सभी अस्पतालों में कल से मॉक ड्रिल प्रारंभ, कोविड19 को लेकर की जाएगी

कोविड-19 के नए वैरीअंट के विश्व के कुछ देशों में बढ़ते प्रभाव के दृष्टिगत उत्तराखंड राज्य मे समय बद तैयारियां की जा रही है। हालांकि वर्तमान तक इस नए वैरीअंट को लेकर भारतवर्ष में किसी भी प्रकार की खतरे की आशंका नहीं जताई गई है, भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार उत्तराखंड राज्य में दिनांक 27 दिसंबर 2022 को समस्त चिकित्सा इकाइयों में कोविड-19 प्रबंधन की चाक-चौबंद व्यवस्था के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है।
इस मॉक ड्रिल के सफल आयोजन के दृष्टिगत सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा डॉ आर राजेश कुमार द्वारा आज सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों एवं चिकित्सा अधीक्षकों के साथ वर्चुअल माध्यम से बैठक की गई व सभी को कोविड-19 के समुचित प्रबंधन के लिए चिकित्सा इकाइयों को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। इस मॉक ड्रिल के अंतर्गत सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों को एक एक चिकित्सा इकाई में मॉक ड्रिल किए जाने के लिए नामित किए जाने हेतु निर्देशित किया गया । समस्त मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को इस मॉक ड्रिल की कड़ी समीक्षा किए जाने के लिए निर्देशित किया गया। राज्य स्तर से भी उच्च अधिकारियों को चयनित चिकित्सा इकाइयों में प्रतिभा किए जाने हेतु नामित किए जाने के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को निर्देशित किया गया।

कोविड गाइडलाइन की सही जानकारी न होने पर खबर प्रसारित न करेंः राजेश कुमार

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा सोशल मीडिया में यह प्रचारित किया जा रहा है कि उत्तराखंड में पर्यटकों का आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि ऐसी कोई गाइडलाइंस जारी नहीं की गई है। राज्य में आने वाले यात्रियों के लिए वर्तमान मे कोविड-19 जांच की कोई बाध्यता नहीं है हालांकि किसी भी प्रकार के लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य सेवा केंद्र में संपर्क किया जाना आवश्यक है। यदि किसी भी व्यक्ति को लक्षण होते हैं तो वह अपनी कोविड-19 जांच करवाएं।
पर्यटकों को किसी प्रकार के घबराने व डरने की जरूरत नहीं है। राज्य में स्थितियां पूरी तरह नियंत्रण में हैं। पर्यटक बिना रोक टोक के राज्य में यात्रा कर सकते हैं।

’भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर मास्क जागरूकता को चलाया जा रहा है अभियान’

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय प्रसाशन की टीमें आम जनता को जागरूक करने के लिए अभियान चला रही हैं। हम सभी को मास्क पहनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आम जनमानस को मास्क पहनने वह कोविड-19 एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन किए जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने तथा सतर्कता बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

’एयरपोर्ट व राज्य की सीमाओं पर अभी नहीं होगी सेम्पलिंग’

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा प्रदेश के एयरपोर्ट व सीमाओं पर अभी किसी भी प्रकार की सेम्पलिंग के आदेश नहीं दिए गए हैं। सभी पूर्व की भांति चलता रहेगा। यात्री किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें।

’राज्य में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में’

राज्य में बूस्टर डोज को लेकर अभियान शुरू कर दिया गया है।
यदि किसी व्यक्ति को कोविड-19 की प्रिकॉशनरी डोज नहीं लगी है तो वह शीघ्र अति शीघ्र यह डोज प्राप्त करें। राज्य में कोविड को लेकर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। हमारे पास दवाइयों से लेकर सभी संसाधन पूरे हैं। हम भारत सरकार की गाइडलाइंस को देखकर आगे बढ़ रहे हैं।

कोविड पर प्रभावी अंकुश लगाने को शुक्रवार से चलेगा बूस्टर डोज लगाने का कैंप

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि कोविड-19 पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य में बूस्टर डोज लगवाने का अभियान चलाया जाए। बूस्टर डोज लगवाने के लिए कल से ही कैम्प लगाना शुरू करें। जनपदों में बूस्टर डोज के लिए कैम्प लगाए जाएं। सभी जनपदों में कंट्रोल रूम सक्रिय किये जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के जो भी नये मामले आयेंगे, उनकी जीनोम सिक्वेंसिंग भी कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि बूस्टर डोज लगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए। इसका विभिन्न माध्यमों से व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार भी किया जाए। उन्होंने मुख्य सचिव को कोविड की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड बूस्टर डोज की जितनी आवश्यकता है, शीघ्र केन्द्र सरकार को डिमांड भेजी जाए। सभी आवश्यक संसाधनों की पूर्ण उपलब्धता रखी जाए।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बैठक में वर्चुअल प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि बूस्टर डोज पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा की राज्य में कोविड की प्रथम एवं द्वितीय डोज लगभग शत प्रतिशत लोगों को लग चुकी है। बूस्टर डोज के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अशोक कुमार, सचिव रंजीत सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव अमरदीप कौर एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

कोरोना वायरसः सभी के लिए एहतियात और वैक्सीनेशन अनिवार्य

कोरोना वायरस के लिए ओमिक्रॉन BF.7 वैरिएंट के खतरे को देखते हुए उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग सतरर्कता बरत रहा है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने आज जिलों के सीएमओ केसाथ वर्चुअल मीटिंग की और कोविड के नए वैरिएंट से संभावित हालातों पर चर्चा की। विभाग ने नई एसओपी जारी करते हुए सभी एहतियात बरतने और वैक्सीनेशन को अनिवार्य करने की सलाह दी है। इसके लिए जागरुकता अभियान पर जोर देने की बात कही गई है। Uttarakhand health depatt issues sop regarding new covid 19 variant

नई एसओपी के अनुसार

1. अस्पतालोंमें आने वाले सभी Influenza like illness (ILI) / Severe Acute Respiratory illness ( SARI) के रोगियों की कोविड-19 जांच की जाये एवं उक्त सभी रोगियों का विवरण अनिवार्य रूप से आई०डी०एस०पी० के अंतर्गत Integrated Health Information Platform (IHIP) पोर्टल में प्रविष्ट किया जाये।

2. आम जनमानस में कोविड-19 से बचाव हेतु कोविड एप्रोप्रियेट व्यवहार के प्रति जागरूकता हेतु विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। त्योहारों के सीजन में भीड-भाड़ वाले स्थानों पर लोगो को मास्क का उपयोगकिये जाने हेतु प्रेरित किया जाये।

3. भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार कोविड-19 टीकाकरण कवरेज को बढ़ाया जाये। पूर्ण कोविड़ 19टीकाकरण के लिए आम जनता को नियमित रूप से प्रेरित करने हेतु जागरूकता की जाये हाई रिस्क आबादी में अनिवार्य रूप से टीकाकरण पूर्ण किया जाये।

4. चिकित्सा ईकाइयों में कोविड़ – 19 संक्रमित रोगियों के उपचार हेतु पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन सिलेण्डर, आक्सीजन कसंनट्रेटर, आक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, आई०सी०यू० बेड एवं आवश्यक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। सम्बन्धित चिकित्सा इकाईयों में स्थापित ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट की क्रियाशीलता सुनिश्चित की जाये।

5. दैनिक रूप से राजकीय एवं निजी चिकित्सा इकाईयों में कोविड-19 संक्रमित भर्ती रोगियों की सूचना प्राप्त की जाये एवं रोगियों के स्वास्थ्य दशा की निरन्तर निगरानी करते हुये समीक्षा की जाये। यह सुनिश्चित किया जाये कि कोविड- 19 संक्रमित रोगियों को ससमय पूर्ण उपचार प्राप्त हो

6. हल्के लक्षण वाले कोविद्ध-19 संक्रमित रोगियों को होम आईसोलेशन में ही उपचार प्रदान किया जाये एवं निरन्तर उनके स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी की जाये। ऐसे रोगियों में किसी भी प्रकार के गम्भीर लक्षण होने पर शीघ्र हीं उन्हें सम्बन्धित चिकित्सालय में संदर्भित किया जाये।

7. कोविड-19 जॉच हेतु आई०सी०एम०आर०, भारत सरकार के दिशा निर्देशों का पालन किया जाये।

8. समुदाय स्तर पर यदि किसी जगह कोविड- 19 फीवर अथवा ILI / SARI कैस की क्लस्टरिंग मिलती है तो वहां पर त्वरित जांच सुविधा की उपलब्धता एवं निरोधात्मक कार्यवाही की जाये।

9. कोविड- 19 जॉच में RTPCR द्वारा पॉजिटिव पाए गए सभी रोगियों के सैंपल Whole Genome Sequence (WGS) जांच हेतु राजकीय दून मेडिकल कॉलेज को प्रेषित किये जाएं एवं wGs जांच हेतु प्रेषित सभी सैंपलों की सूचना अनिवार्य रूप से आई०डी०एस०पी० के अंतर्गत Integrated Health Information Platform (IHIP) पोर्टल में प्रविष्ट किया जाये।

मां आनंदमयी मेमोरियल स्कूल में आयोजित नेत्र जांच शिविर में सैकड़ों बच्चे हुए लाभान्वित

नेगी आई केयर सेंटर ऋषिकेश की ओर से एक दिवसीय निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर (स्कूल स्क्रीनिंग कैम्प) का आयोजन रायवाला स्थित मां आनंदमई मेमोरियल स्कूल में किया गया।

शिविर का शुभारंभ स्कूल की प्रधानाचार्य सुतोपा बॉस ने किया। इस मौके पर स्कूल में 200 से अधिक बच्चों का नजर की जांच एवं कलर विजन की जांच की गई। नेगी आई केयर सेंटर के संचालक डॉ राजे नेगी ने बताया कि 2 दर्जन से अधिक बच्चों की आंखों की नजर में कमजोर पाई गई जिनको नजर का चश्मा लगाने की सलाह दी गई।

साथ ही इस मौके पर स्कूली बच्चों को मोबाइल की लत से बचाव एवं खानपान में उचित पौष्टिक आहार लेने की बात बताई गई। स्कूल की प्रधानाचार्य ने कहा कि सही समय पर अगर बच्चों की आंखों की जांच होती रहे तो उससे भविष्य में आंखों में होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके साथ ही बच्चों को अपना करियर चुनने में भी मदद मिलती है। इस मौके पर मनोज नेगी, बंधन शर्मा, ममता, मानसी, प्रिया सहित स्कूल की तमाम शिक्षिकाएं मौजूद रही।

पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग के साथ की मैराथन बैठक

उत्तराखंड को ड्रग्स फ्री स्टेट बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में शीघ्र ही ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि/2025 अभियान’ चलाया जायेगा। इस अभियान के तहत प्रत्येक माह शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थानों, अनाथालयों, जिला कारागारों एवं सरकारी कार्यालयों में जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। सभी शिक्षण संस्थानों मेंएंटी ड्रग्स सेल का गठन अनिवार्य रूप से करना होगा। राज्य सरकार शीघ्र ही एंटी ड्रग्स एंड रिहेबिलिटेशन पॉलिसी लाने जा रही है। जिसका ड्राफ्ट स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है, इसके लिये सभी संबंधित विभागों से दो सप्ताह के भीतर सुझाव देने को कहा गया है।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में आज सचिवालय स्थित एफआरडीसी सभागार में उत्तराखंड को ड्रग्स फ्री स्टेट बनाने को लेकर मैराथन बैठक हुई। जिसमें डा. रावत ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड को वर्ष 2025 तक ड्रग्स फ्री स्टेट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके शीघ्र ही एंटी ड्रग्स एंड रिहेबिलिटेशन पॉलिसी अस्तित्व में आ जायेगी। राज्य में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को इस अभियान का नोडल बनाया गया है। पुलिस, समाज कल्याण, श्रम, सेवा योजन एवं कौशल विकास, विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि शिक्षा एवं आयुष शिक्षा आदि विभागों को भी अभियान में शामिल किया गया है।

डा. रावत ने बताया कि अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर तक राजकीय एवं निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों, निजी उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, जिला कारागारों, अनाथालयों एवं सरकारी कार्यालयों में ड्रग्स के दुष्प्रभावों को लेकर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। अभियान में ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायतों, नगर निकायों को भी शामिल किया जायेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अभियान के साथ ही जो युवा ड्रग्स की चपेट में आ चुके हैं उनके पुनर्वास के लिये समुचित व्यवस्था की जायेगी जिसके तहत राज्य सरकार के मानसिक चिकित्सालयों को उच्चीकृत करने के साथ ही काउंसलर एवं मनोचिकित्सक की तैनाती की जायेगी। इसके साथ ही जो एनजीओ इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं उनके माध्यम से भी पुनर्वास का कार्य कराया जायेगा। साथ ही ऐसे एनजीओ स्टेट मेंटल हेल्थ आथॉरिटी में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा ताकि समय समय इनके द्वारा किये जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ऐसे युवाओं के पुनर्वास एवं उपचार के निःशुल्क दवा, टेली मनस के माध्यम से काउंसिलिंग की व्यवस्था उपलब्ध है। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि प्रत्येक जिले में रिहेबिलिटेशन सेंटर बनाया जाना चाहिये साथ ही जो लोग इस धंधे में लिप्त हैं उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही जो एनजीओ सरकार के सहयोग से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं उनके लिये भी नियम बनाये जाने जरूरी हैं ताकि सरकारी सहयोग लेने के उपरांत सही ढंग से काम न करने वाले एनजीओ के विरूद्ध भी कार्रवाई की जा सके। बैठक में सचिव कृषि शिक्षा बीवीआरसी पुरूषोत्तम ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में ड्रग्स को रोकने के लिये जो प्रावधान तैयार किये जायेंगे उनको सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों के साथ ही निजी शिक्षण संस्थानों में भी लागू किया जाना चाहिये। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि एंटी ड्रग्स एंड रिहेबिलिटेशन पॉलिसी का प्रारूप लगभग तैयार कर दिया गया है। एक बार संबंधित विभागों को ड्राफ्ट का प्रारूप भेजकर सुझाव आमंत्रित किये जायेंगे, उसके पश्चात ड्राफ्ट को अंतिम रूप देकर स्वीकृति के लिये कैबिनेट में लाया जायेगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर डॉ0 मयंक बडोला ने ड्रग्स एवं उसके दुष्प्रभाव को लेकर एक पावर प्वाइंट के माध्यम से प्रस्तुतिकरण भी दिया।

बैठक में पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड अशोक कुमार, सचिव कृषि बीवीआरसी पुरूषोत्तम, एडीजी पुलिस बी मुरूगेशन, सचिव स्वास्थ्य आर राजेश कुमार, अपर सचिव कृषि रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव समाज कल्याण कर्मेन्द्र सिंह, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, अपर सचिव स्वास्थ्य अमनदीप कौर, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डा. एएस उनियाल, ड्रग कंट्रोलर ताजबर नेगी, नीरज कुमार सहित सहित श्रम एवं कौशल विकास, समाज कल्याण तथा तकनीकी शिक्षा के अधिकारी उपस्थित रहे।

निःशुल्क पैथोलॉजी जांच योजना का लाभ उठा रहे राज्यवासी

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार एवं सुढृढ़िकरण को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। लोगों को सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार द्वारा ‘निःशुल्क पैथोलॉजी जांच योजना’ चलाई जा रही है, जिसके तहत आम जनता को 266 पैथोलॉजी जांच निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इस महत्वकांक्षी योजना के तहत सभी सरकारी अस्पतालों में हर प्रकार की पैथोलॉजी जांचे जिसमें बायोप्सी, कैंसर मार्कर, हार्माेन प्रोफाइल, विटामिन स्तर नापने जैसी तमाम महंगी जांचें शामिल है। अब तक प्रदेशभर में 6.72 लाख से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं जबकि अबतक 23 लाख से अधिक पैथोलॉजी जांचे हो चुकी हैं। निःशुल्क योजना के तहत प्रत्येक दिन औसतन 1500 लोगों की 5 हजार से अधिक पैथोलॉजी जांचे निःशुल्क की जा रही हैं।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेश के आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करने के लिये राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। डॉ रावत ने बताया कि सरकार ने आम लोगों की विकट परिस्थिति को देखते हुये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ‘निःशुल्क पैथोलॉजी जांच योजना’ संचालित की है, जिसके तहत लोगों के विभिन्न रोगों से संबंधित 266 पैथोलॉजी जांच मुफ्त में की जा रही है, जो कि प्रदेशभर के सभी राजकीय चिकित्सालयों में उपलब्ध है। विभागीय मंत्री ने बताया कि ‘निःशुल्क पैथोलॉजी जांच योजना’ 12 अगस्त 2021 को शुरू की गई थी तब से लेकर अब तक प्रदेशभर में 6 लाख 72 हजार 154 लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इस योजना के तहत अबतक कुल 23 लाख 10 हजार 305 पैथोलॉजी जांच मुफ्त में की जा चुकी है। जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 38344 मरीजों की 128518 पैथोलॉजी जांचे मुफ्त में की गई जबकि बागेश्वर में 16382 मरीजों की 64307 जांचे, चमोली में 23246 मरीजों की 70944 जांचे, चम्पावत में 25685 मरीजों की 92226, देहरादून में 165016 मरीजों की 513920 जांचे, हरिद्वार में 90829 मरीजों की 324567 जांचे, नैनीताल में 60786 मरीजों की 177295 जांचे, पौड़ी जनपद में 32904 मरीजों की 115710, पिथौरागढ़ में 45008 मरीजों की 180797 जांचे, रूद्रप्रयाग में 11462 मरीजों की 45272 जांचे, टिहरी गढ़वाल में 28680 मरीजों की 98872 जांचे, ऊधमसिंह नगर में 112523 मरीजों की 428805 जांचे, उत्तरकाशी में 21289 मरीजों की 69072 जांचे की जा चुकी हैं। डॉ रावत ने बताया कि प्रदेशभर के सभी राजकीय चिकित्सा इकाईयों में प्रत्येक दिन में औसतन 1500 लोगों की 5 हजार से अधिक पैथोलॉजी जांचे मुफ्त में की जा रही है। उन्होंने कहा कि निःशुल्क पैथोलॉजी जांच योजना के अंतर्गत ऐसी पैथोलॉजी जांचे जो प्रदेश के चिकित्सालयों में उपलब्ध नहीं हो पा रही थी ऐसी जांचे निजी क्षेत्र के सेवा प्रदाता के माध्यम की उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना के तहत हर प्रकार की पैथोलॉजी जांचे जिसमें बायोप्सी, कैंसर मार्कर, हार्माेन प्रोफाइल, विटामिन स्तर नापने जैसी तमाम महंगी जांचें भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, यह सम्पूर्ण कार्यप्रणाली ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है, साथ ही रोगियों को एस0एम0एस0 के माध्यम से रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि निःशुल्क जांच सैम्पल का टी0ए0टी0 (टर्न अराउण्ड टाइम) निर्धारण किया गया है जिससे रोगियों की जांच रिपोर्ट ससमय उपलब्ध करायी जा रही है।
डॉ रावत ने कहा कि निःशुल्क पैथोलॉजी जांच योजना प्रदेश के आम लोगों को खासकर पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के लिये वरदान साबित हो रही है। इस योजना से जहां लोगों को अस्पताल में ही निःशुल्क जांच की सुविधा मिल रही है वहीं उन्हें निजी पैथोलॉजी सेंटरों के चक्कर भी नहीं काटने पड़ रहे हैं। जिससे उनका समय और पैसा बच रहा है।

सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री

सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस पर बनारस में आयोजित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के अंतरराज्यीय सम्मलेन में आज सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रतिभाग किया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में डॉ रावत ने उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड में तेजी से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी चिकित्सा इकाईयों में आम लोगों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराई वहीं लगभग 260 पैथोलॉजी जांचे मुफ्त में की जा रही है। डॉ रावत ने बताया कि उत्तराखंड में आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 49 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी उन्मूलन को लेकर लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में 13752 सक्रिय टीबी मरीज है जिसमें से 11664 मरीजों द्वारा निरूक्षय से सहायता प्राप्त की दी गई, जिसके सापेक्ष 7675 निक्षय मित्र बनाये जा चुके हैं। निक्षय मित्र बनाने में उत्तराखंड देशभर में दूसरे स्थान पर है। सम्मेलन में डॉ रावत ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 तक सूबे में कुल 1422 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का उच्चीकरण किया गया और दिसम्बर 2022 तक 1800 वेलनेस सेंटरों को स्थापित किया जायेगा। विभगीय मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 7 सितम्बर 2022 से 7 अक्टूबर 2022 तक जन आरोग्य अभियान संचालित किया गया जिसमें सीएचओ के माध्यम से 10-10 गांव में स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस अभियान के तहत 3 लाख 21हजार 236 लोगों का मेडिकल चेकअप किया गया। जिसमें 2 लाख 67 हजार 263 लोगों का रक्तचाप स्क्रीनिंग की गई, 2 लाख 58 हजार 231 लोगों की मधुमेह जांच की गई, 2 लाख 46 हजार 592 लागों के ओरल कैंसर की जांच, 1 लाख 39 हजार 116 महिलाओं के स्तन कैंसर की जांच, 2 लाख 8 हजार 944 लोगों का नेत्र परीक्षण, 1 लाख 94 हजार 385 लोगों का टीबी रोग परीक्षण किया गया जबकि 2 लाख 5 हजार 980 लोगों को तम्बाकू निषेध के प्रति जागरूक किया गया। डॉ0 रावत ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार बेहतर करने जुटी है।
सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखंड द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जमकर सराहना की, साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ रावत के कार्यों की प्रशंसा भी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का अर्थ है देश में रहने वाले सभी लोगों और समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना। इसका उद्देश्य यह भी है कि जाति, धर्म, लिंग, आय स्तर और सामाजिक स्थिति में भेदभाव किए बगैर सभी को वहनीय, उत्तरदायी, गुणवत्तापूर्ण और यथोचित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सुनिश्चित करना है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के 900 से अधिक सीएचओ ने भी प्रतिभाग किया।

664 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को जल्द मिलेंगे नियुक्ति पत्र

आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के अंतर्गत 664 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सी.एच.ओ.), की नियुक्ति को लेकर रिजल्ट जारी किया जा चुका है व काउंसलिंग प्रक्रिया शीघ्र ही आरंभ होगी, जिसके बाद चयनित सी.एच.ओ. को मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे यह बात प्रभारी सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा व एन.एच.एम. मिशन निदेशक डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा बतायी गई।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में सी.एच.ओ. के पदों हेतु एच.एन.बी. मेडिकल यूनिवर्सिटी के माध्यम से रिजल्ट जारी किया जा चुका है व काउंसीलिंग प्रक्रिया भी शीघ्र ही आरंभ होगी। नवनियुक्त सी.एच.ओ. को नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री पुष्कर धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा दिए जाएंगे।
डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा बताया गया कि सी.एच.ओ. की नियुक्ति के बाद सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में गैर-संचारी रोग जैसे टी.बी., तंबाकू निषेध, मेंटल हेल्थ, डायबिटीज, कैंसर, बल्ड प्रेशर (हाइपरटेंशन), आंखों की कमजोरी, नाक, गले आदि से जुड़ी बिमारियों की स्क्रीनिंग में तेजी आएगी, जिससे समय पर रोगों का पता लग सकेगा व इलाज संभव होगा। सी.एच.ओ. द्वारा टारगेट पोपुलेशन जो कि मैदानी क्षेत्रों में 5,000 व पहाड़ी क्षेत्रों में 3,000 है में 30 से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग की जाती है।

स्वास्थ्य मंत्री डा. रावत ने थपथपाई विभागीय अधिकारियों की पीठ

हरिद्वार जनपद के रूड़की उप जिला अस्पताल को गुणवत्ता पूर्ण कार्यों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिये भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) एवं लक्ष्य पुरस्कार द्वारा नवाजा गया। जिस पर विभागीय मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेहत्तर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता हैं।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने जनपद हरिद्वार के उप-जिला चिकित्सालय (एस.डी.एच.), रुड़की को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एन.क्यू.ए.एस.) व लेबर रूम गुणवत्ता सुधार पहल (लक्ष्य सर्टिफिकेशन) पुरस्कार से नवाजे जाने पर खुशी जाहिर की। उन्होंन कहा कि वर्ष 2022 हेतु एसडीएच रूड़की को यह पुरस्कार 07 अलग-अलग प्रभागों सामान्य प्रशासन, लेबर रूम, मैटरनिटी ओ.टी., जनरल ओ.टी., ब्लड बैंक, मैटरनिटी वार्ड व प्रयोगशाला में गुणवत्ता पूर्ण कार्य के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि सर्वे टीम द्वारा माह अगस्त में उप-जिला चिकित्सालय, रुड़की का निरीक्षण किया और अस्पताल में मानकों के अनुरूप सभी चिकित्सकीय व्यवस्थाएं पाई। चिकित्सालय में अलग उच्च निर्भरता इकाई (एच.डी.यू.), ट्रेज रूम, सेप्टिक लेबर रूम के साथ ही उत्तराखंड के पहले कार्यात्मक एलडीआर लेबर रूम का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही चिकित्सालय में पूरी तरह से स्वचालित कपड़े धोने की मशीन, प्रयोगशाला में टोकन सिस्टम, ओ.टी. ज़ोनिंग, नवीनतम तकनीक से युक्त व दिव्यांगजनों के अनुकूल शौचालय आदि जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।

विभागीय मंत्री ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टॉफ, तकनीकी स्टॉफ, फैसिलिटी इंचार्ज, गुणवत्ता विभाग के नोडल, नर्सिंग टीम, हाउसकीपिंग टीम व प्रशासनिक टीम के कठिन परिश्रम व आम जनमानस को उपलब्ध कराई गई स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते एन.क्यू.ए.एस. एवं लक्ष्य सर्टिफिकेशन प्राप्त किया, इसके लिये चिकित्सालय की समस्त टीम को बधाई और शुभकामनाएं। डॉ0 रावत ने बताया कि प्रदेश में अब तक कुल 05 चिकित्सा इकाइयों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एन.क्यू.ए.एस.) व 14 चिकित्सा इकाइयों को लेबर रूम गुणवत्ता सुधार पहल (लक्ष्य सर्टिफिकेशन) प्रमाणपत्र मिल चुका है। जबकि एन.क्यू.ए.एस. के लिए 08 चिकित्सा इकाइयों व लक्ष्य सर्टिफिकेशन के लिए 12 चिकित्सा इकाइयों को सार्टिफिकेशन की प्रक्रिया गतिमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेहत्तर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।