मुख्यमंत्री ने आयुष एवं ईएसआई के 332 नव नियुक्त कार्मिकों को प्रदान किए नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में आयुष विभाग के 271 तथा कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत 61 एलोपैथिक फार्मेसी अधिकारियों सहित कुल 332 नव नियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने सभी नव नियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे सेवाभाव, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करना युवाओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके साथ ही उनके जीवन में जनसेवा की नई जिम्मेदारी भी शुरू होती है। उन्होंने कहा कि नव नियुक्त कार्मिक अपने सरकारी दायित्व को केवल नौकरी के रूप में न देखें, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनाएं। आयुष विभाग और कर्मचारी राज्य बीमा योजना से जुड़े कार्मिकों की भूमिका सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों तक पहुंचने वाले लोगों के मन में व्यवस्था के प्रति एक भरोसा होता है। कार्मिकों की संवेदनशीलता, तत्परता और कार्यकुशलता इस भरोसे को और मजबूत करती है। उन्होंने नव नियुक्त कार्मिकों से कहा कि वे जहां भी सेवाएं दें, अपनी कार्यशैली से उदाहरण प्रस्तुत करें। अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक उम्मीद लेकर आता है और कार्मिकों का सही निर्णय तथा ईमानदार प्रयास जरूरतमंद के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। नकल माफिया पर कठोर कार्रवाई के साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के युवाओं को उनकी मेहनत और योग्यता के आधार पर सरकारी सेवाओं में अवसर मिल रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। यह राज्य में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ योग, आयुर्वेद और औषधीय जड़ी-बूटियों की समृद्ध परंपरा वाला राज्य है। राज्य सरकार उत्तराखण्ड को मॉडल ‘आयुष प्रदेश’ और ‘ग्लोबल वेलनेस हब’ के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी जनपदों में आयुष सेवाओं का विस्तार करने के साथ पंचकर्म सेवाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है तथा आयुर्वेद उत्कर्ष केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी के माध्यम से लोगों को घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। ‘आयुष सेतु पोर्टल’ भी इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश के अनेक होमस्टे को निकटवर्ती आयुर्वेद चिकित्सालयों की वेलनेस सेवाओं से जोड़ा गया है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड आने वाले लोगों को योग, आयुर्वेद और पंचकर्म के माध्यम से स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति का बेहतर अनुभव मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना की स्वास्थ्य सेवाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। पूर्व में ईएसआई योजना प्रदेश के छह जनपदों में संचालित थी, जिसे अब सभी 13 जनपदों तक पहुंचाया गया है। रुद्रपुर में 100 बेड के ईएसआई अस्पताल का संचालन शुरू हो चुका है, जबकि हरिद्वार में 300 बेड के ईएसआई अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है। काशीपुर में भी ईएसआई अस्पताल के लिए भूमि चिन्हित की गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए 47 नए चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने नव नियुक्त कार्मिकों से पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सेवाभाव के साथ कार्य करने की अपेक्षा करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता विकसित एवं सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण के संकल्प को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने नव नियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आयुष सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं जनसुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नव नियुक्त कार्मिकों के आने से विभाग की कार्यक्षमता बढ़ने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने नव नियुक्त कार्मिकों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और सेवाभाव के साथ निर्वहन करते हुए आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ किया। योजना के माध्यम से प्रदेश के राजकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत पात्र छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के प्रथम चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए मेहनत के साथ सही दिशा, बेहतर रणनीति, अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास भी आवश्यक है। विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली युवा आर्थिक परिस्थितियों, उचित मार्गदर्शन और संसाधनों की कमी के कारण अच्छे कोचिंग संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते। राज्य सरकार ने तय किया है कि संसाधनों की कमी अथवा आर्थिक तंगीं किसी भी प्रतिभाशाली युवा के सपनों की राह में बाधा नहीं बनेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। राज्य का युवा मेहनती, प्रतिभाशाली और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। आवश्यकता उसकी प्रतिभा को सही दिशा, बेहतर मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है। बीते 5 वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराना नहीं है। सरकार चाहती है कि उत्तराखण्ड का युवा नौकरी मांगने वाला ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बने। इसी दिशा में स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रिवर्स पलायन बढ़ा है। आज अनेक युवा गांवों की ओर लौटकर व्यवसाय, कृषि-बागवानी, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को प्रदेश के भविष्य की दिशा तय करने में भी सक्रिय भागीदार बना रही है। इसी सोच के साथ प्रदेश के ढाई लाख से अधिक युवा विद्यार्थियों के साथ वैचारिक मंथन कर उनके विचार और सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आशाओं, आकांक्षाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर विशेष रूप से कार्य करने के लिए राज्य में अलग ‘युवा आयोग’ बनाया जाएगा। सरकार चाहती है कि युवा केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी न बनें, बल्कि प्रदेश की नीति और विकास की दिशा तय करने में भी सक्रिय भागीदार बनें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत और लगन से कार्य करें। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन, मार्गदर्शन और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा अपनी मेहनत, प्रतिभा और संकल्प के बल पर नई ऊंचाइयां प्राप्त करेंगे तथा उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं के बीच जाकर उनसे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों, भविष्य के लक्ष्यों और आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली तथा उन्हें पूरी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर छात्र-छात्राओं में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना के माध्यम से विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन सुलभ होगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचे और वे इसका लाभ उठा सकें।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाएंगे। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में डिजिटल शिक्षा को भी लगातार विस्तार दिया जा रहा है और ई-ग्रंथालय के माध्यम से विद्यार्थियों को लगभग 20 लाख पुस्तकों तक डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराई गई है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने योजना से जुड़े कोचिंग संस्थानों से विद्यार्थियों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करते हुए कहा कि वे इसे केवल व्यावसायिक दायित्व न मानकर व्यक्तिगत एवं सामाजिक दायित्व के रूप में भी लें। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, नियमित संवाद और प्रत्येक विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुरूप सहयोग उनकी तैयारी और आत्मविश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्य सचिव ने युवाओं से उपलब्ध अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों और अवसरों का बेहतर उपयोग कर युवा अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ.बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, अपर सचिव मनमोहन मैनाली एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में पशुपालन विभाग तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग में चयनित 101 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। जिसमें 88 पशुधन प्रसार अधिकारी एवं 13 गन्ना पर्यवेक्षक शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करना युवाओं के परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। आज से वे उत्तराखण्ड सरकार का अभिन्न हिस्सा बनने के साथ ही जनसेवा की महत्वपूर्ण यात्रा प्रारंभ कर रहे हैं। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से अपने ज्ञान, ऊर्जा और नए विचारों के माध्यम से शासकीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अपनी कार्यशैली से उदाहरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए देश का सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। आज सरकारी नौकरियां सिफारिश या पहचान से नहीं, बल्कि युवाओं की मेहनत और प्रतिभा के आधार पर मिल रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल रहे हैं। यह पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और युवाओं को उनकी प्रतिभा के आधार पर अवसर प्रदान करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़े हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका, मातृशक्ति के आर्थिक सशक्तीकरण और गांवों की समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार है। राज्य सरकार पशुपालन को रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के माध्यम से पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। पशुपालकों को अनुदान पर गाय, बकरी, भेड़ और मुर्गी पालन की इकाइयां उपलब्ध कराने के साथ ही पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गन्ना किसानों के हितों के प्रति भी प्रतिबद्ध है। गन्ना सर्वेक्षण की व्यवस्था को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को नई तकनीक, उन्नत गन्ना प्रजातियों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए गन्ना क्लीनिक एवं परामर्श केंद्र शुरू किए गए हैं। उत्तराखण्ड में गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश की तुलना में 05 रुपये प्रति कुंतल अधिक गन्ना मूल्य दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्हें किसानों और पशुपालकों से संवाद कर उनकी समस्याओं को समझते हुए समाधान के लिए संवेदनशीलता से कार्य करना होगा। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि आम नागरिक को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। शासकीय कार्यप्रणाली में ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तराखण्ड भी इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण में अपना शत-प्रतिशत योगदान देने का आह्वान किया।

धराली में दुपट्टे के टुकड़े से बांधी थी सीएम धामी को राखी, आज गुजरात से भेजी

रक्षाबंधन के अवसर पर अहमदाबाद की धनगौरी बरोलिया ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी भेजी है। इसके साथ उन्होंने मुख्यमंत्री को एक भावुक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने पिछले वर्ष धराली में आई आपदा के दौरान मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात को याद किया है।

धनगौरी ने बताया कि पिछले वर्ष रक्षाबंधन के समय वह उत्तराखंड आई थीं। इसी दौरान धराली में आई बाढ़ में वह फंस गई थीं। मुख्यमंत्री धामी जब आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे और वहां फंसे लोगों से मिले, तब उन्हें भी मुख्यमंत्री से मिलने का मौका मिला।

धनगौरी ने बताया कि उस समय रक्षाबंधन करीब था। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि अगर उनके पास राखी हो तो वह उन्हें राखी बांध सकती हैं। उस समय उनके पास राखी नहीं थी। उन्होंने अपने दुपट्टे का एक छोटा सा टुकड़ा फाड़कर उसे ही राखी मानकर मुख्यमंत्री की कलाई पर बांध दिया।

धनगौरी ने अपने पत्र में लिखा कि उसी दिन उन्होंने मुख्यमंत्री धामी को अपना धर्म भाई मान लिया था। उनके लिए वह मुलाकात आज भी बहुत खास है और उस पल को वह कभी नहीं भूल सकतीं।

उन्होंने कहा कि धराली की उस मुश्किल घड़ी में मुख्यमंत्री धामी ने वहां फंसे लोगों का हौसला बढ़ाया और उन्हें भरोसा दिया। धनगौरी ने भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह श्रीकृष्ण द्रौपदी की मदद के लिए आगे आए थे, उसी तरह मुख्यमंत्री भी उस कठिन समय में उनके लिए सहारा बने।

धनगौरी ने कहा कि इस वर्ष वह अहमदाबाद में हैं, लेकिन रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी भेजना वह नहीं भूल सकतीं। इसी भाव के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री धामी के लिए राखी भेजी है।

पत्र के अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु रहने की कामना की और कहा कि वह इसी तरह उत्तराखंड और प्रदेश की जनता की सेवा करते रहें।

धराली की आपदा के दौरान दुपट्टे के टुकड़े से शुरू हुआ यह भाई-बहन का रिश्ता आज भी धनगौरी के लिए उतना ही खास है।

खेल महाकुंभ चैपियनशिप का शुभारंभ कर बोले सीएम, राज्य को खेलभूमि बनाना हमारा लक्ष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के स्व. कैलाश चन्द्र गहतोड़ी स्पोर्ट्स स्टेडियम, टनकपुर में ‘खेल महाकुम्भ-मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी-2026’ का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट खिलाड़ी गहना महर को मशाल सौंपकर खेल महाकुम्भ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर खिलाड़ियों ने पूर्ण अनुशासन, निष्पक्षता एवं खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने की शपथ ली। खिलाड़ियों द्वारा योगासन एवं उत्तराखंड के पारंपरिक खेल ‘मुर्गा झपट’ का प्रदर्शन भी किया गया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल महाकुम्भ प्रदेश की प्रतिभाओं को गांव की मिट्टी से राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उचित मंच और संसाधनों के अभाव में प्रदेश की कोई भी प्रतिभाशाली खेल प्रतिभा पीछे न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि खेल अनुशासन सिखाते हैं, आत्मविश्वास जगाते हैं, संघर्ष करना सिखाते हैं और गिरकर फिर उठने का साहस देते हैं। खेल स्वस्थ शरीर के साथ मजबूत चरित्र और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार खेलों को उत्तराखंड के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का महत्वपूर्ण आधार मानकर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में खेल महाकुम्भ की शुरुआत प्रदेश के गांव-गांव में छिपी खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। आज खेल महाकुम्भ अपने दसवें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। पिछले वर्ष 2 लाख 20 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने खेल महाकुम्भ में प्रतिभाग किया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष और अधिक संख्या में बच्चे एवं युवा इसमें प्रतिभाग करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष खेल महाकुम्भ को और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया है। न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर विधानसभा, संसदीय एवं राज्य स्तर तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक विजेता खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। इस वर्ष लगभग 11 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खिलाड़ियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से खेल महाकुम्भ की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह खिलाड़ियों के परिश्रम, प्रतिभा और उनके सपनों का सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खेल महाकुम्भ के मंच से निकलने वाली प्रतिभाएं भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड और देश का नाम रोशन करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के प्रति सोच में व्यापक बदलाव आया है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों ने देश के गांवों एवं दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रोत्साहन मिलने से भारत वैश्विक खेल मंच पर निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी उत्तराखंड में खेल और खिलाड़ियों के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की नई खेल नीति के अंतर्गत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। साथ ही 38वें राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में सेवायोजित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री खेल विकास निधि के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों एवं क्रीड़ा छात्रावासों में चयनित खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आवास, भोजन, खेल उपकरण, खेल किट, शिक्षा एवं चिकित्सा जैसी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चौंपियन की तैयारी बचपन से ही शुरू होती है। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के अंतर्गत 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को मासिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, ताकि छोटी उम्र से ही उनकी खेल प्रतिभा को सही दिशा और प्रोत्साहन मिल सके।

उन्होंने कहा कि 14 से 23 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों के लिए मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के माध्यम से मासिक छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिता एवं प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटना की स्थिति में बीमा संबंधी व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के लिए मजबूत एवं आधुनिक आधारभूत ढांचा विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। हाल ही में हल्द्वानी में उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं प्रथम शैक्षणिक सत्र का शुभारम्भ किया गया है। इसके साथ ही खटीमा में आधुनिक खेल सुविधाओं से युक्त स्टेडियम के निर्माण की घोषणा भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक जनपद-एक खेल’ के माध्यम से विभिन्न खेल विधाओं और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जनपद की अपनी विशिष्ट खेल पहचान विकसित हो और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का आह्वान किया कि वे पूरी ताकत, लगन, अनुशासन और निष्ठा के साथ मैदान में उतरें तथा अपने खेल के जुनून को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने, उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘खेल महाकुम्भ-2026’ उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प के बल पर उत्तराखंड को देश में ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करने का हमारा ‘विकल्प रहित संकल्प’ अवश्य सिद्ध होगा।

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने खिलाड़ियों को पूर्ण समर्पण एवं खेल भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि न्याय पंचायत स्तर की प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के खेल जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआती सीढ़ी हैं। यहां से खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के बल पर विभिन्न स्तरों से आगे बढ़ते हुए राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले।

खेल मंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं के विकास के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

खेल महाकुम्भ-2026 के अंतर्गत 01 से 10 सितम्बर तक न्याय पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं, 11 से 20 सितम्बर तक विधायक चौम्पियनशिप ट्रॉफी, 21 से 30 सितम्बर तक सांसद चौम्पियनशिप ट्रॉफी तथा 10 से 30 अक्टूबर तक राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिताओं में विभिन्न आयु वर्गों के बालक-बालिकाओं के साथ महिला ओपन एवं दिव्यांगजन महिला-पुरुष वर्ग के खिलाड़ियों को भी विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभाग करने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित कुमार सिन्हा, निदेशक खेल दीप्ति सिंह, जिलाधिकारी मनीष कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, दायित्वधारी, अधिकारी, प्रशिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे।

विदेशों में कुशल मानव संसाधन की मांग और रोजगार के अवसरों के लिए भारतीय मिशनों के साथ नियमित समन्वय रखें अधिकारीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी, इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम एवं जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा ने भेंट की। इस दौरान संबंधित देशों में रोजगार की संभावनाओं, कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता तथा उत्तराखंड के युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन देशों में जिन क्षेत्रों में रोजगार की अधिक संभावनाएं हैं और जहां कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है, उनकी जानकारी प्राप्त करने के लिए संबंधित भारतीय मिशनों के साथ नियमित समन्वय रखा जाए। उन्होंने कहा कि विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों और वहां की आवश्यकता के अनुरूप राज्य के युवाओं को कौशल एवं आवश्यक भाषा प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे उन्हें वैश्विक स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में होम स्टे के क्षेत्र में सराहनीय कार्य हुए हैं। विभिन्न देशों से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों को राज्य के होम स्टे मॉडल से परिचित कराने के लिए होम स्टे का भ्रमण कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फार्मा, उद्योग, आयुर्वेद और वेलनेस के क्षेत्र में उत्तराखंड में अनेक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में राज्य की विशेषताओं और संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है। उन्हें वैश्विक मांग के अनुरूप आवश्यक कौशल और प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न देशों में कुशल मानव संसाधन की मांग और रोजगार की संभावनाओं का आकलन करते हुए युवाओं के प्रशिक्षण के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा ने कहा कि जाम्बिया में कुशल मानव संसाधन की व्यापक आवश्यकता है। शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में वहां कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जाम्बिया में जिन क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है, उनके संबंध में राज्य सरकार को विस्तृत नोट उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने इस दिशा में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी ने कहा कि जमैका में पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और कृषि के क्षेत्र में कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं। विशेष रूप से नर्सिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग है। इन क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुरूप युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा सकता है।

इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम ने कहा कि इथियोपिया में प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं। फार्मास्युटिकल और फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में भी वहां बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ उत्तराखंड के युवाओं को मिले, इसके लिए संबंधित देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय मिशनों के साथ समन्वय बनाकर विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सुनियोजित तरीके से कार्य किया जाए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु एवं सचिव विनय शंकर पांडेय उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी ने हल्द्वानी में व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों के साथ किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय खेल दिवस कार्यक्रम के उपरांत आईटीसी फॉर्च्यून, हल्द्वानी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कुमाऊं मंडल के व्यापारियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं विभिन्न व्यापार मंडलों के पदाधिकारियों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने व्यापारियों की समस्याओं, सुझावों एवं अपेक्षाओं को सुना और राज्य सरकार की ओर से उनके समाधान के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

संवाद के दौरान व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने जीएसटी से संबंधित प्रक्रियाओं के सरलीकरण, मंडी शुल्क, अतिक्रमण एवं पार्किंग की समस्या, लीज नवीनीकरण, औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने सहित विभिन्न विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारी और उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। व्यापारी न केवल रोजगार सृजन करते हैं, बल्कि उत्पादन और उपभोक्ता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में राज्य की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्यमी तक प्रत्येक व्यापारी प्रदेश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण भागीदार है। राज्य सरकार व्यापारियों एवं उद्यमियों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनके लिए सुरक्षित, पारदर्शी तथा सरल व्यावसायिक वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड जैसे चुनौतीपूर्ण समय में भी प्रदेश के किराना एवं रिटेल व्यापारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों तक राशन एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाईं। संकट के समय व्यापारी वर्ग ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर यह सिद्ध किया कि वह देश और प्रदेश का मजबूत स्तंभ है। उन्होंने कहा कि हमारे व्यापारी “ब्रांड इंडिया” के सच्चे राजदूत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में व्यापार, उद्यमिता और नवाचार के प्रति नया विश्वास पैदा हुआ है। प्रधानमंत्री का निरंतर प्रयास रहा है कि देश में ऐसा वातावरण तैयार हो, जिसमें सामान्य परिवार का युवा भी नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने का सपना देख सके। केंद्र एवं राज्य सरकार इसी सोच के साथ युवाओं में उद्यमिता और स्वरोजगार को प्रोत्साहित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। निवेशकों एवं उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए “निवेश मित्र” की व्यवस्था की गई है और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया गया है। वर्तमान में 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट के दौरान उद्योग जगत एवं व्यापारियों से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने 30 से अधिक नीतियां तैयार की हैं। इन नीतियों के निर्माण में उद्योग एवं व्यापार जगत के सुझावों को प्राथमिकता दी गई, जिसके सकारात्मक परिणाम प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के रूप में सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनसे लगभग 1.27 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। सरकार की सोच स्पष्ट है कि शासन उद्योगों के लिए बाधा नहीं, बल्कि सहयोगी और भागीदार बने। उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और रोजगार बढ़ने से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को अपने विचारों, नवाचार एवं उद्यम के माध्यम से रोजगार देने वाला बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड स्टार्टअप नीति लागू की गई है। इसके साथ ही 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड भी स्थापित किया गया है। सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों का युवा भी अपने गांव में रहकर देश और दुनिया के बाजार के लिए कारोबार खड़ा कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का औद्योगिक विकास केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, इसके लिए पर्वतीय जनपदों में भी औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष औद्योगिक पार्कों हेतु भूमि चिन्हित की गई है। छोटे उद्यमियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरिद्वार में फ्लैटेड फैक्ट्री विकसित की जा रही है तथा भविष्य में सेलाकुई और पंतनगर में भी इस प्रकार की सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि जहां प्रतिभा हो, वहीं अवसर उपलब्ध हों और जहां युवा हों, वहीं रोजगार के साधन विकसित किए जाएं। उत्तराखंड का विकास केवल बड़े उद्योगों से संभव नहीं है। गांवों में तैयार होने वाले उत्पाद, शिल्पकार, किसान, छोटे व्यापारी एवं स्थानीय उद्यमी भी प्रदेश की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण भागीदार हैं।

उन्होंने कहा कि “वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट” जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों एवं पारंपरिक शिल्प को बड़े बाजारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि “मेड इन उत्तराखंड” केवल प्रदेश के उत्पादों की पहचान न रहे, बल्कि गुणवत्ता और विश्वास के साथ वैश्विक बाजार में एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित हो। राज्य में फार्मा, हर्बल, आयुष, इंजीनियरिंग और ऑटो-कंपोनेंट जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के रूप में विकसित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में व्यापार करने वाला प्रत्येक व्यक्ति राज्य की विकास यात्रा का भागीदार है। व्यापार की प्रगति में ही प्रदेश की प्रगति निहित है। जब व्यापारी का व्यवसाय बढ़ता है तो रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक व्यापारी को सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी व्यवस्था, सरल प्रक्रियाएं और निवेश के बेहतर अवसर उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि उत्तराखंड का व्यापारी केवल प्रदेश के बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि देश और दुनिया के बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। आज देश और उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़ रहे हैं तथा व्यापार और उद्योग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जो अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति के साथ आर्थिक शक्ति का भी प्रमुख केंद्र बने, जहां युवाओं के हाथ में रोजगार, व्यापारियों के मन में विश्वास और उद्यमियों के सामने नए अवसर हों।

मुख्यमंत्री ने व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों से प्रदेश में निवेश एवं व्यापारिक गतिविधियों को और आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा, “आप व्यापार बढ़ाइए, सरकार आपके साथ खड़ी है।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। व्यापार एवं उद्योग जगत के सहयोग और सहभागिता से विकसित उत्तराखंड का संकल्प साकार होगा और उत्तराखंड विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, मंत्री राम सिंह कैड़ा, दायित्वधारी नवीन लाल वर्मा, डॉ. अनिल कपूर ‘डब्बू’, शंकर कोरंगा, हुकुम सिंह कुंवर, व्यापार एवं उद्योग प्रतिनिधियों में कश्मीरी लाल गोयल, नीरज शारदा, राधेराम अग्रवाल, साकेत अग्रवाल, दीपक माहेश्वरी, गौरव गोयल सहित जीएसटी, उद्योग, सिडकुल एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली ने किया।

सीएम ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय खेल दिवस-2026 के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, गौलापार, हल्द्वानी में उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय, मानसखण्ड खेल परिसर के प्रथम चरण के ₹43.50 करोड़ के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रथम शैक्षणिक सत्र का भी शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों एवं उनके प्रशिक्षकों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार एवं हिमालय रत्न पुरस्कार प्रदान किए। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से खेल छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों एवं खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद की जयंती पर हल्द्वानी से उत्तराखण्ड के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास और प्रथम शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगा। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करते हुए ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने अपने असाधारण खेल कौशल से पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया। मेजर ध्यानचंद का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि प्रतिभा को महानता में बदलने के लिए कठोर परिश्रम, अनुशासन और समर्पण आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश के खेल क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अभी तक खेल शिक्षा और विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए प्रदेश के खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपनी देवभूमि में ही उच्च स्तरीय खेल शिक्षा, आधुनिक प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने का प्रमुख केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि देवभूमि और वीरभूमि उत्तराखण्ड अब ‘खेलभूमि’ के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ाया है। खिलाड़ियों की उपलब्धियां राज्य के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को खेल छात्रवृत्ति प्रदान करते हुए कहा कि यह छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के प्रति एक नया वातावरण बना है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश के कोने-कोने में छिपी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। छोटे गांवों, दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों और सामान्य परिवारों से निकलकर युवा खिलाड़ी आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरणा लेते हुए उत्तराखण्ड सरकार भी राज्य को खेलों का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी का सही दिशा में उपयोग करने के लिए खेल एक सशक्त माध्यम है। उत्तराखण्ड के युवाओं में अद्भुत ऊर्जा और प्रतिभा है। आवश्यकता उन्हें सही मंच, आधुनिक संसाधन, बेहतर प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के अंतर्गत 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को मासिक खेल छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के माध्यम से 14 से 23 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को मासिक खेल छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। खिलाड़ियों के लिए खेल इंजरी एवं आकस्मिक परिस्थितियों में बीमा और आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने तथा स्थानीय एवं पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खेल विकास निधि का गठन किया गया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवायोजन की व्यवस्था की गई है। इसके तहत अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी विभिन्न विभागों में सेवायोजित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश का पहला बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में संचालित किया जा रहा है। भविष्य की खेल चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड खेल नीति-2026 का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘एक जनपद-एक खेल’ योजना के माध्यम से प्रत्येक जनपद की विशिष्ट खेल पहचान विकसित करने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग खेल विधाओं के लिए 23 नई हाईटेक खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों में अधिक से अधिक पदक जीतने और ओलंपिक-2036 में उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अभी से विशेष रोडमैप पर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक खेलों के विकास और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी सोच के साथ ‘मौली एआई एप्लीकेशन’ विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से उदीयमान खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। भविष्य में आधुनिक खेल तकनीकों के अधिकाधिक प्रयोग के माध्यम से खिलाड़ियों के कौशल और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे मैदान में उतरकर पूरी मेहनत और समर्पण के साथ अपना शत-प्रतिशत दें। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि साधनों की कमी, आर्थिक कठिनाई अथवा अवसरों का अभाव किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी के सपनों की राह में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का प्रत्येक खिलाड़ी हिमालय की तरह अडिग रहकर न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन करे।

देवभूमि खेल पुरस्कार से खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक सम्मानित
वर्ष 2024 के लिए एथलेटिक्स की अंकिता को देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार तथा एथलेटिक्स के ही लोकेश चौधरी को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2025 के लिए शूटिंग के अभिनव देशवाल को खेल रत्न पुरस्कार, क्याकिंग एंड कैनोइंग के मुकेश शर्मा को द्रोणाचार्य पुरस्कार तथा बॉक्सिंग के मुकेश चन्द्र बेलवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया। दिव्यांग श्रेणी में शूटिंग के शौर्य सैनी को हिमालय रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया। मॉडर्न पैंटाथलॉन में टीम श्रेणी में सक्षम प्रताप सिंह एवं ममता खाती तथा बॉक्सिंग में एकल श्रेणी में खुशी चंद को हिमालय खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी पुरस्कार विजेताओं को नकद धनराशि के साथ प्रशस्ति पत्र, ब्लेजर एवं शॉल प्रदान किए गए।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी और प्रशिक्षक भी पुरस्कृत
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मानित खिलाड़ियों में एथलेटिक्स की अंकिता, बॉक्सिंग की खुशी चंद, हॉकी की मनीषा चौहान, वॉलीबॉल के रफीक अहमद, कबड्डी की भूमिका एवं राहुल सिंह, बैडमिंटन के चिराग बरेठा, मनोज सरकार एवं मनदीप कौर, मॉडर्न पैंटाथलॉन के सक्षम प्रताप सिंह, ब्लाइंड फुटबॉल की शेफाली रावत, पैरा लॉन बॉल की निलिमा राय तथा शूटिंग के आर्यावंश त्यागी एवं भूमि शामिल रहे।

उत्कृष्ट प्रशिक्षकों में एथलेटिक्स कोच लोकेश कुमार, बॉक्सिंग कोच बिजेन्द्र मल्ल, शूटिंग कोच अमित, वॉलीबॉल कोच गिरीश कुमार एवं कबड्डी कोच नितिन कुमार को भी पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या, सांसद अजय भट्ट तथा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में खेल मंत्री रेखा आर्या, विधायक राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विधायक सरिता आर्या, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, दायित्वधारी डॉ. अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्या, शंकर कोरंगा सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने मेरे सपनों का उत्तराखंड पर विद्यार्थियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नेरुद्रपुर स्थित निजी विद्यालय में मेरे सपनों का उत्तराखंड पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवा विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विचारों, सुझावों और भविष्य के उत्तराखंड को लेकर उनकी परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा विद्यार्थियों की ऊर्जा, सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की भावी पीढ़ी, सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बने, यही हमारी प्राथमिकता है। युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने के लिए शिक्षा, रोजगार, नवाचार, कौशल विकास, पर्यटन, कृषि, खेल और तकनीक सहित प्रत्येक क्षेत्र को सशक्त बनाया जा रहा है। युवा शक्ति उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत है और उनके सपनों, विचारों एवं प्रतिभा को अवसर देकर हम एक आत्मनिर्भर, सक्षम और विकसित उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा केवल आज का नहीं बल्कि कल के भविष्य भी हैं। मेरे सपनों का उत्तराखंड विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पर्यटन, विकास, नवाचार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। और इन क्षेत्रों के लिए सरकार ने नई नीतियां लागू की हैं।

विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं को बढ़ावा देने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में देश की 5वीं सबसे बड़ी साइंस सिटी का निर्माण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के होनहार विद्यार्थियों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश और दुनिया पर नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने लीडरशिप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नेतृत्व क्षमता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। बल्कि खेल, चिकित्सा, विज्ञान, मीडिया और उद्योगकृहर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में सच्चे लीडर होते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से जुड़कर देश व राज्य के विकास में अपना योगदान देने का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी को राखी त्यौहार की बधाईयां व शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ प्रतियोगिता को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच और संकल्प को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी राज्य के भविष्य को लेकर सजग और जागरूक है। विद्यार्थियों के सपनों, सुझावों और नवाचारपूर्ण विचारों को विकास की दिशा से जोड़ते हुए एक ऐसे उत्तराखंड के निर्माण किया जाएगा, जो सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित हो।

कार्यक्रम में विभिन्न विधालयों के लगभग 800 छात्र-छात्राएं, शिक्षक सहित महापौर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, रामपाल सिंह, दिनेश मानसेरा, उत्तम दत्ता, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम धामी ने सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के स्टालों से खरीदे स्थानीय उत्पाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों से विभिन्न स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से आगामी त्योहारों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को आगे बढ़ाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे उत्पाद हमारी स्थानीय संस्कृति, परंपरा और हुनर की पहचान हैं। इन उत्पादों को खरीदकर हम न केवल स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि उनसे जुड़ी महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों का समय स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रदेशवासी त्योहारों पर उपहार एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद में स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक प्राथमिकता दें। हमारे द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पाद की प्रत्येक खरीद किसी परिवार की आय बढ़ाने, किसी महिला के स्वरोजगार को मजबूती देने और राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक बनती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने देश में स्थानीय उत्पादों के प्रति एक नया विश्वास पैदा किया है। राज्य सरकार भी महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस त्योहारी सीजन में स्थानीय उत्पाद खरीदें, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ को जन-अभियान बनाने में अपना योगदान दें। स्थानीय उत्पादों को अपनाने से ही आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।