नैनीताल हाईकोर्ट में दायर परमार्थ निकेतन मामले में याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका

परमार्थ निकेतन के समीप निर्माण कार्य के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका को याचिकाकर्ता ने वापस ले लिया है। याचिकाकर्ता के अनुसार म्यूटेशन संबंधी पत्रावलियां जुटाने के बाद पुनः याचिका दायर करेंगे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि चिदानंद मुनि की ओर से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीन पर अतिक्रमण कर भारी निर्माण कर दिया गया है। याचिका में कहा कि 2.39 एकड़ सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है।

पिछले दिनों कोर्ट ने अतिक्रमण मामले में नोटिस देने व 15 दिन में उसका निस्तारण करने के निर्देश दिए थे। अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने बताया कि म्यूटेशन संबंधी कागजात जुटाने के बाद फिर से याचिका दायर की जाएगी। फिलहाल उन्होंने इस संबंध में दायर याचिका को वापस ले लिया है।

रिटायरमेंट के बाद भी पूर्व फौजी युवाओं को कर रहे देश सेवा के लिए प्रेरित

कहते हैं कि, फौंजी कभी रिटायर नहीं होता है, चाहे वो ऑन ड्यूटी हो या ऑफ ड्यूटी। उत्तराखंड में ऐसे कई पूर्व फौंजी हैं जो रिटायरमेंट के बाद समाज की तस्वीर बदलने में जुटे पड़े हैं और इनकी मेहनत के अच्छे नतीजे भी सामने आने लगे हैं। इन्हीं में से हैं बागेश्वर जिले के रूनीखेत निवासी पूर्व कैप्टन नारायण सिंह उन्यूड़ी। जिनकी तीन साल की मेहनत से 17 युवा फौंज में भर्ती हो चुके हैं। कैप्टन के कदम अभी थमे नहीं हैं उनका मुकाम नशे की गिरफत से युवाओं को मुक्त करा उन्हें देश सेवा से जोड़ना है।

उत्तराखंड के लोगों में देशसेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। पहाड़ के हर घर में फौजी हैं, और ये फौजी रिटायरमेंट के बाद भी देशकृसमाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते आ रहे हैं। वर्ष 2017 में 12 कुमाउं में तैनात सुबेदार मेजर नारायण सिंह को रिटायर के वक्त सेना ने ऑनरी कैप्टन की उपाधी से नवाजा। घर आने पर उन्होंने देखा कि गांव के ज्यादातर युवाकृबुजुर्ग नशे की गिरफ्त में हैं। इस पर उन्हें बहुत पीड़ा पहुंची तो उन्होंने युवाओं को देश सेवा का जज्बा भरने के लिए गांव के ही एक युवक को लेकर ग्राम पंचायत खोली के तोक घाटबगड़ रुनीखेत मैदान में निरूशुल्क ट्रैनिंग देनी शुरू कर दी। उनके जज्बे को देख कुछ ही महीनों में हल्द्वानी, सोमेश्वर, चौंरा, कपकोट, दफौट के दूरस्थ क्षेत्रों से युवा उनके पास ट्रैनिंग के लिए आने शुरू हो गए। ट्रैनिंग में जरूरत के सामानों के लिए कैप्टन की मदद के लिए कुछेक लोगों ने मदद की तो मैदान में बारिश से बचने के लिए जिला पंचायत उपाध्यक्ष नवीन परिहार ने भी अपने खर्चे पर डेढ़ लाख रुपये से वहां एक व्यायामशाला बना दी।

भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए जो मानक बने हैं उन सारे मानकों की वो निरूशुल्क ट्रैनिंग दे रहे हैं। सुबह पांच से सात बजे तक फिजिकल ट्रैनिंग के सांथ ही रिटर्न टैस्ट की भी ट्रैनिंग युवाओं को दी जा रही है। इसके सांथ ही हर रविवार को युवाओं की फिजिकल प्रोग्रस को आंका जाता है। विगत तीन सालों में उनसे ट्रैनिंग लिए 17 युवा स्पेशल फोर्स, लद्वाख स्कॉट, पैरा कंमाडो सहित अन्य बटालियनों में भर्ती हो चुके हैं।

इस मुहिम में कैप्टन नारायण सिंह अकेले नहीं हैं। उनके साथ प्रिंसिपल चंदन सिंह परिहार भी जुड़ गए हैं, जो कि ट्रैनिंग ले रहे युवाओं का लेखाकृजोखा रखने में मदद करते हैं। रूनीखेत मे चल रहे कैंप मे इस वक्त चालीस युवा निशुल्क ट्रेनिंग ले रहे हैं।

आज के वक्त में जब ज्यादातरों ने अपने हुनर को बिजनस बना लिया है वहीं कैप्टन नारायण सिंह रिटायर होने के बाद भी निस्वार्थ हो अपना कीमती वक्त युवा पीड़ी में देश सेवा का जज्बा भरने में जुटे पड़े हैं। देश सेवा के उनके जुनुन को युवा पीड़ी भी समझ उनके कदम से कदम मिला अपने भविष्य को संवारने में लगी है।

कड़कनाथ के चूजों का एक माह में होगा वितरण, जिला योजना के बजट से खरीदे जाएंगे चूजे

कोविड-19 में उत्तराखंड लौटै प्रवासी युवाओं को गांव में रोकने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़े रखने के लिए जिला योजना के बजट से सरकार ने पहल की है। सरकार इस बजट से पौड़ी गढ़वाल और चमोली जिले में पशुलोक ऋषिकेश से 70 हजार कड़कनाथ मुर्गी के चूजे भेजने जा रही है। 10 सितंबर से यह चूजे पशुपालन विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे।

पहली बार जिला योजना के बजट से पशुपालन विभाग मुर्गी के चूजे खरीद रहा है। पशुलोक ऋषिकेश स्थित कुक्कट प्रक्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डा. मनोज तिवारी ने बताया कि पौड़ी जिले को कड़कनाथ के एक माह के 60 हजार चूजे और चमोली जिले को 10 हजार चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हर आठ दिन बाद कई अलग जिले को 1500 चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। 10 सितंबर से यह चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे।

कुक्कट प्रक्षेत्र पशुलोक में सात जुलाई को हैदराबाद से एक दिन के रेनबो रोस्टर के 1800 चूजे आए हैं। डॉण्मनोज तिवारी ने बताया कि यह चूजे कुक्कट प्रक्षेत्र में पाले जाएंगे। रेनबो रोस्टर के 1600 मुर्गों की लॉट की नीलामी होनी है। ऐसे में यह चूजे उनके स्थान पर भरे जाएंगे। कुक्कट प्रक्षेत्र में 72 हफ्ते की आयु पूरी होने के बाद मुर्गों की नीलामी की जाती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाते में आयेंगे एक-एक हजार, जानिए किसे मिलेगी धनराशि

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा है कि रक्षाबंधन हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ त्यौहार है। हम प्रतिवर्ष इस त्यौहार को बड़ी खुशी के साथ व बड़ी आत्मीयता के साथ मनाते आ रहे हैं। इस दिन सभी को अपनी बहनों का इंतजार रहता है।
मुख्यमंत्री ने रक्षा बन्धन के अवसर पर प्रत्येक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री के खाते में एक-एक हजार रूपए की सम्मान राशि दिये जाने की घोषणा की। इससे लगभग 50 हजार आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री बहनें लाभान्वित होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज रक्षाबंधन के अवसर पर कोरोना कि कारण जब हम इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं, सामूहिक रूप से अपने त्यौहार नहीं मना पा रहे हैं। ऐसे में भी हमारी हजारों आगनबाड़ी बहने, आशा बहने फ्रंट लाइन में रह करके और कोरोना से बचने के लिए और बचाने के लिए अपने आप को जोखिम में डालकर इस काम को कर रही है। हमें सतर्क करने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी उन सभी बहनों के लिए बहुत ही शुभकामनाएं हैं, वो सब स्वंय भी स्वस्थ रहें तभी वे औरों के स्वास्थ्य का ख्याल रख सकती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निवास पर भी विगत वर्षों तक बड़ी संख्या में हमारी बहनें रक्षासूत्र बांधने आती थी और अपना आशीर्वाद व अपनी शुभकामनाएं मुझे प्रदान करती थी, परन्तु इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण परिस्थितियां बदली है। सैकड़ों बहनों की राखियां मुझे पहुंची है, निश्चित रूप से उनका आशीर्वाद राखियों के साथ मुझे प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मैं सभी बहनों का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं और इस अवसर पर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुविधा के लिये रक्षाबंधन के अवसर पर उन्हें उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा करने की सुविधा प्रदान की गई है। इसके साथ ही जो हमारी किशोरियां हैं उनके लिए हम बहुत जल्दी सेनेटरी नैपकिन योजना ला रहे हैं। आज हमारी सैकड़ों बहने बद्रीनाथ, केदारनाथ, जागेश्वर धाम, गर्जिया मन्दिर, चंडी देवी मंदिर और जो तमाम प्रसिद्ध मंदिर हैं वहां पर प्रसाद बनाकर अपनी आजीविका चला रही हैं। सरकार ने उन्हें मौका दिया है कि स्थानीय हमारे जो उत्पाद हैं उनसे हम प्रसाद तैयार करके और जो श्रद्धालु आते हैं वह उसे भगवान को उसका भोग चढ़ाएं। इसी तरह से हमने अपनी राज्य की महिलाओं के लिए और जो महिला समूह है उनके लिए 5 लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज के दे रहे हैं ताकि हमारी बहने अपने पैरों में खड़ी हो सके और छोटी-मोटी मदद के लिए उनको किसी की आवश्यकता ना पड़े। उन्होंने कहा कि आज जब हम महिलाओं के उत्थान की बात करते हैं, महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं तो बहुत जरूरी है कि हमारी बहनें शिक्षित हो, हमारी बेटियां शिक्षित हो और वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने इसी दिशा में सरकार यह प्रयास कर रही है।

मानव अस्तित्व के लिए सरला बहन ने दिया था प्रकृति संरक्षण का मंत्र

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
जंगल में जानवरों को भेजने की जगह खेतों में चारा लगाओ। छोटे पेड़ बचाओ। पत्तियां न तोड़ो ,पेड़ों से प्रेम करो, प्रकृति की चाल के साथ चलो। पर्यावरण संरक्षण शब्द की रचियता और जिन्होंने अपना पूरा जीवन प्रकृति में आत्मसात करके जिया और प्रकृति पर आने वाले संकट के प्रति सचेत किया और दर्शन भी विश्व को प्रदान किया। शोर से दूर हिमालय के आगोश में शांत वातावरण में विश्व पर्यावरण के संरक्षण पर गहन चिंतन और मनन करने वाली सरला बहन के जन्मदिन 5 अप्रैल को उनकी कहीं और लिखी एक एक बात मार्ग दर्शक की तरह विकास की सही दिशा की ओर आज ही इशारा करती है।
गांधी जी ने कुछ सोच कर सरला बहन को कौसानी भेजा होगा। उनको सरला बहन में एक बड़ी संभावना दिखी होगी। सरला बहन ने कौसानी से ही स्त्री शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जय जगत को सिद्ध करने के लिए अपना जीवन आहूत किया।
प्रथम विश्व युद्ध की विभीषिका और पागलपन को देख उन्होंने शांति और अहिंसा का मार्ग खोजने की अपनी यात्रा में गांधी जी को एक अडिग पड़ाव ही नही मंजिल के रूप में पाया। युद्ध और विकास के उफनते उन्मांद और युद्ध रोमांस से दुनिया विनाश की उस नाव में बैठी हुई है, जिसका चप्पू उनके हाथ के नियंत्रण से बेकाबू होने के कगार पर होता जा रहा है। प्रकृति की अपनी एक चाल होती है। सतत और निरंतर, कोई जल्दबाजी नही, उतावलापन नही जीत और हार की रेस से परे केवल चलते जाना ही है। गांधी ने इस चाल को अनुभव किया और उसकी चाल और उससे निकल रहे संगीत को समझा और उसकी चाल में कदम मिलाकर ग्राम स्वराज्य का मॉडल निर्मित किया। शिक्षा की नई तालीम में इन सब को पिरो दिया। प्रकृति ने जो दिया है, उसकी चाल के साथ सतत चला जा सकता है। प्रकृति के इर्द गिर्द ही मानव अपना विकास कर सकता है। मानव अस्तित्व के लिए प्रकृति का विनाश नही अपितु संरक्षण ही मंत्र हो सकता है। शिक्षा प्रकृति के अनुसार होनी चाहिए, उसके विरुद्ध नही। प्रकृति के परे कोई मार्ग हो ही नही सकता।
गांधी के जीवन दर्शन और जीवन ने ये सब एक सूत्र में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया। विश्व युद्ध की विभीषिका को देख कैथरीन, उनका असली नाम, संमझा की युद्ध जीतने वाला और युद्ध हारने वाला दोनों ही हारते है। केवल मानव के भीतर दम्भ और दूसरे को हराने का उन्माद जो विनाश का पर्याय है, ही जीतता है। आज ये सब हमारे सामने चरितार्थ हो रहा है।
सरला बहन के जन्मदिन पर उनकी हिमदर्शन की धार पर बैठना और प्रकृति के संरक्षण की गहन चिंतन करना मानव को एक दिशा प्रदान करता है। लक्ष्मी आश्रम का सतत परिवेश आज ही एक आशा प्रदान तो करता ही है। हालांकि विश्व में बेतरतीव भागता विकास सब कुछ लील लेने को अंधी दौड़ में चारो ओर भाग रहा है। उसकी अंधी दौड़ को रोक पाना संभव नही है। लेकिन गांधी के ग्राम स्वराज्य में अभी भी गांव को गांव बनाने की दिशा और मार्ग संरक्षित है। पुरखों की सतत और मेहनत के परिचायक खेत और गांव आज भी मानव सभ्यता को अमरता प्रदान करने की असीम क्षमता है।

सरला बहन ने लक्ष्मी आश्रम को एक मॉडल के रूप में विकसित किया। ये गांधी का ही जीवित मॉडल है। दूसरी और हिमदर्शन कुटीर को चिंतन स्थली के रूप में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया।
आज विकास के बेतरतीव मॉडल को मानव ही नही वन्य प्राणियों की सहज और नीरव जीवन शैली को भी प्रभावित किया है। विकास की तुरत गति ने सतत गति को बाधित ही किया है। वन्य प्राणियों का जंगल से बाहर आना इसका संकेत है। पर्यावरण संरक्षण ही इसका एक मात्र समाधान हो सकता है।
विश्व में जल संकट का गहराता भयावह रूप प्रकृति की चाल को बाधित करने वाले तुरत विकास का ही परिणाम है। मुट्ठी भर लोग दुनियां को तेजी से भागना चाहते है, इस भागमभाग में वो न जाने किस मंजिल को छूना चाहते है और पूरी मानव जाति को इस चाल में अपने अंधकूप में झोंकना चाह रहे है। ये आज प्रकृति के विनाश से संमझा जा सकता है। जब महानगर की चकाचैंध में सांस लेना कठिन हो जाती है, उस वक्त सब बेमानी लगता है। खाने के स्वाद में तेजी से आये बदलाव, विश्व में पिघलते ग्लेशियर, भारत में गंगा नदी समेत सारी नदियों को नालों में परिवर्तित होते देख प्रकृति की सतत चाल को समझना भी कहाँ रह गया है, संभव।
ये सब सहसा सरला बहन के जन्मदिन पर याद हो चला। कृत्रिम शोर से दूर प्रकृति के संगीत के साथ कैसे सुरताल मिल कर चला जा सकता है। ये सरला बहन के जीवन दर्शन और उनकी यादों में आज भी कौसानी के लक्ष्मी आश्रम और उनकी चिंतन स्थली हिमदर्शन में खोजा जा सकता है, बस प्रकृति की चाल के संग चलने मात्र से, जंगल के संगीत में सराबोर हुए, आज भी तमाम कोलाहल के बावजूद भी पक्षियों का कलरव ध्यान खींच ही लेता है। हिमालय की बर्फानी चोटियां अपनी ओर आकर्षित आज भी करती है। घाटियों से आती हवा एक संगीत ही तो है। घने जंगल में अनहद का संगीत तनिक एकाग्र होने से सुना जा सकता है। आज भी सूर्यास्त की लालिमा, रात का सन्नाटा, चन्द्रमा का प्रकाश अपने होने का अहसास छोड़ ही जाता है। ये सब सतत और निरंतर ही है। तुरत विकास की अवधारणा से ये कब तक रहेगा, इस पर चिंतन तो करना ही होगा, ये तय है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब राज्य में हिम तेंदुए की गणना होगी

उत्तरकाशी वन प्रभाग क्षेत्र में हिम तेंदुए का संरक्षण केन्द्र बनाया जायेगा। यह संरक्षण केन्द्र भैरों घाटी के लंका नामक स्थान पर बनाया जायेगा। यह निर्देश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हिम तेंदुओं की गणना की जाय। हिम तेंदुओं के सरंक्षण एवं इनकी संख्या में वृद्धि के लिए विशेष प्रयास किये जाय। पिछले कुछ वर्षों में जिन क्षेत्रों में हिम तेंदुए देखे गये हैं। स्थानीय लोगों एवं सैन्य बलों के सहयोग वन विभाग द्वारा ऐसे क्षेत्र चिन्हित किये जाय। ऐसे क्षेत्रों में ग्रिड बनाकर इनकी गणना की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम तेंदुए एवं अन्य वन्य जीवों के संरक्षण से राज्य में विन्टर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों की अनेक प्रजातियां हैं, जो पर्यटकों के आर्कषण का केन्द्र बनती हैं। वन्य जीवों की लुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में प्रयासों की जरूरत है। आज वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लोग भी जागरूक हैं। उत्तराखण्ड के प्राकृतिक एवं नैसर्गिक सौन्दर्य में वन एवं वन्य जीवों का महत्वपूर्ण योगदान है।

बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ जनपद में हिम तेंदुए अधिक मात्रा में देखे गये हैं। अभी तक इनकी गणना नहीं की गई है। विभिन्न शोधों के आधार पर उत्तराखण्ड में अभी 86 हिम तेंदुए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस अवसर पर प्रो. एन. फिन्स्ट्रा ने हिम तेंदुए के संरक्षण केन्द्र पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया।

आखिर पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया फरार गैंगस्टर

थानाध्यक्ष रानीपोखरी दीपक धारीवाल ने बताया कि डोईवाला कोतवाली में 50 वर्षीय मनजीत सिंह पुत्र खेम सिंह निवासी मिस्सरवाला थाना डोईवाला, शकील अहमद पुत्र फकीर मौहम्मद निवासी बाजावाला डोईवाला देहरादून और बलवीर सिंह पुत्र सरदार भगवान सिंह निवासी खैरी प्रथम मारखमग्राण्ट कोतवाली डोईवाला के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस संबंध में शकील अहमद और बलवीर को पुलिस पूर्व में गिरफ्तार कर चुकी है। थानाध्यक्ष ने बताया कि शकील वर्तमान में जेल में ही कैद है, जबकि बलवीर अभी जमानत पर बाहर आया हुआ है। बताया कि गैंग का लीडर मनजीत सिंह पिछले सात माह से फरार चल रहा था। जिसे शनिवार को मुखबिर की सूचना पर रानीपोखरी पुलिस टीम ने मिलन विहार देहरादून से गिरफ्तार किया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी पर चार मुकदमें डोईवाला कोतवाली में दर्ज है। पुलिस टीम में थानाध्यक्ष रानीपोखरी दीपक धारीवाल, कांस्टेबल वीर सिंह, अमित, ललित और प्रमोद शामिल रहे।

सम्मोहन के जरिए महिलाओं से करते थे ठगी, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सम्मोहन कर महिलाओं के सामान को दुगुना करने का लालच देकर गहनें की ठगी करने वाले एक शातिर को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी से 12 बोर का एक जिंदा कारतूस, 12 बोर का एक तमंचा अपने कब्जे में लिया है। इसके अलावा महिलाओं से लूटे गए दो सोने के कुंडल, एक मोटरसाइकिल, दो हजार रुपये नगद भी बरामद किए हैं। वहीं, एक शातिर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया है।
बता दें कि ऋषिलोक कॉलोनी आशुतोष नगर निवासी महिला शिव देवी कैंतूरा पत्नी नैन सिंह कैंतूरा ने कोतवाली पुलिस में तहरीर दी। बताया कि 24 जुलाई को दोपहर दो बज करीब नटराज चैक से अपने घर ऋषिलोक कॉलोनी वापस आ रही थी। तभी आशुतोष नगर बालाजी बगीचे वाली गली में मोटरसाइकिल पर दो युवक पहुंचे। उन्होंने सम्मोहन कर गले से मंगलसूत्र, कान के कुंडल और चांदी की अंगूठी को रूमाल पर रख लिया और वहां से चलते बने। सम्मोहन से बाहर आने के बाद उन्हें धोखे का पता चला। महिला की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।

कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि मामले में घटना स्थल सहित नगर के करीब 30 सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए। साथ ही मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया। शुक्रवार की रात्रि श्यामपुर फाटक के समीप मुखबिर से सूचना मिली कि हरिद्वार से ऋषिकेश की ओर से एक संदिग्ध व्यक्ति मोटरसाइकिल पर आ रहा है। पुलिस ने फाटक पर चेकिंग कर उसे पकड़ लिया। तलाशी लेने पर पुलिस को उसके कब्जे से पीली धातु के कुंडल, दो हजार नगद और एक तमंचा मय जिंदा कारतूस बरामद हुआ। कोतवाल रितेश शाह ने आरोपी की पहचान गुलजार (26) पुत्र सुक्रउद्दीन निवासी मोहम्मदपुर घड़ी थाना किठौर जिला मेरठ उत्तर प्रदेश, हाल निवासी ग्राम शिकारपुर थाना मंगलौर जिला हरिद्वार के रूप में कराई। बताया कि बरामद तमंचे के आधार पर आयुध अधिनियम में भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि आरोपी गुलजार बदायूं से भी पूर्व में जेल जा चुका है तथा वर्तमान में जमानत पर बाहर आया है। पूछताछ में आरोपी ने कबूला है कि वह अपने साथी शहजाद के साथ ऋषिकेश आया था। 24 जुलाई को उसने साथी के साथ घटना को अंजाम दिया। इसके बाद 26 जुलाई को रुड़की गंगनहर एक महिला को झांसे में लेकर उसके कान के कुंडल उतरवाये थे।

यूटयूब में वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना सीखा और जीत लिया राष्ट्रीय पुरस्कार

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
आज के वक्त में कोई भी चीज बेकार नहीं होती हैं, घर के पुराने वेस्ट मेटिरियल हों या पुराने अखबार। इनसे भी घर को नया लुक दिया जा सकता है, बशर्ते उसका बखूबी इस्तेमाल करने का हुनर आपके पास हो। इस बात को सच साबित करने में लगी है बागेश्वर जिले के मेलाडुंगरी गांव की अर्चना भंडारी। लॉकडाउन में ऑनलाइन शिल्पकला के अपने हुनर से अर्चना ने न केवल राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय शिल्पकला प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया, बल्कि अब वो स्वयं शिल्पकला में अभिनव प्रयोग करने के साथ 20 अन्य बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में जुटी पड़ी है।
कोरोना काल के लॉकडाउन में अर्चना की प्रतिभा निखर कर सामने आई। शुरूआत में उसने कोरोना वायरस से बचाव के लिए घर में ही मॉस्क बनाकर बांटने शुरू कर दिए। समय था तो उसने यूटयूब से वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना भी सीखना शुरू कर दिया और ऑनलाइन शिल्पकला में राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में द्वितीय पुरूष्कार भी हांसिल कर लिया। इससे उसके सांथियों ने भी शिल्पकला सीखने की बात कही तो अब वो 20 बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में लगी है। अर्चना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के सांथ ही स्वरोजगार अभियान को लेकर काफी जागरूक है। कई नुक्कड़ नाटकों में प्रतिभाग कर वो इसका संदेश भी दे चुकी हैं। अभी रक्षाबंधन के त्यौहार पर उन्हें पांच सौ राखियों की डिमांड मिली है तो वो सभी राखियां बनाने में जुटी पड़ी हैं।

हर दिन सुबह आठ से दस बजे तक के प्रशिक्षण में हाईस्कूल, ग्रेजुएशन कर रहे छात्राओं के सांथ ही नौकरीपेशा भी अर्चना से कलमदान, पेन स्टैंड, न्यूज पेपर होल्डर, फोटो फ्रेम, ज्यूलरी बॉक्स समेत राखी बनाना सीख रहे हैं। लगातार अभ्यास से वो अब पारंगत होते जा रहे हैं और अभी तक उन्होंने तीन हजार से भी ज्यादा सजावटी सामान बना दिए हैं। गुजरात सूरत के एक स्कूल में सुपरवाईजर पोस्ट पर तैनात भावना नयाल लॉकडाउन में स्कूल बंद होने पर गांव आ गई और अब वो भी यहां शिल्पकला का प्रशिक्षण ले खुश हैं।
अर्चना की इस पाठशाला में हर कोई अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए पूरी मेहनत से जुटे हैं। वहीं अर्चना भी उनका उत्साहवर्धन कर बेटियों की प्रतिभा को सामने लाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को सच साबित कर समाज को नया संदेश देने में लगी है।

अटकलों पर विराम, मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ आईएएस को बनाया मुख्य सचिव

1987 बैच उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ओम प्रकाश को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। वह मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हो रहे उत्पल कुमार सिंह के स्थान पर शुक्रवार शाम पांच बजे विधिवत कार्यभार ग्रहण करेंगे। अपर मुख्य सचिव (कार्मिक एवं सतर्कता) राधा रतूड़ी ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी किये है।
वहीं, आदेश जारी होने के बाद आईएएस ओम प्रकाश मुख्यमंत्री के आवास गए और मुख्यमंत्री को पुष्प गुच्छ देकर आभार व्यक्त किया। सूत्रों की मानें तो ओम प्रकाश को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के करीबियों में माना जाता है। उनका त्रिवेन्द्र सिंह रावत के साथ काम करने का पुराना अनुभव है। जब त्रिवेन्द्र सिंह रावत कृषि मंत्री थे, तब ओम प्रकाश उनके सचिव हुआ करते थे। उत्पल कुमार के सेवानिवृत्त होने से नए मुख्य सचिव को लेकर हालांकि तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि वरिष्ठता के आधार पर दो अपर मुख्य सचिवों में से एक को मुख्य सचिव बनाया जाएगा। बुधवार को कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने ओम प्रकाश को मुख्य सचिव बनाए जाने के संकेत भी साफ कर दिए थे।
मुख्य सचिव के आदेश जारी होने के बाद ओम प्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्राथमिकता वाली योजनाओं पर खास फोकस करेंगे। उन्होंने कहा कि चारधाम आलवेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना, केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य व वाह्य साहयतित योजनाओं के तहत अवस्थापनाओं के कार्यों को समय से पूरा कराया जाएगा। कोविड-19 महामारी और अनलॉक के दौर में राज्य के समक्ष चुनौतियों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार के स्तर पर प्रयास चल रहे है। ओम प्रकाश ने कहा कि वह कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। राज्य सरकार ने खेती को स्वरोजगार से जोड़ने की कई योजनाएं बनाई हैं, जिन्हें लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

एक नजर मुख्य सचिव तक का सफर तय करने तक …
-ओम प्रकाश का जन्म 14 मई 1962 को बौंसी, जिला बाँदा (बिहार) में हुआ।
-बीएससी फिजिक्स-ऑनर्स। पटना साइंस कॉलेज। 
-एमएससी-थेऔरोटिकल फिजिक्स। सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी।
-एम फिल-सीएसआईआर फेलोशिप। 
-1987 बैच के आईएएस अफसर। 
-1985 तक इनकम टैक्स में जॉब।
-ट्रेनिंग जौनपुर यूपी।
-एसडीएम-खुर्जा बुलंदशहर।
– सीडीओ-फतेहपुर।
-डीएम-मऊ, गाजीपुर, बांदा, हाथरस और देहरादून।
-2012 में प्रमुख सचिव। 
-2017 में अपर मुख्य सचिव।