डीएम देहरादून को प्रतिमाह विकास कार्यों की रिब्यू बैठक करने के निर्देश

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक में डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, शासन, प्रशासन एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये विकास कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाय। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने अधिकारियों एवं इंजीनियरों को निर्देश दिये की फील्ड में जाकर कार्यों का निरीक्षण किया जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण हों।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सिटी पार्क के लिए लच्छीवाला क्षेत्र को विकसित किया जाय। मोटर मार्ग निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति की प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाय। उन्होंने कहा कि सम्बंधित विभागों द्वारा आपसी समन्वय से कार्य किया जाय। कार्यों में तीव्रता लाने के लिए मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत किया जाय। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी देहरादून को प्रतिमाह विकास कार्यों की रिब्यू बैठक करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत किये जाने वाले कार्यों में तेजी लाई जाय। दुधली क्षेत्र के अन्तर्गत शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए सर्वे किया जाए। सर्वे होने के बाद ही आगे की कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने घोषणाओं के तहत किये जा रहे कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री घोषणाओं के तहत अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुके हैं, अवशेष कार्यों को भी जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिये गये।
बैठक में जानकारी दी गई कि सूर्यधार झील का निर्माण कार्य अगस्त माह तक पूर्ण हो जायेगा। डोईवाला में सौंग ब्रिज के समीप श्मशान घाट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जल संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए जलाशयों के निर्माण किये जा रहे हैं। माजरी ग्रान्ट में नवग्रह वाटिका एवं हरित पट्टिका का निर्माण कार्य किया जा रहा है। बालावला एवं बांसवाड़ा में ऊर्ध्व जलाशय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मिस्सरवाला पेयजल योजना के सुदृढ़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। डोईवाला विधानसभा के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों में नलकूप निर्माण एवं हैण्डपम्पों की स्थापना के कार्य किये जा रहे हैं। लच्छीवाला में झील निर्माण, पार्किंग स्थल तथा मुख्य मार्ग से पिकनिक स्पॉट तक सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार डॉ. नरेन्द्र सिंह, आईटीसलाहकार रवीन्द्र दत्त, विशेष कार्याधिकारी धीरेन्द्र पंवार, जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी निकिता खण्डेलवाल, भाजपा के जिलाध्यक्ष देहरादून शमशेर सिंह पुण्डीर, डोईवाला विधानसभा से करन बोहरा, राजेन्द्र मनवाल, राजकुमार विनय कण्डवाल, अशोक राज पंवार एवं सबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में फ्लोटिंग टरबाइन से अवसर तलाशने को कहा

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य की नदियों एवं नहरों में फ्लोटिंग टरबाइन के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सोलर व विंड पावर की भांति ऊर्जा उत्पादन की यह विधि राज्य की नहरों एवं नदियों के अनुकूल होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में नदियों में इस प्रकार के फ्लोटिंग टरबाइन ऊर्जा उत्पादन के साथ ही खेतों की सिंचाई तथा पेयजल आपूर्ति में मददगार हो सके इसकी भी संभावनाएं तलाशी जाएं, इससे वर्षा जल पर आधारित खेतों की सिंचाई की निर्भरता कम होगी। उन्होंने इसके लिए स्थानीय लोगों को भी प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नदियों एवं नहरों का राज्य हित में तकनीकी के माध्यम से ऊर्जा एवं पर्यटन की दृष्टि से बेहतर उपयोग समय की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस दिशा में नदियों व नहरों की क्षमता के उपयोग लागत आदि का भी आधुनिक तकनीकी दक्षता के साथ आकलन करने को कहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर इस संबंध में प्रस्तुतीकरण भी प्रस्तुत किया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार नरेंद्र सिंह, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, राधिका झा, तीनों ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशकों के साथ ही अन्य संस्थानों के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से राज्य के लोगों को मिल रहा बड़ा फायदाः सीएम

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवम्बर माह तक बढ़ाए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना को 5 माह बढ़ाए जाने से देश के 80 करोड़ गरीबों को बड़ी राहत मिलेगी। आने वाला समय त्यौंहारों का है। प्रधानमंत्री जी की इस घोषणा से गरीब भाई-बहन, खुशी के साथ त्यौहार मना सकेंगे।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में अप्रैल-मई और जून माह में हर महीने 80 करोड़ गरीबों को प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं या 5 किलो चावल जबकि प्रति परिवार 1 किलो दाल प्रति माह निशुल्क उपलब्ध कराई गई। अब इस योजना को जुलाई से नवम्बर तक बढ़ाने से सरकार के इस संकल्प को बल मिलेगा कि कोई गरीब भूखा न सोए। योजना का 5 माह और विस्तार करने से 90 हजार करोड़ रूपए खर्च होंगे जबकि पहले के तीन माह भी जोड़ दिए जाएं तो इस योजना पर कुल खर्च 1 लाख 50 हजार करोड़ रूपए बैठता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से उत्तराखण्ड के लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। अब नवम्बर तक इस योजना को बढ़ाने से राज्य के इन परिवारों को राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी हम सभी के अभिभावक हैं। देश हित में उन्होंने हमेशा सही समय पर सही फैसले लिए। उनके फैसलों के केंद्र बिंदु में इस देश के गरीबों का कल्याण होता है। लॉकडाउन को लेकर उन्होंने सही समय पर साहसिक फैसला लिया जिसके फलस्वरूप लाखों लोगों की जान बची।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 130 करोड़ भारतीय अपने प्रधानमंत्री के साथ हैं। हम सभी को मिलजुलकर आगे बढ़ने का संकल्प लेना है। प्रधानमंत्री जी देशवासियों के हित में जो भी सम्भव है, कर रहे हैं। हमें भी अपने प्रधानमंत्री का साथ देना है। हमें केवल इतना करना है कि कोरोना को लेकर तमाम सावधानियां बरतनी हैं। मास्क का अनिवार्यता से प्रयोग करना है, दो गज की दूरी बनाए रखनी है और हाथों को नियमित रूप से धोना है। जब तक कोरोना की वेक्सीन तैयार नहीं होती तब तक यही इसकी दवा है। उन्होंने कहा कि अनलॉक-2 में राज्य में काफी सहूलियतें दी जा रही हैं, प्रदेशवासियों के लिये चारधाम यात्रा खोल दी गई है। होटल व्यवसाय को गति देने के लिये पर्यटक प्रदेश में आकर होटल में ठहर सकते हैं। इसके लिये उनका 48 घंटे पूर्व का कोरोना टेस्ट नेगेटिव होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के दृष्टिगत प्रदेश में सभी चीजों का आंकलन किया जा रहा है। इस महामारी के कारण सामाजिक आर्थिक एवं मानसिक दिक्कतें भी उत्पन्न हुई है। हम सबको इसका सतर्कता से सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में प्रदेश में कोरोना के मामलों में ठहराव व गिरावट आयी है। इस दिशा में हम सचेत हैं तथा राज्य में आने वालों की सतत रूप से चेकिंग की जा रही है तथा उनकी ट्रैवल हिस्ट्री देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस महामारी का सामना करने के लिये हमारे डाक्टर तथा फ्रंट लाइन वर्कर सजगता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए कृषि ही मददगारः सुबोध उनियाल

(एनएन सर्विस)
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 26 वीं बैठक में उत्तराखण्ड के उद्यान, कृषि एवं रेशम विकास विभाग मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं, परन्तु अभी भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि औषधीय खेती एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। कृषि उत्पादों का निर्यात भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नई नई फसलों को विकसित किए जाने की आवश्यकता है। इससे उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को इंश्योरेंस के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में छोटे छोटे किसानों की संख्या अधिक है। उनको ध्यान में रखते हुए योजनाओं को तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों में सिंचाई के दायरे को बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। नए अध्यादेशों एवं फसल बीमा योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को पहुंचे इसके प्रयास किए जाएं, ताकि हमारे किसान आत्मनिर्भर भारत बनाने में अपना योगदान दें सकें।
उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में कृषि महिला आधारित है, इसलिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वुमन फ्रेंडली खेती की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैविक कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए वनों के वेस्ट मटीरियल से खाद बनाने हेतु योजनाओं पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु सब्जी और फल फसलों में कीट नियंत्रण के लिए जैविक शोध कार्यक्रम चलाए जाने पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने राज्य के उत्पादों जैसे रेड राईस, राजमा, मंडुवा आदि की उन्नत किस्मों पर भी अनुसंधान किए जाने की आवश्यकता बताई।
कृषि मंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के साथ ही कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाले बीजों पर भी रिसर्च किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्तर्राष्ट्रीय बॉर्डर क्षेत्रों हेतु उचित जलवायु अनुसार फसलों पर अधिकाधिक शोध कराए जाएं ताकि सीमांत क्षेत्रों के किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़े। इससे पलायन भी रोका जा सकेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में नींबू वर्गीय फलों हेतु कल्मी पौध रोपण के लिए आईसीएआर एवं उद्यान विभाग उत्तराखण्ड द्वारा नींबू वर्गीय फलों के नेटवर्क परियोजना को लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने राज्य में आलू उत्पादन की अपार सम्भावनाओं के दृष्टिगत केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखण्ड राज्य में भी क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की भी मांग की।
इस अवसर पर सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम एवं अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

राज्य में संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा

(एनएन सर्विस)
कोरोना के मरीजों की संख्या भले ही बढ़ रही हो। लेकिन उत्तराखंड में इन मरीजों के ठीक होने की संख्या में दिन प्रतिदिन तेजी से सुधार हो रहा है। सोमवार को छह गुणा से अधिक 93 मरीज स्वस्थ होकर अस्पतालों से डिस्चार्ज हुए। रिकवरी दर लगातार अच्छा संकेत दे रही है। सोमवार को स्वस्थ हुए मरीजों का प्रतिशत 74.40 पहुंच गया। प्रदेश में अभी तक कोरोना के 2837 मामले आए हैं। जिनमें अब तक 2111 स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
हालांकि अभी भी राज्य के विभिन्न अस्पतालों व कोविड केयर सेंटरों में 664 मरीज भर्ती हैं। यह संख्या स्वस्थ हुए मरीजों से एक तिहाई से भी कम है। कोरोना पॉजिटिव 23 मरीज राज्य से बाहर जा चुके हैं, जबकि 39 की अब तक मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को 837 सैंपलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें 823 निगेटिव और चैदह मामले पॉजिटिव हैं। देहरादून में दस और लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें एम्स ऋषिकेश के तीन नर्सिंग ऑफिसर भी शामिल हैं। इसके अलावा ऋषिकेश के मंसादेवी, इंदिरा नगर, रेशम माजरी, मोतीचूर और मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व बिजनौर निवासी एक-एक व्यक्ति की भी रिपोर्ट पॉजिटिव है। इनमें छह एम्स की आइपीडी-ओपीडी में आए मरीज और एक मरीज का अटेंडेंट है।
उत्तराखंड में पिछले दो-तीन दिन से कम संख्या में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं संत्मित मरीजों के ठीक होने की रफ्तार भी लगातार बढ़ रही है। जितने मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, उसके तीन गुणा ठीक हो चुके हैं। प्रवासियों की आमद बढ़ने के साथ जो संक्रमण दर एकाएक बढ़ी थी उसमें भी गिरावट दिखने लगी है। मौत का बढ़ता आंकड़ा जरूर चिंता का सबब बन रहा है। बता दें, उत्तराखंड में कोरोना का पहला मामला पंद्रह मार्च को सामने आया था।

चारधामः उत्तराखंड के लोग अब एक जुलाई से कर सकेंगे दर्शन

(एनएन सर्विस)
प्रदेश सरकार ने केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में एक जुलाई से प्रदेश में रह रहे लोगों को दर्शन करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए ऑनलाइन पास की व्यवस्था रहेगी। यदि कोई व्यक्ति दूसरे राज्य से आया है तो उसे क्वारंटीन के सभी दिशानिर्देशों का पालन करने के बाद ही चारधाम में दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। चारों धामों में दर्शन के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही सैनिटाइजर रखने के साथ ही मास्क पहनना अनिवार्य होगा। 

एक रात ठहरने की मिली अनुमति
बोर्ड की ओर से जारी एसओपी के अनुसार दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु को धाम के विश्राम गृह में एक रात ही ठहरने की अनुमति होगी। आपातकालीन स्थिति, सड़क बाधित होने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में ही जिला प्रशासन की अनुमति से इसे बढ़ाया जा सकेगा। जिस लोगों के धाम क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला, ढांबे और अन्य परिसंपत्तियां हैं, वे मरम्मत कार्य के लिए प्रशासन की अनुमति से जा सकेंगे और एक दिन से ज्यादा ठहर सकेंगे। 

बुुजुर्ग और बच्चों के लिए नियम
कोरोना संक्रमण को देखते हुए चारधाम में 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और 10 साल से कम आयु के बच्चों को जाने की अनुमति नहीं होगी। 

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इसका रखना होगा ध्यान 
कोरोना संक्रमण को देखते हुए धामों के मंदिरों में बाहर से लाए गए प्रसाद और चढ़ावे पर रोक रहेगी। मूर्तियों को छूने पर भी प्रतिबंधित रहेगा। मंदिर में प्रवेश से पहले हाथ और पैर धोना अनिवार्य होगा। 

सचिवालय में विजिटर्स को मिली अनुमति
एक जुलाई से सचिवालय में आगंतुकों (विजिटर्स) को प्रवेश मिल सकेगा। पहले चरण में एक दिन में अधिकतम 50 लोगों को ही प्रवेश मिल पाएगा। निजी सचिवों की ऑनलाइन मंजूरी के बाद प्रवेश पत्र आगंतुकों को जारी किए जाएंगे। अपर मुुख्य सचिव (सचिवालय प्रशासन) राधा रतूड़ी ने इस संबंध में आदेश जारी किए। कोविड-19 महामारी की रोकथाम के चलते मई और जून में सचिवालय प्रशासन ने सचिवालय में आगंतुकों के प्रवेश को पहले सीमित किया था, उसके बाद उनके प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। यह रोक अनलॉक 1.0 में भी जारी रही, लेकिन अब अनलॉक 2.0 में प्रदेश सरकार के स्तर पर दी जा रही ढील के क्रम में सचिवालय प्रशासन ने भी सचिवालय में प्रवेश की व्यवस्था लचीली कर दी है।

वन भूमि हस्तांतरण के मामलों में समय के साथ तेजी लाने के निर्देश

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि बैठकों में लिए गए निर्णयों की अनुपालना समयबद्धता के साथ सुनिश्चित की जानी चाहिए। कार्यवाही केवल पत्राचार तक ही सीमित न रहे बल्कि इसका आउटपुट दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री, सचिवालय में उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड की 15 वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी बैठक का कार्यवृत्त उसी दिन बन जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएच 72-ए उत्तराखण्ड के लिए बहुत अधिक महत्व का है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, स्वीकृतियों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं में किसी प्रकार की देरी न हो। कार्बेट रिजर्व व राजाजी टाईगर रिजर्व में गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन का काम टाईमबाउंड तरीके से हो। राजाजी टाईगर रिजर्व के अंतर्गत चैरासी कुटिया का विकास इंटीग्रेटेड एप्रोच के आधार पर किया जाए। इसकी कार्ययोजना में वन्यजीवन, आध्यात्मिकता, संस्कृति सहित सभी पहलुओं का समावेश किया जाए। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में स्थित गरतांग गली ट्रेल के मार्ग का पुनरूद्धार, इसकी मौलिकता को परिरक्षित रखते हुए किया जाए। आरक्षित वन क्षेत्रों में टोंगिया ग्रामों को राजस्व ग्रामों का दर्जा देने और संरक्षित क्षेत्रों से ग्रामों के विस्थापन के बाद वन भूमि पर बसाये गए नए स्थलों के नवीनीकरण और डिनोटिफिकेशन का काम शीघ्र किया जाए।
बैठक में गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विभिन्न मार्गों के निर्माण के लिए प्रस्तावों को अनुमति के लिए राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को भेजे जाने पर सहमति दी गई। इसी प्रकार सौंग बांध परियोजना के निर्माण से संबंधित वन भूमि हस्तांतरण और जौलीग्रान्ट हवाई अड्डे के विस्तारीकरण के लिए वन भूमि हस्तांतरण के लिए अनुमति का प्रस्ताव भी राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को भेजा जाएगा।
बैठक में बताया गया कि कार्बेट टाईगर रिजर्व व राजाजी टाईगर रिजर्व में बाघों और जंगली हाथियों की धारण क्षमता का अध्ययन भारतीय वन्यजीव संस्थान से कराने के लिए प्रस्ताव प्राप्त हो गया है। इसी प्रकार गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन के लिए साईट सूटेबिलिटी रिपेर्ट मिल गई है। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के रैशनलाईजेशन के लिए संबंधित जिलाधिकारियों, प्रभागीय वनाधिकारियों और भारतीय वन्यजीव संस्थान के प्रतिनिधि की एक समिति का गठन कर लिया गया है।
बैठक में जानकारी दी गई कि 6 जून से 8 जून तक तीन दिन उत्तराखण्ड में हाथियों की गणना की गई। इसमें पाया गया कि राज्य में कुल 2026 हाथी हैं। वर्ष 2012 में 1559 जबकि 2017 में 1839 हाथी थे। इस प्रकार वर्ष 2017 से हाथियों की संख्या में 10.17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसी प्रकार 22 से 24 फरवरी 2020 में जलीय जीवों की गणना की गई। इसमें पाया गया कि राज्य में 451 मगरमच्छ, 77 घड़ियाल और 194 ऊदबिलाव हैं। बताया गया कि वर्ष 2020 से 2022 तक राज्य में स्नो-लैपर्ड की जनसंख्या का आंकलन भी किया जाएगा। राज्य के 23 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में स्नो-लैपर्ड हैं।
बैठक में वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत, विधायक धन सिंह नेगी, दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश राठौर, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, सचिव दिलीप जावलकर, सौजन्या, डीजीपी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार सहित बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने को एमएसएमई सेक्टर में किये गये बदलाव का लाभ उठाये उद्योग जगतः गडकरी

(एनएन सर्विस)
केन्द्रीय एमएसमई मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदयुरप्पा, मेघालय के मुख्यमंत्री के. संगमा, पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इन्द्र सिंगला ने संयुक्तरुप से ग्लोबल एलायन्स फाॅर मास एन्टरप्रिन्योरशिप की नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट का वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से विमोचन किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय एमएसमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोविड 19 के दृष्टिगत अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए हमें एमएसमई के क्षेत्र में तेजी से कार्य करने होंगे। एमसएमई ऐसा क्षेत्र है, जिसमें रोजगार सृजन के साथ ही अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रगति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है कि हम किन क्षेत्रों में अपनी स्ट्रेन्थ को और मजबूत कर सकते हैं। राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उनमें कुछ विशिष्टताएं हैं। एग्रो एमएमई, हेण्डलूम, हेन्डीक्राफ्ट के क्षेत्र में अनेक राज्यों में कार्यों की प्रबल संभावनाएं हैं।
केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एमएसमई क्षेत्र में अनेक कार्य किये जा सकते हैं, हमें उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ ही राज्यों में औद्योगिक स्थापना के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण की ओर ध्यान देने की जरूरत है। कोविड 19 के दृष्टिगत पीपीई किट, सेनिटाईजर एवं अन्य उपयोगी उत्पादों को एमएसमई के माध्यम से बढ़ावा दिया जा सकता है। लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम क्षेत्र के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों तक इन गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था विशेषकर उत्तराखण्ड जैसे राज्यों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और आर्थिक विकास के लिए के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। कोविड-19 से पूरा विश्व प्रभावित हुआ है। व्यापार करने और काम करने के तरीकों में बदलाव आया है। लाॅकडाउन में प्रभावित उद्योगों को पुनः संचालित करने के लिए आत्मनिर्भर पैकेज में एमएसएमई सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया गया है। एमएसएमई ही ऐसा क्षेत्र है जहां रोजगार के अवसर बड़े पैमाने पर सृजित किए जा सकते हैं और अर्थव्यवस्था में तेजी लाई जा सकती है।
आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत एमएसएमई के लिए लागू इमरजेंसी क्रेडिट लाईन गारंटी स्कीम का लाभ पात्र इकाईयों को पहुंचाने के लिए राज्य सरकार एसएलबीसी, बैंकों और औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इस योजना में उत्तराखण्ड राज्य में 34671 पात्र खातों में 1835 करोड़ रूपए की स्वीकृति और 1067 करोड़ का वितरण यिका जा चुका है। इस योजना के क्रियान्वयन में उत्तराखण्ड राज्य की परफोरमेंस सर्वश्रेष्ठ राज्यों में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए लगातार सुधार कर रहे हैं। ईज आॅफ डूईंग बिजनेस के लिए सतत क्रियाशील हैं। सिंगल विंडो सिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य देश में लगातार अच्छी उपलब्धि अर्जित कर रहा है। कोविड-19 की परिस्थितियों में युवाओं और बाहर से घर लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। इस योजना में विनिर्माण और सेवा के साथ ही व्यवसाय और एलाईड एग्रो गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। जिला स्तर पर भी जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं अनुश्रवण समिति गठित की गई हैं। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में उद्यमियों को उद्यम स्थापना के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं में सहयोग, तकनीकी ज्ञान आधारित उद्यमों की स्थापना और स्थानीय स्तर पर स्केलेबल बिजनेस माॅडल चिह्नित करने, मूल्य संवर्द्धन, पैकेजिंग और विपणन में सहयोग के लिए 2 रूरल बिजनेस इन्क्यृबेटर स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल एलायन्स फाॅर मास एन्टरप्रिन्योरशिप के उत्तराखण्ड में उद्यमिता विकास के लिए ईको सिस्टम विकसित करने के लिए दिए गए प्रस्ताव पर सहमति देते हुए कहा कि राज्य में निवेश के प्रोत्साहन के लिए सुनियोजित तरीके से काम किया जा रहा है। मेडिकल डिवाईसेस पार्क, फार्मा सिटी, अरोमा पार्क आदि के लिए सिडकुल के माध्यम से काम किया जा रहा है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट, निदेशक उद्योग सुधीर चन्द्र नौटियाल आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की समीक्षा की, लोगों को दी कई राहते, आप भी जानें

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को सचिवालय में कोविड-19 एवं डेंगू के रोकथाम एवं बचाव के लिए सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाय। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। जिन जनपदों में पिछले वर्षों में डेंगू का फैलाव कम रहा, उन जनपदों में हम इसे पूरी तरह कैसे नियंत्रित कर सकते हैं, इसके लिए ठोस रणनीति बनायी जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि अस्पतालों में प्लेटलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता हो। नगर निकायों द्वारा समय-समय पर फोगिंग की जाए। डेंगू से बचाव में रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार हो इसके लिए डाॅक्टर समय-समय पर मीडिया से समन्वय स्थापित करे। शहरी क्षेत्रों में डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता एवं जल निकासी पर विशेष ध्यान दिया जाय। प्रत्येक जनपद में सप्ताह में एक दिन व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाय।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वर्षाकाल को दृष्टिगत रखते हुए पेयजल व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया जाय। पर्वतीय जनपदों में वर्षाकाल में पेयजल लाईनें क्षतिग्रस्त होने से व दूषित जल से बीमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए जन प्रतिनिधियों से निरन्तर संवाद बनाये रखें। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू की रोकथाम एवं जनजागरूकता के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के प्रभावी नियंत्रण के लिए सर्विलांस सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जाय। जो लोग होम क्वारंटीन एवं होम आईसोलेशन है उनकी लगातार निगरानी की जाय। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाय। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी जनपदों में दुकानों को शाम 8 बजे तक खोलने की अनुमति दी जाय। देहरादून में अगले सप्ताह से शनिवार और रविवार को भी मार्केट को खोलने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लोगों को सुबह 5 बजे से माॅर्निंग वाॅक की अनुमति दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना पाॅजिटव की रिकवरी रेट में तेजी से सुधार हुआ है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता एवं सुरक्षात्मक दृष्टि से कार्य करने को कहा। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब 1700 से अधिक टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। सोमवार से मुक्तेश्वर में भी कोरोना की टेस्टिंग शुरू हो जायेगी। यहां पर प्रतिदिन 100 टेस्ट होंगे।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, सचिव शैलेष बगोली, सौजन्या, एस.ए. मुरूगेशन, पंकज पाण्डेय, डीजी स्वास्थ्य श्रीमती अमिता उप्रेती आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री आवास में रोजगार के क्षेत्र में किये जा उद्यानिकी विभाग के ट्रायल हो रहे सफल

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री आवास में उद्यान विभाग के द्वारा राज्य के उद्यानिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में कई प्रकार के ट्रायल किये जा रहे है। जिनसे युवा इन क्षेत्रों को रोजगार के रुप में अपनाये। इसी क्रम में मुख्यमंत्री आवास परिसर में उद्यान विभाग द्वारा एक पेड पर आम की 42 प्रजातियों की ग्राफ्टिंग की गयी। अरूनिमा, अरूनिका, अम्लिका, सूर्या, लालिमा, मल्लिका, निलय, आम्रपाली इत्यादि को मिलाकर कुल 42 प्रजातियों की ग्राफ्टिंग एक पेड पर की गयी।
मुख्य उद्यान अधिकारी देहरादून डाॅ0 मीनाक्षी जोशी द्वारा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को इन प्रजातियों के बारे में विस्तृत से जानकारी दी गयी। वहीं, आवास परिसर में मौनपालन से इस वर्ष 22 कि0ग्रा0 शहद का उत्पादन हुआ। जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा पुनः मौनपालन को बढ़ावा देने हेतु योजना बनाने हेतु निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री द्वारा उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित को आवास परिसर में औद्यानिकी की अन्य गतिविधियां भी शुरू करने हेतु निर्देशित किया गया। पुरोहित द्वारा बताया कि आवास परिसर में अगले वर्ष तक अनुमानित आम की 200 से भी अधिक प्रजातियाँ लगायी जायेंगी।