सीएम के मार्गदर्शन में घनघोर अंधकार से शिक्षा उजाले की ओर, डीएम दून की सार्थक पहल

जिले में संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC), जहां भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चों का माइंड रिफॉर्मेशन कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, अब शैक्षणिक शोध एवं सामाजिक अध्ययन का केंद्र भी बनता जा रहा है। देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के छात्र-छात्राएं यहां भ्रमण कर न केवल शोध कार्य कर रहे हैं, बल्कि बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

इसी क्रम में IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के 12 छात्र-छात्राओं ने डॉ. सुरेन्द्र यादव (सहायक प्रोफेसर) के नेतृत्व में इंटेंसिव केयर सेंटर का भ्रमण किया और बच्चों के साथ संवाद स्थापित किया।
इस अवसर पर ICC के बच्चों ने अतिथियों का स्वयं के हाथों से बनाए गए स्वागत कार्ड एवं सुंदर स्वागत नृत्य के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया। इस सहभागिता से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, प्रस्तुति कौशल एवं टीमवर्क के सकारात्मक विकास की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
यह पहल न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि समाज और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवेदनशील साझेदारी का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भिक्षावृत्ति, बालश्रम एवं कूड़ा बीनने जैसी परिस्थितियों से रेस्क्यू किए गए बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेलकूद एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

परिस्थितियों की मार झेल रहे, सड़कों पर बिखरे बचपन से भिक्षा का कटोरा छीनकर शिक्षा की कलम सौंपने का यह मानवीय प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहा है। जिला प्रशासन का यह इंटेंसिव केयर सेंटर आज आशा की किरण बन चुका है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए 27 बच्चों को इंटेंसिव केयर सेंटर से विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया।

अब तक भिक्षावृत्ति, बालश्रम एवं कूड़ा बीनने में संलिप्त कुल 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 154 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।

दिसंबर 2024 से संचालित इस अभियान के अंतर्गत साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में बच्चों को रखा गया। इनमें 83 बच्चे भिक्षावृत्ति, 117 बच्चे कूड़ा बीनने तथा 67 बच्चे बालश्रम से रेस्क्यू किए गए।

बच्चों को शिक्षा से जोड़ने हेतु इंटेंसिव केयर सेंटर में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाया गया। जिलाधिकारी के प्रयासों से यहां पढ़ाई की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, खेल, व्यायाम, मनोरंजन एवं काउंसलिंग की सुविधाएं प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त बच्चों के आवागमन के लिए विशेष कैब सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।

इस संपूर्ण कार्यक्रम की जिलाधिकारी द्वारा नियमित एवं व्यक्तिगत मॉनिटरिंग की गई। मानसिक रूप से सशक्त किए जाने के उपरांत 154 बच्चों का चरणबद्ध तरीके से विभिन्न सरकारी विद्यालयों में दाखिला कराया गया है।
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि
“शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “भिक्षावृत्ति निवारण अभियान पूर्ण सेचुरेशन तक निरंतर जारी रहेगा। रुकना कोई विकल्प नहीं है।

विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ: शेखावत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का साक्षात भावात्मक अभिव्यक्ति है। माताजी का संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को सही दिशा और नई दृष्टि दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता, यह उस युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की ओर अग्रसर करता है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पावन परिवेश में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा राज्य में समान नागरिक संहिता लागू किया गया है। सख्त दंगारोधी कानून एवं धर्मांतरण कानून भी लाया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 हजार एकड़ से अधिक अवैध अतिक्रमण को हटाया गया है।

केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ल गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार के त्रिवेणी संगम यह शताब्दी समारोह नवयुग का निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है। जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है, बल्कि यह युगऋषि पूज्य आचार्यश्री का “खोया-पाया विभाग” है, जहाँ व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य किसी के द्वार पर खड़ा होकर प्रतीक्षा नहीं कर रहा, वरन् यह आयोजन स्वयं आपके सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए कहा कि “गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा। कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा।” उन्होंने जनसमूह से आत्मपरिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन की प्रथम शर्त बताते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करता है, तभी राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण की नींव सशक्त होती है। शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी इसी चेतना को जाग्रत करना है, ताकि विचार, आचरण और कर्म के स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव हो सके।

शताब्दी समारोह के अवसर पर पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री विनय रुहेला, सुदर्शन न्यूज के प्रबंध निदेशक सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक राजेश्वर सिंह सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने विशिष्ट अतिथियों सहित न्यायाधीश परविन्दर सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी सम्पूर्णानंद जी, स्वामी वेलु बापू जी,के नारायण राव,रमेश भट्ट,दिनेश काण्डपाल, आचार्य डॉ दयाशंकर विद्यालंकार, आदि को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष की माला तथा युग साहित्य आदि भेंट कर सम्मानित किया गया।

राजा दक्ष की नगरी कनखल के वैरागी द्वीप की भूमि पर जब शताब्दी ध्वज लहराया, तो मानो एक युग ने अपने गौरवशाली अतीत को नमन करते हुए नवसंकल्प लिया। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में आयोजित गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी व अखण्ड दीपक के शताब्दी समारोह का शुभारंभ ध्वज वंदन के साथ श्रद्धामय वातावरण में हुआ। यह आयोजन 23 जनवरी तक चलेगा।

इस कार्यक्रम में विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, दायित्वधारी श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, जिला अध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

हजारों नौनिहालों की जीवन सुरक्षा सर्वाेपरि, लंबे समय से जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों पर डीएम सख्त

जनपद में वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े विद्यालय भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने पहली बार ठोस एवं निर्णायक कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सविन बसंल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश है कि नौनिहालों के जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में जर्जर एवं निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों की पहचान, आकलन और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।
जिलाधिकारी की सख्ती के बाद महज 10 दिनों के भीतर 100 विद्यालयों के जर्जर भवनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट में देरी को लेकर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूलों की सूची पूर्ण रिपोर्ट के साथ जिला प्रशासन को सौंप दी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को निष्प्रोज्य एवं आंशिक निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों के आंगणन (एस्टिमेट) तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि ध्वस्तीकरण एवं आवश्यक सुरक्षा उपायों में कोई विलंब न हो। जनपद में कुल 79 विद्यालयों के सम्पूर्ण भवन निष्प्रोज्य पाए गए हैं, इनमें 13 माध्यमिक एवं 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। 63 विद्यालयों में शिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर दी गई है। 16 विद्यालय ऐसे हैं, जहाँ अभी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है। इनके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। 17 विद्यालय आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं। 8 विद्यालय ऐसे हैं, जहाँ ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं पाई गई है। जिलाधिकारी ने पूर्णतः निष्प्रोज्य विद्यालयों में तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी। जिन विद्यालयों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था नहीं है, वहाँ पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर उसके बाद ध्वस्तीकरण किया जाएगा। आंशिक निष्प्रोज्य भवनों में सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक मरम्मत/प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसी भी विद्यालय में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण संचालित नहीं होगा। प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी States’ Startup Ecosystem Ranking (5वां संस्करण) में उत्तराखण्ड को मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने में ‘लीडर’ के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार के उद्योग विभाग को Certificate of Appreciation प्रदान किया गया।
इस सम्मान से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड में स्टार्टअप नीति के जरिए नवाचार, उद्यमिता, निवेश प्रोत्साहन और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में कामयाब रहा है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। उत्तराखंड की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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*यह सम्मान उत्तराखण्ड के लिए गर्व का विषय है। हमारी सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतियां, सरल प्रक्रियाएं और मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया है। राज्य के युवाओं में नवाचार की अद्भुत क्षमता है और सरकार हर स्तर पर उन्हें सहयोग प्रदान कर रही है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी उद्यमियों, स्टार्टअप्स और अधिकारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

मुख्यमंत्री धामी से मुख्यमंत्री आवास में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने की शिष्टाचार भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री (जल शक्ति मंत्रालय) डॉ. राज भूषण चौधरी ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर राज्य एवं केंद्र के बीच जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल योजनाओं, सिंचाई, स्वच्छ जल उपलब्धता और उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक एवं सार्थक चर्चा हुई।

भेंट के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की पर्वतीय भौगोलिक संरचना, जल स्रोतों की संवेदनशीलता और राज्य में सतत जल प्रबंधन की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड न केवल देश की प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल है, बल्कि “जल जीवन मिशन” और अन्य केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से राज्य सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय राज्य मंत्री को अवगत कराया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से पेयजल आपूर्ति, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और परंपरागत जल संरचनाओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने उत्तराखंड में जल शक्ति मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं में राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की।

इस दौरान मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री के बीच राज्य में भविष्य की जल परियोजनाओं, केंद्र–राज्य समन्वय को और सुदृढ़ करने तथा जल संसाधनों के सतत उपयोग को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभरकर सामने आएगा।

मुख्यमंत्री धामी का शेफ समुदाय से आवाहन, उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम्रपाली विश्वविद्यालय परिसर से आयोजित श्रीअन्न आधारित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े युवा शेफ, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों, श्रीअन्न आधारित खानपान और इससे जुड़े रोजगार व पर्यटन अवसरों पर सार्थक संवाद स्थापित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से युवा शेफों ने उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन के प्रचार–प्रसार, गुणवत्ता मानकों, सरकारी प्रयासों और इस क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को लेकर अनेक प्रश्न किए। शेफ शक्ति प्रसाद के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सभी होटलों के मेन्यू में उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री आवास तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में मेहमानों को उत्तराखंड का पारंपरिक भोजन प्राथमिकता से परोसा जाता है, जिससे स्थानीय व्यंजनों को सम्मान और पहचान मिल सके।

शेफ संजीव जुयाल द्वारा उत्तराखंड के सभी शेफों को एक साझा मंच पर लाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिशा में पर्यटन विभाग को एक समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि राज्य के शेफ समुदाय को एक अंब्रेला प्लेटफॉर्म के तहत जोड़ा जा सके और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकें।

वहीं, शेफ सुनील उपाध्याय द्वारा पारंपरिक उत्तराखंडी भोजन की शुद्धता, प्रमाणिकता और मानक तय करने को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से कार्य कर रही है। पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता बनाए रखने, उनकी पहचान संरक्षित करने और मानकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि उत्तराखंड के स्वाद की मौलिकता बनी रहे।

उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विभाग और कौशल विकास विभाग मिलकर इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वरोजगार एवं उद्यमिता की ओर अग्रसर हों।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह संवाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी शेफ साथियों, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए आम्रपाली विश्वविद्यालय और उसकी पूरी टीम को इस विचारशील और सार्थक “शेफ संवाद” कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड संस्कारों, संस्कृति और विविध व्यंजनों की भूमि है। यहां के व्यंजन पहाड़ों की जीवनशैली, परंपराओं और आत्मा की कहानी कहते हैं। आज का पर्यटक केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और खानपान का अनुभव भी करना चाहता है। ऐसे में शेफों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे स्थानीय स्वाद के माध्यम से राज्य की पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाते हैं।

मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी कहा कि आज का शेफ केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संस्कृति का संवाहक, पर्यटन का ब्रांड एम्बेसडर और रोजगार सृजन का माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में स्थानीय व्यंजनों, आतिथ्य परंपरा और शेफ समुदाय का योगदान अतुलनीय है।

श्रीअन्न पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल भोजन या फसल नहीं, बल्कि उत्तराखंड के समग्र विकास का सशक्त माध्यम बन रहा है। श्रीअन्न के माध्यम से गांव, किसान और समाज का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। मंडुवा, झंगोरा, कोदा और रामदाना जैसी फसलें कम पानी में उगने वाली, पोषक तत्वों से भरपूर और किसानों की आय बढ़ाने वाली हैं, जो उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज श्रीअन्न के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है। भारत वैश्विक स्तर पर मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक है और कुल वैश्विक उत्पादन में लगभग 38.4 प्रतिशत योगदान देता है। बदलती वैश्विक खाद्य प्राथमिकताओं के बीच फूड प्रोसेसिंग, हेल्थ फूड, होटल, कैफे, होम-स्टे और फूड स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।

राज्य सरकार की सोच को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में लगभग 44 प्रतिशत युवा देश के विभिन्न हिस्सों से उत्तराखंड वापस लौटे हैं, जो राज्य में बढ़ते अवसरों का प्रमाण है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने शेफ समुदाय से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि सभी मिलकर उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को “लोकल से ग्लोबल” बनाने की दिशा में कार्य करें। उनकी रचनात्मकता और प्रस्तुति उत्तराखंड के स्वाद को दुनिया की थाली तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “शेफ संवाद” से निकले विचार उत्तराखंड को पर्यटन, रोजगार और संस्कृति के क्षेत्र में एक नए विजन के साथ आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे और उत्तराखंड को सशक्त, आत्मनिर्भर व गौरवशाली राज्य बनाने का संकल्प अवश्य पूरा होगा।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, आम्रपाली विश्वविद्यालय से संजय मिश्रा सहित देश भर से आए अनेक प्रतिष्ठित शेफ उपस्थित रहे।

सेब की अति सघन बागवानी योजना का उद्देश्य सेब उत्पादन को बढ़ावा और किसानों की आय में वृद्धि करना: धामी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सेब की अति सघन बागवानी योजना सम्बन्ध में शासन में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट का उत्पादन बढ़ाए जाने के सम्बन्ध में अधिकारियों से चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता एवं अन्य राज्यों की उत्पादन क्षमता के सापेक्ष उत्तराखण्ड की उत्पादन क्षमता पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि “सेब की अति सघन बागवानी योजना” के अंतर्गत सेब की नवीनतम प्रजातियों के बागान स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए मुख्य सचिव ने जनपदों में किसानों को क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनाए जाने हेतु प्रेरित किया जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में सेब उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। प्रदेश में अभी सेब उत्पादन क्षेत्र बढ़ाए जाने की अत्यधिक सम्भावना है, जो प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट उत्पादन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा।

मुख्य सचिव ने सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश की उत्पादन क्षमता विशेषकर सेब की उत्पादन क्षमता का आंकलन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपदों को सेब उत्पादन में क्षमता के अनुरूप 2030, 2040 एवं 2050 में कितना उत्पादन होगा, इसके लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजना को धरातल पर उतारा जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि झाला (हर्षिल, उत्तरकाशी) स्थिति कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कोल्ड स्टोरेज तैयार किए जाएं। इससे किसान अपना सेब और अन्य उत्पाद ऑफ सीजन में मार्केट में उतार कर अधिक लाभ ले सकेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के अधिकतम क्षेत्रों में अभी भी पुरानी कम उत्पादन क्षमता वाली किस्म की फसलों का उत्पादन हो रहा है। उन्हें हाई डेंसिटी ऐपल प्लांट्स से रिप्लेस करने की आवश्यकता है। इसके लिए बड़े स्तर पर किसानों से संवाद करते हुए इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने इसकी भावी मांग के अनुरूप नर्सरियों को अपग्रेड किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि बड़े पैमाने पर हाई डेंसिटी प्लांट्स तैयार किए जाने के लिए नर्सरियां विकसित की जाएं। फुल टाईम टैक्निकल सपोर्ट के लिए पीएमयू गठित किया जाना चाहिए, ताकि वृहद स्तर पर इस योजना को संचालित किया जा सके। इससे धरातल पर योजनाओं को सफल बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम एवं डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हम शिक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए भी कई स्तरों पर कार्य कर रहे: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कन्हैया लाल डीएवी महाविद्यालय, रुड़की में आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक, समाज की चेतना को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। जिस समाज में शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और संतुष्ट होता है, वही समाज प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हुए उन्नति के शिखर को छूता है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को प्रमुखता देते हुए राज्य में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हम शिक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए भी कई स्तरों पर कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार, शिक्षा व्यवस्था को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे स्किल डेवलपमेंट से जोड़कर राज्य में रोजगार के साथ स्वरोजगार के क्षेत्र में भी युवाओं को आगे बढ़ाना चाहती है। सरकार ने देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति को लागू कर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्ट कर दिया है। नई शिक्षा नीति के तहत अब हमारे विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे कई नए कोर्स शुरू हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार द्वारा राज्य में 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए महिला छात्रावास, आधुनिक आई.टी. लैब और नए परीक्षा भवनों का निर्माण किया जा रहा है। हमने ब्रिटेन के साथ शेवनिंग उत्तराखण्ड छात्रवृत्ति के लिए समझौता किया है। इसके तहत हमारे 5 सबसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मास्टर्स के लिए ब्रिटेन भेजा जाएगा। युवा देश के 100 श्रेष्ठ रैंकिंग वाले संस्थाओं में प्रवेश लेंगे, हमारी सरकार उन्हें 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि भी देने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड का युवा केवल नौकरी मांगने वाला न बने, बल्कि स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी देने वाला भी बने, इसके लिए भी राज्य सरकार काम कर रही है। उत्तराखंड के महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ही 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उत्कृष्ट शोध पत्रों के प्रकाशन पर राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा युवाओं के भविष्य से खेलने वाले नकल माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। 100 से अधिक नकल माफिया सलाखों के पीछे हैं। साढ़े चार वर्षों में हमारे 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियाँ प्राप्त हुई हैं। ये संख्या राज्य गठन के बाद किसी भी सरकार द्वारा दी गई कुल नियुक्तियों से दो-तिहाई से भी अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब 1 जुलाई 2026 के बाद देवभूमि में केवल वही मदरसा संचालित होंगे, जो सरकार द्वारा निर्धारित आधुनिक सिलेबस पढ़ाएंगे, वरना उन्हें बंद किया जाएगा। उन धार्मिक गुरुओं पर भी नियंत्रण लगाया जाएगा, जो बिना किसी शैक्षिक योग्यता के केवल धार्मिक आधार पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। हमारा प्रयास है कि राज्य के शिक्षा मंदिरों में तय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को उनके समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करना होना चाहिए, ना कि उन्हें 500 साल पुरानी कबीलाई मानसिकता की ओर धकेलना।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, विधायक प्रदीप बत्रा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्रपाल सिंह एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने पैरा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश

आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देश की प्रतिष्ठित पैरा एथलीट एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. दीपा मलिक ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने डॉ. दीपा मलिक को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की और पैरा स्पोर्ट्स के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों को देश और समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

भेंट के दौरान डॉ. दीपा मलिक ने उत्तराखंड में पैरा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और समर्पित मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक पैरा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का अनुरोध मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में प्रतिभाशाली पैरा खिलाड़ियों की अपार संभावनाएं हैं और यदि उन्हें संरचित प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. दीपा मलिक के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए इसे महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों और पैरा खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश अपर सचिव श्री आशीष चौहान को दिए, ताकि प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर आगे की ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर पैरालम्पिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावर लिफ्टिंग के चैयरपर्सन जेपी सिंह, पैरा राव लिफ्टिंग के उपाध्यक्ष शुभम चौधरी, कोर यूनिवर्सिटी के चैयरमैन जेसी जैन, पैरालंपिक पावर लिफ्टर परमजीत कुमार, अशोक, कस्तूरी उपस्थित रहे।

जिला पूर्ति अधिकारी हरिद्वार अपने सहायक के साथ 50 हजार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों एवं जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की नीति के तहत प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विजिलेंस विभाग की टीम ने हरिद्वार जनपद में बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य एवं उनके सहायक को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार देहरादून से आई विजिलेंस टीम को काफी समय से जिला पूर्ति कार्यालय हरिद्वार से जुड़े इन अधिकारियों की रिश्वतखोरी की लगातार सूचनाएं प्राप्त हो रही थीं। सूचनाओं के सत्यापन एवं सटीक योजना के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर यह कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम द्वारा दोनों आरोपियों से जिला पूर्ति कार्यालय हरिद्वार में ही गहन पूछताछ की जा रही है, साथ ही संबंधित कार्यालय के अभिलेखों एवं अन्य दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा किया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने दोहराया कि सरकारी सेवा को जनता की सेवा मानते हुए यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करता है, तो उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विजिलेंस, एसटीएफ एवं अन्य जांच एजेंसियों को पूर्ण स्वतंत्रता के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में बीते वर्षों में प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार आक्रामक अभियान चलाया गया है। चाहे वह रिश्वत लेते अधिकारियों की गिरफ्तारी हो, अवैध संपत्ति पर कार्रवाई हो या भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय दंड, राज्य सरकार ने हर स्तर पर कड़ा संदेश दिया है कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है। इन निरंतर कार्रवाइयों से आमजन में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी प्रशासन उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी भ्रष्टाचार की शिकायत हो, तो निःसंकोच संबंधित माध्यमों से सूचना दें, सरकार उनकी पहचान गोपनीय रखते हुए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

हरिद्वार में हुई यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है, जिसके तहत उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त, सुशासन युक्त और विश्वास आधारित शासन प्रणाली की दिशा में निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।