चारधाम यात्रा प्रबंधन प्राधिकरण के गठन को कार्रवाई तेज करने के निर्देश

मुख्यंमत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को चारधाम प्रबंधन यात्रा प्राधिकरण के गठन हेतु कार्रवाई त्वरित गति से करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने यमुनोत्री धाम में कैरिंग कैपेसिटी (धारण क्षमता) कैसे बढ़ाई जाए, इस पर भी कार्ययोजना शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।
बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित बैठक में उन्होंने यह निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रबंधन प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र सिर्फ चारधामों तक सीमित नहीं होगा अपितु प्रदेश में समस्त प्रकार की यात्राओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उक्त प्राधिकरण के अंतर्गत आएगी। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण गठन के पीछे मुख्य उद्देश्य यही है कि प्रदेश में बढ़ते धार्मिक व सामान्य पर्यटन के मद्देनजर हमारे पास एक ऐसी संस्था हो जो इन सब जिम्मेदारियों व तैयारियों का भलीभांति निर्वहन कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरगामी विजन के चलते आज प्रदेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। खासतौर से इस बार के यात्रा सीजन में यह तथ्य प्रमुखता से उभरा है कि गंगोत्री व यमुनोत्री धामों में तीर्थयात्रियों की संख्या में दोगुना तक वृद्धि हुई है। ऐसे में यमुनोत्री धाम की कैरिंग कैपेसिटी यानि वहां ठहरने की सुविधाएं होटल, गेस्ट हाउस आदि को किस प्रकार से बढ़ाया जाना चाहिए, इस दिशा में भी ठोस कार्य किये जायें। विदित हो कि चारधामों के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सतत रूप से प्रयासरत रहे हैं और इसी का प्रतिफल है कि श्री बद्रीनाथ धाम व केदारनाथ धाम में मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य किये जा रहे हैं। साथ ही ऑल वेदर रोड के निर्माण के बाद चार धामों की यात्रा अधिक सुगम व सुरक्षित हुई है।

चारधाम यात्रा को कोटद्वार से संचालित करने की संभावना तलाशें, रोपवे की बाधाओं को करें दूर
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा अभी मुख्य रूप से ऋषिकेश से संचालित होती है लेकिन यहां पर बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुँचने के चलते जाम की समस्या भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा का संचालन किस तरह से कोटद्वार से भी किया जा सकता है, इसकी भी संभावना तलाशी जायें। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ धाम, हेमकुंड साहिब व यमुनोत्री धाम के लिए रोपवे निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

टिहरी झील व आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1200 करोड़ का प्रोजेक्ट
टिहरी झील और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एडीबी ने 1200 करोड़ रुपये का अवस्थापना संबंधी प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है। उन्होंने इसकी निविदा प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के आने से टिहरी झील के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन तेजी से बढ़ेगा। इससे यह झील और भी अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगी। मुख्यमंत्री ने पौड़ी जिला मुख्यालय तक पर्यटन को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक लोग यहां पहुँच सके और यह क्षेत्र भी सीधे पर्यटन से जुड़ सके।

मुख्य सचिव ने 31 जुलाई तक डीपीआर भेजने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने लोक निर्माण, सिंचाई, पशुपालन, स्कूली शिक्षा, कौशल तथा तकनीकी शिक्षा विभाग को 24 घण्टे की डेडलाइन देते हुए अवशेष 383.11 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट तत्काल नाबार्ड को भेजने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने 31 जुलाई की समय सीमा निर्धारित करते हुए सभी विभागों को वित्त विभाग को डीपीआर भेजने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को भविष्य में नाबार्ड की समयसीमा के अनुसार ही अपने प्रोजेक्ट के बजट बनाकर समयबद्धता से भेजने की सख्त हिदायत दी है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने विभागों को अपने प्रोजेक्ट के प्रस्ताव, आहरण, प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट (पीसीसी), प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) को ऑनलाइन जमा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को प्रोजेक्ट पूरे होने पर एक सप्ताह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट तथा छः माह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) जमा करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही राधा रतूड़ी ने विभागों को शहरी अवसंरचना विकास निधि (यूआईडीएफ) के तहत पार्किंग, मलिन बस्तियों के पुनर्विकास एवं शहरी वनीकरण के प्रोजेक्ट को शीर्ष प्राथमिकता पर नाबार्ड को भेजने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव रतूड़ी ने विभागों को सख्त हिदायत दी है कि नाबार्ड को सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले तथा योग्य प्रोजेक्ट ही प्रस्तावित किए जाने चाहिए। प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता भी विभागों द्वारा ही तय की जानी चाहिए तथा विभागों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फण्डिंग की डुप्लीकेसी ना हो। उन्होंने अपेक्षाकृत छोटे प्रोजेक्ट को नाबार्ड में प्रस्तावित ना करने का सुझाव दिया है। मुख्य सचिव ने विभागों को दिए गए लक्ष्य के 50 प्रतिशत प्रोजेक्ट 30 जून, 60 प्रतिशत प्रोजेक्ट 31 जुलाई तथा 100 प्रतिशत प्रोजेक्ट 15 अगस्त तक वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वित्त विभाग को भी प्रतिपूर्ति हेतु बिल नाबार्ड में जमा कराने हेतु प्रत्येक चार माह का टारगेट दिया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी विभागों को कड़ाई से स्पष्ट किया है कि प्रतिपूर्ति लेने में असफल होने वाले विभागों को इस सम्बन्ध में भविष्य में कार्यशैली में सुधार करना होगा। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को जल स्रोतों एवं नदियों के पुनर्जीवीकरण के प्रोजेक्ट नाबार्ड हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए।
बुधवार को सचिवालय में नाबार्ड की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक की अध्यक्षता के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि राज्य के ग्रामीण विकास में नाबार्ड द्वारा प्राप्त होने वाली वित्तीय सहायता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि वित्त विभाग द्वारा कुल 360.47 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट प्राप्त किए गए हैं जिनमें सिंचाई विभाग से 77.40 करोड़ के 10 प्रोजेक्ट, लोक निर्माण विभाग से 193.11 करोड़ के 89 प्रोजेक्ट, तकनीकी शिक्षा से 66.96 करोड़ के 4 प्रोजेक्ट, पशुपालन से 9.52 करोड़ का 1 प्रोजेक्ट, ग्रामीण निर्माण विभाग से 13.4811 करोड़ के 5 प्रोजेक्ट हैं। वर्ष 2023-24 में राज्य को नाबार्ड द्वारा कुल अनुमोदित 904.4 करोड़ के सापेक्ष भुगतान 954.9 करोड़ रहा है। वर्ष 2024-25 के लिए आरआईडीएफ के तहत 1200 करोड़ का अनुमोदित लक्ष्य तथा 969 करोड़ रूपये का प्रतिपूर्ति लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में नाबार्ड के तहत ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से 2.05 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई सुविधाओं का सृजन एवं पुनर्द्धार किया गया है। लगभग 14,766 किमी ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क का निर्माण एवं सुधार किया गया है। 27307 मीटर ब्रिज का निर्माण हो चुका है। 23.77 लाख ग्रामीण आबादी को पेयजल सुविधा मिल चुकी है। 241 स्कूल एवं आईटीआई का निर्माण एवं पुनर्द्धार हो चुका है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव दिलीप जावलकर, सीजीएम नाबार्ड सहित वित्त, लोक निर्माण, सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

जनपदों से लिया फीडबैक, पुख्ता तैयारियों के दिये निर्देश

प्रदेश में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिये स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड़ पर रहने तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिये सभी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिये गये हैं। विशेषकर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, चम्पावत, नैनीताल, पौड़ी व टिहरी जनपदों के विभागीय अधिकारियों को डेंगू व अन्य वेक्टर जनित रोगों से निपटने के लिये जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही माइक्रो प्लान तैयार कार्य करने को कहा गया है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशायल में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर विभागीय समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने कहा कि आने वाले चार माह डेंगू व चिकनगुनिया सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों की दृष्टि से काफी संवदेनशील हैं। जिनसे निपटने के लिये आम लोगों में जनजागरूकता फैलाने के साथ ही विभागीय तैयारियों को पुख्ता किया जाना जरूरी है। उन्होंने सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को अपने-अपने जनपदों का माइक्रो प्लान तैयार कर अन्य रेखीय विभागों के साथ बैठक करने व कार्ययोजना को धरातल पर क्रियान्वित करने के निर्देश दिये।
डा. रावत ने कहा कि पिछले वर्षों के आंकड़ों को देखते हुये विशेषकर मैदानी जनपदों के विभागीय अधिकारी अपनी टीम को अलर्ट मोड़ पर रखें, ताकि किसी भी स्थिति से आसानी से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि जनपदों में संभावित डेंगू मरीजों को बेहतर चिकित्सा दिये जाने के मध्यनज़र आइसोलेटेड बेड आरक्षित रखने, पर्याप्त मात्रा में दवाईयां की उपलब्धता के साथ ही ब्ल्ड बैंकों में पर्याप्त मात्रा में ब्ल्ड की व्यवस्था भी बनाई जाय। विभागीय मंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू की रोकथाम में आशा कार्यकत्रियों के माध्यम से संभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने के साथ ही जोरों पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाय। उन्होंने सभी सीएमओ को निर्देश दिये कि संबंधित जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सभी रेखीय विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर अपने जनपदों में वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिये प्रभावी कदम उठायें।
बैठक में स्वास्थ्य सचिव डा. आर. राजेश कुमार, अपर सचिव अमनदीप कौर, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. विनीता शाह, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डा. आशुतोष सयाना, निदेशक स्वास्थ्य डा. तारा आर्य, डा. सुनीता टम्टा, डा. भागीरथी जंगपांगी, डा. मीतू शाह, डा. जौहरी, डा. चुफाल, डा. कुलदीप मार्ताेलिया सहित तमाम विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जबकि सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया।

’जनपदों में होगी स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक’
बैठक में विभागीय मंत्री डा. रावत ने बताया कि आगामी 17 जून के बाद वह प्रत्येक जनपद में जाकर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक लेंगे। जिसमें संबंधित सांसद, क्षेत्रीय विधायक व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ ही स्वास्थ्य सचिव, महानिदेशक स्वास्थ्य, जिलाधिकारी व विभागीय अधिकारी प्रतिभाग करेंगे। इसके लिये उन्होंने विभागीय अधिकारियों को अपने-अपने जनपदों की सभी जानकारियां उपलब्ध रखने के निर्देश दिये।

’चार धाम यात्रा में बनाये रखें मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था’
स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने समीक्षा बैठक में चार धाम सहित यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी विभागीय अधिकारियों से ली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को यात्रा मार्गों पर तीर्थ यात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने एम्बुलेंस के रिस्पॉस टाइम को भी कम करने, दवाईयों एवं जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने को कहा। डा. रावत ने उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, रूद्रप्रयाग और चमोली जनपद के सीएमओ को अलर्ट मोड़ पर रहने के भी निर्देश दिये।

’विभाग में भरे जायेंगे सभी संवर्गों के रिक्त पद’
बैठक में विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को विभाग के अंतर्गत सभी संवर्गों के रिक्त पदों का विवरण तैयार कर उनको भरने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की सबसे निचली इकाई आशा कार्यकत्री, एएनएम, वार्ड ब्वाय, सीएचओ, टेक्नीशियन, नर्सिंग अधिकारी, एमओआईसी सहित चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरा जाना अति आवश्यक है। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को संवर्गवार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का बैकलॉक खत्म

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं और बेहतर बनाने के लिए जिलाधिकारियों से समन्वय बनाकर रखें। समय-समय पर उच्चाधिकारी यात्रा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करें, और बेहतर व्यवस्थाओं के लिए जिलाधिकारियों का सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि यात्रा प्राधिकरण बनाने के लिए, कर्तव्य और दायित्व निर्धारित किये जाएं। इसमें प्रशासन, मंदिरों, ट्रासपोर्टस, टूर एजेंटो एवं अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक की जाए। उन्होंने कहा यात्रा मार्गों पर 42 सीटर तक की बसों की व्यवस्था सुनिश्चत की जाए।
बैठक के दौरान गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय ने कहा कि चारधाम यात्रा के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में श्रद्धालुओं का बैकलॉग खत्म हो गया है। जो भी श्रद्धालु आ रहे हैं, उनका पंजीकरण कर चारधाम यात्रा पर भेजा जा रहा है। पंजीकरण की संख्या अब सीमित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्वेस्टर समिट के दौरान जो निवेश प्राप्त हुए हैं, उनके क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए। ऐसे निवेश प्रस्तावों को पहले प्राथमिकता में रखा जाए, जो राज्य की परिस्थितियों के अनुकूल हों तथा स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने में सहायक हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन, टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन और दिल्ली-देहरादून एलीवेटेड रोड के अन्तर्गत राज्य में टनल निर्माण में लगी कार्यदायी संस्थाओं के साथ बैठक बुलाई जाए और निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाय।
बेतालघाट, नैनीताल में पिकअप पलटने पर घायलों द्वारा 108 को कॉल करने पर फोन न उठने की खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने सचिव स्वास्थ्य को निर्देश दिये कि इस मामले की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह खबर सही है, तो इसके प्रति जिम्मेदार लोगों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

ई-केवाईसी ना होने से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं ले पा रहे थे अल्मोड़ा के धर्म सिंह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में आने के बाद अल्मोड़ा के लमगड़ा ब्लॉक अंतर्गत तुलेड़ी गांव में रहने वाले बुजुर्ग धर्म सिंह को दो वर्ष के लंबे समयांतराल के बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। रेटिना और अंगूठे का स्कैन न होने की वजह से धर्म सिंह की ई-केवाईसी नहीं हो पा रही थी। जिस कारण वह इस योजना से वंचित चल रहे थे।
सोमवार को प्रधानमंत्री ने दिल्ली से सम्मान निधि की 17वीं किस्त जारी करी तो स्थानीय लोगों ने धर्म सिंह के मामले को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री से मामले में कार्रवाई की मांग की।
मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को बुजुर्ग की ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए। जिसके बाद सचिव शैलेश बगोली ने मामले को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बुजुर्ग की ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए। सचिव के आदेश मिलते ही प्रशासन के आला अधिकारी बुजुर्ग के घर पहुंचे और उनकी ई-केवाईसी करवाई गई। अब जल्द ही धर्म सिंह को भी अन्य किसानों की भांति किसान सम्मान निधि मिलनी शुरू हो जाएगी।
केवाईसी होने और उनके मामले का त्वरित संज्ञान लेने पर बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार बुजुर्ग, महिलाओं और दिव्यांगों के कल्याण के लिए पूरी तरह से समर्पित है। हमारा प्रयास डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रत्येक वर्ग को लाभान्वित करना है।

मौसम के पूर्व चेतावनी के आधार पर लोगों को नियमित अलर्ट मोड पर रखें-धामी

15 जून से पहले मानसून के दृष्टिगत सभी तैयारियां पूर्ण की जाय। सभी विभाग 15 जून तक आपदा प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती करना सुनिश्चत करें। एसटीपी प्लांट और पुराने पुलों का सेफ्टी ऑडिट किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि बिजली की तारों से कोई घटना घटित न हो। मानसून सीजन के दृष्टिगत मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए आपातकालीन स्थिति में हेली एम्बुलेंस की व्यवस्था रखी जाए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आगामी मानसून की तैयारियों की बैठक के दौरान ये निर्देश अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि से पिछले सालों में क्या चुनौतियां सामने आई और किन-किन क्षेत्रों में अधिक आपदाएं आई एवं इस तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए शासन और जनपद स्तर पर क्या तैयारियां की गई हैं, इसका पूरा एक्शन प्लान प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मौसम के पूर्वानुमान की सटीक जानकारी लोगों तक समय पर पहुंचे। मौसम के पूर्व चेतावनी के आधार पर लोगों को नियमित रूप से अलर्ट मोड पर रखें। उन्होंने कहा कि मौसम के पुर्वानुमान और जन जागरूकता से अतिवृष्टि और आपदा के प्रभाव को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जनपदों में ऐसे क्षेत्र जहां भू-स्खलन की समस्याएं रहती हैं, उन्हें चिन्हित कर जो भी आवश्यक व्यवस्थाएं करवाने की आवश्यकता है, समय पर की जाए। जिन क्षेत्रों में बरसाती नदी और नाले उफान पर आते हैं, उनके लिए भी वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए अभी से प्लान बना कर रखे जाएं। मानसून के दृष्टिगत विभिन्न कार्यों के लिए शासन स्तर से जो धनराशि की आवश्यकता है, उसका यथाशीघ्र प्रस्ताव भेजा जाए। अतिवृष्टि के कारण फसलों को होने वाले नुकसान का तुरंत आकलन कर मानकों के अनुसार यथाशीघ्र क्षतिपूर्ति की व्यवस्था रखी जाए। मानसून के दृष्टिगत पर्वतीय जनपदों में आवश्यक दवाओं, खाद्य सामग्री एवं अन्य मूलभूत आवश्यकताओं से संबंधित सभी व्यवस्थाएं पर्याप्त मात्रा में रखी जाए। आपदा कि स्थिति में रिस्पांस टाइम कम से कम रखा जाए। मानसून अवधि में सभी जिलाधिकारी मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने जनपदों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार छुट्टी की घोषणा करें, स्कूल जाने के पैदल मार्गों में नदी और नाले वाले स्थानों पर वैकल्पिक मार्ग तलाशे जाएं। हर जनपद में बड़े रपटे चिन्हित किये जाएं एवं वहां पर सुरक्षा की दृष्टि से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा के दृष्टिगत त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था रखी जाए। आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अल्मोड़ा जनपद के सरियापनी में एसडीआरएफ बटालियन खोलने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से विभिन्न विभागों द्वारा शासन से जो धनराशि की मांग की जा रही है, वह धनराशि यथाशीघ्र संबंधित विभागों को दी जाए। जिलाधिकारियों द्वारा भी विभिन्न पदों में जो धनराशि की मांग की जा रही है, उन्हें भी शीघ्र धनराशि अवमुक्त की जाए। जिन विभागों को पहले की धनराशि अभी तक अवमुक्त नहीं हुई है, वह शीघ्र दी जाए, इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि मानसून अवधि में सड़कें, विद्युत और पेयजल लाईन बाधित होने की स्थिति में उनकी सुचारू व्यवस्थाओं के लिए रिस्पांस टाईम कम से कम रखा जाए और वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने निर्देश दिये कि अतिवृष्टि से पिछले वर्ष के जो कार्य अभी तक पूर्ण नहीं किये गये हैं, उन्हें 15 जून तक पूर्ण किया जाए।
बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद् विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, एल. फैनई, डीजीपी अभिनव कुमार, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, सचिव आर. मीनाक्षी सुदंरम, शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, दिलीप जावलकर, सचिन कुर्वे, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, सचिव आर. राजेश कुमार, एस.एन.पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, वर्चुअल माध्यम से कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत एवं सभी जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

नई दिल्ली में निर्मित उत्तराखण्ड निवास में दिखेगी पहाड़ी शैली की झलक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में निर्माणाधीन ‘उत्तराखण्ड निवास’ का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था को निर्देशित करते हुए कहा कि कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए माह जुलाई तक कार्य को पूर्ण किया जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्ग में राज्य अतिथि गृह बनाने के भी निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड निवास में पहाड़ी शैली की झलक देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान उत्तराखण्ड निवास के निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से बातचीत भी की।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा, विशेष कार्याधिकारी रंजन मिश्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएस रतूड़ी ने दिए सभी सरकारी विभागों को सिर्फ मानकीकृत एवं प्रमाणीकृत उत्पादों की खरीद के निर्देश

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी सरकारी विभागों को सिर्फ मानकीकृत एवं प्रमाणीकृत उत्पादों की खरीद के निर्देश दिए हैं। सीएस ने बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) को राज्य में उत्पादों के प्रमाणीकरण के प्रशिक्षण से सम्बन्धित अपना नियमित कैलेण्ड जारी करने का भी अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के युवाओं के लिए मानकीकरण, गुणवत्ता सुनिश्चतता, मेनेजमेंट सिस्टम, प्रमाणीकरण, लेब प्रशिक्षण की व्यवस्था कर उन्हें स्टार्ट अप शुरू करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने मानकीकरण एवं प्रमाणीकरण को बढ़ावा देने हेतु राज्य स्तरीय अधिकारियों के क्षमता विकास, शैक्षणिक संस्थाओं में स्टेण्डर्ड क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्ता एवं मानकीकरण के बारे में जागरूक करने तथा ग्राम पंचायत स्तर पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखण्ड राज्य में औद्योगिक उत्पादों के मानकीकरण एवं गुणवत्ता हेतु राज्य स्तरीय समिति की चौथी बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने उत्पादों के प्रमाणीकरण के सम्बन्ध में ग्राहकों तथा ग्राहक समूहों जिसमें स्वयं सहायता समूह आदि भी शामिल हो हेतु जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों तथा उद्यमों में कार्यरत कार्मिकों को भारत मानक ब्यूरों के कार्यालयों, टेस्टिंग लेब तथा मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट में भ्रमण करवाने के भी निर्देश दिए हैं। सीएस ने उत्पादों के प्रमाणीकरण से सम्बन्धित सूचना पट जिलाधिकारी कार्यालय सहित मुख्य सार्वजनिक स्थानों पर लगवाने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जिला स्तरीय अधिकारियों को अपनी प्रोक्योरमेंट पॉलिसी में प्रमाणीकरण एवं मानकीकरण को लागू करने हेतु संवेदनशील बनाया जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव एल फैनई सहित भारत मानक ब्यूरो तथा राज्य सरकार के अधिकारी मौजूद रहे।

राज्य के प्राकृतिक स्त्रोतों के पुनर्जीवीकरण के लिए जिलाधिकारियों को एक सप्ताह की डेडलाइन

उत्तराखण्ड में जलस्रोतों, धाराओं व नदियों के पुनर्जीवीकरण के सम्बन्ध में जिलों से एक्शन प्लान प्राप्त ना होने पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस सम्बन्ध में जिलाधिकारियों को एक सप्ताह की डेडलाइन दी है। विषय की गम्भीरता को देखते हुए सीएस ने जिलाधिकारियों को इस कार्य हेतु जिलें में तत्काल एक पूर्णकालिक समर्पित जलागम नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को तत्काल तीन दिन के भीतर जिला स्तरीय Spring and river rejuvenation authority (SARRA) की बैठक लेने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को इस अभियान से प्रमुखता से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने अपर मुख्य सचिव वित्त को निर्देश दिए कि विभिन्न माध्यमों जैसे मनेरगा, नाबार्ड, कैम्पा, पीएमकेएसवाई से जलस्रोतों व नदियों के पुनर्जीवीकरण हेतु फण्डिंग यूटिलाइजेशन के सम्बन्ध में बैठक करने हेतु पत्र जारी किया जाए। मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने बुधवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में सम्बन्धित अधिकारियों को राज्य के जलस्रोतों, नदियों, सहायक नदियों, धाराओं के पुनर्जीवीकरण हेतु जिलावार योजना के स्थान पर Holistic and Integrated पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में जल संरक्षण के सम्बन्ध में आज की महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारियों को जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत प्रत्येक ब्लॉक में 10 Critical सूख रहे स्प्रिंग तथा जिलें में 20 Critical सूख रहे जलधाराओं/सहायक नदियों के चिन्हीकरण के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक जिले में दीर्घ अवधि के योजना के तहत एक नदी के पुनर्जीवीकरण की योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने मैदानी जिलों में सूख चुके तालाबों के चिन्हीकरण एवं पुनर्जीवीकरण के एक्शन प्लान पर भी कार्य के करने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत ग्राम स्तर पर जल संरक्षण कार्य हेतु लक्ष्यों के अंतर्गत बताया गया है कि प्रायः पर्वतीय ग्रामों में 2 से 3 जल स्रोत उपलब्ध होते हैं। इन जल स्रोतों के पुनरुद्धार को लक्षित करते हुए इन स्रोतों के जल संभरण क्षेत्रों में कन्टूर ट्रेचेंज एवं रिचार्ज पिट्स निर्मित किये जा सकते हैं। मैदानी ग्रामों में कच्चे तालाब, चैक डैम एवं रिचार्ज पिट्स के माध्यम से भू-जल रिचार्ज किया जा सकता है। ग्रामों के समीप वन क्षेत्रों एवं चारागाह क्षेत्रों में चाल-खाल का निर्माण किया जा सकता है।

इसके साथ ही जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत विकासखंड स्तर पर Critical जल स्रोतों के उपचार का लक्षयों में बताया गया है कि Critical जल स्रोतों के चिन्हीकरण हेतु पेयजल विभाग एवं जल संस्थान द्वारा चिन्हित ऐसी पेयजल योजनाएं जिसमें जल का प्रवाह अत्यधिक कमी दृष्टिगत हो रही है, के उपचार की योजना निर्माण कर क्रियान्वयन की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। केंद्रीय भू-जल बोर्ड द्वारा चिन्हित 4 मैदानी जनपदों में चिन्हित Aquifer के रिचार्ज क्षेत्रों में योजना निर्माण कर क्रियान्वयन की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। पेयजल विभाग एवं जल संस्थान विभाग द्वारा 145 Critical जल स्रोत उपचार हेतु चिन्हित किये गये हैं।

जल संरक्षण अभियान 2024 के तहत जनपद स्तर पर सहायक नदियों और धाराओं के उपचार का लक्षयो के तहत बताया गया है कि पेयजल एवं जल संस्थान विभाग द्वारा निर्मित कई पेयजल योजनाएं जोकि वर्षा आधारित सहायक नदियों/गधेरों पर निर्भर है, इनके जीर्णोद्धार की योजना प्राथमिकता के आधार पर निर्मित कर गतिविधियां प्रारंभ की सकती हैं। सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित विभिन्न सिंचाई योजनाएं सहायक नदियों / धाराओं पर आधारित संभरण क्षेत्रों को चिन्हित कर योजना बनाकर गतिविधियां प्रारंभ की जा सकती हैं। उपरोक्त योजनाओं का यदि संभरण क्षेत्र आरक्षित वन में हैं, ऐसी स्थिति में वन विभाग से अर्न्त-विभागीय समन्वय स्थापित करते हुए कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है । पेयजल विभाग/जल संस्थान विभाग द्वारा 412 सहायक नदियां/धाराएं एवं 6 नदियां उपचार हेतु चिन्हित की गई हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंदवर्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंडः 26 मई को संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा

उत्तराखंड राज्य में पहली बार राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जायेगा जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय को जिम्मेदारी दी गयी है। उत्तराखंड राज्य में उच्च शिक्षा के अन्तर्गत तीन राज्य विश्वविद्यालय जिसमें श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय टि0ग0, कुमांऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल एवं सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा सम्मिलित हैं, की राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा का आयोजन श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा किया जायेगा।

बीते दिनों श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एन0के0 जोशी की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा 2024-26 के सम्बन्ध में ऑन लाईन बैठक आयोजित की गयी। बैठक में तीनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, नोडल, संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा, विश्वविद्यालय समर्थ नोडल तथा राज्य समर्थ नोडल अधिकारी, डॉ0 शैलेन्द्र कुमार सिंह शामिल रहे। बैठक में लिये गये निर्णयों के क्रम में प्रो0 जोशी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालयों (श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय टि0ग0, कुमांऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल एवं सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा) से सम्बद्ध समस्त राजकीय/अशासकीय महाविद्यालयों/स्ववित्त पोषित शिक्षण संस्थानों में सत्र 2024-26 में प्रवेश परीक्षा का आयोजन दिनांक 26 मई, 2024 (रविवार) को गढ़वाल एवं कुमांऊ मण्डल के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में किया जायेगा, जिस हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र पंजीकरण भरने की तिथि 26 अप्रैल, 2024 से 15 मई, 2024 तक निर्धारित की गयी तथा परीक्षा शुल्क जमा करने की अन्तिम तिथि दिनांक 16 मई, 2024 निर्धारित की गयी। प्रो0 जोशी ने बैठक में उत्तराखंड राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा के सफल आयोजन हेतु तीनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों एवं बैठक में उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये।

कुलपति प्रो0 जोशी ने बताया कि छात्रों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तीनों विश्वविद्यालय आपस में समन्वय स्थापित कर प्रवेश परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण किया जाएगा। उन्होने बताया कि प्रवेश परीक्षा के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं तथा समयबद्धता के साथ दिनांक 26 मई, 2024 को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा साथ ही विश्वविद्यालय अधिकारियों को उत्तराखंड राज्य संयुक्त बी0एड0 प्रवेश परीक्षा 2024-26 के आयोजन के सम्बन्ध में आवश्यक तैयारियां 15 मई, 2024 तक पूर्ण करने हेतु निर्देश दिये गये हैं।

श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय प्रदेश में छात्र नामांकन की दृष्टि से प्रदेश का अग्रणीय विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सत्र 2022-23 से प्रारम्भ किया गया है एनईपी द्वितीय बैच के द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं दिनांक 06 मई, 2024 से प्रस्तावित हैं साथ ही अन्य आधारभूत एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम जो कि नॉन एनईपी पाठ्यक्रम संचालित हैं उनकी परीक्षाएं भी दिनांक 06 मई, 2024 से प्रस्तावित हैं। छात्र हितों के मध्येनजर विभिन्न पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किये जा रहे हैं। शैक्षणिक कैलेन्डर के अनुरूप विश्वविद्यालय में प्रवेश, परीक्षा तथा परिणाम का अनुपालन सुनिश्चित किया गया है। शासन द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय समन्वय स्थापित कर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय में नवाचार के लिए शैक्षिक गतिविधियों का समय-समय पर आयोजन किया जा रहा है तथा उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक व रोजगार परक पाठ्यक्रम भी विश्वविद्यालय परिसरों में संचालित किये जा रहे हैेैं।