सतपाल महाराज ने उत्तराखंड के विकास में केन्द्र का सहयोग मांगा

विज्ञान भवन नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में आयोजित “प्री-बजट कंसल्टेशन” संबंधी बैठक में उत्तराखण्ड के पर्यटन, तीर्थाटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने प्रतिभाग किया। बैठक में केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति एवं अर्थव्यवस्था से संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि हरिद्वार में 2021 में आयोजित होने वाले महाकुम्भ के लिए अब लगभग 1 वर्ष 7 माह का ही समय शेष है, जिसके दृष्टिगत कुम्भ मेले के आयोजन से संबंधित स्थायी प्रकृति के कार्यों की स्वीकृतियां प्राथमिकता के आधार पर निर्गत की जानी आवश्यक होगी, ताकि कुम्भ मेले के आयोजन से पूर्व ही माह अक्टूबर/नवम्बर 2020 तक समस्त कार्य पूर्ण कराया जाना सम्भव हो सके। हरिद्वार में आगामी महाकुम्भ मेला का अयोजन माह जनवरी 2021 के प्रथम सप्ताह से प्रारम्भ हो जायेगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिये उन्होंने रूपये 5000 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया।
केबिनेट मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को 38वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन का अवसर प्रदान किया गया है। जिसे वर्ष 2021 में आयोजित किया जाना है। राष्ट्रीय खेलों में 38वें संस्करण के 39 खेल विधाओं में खेल प्रतियोगितायें आयोजित की जायेंगी। खेलों के आयोजन हेतु परिसम्पतियों के निर्माण में समय लगेगा। इसलिए राष्ट्रीय खेलों को राज्य में सफलतापूर्वक आयोजित किये जाने एवं अवस्थापना विकास हेतु रूपये 682 करोड़ की धनराशि वर्ष 2019-20 में उपलब्ध कराई जाये।

सतपाल महाराज ने बताया कि राज्य की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के दृष्टिगत निर्माण सामग्री को निर्माण स्थल तक पहुचाने में ढुलान आदि पर अत्याधिक व्यय होने के कारण हिमालयी राज्यों हेतु प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत आवास निर्माण हेतु प्रति लाभार्थी रूपये 1.30 लाख को बढ़ाकर प्रति लाभार्थी रूपये 2 लाख की सहायता राशि का प्रावधान किया जाय। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थी परिवार हेतु 30 अतिरिक्त मानव दिवस स्वीकृत कर युगपतिकरण के अन्तर्गत मनरेगा के तहत अकुशल श्रमांश के दिवसों को 95 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया जाये। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी नरेगा में पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण उत्तराखण्ड में सामग्री ढुलान अत्यन्त मंहगा होता है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में पहुचने पर सामग्री की वास्तविक लागत में काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है। इस कारण महात्मा गांधी नरेगा अन्तर्गत टिकाऊ प्रवृत्ति के कार्य कराने में कठिनाई होती है। इसलिऐ पर्वतीय राज्यों हेतु श्रम सामग्री अनुपात 60ः40 के बजाय 50ः50 किया जाना गुणवत्तापूर्ण स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्व होगा।
सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत वर्तमान में योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्वतीय राज्यों में 250 से अधिक आबादी की पात्र बसावटों को ही संयोजित किये जाने का लक्ष्य है, जबकि पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों एवं जनसख्यां के विरल घनत्व को दृष्टिगत रखते हुए योजनान्तर्गत 250 के स्थान पर 150 किया जाय।
सतपाल महाराज ने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का नाम प्रधानमंत्री सम्पर्क सड़क योजना रखा जाये जिससे रोपवे सेक्टर में भी इसका लाभ उठाया जा सके क्योंकि गर्मी के दौरान सभी पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों की भारी आवाजाही होती है इससे लंबे टै्रफिक जाम और भारी प्रदूषण का खतरा पैदा होता है। इसके अलावा, पहाड़ियों में रोपवे लोगां को माल ढोने तथा परिवहन का बहुत अच्छा साधन हो सकता है जो यात्रा के समय को कम कर सकता है और साथ ही दुर्घटनाओं में भी कमी ला सकता है, उन्होंने भारत सरकार से रोपवे सैक्टर में गौरीकुण्ड से केदारनाथ, नैनीताल रोपवे, गोविन्दघाट से हेमकुण्ड के लिए एक अलग केन्द्र सहायतित योजना शुरू करने का अनुरोध किया।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में वर्तमान में कुल 7797 ग्राम पंचायतें है जिसमें 1599 ग्राम पंचायतों ऐसी हैं जिनके पास अपना कोई भी भवन नहीं है। पंचायत भवन ग्रामीण क्रियाकलापों का महत्वपूर्ण केन्द्र है। भविष्य में ग्राम पंचायतों को ई-पंचायत के रूप में भी विकसित किया जाना है तथा सभी पंचायतों का डिजिटलाईजेशन भी किया जाना है। पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक पंचायत भवन की लागत रूपये 20 लाख निर्धारित की गयी है। इस प्रकार 1449 पंचायत भवनों पर रू. 28980 लाख की आवश्यकता होगी, जिसे चरणबद्व रूप से तीन चरणों में निर्मित किये जाने का प्रस्ताव है। प्रथम चरण के रूप में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 483 पंचायत भवनों का निर्माण का किया जायेगा, जिस पर एक वर्ष में रूपये 20 लाख प्रति पंचायत भवन की दर से 483 पंचायत भवनों के निर्माण हेतु कुल रूपये 9660 लाख की आवश्कता होगी।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्यों में जनसंख्या का घनत्व कम होता है तथा क्षेत्रफल ज्यादा है, जहां तक उत्तराखण्ड का सवाल है राज्य से नेपाल तथा चीन की अर्न्तराष्ट्रीय सीमाऐं जुड़ी हुई है, तथा इन क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम हुआ है जिसके कारण यहां से लोगों का पलायन हो रहा है जो कि सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल नहीं है अतः हिमालयी राज्य हेतु सीमान्त क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अर्न्तगत भारत सरकार द्वारा दिये जाने वाले आंवटन को बढ़ाया जाये।
केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश में समग्र शिक्षा योजना में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन की सम्पूर्ण धनराशि का वहन पूर्व की भांति भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा 90ः10 के अनुपात में किये जाने के साथ ही भारत सरकार द्वारा वर्तमान में वृद्वावस्था पेंशन प्रति लाभार्थी रूपये 200 की दर से दिया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर अधिकतम रूपये 1000 या कम से कम 500 रूपये किये जाने का भी अनुरोध किया है।
बैठक में केन्द्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर व अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, वित्तमंत्री एवं केन्द्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

योग को जन आंदोलन बनाने की जरुरतः मुख्यमंत्री

5वें अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पैवेलियन ग्राउंड देहरादून में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हजारों योग साधकों के साथ योगाभ्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमित योगाभ्यास हमें मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मददगार होता है। योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या में लाना जरूरी है। योग को जन आन्दोलन बनाने के लिए आम आदमी की सहभागिता को जरूरी बताते हुए कहा कि योग की धारा देवभूमि उत्तराखण्ड से प्रवाहित हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारतीय सभ्यता, संस्कृति तथा जीवन शैली का अभिन्न अंग रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्थक प्रयासों से योग को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना भारत के लिए गर्व की बात है। योग की वजह से वैश्विक पटल पर भारत का विशिष्ट स्थान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की अपील की थी। 193 देशों ने इसका समर्थन किया था। पतंजलि ने लिखा है जिस प्रकार व्याकरण से भाषा की शुद्धता होती है उसी प्रकार योग से चित्त शुद्ध होता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में योग का महत्व बढ़ा है। योग प्रशिक्षकों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य व मन की शुद्धता के लिए विश्वभर में करोड़ों लोग योगाभ्यास कर रहे हैं। स्वस्थ शरीर व मन से ही सम्पूर्ण विश्व का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थित में देहरादून में 60 हजार से अधिक लोगों ने योगाभ्यास किया। जिससे देवभूमि व योग भूमि उत्तराखण्ड को विश्वभर में अलग पहचान मिली। उन्होंने कहा कि आत्मा व परमात्मा के मिलन का एकमात्र साधन योग है।
आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड योग की भूमि रही है। हजारों सालों से ऋषि-मुनियों, महात्माओं ने यहां से देश और दुनिया को योग के माध्यम से स्वस्थ रहने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में 250 वैलनेस सेंटर बनाये जायेंगे। एक स्वस्थ जीवन की कल्पना योग से ही जा सकती है। प्रधानमंत्री ने श्री केदारनाथ जी में योग साधना कर बाबा केदार का आशीर्वाद लिया। श्री केदारनाथ जी की यात्रा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में इससे काफी वृद्धि हुई है।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक खजान दास, मुन्ना सिंह चैहान, गोपाल रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, सचिव आयुष अरविन्द सिंह ह्यांकी आदि उपस्थित थे।

रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में पहल होनी चाहिएः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से विज्ञान भारती के अध्यक्ष डॉ. महेश भट्ट, निदेशक यूसर्क प्रो0 दुर्गेश पंत आदि ने भेंट कर उन्हें माह सितम्बर मे देहरादून में प्रस्तावित ‘‘हिमालय महोत्सव‘‘ आयोजित किये जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने हिमालय महोत्सव जैसे आयोजनो को राज्य हित में बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों में विश्व विश्वविद्यालयों का भी सहयोग लेने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में भी पहल होनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों को पर्यावरण संरक्षण जल संवर्धन तथा प्राकृतिक जल श्रोतो को पुनर्जीवित करने की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को नर्सरी स्थापित करने के साथ ही छात्रों को पर्यावरण बचाने तथा वृक्षारोपण के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। समाज हित से जुड़े ऐसे कार्यो में बच्चों का जागरूक होना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिवेष में परम्परागत स्वदेशी विज्ञान के विकास तथा आधुनिक विज्ञान में आपसी समन्वय जरूरी है। उन्होंने प्राकृतिक तथा आध्यात्मिक विज्ञान को आम आदमी से जोड़ने की पहल पर भी बल दिया।
इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश नोटियाल, कल्याण सिंह रावत ‘‘मैती‘‘ तथा विज्ञान भारती के सी.डी.असवाल आदि उपस्थित थे।

29 जून में पर्वतीय क्षेत्रों को पौड़ी में मिल सकती है कई सौगात

पौड़ी गढ़वाल कमिश्नरी के गठन की स्वर्ण जयंती, यानी 50 वर्ष पूरे होने के मौके को त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार खास बनाने जा रही है। 29 जून को पौड़ी में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की जा रही है। यह तीसरा मौका है जब त्रिवेंद्र सरकार देहरादून के बाहर पर्वतीय क्षेत्र में मंत्रिमंडल की बैठक करेगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को सचिवालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि कि पौड़ी गढ़वाल कमिश्नरी के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 29 जून को पौड़ी में मंत्रिमंडल की बैठक होगी। इस बैठक में मंत्रिमंडल पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से संबंधित फैसलों पर मुहर लगा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले देहरादून से इतर पर्वतीय क्षेत्रों में दो दफा त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल की बैठकें हो चुकी हैं। बीते वर्ष टिहरी महोत्सव के उपलक्ष्य में मंत्रिमंडल की बैठक टिहरी में आयोजित की जा चुकी है।
त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल की बैठक गैरसैंण में भी हो चुकी है। गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान मंत्रिमंडल की बैठक आहूत की गई थी। इसके अलावा पूर्व की सरकारों के समय भी तीन बार राजधानी देहरादून से बाहर कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं। पौड़ी में मंडल मुख्यालय होने की वजह से कई मंडलस्तरीय कार्यालय भी वहां हैं। यह दीगर बात है कि पौड़ी में मंडल मुख्यालय समेत पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी कार्यालय होने के बावजूद अधिकारियों की इन कार्यालयों में नियमित उपस्थिति की समस्या अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी बरकरार है। माना जा रहा मंत्रिमंडल पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को देखते हुए अहम फैसले ले सकती है।

भाजपा की कमेटी देखेगी विस अध्यक्ष और राज्यमंत्री कोठारी का मामला

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और गन्ना एवं चीनी विकास बोर्ड के अध्यक्ष भगतराम कोठारी के मध्य उपजे विवाद प्रकरण की भाजपा ने जांच कराने का निर्णय लिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के अनुसार जल्द ही जांच कमेटी घोषित की जाएगी।
विस अध्यक्ष अग्रवाल और दायित्वधारी कोठारी के मध्य तब विवाद हो गया था, जब हाल में ही केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत नमामि गंगे के कार्यों के निरीक्षण को ऋषिकेश पहुंचे थे। इस दौरान चंद्रभागा पुल के नजदीक परिचय कराने को लेकर दोनों के मध्य हुआ विवाद नोकझोंक तक जा पहुंचा। बाद में विस अध्यक्ष अग्रवाल और दायित्वधारी कोठारी ने ऋषिकेश पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश से अलग-अलग मुलाकात की।
अब भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी इस विवाद को लेकर गंभीर हुआ है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि विस अध्यक्ष और दायित्वधारी के मध्य विवाद के मद्देनजर जांच बैठाई जा रही है। जल्द ही जांच कमेटी गठित की जाएगी। इस बारे में पार्टी के प्रांतीय पदाधिकारियों से विमर्श किया जा रहा है।
गौरतलब है कि कुछ समय से भाजपा विधायकों कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और देशराज कर्णवाल के मध्य विवाद चला आ रहा है। दोनों विधायकों के मध्य छिड़ी जुबानी जंग ने पार्टी को असहज स्थिति में ला दिया था। सरकार और संगठन के हस्तक्षेप के बाद भी जब बात नहीं बनी तो पार्टी ने प्रकरण की जांच के लिए कमेटी गठित की। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष भट्ट को सौंप चुकी है, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने बताया कि जांच रिपोर्ट आधी उन्होंने पढ़ ली है। जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा।

पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, अल्मोड़ा की रिपोर्ट से पलायन का सच आया सामने

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से लोग पलायन कर रहे हैं। अल्मोड़ा जनपद में वर्ष 2001 से 2011 तक दस सालों में करीब 70 हजार लोग पैतृक गांव से पलायन कर गए। 646 पंचायतों से 16207 लोगों ने स्थायी रूप से गांव छोड़ दिया है। इसका खुलासा पलायन आयोग की रिपोर्ट में हुआ है।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सीएम आवास पर पलायन आयोग की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद की पलायन रिपोर्ट का विमोचन किया। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में सल्ट, भिकियासैंण, चैखुटिया, स्याल्दे विकासखंड से सबसे ज्यादा लोगों ने पलायन किया है। इन ब्लाकों के कई गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और आजीविका के साधन नहीं है, जिससे लोग जनपद मुख्यालय और प्रदेश के अन्य शहरी क्षेत्रों में जाकर बस गए हैं।
वर्ष 2001 से 2011 तक जनपद के 1022 ग्राम पंचायतों में 53611 लोगों ने पूर्ण रूप से पलायन नहीं किया है। ये लोग समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते हैं। जबकि 646 पंचायतों में 16207 लोगों ने स्थायी रूप से पलायन किया है। अब इन लोगों के दोबारा वापस गांव लौटने की संभावनाएं नहीं हैं। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि जनपद की 11 विकासखंडों से 7.13 प्रतिशत लोगों ने गांव के नजदीकी शहरी क्षेत्रों में पलायन किया है।
जबकि 13 प्रतिशत ने जनपद मुख्यालय, 32.37 प्रतिशत ने प्रदेश के अन्य जनपदों में, 47.08 प्रतिशत लोग राज्य से बाहर पलायन कर चुके हैं। देश से बाहर पलायन करने वाले की संख्या 0.43 प्रतिशत है। 2011 के बाद जनपद के 80 गांवों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 50 प्रतिशत आबादी कम हुई है। वहीं, 63 गांवों में सड़क, 11 गांवों में बिजली, 34 गांवों में एक किलोमीटर के दायरे में पेयजल और 71 गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा न होने से 50 प्रतिशत आबादी घटी है।

रिपोर्ट पर एक नजर ….

– 2011 की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की 6 लाख 22 हजार 506 आबादी
– 89 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।
– 3189 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है अल्मोड़ा जनपद
– जनपद में रहने वाले परिवारों की संख्या एक लाख 40 हजार 577
– दस वर्षों में शहरी क्षेत्रों की आबादी में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

चुनौती को अवसर में बदलने का कार्य करुगां, अपेक्षाओं पर खरा उतरुगांः निशंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक आज देहरादून में कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए। निशंक ने कहा- मंत्री बनने के साथ ही काम शुरू हो चुका है। 100 दिन में काम के लक्ष्य हमारे सामने हैं। पहले उन्हें साधना है। उसके बाद ही वे अपने मंत्रालय की जानकारियों को लेकर प्रेस के सामने आएंगे।
डॉ. निशंक प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित स्वागत समारोह कार्यक्रम में जुटे कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। अपने करीब आधे घंटे के संबोधन में उन्होंने कहा कि उन्होंने भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री उन्हें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री सरीखा अहम मंत्रालय देंगे। उनका तो पर्यटन और संस्कृति में मन था। कहा-‘मेरे लिए ये बड़ी चुनौती है। मैं इसे अवसर में बदलने का प्रयास करूंगा। प्रधानमंत्री ने मुझ पर बहुत भरोसा किया है। मैं समझ लूं कि प्रधानमंत्री जी क्या चाहते हैं। जितनी भी क्षमता है लगा दूंगा किंतु उत्तराखंड का माथा नीचे नहीं होने दूंगा।’
निशंक ने कांग्रेस पर निशाना साधा तो प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस ने देश को चैराहे पर ला खड़ा किया था। लेकिन भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाया और उनके नेतृत्व में देश लगातार नई ऊंचाई छू रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की तारीफ की। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, वरिष्ठ विधायक हरबंस कपूर, देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा ने भी निशंक ने भी कार्यकर्ता संबोधन किया और निशंक को केंद्रीय मंत्री बनाने का पीएम मोदी का आभार प्रकट किया। प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल ने कार्यकर्ताओं का आभार जताया। पार्टी विधायक खजानदास ने कार्यक्रम का संचालन किया।

एचआरडी मंत्री निशंक ने किए बदरी-केदार के दर्शन
केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री बनने के बाद पहली बार डा. रमेश पोखरियाल निशंक शनिवार को दोनों बेटियों के साथ बदरी-केदार के दर्शन किए। उन्होंने दोनों धामों की पूजा में भी भाग लिया। साथ ही तीर्थयात्रियों, पुरोहितों और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक बेटियों के साथ सुबह पौने आठ बजे केदारनाथ पहुंचे। उन्होंने बाबा केदार के दर्शन कर करीब आधा घंटे तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने तीर्थ पुरोहितों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं और समस्याओं पर प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें मंत्री बनने पर बधाई देते हुए अभिनंदन पत्र सौंपा।

इसके बाद वह दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर बदरीनाथ मंदिर पहुंचे। यहां बीकेटीसी अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल, पूर्व विधायक अनिल नौटियाल और मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने उनका फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। वह 25 मिनट तक मंदिर में आयोजित पूजा में शामिल हुए। डा. निशंक ने धाम में यात्रा व्यवस्थाओं पर संतुष्टि जताई। इस मौके पर विधायक भरत सिंह, जिलाध्यक्ष विजय कप्रवाण, महामंत्री अजय सेमवाल, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष अशोक खत्री, वाचस्पति सेमवाल, आशा नौटियाल, चंडी प्रसाद भट्ट, मंदिर समिति के सदस्य चंद्रकला ध्यानी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, धीरज पंचभैया मोनू, डिमरी पंचायत अध्यक्ष राकेश डिमरी और मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ आदि मौजूद थे।

गजेन्द्र शेखावत ने किया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ऋषिकेश में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि देशभर में 298 अलग-अलग तरह के कार्य किए जा रहे है, ताकि गंगा का शुद्धिकरण हो सके। इसके तहत सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार किए जा रहे हैं। 298 निर्माण कार्यों में से 98 पूरे हो चुके है।
ऋषिकेश में निर्माणाधीन दोनों सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी तय समय सीमा में पूरा होने की उम्मीद है। कुंभ से पहले गंगा नदी का जल आचमन योग्य हो जाएगा। वह यहां बृहस्पतिवार को परमार्थ निकेतन पहुंचे थे। यहां स्वामी चिदानंद सरस्वती के साथ उन्होंने पीलो पानी प्याउ से पानी पीकर उसका शुभारंभ किया किया। पीलो पानी के संस्थापक जतिन अहलावत ने पीलो शुद्ध जल मशीन के बारे में जानकारी दी।
बताया कि इसकी क्षमता 500 लीटर है। यह हर घंटे 300 लीटर आरओ प्यूरीफाइड जल उपलब्ध कराने में सक्षम है। इस दौरान शेखावत परमार्थ गंगा घाट पर आयोजित श्रीराम कथा में भी पहुंचे। यहां कुछ देर कथा सुनने के बाद वह सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के लिए निकल पड़े। इस दौरान नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्रा, ज्वाइंट सेक्रेटरी अशोक कुमार, वित्तीय प्रमुख रोजी अग्रवाल, उत्तराखण्ड राज्य प्रमुख उदयराज, तकनीकी निदेशक प्रवीण कुमार आदि उपस्थित रहे।

30 नवंबर तक हर हाल में पूरा हो प्लांट का काम
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने चंद्रेश्वर नगर में 7.5 एमएलडी के निर्माणाधीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप से परियोजना के निर्माण की अवधि पूछी। इस पर प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि पहले इसका निर्माण 30 अगस्त तक किया जाना था, लेकिन अब इसे 30 दिसंबर तक पूरा किया जा सकेगा।
इस पर केंद्रीय मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने 30 सितंबर तक इसे पूरा करने को कहा, लेकिन प्रोजेक्ट मैनेजर के कई पहलुओं का हवाला देने के बाद उन्होंने प्लांट को हर हाल में 30 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए।

26 एमएलडी प्लांट के कार्य से संतुष्ट दिखे शेखावत
लक्कडघाट में निर्माणाधीन 26 एमएलडी के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य पर केंद्रीय जल शक्ति संतुष्ट दिखे। उन्होंने प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इसे सुंदर बगीचे रूप देने को भी कहा। कार्यदायी संस्था जीडीसीएल के प्रदीप जैन से तकनीकी जानकारी भी ली। उन्होंने आम का पौधा भी रोपा। इस दौरान उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल भी मौजूद रहे।

केन्द्रीय मंत्री के सामने ही भिड़े विस अध्यक्ष और दर्जाधारी
ऋषिकेश पहुंचे केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के स्वागत की होड़ में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और दर्जाधारी राज्यमंत्री भगतराम कोठारी आपस में भिड़ गए। मर्यादा को भूल दोनों राजनेताओं के बीच खूब गाली गलौज हुई। यहां तक कि दोनों महानुभावों ने एक दूसरे को देख लेने तक की धमकी तक दे डाली। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ऋषिकेश दौरे पर पहुंचे थे। पहले उन्होंने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से मुलाकात की। इसके बाद दोपहर डेढ़ बजे मोटर बोट से नाव घाट पहुंचे।
यहां से वे चंद्रेश्वर नगर स्थित नमामि गंगे योजना के तहत बनाए जा रहे 7.5 एमएलडी के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करने जा रहे थे। चंद्रेश्वर नगर के मोड़ पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल तथा दर्जाधारी राज्यमंत्री भगतराम कोठारी अपने-अपने समर्थकों के साथ उनके स्वागत के लिए मौजूद थे।
करीब ढाई बजे केंद्रीय मंत्री की फ्लीट पहुंची। वे अपनी कार से उतरे तो विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और राज्यमंत्री भगतराम कोठारी के बीच पहले मैं-पहले मैं की होड़ शुरू हो गई। कुछ ही पलों में यह होड़ विवाद में बदल गई और सभी मर्यादाएं तार-तार हो गईं। दोनों के बीच जमकर गाली गलौज हुई। हालांकि, बाद में दोनों महानुभावों को स्थिति का एहसास हुआ और बारी-बारी से केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया। इस बारे में जब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो वे मुस्कुराकर चुप्पी साध गए और आगे बढ़ गए।

किसने क्या कहा-

ये वाकया पहली बार नहीं हुआ है। पूर्व में भगवान बद्री विशाल की गाडू घड़ा यात्रा के दौरान भी विधानसभा अध्यक्ष ने मेरे साथ अभद्रता की थी। वहां मैं अपनी पत्नी के साथ दर्शन के लिए लाइन में खड़ा था। बृहस्पतिवार को ऐसा ही सलूक मेरे साथ किया गया। मैं ऐसी राजनीति से त्रस्त आ चुका हूं। अपनी बात ऊपर तक पहुंचाऊंगा। विधानसभा अध्यक्ष ने गाड़ी में बैठते-बैठते धमकाया कि मैं बताऊंगा तेरे को।
– भगतराम कोठारी, अध्यक्ष, गन्ना एवं चीनी विकास उद्योग बोर्ड

भगतराम कोठारी काफी बड़े आदमी हैं और सरकार ने उनको काफी अहम जिम्मेदारी सौंपी है। मैं जहां हूं, वहां तक पहुंचने के लिए सालों परिश्रम किया है और यह पार्टी के प्रति अगाध निष्ठा का परिणाम है। ताजा घटनाक्रम पर मैं यही कह सकता हूं कि कुछ नहीं हुआ। मेरी तरफ से यही सलाह है कि पार्टी नेताओं को संगठन की रीति नीति को समझना चाहिए।
– प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष व स्थानीय विधायक

स्वरोजगार की दिशा में सार्थक प्रयास है ‘‘पहाड़ी रसोई‘‘

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने महिला सशक्तिकरण के साथ ही प्रदेश के परम्परागत व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा देश व दुनिया में पर्यटकों के माध्यम से इसकी पहचान बनाने के लिए पहाड़ी रसोई योजना को कारगर प्रयास बताया है। राजपुर रोड स्थित अनिकेत पैलेस में सरस्वती जागृति महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित ‘‘पहाड़ी रसोई‘‘ का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला समूह द्वारा किया गया यह प्रयास महिला सशक्तिकरण की भी मजबूत पहल है। उन्होंने इसे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायी भी बताया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि समाज में महिला व पुरुष दोनों पक्ष यदि सशक्त होंगे तो हमारा समाज भी आगे बढ़ेगा तथा समाज का कल्याण भी होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हमारा प्रदेश पर्यटन प्रदेश है। यहां आने वाले पर्यटकों को पर्वतीय व्यंजनों की चाहत रहती है। इससे हमारे उत्पादों को देश व दुनिया में पहचान मिलने के साथ ही पारम्परिक खेती के उत्पादन के प्रति हमारे लोग प्रेरित होंगे। इससे पारम्परिक उत्पादों व खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारे उत्पाद पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने, इसके भी प्रयास किए जाने चाहिए। इस अवसर पर विधायक खजान दास, मेयर सुनील उनियाल गामा, मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार के.एस.पवार, सरस्वती जागृति महिला स्वयं सहायता समूह की सुश्री पूजा तोमर, सुषमा शालिनी आदि उपस्थित थे।

स्थाई प्रकृति के कार्य अक्टूबर 2020 तक पूर्ण कर लिये जाएंः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में नगर विकास मंत्री मदन कौशिक के साथ 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ के कार्यों में तेजी लाने के लिए जल्द ही स्थाई मेला अधिकारी व मेला पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी। कुंभ में होने वाले स्थाई कार्यों की जल्द स्वीकृति दी जायेगी। उन्होंने कहा कि अक्ूटबर 2020 तक स्थाई प्रकृति के सभी कार्य पूर्ण कर लिये जाय। कार्यों की गुणवत्ता व पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाय। महाकुंभ को सुविधाजनक बनाने व भीड़ प्रबंधन में सहयोग के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाय। बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार महाकुम्भ के लिए लोगो (प्रतीक चिन्ह) व स्लोगन के लिए जनता के सुझाव आमंत्रित किये जाय। इसके लिए पुरस्कार राशि का प्राविधान किया जाय। कुंभ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा, पेयजल, टॉयलेट, सफाई आदि की व्यवस्था के लिए सुनियोजित प्लानिंग करने के लिए कहा। सकुशल कुंभ कराने व कार्यों की निरंतर निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनायी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ के दौरान हरिद्वार में भीड़ प्रबंधन कैसे हो इसके समाधान के लिए जिलाधिकारी, पुलिस के अधिकारी व रेलवे के अधिकारी आपसी समन्वय कर सुनियोजित कार्ययोजना बनाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैरागी कैम्प व अन्य पार्किंग स्थलों पर अतिक्रमण न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाय। अति महत्वपूर्ण प्रकृति के कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता दी जाय। मेला क्षेत्र में स्नान घाटों का विस्तार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अखाड़ों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाय।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि स्नान पर्वों पर करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं, इसलिए मेला क्षेत्र में स्नान घाटों का विस्तार करना अति आवश्यक है। जटवाड़ा पुल से हरकी पैड़ी तक घाटों का विस्तार करना जरूरी है। मेले के दौरान हिल बाईपास को खोले रखने के लिए प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कैंप के लिए पहले से ही स्थान चयन कर लिये जाय।
पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने बताया कि कुंभ मेले में 20 हजार से अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जायेगी। आग एवं भगदड़ की घटनाओं को रोकने के लिये विशेष कार्ययोजना बनाई जायेगी। कुंभ मेले में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते है ऐसे में भीड़ प्रबन्धन और सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टि से हर सम्भव प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा श्रद्धालुओं को स्नान के लिए आने व जाने के मार्गों के लिए पूरी प्लानिंग की जायेगी।
जिलाधिकारी/मेलाधिकारी हरिद्वार दीपक रावत ने कहा कि कुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए हरिद्वार में रेलवे ट्रेक डबल 27 किमी होना है। जिसमें से 17 किमी पूर्ण हो चुका है। उन्होंने कहा कि एनएच कार्य जल्द पूर्ण होने पर कुंभ के दौरान श्रद्वालुओं के लिए काफी सुविधा हो जायेगी। जिलाधिकारी दीपक रावत ने कुंभ के लिए किये जा रहे कार्यों व आवश्यकताओं पर विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव डॉ. भूपेन्दर कौर औलख, शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, गढ़वाल कमिश्नर बीवीआरसी पुरूषोत्तम, आईजी संजय गुंज्याल आदि उपस्थित थे।