फर्जी क्लेम पाने को प्राईवेट अस्पताल कर रहे सरकार से धोखाधड़ी

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में सूचीबद्ध प्राईवेट अस्पताल फर्जीवाड़े से बाज नही आ रहे है। फर्जी ढंग से क्लेम हड़पने की होड़ में सभी हदें पार कर सरकार के साथ धोखाधड़ी कर रहे है। नया मामला काशीपुर स्थित एमपी मेमोरियल अस्पताल से जुड़ा है।
जहां योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज कई-कई दिन तक अस्पताल में भर्ती दिखाए गए। इतना ही नहीं आइसीयू में भी क्षमता से अधिक रोगियों का उपचार दर्शाया गया है। ताज्जुब ये कि डायलिसिस एमबीबीएस डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है। वह भी क्षमता से कई अधिक। फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका। ऐसे भी प्रकरण हैं जहां बिना इलाज क्लेम प्राप्त किया गया है। जिसकी मरीज को भनक तक नहीं है।
यह सारी अनियमितताएं उजागर होने पर तमाम भुगतान पर रोक लगाते हुए अस्पताल की सूचीबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी युगल किशोर पंत के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण के सिस्टम पर अस्पताल की लॉगइन आइडी भी ब्लॉक की गई है। वहीं, अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसका उसे 15 दिन के भीतर जवाब देना होगा।

डिस्चार्ज होने के बाद भी रिकॉर्ड में भर्ती रहे मरीज
अस्पताल में एकाध नहीं कई स्तर पर गड़बडियां पकड़ में आई हैं। अभिलेखों के परीक्षण में 85 मामले ऐसे पाए गए हैं जिनमें मरीज जितने दिन वास्तव में अस्पताल में भर्ती रहे हैं, उससे ज्यादा दिनों के लिए मरीजों को अस्पताल में भर्ती दिखाकर अधिक धनराशि का क्लेम प्रस्तुत किया गया। 22 मामले ऐसे मिले जिनमें मरीज को डिस्चार्ज करने के बाद प्री-ऑथ इनीशियेट किया गया है।

दस बेड का आइसीयू, 20 मरीज भर्ती
अस्पताल में आइसीयू में उपचारित 263 मरीजों के भर्ती व डिस्चार्ज तिथि का अध्ययन करने पर चैंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। आइसीयू में दस बेड हैं, पर विभिन्न दिवसों पर 11 से 20 मरीजों तक का उपचार करना दिखाया गया है। उस पर आइसीयू में केवल अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के मरीज भर्ती दिखाए गए हैं। जबकि काशीपुर का क्षेत्र उप्र से लगा हुआ है और वहां से भी मरीज उपचार के लिए यहां आते हैं। ऐसे में इस बात पर भी संदेह जताया गया है कि योजना से इतर आइसीयू में किसी अन्य का उपचार ही नहीं किया गया।

क्षमता से कई अधिक डायलिसिस
अस्पताल में सबसे बड़ी खामी डायलिसिस को लेकर सामने आई है। यहां दो मरीजों की एक दिन में दो बार डायलिसिस होना दर्शाया गया है। जबकि ऐसा संभव नहीं है। तीन अक्टूबर 2018 से नौ जून 2019 तक यहां कुल 1773 डायलिसिस होना दर्शाया गया है। अस्पताल में पांच डायलिसिस मशीन हैं। जिनमें मानकों के अनुसार प्रति दिन दस मरीजों का ही डायलिसिस किया जा सकता है। पर डायलिसिस इससे कई अधिक दिखाए गए हैं।

एमबीबीएस कर रहे डायलिसिस, दर्शाया एमडी
अस्पताल में डायलिसिस कर रहे डॉक्टर न तो नेफ्रोलॉजिस्ट हैं, न एमडी और न इसके विशेषज्ञ हैं। यानी एक ऐसे व्यक्ति द्वारा डायलिसिस किया जा रहा है जो इसके योग्य ही नहीं हैं। अस्पताल ने सूचीबद्धता के अपने आवेदन में भी किसी नेफ्रोलॉजिस्ट का उल्लेख नहीं किया था। उक्त डॉक्टर को एमडी मेडिसिन दर्शाया गया है। जबकि उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में वह केवल एमबीबीएस डॉक्टर के रूप में पंजीकृत हैं।

अनुबंध में पांच, नौ विशेषज्ञताओं में कर रहे इलाज
अस्पताल के अनुबंध में केवल जनरल मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, हड्डी रोग, जनरल सर्जरी व नियोनेटोलॉजी का ही उल्लेख है। पर इन पांच विशेषज्ञता से अलग 29 अन्य मरीजों का उपचार भी यहां किया गया। जिनमें यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, पोलीट्रॉमा और प्लास्टिक व रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के मामले शामिल हैं।

सारे नियम किए दरकिनार
अस्पताल ने सूचीबद्धता के आवेदन में हॉस्पिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट कॉलम में एनए अंकित किया गया है। यानी हॉस्पिटल को चलाने के लिए प्रासंगिक कानूनध्नियम के अंतर्गत सर्टिफिकेट भी नहीं है। नेशनल काउंसिल फॉर क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट द्वारा तय न्यूनतम मानकों के अनुसार अस्पताल में प्रत्येक विशेषज्ञता के लिए न्यूनतम एक एमबीबीएस डॉक्टर 24 घंटे अस्पताल में उपलब्ध होना चाहिये। पर अस्पताल इस नियम का भी पालन नहीं कर रहा है।

सरकारी चिकित्सक भी दे रहे सेवा
अस्पताल में एक चिकित्सक डॉ. एके सिरोही द्वारा भी इलाज करना दर्शाया गया है। जबकि वह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महुआखेड़ागंज ऊधमसिंहनगर में पूर्णकालिक संविदा चिकित्सक हैं। इनका सूचीबद्धता के आवेदन में कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था।

बिना इलाज ले लिया क्लेम
एमपी मेमोरियल अस्पताल में एक से बड़े एक फर्जीवाड़े अंजाम दिए गए हैं। अस्पताल ने एक मोहल्ले में स्वास्थ्य शिविर लगाया था। जहां लोगों को अल्ट्रासाउंड में छूट प्रदान की गई। इनमें एक महिला को दिक्कत बता भर्ती होने की सलाह दी गई। जहां उसकी फोटो खींचकर कुछ जांचें लिख दी गई और उसे घर भेज दिया। आयुष्मान कार्ड की फोटो खींचकर उसे वापस कर दिया गया। अगले दिन वह रिपोर्ट लेने आई तो कहा गया कि भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है। जबकि उसे एंट्रिक फीवर के इलाज के लिए इमरजेंसी में भर्ती दिखाया गया। गलत ढंग से उसका क्लेम प्रस्तुत किया गया।

वाटरड्रोम के लिए एमओयू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड

टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन की दिशा में ठोस शुरूआत की गई है। बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की उपस्थिति में टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन हेतु वाटरड्रोम की स्थापना के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण व राज्य सरकार के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। वाटर ड्रोम की स्थापना के लिए एमओयू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है। इसी प्रकार पिथौरागढ़ स्थित नैनी सैनी में हवाई सेवाओं के सफल संचालन के लिए भी सीएनएस-एटीएम (कम्यूनिकेशन, नेवीगेशन, सर्विलांस एंड एयर ट्रैफिक मेनेजमेंट सर्विसेज) एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए।
मुख्यमंत्री ने दोनों एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासित अवसर बताते हुए कहा कि टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन के लिए बड़ी शुरूआत हुई है। इससे टिहरी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्र में पर्यटन संबंधी गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों को लाभ होगा। पिछले कुछ समय में टिहरी की पहचान प्रमुख टूरिस्ट डेस्टीनेशन के तौर पर बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़ राज्य का दूरस्थ क्षेत्र है। इसका सामरिक महत्व भी है। नैनी सैनी में हवाई सेवाओं के संचालन से पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी बहुत सुविधा होगी। राज्य सरकार पिथौरागढ़ को डेस्टीनेशन के तौर पर विकसित कर रही है। वहां 50 हेक्टेयर में ट्यूलिप गार्डन बनाया जाएगा। जो कि देश का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन होगा।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव उषा ने बताया कि यह एमओयू भारत सरकार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। वाटरड्रोम के लिए पहली बार किसी राज्य के साथ एमओयू किया गया है। उड़ान योजना के क्रियान्वयन में मुख्यमंत्री जी व उत्तराखण्ड सरकार ने काफी सक्रियता दिखाई है। प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने हमेशा सहयोग दिया है। उड़ान योजना में एयरपोर्ट डेवलपमेंट की लागत का सौ प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

उषा ने कहा कि पिथौरागढ़ में हवाई सेवाओं के संचालन को बहुत गम्भीरता से लिया गया है। राज्य में 13 हेलीपोर्ट विकसित किए जाने हैं इनमें से 10 की डीपीआर दे दी गई है। जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट को भी विकसित किया जा रहा है। इसके टर्मिनल की क्षमता को 150 से बढ़ाकर 1800 किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में फिक्की के सहयोग से देहरादून में हेलीकाप्टर कान्क्लेव आयोजित किया जाएगा। उन्होंने पवन हंस की ओर से सीएसआर के अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में 60 लाख रूपए की सहयोग राशि दिए जाने की बात भी कही।
सचिव नागरिक उड्डयन, उत्तराखण्ड सरकार दिलीप जावलकर ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार की उड़ान योजना के अंतर्गत सी-प्लेन संचालन के लिए टिहरी झील को चयनित किया गया है। योजना के तहत वाटरड्रोम की स्थापना व हवाई सेवाओं के संचालन के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण व उत्तराखण्ड सरकार के मध्य त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके लिए टिहरी झील के निकट 2.5 हैक्टेयर भूमि का चयन कर लिया गय है। वाटरड्रोम की स्थापना ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट की तरह की जाएगी। उड़ान योजना के तहत अवस्थापना पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति भारत सरकार से की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत संचालित होने वाली हवाई सेवाओं के लिए एटीएफ पर वैट की दर को घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी सोना सजवाण, विधायक विनोद कण्डारी, धन सिंह नेगी, विजय सिंह पंवार, शक्ति लाल शाह, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक एस चड्ढा, अपर सचिव नागरिक उड्डयन उत्तराखण्ड सोनिका, डीएम टिहरी वी.षणमुगम, मुख्यमंत्री के नागरिक उड्डयन सलाहकार कैप्टन दीप श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

पनियाली नाले में आए उफान से मलबा फैला, करंट फैलने से तीन की मौत

पनियाली नाले में आए उफान से कौडिया के एक घर में मलबा घुसने के बाद करंट फैल गया। इसकी चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। यह तीनों उस वक्त कमरों से सामान बाहर निकाल रहे थे। बरसाती नाले का पानी और इसके साथ आया मलबा आमपड़ाव और कौडिया के आधा दर्जन से ज्यादा घरों में घुसा। गुजरे तीन सालों से पनियाली नाला आसपास के इलाकों में कहर बरपा रहा है, लेकिन सिंचाई विभाग यहां बाढ़ सुरक्षा प्रबंध नहीं कर पाया। इससे नाराज क्षेत्रवासियों ने मंगलवार को सिंचाई विभाग के कार्यालय में तालाबंदी की।
कोटद्वार में सुबह सात बजे से शुरू हुई मूसलाधार बारिश करीब डेढ़ घंटे चली। इससे आसपास के इलाकों के नदी-नाले उफान पर आ गए। पनियाली नाले के पानी के साथ काफी मात्रा में मलबा आम पड़ाव और कौडिया स्थित कुछ घरों में घुस गया। इस नाले में सुरक्षा दीवार बनाने के लिए यहां से निकाला गया मलबा वहीं नाले के दोनों किनारों पर एकत्र किया गया था, यही मलबा पानी के बहाव के साथ लोगों के घरों तक पहुंचा। तेज हवाएं चलने और बारिश होने के चलते उस वक्त पूरे इलाके में बिजली भी गुल हो गई।
अफरा-तफरी में लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इसी दरम्यान कौडिया निवासी रणजीत सिंह (30) पुत्र बलवीर अपने घर से सामान बाहर निकाल रहा था। उसकी मदद के लिए पड़ोस में रहने वाले अरुण (28) पुत्र कमल और शाकुन (23) पुत्र गुलशन भी वहां पहुंचे थे। तीनों कमरों से सामान निकाल ही रहे थे, तभी इलाके में बिजली की आपूर्ति बहाल हो गई। घर में मलबा भर जाने की वजह से रणजीत के घर में करंट फैल गया। तीनों लोग इसकी चपेट में आ गए। उन्हें तत्काल बेस चिकित्सालय कोटद्वार ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रणजीत बैंक में कार्यरत था। हादसे में मारे जाने वाले अन्य दोनों युवकों में अरुण मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के ढाकी (नजीबाबाद) और शाकुन इसी जिले सिकरौड़ा नवादा का रहने वाला था। अरुण भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड की कोटद्वार इकाई में कार्यरत था, जबकि शाकुन कोटद्वार में नगर निगम के ट्रेचिग ग्राउंड में कूड़ा निस्तारण के कार्य करता था।

शिकयतों पर गंभीर रहे अधिकारी, 7 दिनों में करे समाधानः मुख्यमंत्री

जनता मिलन कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों व समस्याओं पर सात दिन के भीतर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। बिजली के झूलते तारों को अविलम्ब ठीक किया जाए। ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाना सुनिश्चित किया जाए, जिनके कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही हो। मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता दर्शन हॉल में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लगभग 170 लोगों की शिकायतों व समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया। इनमें 49 आवेदन आर्थिक सहायता से संबंधित थे जिन्हें स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों व समस्याओं पर सात दिन के भीतर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए और की गई कार्यवाही से आवेदक व मुख्यमंत्री कार्यालय को अनिवार्य रूप से अवगत कराया जाए। किसी भी स्तर पर जनता द्वारा की जाने वाली शिकायतों को गम्भीरता से लिया जाए और यथासम्भव राहत पहुंचाने की कोशिश की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदकों द्वारा न केवल अपनी शिकायतें व समस्याएं दर्ज कराई गई हैं बल्कि बहुत से लोगों ने सुझाव भी दिए हैं। इन सभी सुझावों पर गम्भीरता से विचार किया जाएगा और राज्यहित में पाए जाने पर इनको क्रियान्वित भी किया जाएगा।
जनता मिलन कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों में अधिकांशतः सड़क निर्माण, पेयजल, सीवर, छात्रवृत्ति, जलभराव, अतिक्रमण आदि से संबंधित थीं। बड़कोट के संजय थपलियाल के क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के आवेदन पर लोक निर्माण विभाग को इसके लिए कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। यमकेश्वर में काफी समय से वन संबंधी आपत्तियों के कारण सड़क का निर्माण रूके होने के संबंध में वन विभाग को इसकी स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा गया। सुखबीर बुटोला द्वारा चन्द्रबनी, देहरादून में पानी की समस्या बताए जाने पर पेयजल विभाग को जरूरी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। त्यूनी के समीप अणु में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद होने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने मदन मोहन नेगी द्वारा आयुष्मान कार्ड नहीं मिलने की शिकायत को गम्भीर बताते हुए स्वास्थ्य विभाग को इस मामले की जांच कर मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए। श्याम सिंह तोमर द्वारा स्कूल बाउंड्री के कारण सम्पर्क मार्ग बंद होने की शिकायत पर शिक्षा विभाग को इसका मौका मुआयना करने को कहा गया। यूनूस द्वारा झगड़े में गलत मेडिकल लगाए जाने की शिकायत पर जांच करने के निर्देश दिए गए। केवल चैहान द्वारा भूटाणु उत्तरकाशी में सड़क की समस्या बताए जाने पर मुख्यमंत्री ने समुचित कार्यवाही के प्रति आश्वस्त किया। विमल द्वारा बताया गया कि वे भूमिहीन हैं परंतु सरकारी कागजों में दिखा दिया गया है कि उन्हें भूमि मिल चुकी है। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए। बच्चन सिंह नेगी ने शिकायत की कि उनकी जमीन पर किसी ने कब्जा कर लिया है। इस पर एसडीएम को जांच कर तुरंत कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर विधायक गणेश जोशी, मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा, डीएम देहरादून सी.रविशंकर, अपर सचिव मुख्यमंत्री डा. मेहरबान सिंह बिष्ट सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने किया ल्वाली झील निर्माण का शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखण्ड पौड़ी के अन्तर्गत रू0 692.77 लाख लागत की ल्वाली झील निर्माण का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को झील निर्माण के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस झील के माध्यम से क्षेत्रवासियों को काफी लंबे समय तक पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे लगभग 34 हेक्टेयर भूमि भी सिंचित हो सकेगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘मन की बात‘‘ कार्यक्रम को सुना। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में जल संरक्षण एवं योग को अपनाकर इसके प्रचार प्रसार के विषय पर बात की गयी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आने वाले 5 वर्षों के कार्यकाल के लिए जल संरक्षण को अपना महत्वपूर्ण लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ भूमि के जल स्तर में कमी हो रही है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पानी की चिन्ता करनी है। इस झील के निर्माण से पानी के जल स्तर में भी सुधार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे उत्तराखंड में हम विभिन्न स्थानों पर झीलों का निर्माण कर रहे हैं। जनपद पौड़ी के लिए भी हमने 3 झीलें ल्वाली, सतपुली एवं जयहरीखाल में स्वीकृत की हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में झीलें है या बनायी गयी हैं, उन क्षेत्रों में सब्जियों की बहुत अच्छी खेती होती है। ल्वाली झील के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में सब्जी उत्पादन की बहुत अधिक सम्भावनाएं बढ़ जाएंगी। इस क्षेत्र में फल उत्पादन की भी बहुत सम्भावनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस झील का निर्माण 1 वर्ष के अंदर कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी योजना शुरू की जाती है, उसके कार्य समापन की तिथि भी पहले से ही निश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन खेतों को बनाने में हमारी पीढ़ियां लगी हैं। हमें पहाड़ की खेती को आबाद करते हुए खेती की सम्भावनाएं तलाशनी हैं। इसके लिए हमें पेशेवर तरीके से सोचना शुरू करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में खेती और पर्यटन दोनों में विकास की असीम सम्भावनाएं हैं। सीतामाता मंदिर में पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा। साथ ही दीपावली के बाद इस मंदिर में भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा, जो इस क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ने में मददगार होगा।

प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ हजार भर्ती वाला कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर का हुआ शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को कुंआवाला (हर्रावाला) में कोस्ट गार्ड भर्ती सेंटर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। इस भर्ती केन्द्र के लिए भारत सरकार से 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इस भर्ती केन्द्र के लिए पूरा खर्चा भारत सरकार वहन करेगी। यह भर्ती केन्द्र ड़ेढ़ वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा। यह भर्ती केन्द्र केन्द्र चार राज्यों उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश और हरियाणा के लिए बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से प्रदेश के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। थलसेना, वायुसेना व नौसेना के भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में पहले से ही हैं। कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से राज्य के युवाओं को तटरक्षक बल में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह रैबार कार्यक्रम का प्रतिफल है कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खुलने जा रहा है, जबकि देहरादून में देश का पहला ड्रोन एप्लिकेशन रिसर्च सेंटर खुल चुका है। उत्तराखण्ड में पांचवे धाम के रूप में सैन्यधाम को विकसित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प की दिशा में यह एक बड़ी पहल है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि देहरादून में जल्द ही भव्य शौर्य स्थल (सैन्यधाम) बनाया जायेगा। इसके लिए देहरादून में 70 बीघा जमीन का चयन कर लिया गया है। यह शौर्य स्थल सबके लिए प्रेरणा का केन्द्र बनेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रानीपोखरी में नेशनल लॉ युनिवर्सिटी बन रही है। इससे प्रदेश के युवाओं को विधि की पढ़ाई के साथ-साथ कानून के क्षेत्र में कार्य करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा देने राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। राज्य में अधिक से अधिक पर्यटक आयें इसके लिए हवाई सेवाओं को विस्तार दिया जा रहा है। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर हैं। देश का 23वां सीपैट संस्थान डोईवाला में खोला गया है। सीपैट एक ऐसा संस्थान हैं, जिसमें कोर्स करने से रोजगार की बहुत प्रबल संभावनाएं हैं। इसमें जल्द ही डिप्लोमा व डिग्री कोर्स भी शुरू किये जायेंगे।

महानिदेशक कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि गत वर्ष मुख्यमंत्री आवास में रैबार कार्यक्रम में प्रदेश की बड़ी हस्तियों का जो मंथन हुआ। उसके सुखद परिणाम आज हम सबके सामने हैं। डीजी कोस्टगार्ड ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड का वासी होने के नाते मेरे मन में उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए कुछ करने की तमन्ना थी। उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर हो यह मुख्यमंत्री का ख्वाब था और मेरी ख्वाईश थी जिसका परिणाम है कि आज मंजिल हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि यह भर्ती केन्द्र लगभग डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जायेगा। कोस्टगार्ड द्वारा एसडीआरएफ को आपदा से बचाव राहत कार्यों का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि भारत की कोस्टगार्ड विश्व की चौथी सबसे बड़ी कोस्टगार्ड है। काम के मामले में आज भी सबसे आगे है। उन्होंने इस भर्ती केन्द्र के लिए अपेक्षित भूमि आवंटन करने पर मुख्यमंत्री का आभार भी जताया।

चीन सीमा पर सेना की चौकियों में संचार सेवा दो माह से है बंद

भारत-चीन सीमा क्षेत्र में स्थित नीती घाटी के 11 गांवों का संपर्क दो माह से देश-दुनिया से कटा हुआ है। घाटी में संचार सेवा ठप पड़ी हुई है। ग्रामीणों के साथ ही आईटीबीपी, सेना और बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) की चौकियों में भी संचार सेवा ठप पड़ी हुई है।

भारत संचार निगम लिमिटेड के अधिकारियों का कहना है कि सेटेलाइट में आई तकनीकी खामियों के चलते घाटी में संचार सेवा ठप पड़ी हुई है। चमोली जिले से लगे चीन सीमा क्षेत्र के ग्राम पंचायत गमशाली, नीती, बांपा, मेहरगांव, कैलाशपुर, मलारी, फरकिया, कोषा, झेलम, द्रोणागिरी, कागा और गरपक के ग्रामीणों को संचार सेवा से जोड़ने के लिए बीएसएनएल की ओर से क्षेत्र में सेटेलाइट फोन वितरित किए गए थे।

सेना, आईटीबीपी और सीमा सड़क संगठन के अधिकारी और जवान भी सेटेलाइट फोन से ही एक दूसरे से संपर्क करते हैं। लेकिन पिछले दो माह से क्षेत्र में फोन डेड पड़े हुए हैं। मेहरगांव के प्रधान रणजीत सिंह टोलिया, रक्मणी देवी, धर्मेंद्र पाल और धीरेंद्र सिंह गरोड़िया ने बताया कि नीती घाटी में संचार सेवा ठप पड़ जाने से करीब छह हजार की आबादी का देश-दुनिया से संपर्क कटा हुआ है।

बीएसएनएल के अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद भी सेटेलाइट फोन ठीक नहीं किए जा रहे हैं। इधर, बीएसएनएल के महाप्रबंधक विजयपाल का कहना है कि भूसमकालिक कक्षा में स्थापित सेटेलाइट से नीती घाटी में सिग्नल नहीं मिल पा रहे हैं। जिससे सेटेलाइट फोन ने काम करना बंद कर दिया है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही सेवा बहाल कर दी जाएगी।

2020 तक देहरादून को सीएनजी उपलब्ध कराना लक्ष्यः टीएस रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार मिशन स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न फर्मों को कई कार्यों के कार्यादेश एवं स्मार्ट कार्ड वितरित किये। उन्होंने कहा कि देहरादून शहर की बढ़ती आबादी के दवाब को कम करने के लिये नये देहरादून की परिकल्पना को साकार किया जायेगा। इसके लिये लगभग 4 हजार हेक्टियर क्षेत्र का लैण्ड बैंक बनाने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट नागरिकों के बिना स्मार्ट शहर की कल्पना नही की जा सकती है। देहरादून को स्मार्ट शहर बनाने के लिये प्रबुद्धजनो व नागरिको को भी सहयोगी बनना होगा। उन्होंने कहा कि देहरादून स्मार्ट शहर के रूप में शीघ्र ही नये क्लेवर में दिखाई देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून का नया स्वरूप प्रदान करने के साथ ही यहां के नागरिकों को सभी आवश्यक सुविधाये उपलब्ध कराने का हमारा प्रयास है। 2020 के अन्त तक देहरादून को सीएनजी उपलब्ध हो जायेगा। बरसात के बाद सौंग बांध का कार्य आरम्भ हो जायेगा इससे देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध होगा तथा इससे लगभग 92 करोड़ की बिजली की बजत होगी। उन्होंने कहा कि रिस्पना को ऋषिपर्णा के स्वरूप में लाने के भी प्रयास तेजी से किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी के अन्दर स्थापित होने वाले स्मार्ट डाटा सेन्टर तथा स्मार्ट कमाण्ड कन्ट्रोल सेन्टर से देहरादून के साथ ही हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुम्भ के आयोजन में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की स्मार्ट सिटी परियोजना को मूर्त रूप देने में राज्य सरकार तथा देहरादून स्मार्ट सिटी द्वारा सभी सम्भव प्रयास किये जायेंगे। देहरादून स्मार्ट सिटी द्वारा अपने 87 प्रतिशत कार्यों को मूर्त रूप देने कि तैयारी शुरू कर दी गई है।

स्मार्ट सिटी प्लान के तहत कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि स्मार्ट रोड परियोजना के क्रियान्वयन के लिए इस कार्य में दक्ष भारत सरकार की कार्यदायी संस्था ब्रिज एण्ड रूफ लिमिटेड को कार्य आवंटित कर दिया गया है। एकीकृत कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेन्टर के क्रियान्वयन के लिए मै0 एच0पी0 लिमिटेड का चयन कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि अभी तक स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत कुल 484.76 करोड़ रूपए लागत की परियोजनाओं के कार्यादेश जारी किये जा चुकें हैं। इनमें स्मार्ट रोड लागत 57.49 करोड रूपए, ड्रेनेज लागत 37.99 करोड़ रूपए, मल्टीयूटीलिटी डक्ट लागत 64.33 करोड रूपए, स्मार्ट रोड़ के किनारे पेयजल पाइप लाईन लागत 9.96 करोड रूपए, स्मार्ट रोड़ के किनारे सीवर लाईन लागत 20.77 करोड रूपए, एकीकृत कमाण्ड एंड कण्ट्रोल सेन्टर लागत 199.78 करोड रूपए, आई०टी०एम०एस लागत 50 करोड रूपए, सिटी साइनेज लागत 18 करोड रूपए, स्मार्ट बिन्स तथा स्मार्ट वैस्ट गाड़ियां लागत 9.34 करोड रूपए, पापीपी मोड पर वाटर एटीएम लागत 1.98 करोड़ रूपए, स्मार्ट टॉयलेट लागत 2.07 करोड रूपए, स्मार्ट स्कूल्स लागत 6.05 करोड़ रूपए, एमडीडीए पार्क का सौन्दर्यकरण लागत 7 करोड रूपए शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त 331.20 करोड़ रूपए की विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं की डीपीआर की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें इलेक्ट्रिक बस लागत 41.56 करोड रूपए, इण्टरैक्टिव बस स्टॉप्स लागत 15.72 करोड़ रूपए, परेड ग्राउंड विकास योजना लागत 23.63 करोड़ रूपए,. पल्टन बाजार पैदल मार्ग का विकास लागत 13.82 करोड़ रूपए, एकीकृत ऑफिस ग्रीन बिल्डिंग लागत 204.46 करोड रूपए, सचिवालय में शिशु पालन केंद्र लागत 0.90 करोड रूपए, एबीडी क्षेत्र में पेयजल संवर्धन योजना लागत 24.11 करोड़ रूपए व राजपुर रोड का सौन्दर्यीकरण लागत 7 करोड़ रूपए शामिल हैं। इस प्रकार कुल लागत रू0 484.76 करोड के कार्यादेश दिये जा चुके हैं। जबकि कुल 331.2 करोड की डीपीआर को स्वीकृत किया जा चुका है। इस प्रकार देहरादून स्मार्ट सिटी के अंतर्गत 800 करोड़ से अधिक के कार्य जल्द ही प्रारम्भ कर दिए जाएंगे।

कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विस सत्र को सफल बनाने पर दिया जोर

उत्तराखंड विधानसभा के कल 24 जून से आरंभ हो रहे सत्र के सिलसिले में आज विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें तय किया गया कि संसदीय कार्य मंत्री रहे दिवंगत प्रकाश पंत को सत्र के पहले दिन सोमवार को श्रद्धांजलि दी जाएगी। 25 जून को होने वाले विधायी कार्यों के लिए 24 जून को दुबारा कार्य समिति की बैठक करके एजेंडा तय किया जाएगा। विधानभवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधान सभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान, कार्यकारी संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक, नेता प्रतिपक्ष इन्दिरा हृदयेश, गोविंद सिंह कुंजवाल, प्रीतम सिंह आदि मौजूद रहे।
वहीं, कल से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि महज दो दिन का सत्र सरकार ने खानापूर्ति के लिए ही आहूत किया है, क्योंकि छह माह के भीतर सत्र बुलाने की बाध्यता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि सरकार के मंत्री सदन में जबाब देने से बचना चाहते हैं वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विपक्ष की आपत्ति को खारिज किया है। उनका कहना है कि फिलहाल कोई बिजनेस नहीं है। जो विधेयक हैं, वे अभी पाइप लाइन में हैं। लिहाजा, सदन को अनावश्यक नहीं बढ़ाया जा सकता। यह बात विपक्ष भी जानता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने सदन के सुचारू संचालन में विपक्ष का सहयोग मिलने की उम्मीद भी जताई।

कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर से युवाओं का संवरेगा भविष्य

उत्तराखड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खोला जायेगा। यह भारत का पाँचवा कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर होगा। 28 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस भर्ती सेंटर के लिए भूमि का शिलान्यास करेंगे। यह भर्ती सेंटर कुंआवाला (हर्रावाला) देहरादून में बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने मुलाकात कर इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने के लिए भारत सरकार का अनुमति पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर खुलने से उत्तराखण्ड के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कोस्टगार्ड एस.डी.आर.एफ को आपदा से राहत व बचाव के तरीकों के लिए प्रशिक्षण भी देगा। युवाओं को भी कोस्टगार्ड द्वारा आपदा से राहत व बचाव कार्य का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य प्रदेश है। सेना के विभिन्न अंगों मे उत्तराखण्ड के जवान है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड को पांचवे सैन्य धाम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। यह उत्तराखण्ड का सौभाग्य है कि देश का पांचवा कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार कार्यक्रम में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने का प्रस्ताव दिया था। उसी का परिणाम है कि भारत सरकार से इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। उन्होंने डीजी कोस्टगार्ड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि देहरादून में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिली है। इस भर्ती केन्द्र का पूरा खर्च भारत सरकार वहन करेगी। नोएडा, मुम्बई, चेन्नई व कोलकत्ता के बाद यह उत्तराखण्ड में 5वां कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तराखण्ड को सैन्य धाम के रूप में 5वां सैन्य धाम विकसित करने की बात कही है। यह कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड के जवानों को समर्पित होगा। इस भर्ती केन्द्र का लाभ उत्तराखण्ड के साथ ही उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश व हरियाणा के युवाओं को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ साल में यह भर्ती केन्द्र बनकर तैयार हो जायेगा।