धामी सरकार की पारदर्शी नीतियों से खनन को लेकर बदली अवधारणा

खनन गतिविधियों को लेकर सामान्य तौर लोगों में नकारात्मक अवधारणा रहती है। लेकिन उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खनन आवंटन और खनन परिवहन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ ही अवैध खनन पर सख्ती दिखाई, इसी का नतीजा है कि डेढ़ साल से कम समय में सालाना खनन राजस्व 300 करोड़ से 1200 करोड़ के पार पहुंच गया है।
प्रदेश सरकार ने सितंबर 2024 को नई खनन नीति लागू की थी। नई खनन नीति में ई निलामी के जरिए खनन लॉट आवंटन, खनन गतिविधियों की सेटेलाइट निगरानी जैसे कई नए प्रयोग किए गए। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस- प्रशासन को भी अवैध खनन पर सख्ती दिखाने के निर्देश दिए। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। सितंबर 2024 से पहले राज्य को खनन से सिर्फ 300 करोड़ रुपए तक ही सालाना राजस्व प्राप्त हो पाता था, लेकिन अब यह राजस्व 1200 करोड़ के पार चला गया है। यही नहीं उत्तराखंड को खनन सुधार लागू करने के लिए देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त हो चुका है, जिसके फलस्वरूप केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए “पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI)” के अंतर्गत उत्तराखंड के लिए ₹200 करोड़ की विशेष सहायता स्वीकृत की है।

*इन सुधारों से बदली तस्वीर*

ई निलामी के जरिए खनन लॉट आवंटन
अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई गई
खनन परिवहन के लिए माइनिंग सर्विलांस सिस्टम
खनन गतिविधियों की डिजिटल ट्रैकिंग और निरीक्षण

*आम लोगों को आवासीय या अन्य निर्माण के लिए खनन सामग्री की आवश्यकता होती है, साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भी खनन की आवश्यकता है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि खनन पर्यावरण के मानकों के अनुसार हो, साथ ही इसके लिए पारदर्शी तंत्र विकसित किया गया। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इससे राजस्व में भी शानदार वृद्धि हुई है, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन हो रहा है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

सीएम आवास से रवाना हुआ इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड, सीएम धामी ने किया फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स (इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड) का फ्लैग ऑफ किया। यह लैब ऑन व्हील्स छात्रों को ए.आई, कोडिंग, आई.ओ.टी एवं अन्य इमर्जिंग टेक क्षेत्रों में कौशल संवर्धन के लिए हैण्ड्स ऑन सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही विज्ञान विषय के विभिन्न प्रयोगों को वर्चुअल मोड से सीखने में सहायता प्रदान करेगा।

लैब ऑन व्हील्स छात्रों को लर्निंग बाई डूइंग के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा। इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड लैब ऑन व्हील्स आगामी 05 वर्ष तक पूरे राज्य संस्थाओं में जाकर छात्रों को जागरूक करते हुए उनको हैण्स ऑन प्रशिक्षण प्रदान करेगा और उनको वैश्विक संभावनाओं से जोड़ेगा।

लैब ऑन व्हील्स राज्य में छात्रों के लिए हैण्स ऑन प्रशिक्षण की अनुपलब्धता को न्यून करेगा। लैब ऑन व्हील्स में उपलब्ध हैण्ड्स ऑन एवं प्रैक्टिकल्स उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों हेतु उपयोगी है।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, प्रमोद नैनवाल,उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा के अधिकारी एवं इंफोसिस प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार ने की राज्य स्तर पर योजनाओं की सघन समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड में आवास एवं शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से लागू करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में सचिव–आवास, राज्य संपत्ति तथा आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण के आयुक्त एवं मुख्य प्रशासक डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (UHUDA) से संबंधित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सचिव आवास के कॉन्फ्रेंस कक्ष में सम्पन्न हुई।

*UHUDA की संरचना और कार्यों का प्रस्तुतीकरण*
बैठक के प्रारम्भ में कार्यक्रम प्रबंधक, UHUDA द्वारा प्राधिकरण की स्थापना, संगठनात्मक संरचना, विधिक प्रावधानों के अंतर्गत परिभाषित कार्यों, विशेष नीतियों, नियम-विनियम एवं संशोधनों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें UHUDA एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के गठन, वर्ष 1973 के अधिनियम के अंतर्गत कार्यों तथा प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे अवस्थापना विकास कार्यों की जानकारी साझा की गई।

*प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति पर फोकस*
प्रस्तुतीकरण में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 एवं 2.0 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव आवास ने योजना के तहत चल रहे निर्माण, स्वीकृति और आवंटन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंदों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।

*नई आवास नीति तैयार करने के निर्देश*
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य के लिए एक नई आवास नीति तैयार किया जाना समय की आवश्यकता है, क्योंकि वर्ष 2017 में जारी उत्तराखण्ड आवास नीति की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने निर्देश दिए कि नई नीति में शहरीकरण की वर्तमान चुनौतियों, किफायती आवास, पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और सतत विकास को विशेष रूप से शामिल किया जाए।

*MDDA और HRDA परियोजनाओं की समीक्षा*
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 की समीक्षा के दौरान सचिव आवास ने देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA) की परियोजनाओं में लॉटिंग एवं आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही HRDA द्वारा लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि योजनाओं का लाभ आमजन तक समय पर पहुँच सके।

*PMAY 1.0 के कार्य तय समय में पूरे करने के निर्देश*
बैठक में एनपीएमसी के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 से संबंधित सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा (सितम्बर 2026) के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए गए। सचिव आवास ने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर आवंटन सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करने के लिए औपचारिक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।

*कैरिंग कैपेसिटी अध्ययन पर विशेष जोर*
बैठक में कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के लिए तैयार ड्राफ्ट RFP पर भी चर्चा की गई। सचिव आवास ने इसे राज्य के प्रमुख नगरों, तीर्थस्थलों, विशेषकर चारधाम क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में इस अध्ययन को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए, जिससे विकास कार्यों को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

*आगामी बैठकों के लिए रोडमैप तय*
सचिव आवास ने निर्देश दिए कि आगामी बैठक में पीएमयू टीम का परिचय, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 एवं 2.0 की प्रगति, शासन को प्रस्तुत विभिन्न ड्राफ्ट नीतियों एवं ड्राफ्ट RFPs की विस्तृत समीक्षा की जाए। साथ ही UHUDA से संबंधित सभी नियम, विनियम, उपविधियाँ एवं नीतियों की एक-एक प्रति संदर्भ हेतु उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।

*वरिष्ठ अधिकारियों की व्यापक सहभागिता*
बैठक में संयुक्त मुख्य प्रशासक UHUDA, ग्रामीण मंत्रालय UHUDA, पीएमयू टीम, विशेष सचिव आवास एवं शहरी विकास, निदेशक/उप सचिव आवास रजनीश जैन, अपर सचिव राहुल सुन्द्रीयाल, संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक कैलाश चन्द्र पांडेय, हाउसिंग विशेषज्ञ रोहित रंजन, संस्थागत सुधार विशेषज्ञ कामना करण एंव आईटी व एमआईएस विशेषज्ञ सचिन नौटियाल शामिल थे। सभी अधिकारियों ने विभागीय कार्यों की प्रगति और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की।

*सचिव–आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि राज्य में आवास एवं शहरी विकास से जुड़ी सभी योजनाओं को पारदर्शी, समयबद्ध और जनहितैषी तरीके से लागू किया जाए। उत्तराखण्ड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण के माध्यम से आवासीय योजनाओं, अवस्थापना विकास कार्यों और नीतिगत सुधारों को नई दिशा दी जा रही है। वर्ष 2017 की आवास नीति की अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए राज्य की वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नई आवास नीति तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत चल रहे कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है और सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि आवंटन, लॉटिंग एवं निर्माण से जुड़े लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों, प्रमुख नगरों और तीर्थस्थलों में विकास कार्यों को पर्यावरणीय संतुलन के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि राज्य में सतत और संतुलित विकास को मजबूती मिल सके।”

पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम को आमजन और जन-जन का कार्यक्रम बनाया: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून लाइब्रेरी, निकट परेड ग्राउंड, देहरादून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के 130वें एपिसोड को सुना।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मन की बात कार्यक्रम का हर एपिसोड प्रेरणादायी होता है। समाज में सामान्य परिस्थितियों में अनवरत सेवा करने वाले लोगों को इस कार्यक्रम के माध्यम से देश दुनिया जानती है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम को आमजन और जन-जन का कार्यक्रम बनाया है। इसके माध्यम से अन्य लोग भी प्रेरित होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के अंदर कई नवाचार हो रहे हैं। आज इनोवेशन, साइंस, टेक्नोलॉजी एवं ए.आई हर दृष्टि से भारत आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने ए.आई के बढ़ते प्रभाव पर बोलते हुए कहा कि आने वाले समय में सभी कामों में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। जो काम कई दिनों में होता है वह महज कुछ ही घंटे में हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य के अंदर एआई के उपयोग हेतु साइंस आईटी टेक्नोलॉजी से संबंधित विभाग कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री की प्रेरणा से राज्य सरकार ने अनेक ऐसे निर्णय लिए हैं जो राज्य में पहली पहली बार हुए हैं। उन्होंने कहा आज पूरे देश के अंदर हमारे राज्य तस्वीर ऐसे स्थापित हो गई है कि जहां पर अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। 27 जनवरी को यूसीसी लागू करने के पूरे एक साल हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की जनता के सामने समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था, जिसे हमने पूरा किया है। उन्होंने कहा हमारा राज्य एक सीमावर्ती क्षेत्र है। यहाँ चार धाम, गंगा, यमुना का उद्गम स्थान है। सुरक्षा की दृष्टि से भी हमारा राज्य बेहद संवेदनशील है ऐसे में राज्य में रहने वाले सभी लोगों के लिए एक समान कानून लागू होना चाहिए था और हमने ऐसा करके दिखाया है।

मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं एवं राज्य स्तर पर लिए निर्णयों को जन-जन तक पहुंचने में सभी आगे आए। जिससे कि अधिक से अधिक लोग योजनाओं से लाभान्वित हो सके।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, विधायक सुरेश गढ़िया, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, अनिल गोयल, संजय नेगी, दायित्वधारी रजनी रावत एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने ली प्राधिकरण की समीक्षा बैठक, विकास कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में आवास एवं नगर विकास से जुड़ी योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने पदभार ग्रहण करने के बाद *“मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए)”* की पहली समीक्षा बैठक ली। सचिवालय स्थित अपने कक्ष में आयोजित इस बैठक में उन्होंने प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं, निर्माणाधीन परियोजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की और अधिकारियों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

*चल रही परियोजनाओं की गहन समीक्षा*
समीक्षा बैठक में मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की सभी गतिमान परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें पार्किंग निर्माण, पार्कों का विकास, आवासीय योजनाएं, बाजार पुनर्विकास और अन्य शहरी विकास से जुड़े कार्य शामिल रहे। आवास सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए और निर्माण गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गति के साथ-साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

*मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया होगी और अधिक सरल व त्वरित*
समीक्षा बैठक में मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों और निवेशकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि तेज और सुगम प्रक्रिया से शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा और अवैध निर्माण की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।

*स्थलीय निरीक्षण कर खुद करेंगे परियोजनाओं की निगरानी*
आवास सचिव ने यह भी कहा कि वे स्वयं सभी महत्वपूर्ण और निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि मौके पर जाकर कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने से समस्याओं की पहचान आसान होती है और समय रहते उनका समाधान किया जा सकता है। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों सुनिश्चित की जा सकेगी।

*ऋषिकेश, देहरादून, आढ़त बाजार व इंदिरा मार्केट परियोजनाएं प्राथमिकता में*
समीक्षा बैठक में मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ऋषिकेश, देहरादून तहसील क्षेत्र, आढ़त बाजार और इंदिरा मार्केट से जुड़ी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई। आवास सचिव ने इन सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाजारों और सार्वजनिक स्थलों का सुव्यवस्थित विकास न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय व्यापार को भी मजबूती देता है।

*पार्कों में गंदगी फैलाने वालों पर लगेगी पेनल्टी*
आवास सचिव ने मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा विकसित और संचालित पार्कों के रखरखाव पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि पार्कों में गंदगी फैलाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर पेनल्टी की प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें नागरिकों की सहभागिता भी जरूरी है।

*मास्टर प्लान और लैंड पूलिंग नीति पर बनेगी विशेष कार्ययोजना*
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि आवास विभाग सभी विकास प्राधिकरणों के साथ समन्वय बनाकर काम करेगा। प्राधिकरण स्तर पर शासन में लंबित महत्वपूर्ण योजनाओं को प्राथमिकता पर निस्तारित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी विकास प्राधिकरणों के साथ माहवार समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रदेश के कई शहरों के मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित हैं, जिन्हें समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही लैंड पूलिंग नीति के तहत लैंड बैंक बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि सरकारी आवासीय योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

*अधिकारियों ने दी परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी*
बैठक से पूर्व प्राधिकरण सचिव मोहन सिंह बर्निया ने आवास सचिव का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में वित्त नियंत्रक संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, सहायक अभियंता अजय मलिक, सहायक अभियंता सुनील गुप्ता, लेखपाल नजीर अहमद तथा वास्तुविद दृष्टि जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

*आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत आवास एवं नगर विकास विभाग प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेगा। हमारी प्राथमिकता है कि सभी विकास योजनाएं समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी हों। मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को सरल किया जाएगा और लंबित मास्टर प्लान व लैंड पूलिंग नीति पर विशेष कार्ययोजना बनाकर तेजी से अमल किया जाएगा।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बधाई देने नई दिल्ली पहुंचे सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भेंट कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

सिंचाई को मिला 15 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र को बढ़ाकर 30 प्रतिशत किए जाने का टारगेट

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पूंजीगत व्यय, सीएसएस योजनाएं, ईएपी योजनाएं, नाबार्ड योजनाएं, एसएएससीआई, एसएनए स्पर्श एवं विभागों की व्यय योजनाओं के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने पूंजीगत व्यय, सीएसएस, ईएपी एवं नाबार्ड पोषित योजनाओं के प्रस्तावों को समय पर भेजे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रीइंबर्शमेंट दावा भी समय पर किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य कर रहे विभागों को और फंड्स उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

मुख्य सचिव ने सभी परियोजनाओं को समय से पूर्ण किए जाने हेतु टाईमलाईन निर्धारित करते हुए मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने वित्त एवं नियोजन विभाग को कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु इंडिपेंडेंट थर्ड पार्टी इवैल्यूएशन के लिए मजबूत मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय करते हुए, जिम्मेदार के ऊपर एक्शन लिए जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स में थर्ड पार्टी मूल्यांकन का प्राविधान नहीं है, उनमें तत्काल प्रावधान किया जाए। साथ ही, नियोजन विभाग द्वारा एम्पैनल्ड एजेंसियों को भी विभाग थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल के लिए तत्काल शुरू कर सकते हैं।

मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को प्रदेश की कुल 15 प्रतिशत सिंचित भूमि को अगले 5 साल में दोगुना करते हुए 30 प्रतिशत किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने सिंचाई विभाग को अच्छे और गुणवत्तापूर्ण प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए बैराज, नहरें आदि पर काम किया जा सकता है। उन्होंने सिंचाई के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाए गए स्प्रिंकलर सिस्टम को प्रदेशभर में शुरू किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि जहां जहां सिंचाई तंत्र ध्वस्त हो गया है या बंद पड़ा है, उसे दुरूस्त कर शुरू किया जाए। उन्होंने लघु सिंचाई को भी अच्छे एवं गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने पेयजल विभाग को उनके द्वारा संचालित योजनाओं में जीरो कार्बन उर्त्सजन पर फोकस किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने जल संस्थान और जल निगम को अपनी पेयजल योजनाओं को भी जीरो कार्बन उत्सर्जन की ओर ले जाने की दिशा में कार्य करते हुए सोलर को बैटरी से जोड़े जाने पर जोर दिया। उन्होंने क्लाईमेट चेंज फंड को भी इसके लिए प्रयोग किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को किस प्रकार से अपने प्रोजेक्ट्स में ऊर्जा स्रोत के रूप में प्रयोग करें इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने पेयजल विभाग को उनके सभी एसटीपी प्लांट्स की 24×7 रियल टाईम मॉनिटरिंग का मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए।

*जल संस्थान को देहरादून के सभी सरकारी आवास में 31 मार्च तक वाटर मीटर लगाने का टारगेट*

मुख्य सचिव ने जल संस्थान को 31 मार्च तक देहरादून की सभी सरकारी कॉलोनियों को वाटर मीटर से 100 प्रतिशत संतृप्त किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने प्रदेश में सभी नगर निगमों को वाटर मीटर से संतृप्त किए जाने की बात भी कही। कहा कि इससे पानी की बर्बादी पर रोक लगेगी। उन्होंने जल संस्थान को पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अपने सिस्टम को मजबूत किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि दूषित पानी की शिकायत पर सम्बन्धित अधिकारी पर कार्रवाही किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सौंग बांध परियोजना के अन्तर्गत पेयजल घटक के अन्तर्गत डीपीआर एक सप्ताह में शासन को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने एसटीपी से निकले ट्रीटेड वाटर को नॉन-ड्रिंकिंग उद्देश्यों के लिए प्रयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जल संस्थान अपने एसटीपी का ट्रीटेड वाटर सिंचाई विभाग के साथ समन्वय बनाकर सिंचाई एवं अन्य नॉन ड्रिंकिंग कार्यों हेतु उपयोग करने हेतु भी प्रस्ताव तैयार करे।

*टिहरी को इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बनाने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए*

मुख्य सचिव ने शहरी विकास विभाग को देहरादून सहित प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में बड़े पार्क तैयार करे। उन्होंने कहा कि टिहरी को इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के रूप मे विकसित करने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने टिहरी झील रिंग रोड परियोजना को भी शीघ्र शुरू किए जाने की बात कही। साथ ही, पर्यटन विभाग टिहरी, ऋषिकेश एवं चम्पावत में पर्यटन क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव तैयार करे।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को सिटी ग्रीनिंग और एक्सप्रेस-वे के प्रस्ताव एवं के साथ ही बायोफेंसिंग का मॉडल प्रोजेक्ट तैयार किए जाने की बात कही। कहा कि उन्होंने आईटी विभाग को साइंस सिटी एंड विज्ञान केंद्रों की स्थापना के साथ ही इनके संचालन और मेंटरिंग की व्यवस्था हेतु मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. आर. राजेश कुमार, युगल किशोर पंत, रणवीर सिंह चौहान, अपर सचित हिमांशु खुराना, अपूर्वा पाण्डेय एवं मनमोहन मैनाली सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी के नेतृत्व में 3.22 लाख से अधिक नागरिकों को मिला सीधा लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के सभी 13 जनपदों में लगातार जनसेवा शिविरों का आयोजन कर आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर सुनिश्चित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के तहत आज 19 जनवरी 2026 तक प्रदेशभर में कुल 395 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 3 लाख 22 हजार 585 से अधिक नागरिकों ने प्रतिभाग किया। इन शिविरों के माध्यम से कुल 32 हजार 746 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 हजार 173 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है। यह आंकड़े राज्य सरकार की संवेदनशीलता, प्रशासनिक तत्परता और जनसमस्याओं के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

शिविरों के दौरान विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों तथा अन्य शासकीय सेवाओं के लिए कुल 43 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1 लाख 75 हजार 258 नागरिकों को सीधे लाभान्वित किया गया। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस सोच को साकार करती है, जिसमें शासन को जनता के निकट लाकर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

जनपदवार आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जनपदों में बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी दर्ज की गई। अकेले देहरादून जनपद में 41,889 नागरिकों ने शिविरों में सहभागिता की, जबकि हरिद्वार में 64,686 लोगों ने इस पहल का लाभ उठाया। उधम सिंह नगर में 24,421 तथा अल्मोड़ा में 24,771 नागरिकों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के साथ सरकार के विश्वास का सेतु है। इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचती है, तो न केवल समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि शासन के प्रति जनविश्वास भी सुदृढ़ होता है।

राज्य सरकार का यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन की एक नई कार्यसंस्कृति को स्थापित कर रहा है, जिसमें संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आगे भी निरंतर जारी रहेगा और उत्तराखंड को जनकल्याण के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री धामी का शेफ समुदाय से आवाहन, उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम्रपाली विश्वविद्यालय परिसर से आयोजित श्रीअन्न आधारित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े युवा शेफ, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों, श्रीअन्न आधारित खानपान और इससे जुड़े रोजगार व पर्यटन अवसरों पर सार्थक संवाद स्थापित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से युवा शेफों ने उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन के प्रचार–प्रसार, गुणवत्ता मानकों, सरकारी प्रयासों और इस क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को लेकर अनेक प्रश्न किए। शेफ शक्ति प्रसाद के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सभी होटलों के मेन्यू में उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री आवास तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में मेहमानों को उत्तराखंड का पारंपरिक भोजन प्राथमिकता से परोसा जाता है, जिससे स्थानीय व्यंजनों को सम्मान और पहचान मिल सके।

शेफ संजीव जुयाल द्वारा उत्तराखंड के सभी शेफों को एक साझा मंच पर लाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिशा में पर्यटन विभाग को एक समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि राज्य के शेफ समुदाय को एक अंब्रेला प्लेटफॉर्म के तहत जोड़ा जा सके और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकें।

वहीं, शेफ सुनील उपाध्याय द्वारा पारंपरिक उत्तराखंडी भोजन की शुद्धता, प्रमाणिकता और मानक तय करने को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से कार्य कर रही है। पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता बनाए रखने, उनकी पहचान संरक्षित करने और मानकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि उत्तराखंड के स्वाद की मौलिकता बनी रहे।

उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विभाग और कौशल विकास विभाग मिलकर इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वरोजगार एवं उद्यमिता की ओर अग्रसर हों।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह संवाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी शेफ साथियों, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए आम्रपाली विश्वविद्यालय और उसकी पूरी टीम को इस विचारशील और सार्थक “शेफ संवाद” कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड संस्कारों, संस्कृति और विविध व्यंजनों की भूमि है। यहां के व्यंजन पहाड़ों की जीवनशैली, परंपराओं और आत्मा की कहानी कहते हैं। आज का पर्यटक केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और खानपान का अनुभव भी करना चाहता है। ऐसे में शेफों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे स्थानीय स्वाद के माध्यम से राज्य की पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाते हैं।

मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी कहा कि आज का शेफ केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संस्कृति का संवाहक, पर्यटन का ब्रांड एम्बेसडर और रोजगार सृजन का माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में स्थानीय व्यंजनों, आतिथ्य परंपरा और शेफ समुदाय का योगदान अतुलनीय है।

श्रीअन्न पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल भोजन या फसल नहीं, बल्कि उत्तराखंड के समग्र विकास का सशक्त माध्यम बन रहा है। श्रीअन्न के माध्यम से गांव, किसान और समाज का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। मंडुवा, झंगोरा, कोदा और रामदाना जैसी फसलें कम पानी में उगने वाली, पोषक तत्वों से भरपूर और किसानों की आय बढ़ाने वाली हैं, जो उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज श्रीअन्न के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है। भारत वैश्विक स्तर पर मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक है और कुल वैश्विक उत्पादन में लगभग 38.4 प्रतिशत योगदान देता है। बदलती वैश्विक खाद्य प्राथमिकताओं के बीच फूड प्रोसेसिंग, हेल्थ फूड, होटल, कैफे, होम-स्टे और फूड स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।

राज्य सरकार की सोच को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में लगभग 44 प्रतिशत युवा देश के विभिन्न हिस्सों से उत्तराखंड वापस लौटे हैं, जो राज्य में बढ़ते अवसरों का प्रमाण है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने शेफ समुदाय से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि सभी मिलकर उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को “लोकल से ग्लोबल” बनाने की दिशा में कार्य करें। उनकी रचनात्मकता और प्रस्तुति उत्तराखंड के स्वाद को दुनिया की थाली तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “शेफ संवाद” से निकले विचार उत्तराखंड को पर्यटन, रोजगार और संस्कृति के क्षेत्र में एक नए विजन के साथ आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे और उत्तराखंड को सशक्त, आत्मनिर्भर व गौरवशाली राज्य बनाने का संकल्प अवश्य पूरा होगा।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, आम्रपाली विश्वविद्यालय से संजय मिश्रा सहित देश भर से आए अनेक प्रतिष्ठित शेफ उपस्थित रहे।

सेब की अति सघन बागवानी योजना का उद्देश्य सेब उत्पादन को बढ़ावा और किसानों की आय में वृद्धि करना: धामी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सेब की अति सघन बागवानी योजना सम्बन्ध में शासन में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट का उत्पादन बढ़ाए जाने के सम्बन्ध में अधिकारियों से चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता एवं अन्य राज्यों की उत्पादन क्षमता के सापेक्ष उत्तराखण्ड की उत्पादन क्षमता पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि “सेब की अति सघन बागवानी योजना” के अंतर्गत सेब की नवीनतम प्रजातियों के बागान स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए मुख्य सचिव ने जनपदों में किसानों को क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनाए जाने हेतु प्रेरित किया जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में सेब उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। प्रदेश में अभी सेब उत्पादन क्षेत्र बढ़ाए जाने की अत्यधिक सम्भावना है, जो प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट उत्पादन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा।

मुख्य सचिव ने सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश की उत्पादन क्षमता विशेषकर सेब की उत्पादन क्षमता का आंकलन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपदों को सेब उत्पादन में क्षमता के अनुरूप 2030, 2040 एवं 2050 में कितना उत्पादन होगा, इसके लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजना को धरातल पर उतारा जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि झाला (हर्षिल, उत्तरकाशी) स्थिति कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कोल्ड स्टोरेज तैयार किए जाएं। इससे किसान अपना सेब और अन्य उत्पाद ऑफ सीजन में मार्केट में उतार कर अधिक लाभ ले सकेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के अधिकतम क्षेत्रों में अभी भी पुरानी कम उत्पादन क्षमता वाली किस्म की फसलों का उत्पादन हो रहा है। उन्हें हाई डेंसिटी ऐपल प्लांट्स से रिप्लेस करने की आवश्यकता है। इसके लिए बड़े स्तर पर किसानों से संवाद करते हुए इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने इसकी भावी मांग के अनुरूप नर्सरियों को अपग्रेड किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि बड़े पैमाने पर हाई डेंसिटी प्लांट्स तैयार किए जाने के लिए नर्सरियां विकसित की जाएं। फुल टाईम टैक्निकल सपोर्ट के लिए पीएमयू गठित किया जाना चाहिए, ताकि वृहद स्तर पर इस योजना को संचालित किया जा सके। इससे धरातल पर योजनाओं को सफल बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम एवं डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।