कैंचीधाम जाम से मिलेगी स्थायी राहत, प्राथमिकता पर हो रहा बाईपास का निर्माण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी प्रशासनिक निर्णयों के परिणामस्वरूप नैनीताल जनपद की बहुप्रतीक्षित कैंचीधाम बाईपास (सैनिटोरियम–रातीघाट) परियोजना तेजी से अपने निर्णायक चरण की ओर अग्रसर है। आज मुख्यमंत्री ने नैनीताल भ्रमण के दौरान इस महत्वपूर्ण परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी यात्रा एवं पर्यटन सीजन से पूर्व बाईपास मार्ग को पूर्ण कर यातायात के लिए खोलना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध श्री कैंचीधाम मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन होता है। श्रद्धालुओं को सुचारु, सुरक्षित और सुविधाजनक यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कैंचीधाम बाईपास का निर्माण तेज़ी से कराया जा रहा है, जिससे वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान संभव होगा।

लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मनोहर सिंह धर्मशक्तू ने अवगत कराया कि 18.15 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित बाईपास मार्ग में से 8 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य पूर्ण कर हॉटमिक्स किया जा चुका है, जिसके लिए 12 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रभावी उपयोग किया गया है। शेष 10.15 किलोमीटर मार्ग में पहाड़ कटिंग कार्य हेतु प्राप्त 5 करोड़ 6 लाख रुपये की धनराशि से कार्य पूर्ण किया जा चुका है। वर्तमान में इस खंड में 9 करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से कलमठ निर्माण, सुरक्षा दीवारों का निर्माण एवं अन्य आवश्यक कार्य तेजी और गुणवत्ता के साथ प्रगति पर हैं।

परियोजना के अंतर्गत बाईपास को रातीघाट स्थित अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने हेतु 74.15 मीटर स्पान का मोटर पुल भी निर्मित किया जा रहा है। इसके लिए शासन से 9 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और पुल निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बाईपास के पूर्ण होने से न केवल कैंचीधाम में लगने वाले जाम से निजात मिलेगी, बल्कि पहाड़ी जनपदों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी एक वैकल्पिक, सुगम और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होगा। यह परियोजना पर्यटन, धार्मिक यात्रा और स्थानीय आवागमन—तीनों के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री धामी ने 9 करोड़ 99 लाख रुपये की लागत से निर्मित सैनिटोरियम से अल्मोड़ा मार्ग तक भवाली बाईपास सड़क एवं इसी मार्ग पर शिप्रा नदी पर निर्मित 30 मीटर स्पान के डबल लेन मोटर पुल का भी निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बाईपास के चालू होने से भवाली बाजार में वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान होगा और पर्यटन सीजन में यात्रियों को निर्बाध आवागमन सुविधा मिलेगी।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की तथा उनके कल्याण और सुरक्षा के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने बर्फबारी देखने पहुंचे देश के विभिन्न राज्यों से आए पर्यटकों से भी बातचीत की। पर्यटकों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, बेहतर व्यवस्थाओं और सुरक्षित वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें यहां किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई है और वे भविष्य में भी यहां आते रहेंगे।

रेन बसेरा में रहने वाले लोगों का हाल जान डीएम ने नगर निगम को सफाई व्यवस्था के निर्देश दिए

राजधानी देहरादून में लगातार हो रही बारिश एवं बढ़ती ठंड को दृष्टिगत रखते हुए शीतलहरी में रात्रि में जिलाधिकारी सविन बसंल शहर के चौक चौराहों पर पंहुच अलाव व्यवस्था देखी तथा इस दौरान उन्होंने रेनबसेरों में रहने वालों का हाल जाना तथा नगर निगम एवं तहसील प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने देहरादून में देर सांय चौक चौराहों पर अलाव व्यवस्था का औचक निरीक्षण करते हुए रैन बसेरों में रह रहे असहाय एवं जरूरतमंद लोगों का हाल चाल जाना।

जिलाधिकारी ने रैन बसेरा का निरीक्षण कर वहां ठहरे लोगों से बातचीत की तथा उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने नगर निगम एवं तहसील प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ठंड के मौसम में कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति असुविधा का शिकार न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सभी चौक चौराहो पर अलावा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए इसकी दैनिक सूचना उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा असहाय, निराश्रित एवं बेघर लोगों की सहायता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ठंड एवं बारिश के दौरान रैन बसेरों में रह रहे लोगों को पर्याप्त कंबल, भोजन एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि रैन बसेरों की नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं तत्काल की जाएं, जिससे किसी भी व्यक्ति को ठंड से प्रभावित न होना पड़े। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरी, डीडीएमओ ऋषभ कुमार मौजूद रहे।

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता बनी तकनीकी उत्कृटता का मॉडल

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की सेवाएं, अंग्रेजी के अलावा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं। साथ ही आवेदक एआई की सहायता से भी यूसीसी की प्रक्रिया को समझने के साथ ही अपना पंजीकरण करवा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि, यूसीसी के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा जाए, साथ ही वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली रखा जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति स्वयं ही अपना पंजीकरण करवा सके। इसी क्रम में आईटीडीए ने यूसीसी की वेबसाइट को आठवीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं — असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी के साथ अंग्रेजी में तैयार किया है। इस तरह आवेदक अपनी भाषा के अनुसार ना सिर्फ यूसीसी के नियम, प्रक्रिया और पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ले सकता है, बल्कि अपनी भाषा में ही आवेदन भी कर सकता है। इस काम में एआई की भी मदद ली जा सकती है।

*हमारी सरकार पहले ही दिन से सरलीकरण से समाधान तक के मूलमंत्र लेकर चल रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनसामान्य को पंजीकरण में किसी तरह की मुश्किल न आए। यूसीसी तकनीकी उत्कृटता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यही कारण है कि बीते एक साल में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत नहीं आई है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गीता भवन में कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का किया विमोचन

ऋषिकेश, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज दो दिनी उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे हुए हैं। उन्होंने आज स्वर्गाश्रम के गीताभवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध कल्याण पत्रिका के शताब्दी महोत्सव में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन भी किया।

गीताभवन में गीताप्रेस गोरखपुर की प्रसिद्ध कल्याण पत्रिका के शताब्दी महोत्सव में पहुंचे। हेलीपैड पर उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद शाह गीताभवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन किया। अब तक कल्याण पत्रिका की 17 करोड़ पचास लाख प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोग्य अंक का भी विमोचन किया गया। आरोग्य अंक की दो लाख 22 हजार प्रतियां छप चुकी हो चुकी हैं। गीता भवन में करीब दो घंटे रहने के बाद गृह मंत्री हरिद्वार में प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए थे। गृह मंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। रूट भी डायवर्ट किया गया है।

गीता भवन में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी भाग लिया। सीएम धामी ने कहा कि गीता प्रेस पिछले सौ वर्षों से हमारी सनातन संस्कृति, धर्मग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में अतुलनीय योगदान देती आ रही है। कहा कि प्राचीन भारत में जब विदेशी शक्तियां वैचारिक भ्रम उत्पन्न कर रही थी, समाज को दिग्भ्रमित करने का काम कर रही थी, तब गीता प्रेस परिवार ने श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस, उपनिषदों, पुराणों आदि का हमारे महान सनातनी ग्रंथों का जो सूक्ष्म मूल्य में शुद्ध और प्रमाणिक प्रकाशन कर भारतीय जनमानस को जागृत करने का ऐतिहासिक काम है।

नजरिया: सीएम धामी के नेतृत्व में एक ही दिन में 7,876 नागरिकों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और परिणामोन्मुख नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, त्वरित सेवा-प्रदान और जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी मॉडल बनकर सामने आया है। यह कार्यक्रम सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर शासन को वास्तव में जन-केन्द्रित बना रहा है।

आज 20 जनवरी 2026 तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 408 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। केवल आज के दिन 13 नए शिविरों का आयोजन कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया। इन शिविरों में अब तक 3,30,461 नागरिकों ने प्रतिभाग किया है, जिनमें आज 7,876 नागरिकों की सीधी भागीदारी रही। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल को जनता का व्यापक विश्वास और समर्थन प्राप्त हो रहा है।

शिविरों के माध्यम से अब तक 33,529 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,675 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। केवल आज के दिन ही 783 नए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए और 502 मामलों का समाधान मौके पर अथवा संबंधित विभागों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया। यह त्वरित निस्तारण सरकार की प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का प्रमाण है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए कुल 43,975 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें आज 659 नए आवेदन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,79,169 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया जा चुका है, जिनमें आज 3,911 नए लाभार्थी जुड़े। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर वास्तव में जनता के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।

जनपदवार आंकड़े बताते हैं कि देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल सहित सभी पर्वतीय और मैदानी जिलों में इस अभियान को समान उत्साह के साथ अपनाया गया है। शिविरों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति इस बात को सिद्ध करती है कि सरकार की यह पहल जनता की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही और संवेदनशीलता का प्रतीक है। उनका मानना है कि जब सरकार स्वयं जनता के पास जाकर उनकी समस्याएं सुनती है और समाधान करती है, तो शासन के प्रति विश्वास स्वतः मजबूत होता है।

उत्तराखंड सरकार का यह अभियान राज्य में सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को स्थापित कर रहा है, जहां संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आने वाले समय में भी और अधिक व्यापक रूप में जारी रहेगा तथा उत्तराखंड को जनकल्याण और सुशासन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

अपनी मां से मांगो माफी, वरना होगा जिला बदरः डीएम

देहरादून। बेटों द्वारा प्रताड़ित विधवा ने जिन बेटों को जन्म दिया, वही मां जब अपने बेटों के हाथों पिटने लगे और हर रात जान का डर सताने लगे तब जिला प्रशासन उसके लिए ढाल बनकर खड़ा हुआ। बंजारावाला क्षेत्र की एक लाचार विधवा मां विजय लक्ष्मी पंवार ने हिम्मत जुटाकर प्रशासन से गुहार लगाई कि उसके ही बेटे नशे में उसे पीटतें है, पैसे मांगते है और जान से मारने की धमकी देते है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने गोपनीय जांच कराई। पड़ोसियों और जनप्रतिनिधियों की बातों ने उस मां के दर्द की पुष्टि की। प्रशासन ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की तो बेटों को पहली बार अपनी मॉ के प्रति जिम्मेदारी एवं कर्तव्यों का एहसास हुआ।

न्यायालय में दोनों बेटों ने मां से माफी मांगी, नशा छोड़ने और हिंसा न करने का शपथ पत्र दिया। कानून का डर और मां की चुप पीड़ा दोनों ने मिलकर बेटे को झकझोर दिया। विधवा मां के साथ मारपीट व जान से मारने की धमकी के मामले में जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई से दोंनो पुत्रों को अपने कर्तव्यों का बोध हुआ। गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत वाद दर्ज होने के बाद दोनों बेटों ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर नशा छोड़ने और मां के साथ दुर्व्यवहार न करने का वचन दिया। जिला प्रशासन की चेतावनी और कानूनी शिकंजे के बाद दोंनो बेटों के व्यवहार में सुधार को देखते हुए न्यायालय ने आगे की कार्रवाई समाप्त की।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि महिलाओं, विधवाओं व निर्बल वर्ग के उत्पीड़न पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है और भविष्य में पुनरावृत्ति होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अवैध निर्माण व प्लॉटिंग पर एमडीडीए का शिकंजा, कई स्थानों पर सीलिंग व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत हो रहे अवैध निर्माणों एवं अनधिकृत प्लॉटिंग के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में आज विभिन्न क्षेत्रों में चिन्हित अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें सील एवं ध्वस्त किया गया। एमडीडीए की टीम द्वारा कुलदीप द्वारा पैसिफिक गोल्फ, कुल्हान, सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों के क्रम में सहायक अभियंता शैलेन्द्र सिंह रावत, अवर अभियंता विदिता कुमारी, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल की उपस्थिति में सम्पन्न की गई।

इसके अतिरिक्त भावेश जोशी एवं अन्य द्वारा वीरभद्र रोड, वीरभद्र शिव मंदिर के समीप, ऋषिकेश क्षेत्र में किए गए अवैध आवासीय भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उक्त कार्रवाई सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता पूनम सकलानी तथा पुलिस बल की मौजूदगी में संपन्न हुई।

वहीं मकबूल इरफान, अरविंद मनोडी एवं अन्य द्वारा आरकेडिया ग्रांट, देहरादून क्षेत्र में की जा रही 16 बिघा अवैध प्लॉटिंग पर भी कड़ी कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण किया गया। इस दौरान सहायक अभियंता विजय सिंह रावत, अवर अभियंता अभिजीत सिंह थलवाल एवं सुपरवाइजर मौके पर उपस्थित रहे।

एमडीडीए द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृति एवं नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार का निर्माण अथवा प्लॉटिंग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के विरुद्ध सघन अभियान निरंतर जारी रहेगा।

*उपाध्यक्ष, एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान*
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण क्षेत्र में नियोजित और संतुलित विकास सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अवैध निर्माण एवं अनधिकृत प्लॉटिंग न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि इससे शहर की आधारभूत संरचना, पर्यावरण और जनसुविधाओं पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर चेतावनी दिए जाने के बावजूद यदि कोई नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आम नागरिकों से अपील है कि किसी भी निर्माण कार्य को प्रारंभ करने से पूर्व एमडीडीए से मानचित्र स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। एमडीडीए पारदर्शी, सुरक्षित और सुनियोजित शहरी विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

*सचिव, एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान*
प्राधिकरण द्वारा की जा रही सभी कार्रवाई पूर्णतः नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। अवैध निर्माणों को पहले चिन्हित कर संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए जाते हैं, इसके उपरांत आवश्यक होने पर सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है। एमडीडीए का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि नियोजित विकास को प्रोत्साहित करना है। सभी नागरिकों से अपेक्षा है कि वे प्राधिकरण के नियमों का पालन करें और सहयोग प्रदान करें, ताकि शहर का सुव्यवस्थित और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

यूसीसी का एक साल: ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए, आगामी 27 जनवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समता कायम करने के साथ ही यूसीसी का एक महत्वपूर्ण योगदान प्रक्रियाओं के सरलीकरण के रूप में रहा है। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के एक साल से कम समय में 4,74,447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है। अब पति – पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन तरीके से विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं। पहले उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।
समान नागरिक संहिता लागू होने से पहले, ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत, विवाह पंजीकृत किए जाते थे। यह पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी, इसलिए पति- पत्नी को दो गवाहों के साथ विवाह पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। लेकिन यूसीसी के लगभग शत प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं। जिसमें दंपत्ति या गवाह कहीं से भी, अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज करा, पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के बाद एक साल से कम समय में सोमवार, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक 4,74,447 विवाह पंजीकरण सम्पन्न हो चुके हैं। इस तरह प्रतिदिन औसत पंजीकरण की संख्या 1400 के करीब पहुंच रही है, जबकि पिछले अधिनियम में विवाह पंजीकरण का औसत प्रतिदिन 67 का आता था। यही नहीं इस दौरान, 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद करने और 68 ने लिवइन रिलेशनशिप में जाने जबकि 02 ने लिवइन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है।
औसत पांच दिन पंजीकरण
यूसीसी तहत यूं तो आवेदन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन आवेदन करने के बाद औसत पांच दिन के भीतर ही पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो रहा है। जबकि पुराने अधिनियम में एक तो आवेदकों को भौतिक तौर पर पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था, उस पर विवाह पंजीकरण के लिए समय सीमा भी तय नहीं थी।

*उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करते हुए, अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। बीते एक साल में जितनी पारदर्शी और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैँ। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।*

*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

हजारों नौनिहालों की जीवन सुरक्षा सर्वाेपरि, लंबे समय से जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों पर डीएम सख्त

जनपद में वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े विद्यालय भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने पहली बार ठोस एवं निर्णायक कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सविन बसंल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश है कि नौनिहालों के जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में जर्जर एवं निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों की पहचान, आकलन और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।
जिलाधिकारी की सख्ती के बाद महज 10 दिनों के भीतर 100 विद्यालयों के जर्जर भवनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट में देरी को लेकर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूलों की सूची पूर्ण रिपोर्ट के साथ जिला प्रशासन को सौंप दी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को निष्प्रोज्य एवं आंशिक निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों के आंगणन (एस्टिमेट) तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि ध्वस्तीकरण एवं आवश्यक सुरक्षा उपायों में कोई विलंब न हो। जनपद में कुल 79 विद्यालयों के सम्पूर्ण भवन निष्प्रोज्य पाए गए हैं, इनमें 13 माध्यमिक एवं 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। 63 विद्यालयों में शिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर दी गई है। 16 विद्यालय ऐसे हैं, जहाँ अभी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है। इनके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। 17 विद्यालय आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं। 8 विद्यालय ऐसे हैं, जहाँ ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं पाई गई है। जिलाधिकारी ने पूर्णतः निष्प्रोज्य विद्यालयों में तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी। जिन विद्यालयों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था नहीं है, वहाँ पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर उसके बाद ध्वस्तीकरण किया जाएगा। आंशिक निष्प्रोज्य भवनों में सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक मरम्मत/प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसी भी विद्यालय में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण संचालित नहीं होगा। प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी States’ Startup Ecosystem Ranking (5वां संस्करण) में उत्तराखण्ड को मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने में ‘लीडर’ के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार के उद्योग विभाग को Certificate of Appreciation प्रदान किया गया।
इस सम्मान से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड में स्टार्टअप नीति के जरिए नवाचार, उद्यमिता, निवेश प्रोत्साहन और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में कामयाब रहा है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। उत्तराखंड की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के तौर पर भी देखा जा रहा है।
—————-
*यह सम्मान उत्तराखण्ड के लिए गर्व का विषय है। हमारी सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतियां, सरल प्रक्रियाएं और मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया है। राज्य के युवाओं में नवाचार की अद्भुत क्षमता है और सरकार हर स्तर पर उन्हें सहयोग प्रदान कर रही है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी उद्यमियों, स्टार्टअप्स और अधिकारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*