चारधाम यात्रा की बुकिंग रद्द करवा रहे यात्रियों को जीएमवीएन दे रहा सुविधा

वैश्विक महामारी के कारण जहां देशव्यापी लाॅकडाउन हो रहा है, इसी बीच विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा की बुकिंग भी रद्द हो रही है। गढ़वाल मंडल विकास निगम को मिली बुकिंग में एक करोड़ 25 लाख की बुकिंग अभी तक रद्द हो चुकी है। जीएमवीएन के यात्रा कार्यालय को बुकिंग रद्द करने के लिए अभी तक दो हजार ईमेल मिल चुकी हैं। इसके अलावा रोजना काॅल आ रही हैं।
जीएमवीएन की ओर से यात्रियों को बुकिंग रद्द नहीं करने की अपील की जा रही है। जीएमवीएन ने यात्रियों को सुविधा दी है कि वे अपनी बुकिंग का अगले दो वर्षों में समयानुसार उपयोग कर सकते हैं। 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुल रहे हैं। जबकि 29 अप्रैल को केदारनाथ व 30 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी।

बच्चों ने मंगलगीत गाकर मनाया फूलदेई का त्योहार

सुख-समृद्धि का प्रतीक फूलदेई त्योहार उत्तराखंड की गढ़ कुंमाऊ संस्कृति की पहचान है। वसंत का ऋतु के आते ही बच्चों को इस त्योहार का खासा इंतजार रहता है। देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बच्चों के साथ यह त्योहार मनाया और उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पौधरोपण भी किया। बच्चें हर घर-घर में फूलों की बारिश करते है और हर घर सुख-समृद्धि से भरपूर हो, ऐसी प्रभु से कामना करते है। इसी भावना के साथ बच्चे अपने गांवों के साथ-साथ आस-पास के गांव में जाकर घरों की दहजीज पर फूल गिराते हैं और उस घर के लिए मंगलमय कामना करते हैं।

साथ ही घर की गृहणी उनको फूल वर्षा के बदले चावल, गुड़ के साथ दक्षिणा के रूप में रुपए भी देती है। यह त्योहार आमतौर पर चैत्र पंचमी को आता है। इस दिन लोग गांवों में अपने घरों को साफ-सफाई कर लाल मिट्टी से सजाते हैं। फिर इसके बाद बच्चे इन घरों में विभिन्न प्रकार के फूलों की वर्षा कर गांव की उन्नति के गीत गाते हैं। फूलदेई त्योहार में बुरांस के फूल विशेष होते हैं। बच्चे एक दिन पहले ही जंगल जाकर बुरांस के फूल एकत्र करते हैं।
इसके साथ ही प्यूंली, हिलांश, सरसौं आदि के फूलों से सजी रिंगाल की टोकरियों को सिर पर रखकर बच्चे गीत गाते हुए आंगन-आंगन जाते हैं। फिर गांव के सार्वजनिक चैक में वसंत ऋतु के आगमन को लेकर गीत गाकर नृत्य करते हैं।

गणेश भगवान के कृपा चाहिए तो करें ये उपाय

घर में सुख-समृद्धि बनी रहे इसके लिए जरूरी है कि हम कुछ उपाय भी किरे। बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित रहता है। इस दिन किए गए उपाय आपको जिंदगी भर फल प्रदान करेंगे। आइए जानते है कि इन उपायो को जो आपकी जिंदगी समृद्ध कर देंगे। प्रत्येक बुधवार को गणेशजी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन मंदिर में जाकर गणेश भगवान को दूर्वा की 11 या 21 गांठ चढ़ाएं। आपको जल्द ही शुभ फल देखने को मिलेंगे।
बुधवार को मूंग की दाल दान करने से कष्टों का निवारण होता है। किसी गरीब अथवा जरूरतमंद को मूंग दान करें और फिर देखें कि कैसे आपके सभी दुख दूर हो जाते हैं। जिनकी कुंडली में बुध ग्रह दोष है वे खासकर इस दिन गणेश भगवान को मोदक का प्रसाद चढ़ाएं। इससे ग्रह के दोष खत्म हो जाएंगे। गाय को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है। बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाने से सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। अगर हरी घास खिलाना संभव ंन हो तो गाय को सुबह की पहली रोटी खिलाएं।
बुधवार के दिन गणेश भगवान को सिंदूर चढ़ाने से लाभ मिलता है। ऐसा करने से सभी परेशानियों का भी निवारण होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

कुंभ की व्यवस्थाएं अलौकिक और दिव्य बनाने की तैयारी

वर्ष 2021 में आयोजित हो रहे हरिद्वार महाकुंभ को प्रदेश सरकार भव्य और ग्रीन कुंभ परिकल्पना के आधार पर आयोजित करेगी। इस परिकल्पना को साकार करने के लिए सरकार ने बजट में 1205 करोड़ रुपये खर्च करना तय किया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 करोड़ के स्थायी और एक हजार रुपये के अस्थायी कार्य किए जाएंगे।
सरकार की कोशिश है कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु चारधाम की यात्रा भी कर पाए। इसके लिए चारधाम और ऑलवेदर रोड को महाकुंभ से पहले पूरा करने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है। कुंभ के लिए सरकार अलग से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60.12 करोड़ रुपये भी खर्च करेगी।
वहीं, महाकुंभ के आयोजन के लिए सरकार ने केंद्र से भी पांच हजार करोड़ की अलग से मांग की है। अभी तक सरकार ने कुंभ के कार्यों के लिए 250 करोड़ का बजट जारी किया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक महाकुंभ के लिए केंद्र से सहायता जल्द मिलने की उम्मीद है।

सरकार का अनुमान है कि महाकुंभ में करीब 10 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से सरकार ने भीड़ नियंत्रण पर भी फोकस किया है। सुरक्षा व्यवस्था पर 60 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। प्रदेश सरकार ने बजट में जनवरी 2021 में प्रस्तावित कुंभ मेले के लिए पुलिस विभाग के लिए 60.12 करोड़ का प्रावधान किया है। हालांकि कुंभ मेले को छोड़कर पुलिस आधुनिकीकरण और जेलों के उद्धार को कुल 174.33 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे पुलिस महकमे में थाना और नई चैकियों के भवनों के निर्माण होने की उम्मीद जगी है।
सरकार ने बजट में प्रस्तावित कुंभ मेले में बेहतर व्यवस्थाओं और पुलिस आधुनिकीकरण के संकल्प को दोहराया है। कहा गया कि जनसहभागिता से शांति बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पर्यटन गतिविधियों को सुचारु बनाने को पुलिस विभाग का निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

महाशिवरात्रिः मंदिरों में भगवान शिव की हुई विशेष पूजा-अर्चना

देवों के देव महादेव की पूजा-आराधना का सबसे विशेष दिन महाशिवरात्रि का त्योहार बड़े धूमधाम के साथ मनाया जा रहा। उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों में मौसम खराब होने के बाद भी मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी लाइनें लगी हैं। देखा गया कि पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मना रहे हैं। वहीं योग परंपरा के अनुसार बात की जाए तो यह एक ऐसा दिन है जब प्रकृति स्वयं मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करती है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि का योग बनने से पर्व की महत्ता और अधिक बढ़ गई है। भारतीय सनातन संस्कृति में महाशिवरात्रि का त्योहार बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है।
यूं तो साल में हर चंद्र मास का चैदहवां दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का दिन शिवरात्रि होती है। लेकिन फाल्गुन माह की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस खास रात में प्रकृति मनुष्य के भीतर की ऊर्जा को प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर उठाने में मदद करती है। इसलिए इस समय का उपयोग करने के लिए सनातन परंपरा में प्राचीन काल से ही पूरी रात उत्सव मनाया जाता था और आज भी यह परंपरा बरकरार है। महाशिवरात्रि की पूरी रात को भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर अध्यात्म की अलख जगाने का भी कार्य किया जाता है। दरअसल, भगवान शिव को आदि गुरु माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन से सृष्टि का प्रारंभ हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था।
ज्योतिषाचार्य पंडित कैलाश तिवारी का कहना है कि वैसे तो महाशिवरात्रि एक सिद्ध दिन और महापर्व होता है। इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग होने से सभी कार्यों की सफलता के लिए शुभ माना गया है। इससे महाशिवरात्रि के पर्व का महत्व कई गुना बढ़ गया है। शिव का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से किया जाता है। भगवान शिव ऐसे देव हैं, जो केवल जल का लोटा चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन भगवान शिव को इसके साथ ही बिल्व पत्र, दूध, दही, धतूरा, कर्पूर, चावल, चंदन, भस्म और रूद्राक्ष बहुत प्रिय है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी इच्छा के अनुसार भगवान शिव का विभिन्न चीजों से अभिषेक कर शिव कृपा हासिल कर सकते हैं।

9411112780 पर फोन कर महिला एवं छात्राएं करा सकती हैं शिकायत दर्ज

उत्तराखंड में असुरक्षित महसूस करने वाली महिलाओं और छात्राओं के लिए पुलिस मुख्यालय ने नई पहल शुरू की है। अपनी शिकायत को लेकर थाने जाने से परहेज करने वाली महिला एवं छात्राओं के लिए पुलिस ने महिला व्हाट्सअप हेल्पलाइन सेवा शुरू की हैं।
पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि महिलाएं और छात्राएं व्हाट्सएप नंबर 9411112780 पर सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। मेसेज आने के बाद संबंधित क्षेत्र में तत्काल पुलिस सहायता मिलेगी। इस नंबर पर किसी भी घटना और समस्या से संबंधित मेसेज, फोटो अथवा पुलिस मुख्यालय में स्थापित महिला सुरक्षा सेल को भेज सकती हैं। महिला सुरक्षा सेल में तैनात पुलिस अधिकारी व्हाट्सएप पर आए संदेश पर संबंधित जनपद की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंचेगी। डीजी क्राइम ने बताया कि महिलाएं पीछा करने और छेड़छाड़ करने वाले का फोटो और वीडियो भी सीधे भेज सकेंगी।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में हिंदू पक्ष के वकील के परासरन को बनाया ट्रस्टी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए नवगठित ट्रस्ट को एक रूपए का दान किया है। गृह मंत्रालय में अवर सचिव ने सरकार की ओर से यह राशि दी। ट्रस्ट बिना किसी शर्त के दान, अनुदान, चंदा, मदद या योगदान नकद, अचल संपत्ति के तौर पर स्वीकार करेगा।
अयोध्या विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्य वकील रहे 92 वर्षीय के परासरन को राम मंदिर ट्रस्ट में ट्रस्टी बनाया गया है। परासरन के अलावा इस ट्रस्ट में एक शंकराचार्य समेत पांच सदस्य धर्मगुरु ट्रस्ट में शामिल हैं। साथ ही अयोध्या के पूर्व शाही परिवार के राजा विमलेंद्र प्रताप मिश्रा, अयोध्या के ही होम्योपैथी डॉक्टर अनिल मिश्रा और कलेक्टर को ट्रस्टी बनाया गया है।
बतादें कि 30 साल पहले केंद्र की तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार की अनुमति के बाद 9 नवंबर 1989 को प्रस्तावित राममंदिर की नींव पड़ी थी। शिलान्यास के लिए पहली ईंट विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन संयुक्त सचिव कामेश्वर चौपाल ने रखी थी। चौपाल का नाता बिहार से है और वे दलित समुदाय से आते हैं।
पांच एकड़ जमीन पर बनेगी मस्जिदः योगी सरकार
पीएम के एलान के कुछ देर बाद ही यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक हुई। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि अयोध्या मुख्यालय से 18 किमी दूर ग्राम धानीपुर, तहसील सोहावल रौनाही थाने के 200 मीटर के पीछे पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के लिए मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। यह जमीन लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर अयोध्या से करीब 22 किमी पहले है।

पौराणिक मान्यताओं को आज भी निभा रहा श्री भरत मंदिर

वसंतोत्सव-2020 के तहत बसंत पंचमी के शुभमुहुर्त पर भगवान श्री भरत की शोभायात्रा धूमधाम से नगर क्षेत्र में निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान भरत के जयकारों से डोली का स्वागत कर पुष्पवर्षा की। पावन पर्व पर श्रद्घालुओं ने भगवान भरत के दर्शन कर पुण्य अर्जित किए।
बुधवार को झंडा चैक स्थित श्री भरत मंदिर परिसर से शोभा यात्रा का आयोजन हुआ। इससे पूर्व मंदिर में श्री भरत भगवान की पूजा अर्चना विधिवत रूप से की गई। शोभा यात्रा झंडा चैक स्थित मंदिर से शुरू होकर मायाकुंड होते हुए विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों से गुजरकर मां गंगा के तट पहुंची। यहां पर श्री भरत भगवान की मूर्ति को गंगा स्नान करवाने के बाद पूजा अर्चना की गई। यहां से शोभा यात्रा सुभाष चैक, श्री भरत मंदिर रोड और झंडा चैक से होते हुए मंदिर परिसर में संपन्न हुई। शोभा यात्रा का नगर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक, राजनैतिक, धार्मिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस अवसर पर महंत अशोक प्रपन्न शर्मा, कार्यक्रम संयोजक हर्षवर्धन शर्मा, मेयर अनिता ममगाईं, पंडित वत्सल शर्मा, पंडित वरुण शर्मा आदि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने किए दर्शन
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बसंत पंचमी के अवसर पर भरत मन्दिर ऋषिकेश में आयोजित बसन्तोत्सव कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को बसन्त पंचमी की शुभकामनायें दी तथा भरत मन्दिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बसन्तोत्सव प्रकृति के श्रृगांर एवं नई ऊर्जा का संचार करने वाला पर्व है। यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने आयोजकों की इस आयोजन के लिए भी सराहना की।

उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड राज्य में धार्मिक पर्यटन की तस्वीर को बदल कर रख देगा

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने राज्य में स्थापित मंदिरों की व्यवस्था को एकरूपता देने और राज्य में चार धाम यात्रा को और बेहतर बनाने के लिए उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड बनाकर एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था के बाद राज्य में चार धाम यात्रा पहले के कहीं अधिक सुचारू रूप से चलेगी। राज्य में मंदिरों की देखभाल ठीक तरीके से हो सकेगी और देवसंस्कृति के वाहक पुरोहित समाज को भी पहले से अधिक सुविधाएं मिल दी जा सकेंगी। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बोर्ड के गठन के बाद न सिर्फ उत्साहित हैं बल्कि उम्मीद जता रहें हैं कि ये बोर्ड राज्य में धार्मिक पर्यटन की तस्वीर को बदल कर रख देगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर होगा बेहतर
देवस्थानम बोर्ड बनाने के पीछे उत्तराखंड सरकार का प्रमुख उद्देश्य राज्य के  मंदिरों में आधारभूत ढांचागत विकास करना है। इस बोर्ड के अधीन राज्य के चारों धाम और 51 मंदिर आएंगे। इन मंदिरों में देश ही नहीं विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इन मंदिरों में विश्व स्तरीय सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। सरकार अब राज्य में धार्मिक पर्यटन पर आने वालों के लिए सिंगल प्वाइंट अरेंजमेंट की ओर कदम बढ़ा रही है।

पुरोहितों के हित सुरक्षित
देवस्थानम बोर्ड के गठन के ऐलान के साथ ही इसका विरोध भी पटल पर आ गया। बड़ी संख्या में पुरोहित समाज के लोगों ने इस बोर्ड के गठन के विरोध में मोर्चा खोल दिया। हालांकि इस बोर्ड गठन के बाद अब पुरोहित समाज का बड़ा तबका इसके समर्थन में आ गया है। वहीं सरकार शुरुआत से इस बात का दावा करती रही है कि इस बोर्ड के गठन से पुरोहित समाज के हितों की अनदेखी किसी स्तर पर नहीं होगी। रावत और पुरोहितों की सदियों पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आएगा। प्रबंधन के स्तर पर बोर्ड व्यवस्थाओं को बेहतर करेगा। इसी लिहाज से सरकार ने बोर्ड में चारों धामों के प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया है। सरकार की माने तो इस बोर्ड के गठन के बाद चारों धामों की व्यवस्था में समन्वय बनेगा।

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भविष्य के लिए जरूरी
त्रिवेंद्र सरकार राज्य में धार्मिक तीर्थाटन को भविष्य के लिहाज से व्यवस्थित करना चाहती है। वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी जैसे मंदिरों में की गई व्यवस्थाओं के मुताबिक ही त्रिवेंद्र सरकार उत्तराखंड के मंदिरों में भी व्यवस्थाएं करना चाहती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य के मंदिरों में धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा। हालांकि सरकार के प्रयासों से चार धामों में आने वाले यात्रियों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। फिलहाल तकरीबन चालीस लाख पर्यटक पहुंच रहें हैं। राज्य में जारी ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण के बाद पर्यटकों की संख्या करोड़ों में पहुंच सकती है। ऐसे में राज्य के मंदिरों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार को इस तरह के बोर्ड के गठन की जरूरत महसूस हो रही थी।

तीर्थ पुरोहितों के हकहकूकों के साथ नहीं होगी छेड़छाड़ः सीएम

चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड राज्य के धार्मिक स्थलों को बुनियादी सुविधाएं देगा। इससे किसी भी तीर्थ पुरोहित, हकहकूकधारी के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रेसवार्ता के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और इनके आसपास के मंदिरों का प्रबंधन चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के नियंत्रण में रहेगा। लेकिन, इनसे जुड़े पुजारी, न्यासी, तीर्थ, पुरोहितों, पंडों और हकहकूकधारियों को वर्तमान में प्रचलित देव दस्तूरात और अधिकार यथावत रहेंगे।

उन्होंने कहा कि कहा कि जब हम कोई भी सुधार करते हैं तो उसकी प्रतिक्रिया होती ही है। सीएम ने साफ अल्फाज में कहा कि तीर्थ पुरोहितों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जायेगा। प्रदेश के चार धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से के श्रद्धालु आना चाहते हैं। उत्तराखंड को अच्छे आतिथ्य के रूप में जाना जाता है। देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर आने का मौका मिले और उन्हें अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हों इसके लिए यह विधेयक लाया गया है। मालूम हो कि चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड विधेयक को राजभवन ने मंजूरी दे दी है।