बद्रीनाथ में सीएम ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कार्यों की प्रगति का लिया विस्तृत जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज चमोली स्थित बीआरओ गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की। इस अवसर पर आयोजित बैठक में पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से धाम में चल रहे निर्माण कार्यों, उनकी वर्तमान प्रगति, तकनीकी पहलुओं तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई।

बैठक के दौरान अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी (पीआईयू) योगेश मनराल ने विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति, अब तक की उपलब्धियों तथा निर्धारित समयसीमा के सापेक्ष प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान के अंतर्गत अनेक महत्वपूर्ण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं, जिनमें आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण, यात्री सुविधाओं का विस्तार, आवागमन व्यवस्था में सुधार तथा आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है। मुख्यमंत्री ने प्रस्तुतीकरण को देखते हुए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के अनुरूप संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य बद्रीनाथ धाम को एक भव्य, दिव्य, सुरक्षित और अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थस्थल के रूप में विकसित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और उन्हें एक सुव्यवस्थित एवं सुखद अनुभव प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं तथा प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और निर्माण कार्यों में उच्च मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखते हुए तकनीकी दक्षता का पूर्ण उपयोग किया जाए, ताकि कार्यों में तेजी और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित हो सकें।

उन्होंने आगे निर्देश दिए कि बद्रीनाथ धाम में विकसित की जा रही सभी सुविधाओं में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सुगमता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। यात्री आवागमन, आवास, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए और उसका समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धाम के विकास कार्यों के दौरान पारंपरिक स्वरूप, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि विकास और विरासत के बीच संतुलन बना रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मास्टर प्लान के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी प्रकार की बाधा या विलंब की स्थिति में त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हो सकें और बद्रीनाथ धाम का समग्र विकास तेजी से आगे बढ़ सके।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों, अधिकारियों की प्रतिबद्धता और केंद्र सरकार के सहयोग से बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत सभी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होंगे और यह धाम भविष्य में एक आदर्श, भव्य और विश्वस्तरीय तीर्थस्थल के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।

शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडलः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचकर क्षेत्र का भ्रमण किया तथा वहां आए श्रद्धालुओं एवं स्थानीय जनता से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुखद एवं प्लास्टिक मुक्त हरित यात्रा बनाने की अपील करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर एवं स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए ग्रामीण महिलाओं का आभार व्यक्त किया और उनकी परंपराओं एवं संस्कृति की सराहना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव की शत-प्रतिशत “लखपति दीदियों” से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए कहा कि ये उत्पाद न केवल स्थानीय आजीविका को सशक्त कर रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीद कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है और जो गांव पहले “अंतिम गांव” कहे जाते थे, उन्हें अब “प्रथम गांव” की संज्ञा देकर उनके समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड के सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार, पर्यटन और आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। माणा गांव सहित अन्य सीमांत क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्य प्रदेश के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से सीमांत गांव विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

ग्राम पंचायत माणा, विकासखण्ड ज्योतिर्मठ, जनपद चमोली, आज स्वयं सहायता समूहों और “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यहां कुल 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ग्राम में एक ग्राम संगठन “घुंघटी महिला ग्राम संगठन” तथा एक क्लस्टर स्तरीय संगठन “योगबंदी क्लस्टर स्तरीय संगठन” कार्यरत है और विशेष बात यह है कि यहां सभी 82 महिलाएं “लखपति दीदी” के रूप में स्थापित हो चुकी हैं, जिससे माणा उत्तराखंड का प्रथम शत-प्रतिशत लखपति दीदी गांव बन गया है।

ग्राम की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पारंपरिक एवं गैर-कृषि कार्यों को बढ़ावा देते हुए आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, फर्नीचर, टोकरी निर्माण, दाल, कालीन, पापड़, मसाले तथा भोजनालय संचालन जैसे विविध कार्यों में संलग्न हैं और इन उत्पादों का विपणन कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। इसके अतिरिक्त कृषि, पशुपालन, डेयरी, होमस्टे, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से भी महिलाएं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं। स्थानीय उत्पादों को सरस मॉल एवं विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में सहायता मिल रही है और वे “लखपति दीदी” योजना से लाभान्वित हो रही हैं।

माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्र के समग्र विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जहां सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय महिलाओं के परिश्रम ने विकास की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।

संवाद ही विश्वास की नींव, राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर देहरादून में विचार गोष्ठी हुई आयोजित

राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर पब्लिक रिलेशंस सोसायटी ऑफ इंडिया देहरादून चौप्टर द्वारा राजपुर रोड स्थित हुडको सभागार में “लोकतंत्र में जनसंपर्क का महत्व” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में चौप्टर के अध्यक्ष एवं उपनिदेशक रवि बिजारनिया ने कहा कि लोकतंत्र में जनसंपर्क सरकार और जनता के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। प्रभावी जनसंपर्क के माध्यम से संवाद स्थापित होता है और इसी संवाद से विश्वास का निर्माण होता है, जो समाज में आशाओं को साकार करता है।

हुडको के क्षेत्रीय प्रमुख संजय भार्गव ने कहा कि जनसंपर्क केवल शासन-प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के स्तर पर भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने वर्तमान समय में संचार के बढ़ते माध्यमों के बीच जिम्मेदार संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

चौप्टर के सचिव अनिल सती ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में सदस्य मनीता हरि ने फेक न्यूज़ और डीप फेक जैसी चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।

वक्ताओं ने जनसंपर्क के सकारात्मक, प्रामाणिक और प्रभावी स्वरूप पर बल देते हुए इसे संस्थागत के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी राष्ट्र और समाज सेवा का सशक्त माध्यम बताया।

गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार संजीव कंडवाल ने किया।

इस अवसर पर राकेश डोभाल, प्रियांक वशिष्ठ, सुशील कुमार, मनोज सती, रितिक, वैभव गोयल, विमल डबराल, दिनेश कुमार, दीपक शर्मा, संजय पांडेय, पुष्कर नेगी सहित अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

सीएस बर्द्धन ने अखरोट विकास कार्यक्रम के तहत् लगाए गयी अखरोट की पौध की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन समिति की उच्चाधिकार समिति की बैठक संपन्न हुयी। बैठक के दौरान उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन समिति के विभिन्न कार्यकलापों की जानकारी समिति के समक्ष रखी गयी एवं विभिन्न प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गयी।

मुख्य सचिव ने अखरोट विकास कार्यक्रम के तहत् लगाए गयी अखरोट की पौध की अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी। उन्होंने सम्बन्धित प्रभाग के डीएफओ से इसका मूल्यांकन कर अवगत कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने योजना के अंतर्गत किसानों द्वारा इससे होने वाले फलोत्पादन की भी अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के मूल्यांकन से आगे की कार्ययोजना बनायी जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने योजना के अंतर्गत जापान के तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन से मृदा अपरदन नियंत्रण और अवसाद आपदा शमन (Erosion Control & Sediment Disaster Mitigation) के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों को आपदा प्रबन्धन विभाग के साथ जापानी तकनीक के महत्त्वपूर्ण पहलुओं को साझा किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखण्ड में लैंड स्लाईड मिटिगेशन में सहायता मिल सकती है।

मुख्य सचिव ने योजना के अंतर्गत आजीविका से जुड़े विभिन्न स्वयं सहायता समूहों, क्लस्टर्स और राज्य स्तरीय फेडरेशन की क्षमता विकास, बाजार की उपलब्धता के साथ ही हैंड होल्डिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिरूल की तर्ज पर लैंटाना पर भी कार्य किए जाने की जरूरत है।

इस अवसर पर पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम एवं धीराज गर्ब्याल, सी. रविशंकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस बर्द्धन ने देहरादून शहर के यातायात संतुलन को लेकर देहरादून मोबिलिटी प्लान की बैठक ली

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में देहरादून शहर के यातायात संतुलन को लेकर देहरादून मोबिलिटी प्लान की बैठक ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर के बन जाने से सप्ताहांत एवं चारधाम यात्रा के कारण अत्यधिक यातायात दबाव रहेगा. इसके लिए उन्होंने लगातार देहरादून के यातायात को अपग्रेड किए जाने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने इकोनॉमिक कॉरिडोर के बाद बढ़ने वाले यातायात के प्रबंधन के लिए शीघ्र यातायात प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आढ़त बाज़ार की रजिस्ट्री एवं मुआवजा का कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जाए। उन्होंने आढ़त बाज़ार के अंतर्गत हो भी ध्वस्तीकरण कार्य किया जाना है, उसे भी शीघ्र शुरू किया जाए। उन्होंने 15 मई, 2026 तक रजिस्ट्री कार्य पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने निरंजनपुर मंडी को भी शीघ्र शुरू कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए उपयुक्त भूमि चिह्नित करने हेतु तत्काल एक साईट सिलेक्शन कमेटी बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सचिवालय एवं परेड ग्राउंड के पास अंडरग्राउंड पार्किंग के लिए फीजीबिलिटी एवं डीपीआर को शीघ्र तैयार कराए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने देहरादून के विभिन्न जंक्शनों के सुधारीकरण कार्य की प्रगति की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि कारगी चौक सुधारीकरण कार्य को तत्काल कराया जाए। बताया गया कि 4 जंक्शनों में कार्य प्रारम्भ हो गया है, 6 का प्रस्ताव गतिमान है। उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने बताया किआढ़त बाज़ार की 52 रजिस्ट्री कम्पलीट हो चुकी है, बाकी का कार्य गतिमान है।

मुख्य सचिव ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने परिवहन विभाग को देहरादून के लिए बसों और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लगातार फॉलोअप करते हुए सितंबर तक देहरादून के रूट्स पर 100 बसें संचालित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि नो पार्किंग में पार्किंग करने वाले लोगों पर चालान, लेफ्ट टर्न फ्री रखना जैसे छोटे छोटे परंतु महत्त्वपूर्ण कार्यों को लगातार प्रवर्तन कराया जाए। उन्होंने बड़े दिवसों पर शोभायात्रा एवं धरने प्रदर्शन आदि के दौरान ट्रैफिक प्लान का प्रचार प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि टोइंग वैन्स की संख्या को बढ़ाया जाए। इसके लिए शीघ्र प्रस्ताव भेजा जाए।

मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को रात को ओवरस्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोके जाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जाने के निर्देश दिए। स्पीडब्रेकर, साईनेज आदि के साथ ही एएनपीआर कैमरों के द्वारा लगातार मॉनिटरिंग करायी जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि देहरादून के भीतर चिह्नित पार्किंग स्थलों, सरकारी एवं व्यावसायिक संस्थानों की पार्किंग कैपेसिटी को पूर्ण रूप से उपयोग किया जाए। उन्होंने यूपीसीएल द्वारा विद्युत के अंडरग्राउंड कार्य एवं गैस पाइप लाइन कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराया जाने सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर सचिव बृजेश कुमार संत, डॉ. आर राजेश कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, एसएसपी देहरादून परमेन्द्र डोभाल सहित अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में विधानसभा क्षेत्र डीडीहाट, गंगोलीहाट, कपकोट एवं बागेश्वर से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन घोषणाओं पर अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उनके संबंध में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि लंबित घोषणाओं पर अधिकतम 20 दिनों के भीतर शासनादेश जारी कर दिए जाएं, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का संबंधित क्षेत्र के विधायकगणों के साथ समन्वय स्थापित कर उनका प्रभावी समाधान निकाला जाए, ताकि विकास कार्यों की गति बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वन भूमि स्थानांतरण से जुड़े मामलों की जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि वन भूमि से संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाकर विकास कार्यों में बाधा को दूर किया जाए। साथ ही, इस विषय में विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत निर्मित सड़कों के रख-रखाव के लिए संबंधित विभागों की एक समन्वय समिति गठित की जाए। उन्होंने कहा कि इस समिति द्वारा सड़कों के मेंटिनेंस कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम और सुरक्षित बना रहे।

बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सड़कों के पैच वर्क का कार्य वर्षाकाल से पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर खेल मैदानों के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है, वहां 15 दिनों के भीतर आवश्यक धनराशि जारी की जाए, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ हो सके और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कनालीछीना से पिपली बगड़ीगांव तक मोटर मार्ग के चौडीकरण की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कपकोट के राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय कपकोट के साथ पूर्व माध्यमिक स्कूल संचालित करने की कार्यवाही के साथ मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बागेश्वर जिला अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनहित से जुड़े कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और समयबद्ध तरीके से सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में विधायक डीडीहाट बिशन सिंह चुफाल, विधायक कपकोट सुरेश गड़िया, विधायक बागेश्वर पार्वती दास, वर्चुअल माध्यम से विधायक गंगोलीहाट फकीर राम, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, एस.एन.पाण्डेय, संबंधित विभागीय सचिव, वर्चुअल माध्यम से कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष भटगांई, जिलाधिकारी बागेश्वर आकांक्षा कोण्डे मौजूद थे।

पलायन रोकने के लिए श्रमिकों को स्थानीय आवश्यकता के अनुसार दिया जाए कौशल प्रशिक्षण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकापर्ण करने के साथ ही 8005 श्रमिकों के खाते में 17 करोड़ से अधिक राशि का डीबीटी के माध्यम से हस्तातंरण किया।

मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड को अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि, अनुदान वितरण में पारदर्शिता बरते जाने के क्रम में ऑफलाईन अनुदान वितरण बन्द कर ऑनलाईन निस्तारण एवं डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि का हस्तांतरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए अब तक 11828 लाभार्थियों को कुल 29.89 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है। आज 8005 लाभार्थियों को कुल 17.25 करोड़ की धनराशि वितरित की जा रही है। इस प्रकार विगत 06 माह में अब तक कुल 19833 लाभार्थियों को 47.14 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय श्रमिकों को पलम्बर, इलैक्ट्रिशियन, मिस्त्री, कारपेन्टर आदि क्षेत्रों में कौशल प्रदान किया जाए। इसी तरह योगा एंव वेलनेस में रोजगार की सम्भावना को देखते हुए आगामी सत्र में श्रमिकों के बच्चों को योग एवं वेलनेस में निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड निर्माण श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को कौशल प्रशिक्षण उपरान्त विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास करे। इसके लिए विदेश मंत्रालय भारत सरकार में पंजीकृत एजेन्सी के माध्यम कार्यवाही की जाए। साथ ही श्रमिकों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने और उनका समय- समय पर स्वास्थ्य परीक्षण पर भी ध्यान दिया जाए। इस हेतू श्रमिकों के कार्य स्थल पर ही चिकित्सा परीक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि उनके रोजगार में व्यवधान उपलब्ध न हो।

इस मौके पर श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बताया कि UKLCCMS Portal पोर्टल के माध्यम से अब तक 16000 अधिष्ठानों का पंजीकरण हो चुका है, जिसके जरिए शुल्क के रूप में 80,00000.00 (रूपये अस्सी लाख मात्र) धनराशि जमा हो चुकी है, साथ ही बोर्ड के पास अब तक कुल 324 करोड़ की धनराशि सेस के रूप में जमा हो चुकी है। जिसे श्रमिकों के कल्याण में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण श्रमिकों के बीच सामग्री वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है। जिससे लाभार्थियों का लाईव फोटो एवं जियो ट्रेकिंग द्वारा सामग्री वितरण सुनिश्चित किया जायेगा। इस मौके पर उपायुक्त विपिन कुमार सहित बोर्ड के अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।

सीएम धामी ने किया निकाय कर्मचारी संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित आभार रैली में प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड निकाय कर्मचारी संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित आभार रैली में प्रतिभाग किया। उन्होंने कर्मचारियों द्वारा व्यक्त किए गए सम्मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश की देवतुल्य जनता को समर्पित बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास में कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और नगर निकाय कर्मचारियों की जिम्मेदारी विशेष रूप से अहम है। उन्होंने कहा कि निकाय कर्मियों के अथक प्रयासों से ही शहरों और कस्बों में स्वच्छता एवं बुनियादी सुविधाएं सुचारु रूप से संचालित होती हैं। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान कर्मचारियों द्वारा निभाई गई जिम्मेदारी और सेवा भाव को सराहते हुए इसे मानवता की उत्कृष्ट मिसाल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आस्था, संस्कृति और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है, यहां नगर निकायों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, विशेषकर चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और कुंभ जैसे आयोजनों के दौरान। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के सशक्तिकरण, सुरक्षा एवं संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है और चरणबद्ध तरीके से सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नगर निकाय कर्मचारियों एवं पर्यावरण मित्रों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिनमें पर्यावरण मित्रों का मानदेय बढ़ाकर ₹500 प्रतिदिन करना, चारधाम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय प्रदान करना, वर्दी एवं स्नोबूट हेतु ₹2500 की सहायता, स्वास्थ्य एवं कल्याण योजनाओं के लिए वित्तीय प्रावधान, ₹5 लाख का ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस लागू करना, ईपीएफ एवं ईएसआई लाभ सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी करना, संविदा कर्मचारियों का वेतन ₹7,500 से बढ़ाकर ₹15,000 करने के साथ ही कई और निर्णय लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘अमृत योजना’, ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ एवं ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ जैसी योजनाओं के माध्यम से देश में व्यापक विकास कार्य किए जा रहे हैं। राज्य सरकार इन योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर प्रदेश के समग्र विकास को गति दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को ‘स्वच्छता मित्र’ के रूप में सम्मानित करते हुए उनके सुरक्षा और कल्याण हेतु ‘नमस्ते योजना’ तथा ‘आयुष्मान भारत योजना’ जैसी पहलें संचालित की जा रही हैं।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, उत्तराखंड निकाय कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक सुरेन्द्र तेश्वर, सह संयोजक संतोष गौरव, नरेश वेद एवं अन्य पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड में सरकारी आवासीय ढांचे को मिलेगा नया स्वरूप

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व मुख्यसचिव आनंद बर्धन के दिशा-निर्देश पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार प्रदेश भर में सरकारी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की व्यापक योजना पर काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य न केवल कर्मचारियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराना है, बल्कि सरकारी आवासीय परिसंपत्तियों का व्यवस्थित रखरखाव और विस्तार सुनिश्चित करना भी है। राज्य संपत्ति विभाग के अनुसार लंबे समय से कई सरकारी आवास जर्जर हो चुके हैं, जिससे कर्मचारियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सरकार अब ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें मरम्मत और पुनर्निर्माण के माध्यम से बेहतर बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।

*जर्जर आवासों की पहचान, नए निर्माण की तैयारी*
सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में मौजूद जर्जर सरकारी आवासों का सर्वे शुरू करने का निर्णय लिया है। जिन भवनों की स्थिति बेहद खराब है, उन्हें या तो पुनर्निर्मित किया जाएगा या फिर उनकी जगह नए आधुनिक आवास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही जहां भी विभागीय या सरकारी भूमि उपलब्ध है, वहां आवश्यकता के अनुसार नए आवासीय परिसरों के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। इन आवासों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि कर्मचारियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा मिल सके। सरकार का मानना है कि बेहतर आवास मिलने से कर्मचारियों का कार्य परिवेश भी बेहतर होगा और वे अधिक दक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

*कार्यों की निगरानी के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति*
इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए राज्य संपत्ति विभाग के स्तर पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि, जर्जर भवनों और नए निर्माण की संभावनाओं का त्वरित सर्वेक्षण किया जाए। सर्वेक्षण के आधार पर विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा, ताकि निर्माण और मरम्मत से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर स्वीकृति मिल सके। इसके अलावा कार्यदायी संस्थाओं को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों और तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी की संभावना कम हो सके।

*रेसकोर्स में बनेंगे नए आवास*
राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन देहरादून के ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी, रेसकोर्स क्षेत्र में भी नए आवासों के निर्माण की योजना बनाई गई है। यहां जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद खाली हुई भूमि पर श्रेणी-2 के 31 नए आवास बनाने का प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा गया। इसके अलावा 6 मार्च 2026 को इसी कॉलोनी में उपलब्ध अन्य भूमि पर श्रेणी-4 के 10 आवासों के निर्माण की योजना भी प्रस्तुत की गई। दोनों परियोजनाओं के लिए सिंचाई विभाग के परियोजना खंड द्वारा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इन आवासों के निर्माण के लिए श्रेणी-2 के 31 आवासों पर लगभग 1458.56 लाख रुपये और श्रेणी-4 के 10 आवासों के लिए लगभग 743.95 लाख रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है।

समिति की बैठक में इन परियोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसके बाद विचार-विमर्श के पश्चात दोनों योजनाओं को स्वीकृति देने पर सहमति व्यक्त की गई। सरकार की इस पहल को प्रदेश में सरकारी आवासीय ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बेहतर आवासीय सुविधाओं से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक कार्यों की दक्षता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

*आवास सचिव डॉ आर. राजेश कुमार का बयान*
राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई जिलों में पुराने सरकारी आवास जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं, इसलिए उनकी पहचान कर मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जा रही है।उन्होंने कहा कि जहां भी विभागीय भूमि उपलब्ध है, वहां नए और आधुनिक आवासों का निर्माण कराया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिल सके। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सभी परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई गई है। उनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में पूरे प्रदेश में सरकारी आवासीय ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाना है, जिससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य परिवेश मिल सके।

ऐसी नदियां जिसमें कटान के कारण प्रत्येक वर्ष कार्य होता है, चिन्हित कर चैनलाईजेशन की योजना तैयार करें: बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य आपदा मोचन निधि एवं राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि मद के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों के अनुमोदन हेतु राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक आहूत हुई। बैठक के दौरान जनपदों से प्राप्त विभिन्न प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि समिति के समक्ष प्रस्तावों को जनपद स्तरीय समिति की सिफारिश पर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया जाए। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को नदियों की डेजिंग/माइनिंग की एसओपी शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाढ़ सुरक्षा कार्यों से सम्बन्धित प्रस्तावों को सिंचाई विभाग की इस हेतु गठित समिति द्वारा टीएसी के उपरान्त राज्य कार्यकारिणी समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन नदियों में कटान के कारण प्रत्येक वर्ष कार्य कराना पड़ रहा है, उन्हें चिन्हित कर चैनलाईजेशन की योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि सितारगंज में बैगुल नदी के लिए अध्ययन करा लिया जाए।

मुख्य सचिव ने जनपद नैनीताल के चार्टन लॉज को भू-स्खलन से सुरक्षा प्रदान (लागत रू0 699.98 लाख), जनपद पिथौरागढ़ में खोटिला लैंड और घटधार, धारचुला में हिल का ड्रेनेज का कार्य एवं विभिन्न स्थलों पर भू-स्खलन संबंधी कार्य (लागत रू0 3840.78 लाख), जनपद हरिद्वार के मनसा देवी हिल बाईपास रोड का डेªनेज और भूस्खलन सम्बन्धित कार्य (लागत रू0 4124.83 लाख), जनपद अल्मोडा के दुधौली बैण्ड से पंचायत घर मोटर मार्ग के कि0मी0 2.00 में एच0पी0बैण्ड पर मार्ग सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 34.75 लाख), जनपद उत्तरकाषी के धराली झुला पुल का सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 147.13 लाख), जनपद उत्तरकाषी के नगर पालिका परिशद पुरोला में टैक्सी स्टैण्ड के ऊपर से हो रहे भूस्खलन को रोकने हेतु सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 128.37 लाख), जनपद उत्तरकाषी के हर्षिल मुखवा मोटर मार्ग का सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 472.00 लाख), विकास खण्ड सितारगंज में बैगुल नदी के दॉये एवं बॉये पार्श्व में ग्राम रूदपुर के आबादी क्षेत्रों की बाढ़ सुरक्षा कार्य (लागत रू0 146.67 लाख), विकासखण्ड सितारगंज में बैगुल नदी के दांये पार्ष्व में ग्राम बीसर्क्वाटर के आबादी क्षेत्र की बाढ़ सुरक्षा योजना (लागत रू0 148.48 लाख), तहसील जसपुर में फीका नदी की बाढ़ से ग्राम हजीरों की सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य (लागत रू0 419.82 लाख), जनपद नैनीताल में कौशल्यापुरी क्षेत्र की जल भराव की समस्या का समाधान कार्य (लागत रू0 84.77 लाख), रामनगर, नैनीताल के कानियॉ नई बस्ती एवं हिम्मतपुर डोटियाल के आबादी क्षेत्र को बरसाती नाले से जल भराव सुरक्षा कार्य (लागत रू0 112.15 लाख), जनपद देहराूदन के विकासखण्ड रायपुर में डिफेंस कालोनी जोगीवाला एवं बद्रीपुर में बाढ़ सुरक्षा कार्य (लागत रू0 460.45 लाख), जनपद देहरादून के डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में दुल्हनी नदी के विभिन्न स्थानों पर यथा, निर्मल कालोनी, बनसरी पुरम, दिल्ली फार्म, लक्ष्मणसिद्ध मंदिर, नकरोंदा रोड (विवेक विहार, वायु विहार) में सुरक्षात्मक कार्य (लागत रू0 412.70 लाख), जनपद देहरादून के विधानसभा क्षेत्र कैंट के अंतर्गत टोंस नदी के बांये तट पर स्थित स्वर्गाश्रम एवं गोषाला की सुरक्षा दीवार का निर्माण (लागत रू0 186.28 लाख) एवं जनपद देहरादून के विकासखण्ड सहसपुर के टौन्स नदी के बांये तट पर स्थित जलवायु टावर की क्षतिग्रस्त दीवार का निर्माण कार्य (लागत रू0 88.36 लाख) सहित अन्य विभिन्न कार्यों को स्वीकृति प्रदान की।

राज्य आपदा मोचन निधि के अन्तर्गत विभिन्न मदों में अतिरिक्त धनराशि आवंटन हेतु उपलब्ध कराये गये प्रस्तावों के सापेक्ष कुल रु0 34.00 करोड की वित्तीय स्वीकृतियों के संबंध में कार्योत्तर अनुमोदन प्रदान किया गया।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय एवं विनोद कुमार सुमन सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।