‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2020’’ के परिणाम जारी, उत्तराखण्ड के निकायों का शानदार प्रदर्शन

‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2020’’ में उत्तराखण्ड राज्य द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर तीन पुरस्कार प्राप्त किए गए। उत्तराखण्ड राज्य द्वारा 100 से कम शहरी निकायों वाले राज्यों की श्रेणी में ‘‘बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट’’ से तीसरा स्थान प्राप्त किया। नगर पंचायत नंदप्रयाग ने देशभर की एक लाख से कम आबादी वाली निकायों में से ‘‘सिटिजन फीडबैक श्रेणी’’ में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। छावनी क्षेत्र अल्मोड़ा द्वारा ‘‘सिटिजन फीडबैक श्रेणी’’ में तीसरे स्थान पर रह कर राज्य को तीसरा पुरस्कार दिलवाया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने ये पुरस्कार प्राप्त किये ।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले निकायों को बधाई देते हुए कहा कि निकायों इसी मनोयोग से आगे कार्य करना होगा। स्वच्छता के क्षेत्र में अभी बहुत सुधार की गुंजाईश है। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों एवं निकायों की रैंकिंग में अच्छा सुधार हुआ है। इसमें और बेहतर प्रदर्शन किये जाने पर उन्होंने बल दिया। मुख्यमंत्री कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वच्छ भारत मिशन अभियान को आगे बढ़ाने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। स्वच्छता के बल पर हम अनेक बीमारियों से बचाव सकते हैं।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों हेतु अत्यधिक गंभीरता से कार्य कर रही है। नगर निकायों को और भी अधिकार सम्पन्न बनाने एवं उनकी आय अर्जन के नए स्रोतों के विकास हेतु भी राज्य पर लगातार किया गया है। हमने निकायों को कहा कि स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए कार्य किए जाएं। यहां तक कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत निकायों को प्रदान किए जाने वाले अनुदान को भी सबसे पहले स्वच्छता कार्यों हेतु उपलब्ध करवाने संबंधी स्पष्ट दिशा – निर्देश जारी किए गए। इसका सीधा असर स्वच्छ सर्वेक्षण में हमारे प्रदर्शन पर पड़ा है।
नगरीय स्वच्छता की अखिल भारतीय प्रतियोगिता ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020’’ के बहुप्रतीक्षित नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। इस ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण’’ में उत्तराखण्ड राज्य की नगरीय निकायों तथा छावनी परिषदों द्वारा विभिन्न श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन किया गया है। आज ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020’’ के परिणामों तथा ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2021’’ का टूलकिट जारी करते हुए मा0 केन्द्रीय मंत्री, आवसन और शहरी कार्य मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), भारत सरकार, श्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पुरस्कार वितरित किए गए। वर्षभर चलने वाली इस राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया में देशभर के 4242 नगरों एवं 62 केन्ट बोर्ड द्वारा प्रतिभाग किया गया। गत वर्ष तक ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण’’ के परिणामों को राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली में आयोजित किया जाता रहा है। इस वर्ष कोविड -19 संक्रमण के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में इस आयोजन को एन0आई0सी0 के सहयोग से वर्चुअल प्लेटफार्म पर ऑनलाईन आयोजित किया गया।

एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में उत्तराखण्ड का स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। वर्ष 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षण में देहरादून का स्थान 384, रूड़की का 281, काशीपुर का 304, हल्द्वानी का 350, हरिद्वार का 376 एवं रूद्रपुर का 403वां स्थान था। जबकि 2020 में देहरादून का 124वां, रूड़की का 131वां, काशीपुर का 139, हल्द्वानी का 229, हरिद्वार का 244 एवं रूद्रपुर का 316 स्थान आया है। 50 हजार से अधिक एवं एक लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में रामनगर का नार्थ जोन के शहरों में 18वां, जसपुर का 56वां एवं पिथौरागढ़ का 58वां स्थान आया है। 25 हजार से 50 हजार से तक की जनसंख्या वाले नगरों की श्रेणी में नार्थ जोन में नैनीताल का 68वां एवं सितारगंज को 106वां स्थान प्राप्त हुआ है। 25 हजार से कम जनसंख्या वाले नगरों की श्रेणी में मुनि की रेती का 12वां, उखीमठ का 41वां, भीमताल का 50वां एवं नरेन्द्रनगर का 58वां स्थान आया है। देश भर के कुल 92 गंगा निकायों में उत्तराखण्ड से गौचर ने तीसरा, जोशीमठ ने चैथा, रूद्रप्रयाग ने पांचवा, श्रीनगर ने छटवां, गोपेश्वर ने आठवां, मुनि कि रेती ने 11 वां, बड़कोट ने 12वां , कर्णप्रयाग ने 13 वां, कीर्तिनगर ने 18वां, देवप्रयाग ने 20 वां, नन्दप्रयाग ने 22वां व टिहरी ने 28 वां स्थान प्राप्त किया।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक द्वारा राज्य की निकायों को बेहतर मार्गदर्शन करने तथा ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2020’’ में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राज्य स्तरीय पी0एम0यू0 टीम को भी पुरस्कार प्रदान किया गया। अपर निदेशक शहरी विकास अशोक कुमार पाण्डे, संयुक्त निदेशक कमलेश मेहता, अधीक्षण अभियंता, रवी पाण्डेय, राज्य मिशन प्रबंधक, रवि शंकर बिष्ट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं आई0ई0सी0 विशेषज्ञ, कमल भट्ट, एम0आई0एस0 विशेषज्ञ, राकेश कुमार, कनिष्ठ सहायक, उपेन्द्र सिंह तड़ियाल एवं अनुज गुलाटी को यह पुरस्कार प्रदान किए गए।

नई शिक्षा नीति के तहत अब प्रदेश में उच्च शिक्षा आयोग का गठन करने की तैयारी

राज्य में अब उच्च शिक्षा आयोग के गठन की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही वार्षिक परीक्षा प्रणाली को खत्म कर सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने की बात भी हो रही है। सचिवालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा के दौरान इन बिन्दुओं पर उच्च शिक्षा मंत्री और अधिकारियों के बीच इस पर सहमति बनती दिख रही है।
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रस्तुतीकरण किया गया। जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विस्तृत अध्ययन के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं उच्च शिक्षा सलाहकार प्रोफेसर एमएसएम रावत की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। यह कमेटी 40 दिनों में अपने सुझाव प्रस्तुत करेगी। नई शिक्षा नीति पर चर्चा के दौरान कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किये। जिनमें प्रमुख रूप से राज्य शिक्षा आयोग के गठन, राज्य के कई महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय व स्वायत्तशासी महाविद्यालय बनाए जाने, बहुविषय विश्वविद्यालय की स्थापना, कोर्स स्ट्रक्चर तैयार किए जाने, वार्षिक परीक्षा प्रणाली खत्म कर सेमेस्टर सिस्टम को शुरू कर क्रेडिट बेस्ड सिस्टम लागू करने, प्रत्येक जिले में समावेशी महाविद्यालय बनाए जाने पर सहमति बनी। 
बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तृत अध्ययन के लिए जो कमेटी गठित की गई है। उसमें राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों के कुलपति, निदेशक उच्च शिक्षा, उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा, उन्नयन समिति व शासन स्तर के अधिकारी बतौर सदस्य शामिल रहेंगे। चर्चा के दौरान उच्च शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से यह भी बताया गया कि बहुविषयक शिक्षा के प्रावधान के तहत स्नातक तीन या चार वर्ष की अवधि की होगी। जिसमें छात्रों को किसी भी विषय या क्षेत्र में एक साल पूरा करने पर प्रमाणपत्र, दो साल पूरा करने पर डिप्लोमा, तीन वर्ष की अवधि के बाद स्नातक की डिग्री प्रदान की जाएगी। जबकि चार वर्ष के कार्यक्रम में शोध सहित डिग्री प्रदान की जाएगी। पीएचडी के लिए या तो स्नातकोत्तर डिग्री या शोध के साथ चार वर्ष की स्नातक डिग्री अनिवार्य होगी। 
इसके अलावा नई शिक्षा नीति के तहत तीन प्रकार के शिक्षण संस्थान होंगे। जिसमें अनुसंधान विश्वविद्यालय, शिक्षण अनुसंधान, स्वायत्त महाविद्यालय शामिल हैं। इसमें एफिलेटिंग विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों का कंसेप्ट समाप्त हो जाएगा।

सीएम की विधानसभा में हाईटेक अस्पताल के निर्माण का रास्ता साफ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर शासन द्वारा हर्रावाला, देहरादून में 300 शैय्या युक्त शकुन्तला रानी सरदारी मैटर्निटी व कैंसर चिकित्सालय के निर्माण के लिये 10 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह धनराशि मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को उपलब्ध करायी गई है। मुख्यमंत्री ने इस अस्पताल के निर्माण को स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि हर्रावाला क्षेत्र में सुविधायुक्त अस्पताल की जरूरत भी थी। इससे क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
सचिव अमित सिंह नेगी द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि जनपद देहरादून के हर्रावाला में जीवन ज्योति कैंसर हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा उपहार स्वरूप स्वास्थ्य विभाग को प्रदत्त भूमि पर 300 शैय्या युक्त चिकित्सालय का निर्माण किया जायेगा। चिकित्सालय निर्माण की अनुमोदित लागत रू. 106 करोड़ 84 लाख 70 हजार है। इसमें से भारत सरकार द्वारा 97.60 करोड़ की धनराशि अनुमोदित की गई है।

ऑल वेदर रोड परियोजना के निर्माण कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में ऑल वेदर रोड परियोजना की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय एवं सामरिक महत्व की महत्वपूर्ण परियोजना है, इसके क्रियान्वयन मे आ रही कठिनाइयों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्धता के साथ निराकरण किया जाय। उन्होने कहा कि चार धाम ऑल वेदर रोड योजना राज्य सरकार के साथ ही भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इस योजना को निर्धारित अवधि के अन्दर पूर्ण किया जाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 889 कि0मी0 की लगभग 11700 करोड़ की यह योजना राज्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। योजना के पूर्ण होने पर चारधाम यात्रा मार्ग पर आवागमन में सुविधा होने के साथ ही सीमान्त क्षेत्रों तक आवाजाही में आसानी होगी। यह योजना इस क्षेत्र के विकास की नई राह भी प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण में आ रही कठिनाइयों को नियमित रूप से सभी सम्बन्धित विभाग नियमित रूप से समीक्षा कर उनका निराकरण करें। इस सम्बन्ध में भारत सरकार के स्तर से जो स्वीकृतियां प्राप्त की जानी है। उन्हें सन्दर्भित किया जाय। भारत सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिया जा रहा है इसके लिए धनराशि की भी कोई कमी नही है। मुख्यमंत्री ने उर्जा विभाग को सड़क निर्माण में बाधक विद्युत लाईनों को तुरन्त शिफ्ट करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को सभी आवश्यक सहयोग एवं सुविधाये भी दिये जाने को कहा है। मुख्यमंत्री ने पेयजल विभाग को पेयजल लाइन शिफ्ट करने के भी निर्देश दिये। सड़क निर्माण में बाधक वृक्षों के कटान की स्वीकृति के लिए भी शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के अन्तर्गत सड़क निर्माण के लिए 15 दिन के अन्दर इन्वायरमेंट इम्पेक्ट एसेसमेंट की व्यवस्था की जाय। ताकि इस क्षेत्र में बनने वाली सड़क निर्माण में भी तेजी आ सके। मुख्यमंत्री ने चारधाम सड़क मार्ग पर किये जाने वाले वृक्षारोपण की योजना भी तैयार करने को कहा। इसके साथ ही सड़को के आस-पास स्थापित किये जाने वाले पेट्रोल पंप, विश्राम स्थलों, इको पार्को के लिए भी स्थान चिन्हित किये जाय। उन्होंने अतिरिक्त भूमि पर महिला स्वयं सहायता समूहो के लिए कियोस्क बनाये जाने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण का मुवाअजा प्राप्त करने वाला कोई भी व्यक्ति छूटने न पाये इसका भी ध्यान रखने को कहा। कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण सामाग्री नियमित रूप से उपलब्ध होती रहे इसकी भी व्यवस्था की जाय।
समीक्षा बैठक में आल वेदर रोड निर्माण के लिये कार्यदायी संस्थाओं में लोक निर्माण विभाग द्वारा ऋषिकेश-रूद्रप्रयाग (140कि0मी0), एन.एच.आई.डी.सी.एल एवं बीआरओ द्वारा रूद्रप्रयाग-माणा (160 कि0मी0), बीआरओ एवं पीआईयू ऋषिकेश-धरासू (144 कि0मी0), एनएचआईडीसीएल एवं बीआरओ धरासू-गंगोत्री (124 कि0मी0), एनएचआईडीसीएल एवं पीडब्लूडी धरासू-यमुनोत्री (95 कि0मी0), पीडब्लूडी रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड (76 कि0मी0), पीडब्लूडी टनकपुर-पिथौरागढ़ (150 कि0मी0) में सात पैकेजों पर चल रहे निर्माण कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि 672 की0मी0 के 40 स्वीकृत कार्यों पर निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। अन्य अवशेष सड़को के निर्माण हेतु स्वीकृति प्रक्रिया गतिमान है।
बैठक में मुख्य सचिव ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव आनन्द वर्धन, सचिव आर0के0सुधांशु, नीतेश झा, सुशील कुमार, अपर सचिव नीरज खेरवाल, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

सीएस ने श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निमाण कार्यो की समीक्षा की

मुख्य सचिव ओम प्रकाश की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निमाण कार्यो की समीक्षा हुई। बैठक में पुनर्निर्माण कार्यों में आ रही कठिनाईयों के निराकरण पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य मास्टर प्लान के अनुसार समयबद्धता से पूर्ण किया जाय। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई बैठक में भी निर्देश दिये गये थे कि मास्टर प्लान में लिये गये परियोजनाओं को तय समय पर पूरा किया जाय।
केदारनाथ पुनर्निर्माण फेज-2 के अन्तर्गत किये जाने वाले कार्यो की डीपीआर की समीक्षा पर मुख्य सचिव द्वारा सिंचाई विभाग को निर्देश दिये कि फ्लड जोनेशन के नोटिफिकेशन का कार्य 15 सितम्बर तक पूर्ण कर लें।
मुख्य सचिव ने इण्डियन ऑयल कॉपरोशेन द्वारा 36 करोड़ 74 लाख के निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व के कार्यो यथा संगम घाट के पुनर्निर्माण, फर्स्ट एड टूरिस्ट फेसिलेशन सेन्टर तथा मन्दाकिनी के किनारे सुरक्षा दिवार का निर्माण कार्य से सम्बन्धित प्रगति की जानकारी सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर से प्राप्त की। इसी क्रम में ओएनजीसी द्वारा मंदाकिनी आस्थापथ में बैठने एवं वर्षा शेड निर्माण, केदारनाथ धाम, मंदाकिनी के किनारे तथा मंदिर रोड में अवस्थापना सुविधाओं के विस्तार, वाटर एटीएम की स्थापना तथा मंदाकिनी प्लाजा विकास से सम्बन्धित 32.05 करोड़ लागत की अवस्थापना सुविधाओं पर भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा कार्यदायी विभागों को समयबद्धता एवं गुणवत्ता से कार्य करने के निर्देश दिये। आरईसी लि0 कम्पनी द्वारा 25 करोड़ 89 लाख रूपये की लागत से केदारनाथ मे पुनर्निर्माण एवं रूद्रप्रयाग में प्रशासनिक भवन एवं अस्पताल पुनर्निर्माण, केदारनाथ स्थित क्षतिग्रस्त पवित्र कुण्डों के विकास तथा केदारनाथ में सरस्वती नदी के किनारों एवं मन्दिर के रास्तों में अवस्थापना विकास की भी विस्तार से समीक्षा की।
इसी क्रम में पावर फाइनेन्स कारपोरेशन द्वारा सामाजिक दायित्व के तहत 28 करोड़ 13 लाख की लागत से किये जाने वाले म्यूजियम निर्माण, रेन शेड, गौरीकुण्ड में सुरक्षा की दृष्टि से गेट निर्माण के कार्यो की भी अद्यतन प्रगति की मुख्य सचिव ने समीक्षा की।
मुख्य सचिव द्वारा मुख्य अभियन्त लोनिवि को दिये गये कार्यो के आदेश जारी करने एवं टेण्डरिंग आदि समयबद्धता से पूर्ण करने के निर्देशे दिये। उन्होंने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यो में तेजी लाने के लिए वहां पर अभियन्ताओं की तैनाती के लिए आदेश दिये। इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग को भी निरन्तर अनुश्रवण करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कुछ प्रकरण जो फारेस्ट क्लीयरेंस से जुड़े हैं को वन विभाग के अधिकारियों को शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिये। इशानेश्वर मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य आरकेलाजिकल सर्वे आफ इण्डिया को हस्तांतरित करने के निर्देश दिये। बैठक में चिनूक हैलिकॉप्टर उतारने हेतु वर्तमान में उपलब्ध हेलीपैड के विस्तार पर भी चर्चा हुई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव नियोजन मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव वित्त सौजन्या, सचिव लोनिवि आर0के0सुधांशु तथा लोनिवि, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियन्ता उपस्थित रहे। वहीं वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन तथा जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग वन्दना जुड़े थे।

देहरादून और हल्द्वानी में उपनल बनाने जा रहा मल्टी सर्विस सेंटर

बुजुर्गों की मदद को उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) प्रमुख शहरों में मल्टी सर्विस सेंटर बनाने जा रहा है। प्रथम चरण में ये सेंटर देहरादून और हल्द्वानी में स्थापित किए जाएंगे। कॉलसेंटर की तरह काम करने वाले उपनल के इन खास दफ्तरों में स्थानीय स्तर पर डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टोर, होटल, मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, सुपर स्टोर, किराना स्टोरों का डाटा होगा।

बुजुर्गों की मांग के आधार पर उन तक ये सेवाएं पहुंचाई जाएंगी। इस सेवा को लेने के लिए फीस-वस्तु की कीमत के साथ एक न्यूनतम सेवा शुल्क देना होगा जो 100 रुपये तक हो सकता है। उपनल के एमडी ब्रिगेडियर (सेनि) पीपीएस पाहवा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के हर बड़े शहर में सेंटर बनाने की योजना है। पर, आबादी को देखते हुए पहले चरण में दून और हल्द्वानी को चुना गया है।

ऐसे काम करेगी योजना

मल्टी सर्विस सेंटर में स्वास्थ्य, बिजली, पानी समेत रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी सेवाएं देने वाले सभी लोगों का डाटा होगा। यदि किसी बुजुर्ग को डाक्टर की अथवा नर्स की आवश्यकता है। अस्पताल जाना है या फिर दवाएं खरीदनी है तो वह सेंटर में फोन कर सकता है। सेंटर में मौजूद कर्मचारी बुजुर्ग के आवासीय लोकेशन के आधार पर संबंधित व्यक्तियों को इसकी सूचना देगा। एक तय चार्ज लेते हुए घर तक सुविधा पहुंचा दी जाएगी। इसी प्रकार मैकेनिक, इलेक्ट्रियन, बिल जमा कराने वाली एजेसियां आदि भी सेंटर से जुड़ी होंगी। सामान्य सुविधाओं को उपनल अपने कर्मियों के जरिए भी घर तक पहंचा सकता है। सेवाओं की संख्या और उन्हें जरूरतमंद तक पहुंचाने के लिए ठोस ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इस अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

कार्यों की पारदर्शिता के लिए कार्यों का ऑडिट होना जरूरीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रायपुर, देहरादून में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उत्तराखण्ड के लोकार्पण के अवसर पर कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद से ही हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ हमने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी। सचिवालय एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को हमने भ्रष्ट व माफिया तत्वों से मुक्त किया है। कार्यों की पारदर्शिता के लिए कार्यों का ऑडिट होना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर थर्ड पार्टी ऑडिट होना चाहिए। सरकार के प्रति जनता का विश्वास होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि चावल घोटाले का जो मसला है, वह वर्ष 2016-17 की तत्कालीन सरकार के समय का मामला है। भाजपा सरकार बनने के बाद हमने इस मामले की जांच करवाई। केवल कागजों में राशन दिखाई जा रही थी, जरूरतमंदों तक राशन पहुंचती नहीं थी। आज गरीबों को जो राशन मिल रही है, वह उच्च गुणवत्ता की राशन है। प्रधानमंत्री जी का आह्वाहन रहता है कि हमारी नजर गरीबों पर होनी चाहिए। जब तक गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा, तब तक देश का उत्थान नहीं हो सकता।

लोक सेवा आयोग से पीएस की भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है। लोक सेवा आयोग में अधिक वर्कलोड होने के कारण भर्ती प्रक्रिया मे समय अधिक लगता है। लोक सेवा आयोग को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया है। कोविड-19 की वजह से भी भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की गतिविधियों के बेहतर क्रियान्वयन के उपायों को सुझाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कार्यालय में एक प्रकोष्ठ गठन किया गया।

कड़कनाथ के चूजों का एक माह में होगा वितरण, जिला योजना के बजट से खरीदे जाएंगे चूजे

कोविड-19 में उत्तराखंड लौटै प्रवासी युवाओं को गांव में रोकने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़े रखने के लिए जिला योजना के बजट से सरकार ने पहल की है। सरकार इस बजट से पौड़ी गढ़वाल और चमोली जिले में पशुलोक ऋषिकेश से 70 हजार कड़कनाथ मुर्गी के चूजे भेजने जा रही है। 10 सितंबर से यह चूजे पशुपालन विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे।

पहली बार जिला योजना के बजट से पशुपालन विभाग मुर्गी के चूजे खरीद रहा है। पशुलोक ऋषिकेश स्थित कुक्कट प्रक्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डा. मनोज तिवारी ने बताया कि पौड़ी जिले को कड़कनाथ के एक माह के 60 हजार चूजे और चमोली जिले को 10 हजार चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हर आठ दिन बाद कई अलग जिले को 1500 चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। 10 सितंबर से यह चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे।

कुक्कट प्रक्षेत्र पशुलोक में सात जुलाई को हैदराबाद से एक दिन के रेनबो रोस्टर के 1800 चूजे आए हैं। डॉण्मनोज तिवारी ने बताया कि यह चूजे कुक्कट प्रक्षेत्र में पाले जाएंगे। रेनबो रोस्टर के 1600 मुर्गों की लॉट की नीलामी होनी है। ऐसे में यह चूजे उनके स्थान पर भरे जाएंगे। कुक्कट प्रक्षेत्र में 72 हफ्ते की आयु पूरी होने के बाद मुर्गों की नीलामी की जाती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाते में आयेंगे एक-एक हजार, जानिए किसे मिलेगी धनराशि

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा है कि रक्षाबंधन हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ त्यौहार है। हम प्रतिवर्ष इस त्यौहार को बड़ी खुशी के साथ व बड़ी आत्मीयता के साथ मनाते आ रहे हैं। इस दिन सभी को अपनी बहनों का इंतजार रहता है।
मुख्यमंत्री ने रक्षा बन्धन के अवसर पर प्रत्येक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री के खाते में एक-एक हजार रूपए की सम्मान राशि दिये जाने की घोषणा की। इससे लगभग 50 हजार आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री बहनें लाभान्वित होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज रक्षाबंधन के अवसर पर कोरोना कि कारण जब हम इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं, सामूहिक रूप से अपने त्यौहार नहीं मना पा रहे हैं। ऐसे में भी हमारी हजारों आगनबाड़ी बहने, आशा बहने फ्रंट लाइन में रह करके और कोरोना से बचने के लिए और बचाने के लिए अपने आप को जोखिम में डालकर इस काम को कर रही है। हमें सतर्क करने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी उन सभी बहनों के लिए बहुत ही शुभकामनाएं हैं, वो सब स्वंय भी स्वस्थ रहें तभी वे औरों के स्वास्थ्य का ख्याल रख सकती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निवास पर भी विगत वर्षों तक बड़ी संख्या में हमारी बहनें रक्षासूत्र बांधने आती थी और अपना आशीर्वाद व अपनी शुभकामनाएं मुझे प्रदान करती थी, परन्तु इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण परिस्थितियां बदली है। सैकड़ों बहनों की राखियां मुझे पहुंची है, निश्चित रूप से उनका आशीर्वाद राखियों के साथ मुझे प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मैं सभी बहनों का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं और इस अवसर पर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुविधा के लिये रक्षाबंधन के अवसर पर उन्हें उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा करने की सुविधा प्रदान की गई है। इसके साथ ही जो हमारी किशोरियां हैं उनके लिए हम बहुत जल्दी सेनेटरी नैपकिन योजना ला रहे हैं। आज हमारी सैकड़ों बहने बद्रीनाथ, केदारनाथ, जागेश्वर धाम, गर्जिया मन्दिर, चंडी देवी मंदिर और जो तमाम प्रसिद्ध मंदिर हैं वहां पर प्रसाद बनाकर अपनी आजीविका चला रही हैं। सरकार ने उन्हें मौका दिया है कि स्थानीय हमारे जो उत्पाद हैं उनसे हम प्रसाद तैयार करके और जो श्रद्धालु आते हैं वह उसे भगवान को उसका भोग चढ़ाएं। इसी तरह से हमने अपनी राज्य की महिलाओं के लिए और जो महिला समूह है उनके लिए 5 लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज के दे रहे हैं ताकि हमारी बहने अपने पैरों में खड़ी हो सके और छोटी-मोटी मदद के लिए उनको किसी की आवश्यकता ना पड़े। उन्होंने कहा कि आज जब हम महिलाओं के उत्थान की बात करते हैं, महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं तो बहुत जरूरी है कि हमारी बहनें शिक्षित हो, हमारी बेटियां शिक्षित हो और वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने इसी दिशा में सरकार यह प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब राज्य में हिम तेंदुए की गणना होगी

उत्तरकाशी वन प्रभाग क्षेत्र में हिम तेंदुए का संरक्षण केन्द्र बनाया जायेगा। यह संरक्षण केन्द्र भैरों घाटी के लंका नामक स्थान पर बनाया जायेगा। यह निर्देश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हिम तेंदुओं की गणना की जाय। हिम तेंदुओं के सरंक्षण एवं इनकी संख्या में वृद्धि के लिए विशेष प्रयास किये जाय। पिछले कुछ वर्षों में जिन क्षेत्रों में हिम तेंदुए देखे गये हैं। स्थानीय लोगों एवं सैन्य बलों के सहयोग वन विभाग द्वारा ऐसे क्षेत्र चिन्हित किये जाय। ऐसे क्षेत्रों में ग्रिड बनाकर इनकी गणना की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम तेंदुए एवं अन्य वन्य जीवों के संरक्षण से राज्य में विन्टर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों की अनेक प्रजातियां हैं, जो पर्यटकों के आर्कषण का केन्द्र बनती हैं। वन्य जीवों की लुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में प्रयासों की जरूरत है। आज वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लोग भी जागरूक हैं। उत्तराखण्ड के प्राकृतिक एवं नैसर्गिक सौन्दर्य में वन एवं वन्य जीवों का महत्वपूर्ण योगदान है।

बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ जनपद में हिम तेंदुए अधिक मात्रा में देखे गये हैं। अभी तक इनकी गणना नहीं की गई है। विभिन्न शोधों के आधार पर उत्तराखण्ड में अभी 86 हिम तेंदुए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस अवसर पर प्रो. एन. फिन्स्ट्रा ने हिम तेंदुए के संरक्षण केन्द्र पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया।