ईडब्ल्यूएस (शहरी) आवासों का आवंटन केवल पात्र लोगों को ही मिले, यह सुनिश्चित किया जाएः सीएस

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आवास विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ई.डब्ल्यू.एस (शहरी) आवासों का लाभ जिन लोगों को दिया गया है, उनका पुनः सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना का लाभ सिर्फ पात्र लोगों को ही मिले। गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वाले और देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आगे जो भी आवास आवंटन किए जाएं, यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल पात्र लोगों को ही मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अंतर्गत विभिन्न शहरों के मास्टर प्लान के कार्यों में तेजी लाई जाए। मास्टर प्लान के साथ शहरों की धारण क्षमता का आकलन भी किया जाए। नगर क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ ही वृक्षारोपण पर भी ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि शहरी क्षेत्रों में प्राधिकरणों द्वारा पारित नक्शों के अनुरूप ही निर्माण कार्य हों। बिल्डिंग और सोसाइटी निर्माण कार्यों में वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीनरी का भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए सख्ती से कार्य किए जाएं। आमजन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आवासों के नक्शे निर्धारित समयावधि में पास किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने राज्य के दोनों मंडलों में एक-एक नए शहर विकसित किए जाने की दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। इन शहरों को स्प्रिचुअल जोन के साथ क्लब किया जाए। मुख्यमंत्री ने राज्य में आवासीय आवश्यकता का मूल्यांकन करते हुए सभी वर्गों के लिए आवास की मांग का आकलन करने, भविष्य की आवश्यकताओं का अनुमान लगाने एवं उसके अनुरूप ठोस कार्ययोजना विकसित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में भूमि का समुचित उपयोग, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का आवश्यकता अनुसार पुनर्विकास करने के भी निर्देश दिए।

प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि आवास विकास विभाग 8 गेम चेंजर योजनाओं पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए 191 स्थानों पर पार्किंग निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें 109 मल्टीलेवल, 10 टनल, 63 सर्फेस और 9 ऑटोमेटेड पार्किंग हैं। 48 पार्किंग के निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 47 पर कार्य गतिमान है।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीपीपीजीजी मनोज पंत एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अगस्त माह के अंत तक पेश करें कुम्भ 2027 की सम्पूर्ण कार्ययोजनाः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में कुंभ मेला से संबंधित कार्यों हेतु उच्च अधिकार प्राप्त समिति एवं व्यय वित्त समिति की बैठकें संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि घाटों के निर्माण में गुणवत्ता के साथ ही हरियाली का विशेष ध्यान रखा जाए। जहाँ जहाँ संभव हो हरियाली का प्रावधान रखा जाए।

मुख्य सचिव ने मेलाधिकारी को अगस्त माह के अंत तक कुम्भ 2027 की सम्पूर्ण कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य जो प्रत्येक स्थिति में किए ही किए जाने हैं, उन कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखते हुए स्थायी एवं अस्थायी प्रकृति के सभी प्रकार के कार्यों की एक व्यापक सूची सहित कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत की जाए।

मुख्य सचिव ने कुम्भ क्षेत्र के पुलों की सुरक्षा जांच तत्काल अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे कुम्भ क्षेत्र का सर्क्यूलेशन प्लान भी अनिवार्य रूप से तैयार किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि विशेष पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं की अधिकतम भीड़ के अनुरूप योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने प्रत्येक बिन्दु पर प्रवेश एवं निकासी के लिए योजना तैयार किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव कहा कि कुंभ क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों के रेलवे स्टेशनों की क्षमता विकास और सौंदर्यीकरण हेतु रेल मंत्रालय से संवाद किया जाए। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ के दौरान रेलवे स्टेशनों में होल्डिंग एरिया तैयार किया जाए। मुख्य सचिव ने कुम्भ क्षेत्र में नए पार्किंग एरिया चिन्हित कर अभी से तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कुम्भ के दौरान प्राइवेट भूमि पर पार्किंग स्थल किराए पर लिए जाने हेतु भी अभी से तैयारियां करते हुए भूमि के मालिकों से भी अभी से बातचीत कर ली जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि घाटों के पास सीढ़ियों को मानक के अनुरूप रखा जाए ताकि श्रद्धालुओं को सीढ़ियाँ चढ़ने उतरने में परेशानी का सामना ना करना पड़े। उन्होंने घाटों के पास चेंजिंग रूम और बैठने के लिए बेंच आदि का प्रावधान भी रखा जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने घाटों के निर्माण को समयबद्ध तरीके से पूर्ण किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि नहरों के बंदीकरण के दौरान सभी कार्य समय से पूर्ण किए जा सकें।

व्यय वित्त समिति में निम्न प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई
व्यय वित्त समिति में लोक निर्माण विभाग एवं सिंचाई विभाग के कार्यों को संस्तुति प्रदान की गयी, जिसमें जनपद हरिद्वार में बहादराबाद सिडकुल चार लेन मार्ग (भाईचारा ढाबा) से बीएचईएल बैरियर नं0-6 होते हुए शिवालिक नगर चौक (बीएचईएल मध्य मार्ग) तक मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़िकरण का कार्य, दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 334 पर पतंजलि योगपीठ से सहदेवपुर, दिनारपुर, सुभाषगढ होते हुए पुरकाजी-लक्सर-ज्वालापुर राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 334ए पर फेरूपुर तक मार्ग का 1.50 लेन में चौडीकरण एवं सुदृढीकरण का कार्य सहित सिंचाई विभाग के कुल 02 कार्य जिसमें ऊपरी गंगा नहर के बाएँ किनारे पर अमरापुर घाट से ऋषिकुल पुल तक 600 मीटर घाट का निर्माण एवं ऋषिकुल पुल से साक्षी सतनाम घाट तक अपर गंग नहर के बांयें पार्श्व पर घाट निर्माण कार्य शामिल है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. वी षणमुगम, आयुक्त गढ़वाल विनय कुमार पाण्डेय एवं मेलाधिकारी सोनिका सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्र से उत्तराखंड को विशेष पूंजीगत सहायता को पहली किश्त में रू. 380.20 करोड़ की धनराशि जारी

भारत सरकार द्वारा विशेष पूंजीगत सहायता के तौर पर उत्तराखंड के लिए रू. 615 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। जिसकी पहली किश्त में रू. 380.201 करोड़ की धनराशि भी राज्य को जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष केन्द्रीय सहायता मंजूर किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दशक को उत्तराखंड के विकास का दशक बनाने की प्रधानमंत्री की संकल्पना को पूरा करने के लिए राज्य सरकार पूरी तत्परता एवं प्रतिबद्धता से जुटी है। इस दिशा में केन्द्र सरकार द्वारा उत्तराखंड को भरपूर सहयोग मिल रहा है।

केन्द्र सरकार की पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) योजना के अंतर्गत उत्तराखंड सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 37 योजनाओं के लिए रू. 619.42 करोड़ रुपये की विशेष सहायता उपलब्ध कराए जाने की मॉंग की गई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा केन्द्र सरकार के समक्ष इन प्रस्तावों की प्रभावी पैरवी करते हुए शीघ्र मंजूरी दिए जाने का आग्रह किया गया था।

वित्त मंत्रालय भारत सरकार ने इस संबंध में राज्य सरकार को एक पत्र भेजकर एसएएससीआई योजना के तहत उत्तराखंड को 37 योजनाओं के लिए रू. 615.00 करोड़ की धनराशि मंजूर किए जाने की जानकारी दी है।

विशेष पूंजीगत सहायता के तौर पर जारी स्वीकृति के अनुसार राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों हेतु रू. 218.45 करोड़ और सौंग बांध पेयजल परियोजना हेतु रू. 70 करोड़ की धनराशि स्वीकृति की गई है। विभिन्न स्थानों पर घाटों, नहर पर बाईपास सड़क निर्माण एवं ड्रेनेज के निर्माण की परियोजनाओं हेतु रू. 36.18 करोड़, 06 पुलिस थानों एवं 14 रिपोर्टिंग पुलिस चौकियों के प्रशासनिक भवनों के निर्माण हेतु रू. 10.00 करोड़, स्टार्टअप की सुविधा एवं प्रोत्साहन हेतु यू-हब स्टार्ट अप प्लेस का निर्माण हेतु रू. 10.00 करोड़, जलापूर्ति व्यवस्था एवं सीवरेज प्रबंधन की योजनाओं हेतु रू. 35.00 करोड़ और विद्युत पारेषण लाईनों को निर्माण कार्य हेतु रू. 47.33 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। उच्च शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा संस्थानों के निर्माण कार्यों हेतु रू. 82.74 करोड़, आईएसबीटी और आधुनिक कार्यशाला निर्माण की तीन योजनाओं हेतु रू. 25.00 करोड, डाकपत्थर बैराज एवं इच्छाड़ी बांध के पहुंच मार्ग आदि के कार्यों हेतु रू. 34.72 करोड़ की योजनाओं की भी स्वीकृति मिली है। इसी तरह ऋषिकेश में तिलक रोड के पास मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण, देहरादून में आढ़त बाज़ार पुनर्विकास की परियोजना और विद्युत वितरण नेटवर्क को भूमिगत करने के कार्यों हेतु रू. 45.58 करोड़ की धनराशि की योजना स्वीकृत की गई है।

जन समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताः धामी

विधायकगणों द्वारा उठाई गई जन समस्याओं को अधिकारी पूरी गंभीरता से लें। विधानसभा क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारी विधायकगणों के साथ निरंतर संवाद करें। राज्य की सभी 70 विधानसभाओं के अंतर्गत की गई घोषणाओं और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए शासन-प्रशासन और विधानसभा क्षेत्र के बीच सेतु की भूमिका में कार्य करने हेतु अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में टिहरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभाओं की मुख्यमंत्री घोषणाओं और अन्य कार्यों की समीक्षा के दौरान ये निर्देश अधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रत्येक विधानसभा में गतिमान विभिन्न कार्यों की समीक्षा मुख्य सचिव स्तर पर भी की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव भी विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए अपने विभागों की नियमित समीक्षा करें। प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभाओं की प्रत्येक तीन माह में समीक्षा मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे। बैठक में विधायकगणों द्वारा अपनी विधानसभा से संबंधित जो जन समस्याएं रखी गई हैं, उन पर की गई कार्यवाही की जानकारी एक सप्ताह के भीतर संबंधित विधायकगणों एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। यह सुनिश्चित किया जाए कि जनहित से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के बाद सभी निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने सभी विधायकगणों से कहा कि अपनी विधानसभा क्षेत्र में लघु, मध्य और दीर्घ अवधि में पूर्ण होने वाले कार्यों का प्रस्ताव भेजें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माणाधीन योजनाओं का नियमित अनुश्रवण किया जाए और समयबद्धता के साथ योजनाओं को पूर्ण किया जाए।

बैठक के दौरान विधायकगणों द्वारा सड़क मार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं, जलभराव की समस्या के समाधान, सौंदर्यीकरण के कार्यों, सिंचाई के लिए पानी, ड्रेनेज व सीवरेज की समस्या, तटबंध निर्माण, नालों के निर्माण कार्य एवं अन्य समस्याएं रखी गईं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी समस्याओं के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि टिहरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई 469 घोषणाओं में से 305 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं, शेष घोषणाओं पर कार्य गतिमान है।
मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने सभी सचिवों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकगणों द्वारा अपनी विधानसभा क्षेत्र की जिन समस्याओं से अवगत कराया गया है, उन पर तत्काल कार्यवाही की जाए। घोषणाओं से संबंधित मामलों में कार्यवाही की सूचना संबंधित विधायकगणों और घोषणा प्रकोष्ठ को दी जाए। उन्होंने दोनों मण्डलायुक्तों को निर्देश दिए कि जन समस्याओं के समाधान के लिए विधायकगणों, सचिवों और जिलाधिकारियों के बीच सेतु का कार्य करें।

बैठक में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, विधायक किशोर उपाध्याय, प्रीतम सिंह पंवार, सुरेश सिंह चौहान, शक्ति लाल शाह, सहदेव पुंडीर, सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, दुर्गेश्वार लाल, अवस्थापन अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल.एल फ़ैनई, डॉ.आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, अपर सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री निर्देश के बाद अब पर्यटन विभाग बनाएगा मास्टर प्लान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में प्रमुख सचिव, आरके सुधांशु ने सचिव पर्यटन को सभी धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, प्रवेश- निकास व्यवस्था सहित अन्य जरूरी सुविधाएं जुटाने के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

गत 27 जुलाई को हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में हुई दुखद दुर्घटना के तत्काल बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मौका मुआयना कर, स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए विस्तृत मास्टर प्लान बनाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में मंगलवार को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आरके सुधांशु ने सचिव पर्यटन को आदेश जारी करते हुए, जल्द से जल्द इस दिशा में कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैँ। इसमें खासकर ऐसे तीर्थ स्थलों को शामिल किया जाएगा, जहां ज्यादा तीर्थयात्री आते हैं। मास्टर प्लान के निर्माण और इसके क्रियान्वयन में दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों का विशेष तौर पर सहयोग लेने के लिए कहा गया है। साथ ही स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि यदि तीर्थ स्थलों के मार्गों पर अवैध अतिक्रमण हुआ है तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।

मास्टर प्लान में शामिल होगा
भीड़ नियंत्रण व्यवस्था
धारण क्षमता का विकास
पृथक प्रवेश एवं निकास मार्ग
प्रतीक्षा के लिए अतिरिक्त स्थान
आपातकालीन निकासी व्यवस्था
स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार
सुगठित सूचना एवं मार्गदर्शन प्रणाली
पार्किंग व्यवस्था
पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती

उत्तराखंड में प्रति वर्ष करोड़ों तीर्थ यात्री आते हैं। इसलिए तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सभी तीर्थ स्थलों का मास्टर प्लान बनाया जाएगा। तीर्थ स्थलों के आस पास जनसुविधाएं विकसित करते हुए, यात्रा को ज्यादा सुव्यवस्थित किया जाएगा।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

अंतर्राष्ट्रीय टाइगर दिवसः सीएम धामी ने की घोषणा, टाइगर फोर्स में होगी अग्निवीरों की तैनाती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतर्राष्ट्रीय टाइगर दिवस के अवसर पर घोषणा की है कि कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में स्थापित की जा रही टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में उत्तराखंड के अग्निवीरों को सीधी तैनाती दी जाएगी। टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में 80 से अधिक युवाओं की भर्ती होगी। इस बल का प्राथमिक उद्देश्य बाघों और उनके आवास की सुरक्षा को मजबूत करना है। इससे न केवल बाघ संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलेगी बल्कि अग्निवीर योजना के तहत प्रशिक्षित युवाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का उद्देश्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस फोर्स की स्थापना से वृहद बाघ संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी तथा अवैध शिकार पर रोक लगेगी टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का मुख्य काम बाघों के अवैध शिकार को रोकना होगा। प्रशिक्षित जवान वन क्षेत्रों में गश्त करेंगे, खुफिया जानकारी इकट्ठा करेंगे और शिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। इससे वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण के साथ ही यह फोर्स वन और वन्यजीव से संबंधित अन्य अपराधों जैसे लकड़ी की तस्करी, अवैध खनन और अतिक्रमण पर भी नियंत्रण रखेगी।

मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में भी सहयोगी बनेगी यह फोर्स

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। यह फोर्स वनों की कटाई और उनके आवास को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने में मदद करेगी तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रबंधन में भी सहयोगी बनेगी, उन्होंने कहा कि कई बार बाघ आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष होता है। यह फोर्स ऐसी स्थितियों को संभालने और नियंत्रित करने में प्रशिक्षित होगी, ताकि दोनों पक्षों को नुकसान न हो। इस फोर्स को आधुनिक निगरानी तकनीकों, जैसे ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और जीपीएस ट्रैकिंग से लैस किया जा सकता है, जिससे उनकी दक्षता बढ़ेगी।

बाघ संरक्षण में भारतीय सेना (अग्निवीरों) की भागीदारी

उत्तराखंड के अग्निवीरों की सीधी तैनाती बाघ संरक्षण में भारतीय सेना (या सेना से प्रशिक्षित कर्मियों) की भागीदारी का एक अनूठा उदाहरण है। अग्निवीर भारतीय सेना द्वारा कठोर अनुशासन और प्रशिक्षण से गुजर चुके होते हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से मजबूत और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करता है। यह गुण उन्हें वन गश्त और वन्यजीव अपराधों से निपटने में अत्यधिक प्रभावी बनाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना के जवान रणनीतिक योजना और त्वरित निर्णय लेने में निपुण होते हैं। अग्निवीरों को अक्सर आधुनिक हथियारों और संचार प्रणालियों के उपयोग का ज्ञान होता है, जो उन्हें वन्यजीव संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग करने में सक्षम बनाएगा। अग्निवीर राष्ट्र सेवा की भावना से ओत-प्रोत होते हैं। वन्यजीव संरक्षण भी एक प्रकार की राष्ट्र सेवा है, और यह भावना उन्हें अपने कर्तव्य के प्रति अधिक समर्पित बनाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने से उन्हें क्षेत्र के भूगोल, मौसम और स्थानीय चुनौतियों की बेहतर समझ होगी, जिससे उनका काम और प्रभावी होगा।

यह पहल वृहद बाघ संरक्षण के प्रयासों को देगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व, जो भारत में बाघों के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक है, को अब एक अत्यधिक प्रशिक्षित और समर्पित बल की सुरक्षा मिलेगी। इससे अवैध शिकार की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। अग्निवीरों की भर्ती से स्थानीय समुदाय भी संरक्षण प्रयासों में शामिल होगा, जिससे एक सकारात्मक माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य बाघ अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों में भी दोहराया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह घोषणा बाघ संरक्षण के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता दर्शाती है यह कदम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व और उत्तराखंड में बाघों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं में मंडलायुक्त होंगे नोडल अधिकारीः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने को सचिवालय स्थित अपने सभागार में प्रदेश के महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबन्धन आदि के सम्बन्ध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि हरिद्वार के मनसा देवी में श्रद्धालुओं में हुई भगदड़ जैसी घटनाओं पर काबू पाने के लिए प्रदेश के ऐसे सभी धार्मिक स्थलों, जहाँ महत्त्वपूर्ण दिवसों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ जैसी घटनाओं की आशंका बनी रही है, को चिन्हित कर उन में अंशकालिक एवं दीर्घकालिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि धार्मिक स्थलों के मार्गों में सार्वजनिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त कर मार्गों का चौड़ीकरण कराया जाए। मार्गों से अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार अभियान चलाए जाएं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों में भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक का प्रयोग भी किया जाए। कहा कि धार्मिक स्थलों में अत्यधिक भीड़ होने पर मार्गों में श्रद्धाओं को रोके जाने हेतु स्थल तैयार किए जाएँ।

मुख्य सचिव ने कहा की प्रत्येक धार्मिक स्थल के लिए रूट और सर्कुलेशन प्लान तैयार किया जाए, ताकि धार्मिक स्थलों में अचानक भीड़ ना हो। भीड़ होने की संभावना को देखते हुए श्रद्धालुओं को रोके जाने के लिए पूर्वनिर्धारित स्थानों में रोका जाए। मुख्य सचिव ने श्रद्धालुओं की संख्या का आंकलन करने के लिए तकनीक का उपयोग करते हुए भीड़ प्रबंधन तंत्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी प्रकार की भौतिक एवं तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्य सचिव ने अधिक महत्त्वपूर्ण मंदिरों को प्राथमिकता पर लेते हुए पहले चरण में मनसा देवी, चण्डी देवी, नीलकंठ, कैंचीधाम और पूर्णागिरि मंदिर का विशेषज्ञों के माध्यम से विश्लेषण करा लिया जाए। स्थानीय प्रशासन एवं धार्मिक स्थलों के हितधारकों को विशेषज्ञों की टीम को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह विशेषज्ञों की टीम मंदिर क्षेत्र का विश्लेषण कर भीड़ प्रबंधन, निकासी योजना और बॉटल नेक एरिया के लिए सिविल इंजीनियरिंग और तकनीकी पहलुओं का परीक्षण कर विभिन्न जगहों पर रुकने के स्थान आदि के लिए एक प्रॉपर प्लान और प्रॉपर एसओपी तैयार करेगी।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु सचिव शैलेश बगौली, धीराज सिंह गरब्याल, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में माध्यम से कमिश्नर कुमायूँ दीपक रावत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंडः अब दिव्यांग पेंशन योजना हुई सरलीकृत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई घोषणा के अनुपालन में समाज कल्याण विभागान्तर्गत संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना की भांति दिव्यांग पेंशन योजना को भी सरलीकृत किया गया है, प्रदेश में दिव्यांग पेंशन धारकों के हित में मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा की गई थी कि वृद्धावस्था पेंशन योजना की तरह ही दिव्यांग पेंशन योजना को सरलीकृत करते हुए ऐसे समस्त दिव्यांग भी पेंशन हेतु पात्र होंगे जिनके पुत्र/पौत्र 20 वर्ष से अधिक आयु के होंगे, का क्रियानयन सुनिश्चित किया जाय।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में सचिव समाज कल्याण डॉ0 श्रीधर बाबू अद्दांकी द्वारा निदेशक समाज कल्याण को संबोधित पत्र में निर्देश दिये गये है कि राज्य में दिव्यांग पेंशन योजनान्तर्गत ऐसे लाभार्थी, जो निर्धारित मासिक आय सीमा रू0 4000/- की पात्रता पूर्ण करते हो, के पुत्र / पौत्र 20 वर्ष से अधिक आयु के होने पर भी पेंशन हेतु पात्र होंगे। इसके अतिरिक्त बी०पी०एल० श्रेणी के लाभार्थी, जिनके पुत्र/पौत्र 20 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं, भी पेंशन हेतु पात्र होंगे। उन्होंने इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किये जाने की भी अपेक्षा की है।

सीएम ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किया पौधरोपण, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी स्थित एफटीआई परिसर में आयोजित ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान को पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनने का प्रेरणादायक संदेश दिया।

प्रकृति संरक्षण हमारा संकल्प, हरेला पर्व पर रोपे गये 8 लाख से अधिक पौधे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की शुरुआत गत वर्ष की गई थी, और इस वर्ष भी यह अभियान पूरे देश में उत्साहपूर्वक चलाया जा रहा है। उत्तराखंड में इस अभियान का विधिवत शुभारंभ हरेला पर्व के अवसर पर किया गया, जिसमें पहले ही दिन रिकॉर्ड 8,13,000 लोगों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सहभागिता दर्ज की। मुख्यमंत्री ने कहा कि “प्रकृति संरक्षण हमारा संकल्प है” और देवभूमि उत्तराखंड में यह अभियान पूरे एक माह तक जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस पवित्र सावन मास में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अवश्य लगाएं और प्रकृति संरक्षण में अपना योगदान दें।

मनसा देवी हादसे पर की संवेदना व्यक्त।

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में हाल ही में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा तत्परता से आवश्यक निर्णय लिए गए हैं। प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलोंकृजहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री दर्शन हेतु आते हैंकृवहां व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इनमें श्रद्धालुओं की केयरिंग कैपेसिटी के अनुसार प्रवेश, स्थान का संभावित विस्तार, पार्किंग एवं ट्रैफिक प्रबंधन, और सुरक्षा मानकों के पालन को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मनसा देवी मंदिर सहित प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर यह व्यवस्थाएं सख्ती से लागू की जाएंगी।

शहरी क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण को लेकर प्रशासन द्वारा सख्ती बरती जा रही है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गये हैं कि वे अवैध कब्जों की पहचान कर उन्हें तत्काल हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम न केवल सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि विकास परियोजनाओं की गति बनाए रखने और नागरिकों को सुचारु सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, दायित्व धारी दिनेश आर्य, दीपक मेहरा, जिला अध्यक्ष भाजपा प्रताप बिष्ट, डॉ. जोगेन्दर पाल सिंह रौतेला, मजहर नईम नवाब, हुकुम सिंह कुंवर, आयुक्त/सचिव मा. मुख्यमंत्री दीपक रावत, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी वंदना सिंह, निदेशक एफटीआई तेजस्विनी अरविंद पाटिल के साथ ही अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

जैविक उत्पादों पर फोकस कर जैविक उत्पादों का सर्टिफिकेशन अनिवार्य रूप से प्राप्त होः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में हाउस ऑफ़ हिमालयाज की 5वीं बोर्ड बैठक सम्पन्न हुई। बैठक के हाउस ऑफ़ हिमालयाज के नए उत्पादों की समीक्षा और वैश्विक विस्तार की रणनीति तय की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि हाउस ऑफ़ हिमालयाज की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा जैविक उत्पादों पर फोकस करते हुए जैविक उत्पादों का सर्टिफिकेशन अनिवार्य रूप से प्राप्त किया जाना सुनिश्चित किया जाए। आमजन को इसकी जानकारी हो इसके लिए प्रचार प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्य सचिव ने उत्पादों की गुणवत्ता, ट्रेसेब्लिटी और ब्रांड स्टोरीटेलिंग को वैश्विक स्तर पर ब्रांड उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हाउस ऑफ़ हिमालयाज को अपने उत्पादों में QR कोड के साथ ट्रेसिबिलिटी को शामिल करना होगा।

बैठक की शुरुआत कंपनी की ब्रांड अवधारणा के साथ हुई — “ब्रांड उत्तराखंड को वैश्विक मंच पर हिमालयी कृषि एवं गैर-कृषि उत्पादों के प्रीमियम पोजिशनिंग के माध्यम से सशक्त बनाना।” दिसंबर 2023 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च की गई हाउस ऑफ हिमालयाज ने कम समय में ₹2.1 करोड़ की बिक्री के साथ एक प्रेरणादायक ब्रांड के रूप में पहचान बनाई है। इससे 3,000 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष आजीविका भी मिली है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव राधिका झा, दिलीप जावलकर, डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम, डॉ वी षणमुगम, धीरज सिंह गरब्याल, पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पाण्डे, पूर्व निदेशक LBSNA संजीव चोपड़ा, कुलपति UPSE रामके शर्मा एवं एमडी हाउस ऑफ़ हिमालयाज झरना कामठान सहित आया वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

🔹 मुख्य उपलब्धियाँ:
कुल बिक्री: ₹2.1 करोड़ (आरंभ से अब तक), ई-कॉमर्स (Amazon, Blinkit, JioMart), मॉडर्न ट्रेड (Nature’s Basket) और 26 प्रीमियम स्थानों पर भौतिक उपस्थिति।
उत्पाद पोर्टफोलियो: 50+ स्टॉक कीपिंग यूनिट्स जिनमें प्राकृतिक, हर्बल और जैविक उत्पाद शामिल हैं।
महिला सशक्तिकरण: 40+ सामुदायिक संस्थाओं से संग्रहण, 3,000+ महिलाओं को सीधा लाभ।

🔹 प्रमुख मील के पत्थर:
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट का उद्घाटन मई 2025 में माननीय केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया।
11 प्रीमियम होटलों व यात्रा स्थलों पर रिटेल कार्ट्स की स्थापना।
13 FSUs (फ्लोर स्टैंडिंग यूनिट्स) चारधाम यात्रा मार्ग, एयरपोर्ट्स और प्रमुख संस्थानों जैसे LBSNAA में क्रियाशील।

🔹 बोर्ड मीटिंग में चर्चा के केंद्र में:
नए उत्पाद विकास (NPD) पर विशेष फोकस दिया गया, जिसमें निम्नलिखित 15+ नवीन उत्पाद शामिल हैं:

एसेंशियल ऑयल्स: लेमनग्रास, रोज़मेरी, मिंट, लैवेंडर
हर्बल इन्फ्यूजन: कैमोमाइल, बद्री तुलसी, सी-बकथॉर्न
हिमालयी स्पेशलिटी उत्पाद: कनार घी, प्राकृतिक रंगों से तैयार ऊनी stole, सिंहाड़ा कुकीज, बासमती चावल, पहाड़ी अंजीर जैम आदि।

🔹 भविष्य की योजना:
घरेलू विस्तार: दिल्ली-NCR, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों में Reliance Freshpik, Le Marche, Food Square के माध्यम से।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म: BigBasket और Zepto पर ऑनबोर्डिंग।

वैश्विक रणनीति:
अमेरिका में Apna Bazaar के माध्यम से लॉन्च
Amazon Global (UAE, USA) पर उपस्थिति
MEA के माध्यम से दूतावासों और उच्चायोगों से सहयोग
Box of India के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में प्रवेश
लक्ष्य: FY 2025–26 तक ₹10 करोड़ और FY 2026–27 तक ₹25 करोड़ की बिक्री।

🔹 शासन और संगठनात्मक मजबूती:
अप्रैल 2024 में कंपनी का गठन और ₹10 करोड़ की पूंजी जुटाई गई।
वित्तीय एवं प्रशासनिक नियमों को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया।
22 प्रमुख पदों की भर्ती हेतु संरचना तैयार, प्रक्रिया प्रगति पर।
22 ट्रेडमार्क्स के लिए पंजीकरण कराया गया, जिनमें से 11 को स्वीकृति मिल चुकी है।
हाउस ऑफ हिमालयाज अपने मजबूत गवर्नेंस, उद्योग विशेषज्ञों से परामर्श (McKinsey, Fab India, Organic India, APEDA) और बहु-चैनल बिक्री रणनीति के माध्यम से राज्य-नेतृत्व वाले उत्पाद ब्रांडिंग के क्षेत्र में देश का एक अनूठा मॉडल बनकर उभर रहा है।