सीएम से मिला एलआईसी के अधिकारियों का दल, राहत कोष में दिए एक करोड़ की धनराशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज भारतीय जीवन बीमा निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर निगम की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु ₹1 करोड़ (एक करोड़ रुपये) की धनराशि का चेक मुख्यमंत्री को भेंट किया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर भारतीय जीवन बीमा निगम के इस सामाजिक उत्तरदायित्व से प्रेरित कदम की सराहना करते हुए कहा कि, “राज्य में संकट की घड़ी में जब भी जरूरत होती है, एलआईसी जैसी संस्थाएँ आगे बढ़कर सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। यह राशि आपदा प्रभावितों और जरूरतमंदों की सहायता में सार्थक योगदान देगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का सहयोग न केवल सरकार के प्रयासों को बल देता है, बल्कि समाज में साझेदारी और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है।

एलआईसी के अधिकारियों ने कहा कि संस्था हमेशा सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रही है और आगे भी उत्तराखंड राज्य के विकास एवं आपदा प्रबंधन कार्यों में हरसंभव योगदान देती रहेगी।

इस अवसर पर अपर सचिव मनमोहन मैनाली, जोनल मैनेजर एलआईसी पीएस नेगी, एसडीएम एलआईसी एसबी यादव व महेश सिंह मेहरा उपस्थित थे।

सीएम धामी ने पीएम के सुझावों पर कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश

उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सुझावों को राज्य सरकार ने आगामी 25 वर्षों के विकास रोडमैप की आधारशिला मानते हुए, उन पर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रधानमंत्री के सुझावों के अनुरूप ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विचार उत्तराखण्ड के सर्वांगीण विकास का स्पष्ट मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की आत्मा अध्यात्म, पर्यटन और प्राकृतिक संपदा में निहित है, उत्तराखण्ड को “स्पिरिचुअल कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में योग केंद्र, आयुर्वेद केंद्र, नेचुरोपैथी संस्थान और होम-स्टे को मिलाकर एक संपूर्ण पर्यटन एवं वेलनेस पैकेज तैयार किया जाए।

प्रत्येक वाइब्रेंट विलेज को छोटे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ स्थानीय भोजन, संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया जा सके।

राज्य के स्थानीय मेलों और पर्वों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए “वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल” अभियान शुरू किया जाए।

पहाड़ी जिलों को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ ब्लूबेरी, कीवी, हर्बल और औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए।

फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प और ऑर्गेनिक उत्पादों से जुड़े एमएसएमई को सशक्त बनाकर स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं।

तीर्थाटन, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और बारहमासी पर्यटन को समेकित विकास नीति के तहत आगे बढ़ाया जाए। उत्तराखण्ड को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विश्व स्तर पर स्थापित करने हेतु 5-7 प्रमुख स्थलों को विकसित करने की रूपरेखा बनाई जाए।

जीआई टैग प्राप्त उत्पादों और “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के तहत राज्य के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने की ठोस रणनीति बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का विज़न 2047 के ‘विकसित भारत’ के अनुरूप है, और उत्तराखण्ड इस दिशा में अग्रणी राज्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय से विस्तृत रोडमैप और टाइमलाइन आधारित एक्शन प्लान तैयार करें, ताकि इन सुझावों को धरातल पर उतारा जा सके।

उत्तराखंड रजतोत्सवः पीएम मोदी ने एफआरआई से जारी किया विशेष डाक टिकट

उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह के अवसर पर आज देहरादून आगमन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड डाक परिमंडल द्वारा राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों एवं सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित विशेष डाक टिकट श्रृंखला का विमोचन किया। इस विशेष डाक टिकट श्रृंखला के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की गई है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राज्य के 28,000 से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹62 करोड़ से अधिक की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से जारी की। इस पहल से राज्य के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल क्षति से सुरक्षा का लाभ प्राप्त होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ पर आधारित एक विशेष प्रतीक चिन्ह भेंट किया।

मुख्यमंत्री धामी ने एफआरआई में लिया तैयारियों का जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफ आर आई पहुंचकर राज्य के रजत उत्सव आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए हर्ष का विषय है कि हम राज्य स्थापना दिवस के रजत वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं। कहा कि हमारे राज्य को पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल जी ने बनाया और आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी इसको संवार रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री हमारे राज्य के इस रजत उत्सव में प्रतिभाग करने आ रहे हैं और हमारे राज्य को हमेशा से उनका सानिध्य मिलता रहता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने इन 25 वर्षों में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं और 2047 के विकसित भारत निर्माण की दिशा में हमारा राज्य अग्रणी भूमिका निभाने को तत्पर है।

उन्होंने जिला प्रशासन देहरादून, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों को रजत उत्सव की तैयारियों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजानदास, सहदेव पुंडीर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

किसानों का परिश्रम और सरकार की नीतियां पीढ़ियों के लिए तैयार करेंगे स्वस्थ, समृद्ध और स्वर्णिम भविष्य का निर्माणः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के रजत जयंती उत्सव के अवसर पर पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वृहद कृषक सम्मेलन का शुभारम्भ किया।

कार्यक्रम में कृषि, उद्यान, दुग्ध, मत्स्य, सहकारिता के प्रगतिशील कृषक व लखपति दीदीयों को मुख्यमंत्री द्वारा प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आये सभी किसानों को उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती पर्व की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि किसान भाइयों का परिश्रम और त्याग ही हमारी सच्ची पूंजी है और उनका पसीना हमारी ताकत है। उन्होंने उत्तराखंड निर्माण के सपने को साकार करने में अपना योगदान देने वाले और बीते 25 वर्षों में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले किसानों को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल कृषि संबंधी योजनाओं की चर्चा हेतु एक आम कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के हमारे सभी किसान भाइयों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के संतुलित विकास के लिए यह आवश्यक है कि हमारे किसान भाइयों की परेशानियां कम हों, वे सशक्त बनें। किसानों के सशक्तिकरण के बिना राष्ट्र का सशक्तिकरण अधूरा है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विकसित भारत के निर्माण का सपना भी तभी साकार हो सकता है, जब हमारा किसान विकसित हो। हम सभी जानते हैं कि भारत आदि काल से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है।

कृषि मानव जीवन का आधार है
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी के इर्द-गिर्द ही हमारा समाज विकसित हुआ, हमारी परम्पराएं पोषित हुईं और हमारे पर्व व त्योहार निर्धारित हुए। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में भी लिखा है कि कृषि संपत्ति और मेधा प्रदान करती है और कृषि ही मानव जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि उनके लिए तो खेती करना देव उपासना जैसा है, क्योंकि उनके पिता एक जवान भी थे और एक किसान भी। खेती द्वारा, लोगों का पेट भरने से जो संतुष्टि प्राप्त होती है, उसकी व्याख्या नहीं की जा सकती। यही कारण है कि वे आज भी खेती से जुड़े हैं और जब भी उन्हें समय मिलता है तो अपने गांव में खेती करने भी जाते हैं। उन्होंने कहा कि खेती से उन्हें आत्मिक शांति तो मिलती ही है साथ ही अपनी जमीन से भी जोड़े रखती है। माटी से ये जुड़ाव उन्हें सदैव उनके अस्तित्व, वांछित कर्म और कर्तव्य का बोध कराता है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि किसानों के लिए बनी वरदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों का जितना सशक्तिकरण हुआ है वो अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री का मत है कि देश के किसान का आत्मविश्वास देश का सबसे बड़ा सामर्थ्य है, और इसी को मूल मानकर केंद्र सरकार किसानों की दशा सुधारने और कृषि नीतियों को किसान केंद्रित बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का निरंतर ये प्रयास है कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों के किसानों को जो आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं वो भारत के किसान को भी मिलें। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि हमारे किसान के लिए बीज से बाजार तक की यात्रा ना केवल सुगम हो बल्कि ये उसकी आय में वृद्धि करने वाली भी हो। आज, देशभर के 11 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत उत्तराखंड के भी लगभग 9 लाख के करीब अन्नदाताओं को सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

किसानों का कल्याण हमारा संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहां एक ओर सभी प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसान को प्राकृतिक आपदाओं, फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान हेतु सुरक्षा कवच भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के द्वारा खेतों की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कर किसानों को पोषक तत्वों की कमी और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे उनकी उपज की गुणवत्ता और भूमि की उर्वरता दोनों में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। हम एक ओर जहां प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं कृषि उपकरण खरीदने हेतु फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान कर रहे हैं। यहीं नहीं, हमने किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त करने का काम किया है।

किसानों की आय बढ़ाने के किए जा रहे हैं प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण हेतु 200 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान भी किया है। इसके अंतर्गत अब तक राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपए की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम जहां एक ओर गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान रहे हैं, वहीं हमने गन्ने के रेट में भी 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है। इसके अतिरिक्त, हमने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सब्जियों की तरह ही फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। हमारी सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के तहत बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों की उपज की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग-सॉर्टिंग यूनिट के निर्माण के लिए भी अनुदान प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 50 से अधिक मशरूम इकाईयां, 30 से अधिक मौनपालन इकाइयाँ, 30 कोल्ड चेन इकाइयाँ, 18 कोल्ड स्टोरेज, 5 सी.ए. स्टोरेज, 128 बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ, 1030 सूक्ष्म खाद्य उद्यम और 2 मेगा फूड पार्क स्थापित हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत प्रदेश के कृषकों को पौधशाला स्थापना, संरक्षित खेती, औद्यानिक यंत्रीकरण, तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन व प्रसंस्करण हेतु 50 से 55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से फलों की उत्पादकता में ढाई गुना वृद्धि हुई है, जो पहले 1.82 मैट्रिक टन प्रति हैक्टेयर थी, वह अब 4.52 मैट्रिक टन हो गई है। मशरूम उत्पादन में आज उत्तराखण्ड देश में पाँचवें स्थान पर है। राज्य गठन के समय जहाँ मशरूम का उत्पादन मात्र 500 मैट्रिक टन उत्पादन था, वहीं आज यह बढ़कर 27,390 मैट्रिक टन हो गया है। इसी प्रकार शहद उत्पादन में भी राज्य देश में आठवें स्थान पर पहुँचा है और अब 3,320 मैट्रिक टन शहद का उत्पादन किया जा रहा है।

टी टूरिज्म को दिया जा रहा है बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बागवानी के समग्र विकास हेतु जापान सहयोगित उत्तराखण्ड एकीकृत औद्यानिक विकास परियोजना के तहत 526 करोड़ रुपये की बाह्य सहायतित परियोजना टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ जनपदों में लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि सगंध पौधा केन्द्र द्वारा लैमनग्रास, मिन्ट, गुलाब, तेजपात, कैमोमिल जैसी फसलों को प्रोत्साहन देकर 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध खेती विकसित की गई है, जिससे 28,000 से अधिक कृषक 109 एरोमा क्लस्टरों के माध्यम से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि चाय उत्पादन में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य गठन के समय जहाँ केवल 196 हेक्टेयर में चाय की खेती होती थी, वहीं आज यह 1,585 हेक्टेयर तक विस्तृत हो चुकी है। अब प्रदेश में छः लाख किलोग्राम हरी पत्तियाँ उत्पादित हो रही हैं और लगभग डेढ़ लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि टी-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए चम्पावत के सिलिंगटॉग, नैनीताल के श्यामखेत व घोड़ाखाल, तथा बागेश्वर के कौसानी में चाय बागानों को पर्यटन से जोड़ा गया है, जिससे स्थानीय युवाओं को नए रोजगार अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

कृषि के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने का है हमारा प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती वर्ष में हम उत्तराखंड का किसान-उत्तराखंड का गौरव के संदेश के साथ एक नई शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने सबसे आह्वान करते हुए कहा कि आइए, हम सभी मिलकर उत्तराखंड को समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक कृषि राज्य बनाएं। क्योंकि आपका परिश्रम, हमारी नीतियां और केंद्र सरकार का सहयोग, यही मिलकर हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, समृद्ध और स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करेंगे, और उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के हमारे विकल्प रहित संकल्प को पोषित करने में सार्थक सिद्ध होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टालो का निरीक्षण भी किया।

किसान सम्मेलन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने संबोधन में सभी को रजत जयंती की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितनी चिंता सीमा पर खड़े जवान की करते हैं, उतनी ही चिंता किसान की भी करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में कृषि का अहम योगदान है और प्रधानमंत्री ने 10 करोड़ किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बागवानी के क्षेत्र में उत्तराखंड अब कश्मीर और हिमाचल के बाद तीसरे स्थान पर है। मंत्री जोशी ने कहा कि राज्य सरकार ने ड्रैगन फ्रूट, एप्पल, कीवी और मिलेट के लिए विशेष नीतियां तैयार की हैं ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।

कृषि मंत्री ने कहा कि “किसान हमारे अन्नदाता हैं, किसान मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि धामी सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आजीविका को दोगुना करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं आजीविका संवर्धन का कार्य कर रही हैं और अब तक 1.65 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश दिनो दिन प्रगति कर रहा है व मुख्यमंत्री निरंतर कृषकों के बीच जाते रहते है व संवाद करते है। उन्होने कहा कि हमे दलगत राजनीति से उपर उठकर जनसमस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण करना होगा। उन्होने किच्छा में में औद्योगिक पार्क बनाये जाने के लिए आभार व्यक्त किया साथ ही उन्होने पंतनगर की जर्जर सड़कों की मरम्मत की घोषणा करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर दायित्वधारी अनिल कपूर डब्बू, बलराज पासी, उत्तम दत्ता, खतीब अहमद, महापौर विकास शर्मा, दीपक बाली, सचिव मुख्यमंत्री एवं कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, सचिव एसएन पाण्डे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल मंजूनाथ टीसी, सहित अनेक जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में कृषक बन्धु मौजूद थे।

25 वर्षों में उत्तराखंड की सेहत में सुधार, राज्य के हर कोने तक पहुंच रही चिकित्सा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर मेडिकल एजुकेशन तक, हर क्षेत्र में सुधार की नई मिसालें स्थापित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत राज्य ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने, संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने में बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में लंबी छलांग लगाई है। आज प्रदेश के हर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का जाल बिछ चुका है। वर्तमान में राज्य में 13 जिला चिकित्सालय, 21 उपजिला चिकित्सालय, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 577 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और करीब 2000 मातृ-शिशु कल्याण केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ आम जनता को स्थानीय स्तर पर उपचार मिल रहा है।

सरकार ने हाल ही में 6 उपजिला चिकित्सालय, 6 सीएचसी और 9 पीएचसी के उन्नयन को मंजूरी दी है। साथ ही सेलाकुई (देहरादून) और गेठिया (नैनीताल) में 100-100 शैय्यायुक्त मानसिक चिकित्सालयों का निर्माण तेजी से जारी है। भारत सरकार के सहयोग से उत्तरकाशी, गोपेश्वर, बागेश्वर और रुड़की में 200 शैय्यायुक्त क्रीटिकल केयर ब्लॉक, जबकि मोतीनगर (हल्द्वानी) और नैनीताल में 50-50 शैय्यायुक्त ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं। देश में पहली बार एम्स ऋषिकेश के सहयोग से उत्तराखंड में हेली-एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है, जिससे पर्वतीय व दुर्गम इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हुई हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। स्वास्थ्य विभाग पिछले पांच सालों में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और नवजात शिशु मृत्यु दर (एनएमआर) में निरंतर कमी आई है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि एनएमआर को घटाकर 12 और एमएमआर को 70 प्रति लाख जीवित जन्म तक लाया जाए। राज्य में एनएचएम की शुरुआत 27 अक्टूबर 2005 को हुई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण व दूरस्थ इलाकों में रहने वाले गरीबों, महिलाओं और बच्चों को सुलभ व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। डॉ. कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अगुवाई में मिशन ने अपने लक्ष्यों की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है।

शिशु और मातृ मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट
राज्य गठन के समय शिशु मृत्यु दर 52 प्रति हजार थी, जो अब घटकर 20 रह गई है। एसआरएस 2023 रिपोर्ट के अनुसार मातृ मृत्यु दर 450 प्रति लाख से घटकर अब मात्र 91 रह गई है। सकल प्रजनन दर भी 3.3 से घटकर 1.7 हो गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 2020-21 के अनुसार राज्य में संपूर्ण प्रतिरक्षण दर 88.6 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो राज्य गठन के समय 47 प्रतिशत थी। वहीं संस्थागत प्रसव दर अब 83.2 प्रतिशत हो गई है, जबकि राज्य निर्माण के समय यह मात्र 21 प्रतिशत थी।

चिकित्सकों की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
राज्य निर्माण के समय स्वास्थ्य विभाग में 1621 डॉक्टरों के पद स्वीकृत थे। सरकार ने 1264 नए पद सृजित कर यह संख्या 2885 तक पहुंचाई।रिक्तियों को भरने के लिए निरंतर भर्ती अभियानों के साथ-साथ, सरकार ने 220 चिकित्सकों को दुर्गम क्षेत्रों में तैनात किया है। वर्तमान में कुल 2885 पदों के सापेक्ष 2598 डॉक्टर तैनात हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है। लंबे समय से अनुपस्थित 56 डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर सरकार ने सख्ती का संदेश भी दिया है।

नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती
राज्य सरकार ने अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 1399 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति की है। एएनएम के 1933 पदों को बढ़ाकर 2295 किया गया, जिनमें से 1918 पद भरे जा चुके हैं। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से 34 एक्स-रे टेक्नीशियन सहित अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की भर्ती भी की गई है।

मातृ मृत्यु दर में 77 प्रतिशत की कमी
स्वास्थ्य विभाग के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है कि मातृ मृत्यु दर में 77 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य गठन के समय से मातृ मृत्यु दर (440/100000 जीवित प्रसव) के सापेक्ष (91/100000 जीवित प्रसव) हो गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 1,47,717 संस्थागत प्रसव कराए गए, जो कुल प्रसव का 85 प्रतिशत हैं। 2025 में चलाए गए 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक के विशेष अभियान के तहत 37 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच की गई। राज्य में हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में दो पोषण पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, जिनमें इस वर्ष अब तक 32 कुपोषित शिशुओं का उपचार किया गया।

प्रदेश में 1985 आयुष्मान आरोग्य केंद्र
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि प्रदेश के 13 जिलों में अब तक 1985 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों से हर वर्ष 34 लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। बीते तीन वर्षों में 28.8 लाख लोगों की हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की जांच, 28.4 लाख लोगों के मुख कैंसर, और 13.1 लाख महिलाओं के स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग की गई। इससे स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

108 आपातकालीन सेवा बनी जीवन रक्षक
वर्ष 2008 में शुरू हुई 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा अब राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बन चुकी है। वर्तमान में इसके पास 272 एम्बुलेंस हैं जिनमें 217 बेसिक लाइफ सपोर्ट, 54 एडवांस लाइफ सपोर्ट और 1 बोट एम्बुलेंस शामिल है। वर्ष 2019 से अगस्त 2025 तक, इस सेवा के माध्यम से 8.79 लाख से अधिक लोगों को आपातकालीन सहायता मिली है।

गंभीर बीमारियों के लिए आर्थिक सहायता
राज्य व्याधि सहायता निधि समिति के तहत बीपीएल वर्ग के मरीजों को 11 गंभीर बीमारियों के इलाज हेतु आर्थिक मदद दी जाती है। वर्ष 2005-06 से अब तक 1045 लाभार्थियों को इस योजना से सहायता मिली है, जिस पर 12.85 करोड़ रुपये से अधिक व्यय हुआ है।

जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाएं
सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 335 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित हैं, जबकि 48 नए केंद्र प्रस्तावित हैं। इन केंद्रों से आम नागरिकों को दवाएं बाजार मूल्य से 50-80 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैं।

टीबी उन्मूलन में उल्लेखनीय सफलता
राज्य में टीबी मुक्त उत्तराखंड अभियान के तहत 2182 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। 18,159 निक्षय मित्र अब तक जुड़ चुके हैं, जिनमें से 8658 सक्रिय रूप से टीबी मरीजों को गोद लेकर सहयोग कर रहे हैं।

तीर्थ यात्रियों के लिए विशेष स्वास्थ्य व्यवस्था
हर वर्ष चार धाम और कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सभी धामों और यात्रा मार्गों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और जीवनरक्षक उपकरणों की तैनाती की जाती है। स्वास्थ्य सलाह 13 भाषाओं में जारी की जाती है ताकि देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो।

परिवार नियोजन और जन स्वास्थ्य विस्तार
परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत देहरादून और अल्मोड़ा में दो नए परिवार नियोजन साधनों की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 19 केंद्रों में 166 मशीनों द्वारा इस वर्ष अब तक 46,958 डायलिसिस सत्र संपन्न किए जा चुके हैं।

रक्त संचरण सेवाओं का विस्तार
2016 से अब तक राज्य में 65 रक्तकोष (ब्लड बैंक) स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें 28 सरकारी, 18 निजी व 19 चौरिटेबल संस्थान हैं। रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं में बड़ी सुविधा मिली है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विस्तृत बयान
उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का हर नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके। हमने स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिए एनएचएम को एक मजबूत स्तंभ के रूप में कार्यरत किया है। आज प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर ऐतिहासिक रूप से घटी है, संस्थागत प्रसव की दर में वृद्धि हुई है और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति नई चेतना आई है। हमारी सरकार की प्राथमिकता है ‘स्वस्थ उत्तराखंड, समृद्ध उत्तराखंड’। हमने स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त बनाने के लिए रिकॉर्ड स्तर पर निवेश किया है। हेली-एंबुलेंस सेवा, आयुष्मान आरोग्य केंद्र, नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा में विस्तार जैसी पहलों से हमने स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुँचाया है। मेरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के सबसे स्वस्थ राज्यों में शामिल होगा और हमारी नीतियां जनसेवा की नई दिशा तय करेंगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार का बयान
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक परिवर्तन आया है। अगर बात करें पिछले 25 वर्षों की तो उत्तराखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य सरकार की प्राथमिकता हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत, टेलीमेडिसिन, 108 आपातकालीन सेवा और जन औषधि केंद्र जैसे कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती दी है। हमने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की है। सरकार की नीति ‘स्वस्थ उत्तराखंड समर्थ उत्तराखंड’ की दिशा में राज्य निरंतर आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में हमारा लक्ष्य है कि हर गांव और हर व्यक्ति को समयबद्ध, सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। यह परिवर्तन केवल योजनाओं का नहीं, बल्कि संकल्प और प्रतिबद्धता का परिणाम है।

प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन के पहले सत्र में जल, जमीन, जंगल पर अहम चर्चा

प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेेलन का पहला सत्र जल, जंगल, जमीन के संरक्षण की परम आवश्यकता पर केंद्रित रहा। इस मौके पर जोर देते हुए कहा गया कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी खूबसूरती जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। जोर देते हुए कहा गया कि जीडीपी तय करते हुए एक पैमाना यह भी होना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र की पारिस्थितिकी प्रगति किस तरह की रही है।

दून विश्वविद्यालय में आयोजित इस सम्मेलन के पहले सत्र में हेस्को संस्था के संस्थापक पदम भूषण डा. अनिल जोशी ने कहा कि देश का कोई कोना हो या विश्व की कोई अन्य जगह, पारिस्थितिकी और विकास के बीच संतुलन की चर्चा केंद्र में है। हिमालयी प्रदेश होने के कारण हमारे यहां तो यह चर्चा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच संतुलन अति आवश्यक है, क्योंकि आज पारिस्थितिकी संकट गहराने लगा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जीडीपी तय करते वक्त औद्योगिक विकास, रोजगार समेत अन्य पैमानों पर ध्यान दिया जाता है, उसमें पारिस्थितिकी प्रगति का भी मूल्यांकन जरूरी है।

यूएनडीपी के स्टेड हेड प्रदीप मेहता ने कहा कि यह जरूरी है कि हम परंपरागत कृषि करें, लेकिन परिस्थिति और सुविधाओं के अनुरूप उसमें बदलाव किया जाना भी आवश्यक है। वन विभाग के पूर्व पीसीसीएफ और आईआईटी रूड़की की फैकल्टी डा. कपिल जोशी ने कहा कि निसंदेह हिमालयी क्षेत्रों में विकास हुआ है, लेकिन यह समीक्षा होनी भी जरूरी है कि उससे पारिस्थितिकी तंत्र पर कितना असर पड़ा है। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में आंकडे़ भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि चाहे तापमान हो, बारिश हो या पारिस्थितिकी से जुड़ी अन्य कोई बात, आंकडे़ बता रहे हैं कि उनमें बहुत ज्यादा चरम स्थिति दिख रही है, जो कि ठीक नहीं है।

वन विभाग की पीसीसीएफ और यूकेएफडीसी की एमडी नीना ग्रेवाल ने कहा कि प्राकृतिक संपदा का उतना ही इस्तेमाल जरूरी है, जितने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने संबोधन में वनों पर आधारित रोजगार, ईको-टूरिज्म की आवश्यकता पर जोर दिया। एटरो रीसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ नितिन गुप्ता ने कहा कि ई-वेस्ट कोे रिसाइकल करके हम इस समस्या को अवसर में बदल सकते हैं।

इस सत्र के कोऑर्डिनेटर वन विभाग के पीसीसीएफ डा. एसपी सुबुद्धि ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडियों की ओर से उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। प्रवासी उत्तराखंडियों में डा. मायाराम उनियाल, रामप्रकाश पैन्यूली, सतीश पांडेय और राजेंद्र सिंह ने सुझाव दिए।

गुरूनानक जयंती पर सीएम ने गुरू सिंह सभा गुरूद्वारे में टेका माथा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुनानक जयंती एवं कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा रेसकोर्स में मथा टेका। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों व विशेष रूप से सिख समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु नानक देव ने समाज की बुराइयों को दूर करने के लिए अपने उपदेशों एवं शिक्षा के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। उनका जीवन हमें समाज में भाईचारा, सद्भाव एवं आपसी एकता को बढावा देने की प्रेरणा देता है।

विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया अपना संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान आयोजित परिचर्चा में भाग लेते हुए, राज्य गठन की पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान तक का विस्तृत खाका खींचते हुए, सदन के सामने आगामी वर्षों में उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प दोहराया।

सभी मुख्यमंत्रियों का योगदान सराहा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अटल सरकार के कार्यकाल में राज्य स्थापना के साथ ही केंद्र सरकार द्वारा राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया गया। जिसके माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री स्व नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ पर्यटन विकास, औद्योगिक विस्तार और आर्थिक सुधारों का नया दौर प्रारंभ हुआ। उसके बाद वर्ष 2002 में राज्य के प्रथम विधानसभा चुनाव के बाद स्व. नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी। उनके नेतृत्व में राज्य में प्रशासनिक स्थिरता स्थापित करने, औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वर्ष 2007 के बाद, तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का कार्यकाल ‘’सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व’’ की नीति पर केंद्रित रहा। इसके पश्चात डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के मुख्यमंत्रित्व काल में भी कई ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से राज्य का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित किया गया।

इसी क्रम में वर्ष 2012 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने कांग्रेस पार्टी को सत्ता सौंपी, ये कालखंड राज्य के लिए राजनीतिक अस्थिरता, प्राकृतिक आपदाओं और विभिन्न चुनौतियों का दौर रहा। इसी दौरान केंद्र सरकार के सहयोग से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ किए गए, जिन्होंने 2013 की भीषण आपदा के बाद श्रद्धालुओं के विश्वास को पुनर्स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। जबकि वर्ष 2017 में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत से विजय प्राप्त हुई, जिसमें त्रिवेंद्र सिंह रावत को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर मिला। उनके नेतृत्व में राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण सुधार प्रारंभ किए गए। उनके पश्चात तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालते हुए अल्प अवधि में ही हरिद्वार कुंभ जैसे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन का कोरोना जैसी महामारी के बीच सफल आयोजन कराया।

कठिन चुनौतियों के बीच निभाई जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2022 में कोरोना महामारी जैसी वैश्विक आपदा के दौर और विधानसभा चुनाव से मात्र सात माह पूर्व उन्हें राज्य के मुख्य सेवक के रूप में दायित्व संभालने का अवसर मिला। उस अल्पावधि में अनेकों चुनौतियां थीं, ऐसे में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने राज्य में चल रही विभिन्न नीतियों और योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन करते हुए राज्य को नई दिशा देने का प्रयास किया। जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की जनता ने राज्य के इतिहास में पहली बार किसी एक दल को दूसरी बार भारी बहुमत से विजयी बनाकर पुनः राज्य की सेवा करने का अवसर प्रदान किया। उसके बाद से सरकार राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और उनके सपनों को साकार करने के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

प्रगति के पथ पर उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने सरकार के काम काज का विस्तार से विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के साधनों को बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में 30 से अधिक नई नीतियों को बनाकर प्रदेश के समग्र विकास का विजन प्रस्तुत करते हुए राज्य को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने का प्रयास किया गया है। इन प्रयासों से नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2023-24 के सतत् विकास लक्ष्य इंडेक्स में हमारे प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। आज प्रदेश की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। आज राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना बढ़ा है और प्रति व्यक्ति आय में 18 गुना बढ़ोतरी हुई है। राज्य गठन के समय हमारी अर्थव्यवस्था का आकार 14 हजार 501 करोड़ रुपए था, जो 2024-25 में बढ़कर 3 लाख 78 हजार 240 करोड़ रुपये होने जा रहा है। इसी प्रकार राज्य गठन के समय हमारे राज्य में प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 15 हजार 285 रुपए थी, जो अब बढ़कर लगभग 2 लाख 74 हजार 64 रुपए के करीब है।

डबल इंजन सरकार ने गैरसैंण को बनाया ग्रीष्मकालीन राजधानी
उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का काम किया। उन्होंने स्वयं गैरसैंण के सारकोट गाँव को गोद लिया है, प्रतिपक्ष के साथियों को वहां जाकर जायजा लेना चाहिए। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का आयोजन कर 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौते किए।

किसान कल्याण के लिए समर्पित
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि के लिए संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। एक ओर जहां प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं कृषि उपकरण खरीदने हेतु ’’फार्म मशीनरी बैंक’’ योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।

तीर्थाटन के साथ पर्यटन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार राज्य में धार्मिक, साहसिक, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, एग्रो टूरिज्म और फिल्म पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। आज जहां एक ओर केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण हेतु विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। वहीं ऋषिकेश और हरिद्वार को योग और आध्यात्मिक केंद्रों के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने के उद्देश्य से ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर पर भी कार्य किया जा रहा है।

देवभूमि बनी खेल भूमि
उन्होंने कहा कि सरकार देवभूमि को खेल भूमि के रूप में स्थापित करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। इसी वर्ष राज्य में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इन खेलों में उत्तराखण्ड ने 103 पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रीय खेलों में 7वां स्थान प्राप्त कर एक नया इतिहास रचा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए भी संकल्पित होकर कार्य कर रही है। जिसके अंतर्गत सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

इंफ्रा प्रोजेक्ट में तेजी
उन्होंने कहा कि आज ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना द्वारा पहाड़ों तक रेल पहुंचाने का वर्षों पुराना हमारा सपना साकार होने जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में रोपवे विकास की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजनाओं का निर्माण भी शीघ्र प्रारंभ होने जा रहा है। डबल इंजन सरकार’’ द्वारा उड़ान योजना के अंतर्गत प्रदेश में 18 हेलीपोर्ट्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से अब तक 12 हेलीपोर्ट्स पर हवाई सेवाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ की जा चुकी हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रयासरत है। जहां एक ओर राज्य के प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, वहीं देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित करने के साथ ही हल्द्वानी में राज्य के प्रथम आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी चल रहा है। हालांकि अभी हमें स्वास्थ्य क्षेत्र में और अधिक काम करने की आवश्यकता है।

लंबित समस्याओं का निदान किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के पश्चात हमारे समक्ष ऐसी बहुत सी समस्याएं थीं, जिनका यदि समय पर समाधान हो जाता तो आज उत्तराखंड की स्थिति ओर अधिक मजबूत होती। इसी क्रम में मुख्य सेवक का दायित्व संभालने के पश्चात, उन्होंने देखा कि हमारे राज्य के युवा नकल माफियाओं के कारण दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इसलिए सरकार ने देश का सबसे सख्त नकल कानून लाकर हमने नकल माफिया की रीढ़ तोड़ने का काम किया। इसी का परिणाम है कि पिछले साढ़े 4 चार वर्षों के अपने कार्यकाल में हम रिकॉर्ड 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान करने में सफल रहे।

साफ नीयत स्पष्ट नीति और पारदर्शी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि वो साफ नीयत, स्पष्ट नीति और पारदर्शी प्रक्रिया के साथ शासन चलाने का संकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं। आज उत्तराखंड में न तो किसी घोटालेबाज़ को संरक्षण मिलता है, न किसी भ्रष्टाचारी को बख्शा जाता है। आज भ्रष्टाचारियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्यवाही करते हुए प्रदेश के इतिहास में पहली बार आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित पिछले चार वर्षों में भ्रष्टाचार में लिप्त 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की है।

राज्यहित में लिए दूरगामी निर्णय
उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यहित में अनेक ऐसे ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय लिए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक महसूस किया जाएगा। सरकार ने देश में सबसे पहले “समान नागरिक संहिता” कानून लागू कर सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करने का काम किया। डेमोग्राफी बदलाव रोकने के लिए सरकार ने प्रदेश में जहां एक ओर ’’धर्मांतरण विरोधी कानून’’ बनाया, वहीं लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे कुकृत्यों को रोकने के लिए भी सख्त कार्रवाई की। प्रदेश में दंगों की राजनीति करने वालों को सबक सिखाने के लिए सख्त दंगा रोधी कानून बनाकर दंगों में होने वाले नुकसान की भरपाई भी दंगाईयों से ही करने का काम किया गया। साथ ही देवभूमि के मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य में सख्त भू-कानून लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लेने का भी काम किया। सरकार ने राज्य में मदरसा बोर्ड को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है।

उत्तराखंड को बनाएंगे देश का श्रेष्ठ राज्य
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड ने अपनी इन 25 वर्षों की यात्रा में अनेकों उतार चढ़ावों का सामना सफलतापूर्वक किया है, उन्हें पूर्ण विश्वास है कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता के सहयोग से हम आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ’’विकल्प रहित संकल्प’’ को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।

राष्ट्रपति का जताया आभार
इससे पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का सदन की ओर से आभार व्यक्त करने के साथ, देश के अमर शहीदों, राज्य आंदोलनकारियों और राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी सदन की ओर से नमन किया।

काशीपुर में आयोजित हुआ राज्य स्तरीय शहरी विकास सम्मेलन, सीएम ने किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड की रजत जयंती वर्ष समारोह की श्रृंखला में काशीपुर में राज्य स्तरीय शहरी विकास सम्मेलन का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने 46 करोड़ 24 लाख के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया तथा दिव्यांग सशक्तिकरण कौशल विकास वाहन व नगर निगम काशीपुर के 14 कूड़ा एकत्रित करने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में, जब हमारे शहर अपने स्वरूप में ढल रहे थे, तब हमारे निकायों के सामने बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ आवश्यक संसाधनों का भी अभाव हुआ करता था। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने भी विकास कार्यों की गति को अत्यधिक प्रभावित किया। परंतु इन 25 वर्षों की इस गौरवमयी यात्रा में हमारे राज्य ने अनेकों चुनौतियों का सामना करते हुए विकास, समृद्धि और सुशासन के नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी राज्य की आत्मा उसके गाँवों में बसती है तो शहरों में हमारे नागरिकों के सपने और आकांक्षाएँ आकार लेते हैं। इसी सोच के साथ हमने शहरी विकास को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है। आज हमारे नगर स्वच्छता, सड़क व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड का नगरीय स्वरूप तेजी से बदला है। वर्ष 2001 में जहाँ राज्य की शहरी जनसंख्या लगभग 16 प्रतिशत थी, वहीं आज यह बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। यही नहीं, राज्य गठन के समय राज्य में केवल 63 स्थानीय निकाय थे और देहरादून एकमात्र नगर निगम हुआ करता था, लेकिन आज राज्य में 107 नगरीय निकाय और 11 नगर निगम शहरों के विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय शहरी विकास विभाग का बजट जहाँ केवल 55 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर 13 सौ करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया है। बीते 25 वर्षों में हमारे शहरों ने न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की है, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के अनेक अवसर भी सृजित किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के सिद्धांत पर चलते हुए भारत को विकास और समृद्धि की नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से आज देश के लाखों शहरों, कस्बों और नगरों में साफ-सफाई की एक नई संस्कृति विकसित हुई है। अमृत योजना के द्वारा शहरी बुनियादी ढाँचे जैसे जल आपूर्ति, सीवरेज और हरित स्थानों को सशक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के माध्यम से शहरी विकास को तकनीक और नागरिक सुविधा के साथ जोड़ते हुए एक आदर्श नगर विकास का मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाखों गरीब परिवारों को अपने खुद के पक्के घर प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के विकास को एक नई दिशा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जहाँ एक ओर स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रत्येक नगर में ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, वहीं स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, खुले में शौच मुक्त अभियान और लीगेसी वेस्ट प्रबंधन जैसी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उत्तराखण्ड के प्रत्येक नागरिक को देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में पहली बार साढ़े 82 करोड़ रुपये की लागत से 52 स्थानीय निकायों में 115 अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि काशीपुर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के साथ ही ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण भी किया जा रहा है। इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करने एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 1100 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक हब परियोजना एवं 100 करोड़ रुपये की लागत से अरोमा पार्क परियोजना भी संचालित की जा रही है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर काशीपुर दीपक बाली, अन्य जनप्रतिनिधि, सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा उपस्थित थे।