उत्तराखंड में कराए गये विकास कार्यों की बदौलत फिर प्रचण्ड बहुमत से सरकार बनाएगी भाजपाः कैंथोला

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता बिपिन कैंथोला ने कहा कि अपने लगभग 4 वर्षों के कराए गए विकास कार्यों की बदौलत उत्तराखंड में भाजपा प्रचंड जीत के साथ फिर से सरकार बनाएगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार ने अभूतपूर्व विकास कार्य कराए हैं। इन्हीं कामों और उपलब्धियों से उत्तराखंड की जनता का भाजपा में दिन-प्रतिदिन भरोसा और मजबूत हुआ है। उंन्होने कहा कि आज प्रदेश में आलवेदर रोड जैसी महत्वकांक्षी परियोजना चल रही है। पहाड़ में पहाड़वासियों का सपना था कि पहाड़ों पर ट्रेन पहुंचे। आज कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार चारों धामों को ट्रेन से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। गंगोत्री-यमुनोत्री के बाद अब बद्री-केदार धाम को भी ट्रेन से जोड़ने का सर्वे पूरा कर रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है।

उन्होंने आज प्रदेश में हर गांव को सड़क से जोड़ा गया है। हर घर नल योजना पर तेजी से काम चल रहा है। लोगों को एक रुपये में कनेक्शन दिया जा रहा है। अटल आयुष्मान योजना से राज्य के हर परिवार को जोड़ा गया है। कैंथोला ने कहा कि प्रदेश में अनेकों जनकल्याणकारी योजनाओं से राज्य के लोगों को सीधे लाभ पहुंचाने का काम प्रदेश की सरकार ने किया है। कैंथोला ने कहा कि कांग्रेस के आला नेता उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार के विकास कार्यों को देखकर बौखला गए है। जिस कारण वो सोशल मीडिया में लड़कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। आज उंन्होने कांग्रेस के राजभवन कूच पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह साबित हो गया है कि कांग्रेस को अब संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं रहा है। वह आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते देश की संवैधानिक संस्थाओं का ही विरोध करने लगी है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विपिन कैंथोला ने कांग्रेस के अंदरूनी घमासान पर चुटकी भरे अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 2017 के चुनाव में अपना अस्तित्व गंवाकर 11 सीटों पर सिमट चुकी कांग्रेस अपनी लाइन भटक चुकी है। वहां आज नेताओं को केवल मुख्यमंत्री के चेहरे की होड़ में शामिल होने का काम रह गया है।

हरीश रावत को हारों का हार पहनने की चिंता सता रहीः वंशीधर भगत

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों अजीब सी उलझन के शिकार हो गए हैं। उन्हें हारों (पराजय) का हार पहनने की चिंता सता रही है। कहा कि कभी विपक्ष को लोकतंत्र का कहकहा सिखाने वाले रावत अब विधायको के बिखराव और टूट को लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत बता रहे है।

पूर्व सीएम हरीश रावत के बयान का पलटवार करते हुए वंशीधर भगत बोले, हरीश रावत परिस्थितियों को अपने हिसाब से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पार्टी की रणनीति का हिस्सा रावत को नहीं बना रहे है और रावत की हालात खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे जैसी हो गयी है। रावत की बेचैनी को इससे भी समझा जा सकता है की वह टूट के सूत्रधार नेता को भी शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करने को तैयार है।

भगत ने कहा कि हरीश रावत की मनमानी और तानाशाही के कारण प्रदेश में राजनैतिक अस्थिरता का वातावरण जनता ने देखा और इसका असर प्रदेश के विकास पर पड़ा है। वह एक बार फिर प्रदेश में राजनैतिक अस्थिरता को हवा देने का जो दिवास्वप्न देख रहें हैं, वह पूरी तरह निराधार है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा एकजुट है और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में विकास कार्यो की बदौलत पार्टी दोबारा सत्ता में आएगी। भाजपा में टूट का जो सपना कांग्रेस देख रही है वह कभी साकार नही हो पाएगा। बेहतर होगा कि अपने अस्तित्व के लिए तरस रही कांग्रेस अपने बचे-खुचे कुनवे के बारे में सोचे और दूसरे घरो में ताक झांक करना बन्द करे।

कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार कर गये नड्डा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा उत्तराखंड में अपना चार दिवसीय प्रवास पूरा कर सोमवार को लौट गए। जाने से पहले वह संगठन और सरकार को खास पांच मंत्र दे गए। तीन दिन चली मैराथन बैठकों में शीर्ष नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ताओं से हुए संवाद में उन्होंने साफ किया कि 2022 और 2024 में मिशन इलेक्शन का लक्ष्य हिंदुत्व कार्ड, मोदी मैजिक, मजबूत और सक्रिय सांगठनिक नेटवर्क, निरंतर प्रवास और सहज आचरण से ही सधेगा।
ये सारी बातें नड्डा के विचारों और आचरण से बार-बार सामने आई। अपने 120 दिन के देशव्यापी प्रवास की शुरुआत उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड से यूं नहीं की। कुंभनगरी हरिद्वार के गंगा तट हर की पौड़ी से प्रवास की शुरुआत के विशेष निहितार्थ हैं। बेशक नड्डा कहें कि यह उनकी दिली इच्छा थी, लेकिन सियासी जानकार इसे आरएसएस और भाजपा का हिंदुत्व एजेंडा मानते हैं। नड्डा ने गायत्री परिवार के संचालक उन प्रणव पंड्या से मुलाकात की, जिनकी संस्था के देश दुनिया में करीब 20 करोड़ अनुयायी हैं। 
उत्तराखंड में राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर प्रवास अमित शाह ने भी किया था। शाह के दौरे के अनुभव के आधार पर पार्टी नेताओं ने नड्डा के दौरे को लेकर उसी तरह की धारणाएं बनाई थी, लेकिन शाह के आक्रामक रुख से जुदा नड्डा ज्यादा सहज और संतुलन साधते नजर आए।

अनुभवी और हिमाचली होने के फायदा
उनकी बातों ने सरकार और संगठन दोनों को सहज किया। कोविडकाल की बंदिशों के बीच पार्टी नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं से उन्होंने जितना भी संवाद बनाया, उसमें उन्होंने निरंतर प्रवास पर फोकस किया। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर शक्ति केंद्र के मुखिया और उसकी टीम को निरंतर प्रवास करने की सलाह दी। बदलती राजनीतिक चुनौती से मुकाबला करने के लिए उन्होंने सांगठनिक नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया। उनका मानना था कि भाजपा को रोकने के लिए सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर लड़ेंगे, लिहाजा पार्टी को उसी हिसाब से तैयारी करनी है। इसके लिए उन्होंने अपना एजेंडा तय करने का मंत्र दिया।
नड्डा का यह मंत्र पीएम मोदी के नेतृत्व कौशल, केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की चाशनी में लिपटा है, जिसे जन जन के कान में फूंकने की उनकी योजना है। इससे साफ हो गया कि प्रदेश में पार्टी के शीर्ष नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ता की जुबान पर मोदी ही नजर आएंगे। सांगठनिक नेटवर्क की रीढ माने जाने वाले जमीनी कार्यकर्ता के बीच भी उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि संगठन नेतृत्व के जेहन में उनका सबसे ज्यादा ख्याल है। जिला, मंडल और बूथ अध्यक्ष के साथ मंच साझा करना इसी रणनीति का हिस्सा माना गया। साथ ही इसे प्रदर्शित करके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सहजता का संदेश भी दिया। 
राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रवास के दौरान पहाड़ के मर्म पकड़ पाए। उन्होंने कहा भी, मैं पहाड़ी हूं, इसलिए पहाड़ का दर्द खूब समझता हूं। उन्होंने पहाड़ पर महिलाओं के संघर्ष को बयान किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ हिमाचल का हो या उत्तराखंड का, संघर्ष दोनों ही जगह समान है। साथ ही उन्होंने मोदी सरकार की उज्ज्वला और सौभाग्य योजनाओं का जिक्र किया, कहा कि दोनों योजनाओं ने पहाड़ के लोगों और महिलाओं का संघर्ष कम किया है।

सुरेश भट्ट की एंट्री से कई भाजपाई बेचैन

भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने सुरेश भट्ट को भाजपा उत्तराखंड का प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया है। बंशीधर भगत ने आशा व्यक्त की है कि सुरेश भट्ट के प्रदेश महामंत्री बनने से उत्तराखंड में संगठन को और गति मिलेगी व उनके अनुभव का लाभ प्रदेश भाजपा को प्राप्त होगा।
भाजपा मीडिया प्रभारी डॉ देवेंद्र भसीन ने बताया कि उत्तराखंड भाजपा में प्रदेश महामंत्री के तीन पद हैं। इनमें से एक पद बंशीधर भगत के अध्यक्ष रूप में पद ग्रहण करने व उनके द्वारा प्रदेश पदाधिकारियों व कार्यसमिति की घोषणा के बाद से ही रिक्त चल रहा था। इस रिक्त पद प्रदेश अध्यक्ष द्वारा सुरेश भट्ट की नियुक्ति की गई है। सुरेश भट्ट इससे पहले हरियाणा में भाजपा प्रदेश महामंत्री (संगठन) थे।
बतातें चले कि सुरेश भट्ट की एंट्री से प्रदेश भाजपा के कई नेताओं में भी हलचल देखी जा रही है। खासतौर से संघ के वो चेहरे जो आज भाजपा में बड़ा नाम बन चुके है। उनमें बैचेनी देखने को मिल रही है। अपने भविष्य को लेकर अब वह आंशकित देखे जा रहे है। गौरतलब है कि संघ के चेहरे के रुप में त्रिवेन्द्र सिंह रावत अभी वर्तमान में मुख्यमंत्री है। दूसरी लाइन के नेता भी भविष्य में मुख्यमंत्री का ख्वाब संजोये हुए थे। जो सुरेश भट्ट के आने के बाद धूमिल होती नजर आ रही है। मोदी के करीबी नेताओं में सुरेश भट्ट का नाम आता है। जाटलैंड यानि की हरियाणा में भाजपा की पकड़ बनाने में सुरेश भट्ट का महत्वपूर्ण योगदान है।

कांग्रेस प्रदेशभर में धरना देकर कर रही नौटंकी, अपना इतिहास देखेंः विपिन कैंथोला

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता बिपिन कैंथोला ने कहा कि कांग्रेस का आज का प्रदेश भर में किया जा रहा प्रदर्शन महज एक धोखा और छलावा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने इस देश में सीधेतौर पर 55 साल तक राज किया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए 55 सालों में कांग्रेस ने दलितों को केवल वोट बैंक के रूप में देखा और उनका उपयोग किया।
कैंथोला ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में दलितों के उत्थान के लिए कोई नीति नहीं बनाई। नतीजा यह रहा कि दलित समाज हमेशा पिछड़ता चला गया। उनके उत्थान के लिए जो काम किए जाने चाहिए थे। कांग्रेस ने उनके उत्थान की योजनाएं बनाने के बजाय दलितों की हमेशा उपेक्षा की।
बिपिन कैंथोला ने कहा कि जो पार्टी अपने दल में ही दलितों को उचित स्थान नहीं देती हो। वह आज पूरे प्रदेश में दलितों के समर्थन में प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से छलावा करती आई और यही वजह है कि कांग्रेस को इस तरह के प्रदर्शनों का नैतिक अधिकार नहीं हैं।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया नए प्रदेश कार्यालय का वर्चुअल शिलान्यास

भाजपा का प्रांतीय कार्यालय 50 वर्ष आगे के हिसाब से बनाया जाएगा। देशभर में पार्टी कार्याकर्ताओं के सहयोग से कार्यालय बनाए जा रहे है। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कही। उन्होंने नई दिल्ली से उत्तराखंड के नए भाजपा कार्यालय का वर्चुअल शिलान्यास किया। मौके पर उन्होंने विपक्ष की टांग खींची।

उन्होंने कहा कि एक पार्टी का कार्यालय राजनेता के निवास स्थान से संचालित होता है तो इसका मतलब है कि पार्टी उस व्यक्ति की है। पर अन्य दलों के लिए ऐसा नहीं है। उनके मामले में परिवार पार्टी बन गया है। मगर, भाजपा के लिए पार्टी ही हमारा परिवार है।

कहा, कांग्रेस हो या कोई भी क्षेत्रीय पार्टी। सभी भाई-बहन, मां-बेटे की रक्षा करने में व्यस्त हैं। कहीं तो भतीजों के साथ अनबन चल रही है। परिवार ही उनके लिए पार्टी बन चुका है। देहरादून में कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा के प्रदेश अध्घ्यक्ष बंशीधर भगत, सांसद तीरथ सिंह रावत, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत आदि मौजूद थे। दिल्ली से राष्घ्ट्रीय अध्घ्यक्ष के साथ केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद अजय भट्ट और अजय टम्टा, राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी आदि मौजूद रहे।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का नया प्रदेश कार्यालय खड़ा हो जाएगा, जो आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस होगा।

सरकार के साथ मिलकर संगठन ने लिया निर्णय, चार माह के कार्यक्रम तय

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सरकार और संगठन की समन्वय बैठक आयोजित हुई। बैठक में कोविड-19 के दृष्टिगत सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को सरकार द्वारा जनहित में किए गए निर्णयों की जानकारी होनी आवश्यक है। सरकार के सवा तीन साल के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन निर्णयों को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार और संगठन की संयुक्त रूप से है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता से जुड़े कल्याणकारी कार्यक्रमों को समयबद्ध और प्रभावी रणनीति के साथ जनता तक पहुंचाने की जरूरत है। इसमें सभी लोगों का सहयोग लिया जाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि संगठन के निचले स्तर से लेकर ऊपर तक पदाधिकारियों और विधायकों व दायित्वधारियों को सरकार की उपलब्धियों और उनके विधानसभा क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों की जानकारी हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की है। इसमें स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, प्रवासियों को स्वरोजगार के प्रयास, गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त राशन, मनरेगा में मजदूरी को बढ़ाने, अटल आयुष्मान का दायरा बढाकर प्रदेश के बाहर के नामी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिए जाने, स्वरोजगार के लिए आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है ऐसे प्रवासियों के लिए भी सस्ते दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने सहित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
बैठक में राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास और जनहित के कार्यों को वर्चुवल कान्फ्रेंस और वर्चुवल मीटिंग के जरिए जनता तक पहुंचाने का भी निर्णय लिया गया, इसके लिए सांसद, मंत्रियों और पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सांपी गई। प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत, मेयर सुनील उनियाल गामा, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, महामंत्री राजू भंडारी व कुलदीप कुमार भी उपस्थित थे।

त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड से किया वादा निभायाः बंशीधर भगत

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर समय राजनीति करती है। अच्छे निर्णयों को लेकर जहां कांग्रेस को सरकार की पीठ थपथपानी चाहिए। कांग्रेस वहां भी लोगों को गुमराह करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण सवा करोड़ उत्तराखण्डियों की भावनाओं में है। प्रदेश के सभी लोग चाहते हैं कि गैरसैंण को लेकर जो सपना हमारे राज्य आंदोलनकारियों ने देखा था, वो आज पूरा हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी गैरसैंण को लेकर सदैव सकारात्मक रही है, यही वजह है कि हमारे घोषणापत्र में गैरसैंण प्रमुखता से था। मुझे खुशी है कि त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार ने उत्तराखण्ड के लोगों से किया वादा निभाया है। मैं प्रदेश सरकार, राज्य के समस्त जनता और आंदोलनकारियों को बहुत बहुत बधाई देता हूँ।
बंशीधर भगत ने कहा कि गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्म राजधानी ऐसे समय बनाया गया है, जब न तो चुनाव हैं, न किसी तरह की मजबूरी है। हमारी पार्टी के प्रयास होता है कि जनभावनाओं को सर्वोपरि रखा जाय, उसी दिशा में ये कदम बढ़ाया गया है।
उत्तराखण्ड के सृजन से लेकर अब तक भाजपा की सरकारों ने इस पर्वतीय प्रदेश के लिए दिल खोलकर, बिना नफा नुकसान की परवाह किये काम किया है। याद कीजिये उत्तराखण्ड का सृजन स्व. अटल जी ने ही किया था। यही नहीं प्रदेश में आज जो औद्योगिक ढांचा है उसके लिए अटल जी की सरकार ने ही विशेष पैकेज दिया था, हालांकि बदकिस्मती से कांग्रेस की सरकार ने इस विशेष पैकेज को खत्म कर दिया था। आज के दौर में भी मोदी जी का उत्तराखण्ड के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। ऑल वेदर रोड, पहाड़ पर रेल लाइन, केदारपुरी का कायाकल्प, ये सारे काम भाजपा की सरकारों द्वारा ही संभव थे। गैरसैंण को ग्रीष्म राजधानी घोषित करना भी इसी विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 
मगर ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। कांग्रेस की सरकारों ने 10 साल राज किया लेकिन गैरसैंण पर कोई ठोस फैसला नहीं ले पाए, और जब भाजपा की सरकार ने ये ऐतिहासिक कदम उठाया तो कांग्रेस जनता को गुमराह करने लगी है। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस नेतृत्व से पूछता हूँ, आखिर जब सरकार में थे तब क्यों सोए रहे? तब आपने जनभावना का अपमान क्यों किया? सच तो ये है कि कांग्रेस चाहती है नहीं है कि गैरसैंण की तरफ कदम आगे बढ़ाए जायँ, हां इनके नेता ढोंग करने, धरना देने जरूर वहां पहुंच जाते हैं। और जब जनभावनाओं के सम्मान की बात आती है तो ये पीछे हट जाते हैं।

भाजपा की टीम में विधानसभा चुनाव की दिखी झलक

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने अपनी टीम का एलान कर दिया है। भगत की टीम में उनके और प्रदेश संगठन महामंत्री समेत कुल 28 पदाधिकारी हैं। उनकी टीम में 26 नए पदाधिकारी शामिल हुए हैं। इनमें आठ प्रदेश उपाध्यक्ष, दो प्रदेश महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष, आठ प्रदेश मंत्री, एक कार्यालय सचिव और छह प्रदेश प्रवक्ता शामिल हैं। तीन विधायकों को भगत की टीम में जगह मिली है। प्रदेश सरकार के किसी भी दायित्वधारी को टीम में शामिल नहीं किया गया है। 16 पदाधिकारियों की दोबारा टीम में जगह मिली है।
इन्हें मिली जिम्मेदारी
प्रदेश उपाध्यक्षः खजान दास (विधायक), पुष्कर सिंह धामी (विधायक), अनिल गोयल, राजकुमारी गिरी, कुसुम कंडवाल, देवेंद्र भसीन, खिलेंद्र चैधरी
प्रदेश महामंत्रीः अजय कुमार (प्रदेश संगठन महामंत्री), राजेंद्र भंडारी व कुलदीप कुमार
कोषाध्यक्षः पुनीत मित्तल
प्रदेश मंत्रीः बलबीर घुनियाल, पुष्कर सिंह काला, आशीष गुप्ता, राजेंद्र बिष्ट, आदित्य चैहान, नीरू देवी, मधु भट्ट, किरण देवी
प्रदेश कार्यालय सचिवः कौस्तुभानंद जोशी
प्रदेश प्रवक्ताः सुरेश जोशी, विनय रूहेला, विनय गोयल, नवीन ठाकुर, प्रकाश रावत, विनोद सुयाल
क्षेत्रीय असंतुलन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तुलना में प्रदेश भाजपा की टीम बहुत छोटी है। लेकिन टीम में वरिष्ठता, अनुभव, जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर चेहरों को जगह दी गई है। टीम में तीन महिला नेताओं को दायित्व सौंपा गया है। हालांकि क्षेत्रीय संतुलन के हिसाब से उसमें अभी विस्तार की गुंजाइश है। प्रदेश पदाधिकारियों की सूची में हरिद्वार, उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग जिले को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
मोर्चों की कमान
भाजपा युवा मोर्चाः कुंदन लटवाल (अध्यक्ष पद पर बरकरार)(अल्मोड़ा)
भाजपा महिला मोर्चाः ऋतु खंडूड़ी, विधायक यमकेश्वर (जनरल बीसी खंडूड़ी की सुपुत्री)(पौड़ी)
अनुसूचित जाति मोचाः अंबादत्त आर्य (नैनीताल)
अनुसूचित जनजाति मोचाः राकेश राणा (ऊधमसिंह नगर)
किसान मोर्चाः अनिल चैहान (यूएस नगर)
पुराने नेताओं को जीवित करेंगे
वहीं अब इसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का नया अभियान पार्टी के पुराने और उदासीन नेताओं को एक्टिव करने का होगा। यह अभियान वे छह अप्रैल से शुरू करेंगे।
इस अभियान के दौरान वे पुराने नेताओं के पास जाएंगे और उनसे सांगठनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करेंगे। उनके पास पुराने खांटी नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी देने का एक प्लान भी है। इस अभियान में पार्टी के सभी पदाधिकारियों की भूमिका तय होगी।
संगठन की कमान संभालने के बाद से ही भगत पूरे प्रदेश के दौरा कर रहे हैं। भ्रमण के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता किसी न किसी कारण से उदासीन हैं। वे भाजपा की विचारधारा से गहरे तक तो जुड़े हैं लेकिन पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं हो रहे हैं। हालांकि सांगठनिक और चुनावी रणनीति के लिहाज से वे 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए काफी अहम हो सकते हैं।
प्रदेश की तकरीबन हर विधानसभा का दौरा पूरा करने के बाद भगत ने अब पुराने व उदासीन नेताओं के दरवाजे पर दस्तक देने का फैसला किया है। भगत छह अप्रैल से इस अभियान की शुरुआत करेंगे।
उनके नेतृत्व पार्टी के पदाधिकारियों की टीम फील्ड में उतरेगी और पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क साधेगी। उनकी कुशलक्षेम भी लेगी। अभियान के दौरान वरिष्ठ नेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। उनसे नियमित मुलाकातों के भी कार्यक्रम बनेंगे, जिससे वे खुद को अलग थलग महसूस न करें और खुद को हर क्षण पार्टी से जुड़ा हुआ महसूस करें।