चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टॉफ का बनेगा पृथक कैडर

चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय स्थित मुख्य सचिव सभागार में आयोजित बैठक में चारधाम यात्रा मार्ग पर तीर्थ यात्रियों की सुविधा को देखते हुये नये अस्पताल खोलने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही इन अस्पतालों के लिये चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ का पृथक से कैडर बनाया जायेगा। मुख्य सचिव डॉ एसएस संधु ने प्रभारी सचिव स्वास्थ्य आर राजेश कुमार को नये अस्पतालों की शीघ्र डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिये हैं।
स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि चार धाम यात्रा मार्ग पर तीर्थ यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुये यात्रा मार्ग पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नये अस्पताल खोलने का निर्णय लिया गया है। इन अस्पतालों में चिकित्सकों, टेक्नीशियनों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ के लिये पृथक कैडर बनाया जायेगा, जिनको अन्य अस्पतालों से अधिक वेतनमान दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर डीपीआर बनाकर कैबिनट के लिये प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दे दिये गये हैं। रावत ने कहा कि आने वाले समय में चार धाम यात्रियों की संख्या डेढ़ से दो गुना बढ़ने की पूरी संभावना है। इसी के मध्यनजर सूबे के चार धाम यात्रा रूट पर स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहत्तर बनाने का निर्णय लिया गया है। इन अस्पतालों में योगदान देने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सकों, टेक्नीशियनों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ को अपेक्षाकृत अधिक वेतनमान एवं चार धाम यात्रा भत्ता दिया जायेगा। इससे चार धाम यात्रा पर आने वाले सभी यात्रियों को बेहत्तर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चार धाम यात्रा मार्ग पर उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं संबंधी प्रस्तुतिकरण भी दिखाया गया।
बैठक में मुख्य सचिव डॉ एसएस संधु, प्रभारी सचिव स्वास्थ्य आर राजेश कुमार, महानिदेशक स्वास्थ्य डा शैलजा भट्ट, निदेशक एनएचएम डॉ सरोज नैथानी, संयुक्त निदेशक डॉ आरपी खंडूडी, सीएमओ रूद्रप्रयाग सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

एमएसजी में बतौर सदस्य नामित हुए स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में गठित मिशन स्टेरिंग ग्रुप (एमएसजी) में सूबे के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत को बतौर सदस्य नामित किया गया है। जिसके आदेश केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कर दिये गये हैं। मिशन संचालन समूह देशभर में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के समग्र कार्यान्वयन एवं प्रगति की निगरानी के साथ-साथ नीति-निर्देशन का कार्य भी करेगा। मिशन स्टेरिंग ग्रुप का सदस्य नामित किये जाने पर रावत ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का आभार व्यक्त किया।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को मिशन स्टेरिंग ग्रुप (एमएसजी) का सदस्य नामित किया गया है। एमएसजी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गठित सर्वाेच्च नीति निर्धारण एवं संचालन निकाय का दर्जा दिया गया है, जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन एवं प्रगति की निगरानी कर नीति-निर्देश एवं मार्गदर्शन का काम करेगा। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक सुधार करने वाले केरल एवं सिक्कम राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों को भी केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमएसजी में बतौर सदस्य नामित किया है। इसके अलावा नीति आयोग के सदस्य (हेल्थ), स्वास्थ्य एवं रेखीय मंत्रालयों के मंत्रीगण, प्रमुख मंत्रालयों के सचिव सहित देशभर के प्रतिष्ठित सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों को एमएसजी में शामिल किया गया है। एमएसजी में बतौर सदस्य नामित किये जाने पर स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडविया का आभार जताते हुये उन्होंने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जिस उद्देश्य के साथ मिशन स्टेरिंग ग्रुप का गठन किया गया है, निश्चित रूप से उन उद्देश्यों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास किया जायेगा। उन्होंने बताया कि बुधवार को दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में एमएसजी की पहली बैठक आयोजित की गई है जिसमें वह स्वयं भी प्रतिभाग करेंगे। बैठक में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के साथ ही भविष्य का रोड़मैप तैयार करने पर विचार विमर्श किया जायेगा।
स्वास्थ्य मंत्री रावत ने कहा कि राज्य में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत लोगों के डिजीटल हेल्थ आईडी कार्ड बनाये जा रहे हैं। सूबे में अब तक 22 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ आईडी बन चुकी है। विभागीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के तहत स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों जैसे अस्पताल, क्लीनिकों और स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का डिजिटलीकरण किया जायेगा। जिसके तहत सभी अस्पतालों एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को डिजीटल माध्यमों से जोड़ कर प्रक्रियाओं को सरल एवं ई ऑफ लिविंग में वृद्धि करेगा। डिजिटल इकोसिस्टम भी कई अन्य सुविधाओं में सक्षम बनाएगा, जिसमें टेलीकंसल्टेशन, पेपर-लेस हेल्थ रिकॉर्ड, क्यूआर कोड आधारित ओपीडी पंजीकरण आदि सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। यही नहीं डिजिटल हेल्थ आईडी बनाने के बाद मरीजों का स्वास्थ्य रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, जिसको कभी भी कहीं भी एक्सेस किया जा सकेगा।

सरकारी अस्पताल ऋषिकेश में सीटी स्कैन मशीन को दी वित्तीय स्वीकृति

अब उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश में सीटी स्कैन की सुविधा मरीजों को मिलेगी। कैबिनेट मंत्री व क्षेत्रीय विधायक डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने सीटी स्कैन मशीन के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। मंत्री अग्रवाल ने उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश में सीटी स्कैन मशीन को वित्तीय स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत का आभार व्यक्त किया।
मंगलवार को प्रेस जारी करते हुए मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि ऋषिकेश का उप जिला चिकित्सालय स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम स्थान रखता है। बताया कि यहां ऋषिकेश नगर के अलावा छिद्दरवाला, रायवाला, भानियावाला, रानीपोखरी, मुनिकीरेती, ढालवाला, नरेंद्रनगर, तपोवन, शिवपुरी, ब्यासी, स्वर्गाश्रम, यमकेश्वर सहित अन्य क्षेत्रों के मरीज व तिमारदार आते है।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि यहां प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में उप जिला चिकित्सालय में सभी सुविधाएं मिल सके, इसके लिए उनकी ओर से सदैव प्रयास किया गया। डॉ अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हो सकें, इसके लिए व्यापक कार्य कर रहीं हैं।
डॉ अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के रूप में उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश में सीटी स्कैन मशीन के लिए 6 करोड़ 72 लाख 65 हजार 970 रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। डॉ अग्रवाल ने कहा कि उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश में सीटी स्कैन की सुविधा मिलने पर मरीजों को सरकारी दरों में इसका लाभ मिलेगा। इससे उन्हें बाहर निजी लैब में लगने वाले अधिक खर्च से बचत होगी।

मुख्यमंत्री ने एम्स अस्पताल का किया निरीक्षण, मरीजों से हालचाल भी जाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एम्स, ऋषिकेश में पी.आई.सी.यू ( बाल रोग गहन चिकित्सा इकाई ) का शुभारंभ किया, इस अवसर पर उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण किया और मरीजों का हालचाल जाना।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पीआईसीयू के शुभारंभ से छोटे बच्चों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी, उन्होंने एम्स ऋषिकेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में उम्मीदों का केंद्र बताया, उन्होंने कहा एम्स ऋषिकेश के प्रति लोगों में अपेक्षाएं और विश्वास है। उत्तराखंड राज्य के साथ ही अन्य राज्यों से आने वाले मरीजों के लिए एम्स ऋषिकेश एक वरदान के रूप में काम करता है। अपनी सेवा के माध्यम से जनता में विश्वास जगाता है। उन्होंने डॉक्टरों को भगवान का रूप बताया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ सेवा को बढ़ाने का कार्य संपूर्ण देश में लगातार जारी है। मुख्यमंत्री ने उधम सिंह नगर जिले के किच्छा में एम्स की सेटेलाइट शाखा की स्वीकृति हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड मंत्रिमंडल की बैठक में किच्छा एम्स हेतु केंद्र को निशुल्क जमीन देने पर स्वीकृति बनी है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड की भौगोलिक स्थिति अन्य राज्यों के मुकाबले भिन्न है, दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद राज्य सरकार इसे तीव्र गति के साथ कर रही है। उन्होंने एम्स ऋषिकेश से अन्य संस्थानों व अस्पतालों के साथ समन्वय बनाकर लोगों की मदद एवं सेवा करने का आग्रह किया।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, एम्स कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, मेडिकल सुपरिटेंडेंट संजीव मित्तल, प्रो. जया चतुर्वेदी, प्रो. मनोज गुप्ता एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मेडिकल कालेज में कार्मिकों को शीघ्र वितरित होगी प्रोत्साहन राशि-स्वास्थ्य मंत्री

राजकीय मेडिकल कालेजों में आयुष्मान योजना के अंतर्गत मरीजों के उपचार का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है, जिसके लिये कालेज के प्राचार्यों को शीघ्र रोड़ मैप तैयार करने के निर्देश दे दिये गये हैं। इसके साथ ही योजना के अंतर्गत कार्मिकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को शीघ्र वितरित करने को कहा गया। सरकारी अस्पतालों एवं मेडिकल कालेजों में मरीजों को पूरा इलाज दिया जाय, यदि अस्पताल में इलाज संभव नहीं तभी रैफर किया जाय।
स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने आज दून मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयुष्मान योजना की समीक्षा बैठक ली, जिसमें राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य उपस्थित रहे। रावत ने बताया कि सूबे में आयुष्मान योजना का अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण से संबद्ध सरकारी निजी अस्पतालों एवं मेडिकल कालेजों में आयुष्मान मित्र की तैनाती की गई है, जोकि मरीजों के दस्तावेज तैयार करने, आयुष्मान कार्ड बनाने, बिल बाउचर बनाने एवं बिल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने तक सभी काम करेगा जिसके एवज में प्राधिकरण इन्हें प्रति मरीज के हिसाब से भुगतान करेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक 10 आयुष्मान मरीजों पर एक आयुष्मान मित्र को तैनात किया गया है। रावत ने बताया कि सूबे के मेडिकल कालेजों में आयुष्मान योजना के अंतर्गत मरीजों के इलाज के लिये लक्ष्य निर्धारण कर लिया गया है, जिसमे दून मेडिकल कालेज को प्रत्येक वर्ष 25 हजार, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज को 20 हजार, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को 10 हजार एवं अल्मोड़ा मेडिकल कालेज को 5 हजार मरीजों का उपचार किया जाएगा। इसके लिये सभी प्राचार्यों को रोड़ मैप तैयार करने के निर्देश दे दिये गये हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि कार्मिकों को वितरित न किये जाने पर नाराजगी जताते हुये रावत ने सभी प्राचार्यों को तत्काल प्रोत्साहन राशि वितरित करने को कहा, साथ ही उन्होंने इसे प्रत्येक तीन माह में बांटने के निर्देश भी दिये। विभागीय मंत्री ने रेफरल व्यवस्था को न्यून कर मरीजों को सरकारी अस्पताल एवं मेडिकल कालेजों में ही पूरा उपचार देने के निर्देश अधिकारियों को दिये उन्होंने कहा कि मरीजों को दूसरे अस्पतालों में तभी रैफर किया जाय जब अस्पताल में इलाज संभव न हो।
बैठक में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के चेयरमैन डी. के. कोटिया, अपर सचिव स्वास्थ्य एवं सीईओ राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण अरुणेंद्र सिंह चौहान, निदेशक स्वास्थ्य डॉ विनीता शाह, डॉ मीतू शाह, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्राचार्य दून मेडिकल कालेज डॉ आशुतोष सयाना, सभी मेडिकल कालेजों के प्राचार्य एवं राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधिकारी उपस्थित रहे।

एम्स ने सेटेलाइट सेंटर के लिए चयनित भूमि पर कब्जा लिया

एम्स ऋषिकेश को राज्य सरकार की ओर से कुमाऊं मंडल में सेटेलाईट सेंटर निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण कर ली गई है। एम्स जल्द यहां सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का निर्माण शुरू करेगा।
कुमाऊं सेंटर ऑफ एम्स ऋषिकेश के लिए मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस दौरान एम्स के अधिकारियों ने सेटेलाइट सेंटर के लिए चयनित भूमि पर कब्जा ले लिया है। इसके लिए एम्स के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता की अगुवाई में संस्थान के अधिकारी उप निदेशक प्रशासन ले. कर्नल अच्युत रंजन मुखर्जी, अधिशासी अभियंता अजय गुप्ता व जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल मौके पर मौजूद रहे। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा कुमाऊं मंडल के किच्छा, उधमसिंहनगर में एम्स के सेटेलाईट सेंटर के लिए 100 एकड़ भूमि हस्तांतरित की गई है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने बताया कि उक्त हस्तांतरित भूमि पर एम्स एक से डेढ़ वर्ष में टर्सरी केयर सेंटर स्थापित करेगा।
कुमाऊं सेंटर ऑफ एम्स ऋषिकेश में सभी प्रकार की सुपरस्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि संस्थान की प्राथमिकता रहेगी कि कुमाऊं मंडल के लोगों को सभी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाएं, जिससे उन्हें इलाज के लिए ऋषिकेश तक की दूरी तय नहीं करनी पड़े।

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर मंकीपॉक्स को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एसओपी

देश में मंकीपॉक्स के बढ़ते खतरों के बीच सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड़ पर रहने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने विभागीय उच्चाधिकारियों को मंकीपॉक्स को लेकर पहले ही सर्तकता बरतने एवं गाइडलाइन जारी करने को कहा है। विभागीय मंत्री के एक्शन पर स्वास्थ्य विभाग ने मंकीपॉक्स से बचाव हेतु तत्काल हेल्थ एडवाजरी जारी कर सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को एक्टिव रहने को कहा है। जनपद स्तर पर मंकीपॉक्स के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिये कड़ी निगरानी करने व सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को दिये गये हैं।
डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि देश में बढ़ते मंकीपॉक्स के खतरों को लेकर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड़ में रहने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अंतर्गत मंकीपॉक्स से बचाव एवं सर्तकता बरतने के लिये स्वास्थ्य विभाग ने एसओपी जारी कर दी है। विभागीय मंत्री ने बताया कि जनपद स्तर पर मंकीपॉक्स के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिये कड़ी निगरानी रखी जायेगी, जिसके लिये विभागीय अधिकारियों को सर्विलांस सिस्टम मजबूत करने को कहा गया है।
रावत ने बताया कि सूबे की प्रत्येक चिकित्सा इकाईयों एवं मेडिकल कॉलेजों में मंकीपॉक्स हेतु पृथक से आइसोलेशन की व्यवस्था एवं नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है, इसके साथ ही चिकित्सालयों में रोगियों की जांच एवं उपचार हेतु पर्याप्त दवाएं उपलब्ध करने के निर्देश भी विभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य में मंकीपॉक्स के एक मामले को भी प्रकोप माना जायेगा। स्वास्थ्य मंत्री रावत के निर्देश पर प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ आर राजेश कुमार ने विभाग को अलर्ट मोड़ में रहने को कहा है। इसके साथ ही सभी जनपदों में जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को मंकीपॉक्स को लेकर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। उन्होंने बताया गया कि एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत सभी जिला निगरानी इकाइयों के माध्यम से संक्रमण के मामलों, समूहों की तेजी से पहचान करने एवं संक्रमण के प्रसार को तुरंत रोकने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि संदिग्ध मामले मिलने पर इसकी सूचना तत्काल उच्च स्तरीय अधिकारियों को दी जायेगी, जांच नमूनों को नामित प्रयोगशालाओं को भेजने एवं संदिग्धों को अलग वार्ड और आईसोलेशन में रखे जाने सहित अन्य जरूरी निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

एनएचएम के तहत शत-प्रतिशत खर्च करें धनराशि-धन सिंह रावत

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गयी धनराशि को समय पर शत-प्रतिशत खर्च करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। उन्होंने विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुये अधिकारियों को निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत कार्मिकों को विगत तीन माह से वेतन न मिलने पर उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुये शीघ्र वेतन निर्गत करने को कहा।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये। उन्होंने वर्तमान वित्तीय वर्ष में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वीकृत धनराशि को शत-प्रतिशत खर्च करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। डॉ रावत ने बताया कि सूबे में एनएचएम के अंतर्गत हुये बेहत्तर कार्यों के आधार पर भारत सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष रूपये 1129.5 करोड़ का बजट उपलब्ध कराया गया है जो कि जो कि विगत वित्तीय वर्ष में मिले बजट के मुकाबले रूपये 280 करोड़ अधिक है। जिसे तय समय के भीतर शत-प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किया जा सके। बैठक में विभागीय मंत्री ने विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर भारी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाकर सभी निर्माण कार्यां को निश्चत समय सीमा के भीतर पूरा करें। डॉ रावत ने बताया कि ई0आर0सी0पी0 के अंतर्गत 08 चिकित्सा इकाईयों में प्रीफैब्रिकेटेड 42 बेड एवं 10 चिकित्सा इकाईयों में 32 बेड का निर्माण किया जायेगा जिसके लिये शासन ने रूपये 5073.12 लाख की धनराशि स्वीकृत कर दी है। इसके अलावा इस वित्तीय वर्ष में 7 क्रिटिकल केयर यूनिट (सी0सी0यू0) की स्थापना की जायेगी, जिसके लिये कार्यदायी संस्था नामित कर दी गई है, शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा। एनएचएम कार्मिकों को विगत तीन माह से वेतन न मिलने पर डॉ रावत ने विभागीय अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने मिशन निदेशक एनएचएम डॉ आर राजेश कुमार को व्यवस्थाएं ठीक कर शीघ्र वेतन निर्गत करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत कार्मिक अल्प वेतनभोगी हैं और उनका कई महीनों तक बिना किसी कारण वेतन रोकना न्यायोचित नहीं है।
बैठक में प्रभारी सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक एनएचएम डॉ आर राजेश कुमार, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ शैलजा भट्ट, संयुक्त निदेशक डॉ आर0पी0 खंडूडी, वित्त अधिकारी दीपाली भरणे, वित्त नियंत्रक एनएचएम खजान चन्द्र पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

निःशुल्क जांच शिविर में 150 लोगों की जांच की गई

रोटरी क्लब ऋषिकेश और शिवालिक डेंटल एवं ऐमपैथ द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं खून जांच शिविर का आयोजन वीरभद्र मार्ग स्थित शिवालिक डेंटल क्लिनिक में किया गया। जिसका उद्घाटन रोटरी क्लब के डीजीइ अरुण मोगिया ने किया। उन्होंने कहा कि रोटरी क्लब द्वारा लगाए जा रहे स्वास्थ्य के इस शिविर से बहुत से लोगों को फ़ायदा मिलेगा व ग़रीब व्यक्ति जो ब्लड टेस्ट कराने में असमर्थ है, उसे भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने क्लब द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए क्लब को और भी स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए कहा कि समाज में सबसे बड़ी सेवा लोगों की स्वास्थ्य सेवा करना है।
रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने कहा कि रोटरी क्लब अगस्त के महीने में दो या तीन स्वास्थ्य शिविर ब्लड टेस्ट के साथ साथ आँखों व स्कीन के स्वास्थ्य शिविर लगाएगा। सचिव विशाल तायल ने कहा कि रोटरी क्लब स्वास्थ्य शिविर का सिलसिला लगातार चलता रहेगा और इसके लिए जितने भी प्रयास होंगे क्लब द्वारा किए जाएंगे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अरुण मोगिया ने को शाल व रूद्राक्ष की माला पहनाकर उनका सम्मान किया गया। क्लब द्वारा कार्यक्रम में विशेष संयोग देने पर डाक्टर पारुल गर्ग, डॉक्टर राजेंद्र गर्ग व डॉक्टर हरीओम प्रसाद को भी सम्मानित किया गया। शिविर में लगभग एक सौ पचास लोगों ने इस शिविर का लाभ उठाया। कार्यक्रम में राजीव गर्ग, नितिन गुप्ता, डॉक्टर अरुण शर्मा, जितेंद्र बर्थवाल, डॉक्टर डीके श्रीवास्तव, संजय अग्रवाल, डॉक्टर राजे नेगी, गोपाल सिंह, बलवंत सिंह डंग, सुशील गोयल, हिमांशु अग्रवाल रहे।

सीएम ने दो सरकारी नशामुक्ति केंद्र बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2025 तक ड्रग्स फ्री देवभूमि के लिए मिशन मोड में काम किया जाए। इसके लिये सभी संबंधित विभाग मिलकर काम करें। मुख्यमंत्री सचिवालय में नार्काे कॉर्डिनेशन की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड को नशामुक्त करने के लिए सभी को जिम्मेदारी और समन्वय से कार्य करना है। वर्ष 2025 तक ड्रग्स फ्री देवभूमि का लक्ष्य हासिल करना है। एक ओर जहां ड्रग्स सप्लायर्स पर कड़ा प्रहार करना है, वही दूसरी ओर बच्चों और युवाओं को ड्रग्स की चपेट में आने से बचाना है। ड्रग्स सप्लाई की चेन को तोड़ने के लिए पुलिस विभाग मुखबिर तंत्र को और मजबूत करे। ड्रग्स नेटवर्क को तोडने के लिए पुलिस, आबकारी व ड्रग्स कंट्रोलर मिलकर काम करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रग्स लेने वाले बच्चों और युवाओं की सही तरीके से काउंसलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कॉलेजो में एडमिशन के समय विशेष काउंसिल की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रग्स लेते हुए पकड़े जाने वाले बच्चों के साथ अपराधियों की तरह बर्ताव न करके उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाए। कॉलेजों में पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग नियमित रूप से की जाएं। समाज कल्याण व अन्य विभाग युवाओं की जागरूकता पर फोकस करें। इसके लिये सोशल मीडिया व अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में दो सरकारी नशामुक्ति केंद्र बनाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाए। सभी संबंधित विभागों को लेते हुए एंटी ड्रग्स टास्क फोर्स को एक्टिव किया जाए। निजी नशामुक्ति केंद्रों के लिए सख्त गाइड लाइन बनाकर उस पर फालोअप किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिये। जिला स्तर पर डीएम भी लगातार मॉनिटरिंग करे।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अशोक कुमार, प्रमुख सचिव एल फैनई, सचिव शैलेश बगोली, राधिका झा, डॉ पंकज कुमार पाण्डे, दीपेंद्र चौधरी, डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।