चीन ने सेना प्रमुख के बयान को बताया तनावपूर्ण

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान से चीन बौखलाया हुआ है। बतौर चीन, जनरल का बयान दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाएगा। चीन ने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से सीमा पर हालात और तनावपूर्ण होंगे।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने जनरल बिपिन रावत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीते एक साल में भारत और चीन के संबंधों में काफी उथल-पुथल रही है। पिछले साल भारत-चीन के रिश्तों ने कुछ उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन पिछले साल सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन के इतर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात में रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए उनमें आम राय बनी थी।

लू कांग ने कहा कि ऐसी बयानबाजी दोनों देशों के संबंधों को बेहतर करने के प्रयासों पर विपरीत असर डालेगी। इससे सीमा पर शांति बनाए रखने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। लू ने कहा कि चीन और भारत अहम पड़ोसी हैं। वे राष्ट्रीय विकास एवं उत्थान के निर्णायक चरण में हैं। दोनों देशों को सामरिक संवाद बढ़ाना चाहिए, सामरिक संदेह दूर करना चाहिए और सामरिक सहयोग संचालित करना चाहिए।

डोकलाम पर फिर चीन ने जताया अपना हक

प्रवक्ता ने कहा कि हम भारतीय पक्ष से अपील करते हैं कि वह दोनों नेताओं की ओर से बनी आम राय के बाद के कदमों पर काम करे ताकि सीमाई इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उपाय किए जा सकें और ऐसी चीजों से परहेज किया जाए, जिससे हालात जटिल होते हों। जरूरी मामलों को रचनात्मक तरीके से संभाला जाए और द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास को बढ़ावा दिया जाए। इससे समूचे क्षेत्र एवं भारतीय पक्ष के साझा हित सधेंगे। एक सवाल के जवाब में लू कांग ने जनरल बिपिन रावत के बयान का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम पर हमारा रुख साफ है। डोकलाम चीन का हिस्सा है और हमेशा चीन के अधिकार क्षेत्र में रहा है।

गौरतलब है, बिपिन रावत ने कहा था चीन मजबूत तो भारत भी कमजोर नहीं। भारत को पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के साथ-साथ पूर्वी सीमा पर भी ध्यान देने की जरूरत है। भारत अपनी सीमा पर किसी भी देश को अतिक्रमण नहीं करने देगा। अब हालात 1962 जैसे नहीं है, हर क्षेत्र में भारतीय सेना की ताकत बढ़ी है। रावत ने यह भी कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास बीजिंग की ओर से दबाव बनाया जा रहा है।

जल्द हटेगा अंग्रेजों कानून, पटवारी के बजाए पुलिस संभालेगी कानून व्यवस्था

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के लगभग बारह हजार गांवों में अंग्रेजों के बनाये कानून को दरकिनार करते हुये पर्वतीय जिलों में सभी जगह पुलिस थानों खोले जायेंगे।

दरअसल, अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1816 में कुमाऊं के तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर ने पटवारियों के 16 पद सृजित किए थे। इन्हें पुलिस, राजस्व संग्रह, भू अभिलेख का काम दिया गया था। साल 1874 में पटवारी पद का नोटिफिकेशन हुआ। रजवाड़ा होने की वजह से टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी में पटवारी नहीं रखे गए। साल 1916 में पटवारियों की नियमावली में अंतिम संशोधन हुआ। 1956 में टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून जिले के गांवों में भी पटवारियों को जिम्मेदारी दी गई।

वर्ष 2004 में नियमावली में संशोधन की मांग उठी तो 2008 में कमेटी का गठन किया गया और 2011 में रेवेन्यू पुलिस एक्ट अस्तित्व में आया। मगर गौर करने वाली बात यह कि रेवेन्यू पुलिस एक्ट बना तो दिया गया, लेकिन आज तक कैबिनेट के सामने पेश नहीं किया गया।

अंग्रेजों ने अपनी नीतियों के लिहाज से राजस्व वसूली और कानून व्यवस्था संभालने के लिए दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में पटवारी पद सृजित किए थे। तब से लेकर आज तक पर्वतीय जिलों में इसके मुताबिक काम हो रहा है। इन जिलों में सिविल पुलिस नहीं है। हालांकि, उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पटवारियों ने ब्रिटिश कमिश्नर की नियमावली में संशोधन की मांग उठाई, मगर उनकी आवाज दबकर रह गई।
कैबिनेट मंत्री एवं प्रवक्ता राज्य सरकार मदन कौशिक का कहना है कि पर्वतीय राज्यों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में आए हाइकोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद सरकार इस दिशा में आगे कदम बढ़ाएगी।

इस संबंध में एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार का कहना है कि पर्वतीय जिलों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में हाइकोर्ट के आदेश को पढने के बाद आगे कदम उठाए जाएंगे।

रूड़की के छह साल के मासूम को एचआईवी

छह साल के एक बच्चे में एचआईवी पॉजीटिव होने के पता चला है। बच्चा थैलीसीमिया से पीड़ित बताया जा रहा है। बच्चे के पिता का कहना है कि संक्रमित खून चढ़ाने की वजह से एचआईवी हुआ है। इस मामले में बच्चे के पिता ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से की है। जेएम ने सिविल अस्पताल के सीएमएस को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। बच्चे को छह बार सिविल अस्पताल रुड़की से और 48 बार हरियाणा के कैथल में रक्त चढ़ाया जा चुका है।

जिला कैथल, हरियाणा निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसके छह वर्षीय बच्चे को थैलीसीमिया है। 28 अगस्त 2017 से उसके बच्चे का उपचार सिविल अस्पताल रुड़की में चल रहा है। 28 अगस्त से अब तक उसके बच्चे को छह बार खून चढ़ाया जा चुका है। जबकि इससे पहले कैथल में उसका उपचार चल रहा था। वहां पर 48 बार बच्चे को खून चढ़ा है।

सिविल अस्पताल रुड़की में तीन दिन पहले उसके बच्चे की खून की जांच की गई थी। जांच में उसके बच्चे के खून में एचआइवी पॉजिटिव पाया गया है। बच्चे के पिता ने आशंका जताई है कि उसके बच्चे को किसी ऐसे व्यक्ति का खून चढ़ा है, जो एचआइवी पॉजिटिव होगा। इसी कारण उसके बच्चे को भी एचआइवी हो गया है। पीड़ित बच्चे के पिता ने मामले की शिकायत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल से की है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके मिश्रा को जांच के निर्देश दिए हैं।

वहीं सिविल अस्पताल रुड़की के सीएमएस डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चे में एचआइवी पॉजिटिव की बात सामने आई है। अस्पताल में बच्चे का उपचार पिछले चार माह से चल रहा है। अस्पताल के ब्लड बैंक से वही रक्त मरीज को चढ़ाया जाता है जिसकी सभी जांचें सही हो।

भाजपा विधायक ने तोड़ा नियम, शादी कार्ड पर छपवाया उत्तराखंड शासन का लोगो

भाजपा विधायक ने किसी बात की परवाह न करते हुये शादी के कार्ड पर शासन का लोगो छपवा लिया। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया तो वह बेहिचक बोले कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है, बल्कि इससे तो अच्छा संदेश जायेगा।

उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के ज्वालापुर विधायक सुरेश राठौर ने अपनी गोद ली हुयी बेटी की शादी कार्ड पर उत्तराखंड शासन का लोगो तक छपवा लिया है। जैसे ही कार्ड बंटने लगे, तो यह बात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गयी। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कमेंट्स आने लगे। लोगों ने अपने-अपने विचार रखे।

गौरतलब है कि शासन का लोगों केवल शासकीय कार्यों हेतु ही प्रयोग में लाया जा सकता है, निजी तौर पर इसका प्रयोग करना एक तरह से नियम तोड़ना ही है, लेकिन भाजपा विधायक ने मनमर्जी के चलते लोगो को ही शादी कार्ड पर छपवा दिया।

विधायक सुरेश राठौर का कहना है कि मैनें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। यह मेरी गोद ली हुई बेटी है। एक्सीडेंट में इसके माता-पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही मेरी पत्नी और मैं इसका भरण-पोषण कर रह हैं।

शादी का भी पूरा खर्चा हम ही उठा रहे हैं। कार्ड पर लोगो छपवाने का मतलब कानून का उल्लंघन करना नहीं है। इससे पार्टी का अच्छा संदेश जाएगा कि भाजपा गरीब परिवारों और जरूरतमंदों के लिए हमेशा तत्पर रहती है।

अनियंत्रित ट्रक ने लिया पांच वाहन को चपेट में, दो की मौत

ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से पुराने बस अड्डे की ओर जाने वाली रोड़ पर मंगलवार को सड़क दुर्घटना हो गयी। दुर्घटना में स्कूटी सवार एक मजदूर व कार चालक की मौके पर मौत हो गयी। वहीं सूमो सवार छह अन्य घायल हो गये। ट्रक चालक मौके से फरार होने में सफल रहा। वहीं देर रात ट्रक चालक के खिलाफ मुकादमा दर्ज कर लिया गया है।
मंगलवार का दिन तीर्थनगरी के लिये बड़ा दुखहारी रहा। बेकाबू ट्रक ने पांच वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। आलम यह रहा कि ऑल्टो कार बुरी तरह से कुचल कर सिमट गयी। वहंी सूमो तो 90 डिग्री का कोण बनाते हुये आगे के दौ टायरों पर खड़ी हो गयी। वहीं मौके पर दूसरी तरफ से आ रहे स्कूटी सवार भी इनके बीच में समा गये। स्कूटी भी पिचक कर खिलौना बन गयी। वहीं एक और बाइक सवार ने मौके पर ब्रेक लगाकर खुद को किसी तरह बचा लिया।
घटना उस वक्त की जब नगर में नो एंट्री व जीरो जोन का समय होता है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों पर भी सवाल उठना लाजिमी है। आखिर कार कैसे नो एंट्री के समय ये माल वाहक ट्रक नगर के बीच से होकर जा रहे थे।
दुर्घटना में कुंदन (25 वर्ष) निवासी शांति नगर ऋषिकेश, मूल निवासी बिहार व रामस्वरूप (58 वर्ष) पुत्र हरि सिंह रावत निवासी इंदिरा नगर ऋषिकेश की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य लोगों में राधेश्याम (40 वर्ष) पुत्र धर्मपाल निवासी सुंजडू, मुजफ्फरनगर, सतीश (40 वर्ष) पुत्र सज्जन प्रजापति निवासी भरत विहार ऋषिकेश, जुनवरी देवी (45 वर्ष) पत्नी महेंद्र सिंह निवासी नीरगड्डू तपोवन टिहरी गढ़वाल, हरिनारायण (70 वर्ष) पुत्र सुधांशु निवासी मायाकुंड ऋषिकेश, शिशुपाल (24 वर्ष) पुत्र महेंद्र निवासी नीरगड्डू टिहरी गढ़वाल को राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां देर रात सभी घायलों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
गौरतलब है कि रेलवे रोड से हीरालाल मार्ग की ओर ढलान पर आ रहे सीमेंट से लदे एक ट्रक के ब्रेक फेल हो गए। तेज ढलान होने के कारण चालक ट्रक पर नियंत्रण खो बैठा। रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाली यह सड़क आगे चलकर पुराने रोडवेज अड्डे पर मिलती है और यहां से दायीं ओर और बायीं ओर के लिए सड़कें कटती है। जबकि सामने पुराना रोडवेज अड्डे की दीवार है। तिराहे के पास अनियंत्रित ट्रक ने अपने आगे चल रही एक ऑल्टो कार को टक्कर मारते हुए घसीट दिया। जिससे ऑल्टो कार अपने आगे चल रहे टाटा सूमो वाहन से जा टकराई और टाटा सूमो अपने आगे चल रहे एक अन्य ट्रक से जा भिड़ा। इतना ही नहीं सबसे आगे चल रहा ट्रक भी मोड़ नहीं काट पाया और सामने पुराना रोडवेज बस अड्डे की बाउंड्री के बाहर लगे विद्युत ट्रांसफार्मर से जा भिड़ा। इस बीच एक स्कूटी सवार भी इन वाहनों के बीच बुरी तरह कुचल गया। सीमेंट लदे ट्रक की गति इतनी तेज थी कि दोनों ट्रकों के बीच में जो भी वाहन आए उनके परखच्चे उड़ गए। भीषण दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जाम हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से घायलों को वाहनों से बाहर निकाला। जिन्हें 108 आपात सेवा की मदद से राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया गया।

गंगा की स्वच्छता का जिम्मा जर्मनी से आयी टीम के हाथों


जर्मनी के प्रतिनिधिमण्डल नेे सचिवालय में डिप्टी मिशन चीफ डॉ.जेस्पर वेक के नेतृत्व में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह से तकनीकी और वित्तीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार विमर्श किया। मिशन चीफ के साथ फेडरल मिनिस्ट्री के साउथ एशिया डिवीजन हेड डॉ.रोलफ्राम क्लेन, जर्मन डेवलपमेंट बैंक के सीनियर पॉलिसी ऑफिसर, जीआईजेड(जर्मन एजेंसी फॉर इंटरनेशनल टेक्निकल कोऑपरेशन) के कंट्री डायरेक्टर डॉ.यूरिक रिवेरे, सिल्के पालविज सहित अन्य अधिकारी थे। जीआईजेड उत्तराखण्ड में गंगा नदी की स्वच्छता, चिकित्सा, कौशल विकास में तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा।

गंगा नदी की स्वच्छता के लिए जर्मनी के मिशन चीफ के समक्ष 920 करोड़ रूपये के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। जीआईजेड को बताया गया कि हरिद्वार, ऋषिकेश, तपोवन, मसूरी, देहरादून में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नेटवर्किंग का कार्य किया जायेगा। इन शहरों में 265.47 एमएलडी सीवेज निकलता है। इनके नेटवर्किंग 574.26 किमी में की जानी है। जर्मन मिशन ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार द्वारा बनाये गये डीपीआर का मूल्यांकन जर्मन तकनीकी टीम द्वारा किया जा रहा है। जीआईजेड गंगा नदी की स्वच्छता के लिए 920 करोड़ रूपये दिये जाने पर जल्द निर्णय लेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार का संकल्प है कि गंगा नदी स्वच्छ व निर्मल हो। कोई भी नाला गंगा नदी में नही गिरने दिया जायेगा, इसके लिए गंगा किनारे के कस्बों में कार्य चल रहा है। जर्मनी के सहयोग से इस कार्य में और गति मिलेगी।

उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह फैसला विश्वभर में छा रहा

अब उत्तराखंड हाईकोर्ट का गंगा प्रदूषण पर दिया गया फैसला फ्रांस के शिक्षण संस्थानों में भी पढ़ने को मिलेगा। जी हां, गंगा प्रदूषण को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायिर की गयी थी। जिस पर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुये गंगा सहित ग्लेशियर, पेड़ व पौधों को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया था। फ्रांस में गंगा की मान्यता व मौजूदा स्थिति पर भी शोधार्थियों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि फ्रांस के शिक्षण संस्थानों में इस फैसले को कोर्स में शामिल किया गया है।

दरअसल, अधिवक्ता ललित मिगलानी की जनहित याचिका पर वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गंगा के साथ ही ग्लेशियर, पेड़ व पौधों को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया था। पिछले साल दो दिसंबर को खंडपीठ ने 26 बिंदुओं को लेकर फैसला दिया था। गंगा को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने संबंधी फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर चुनौती दी थी। इस सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी, जबकि ग्लेशियर व पेड़-पौधों को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने वाला आदेश प्रभावी है। अब तक इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं मिली है।

फ्रांस की शोधार्थी डेनियल बेरती ने याचिकाकर्ता व अधिवक्ता ललित मिगलानी से मुलाकात कर फैसले के अहम बिंदुओं बारे में जानकारी ली। उन्होंने इसकी पुष्टि किया कि इस विषय को फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंस रिसर्च व सेंट्रल फॉर हिमालयन स्टडीज फ्रांस में अध्ययन के लिए शामिल कर लिया गया है। डेनियल ने गंगा की धार्मिक व सामाजिक मान्यता को लेकर भी तथ्यात्मक जानकारी जुटाई। अधिवक्ता मिगलानी ने इसको उत्तराखंड हाई कोर्ट के साथ ही देश के लिए बड़ी उपलब्धि करार दिया है। साथ ही कहा कि गंगा की स्वच्छता व निर्मलता को लेकर उनकी मुहिम जारी रहेगी।

सीएम ने आईपीएस की कविता “ख्वाबों के खत“ का किया विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में तृप्ति भट्ट द्वारा रचित “ख्वाबों के खत“ नामक कविता संकलन का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रख्यात कवि डॉ.हरिओम पंवार, प्रख्यात अदाकारा और कलाकार शबाना आजमी, कवि असीम शुक्ल और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी भी उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि तृप्ति भट्ट एक आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में चमोली जनपद की पुलिस अधीक्षक भी हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तृप्ति भट्ट की सराहना की कि एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने व्यस्त दिनचर्या के बीच भी वे लेखन और कला के लिए समय निकालती हैं। उन्होंने कहा कि लेखन सदैव ही मानवीय संवेदनाओं को स्पर्श करता है और एक पुलिस अधिकारी के रूप में लेखन करना यह दर्शाता है कि अधिकारी एक संवेदनशील अधिकारी है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई द्वारा पुस्तक विमोचन के कुछ संस्मरणों को भी सुनाया। डॉ.हरिओम पंवार ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी एक कवि है तो उसके हाथों कभी अन्याय नहीं हो सकता और ऐसा अधिकारी कभी किसी दुर्बल को नहीं सताएगा। शबाना आजमी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भट्ट के कविता लेखन की सराहना की और जिस प्रकार से कविता संकलन में विभिन्न विषयों को स्पर्श किया गया है उसकी प्रशंसा भी की। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र की एकरसता से बचाने और अपनी आत्मा पर से धूल झाड़ने के लिए कला से बेहतर कोई मौका नहीं मिलता। उन्होंने एसपी तृप्ति भट्ट की प्रशंसा की थी। उन्होंने अपने कैरियर के बहुत प्रारंभिक चरण में ही अपने कार्य के साथसाथ लेखन के क्षेत्र को भी चुना है।

उत्तराखंड में 334 विद्यालय हो सकते है बंद

अब ऐसे विद्यालयों जिनकी छात्र संख्या दस या उससे भी कम है। सरकार उन्हें बंद करने का मन बना चुकी है। जी हां, जिले में प्राथमिक व जूनियर 334 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर छात्र संख्या दस से कम रह गई है, और ऐसे में सरकार इस पर जल्द फैसला लेगी।
प्राथमिक विद्यालयों में लगातार छात्रसंख्या घट रही है। कम संख्या वाले सबसे ज्यादा विद्यालय देवप्रयाग में 42 व सबसे कम प्रतापनगर में 26 हैं। इन विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। जिले में शून्य छात्र संख्या वाले करीब 80 विद्यालय पहले से ही बंद है। दस से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की सूची तीन सौ से ऊपर है, लेकिन इसमें दूरी का भी ध्यान रखा गया है। बंद होने वाले विद्यालय की दूरी समायोजित होने विद्यालय से दूरी एक किमी रखी गई है ताकि बंद होने वाले विद्यालयों के छात्रों को दूसरे विद्यालय जाने में परेशानियों का सामना न करना पड़े। एक किमी दूरी वाले विद्यालयों को ही बंद किया जाता है तो फिर बंद होने वाले स्कूलों की संख्या कुछ कम हो जाएगी।

सीएम ने की मलेशिया के राजदूत से मुलाकात

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से सचिवालय में भारत में मलेशिया के राजदूत दातो हिदायत अब्दुल हमीद ने इंडियन एंटरप्रेन्योर चौंबर्स ऑफ मलेशिया के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने मलेशिया के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए उन्हें उत्तराखंड में पर्यटन, शिक्षा और अन्य द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में निवेश करने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य के सभी 13 जनपदों में 13 नए पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना पर कार्य कर रही है। यह 13 नए पर्यटन स्थल राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में भविष्य के विकास की आधारशिला होंगे। मलेशिया के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विचार करने के साथ ही पर्यटन, विशेष रूप से होटल और रीसॉर्ट्स के क्षेत्र में रुचि दर्शाई। मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने प्रतिनिधिमंडल को उत्तराखंड में एक विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर पर विचार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अब्दुल हमीद को श्रीबदरीनाथ धाम की अनुकृति स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की। इस अवसर पर आई.ई.सी.एम. के अध्यक्ष भारत अजमेरा सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। उत्तराखंड सरकार की ओर से मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के साथ सचिव मुख्यमंत्री अमित नेगी और राधिका झा भी बैठक में उपस्थित रहीं।