चुनाव परिणाम से पहले फडणवीस पहुंचे केदारनाथ, लिया जीत का आर्शीवाद

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से एक दिन पूर्व पत्नी सहित परिवारिक सदस्यों के साथ बुधवार को बाबा केदार के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने चुनाव में जीत के लिए बाबा का आशीर्वाद लिया।
सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस सुबह साढ़े दस बजे चार्टर हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम पहुंचे। यह उनका निजी कार्यक्रम था, जिस कारण प्रशासन व पुलिस को इस बारे में कोई सूचना नहीं थी। मंदिर पहुंचने पर मुख्य पुजारी केदार लिंग ने उनकी पूजा संपन्न करवाई। रुद्राभिषेक करने के बाद फडणवीस ने मंदिर की परिक्रमा की और कुछ देर तक केदारनाथ की हिमाच्छादित चोटियों के सौंदर्य को निहारते रहे। इस दौरान मंदिर समिति की विजिटर बुक में फडणवीस ने लिखा कि वह बाबा केदार के दर्शनों से अभिभूत हैं और स्वर्ग में होने जैसा अहसास कर रहे है। करीब डेढ़ घंटा केदारनाथ धाम में रहने के बाद फडणवीस वापस लौट गए। गौरतलब है कि इसी वर्ष मई माह में लोकसभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ धाम पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने गर्भगृह में रुद्राभिषेक किया तो मंदिर की परिक्रमा भी की और दोपहर बाद करीब दो बजे वह साधना के लिए एकांत स्थल, मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर ध्यान गुफा में चले गए थे। यहीं रात्रि विश्राम भी किया था।

मुख्य सचिव ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर बुलाई अहम बैठक

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित और सम्भावित स्थलों को अविलम्ब ठीक कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियन्त्रण के लिए सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिये।
सचिवालय सभागार में सड़क सुरक्षा से संबंधित बैठक में मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा निधि में उपलब्ध धनराशि को सड़क सुरक्षा कार्य में उपयोग करने हेतु शीघ्र ही एक बैठक बुलाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस निधि में जमा धन का 25 प्रतिशत सड़क सुरक्षा कार्यों में खर्च करने का प्राविधान भी है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि प्रदेश में 1500 संवेदनशील स्थल चिन्हित किये गये हैं जिसमें से 51 स्थलों को निर्माण विभाग, 47 स्थलों को राष्ट्रीय राजमार्ग एवं लोक निर्माण विभाग तथा 09 स्थलों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस प्रकार कुल 107 स्थलों सही कर दिया गया है। शेष 941 स्थलों पर लोक निर्माण विभाग 358 स्थलों पर राष्ट्रीय राजमार्ग एवं लोक निर्माण विभाग तथा 48 स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा 46 स्थलों पर राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम एवं सीमा सड़क संगठन द्वारा संवेदनशील स्थलों को सही करने का कार्य किया जा रहा है।
बैठक का संचालन करते हुए अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह ने बताया कि उच्चतम न्यायालय की मानीटरिंग कमेटी के निर्देश पर लीड एजेन्सी के सदस्यों की नियुक्ति हेतु अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग के एक अभियंता, पुलिस महानिदेशक के प्रतिनिधि के रूप में सहायक निदेशक स्तर के यातायात अधिकारी की नियुक्ति करने के भी निर्देश दिए हैं। इस हेतु चिकित्सा, शिक्षा विभाग द्वारा एक-एक अधिकारी पूर्व से ही नियुक्त किये गये हैं, जो स्वतंत्र रूप से सड़क सुरक्षा एजेन्सी में पूर्णकालिक सदस्य रहेंगे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष वाहन दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आयी है। बैठक में सचिव परिवहन शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेश अनिल रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अशोक कुमार के साथ ही परिवहन विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे।

विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अल्मोड़ा में 327 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान और शोध संस्थान (मेडिकल कालेज) का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल कालेज के अवशेष निर्माण कार्यों को यथाशीध्र पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि एमसीआई की टीम द्वारा मेडिकल कालेज के निरीक्षण से पूर्व जो अवशेष कार्य एवं उपकरण आदि क्रय किये जाने हैं उन्हें यथाशीघ्र क्रय करना सुनिश्चित किया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही मेडिकल कालेज में फैकल्टी की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान मेडिकल कालेज के फिजियोलॉजी कक्ष, एनाटोमी कक्ष, सर्वर कक्ष, हिस्ट्री कक्ष सहित अन्य कक्षों का निरीक्षण कर इससे जुड़े अधिकारियां एवं कार्यदायी संस्थओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डाॅ. वाईके पंत ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इस परियोजना की कुल लागत 327 करोड़ रू0 स्वीकृत है जिसमे प्रथम एलओपी के निर्माण हेतु स्वीकृत धनराशि कुल 216.77 करोड़ रू0 है। वर्तमान तक कार्यदायी संस्था को 215 करोड़ रू0 अवमुक्त किये जा चुके हैं तथा निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद अल्मोड़ा के लिये कुल 9902.52 लाख रू0 की विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकापर्ण भी किया। जिसमें 6181.73 लाख रू0 की विकास योजनाओं का लोकार्पण तथा 3720.79 लाख रू0 की विकास योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन योजनाओं में प्रमुख रूप से शिक्षा, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, चिकित्सा, रेशम विभाग की योजनायें सम्मलित हैं।
इस अवसर पर प्रभारी मंत्री डाॅ. हरक सिहं रावत, सांसद अजय टम्टा, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान, कापरैटिव बैंक के अध्यक्ष ललित सिंह लटवाल, आयुक्त कुमाऊ मण्डल राजीव रौतेला, डीआईजी जगत राम जोशी आदि उपस्थित थे।

23 विकास योजनाओं की मुख्यमंत्री ने की घोषणा
वहीं, अल्मोड़ा में सम्पन्न हुई कैबिनेट बैठक के उपरान्त मुख्यमंत्री ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए अल्मोड़ा जनपद के विकास से सम्बन्धित 23 विकास योजनाओं की घोषणा की। इन सभी योजनाओं का निर्माण मुख्यमंत्री घोषणा के तहत किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की, कि पवित्र जागेश्वर धाम में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट (एसटीपी) का निर्माण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं में अल्मोडा पेयजल योजना के भाग-1 का सुदृृढीकरण कार्य, कटारमल पम्पिंग पेयजल योजना का निर्माण किया जायेगा, अल्मोड़ा सीवरेज जोन-3 योजना का निर्माण का निर्माण कार्य किया जायेगा, अल्मोड़ा शहर मंे बाजार का सौन्दर्यीकरण किया जायेगा, होटल मैनेजमैन्ट संस्थान अल्मोड़ा का सुदृृढीकरण एवं आधुनीकीकरण किया जायेगा, सिमतौला ईकों पार्क में ईकों टूरिज्म की गीत विधियों को बढ़ावा दिया जायेगा, जनपद अल्मोड़ा के अन्तर्गत डयोलीडाना में बैडमिन्टन हाॅल का निर्माण किया जायेगा, स्पोर्टस स्टेडियम में अवस्थापना सुविधाओं को सुदृृढ किया जायेगा, जनपद के 100 विद्यालयांे में ई लर्निंग सुविधा हेतु रू0 1.00 लाख प्रति विद्यालय की दर से धनराशि दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने ताड़ीखेत में स्थापित गांधी कुटीर के जीर्णोद्वार एवं हाल का निर्माण, नगर पालिका परिषद रानीखेत चिलियानौला के कार्यालय भवन की स्थापना, ताड़ीखेत में मिनी स्टेडियम की स्थापना, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लमगड़ा में भवन का निर्माण, कसारदेवी में स्प्रिीचुअल इकोनाॅमी जोन बनाये जाने, 200 आंगनवाडी केन्द्रों की स्थापना, शीतलाखेत महाविद्यालय एवं लमगड़ा महाविद्यालय के भवनों का निर्माण कार्य किये जाने की घोषणा शामिल है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चम्पावत के विकास से सम्बन्धित 51, पिथौरागढ़ के लिये 22, बागेश्वर के लिये 7, नैनीताल के लिये 25 जबकि उधम सिंह नगर से सम्बन्धित 9 घोषणाये की गई।

समर्पण की भावना से ही किया जा सकता है लक्ष्य हासिलः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को आईआईएम काशीपुर द्वारा उद्यमिता को बढावा देने के लिये आयोजित उत्तिष्ठ-19 कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान अपने आप में एक विशेष स्थान रखता है। इसमे अध्यनरत विद्यार्थी उद्यमिता व कृषि के क्षेत्र में प्रदेश का ही नहीं पूरे देश का नाम रोशन करेगें। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड के कृषि विश्वविद्यालय, कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है। किसी प्रदेश के विकास में संस्थानो का अहम योगदान होता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों के 37 प्रशिक्षु विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिये प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि मैनेजमेंट के लिये कौशल विकास एवं संवाद होना आवश्यक है तभी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होने कहा कि हम सभी को कृषि व उद्योगों के विकास के क्षेत्र में कार्य करना होगा, तभी प्रदेश का चहुंमुखी विकास होगा। समर्पण की भावना व अपने कार्यो के प्रति दृढता होनी चाहिये तभी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आईआईएम काशीपुर में छात्रावास बनाने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने आईआईएम द्वारा विभिन्न क्षेत्रो में उत्पादित सामग्री व यंत्रों की प्रदर्शनी का रिबन काट कर उदघाटन किया व स्टालो का निरीक्षण किया।

सांसद अजय भट्ट ने कहा कि इस प्रतिष्ठान में जो विद्यार्थी अध्ययन कर रहे है वे देश का भविष्य हैं। आने वाले समय में ये बच्चे देश व प्रदेश का नाम रोशन करेगें। उन्होंने आईआईएम के और विस्तार के लिये भारत सरकार से भी बात करने को कहा।

एनआईटी की आधारशिला के बाद अब यहां नियमित रूप से पठन पाठन का कार्य होगाः राज्यपाल

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने सुमाड़ी, पौड़ी गढ़वाल में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), उत्तराखण्ड के स्थायी परिसर का भूमि पूजन कर शिलान्यास किया।

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि आज एक ऐसे संस्थान का भूमि पूजन व शिलान्यास हुआ है जिसकी वर्षों से प्रतीक्षा थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक एवं उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अथक प्रयासों से सुमाड़ी में एनआईटी का शिलान्यास संभव हुआ है। देवभूमि उत्तराखण्ड में आईआईटी, आईआईएम व एनआईटी जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय संस्थान हैं। पिछले 10 वर्षों से एनआईटी का स्थाई कैम्पस नहीं होने के कारण यहां के शिक्षकों व छात्रों ने अनेक चुनौतियों का सामना किया। एनआईटी की आधारशिला रखने के बाद अब इसमें नियमित रूप से पठन-पाठन का कार्य होगा। उम्मीद है कि 2022 में भारत की स्वत्रंता के 75 वर्ष पूर्ण होने तक एनआईटी का निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि लोगों के मन में संशय था कि एनआईटी श्रीनगर में रहेगा या बाहर जायेगा। मगर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को मानव संसाधन विकास मंत्री की जिम्मेदारी दी, तो सबके मन से यह संशय हट गया था। इसके परिणामस्वरूप ही आज सुमाड़ी में एनआईटी के स्थायी परिसर का भूमि पूजन व शिलान्यास किया गया है। एनआईटी में पेयजल की उपलब्धता के लिए 20 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये हैं। 05 करोड़ रूपये आकस्मिक निधि से रिलीज कर दिये हैं। एनआईटी के लिए आन्तरिक सड़को के लिए खर्चा भी राज्य सरकार वहन करेगी। एनआईटी के लिए बिजली के लिए अलग से सुविधा दी जायेगी, जिस पर लगभग 30 करोड़ रूपये का खर्चा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यदायी संस्था एनआईटी के निर्माण में तेजी से कार्य करे, राज्य सरकार द्वारा धनराशि देने में कोई विलम्ब नहीं किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि श्रीनगर हमारे उत्तराखण्ड का केन्द्र बिन्दु है, तमाम शैक्षणिक संस्थाएं, मेडिकल कॉलेज और आने वाले समय में यहां रेल भी पहुंचने वाली है, आल वेदर रोड़ एवं रेल का काम तेजी से चल रहा है। हमारी कोशिश है कि 2024-25 तक रेल कर्णप्रयाग तक पहुंच जाए। 80 प्रतिशत रेलवे लाईन टनल के अन्दर है, श्रीनगर के पास तथा अनेक स्थानों पर टनल निर्माण का कार्य अत्याधुनिक रोबोटिक मशीनों द्वारा बहुत तेजी से किया जा रहा है। भविष्य में श्रीनगर में रेलवे स्टेशन बनेगा जिससे श्रीनगर का विकास होगा, उद्योगों की स्थापना होगी। यहां कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्रों के सामने एक मौका है जिससे हम अपने क्षेत्र का चहुंमुखी विकास कर सकेंगे।

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि आज यहां पर एनआईटी का भूमि पूजन व शिलान्यास हो रहा है। एनआईटी से अनेक प्रतिभाशाली छात्र निकल रहे हैं। यहां के छात्र प्रशासनिक, इंजीनियरिंग व अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि यहां हम एनआईटी के साथ केन्द्रीय विद्यालय भी बनायें, ताकि यहां के बच्चे यहीं अध्ययन कर सकें। सुमाड़ी में एनआईटी की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री ने अनेक प्रयास किये। इस भवन निर्माण का कार्य 02 साल के अन्दर पूर्ण किया जायेगा। परिसर बनने के बाद दुनियाभर से छात्र यहां अध्ययन के लिए आयेंगे।

राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित होगा भारत भारती समारोह, दिखायी जायेगी भारतीयता की झलक

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भावी चिकित्सकों से समाज के गरीब एवं बेसहारा लोगों को बेहतर स्वास्थ सुविधा उपलब्ध कराने का अणु व्रत लेने की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री प्रतिभा सम्मान योजना के तहत प्रतिवर्ष 25 मेधावी छात्रों को उनकी आधी फीस की धनराशि वापस की जायेगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के प्रति लोगों का बड़ा विश्वास एवं भरोसा रहता है, उन्हें उस विश्वास व भरोसे को बनाये रखना होगा।

शुक्रवार को राजकीय दून मेडिकल कालेज के पहले वार्षिकोत्सव फॉरनिक्स-19 का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि दून मेडिकल कालेज में सभी आवश्यक सुविधायें उपलब्ध करायी जायेंगी। मेडिकल कालेज व मेडिकल चिकित्सालय आस पास हो इसके लिये मेडिकल कालेज को मण्डी स्थल पर और जगह उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने सचिव, स्वास्थ शिक्षा को निर्देश दिये हैं कि दून मेडिकल कालेज में फेकल्टी अस्थायी के बजाय स्थायी हो इसके लिये प्रयास किये जाय। उन्होंने कहा कि स्थायी फेकल्टी मेडिकल छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने में अधिक मददगार रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून लघु भारत की तरह है। यहां पर देश भर के हजारों छात्र विभिन्न संस्थानो में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी 9 नवम्बर को राज्य गठन के 19 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित होने वाले राज्य स्थापना दिवस पर देहरादून में वृहद भारत भारती कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा जिसमें देहरादून में रह रहे विभिन्न राज्यों के छात्र व अन्य लोग अपनी अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रस्तुतियां देंगे ताकि राज्यों का वैशिष्टय यहा दिखाई दें, इसमें ‘हम सब एक है‘ तथा भारतीयता का बोध होगा। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता हमारी पहचान है। राष्ट्र एक भौगोलिक व सांस्कृतिक इकाई होती है तभी भारत की पहचान बनती है। हमे अपने इस स्वरूप से भावी पीढ़ी को भी परिचित कराना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही प्रदेश में एक रेजिंडेशियल कालेज की स्थापना की जायेगी जिसमें मेधावी छात्रों को कक्षा 6 से प्रतियोगिता के माध्यम से प्रवेश दिलाया जायेगा। इस कालेज में छात्रों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उनके व्यक्तित्व विकास से सम्बन्धित विभिन्न गतिविधियों भी निशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। इसमें अमीरी गरीबी के हिसाब से नही बल्कि केवल छात्रों की प्रतिभा के बल पर प्रवेश दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सबको स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां राशन कार्ड के आधार पर आम जनता का स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कालेज की पहली वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य दून मेडिकल डॉ. आशुतोष सयाना ने कालेज की गतिविधियों की जानकारी दी, तथा छात्रों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई।

कुभ क्षेत्र को केबल लैस बनाने के लिए बिजली व गैस पाइप लाइन के निर्माण में तेजी लाएंः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मेला नियन्त्रण भवन हरिद्वार में कुम्भ मेला 2021 की आयोजन व्यवस्थाओं की शासन के उच्चाधिकारियों एवं सभी अखाड़ो के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक समीक्षा की। इस अवसर पर नगर विकास मंत्री मदन कौशिक, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव नगर विकास शैलेश बगोली, गढ़वाल आयुक्त रविनाथ रमन, मेलाधिकारी दीपक रावत, आईजी मेला संजय गुंज्याल, अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि, महामंत्री मंहत हरिगिरी सहित सभी अखाड़ो के प्रतिनिधि तथा सभी सम्बन्धित अधिकारी मौजूद थे। इस अवसर मुख्यमंत्री ने संत महात्माओं को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आगामी कुम्भ मेला दिव्य एवं भव्यता के साथ आयोजित हो, इसके लिये समेकित प्रयासों पर ध्यान दिया जाय, सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारी भी समझनी होगी। आगामी कुम्भ मेले में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना के दृष्टिगत व्यवस्थाये सुनिश्चित की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी कुम्भ मेले की ऐसी व्यवस्थायें होनी चाहिए ताकि यह आयोजन भविष्य के आयोजनों के लिये मिसाल बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ मेले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराने के साथ ही नेत्र चिकित्सा के लिए नेत्र कुम्भ भी आयोजित किया जाय। उन्होंने कुम्भ क्षेत्र को केबल लैस बनाने के लिये बिजली व गैस पाइप लाइन को अण्डर ग्राउंड किये जाने में भी तेजी लाने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार को जोड़ने वाली सभी सड़को एवं पुलों के निर्माण मंे तेजी लाई जाय। इसके लिये दो या तीन शिफ्ट में कार्य करने की प्रक्रिया अपनायी जाय।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थाई प्रकृति के काम अक्टूबर 2020 तक पूरे कर लिए जाएं। समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इस वैश्विक मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु, राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों में भी जा सकते हैं। तमाम तरह की सुविधाएं विकसित करने मे आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग करने पर भी उन्होंने बल दिया।

नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि कुम्भ मेला की सफलता सभी के सामुहिक प्रयासों से जुड़ी है। इस कुम्भ में बेहतर व्यवस्थायें कर देश व दुनिया के श्रद्वालुओं को आवश्यक व्यवस्थायें करानी होगी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने संत महात्माओं के सुझावों पर भी ध्यान देने को कहा। अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि तथा महामंत्री महंत हरिगिरि ने कुम्भ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, आन्तरिक सड़को के निर्माण साफ सफाई पेयजल पेशवाई मार्गो के निर्माण मेला क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने अखाड़ो को भूमि उपलब्ध कराने, अखाड़ो के निर्माण के लिये आवश्यक धनराशि की उपलब्धता की बात कही। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिये पूरा सहयोग का भी आश्वासन दिया।

हिन्डन एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री ने किया गाजियाबाद से पिथौरागढ़ हवाई सेवा का शुभारंभ

उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने के प्रयासों में एक और सफलता मिली है। गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट से पिथौरागढ़ के लिए नियमित हवाई सेवा प्रारम्भ कर दी गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिन्डन एयरपोर्ट पर आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में हिन्डन- पिथौरागढ़ -हिन्डन हवाई सेवा का औपचारिक शुभारम्भ किया।

हेरिटेज एविएशन कम्पनी का 9-सीटर विमान, सप्ताह में 6 दिन (गुरूवार को छोड़कर) उड़ान भरेगा। प्रतिदिन पिथौरागढ़ से सुबह 11.30 बजे प्रस्थान कर विमान 12.30 बजे हिंडन एयरपोर्ट पहुंचेगा। जबकि हिंडन एयरपोर्ट से अपराह्न 1 बजे प्रस्थान कर अपराह्न 2 बजे विमान पिथौरागढ़ पहुंचेगा।

गाजियाबाद से पिथौरागढ़ के लिए हवाई सेवा शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इससे प्रदेश के पिथौरागढ़ के अलावा अल्मोड़ा, चम्पावत, बागेश्वर से देश की राजधानी तक पहुंचने में समय की काफी बचत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली से पिथौरागढ़ तक सड़क मार्ग से जाने में काफी समय लगता था, जो मंहगा भी था। इस हवाई सेवा के शुरू होने से जहां लोगों के समय की बचत होगी, वहीं आर्थिक दृष्टि से भी लोगों को फायदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़, सीमान्त जनपद होने के कारण यह हवाई सेवा सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उत्तराखण्ड, आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कई बार गम्भीर स्थिति होने के कारण मरीजों को हायर सेंटर रैफर करना होता है। कम समय में दूरस्थ क्षेत्रों से हायर सेंटर तक पहुंचाने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाएं बहुत जरूरी हैं। कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को भी इस हवाई सेवा से लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पिथौरागढ़ में एक ट्यूलिप गार्डन बनाया जा रहा है। ट्यूलिप गार्डन बनाने का मुख्य उद्देश्य है कि राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पर्यटक यहां आयें और यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का आनन्द भी ले सकें। पर्वतारोहण के लिए पिथौरागढ़ आने वाले पर्यटकों को भी इस हवाई सेवा के शुभारम्भ होने से आसानी होगी।

उत्तराखण्ड में पिछले कुछ वर्षों से हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया गया है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है। हाल ही में मुम्बई-देहरादून-वाराणसी हवाई सेवा शुरू की गई है। देहरादून को मुम्बई, वाराणसी, जम्मू, लखनऊ, हैदराबाद, पटना, रायपुर, बंगलौर, दिल्ली, कलकत्ता, अमृतसर, जयपुर गुवाहाटी सहित दर्जनों शहरों से जोड़ा जा चुका है। टिहरी झील में सी-प्लेन के लिए एमओयू किया जा चुका है। देहरादून से पंतनगर व पिथौरागढ़ के लिए भी हवाई सेवा संचालित की जा रही है।

महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन की जो प्लानिंग हो, उसे कई बार परखा जाए

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ की तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महाकुम्भ की व्यवस्थाएं, इसकी दिव्यता और भव्यता के अनुरूप हों। महाकुम्भ में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हर आवश्यक सुविधा जुटाई जाए। सुरक्षा में किसी तरह की चूक की गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए भीड़ प्रबंधन की जो भी प्लानिंग की जाए, उसे बार-बार परख भी लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महाकुम्भ की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। समय-समय पर तैयारियों के स्थलीय निरीक्षण के साथ इसकी समीक्षा भी करते रहेंगे।

हरिद्वार महाकुम्भ 2021, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक मेला होगा। वैश्विक स्तर के इस मेले में दुनिया भर के देशों से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। इसमें किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही क्षम्य नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री ने शासन स्तर पर भी महाकुम्भ की तैयारियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने, कुम्भ मेलाधिकारी को दैनिक तौर पर तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करने को कहा है। शासन स्तर से किसी भी तरह की आवश्यकता होने पर तत्काल अवगत कराया जाए। महाकुम्भ की तैयारियों में संत महात्माओं का मार्गदर्शन लेना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थाई प्रकृति के काम अक्टूबर 2020 तक पूरे कर लिए जाएं। समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इस वैश्विक मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु, राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों में भी जा सकते हैं, इसलिए कुम्भ मेले के दौरान लोगों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किए जाएं। तमाम तरह की सुविधाएं विकसित करने मे आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन मे तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों का व्यवहार कुशल होना जरूरी है। सुरक्षा के लिए हर आवश्यक व्यवस्था समय से कर ली जाए। रेलवे व निकटवर्ती दूसरे राज्यों के अधिकारियों से समन्वय रखा जाए। स्नान घाटों सहित पूरे कुम्भ क्षेत्र में सफाई की पूरी व्यवस्था रहे। श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य, पेयजल, पार्किंग, आवास व शौचालय की सम्पूर्ण सुविधा रहनी चाहिए।

देहरादून होगा देश का ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराने वाला पहला स्मार्ट शहर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मसूरी में आयोजित उत्तराखण्ड अर्बन ट्रांस्फोरमेशन समिट 2019 का शुभारम्भ किया। उन्होंने समिट में प्रतिभाग कर रहे केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव तथा स्मार्ट सिटी के मिशन डायरेक्टर के साथ ही देश के 12 प्रमुख स्मार्ट सिटी के सी.ई.ओ एवं स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं के प्रमुखों का उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए कहा कि इस समिट में होने वाला मंथन स्मार्ट सिटी मिशन को गति प्रदान करेगा। इससे आपसी अनुभवों एवं ज्ञान का भी आदान प्रदान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समिट में होने वाले आपसी विचार विमर्श एवं अनुभव स्मार्ट सिटी के कार्यों को नई दिशा प्रदान करने में मददगार रहेगा। देहरादून स्मार्ट सिटी का देश-भर में 99 से 32वें पायदान पर आने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। देहरादून का स्मार्ट सिटी बनने में उन्होंने समेकित प्रयासों की भी जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी सोच भी स्मार्ट बनानी होगी। जब हमारी सोच अच्छी होगी तो उनके परिणाम भी अच्छे होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीकी का बेहतर इस्तेमाल कर ही बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोशी एवं रिस्पना में एक घंटे में लाखों वृक्षों का रोपण जन सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। सौग बांध से देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराये जाने की योजना भी शीघ्र धरातल पर उतरेगी। इसमें देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध होने के साथ ही करोड़ों के बिजली व्यय की बचत होगी, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा रिस्पना नदी को ऋषिपर्णा बनाने की भी राह प्रशस्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को पोलीथीन मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में हमारे प्रयास साकार होते दिखाई दे रहें हैं। देश में इसकी शुरूआत हो रही है तब हम इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने देहरादून शहर को पोलीथीन मुक्त बनने के लिए नगर निगम को 50 लाख रूपये देने की भी घोषणा की।