अब स्थानीय भाषा में भी दर्ज हो सकेगी शिकायत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में समाधान पोर्टल हेतु स्मार्ट आई.वी.आर.(इंटरैक्टिव वॉयस रेस्पॉन्स) सिस्टम के माध्यम से सार्वजनिक शिकायतों को मोबाईल/दूरभाष पर प्राप्त कर उनका निस्तारण किये जाने सम्बन्धी सेवा का शुभारम्भ किया। जन समस्याओं और सुझावों को और अधिक सुगम बनाने के लिए कोई भी व्यक्ति टोल फ्री नम्बर 1905 पर फोन कर अपनी शिकायत या सुझाव को पंजीकृत करा सकते है। इसके लिए शिकायतकर्ता को अपना नाम, पता, मोबाईल नम्बर एवं शिकायत का विवरण देना होगा। शिकायत एन.आई.सी. के पोर्टल पर दर्ज हो जायेगी। उसके बाद शिकायत, सम्बन्धित विभाग को भेजी जायेगी। जिसका सम्बन्धित विभाग द्वारा 10 दिन के अन्दर फीडबैक दिया जायेगा। आईवीआर सिस्टम के तहत एक साथ 15 लोग शिकायत/सुझाव दर्ज करा सकते हैं। इसमें लोग स्थानीय भाषा में भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। जिसके लिए अनुवाद की व्यवस्था भी रहेगी। त्रिवेन्द्र ने कहा कि समाधान पोर्टल पर आई.वी.आर. सिस्टम के होने से जनसमस्याओं के निवारण में तेजी आयेगी। समस्याओं के निवारण के लिए सम्बन्धित विभागों की जिम्मेदारी तय रहेगी। इससे प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की समस्याएं पहुंचेगी तथा सुझाव भी मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अच्छी बात है कि आई.वी.आर. सिस्टम में स्थानीय बोलियों को भी सम्मिलित किया गया है।

2022 तक गरीबों को एक लाख आवास देने की मिली मंजूरी

2022 तक गरीब व कमजोर वर्गों को एक लाख आवास मुहैया कराने के लक्ष्य पर आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड आवास नीति को मंजूरी दी गई है। निजी क्षेत्र की मदद से बनने वाले आवासों को राज्य सरकार प्रति आवास छह लाख रुपये की दर से खरीदेगी, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्रति परिवार साढ़े तीन लाख रुपये पर आवास मुहैया कराया जाएगा।
राज्य खाद्य योजना के 11 लाख परिवारों को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर चक्कर काटने से निजात रहेगी। आगामी एक नवंबर से इन परिवारों के बैंक खाते में खाद्यान्न सब्सिडी पहुंचेगी।
इसी तरह अंत्योदय परिवारों को भी चीनी की सब्सिडी उनके खाते में मुहैया कराई जाएगी। उक्त फैसले के साथ ही मंत्रिमंडल ने ऊर्जा के तीन निगमों को सातवां वेतनमान देने पर मुहर लगा दी।
सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि राज्य के तीन नगर निगमों, 22 नगर पालिकाओं और 10 नगर पंचायतों की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
भविष्य में अन्य निकायों की सीमा में भी इजाफा किया जाएगा। अगले नगर निकाय चुनाव में नए विस्तारित क्षेत्र भी शामिल होंगे। निकायों के विस्तारित क्षेत्रों में जन सुविधाओं के लिए केंद्रीय योजनाओं का अधिक फायदा मिलेगा।
साथ ही नए बनने वाले वार्डों को विकास के लिए अधिक धनराशि उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड आवास नीति के तहत अगले पांच सालों में गरीबों को एक लाख आवास मुहैया कराने की कार्ययोजना को मंजूरी मिल गई है। इस कार्ययोजना को निजी भागीदारी से पूरा किया जाएगा। योजना में भागीदार निजी क्षेत्र को सरकार की ओर से रियायतें दी जाएंगी। राज्यभर में आवासहीन कमजोर वर्गों का चिह्नीकरण सर्वे नगर निकायों के जरिए कराया गया था। इस सर्वे के आधार पर ही निकायवार कमजोर वर्गों के लिए आवासों का निर्माण किया जाएगा। काबीना मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने राज्य के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लघु व सीमांत किसानों को एक लाख ऋण मात्र दो फीसद ब्याज दर पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस योजना को दीनदयाल सहकारिता सहभागिता योजना का नाम दिया गया है।

भारत सरकार की नजर में होगा नैनी झील का संरक्षण

पर्वतीय क्षेत्र नैनीताल यूं तो देश के साथ-साथ विदेशों में भी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिये जाना जाता है। हों भी क्यों ना? आखिर यहां नैनी झील ने सबको अपनी ओर आने पर विवश जो कर रखा है। आप यहां कभी भी आकर नैैनी झील में बोटिंग का लुफ्त उठा सकते है, परंतु इस बार नैैनी झील का जलस्तर घटने से जहां नैैनीताल की जनता के सम्मुख पेयजल की समस्या बनी हुयी है, तो वही पर्यटकों को आकर्षित करने वाली नैनी झील अब कम आकर्षित कर रही है और इसका प्रभाव यह देखने को मिला कि यहां पर्यटकों की संख्या अन्य वर्षों की तुलना में कम आंकी गई। लेकिन अब नैैनी झील के जलस्तर की डोर केद्र सरकार की अमृत योजना से दूर होगी।
भारत सरकार की अमृत योजना से नैनी झील में गिरने वाले क्षतिग्रस्त नालों को दुरुस्त करने, नालों की कवरिंग, पार्किंग आदि के लिए सात करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। झील का स्वामित्व सिंचाई विभाग को सौंपने के बाद लोक निर्माण विभाग ने यह प्रस्ताव भी सिंचाई विभाग को सौंप दिया है। दरअसल, ब्रिटिश शासनकाल में नैनी झील के संरक्षण-संवर्धन के लिए शहर की पहाड़ियों पर 62 नाले बनाए गए थे। इनमें से सात नाले झील के जलागम क्षेत्र सूखाताल में गिरते हैं, जबकि छह बलियानाला में। टूट-फूट व अन्य वजहों से इनमें से तीन नालों का अस्तित्व खत्म हो चुका है। 44 नाले सीधे नैनी झील में गिरते हैं। बारिश में इन्हीं नालों के माध्यम से झील रीचार्ज होती है। अतिक्रमण, कूड़ा-कचरा आदि की वजह से नालों का अस्तित्व खतरे में पड़ा तो हाईकोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा। झील में गिरने वाले नालों के किनारे से अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया गया। इसके बाद हरकत में आई मशीनरी द्वारा अतिक्रमण की वजह से बंद किए गए नालों को खोला गया। इसी साल गर्मियों में झील का जलस्तर रिकार्ड स्तर पर नीचे चला गया तो पूरी सरकार और शासन तंत्र हिल गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद झील का निरीक्षण करने व स्थानीय विशेषज्ञों से बात करने नैनीताल पहुंचे तो राज्यपाल ने उच्चस्तरीय बैठक कर कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई।
नालों के ऊपर जाली लगाने का प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता एमपीएस कालाकोटी के अनुसार अमृत योजनांतर्गत नालों को कवर करने का भी प्रावधान है, ताकि अतिक्रमण और कूड़ा-करकट से उनको बचाया जा सके। 23 नंबर नाले के दोनों ओर घनी आबादी है। इसलिए नाले के ऊपर जाली लगाने का भी प्रावधान किया गया है। मल्लीताल मस्जिद के पीछे तथा बीडी पांडे अस्पताल के समीप पार्किंग का भी प्रस्ताव है। झील के समीप के खुले नाले पर स्कवर बनाने की योजना है, ताकि अत्यधिक बारिश में पानी सड़क के बजाय सीधे झील में जाए।

दून की यह पर्वतारोही करेगी भागीरथी 2 पीक फतह

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में 03 सदस्यीय महिला पर्वतारोहियों के एक दल को भागीरथी 2 पीक के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 03 सदस्यीय महिला पर्वतारोहियों का यह दल देहरादून की पर्वतारोही माधवी शर्मा द्वारा लीड किया जा रहा है। हरियाणा की सविता मलिक और छत्तीसगढ़ की नैना धक्कड़ इस दल की दो अन्य सदस्य है। मुख्यमंत्री ने पर्वतारोही दल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इससे बालिकाओं में साहसिक और कठिन कार्यों को करने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज जब हम हिमालय की चिंता कर रहे हैं, हिमालय की पारिस्थितिकी की चिंता कर रहे हैं, ऐसे में बालिकाओं के इस साहसिक अभियान से लोगों को हिमालय से जुड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात की प्रशंसा की कि यह पर्वतारोही दल वापस लौटते समय अपने साथ हिमालय क्षेत्र में अन्य ट्रैकर्स द्वारा छोड़े गए कूड़े कचरे को भी अपने साथ वापस ले आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय की पारिस्थितिकी को स्वस्थ रखने के लिए उसका प्रदूषण मुक्त होना बेहद जरूरी है। उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म के लिए भी ऐसे अभियानों का बहुत महत्व है। उन्होंने पर्वतारोही दल में सम्मिलित सदस्यों के परिजनों को भी बधाई दी। टीम लीडर माधुरी शर्मा ने बताया कि टीम उत्तरकाशी में गौमुख से अपना अभियान प्रारंभ करेगी और भागीरथी2 चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ 18 सितंबर तक देहरादून लौट आएगी। उन्होंने बताया कि टीम के सभी सदस्यों ने एनआईएम उत्तरकाशी से अपनी ट्रेनिंग प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का एक मकसद यह भी है कि यह लड़कियों को उनके अंदर छिपी प्रतिभा, विश्वास और आत्म बल के प्रति प्रेरित कर सके। इसके साथ साथ ही वह दुनिया को यह भी दिखाना चाहती हैं कि उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म के लिए बहुत स्कोप है। उन्होंने कहा कि वह स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत अपना योगदान देते हुए, लौटते समय अपने साथ वहां अन्य ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों द्वारा छोड़े गए कचरे को भी वापस ले आएंगे। मुख्यमंत्री ने पर्वतारोही दल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह के रूप में श्री केदारनाथ की अनुकृति भेंट करते हुए उनके सफल अभियान की कामना की।

महिला क्रिकेटर से ऐसा कौन सा गिफ्ट पाकर कोच हुए गदगद

राज्य सरकार द्वारा खेल दिवस पर मानसी जोशी को सम्मानित किये जाने के बाद मानसी ने अपने गुरू को सम्मानित न करने पर नाराजगी जताई थी और वह खुद भी राज्य सरकार की ओर से सम्मान में दिए जाने वाली राशि पर नाखुश थी, लेकिन अपने गुरू के प्रति सच्ची श्रद्धा व सम्मान का भाव रखनी वाली मानसी ने उन्हें सरप्राइज गिफ्ट देने की मन में ठान ली थी।
गुरु की प्रेरणा से अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंची महिला क्रिकेटर मानसी जोशी ने अपने गुरु को उपहार स्वरूप कार भेंट की है। मानसी का कहना है कि कोच वीरेंद्र रौतेला की मेहनत का फल है कि वह आज इस मुकाम पर पहुंची हैं।
महिला विश्वकप की उपविजेता भारतीय टीम की सदस्य मानसी जोशी पिछले चार साल से क्रिकेट कोच वीरेंद्र सिंह रावत से प्रशिक्षण ले रही है। उनके सिखाए गुर और कठिन परिश्रम से मानसी ने 2016 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।
सालभर के अंदर ही उन्होंने भारतीय महिला टीम में अपना स्थान पक्का करते हुए विश्वकप के लिए चुनी गई टीम तेज गेंदबाज के रूप में जगह बनाई। मानसी ने अपनी सफलता का श्रेय देते हुए कहा कि आज जो कुछ भी हूं वो रौतेला सर की बदौलत हूं। सेंट जोजफ्स ऐकेडमी में उन्हीं के प्रयासों से प्रैक्टिस शुरू कर सकी। अपने गुरु को सम्मानित करने के लिए उन्होंने गुरू वीरेन्द्र रौतेला को स्विफ्ट डिजायर कार भेंट की। अपनी शिष्य से उपहार पाकर वीरेंद्र रौतेला गदगद हो गए। वीरेंद्र सिंह रौतेला ने कहा कि उन्हें इस तरह के सरप्राइज गिफ्ट की कल्पना नहीं थी। मानसी ने जो सम्मान दिया है उससे कोई भी गुरु फर्क महसूस कर सकता है। कोच का काम खिलाड़ी तैयार करना होता है। बिना लालच के अपने अनुभव और परिश्रम से वह देश के लिए खिलाड़ी तैयार करता है। मुझ गर्व है कि मानसी ने मुझे इस काबिल समझा।

जंगली हाथी के हमले से पालतू हाथी की हुयी मौत

तीन जिलों की सीमा में फैला राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज में एक पालतू हाथी की जंगली हाथी के हमले के दौरान मौत हो गई। जिससे क्षेत्र में रोष है। यह पालतू हाथी राजाजी टाइगर रिजर्व का था। बताया जा रहा है कि राजाजी टाइगर रिजर्व में राजा नाम से प्रसिद्ध इस पालतू हाथी पर जंगली हाथी ने हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गयी। घटना से राजाजी प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल राजा 1993 में रेलवे ट्रैक पर पड़ा हुआ मिला था राजा। तभी से पार्क प्रशासन इसका पालन पोषण कर रहा था। राजा पर्यटकों को सफारी भी करा रहा था।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन दुनिया के अन्य आंदोलन से अलग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शहीद स्थल झूलाघर, मसूरी में 02 सितम्बर 1994 को मसूरी गोली कांड में शहीद हुए आन्दोलनकारियों स्व0 बेलमती चौहान, स्व0हंसा धनई, स्व0बलबीर सिंह नेगी, स्व0 धनपत सिंह, स्व0 मदन मोहन ममगाई एवं स्व0 राय सिंह बंगारी को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के लिए इन जाबांजों के बलिदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन दुनिया के अन्य आन्दोलनों से अलग रहा है। इस आन्दोलन में मातृशक्ति एवं सैनिक पृष्ठभूमि की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह एक ऐसा आन्दोलन था जो लगातार चलता रहा। आन्दोलन के दौरान इसमें कभी भी ब्रेक नहीं लगा। इस आन्दोलन में प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति की किसी न किसी रूप में भागीदारी रही। प्रेस ने भी समाचार पत्रों के माध्यम से इस आन्दोलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी की आबादी 50 हजार है जबकि प्रतिवर्ष यहां 30 लाख पर्यटक आते हैं। पार्किंग की छमता कम है इसके लिए पार्किंग की व्यवस्था की जायेगी। इसके साथ ही मोनो रेल पहुंचाने के लिए योजना बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियो के सपनों को साकार करने के लिए जैसा राज्य वे चाहते थे उसके अनुरूप हमें राज्य के विकास को आगे बढ़ाना होगा। राज्य के विकास के लिए पलायन को रोकना, रोजगार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा। पलायन को रोकने एवं रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए 13 डिस्ट्रिक 13 न्यू डेस्टिनेशन पर राज्य सरकार का विशेष फोकस है। कृषि और उद्योगों के विकास के लिए भी निरन्तर प्रयास किये जा रहे है। जिससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि देहरादून में एक संस्कृति ग्राम विकसित किया जा रहा है। जिसमें सम्पूर्ण उत्तराखण्ड की झलक एक साथ दिखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती हमारा आधार है इसके लिए चकबन्दी का कार्य शुरू किया जा रहा है। चकबंदी के लिए एक हजार पटवारियों की भर्ती की जायेगी तथा रिटायर तहसीलदारों की नियुक्ति की जायेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुगम बनाने के लिए आर्मी से डॉक्टरों की मांग की जा रही है। 71 डाक्टरों ने जिसमें सहमति भी जताई है। इसके पश्चात् मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शहीद स्थल मसूरी के निकट हिमवंत कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

ईद उल अजहा में नमाज को खुले गुरूद्वारे

जहां एक और धर्म, मजहब के नाम पर रार मची है। वहीं देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक सहिष्णुता की नजीर पेश हुई है। आदि गुरु शंकराचार्य की तपस्थली जोशीमठ में गुरुद्वारे में ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज मुस्लिम भाईयों ने पढ़ी। बारिश और ठंड को देखते हुए गुरुद्वार प्रबंधन ने नमाज पढ़ने के लिए गुरुवारे के द्वार खोल दिए।
जानकारी के अनुसार चमोली जिले के जोशीमठ में रात भर से भारी वर्षा और ठंड हो रही है। ईद के मौके पर मुस्लिम समाज के लोग नमाज पढ़ना चाहते थे। लेकिन भारी बारिश से खुले मैदान में नमाज पढ़ना मुश्किल हो रहा था। लगभग 600 लोग नमाज अता करने के लिए गांधी मैदान की तरफ आ रहे थे। बारिश और ठंड को देखते हुये जोशीमठ के गुरुद्वारे प्रबंधक ने मुस्लिम भाईयों से गुरुद्वारे में नमाज अता करने के लिए आमंत्रित किया। सभी मुस्लिम समाज के लोगों ने यहां गुरुद्वारे में नमाज पढ़ी। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़ी। इस दौरान देश की एकता और तरक्की की दुआ मांगी गई। नमाज के बाद अन्य धर्म के लोगों ने भी ईद की मुबारक दी और एक दूसरे के गले लगे।

7वर्ष पूर्व पत्नी के टुकड़े करने वाले पति का क्या हुआ, अधिक पढ़े

देहरादून के चर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में कोर्ट ने हत्यारे पति को उम्रकैद की सजा सुनाई हैं। साथ ही उस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साल 2010 में अनुपमा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्यारे पति ने लाश के कई टुकड़े कर उसे फ्रीजर में छिपा दिया था। लगभग 7 साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।
दिल दहला देने वाला यह मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का है। बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में गुरुवार को जज ने अपना फैसला सुनाते हुए हत्यारे पति राजेश गुलाटी को दोषी करार दिया और शुक्रवार को उसे उम्रकैद की सजा सुना दी। राजेश को आईपीसी की धारा 302, हत्या और 201, सबूत मिटाने के आरोपों के तहत दोषी करार दिया गया।
अदालत में अंतिम तथ्य पेश करने के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि राजेश गुलाटी पर हत्या की धारा नहीं बनती, क्योंकि इस केस में कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। जबकि अभियोजन पक्ष ने कहा कि लाश के टुकड़े राजेश के फ्लैट से मिले थे। ऐसे में अपने आप साबित होता है कि आरोपित ने ही हत्या की है।
बताते चलें कि कत्ल की यह सनसनीखेज वारदात कैंट कोतवाली क्षेत्र के प्रकाशनगर में 11 दिसंबर, 2010 को सामने आई थी। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी यहां एक मकान में पत्नी अनुपमा और दो बच्चों के साथ रहता था। अनुपमा 17 अक्टूबर, 2010 को अचानक लापता हो गई थी। बच्चों द्वारा मां के बारे में पूछे जाने पर राजेश उन्हें दो महीने तक टालता रहा। 11 दिसंबर को अनुपमा का भाई राजेश के घर पहुंचा तो उसे घर में घुसने नहीं दिया गया। जिसके बाद उसने पुलिस को इसकी सूचना दी। घर की तलाशी के दौरान पुलिस को राजेश के घर में रखे डीप फ्रीजर से अनुपमा की लाश के टुकड़े मिले। राजेश ने अनुपमा की लाश के 72 टुकड़े किए थे। इन टुकड़ों को वह धीरे-धीरे मसूरी के जंगलों में ठिकाने लगा रहा था। पति-पत्नी के बीच अक्सर होने वाला मामूली झगड़ा कब मारपीट में तब्दील हुआ और कब इसने खूनी बदले की शक्ल अख्तियार कर ली, पता ही नहीं चला। अनुपमा जल्लाद पति के इसी गुस्से का शिकार हुई थी।

जानिए सीएम ने किसको दिलाई शपथ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में अधिकारियों व कर्मचारियों को हिमालय बचाओ अभियान की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि 09 एवं 10 सितम्बर को हिमालय दिवस का आयोजन किया जाएगा और हिमालय के पर्यावरण पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को सन्तुलित करने में हिमालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हिमालय जल, जीवन और पर्यावरण का मूल आधार है। पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए सभी को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि सभी को संकल्प लेना होगा कि हिमालय को किसी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के लिए हर दिन हिमालय दिवस है। यहाँ का आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ताना बाना हिमालय पर पूर्ण रूप से आधारित है। हिमालय के संरक्षण और समृद्धि में ही हमारी समृद्धि है। इस अवसर पर मुख्य सचिव एस.रामास्वामी सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।