की दशा में ₹01 लाख प्रति घर तथा 70 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर ₹02 लाख प्रति घर कर दिया गया है।

’प्राइमरी स्कूल भवन के लिए मिलेंगे ₹15 लाख’
प्राथमिक स्कूलों के लिए पूर्व में निर्धारित मानक प्रति विद्यालय ₹02 लाख की सीमा के अध्यधीन रहते हुए वास्तविक व्यय के अनुसार परिवर्तित करते हुए अब प्राथमिक स्कूलों के लिए 30 से 70 फीसदी की क्षति होने पर ₹07.50 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर ₹15 लाख अनुमन्य किया गया है।
माध्यमिक/वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के नाम से पूर्व में मानक निर्धारित नहीं थे, किन्तु अब माध्यमिक/वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के 30 से 70 प्रतिशत क्षतिग्रस्त होने की दशा में ₹12.50 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर ₹25 लाख अनुमन्य किया गया है।

’सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की भी धनराशि बढ़ी’
प्राथमिक/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिये पूर्व में ₹02.50 लाख प्रति यूनिट की अधिकतम सीमा के अध्यधीन वास्तविक व्यय के अनुसार अनुमन्य था, जिसको अब बढ़ाकर उपकेन्द्र मैदानी क्षेत्र के लिये 30 से 70 प्रतिशत की क्षति तक ₹ 09.20 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर ₹18.40 लाख अनुमन्य किया गया है। पर्वतीय क्षेत्र के लिए यह राशि कमशः ₹07.91 लाख तथा ₹15.81 लाख अनुमन्य किया गया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए मैदानी क्षेत्रों में 70 प्रतिशत की क्षति तक ₹20.99 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर ₹41.97 लाख अनुमन्य है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 70 प्रतिशत की क्षति तक ₹24. 72 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक ₹49.45 लाख अनुमन्य है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मैदानी क्षेत्र के लिये 70 प्रतिशत की क्षति तक ₹79.06 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर ₹158.12 लाख। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर्वतीय क्षेत्र के लिये 70 प्रतिशत की क्षति तक ₹92.86 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर रू0 185.72 लाख।

’पुल की क्षति पर मिलेंगे 35 करोड़’
पुल प्रति संख्या में 70 प्रतिशत की क्षति तक ₹1750 लाख तथा 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर ₹3500 लाख अनुमन्य किया गया है।

’अन्य क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों के लिए निर्धारित दरें एक नजर में’
-तटबन्ध प्रति किमी- 70 प्रतिशत की क्षति तक ₹50.00 लाख और 70 प्रतिशत से अधिक की क्षति पर ₹ 01 करोड़ प्रति किमी।
-प्रमुख सड़कों के लिए मैदानी क्षेत्र में 70 प्रतिशत की सीमा तक ₹32 लाख प्रति किमी और 70 प्रतिशत से अधिक होने पर ₹64 लाख प्रति किमी। इसी प्रकार पहाड़ी क्षेत्रों में 70 प्रतिशत की सीमा तक ₹93.75 लाख और 70 प्रतिशत से अधिक होने पर ₹187.75 लाख प्रति किमी।
-अन्य जिला सड़कों के लिए भी मैदानी क्षेत्रों में 70 प्रतिशत की सीमा तक ₹26.75 लाख प्रति किमी तथा 70 प्रतिशत से अधिक होने पर ₹54.50 लाख। इसी प्रकार पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 70 प्रतिशत की सीमा तक ₹80 लाख तथा 70 फीसदी से अधिक होने पर ₹159.88 लाख।